नई दिल्ली, एजेंसियां। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले आयोजित विरोध प्रदर्शन ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र, युवा पेशेवर और अभिभावक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई। संजय राउत ने किया समर्थन शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि जिन युवाओं को देश का भविष्य और भाग्य-विधाता कहा जाता है, वे आज अपने भविष्य को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। उन्होंने लिखा कि आंदोलनकारियों को "कॉकरोच" कहकर कमतर आंकना उचित नहीं है और सरकार को उनकी बात गंभीरता से सुननी चाहिए। NEET विवाद बना आंदोलन की पृष्ठभूमि राउत ने अपने पोस्ट में NEET परीक्षा पेपर लीक मामले का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि इस विवाद ने लाखों छात्रों के सपनों और भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि परेशान और निराश युवा अब “कॉकरोच” की पहचान के साथ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। जंतर-मंतर पर जुटी बड़ी भीड़ प्रदर्शन में शामिल कई लोग तिलचट्टे (कॉकरोच) के मुखौटे पहनकर पहुंचे। उनके हाथों में फूल और विरोध संबंधी पोस्टर दिखाई दिए। बड़ी संख्या में स्कूली छात्र अपने अभिभावकों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुए। आंदोलन के संस्थापक अभिजीत दीपके भी कार्यक्रम में मौजूद रहे और उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तथा अनुशासित तरीके से विरोध दर्ज कराने की अपील की। सरकार से कार्रवाई की मांग प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। छात्रों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत पर जोर दिया। फिलहाल इस आंदोलन ने युवाओं के मुद्दों और शिक्षा संबंधी चिंताओं को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।
नई दिल्ली: डिजिटल संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) हवाई अड्डे, दिल्ली की सीमाओं तथा अन्य संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस महीने की शुरुआत में समर्थकों और छात्रों से दिल्ली में आयोजित होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने अपने समर्थकों से 6 जून को दिल्ली एयरपोर्ट पर उनसे मिलने का भी आह्वान किया था। सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस को कोई औपचारिक अनुमति आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य खुफिया सूचनाओं के आधार पर एहतियातन सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। राजधानी में बढ़ाई गई सुरक्षा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, नई दिल्ली जिले समेत कई रणनीतिक स्थानों पर 1,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। आईजीआई एयरपोर्ट, प्रमुख रेलवे स्टेशन, अंतरराज्यीय बस टर्मिनल और दिल्ली की सीमाओं पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा प्रमुख बाजारों, चौराहों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। एयरपोर्ट परिसर के बाहर बहुस्तरीय बैरिकेडिंग की गई है, जबकि दिल्ली की सीमाओं और मध्य दिल्ली की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर वाहनों की जांच भी तेज कर दी गई है। अभिजीत दीपके के दिल्ली पहुंचने का दावा सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दावा किया है कि अभिजीत दीपके दिल्ली पहुंच चुके हैं और इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया पर भी साझा की है। रांका के अनुसार, दीपके दिल्ली पुलिस से प्रदर्शन की अनुमति लेने के लिए संबंधित थाने जाएंगे, जिसके बाद जंतर-मंतर पर धरना आयोजित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि यह दिन भारतीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है और संगठन अपने मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाना चाहता है। वरिष्ठ अधिकारियों ने की समीक्षा शुक्रवार को पुलिस उपायुक्त (आईजीआई) विचित्र वीर समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने एयरपोर्ट और आसपास के इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। पुलिस सूत्रों के अनुसार, एक उच्चस्तरीय बैठक में सुरक्षा हालात का आकलन किया गया और सभी फील्ड इकाइयों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए। जिला पुलिस इकाइयों को पर्याप्त संख्या में बल तैयार रखने और पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर बनाए रखने के लिए कहा गया है। खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस खुफिया एजेंसियों और अन्य सुरक्षा संस्थानों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है। पुलिस का कहना है कि आम नागरिकों की सुरक्षा और यात्रियों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। साथ ही राजधानी में कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अभिजीत दीपके ने घोषणा की है कि वह अमेरिका से भारत के लिए रवाना हो चुके हैं और शनिवार सुबह दिल्ली पहुंचेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “भारत के लिए निकल गया हूं। मैं अपना भविष्य संविधान के हाथों में छोड़ता हूं। जय भीम।” उनके इस संदेश के बाद राजनीतिक और सोशल मीडिया हलकों में चर्चा तेज हो गई है। दिल्ली में प्रस्तावित है बड़ा विरोध प्रदर्शन अभिजीत दीपके ने बताया कि दिल्ली पहुंचने के बाद वह सबसे पहले संसद मार्ग थाने जाएंगे और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगेंगे। उन्होंने अपने समर्थकों और पार्टी के पंजीकृत सदस्यों से भी प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। हालांकि अभी तक दिल्ली पुलिस से प्रदर्शन की औपचारिक अनुमति नहीं मिली है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan का इस्तीफा बताया जा रहा है। पार्टी का आरोप है कि नीट पेपर लीक और सीबीएसई परीक्षा परिणामों में कथित गड़बड़ियों के मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। लाखों समर्थकों का दावा एक साक्षात्कार में अभिजीत दीपके ने दावा किया कि उनकी पार्टी के 11 लाख से अधिक पंजीकृत सदस्य हैं और हजारों लोग दिल्ली में प्रदर्शन में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में समर्थकों ने कार्यक्रम में भाग लेने की सहमति दी है। कैसे शुरू हुई कॉकरोच जनता पार्टी? कॉकरोच जनता पार्टी का नाम सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक अभियान के रूप में चर्चा में आया था। बाद में यह एक संगठित ऑनलाइन आंदोलन के रूप में सामने आया। पार्टी और उसके समर्थक बेरोजगारी, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं। प्रशासन की नजर प्रदर्शन पर दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर प्रशासन भी सतर्क है। प्रदर्शन को अनुमति मिलेगी या नहीं, और इसमें कितने लोग शामिल होंगे, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल सभी की नजर अभिजीत दीपके के दिल्ली पहुंचने और उनके अगले कदम पर टिकी हुई है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने घोषणा की है कि वह 6 जून को भारत लौटेंगे और विभिन्न परीक्षा विवादों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करेंगे। वर्तमान में अमेरिका में मौजूद दीपके ने सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों और छात्रों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है। एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि छात्र और नागरिक संविधान के दायरे में रहकर अपनी आवाज बुलंद करें। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों के एकजुट होने पर सरकार को उनकी मांगों पर ध्यान देना पड़ेगा। दिल्ली एयरपोर्ट से जंतर-मंतर तक मार्च की तैयारी अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों से 6 जून की सुबह दिल्ली हवाई अड्डे पर उनका स्वागत करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वहां से सभी लोग संसद मार्ग थाने पहुंचेंगे और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगेंगे। दीपके के अनुसार, उनका प्रस्तावित आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित किया जाएगा। परीक्षा विवादों को लेकर सरकार पर सवाल दीपके ने दावा किया कि हाल के वर्षों में कई प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि नीट, सीबीएसई, सीयूईटी और एसएससी-जीडी जैसी परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने छात्रों के बीच असुरक्षा और चिंता का माहौल पैदा किया है। उनका आरोप है कि इन घटनाओं का असर एक करोड़ से अधिक छात्रों पर पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद जवाबदेही तय नहीं की गई। ऑनलाइन याचिका को मिले लाखों समर्थन अभिजीत दीपके ने बताया कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू की गई ऑनलाइन याचिका पर अब तक करीब आठ लाख लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में भी शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। दीपके ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के प्रभावित होने के बावजूद यदि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती है, तो यह जवाबदेही की कमी को दर्शाता है। गिरफ्तारी की आशंका पर भी दी प्रतिक्रिया अपने वीडियो संदेश में दीपके ने कहा कि उनके परिवार और मित्रों को आशंका है कि भारत लौटने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन उन्हें शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से विरोध दर्ज कराने की अनुमति देगा। उन्होंने कहा कि वह लोकतंत्र और संविधान में विश्वास रखते हैं तथा कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखना चाहते हैं। गांधी, आंबेडकर और भगत सिंह से प्रेरित होने का दावा दीपके ने कहा कि वह महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर, भगत सिंह और जवाहरलाल नेहरू के विचारों से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार देता है और उनका आंदोलन इसी संवैधानिक अधिकार के तहत होगा। उन्होंने समर्थकों से अपील करते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए सभी लोगों को लोकतांत्रिक तरीके से एकजुट होकर अपनी आवाज उठानी चाहिए।
IPL 2026 में धमाकेदार प्रदर्शन के बाद बढ़ी राष्ट्रीय टीम में चयन की उम्मीद भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे Vaibhav Sooryavanshi को लेकर टीम इंडिया में चयन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। आईपीएल 2026 में शानदार बल्लेबाजी करने वाले 15 वर्षीय युवा खिलाड़ी के लिए अब राष्ट्रीय टीम के दरवाजे खुलते नजर आ रहे हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सचिव Devajit Saikia ने संकेत दिया है कि वैभव जल्द ही भारतीय सीनियर टीम का हिस्सा बन सकते हैं। उनके बयान को युवा बल्लेबाज के लिए अब तक का सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है। IPL 2026 के सबसे बड़े सितारे बने वैभव Rajasthan Royals के लिए खेलते हुए वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में 16 मैचों में 776 से अधिक रन बनाए और ऑरेंज कैप अपने नाम की। पूरे सीजन में उन्होंने दुनिया के कई दिग्गज गेंदबाजों के खिलाफ निडर बल्लेबाजी की। उनकी तकनीक, आक्रामकता और दबाव में मैच संभालने की क्षमता ने क्रिकेट विशेषज्ञों और चयनकर्ताओं को प्रभावित किया। BCCI सचिव ने दिए बड़े संकेत देवजीत सैकिया ने कहा कि चयन समिति युवा बल्लेबाज के प्रदर्शन पर लगातार नजर बनाए हुए है और उनके भविष्य को लेकर उचित फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वैभव भारतीय क्रिकेट के नए "वंडरकिड" हैं और आने वाले दिनों में दुनिया भर में अपनी छाप छोड़ सकते हैं। सैकिया के अनुसार, चयन समिति के सभी सदस्य आईपीएल मैचों पर करीबी नजर रख रहे थे और वैभव का प्रदर्शन किसी से छिपा नहीं है। इंग्लैंड दौरे की टीम में मिल सकता है मौका रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय टीम के आगामी यूनाइटेड किंगडम दौरे के लिए होने वाली चयन बैठक में वैभव सूर्यवंशी का नाम चर्चा का विषय बन सकता है। हालांकि BCCI ने आधिकारिक तौर पर किसी चयन की पुष्टि नहीं की है, लेकिन बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों की टिप्पणियों ने अटकलों को और मजबूत कर दिया है। "असाधारण प्रतिभा" बताया देवजीत सैकिया ने कहा कि आईपीएल में कई खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया, लेकिन वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन "असाधारण" रहा। उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट को इस समय एक नया प्रतिभाशाली खिलाड़ी मिला है और वह जल्द ही नई ऊंचाइयों को छू सकता है। चयनकर्ताओं के सामने बड़ी चुनौती अब अंतिम फैसला मुख्य चयनकर्ता Ajit Agarkar और उनकी टीम को लेना है। चयनकर्ताओं को यह तय करना होगा कि इतनी कम उम्र में वैभव को सीधे सीनियर टीम में मौका दिया जाए या पहले उन्हें भारत ए और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुभव दिलाए जाएं। खिलाड़ियों की फिटनेस पर भी BCCI की नजर आईपीएल के बाद खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर भी BCCI सतर्क है। सैकिया ने बताया कि बोर्ड का तकनीकी और फिटनेस स्टाफ केंद्रीय अनुबंध वाले खिलाड़ियों की लगातार निगरानी करता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि आईपीएल के दौरान खिलाड़ी अपनी-अपनी फ्रेंचाइजी के नियंत्रण में होते हैं, इसलिए बोर्ड हर गतिविधि में सीधे हस्तक्षेप नहीं करता। भारतीय क्रिकेट का अगला सुपरस्टार? वैभव सूर्यवंशी की उम्र अभी सिर्फ 15 साल है, लेकिन उन्होंने जिस तरह बड़े मंच पर खुद को साबित किया है, उससे क्रिकेट जगत में उनकी तुलना भविष्य के बड़े सितारों से की जाने लगी है। अगर उन्हें जल्द ही टीम इंडिया में मौका मिलता है, तो वह भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे कम उम्र के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों में शामिल हो सकते हैं।
सोशल मीडिया पर चर्चा में रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ट्रेंड पर उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि मीडिया और समाज युवाओं तक सकारात्मक और प्रेरणादायक कार्यों की जानकारी नहीं पहुंचाएंगे, तो वे भ्रामक इंटरनेट ट्रेंड्स की ओर आकर्षित हो सकते हैं। मलयालम दैनिक ‘दीपिका’ की 140वीं वर्षगांठ समारोह में संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सकारात्मक कार्यों की प्रभावी रिपोर्टिंग जरूरी है। उन्होंने कहा, “अच्छे कामों की सही तरीके से रिपोर्टिंग होनी चाहिए। तभी युवाओं को सही दिशा मिलेगी, अन्यथा वे रुचि खोकर ऐसे ट्रेंड्स के पीछे चल पड़ेंगे, जिनका समाज पर कोई स्थायी प्रभाव नहीं होता।” विकसित भारत के लिए जिम्मेदार मीडिया जरूरी उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी और सकारात्मक सोच देश के विकास के लिए आवश्यक है। अल्पकालिक ट्रेंड्स पर भी उठाए सवाल राधाकृष्णन ने कहा कि किसी भी विषय का महत्व उसकी स्थिरता और प्रभाव से तय होता है। उन्होंने कहा कि जो बातें वास्तव में महत्वपूर्ण होती हैं, वे समय के साथ भी लोगों के बीच चर्चा में बनी रहती हैं, जबकि कई इंटरनेट ट्रेंड्स कुछ समय बाद स्वतः समाप्त हो जाते हैं। CJI की टिप्पणी के बाद चर्चा में आया था ट्रेंड ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नामक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया ट्रेंड उस समय चर्चा में आया था, जब एक न्यायिक टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हुई। बाद में इस टिप्पणी को लेकर स्पष्टीकरण भी दिया गया था।
सोशल मीडिया पर चर्चा में रही "कॉकरोच जनता पार्टी" को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख Sunil Ambekar ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र इतना मजबूत है कि वह सभी विचारों, भावनाओं और मतों को अपने भीतर समाहित कर सकता है। नागपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान आंबेकर ने कहा कि भारत में लोकतांत्रिक संस्थाएं मजबूत हैं और लोगों को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा रखना चाहिए। लोकतंत्र में हर विचार के लिए जगह: आंबेकर कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर पूछे गए सवाल पर आंबेकर ने कहा कि भारत में पारदर्शी चुनाव, स्वतंत्र मीडिया और खुली अभिव्यक्ति की व्यवस्था मौजूद है। ऐसे में अलग-अलग विचारों और चर्चाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विभिन्न मुद्दे उठना स्वाभाविक है और उन्हें सुलझाने के लिए संवैधानिक तथा लोकतांत्रिक तरीके मौजूद हैं। 'जेन-Z' को देश और संविधान पर भरोसा आंबेकर ने कहा कि भारत का 'जेन-Z' यानी 1997 से 2012 के बीच जन्मी युवा पीढ़ी बेहद आशावादी है। उनके अनुसार, देश के युवाओं का भारत और उसकी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गहरा विश्वास है। उन्होंने कहा कि युवा संवैधानिक ढांचे के भीतर रहकर अपनी बात रखते हैं और लोकतांत्रिक माध्यमों से बदलाव में विश्वास करते हैं। RSS ने लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जताया भरोसा RSS नेता ने कहा कि भारत की जनता, लोकतांत्रिक संस्थाएं और राजनीतिक व्यवस्था मजबूत हैं। उन्होंने कहा कि देश का लोकतंत्र हर नागरिक की आवाज और भावनाओं को समायोजित करने की क्षमता रखता है। आंबेकर के मुताबिक, मीडिया स्वतंत्र है, राजनीतिक दल सक्रिय हैं और किसी भी संस्था को कमजोर नहीं माना जा सकता। पाकिस्तान से संवाद पर भी रखी राय पाकिस्तान के साथ बातचीत को लेकर RSS सरकार्यवाह Dattatreya Hosabale के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए आंबेकर ने कहा कि संघ हमेशा लोगों के बीच संवाद का समर्थक रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारों के बीच औपचारिक वार्ता राजनीतिक और कूटनीतिक निर्णय का विषय है, लेकिन लोगों के बीच संपर्क और संवाद जारी रहना चाहिए। उनका मानना है कि व्यापार, सामाजिक संपर्क और संवाद से दोनों देशों के संबंधों में सुधार की संभावना बनी रहती है। विभाजन पर RSS का पुराना रुख दोहराया आंबेकर ने कहा कि RSS ऐतिहासिक रूप से भारत के विभाजन का विरोध करता रहा है। उन्होंने दावा किया कि यदि उस समय संगठन अधिक मजबूत स्थिति में होता तो देश का विभाजन टाला जा सकता था। उन्होंने कहा कि संघ आज भी राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता को अपनी प्राथमिकता मानता है।
Mamata Banerjee और Abhishek Banerjee ने सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे डिजिटल आंदोलन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) को समर्थन देकर सियासी हलचल बढ़ा दी है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में करारी हार के बाद All India Trinamool Congress अब युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की नई रणनीति पर काम करती दिख रही है। डेरेक ओब्रायन ने की पुष्टि टीएमसी के राज्यसभा सांसद Derek O'Brien ने सोमवार को कहा कि पार्टी नेतृत्व युवाओं के इस डिजिटल आंदोलन के साथ खड़ा है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, बंगाल चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी युवाओं और सोशल मीडिया की नई राजनीति को गंभीरता से लेने लगी हैं। क्या है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’? ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ कोई पारंपरिक राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि एक डिजिटल व्यंग्य आंदोलन है, जिसने सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रियता हासिल की है। इसकी शुरुआत बोस्टन यूनिवर्सिटी के छात्र Abhijeet Dipke ने की थी। यह आंदोलन कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की एक टिप्पणी के बाद चर्चा में आया, जिसमें ‘कॉकरोच’ शब्द को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। बाद में युवाओं ने इसे बेरोजगारी, परीक्षा घोटालों और सिस्टम के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध में बदल दिया। NEET पेपर लीक के बाद बढ़ी लोकप्रियता CJP ने हाल ही में NEET-UG 2026 पेपर लीक मुद्दे को जोर-शोर से उठाया, जिसके बाद यह मेडिकल छात्रों और युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स तेजी से बढ़े हैं। बताया जा रहा है कि टीएमसी इस डिजिटल पहुंच का फायदा उठाकर केंद्र सरकार को बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर घेरना चाहती है। सरकार पर अकाउंट ब्लॉक करने का आरोप CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दावा किया है कि उनके आंदोलन को दबाने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, संगठन के आधिकारिक एक्स और इंस्टाग्राम अकाउंट को हैक या ब्लॉक किया गया। वहीं केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju ने बिना नाम लिये इस तरह के आंदोलनों को “विदेशी एजेंडा” और “जॉर्ज सोरोस गैंग” से प्रेरित बताया। हालांकि CJP की ओर से दावा किया गया कि उनके 94 प्रतिशत फॉलोअर्स भारतीय हैं। डिजिटल राजनीति की ओर बढ़ रही TMC राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी अब पारंपरिक राजनीति के साथ-साथ मीम कल्चर, डिजिटल कैंपेन और सोशल मीडिया आधारित आंदोलनों को भी अपनी रणनीति का हिस्सा बना रही है। बीजेपी जहां इसे विपक्ष की नई साजिश बता रही है, वहीं युवाओं के बीच ममता बनर्जी का यह “प्रो-यूथ” रुख चर्चा का विषय बन गया है।
कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आई “Cockroach Janata Party (CJP)” को लेकर दिलचस्प प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक इंटरनेट ट्रेंड नहीं, बल्कि युवाओं की नाराजगी और राजनीतिक भावनाओं की अभिव्यक्ति है। थरूर ने इस उभरते घटनाक्रम को विपक्ष के लिए भी एक बड़ा संकेत बताया। “युवाओं की आवाज दबाना ठीक नहीं” शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि केवल पांच दिनों में इंस्टाग्राम पर 1.5 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स जुटाना यह दिखाता है कि देश के युवा अपनी बात नए तरीकों से रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में किसी अकाउंट को बंद करना सही कदम नहीं माना जा सकता। थरूर के मुताबिक, लोकतंत्र में असहमति, व्यंग्य, हास्य और गुस्से के लिए भी जगह होनी चाहिए। उन्होंने लिखा कि युवाओं की भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें समझने की जरूरत है। थरूर ने कहा कि सोशल मीडिया आज युवाओं के लिए अपनी राय व्यक्त करने का सबसे बड़ा मंच बन चुका है। “CJP अब सिर्फ इंटरनेट ट्रेंड नहीं” Cockroach Janata Party को लेकर दिए गए इंटरव्यू में थरूर ने कहा कि यह ट्रेंड अब सिर्फ ऑनलाइन मजाक या वायरल कंटेंट तक सीमित नहीं रह गया है। उनके अनुसार, यह मौजूदा राजनीति को लेकर युवाओं की निराशा और असंतोष को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि देश का युवा वर्ग पारंपरिक राजनीतिक ढांचे से अलग सोच रहा है और अपनी बात नए प्रतीकों और व्यंग्य के जरिए सामने ला रहा है। विपक्ष के लिए बताया बड़ा मौका थरूर ने कहा कि विपक्षी दलों को इस बदलते राजनीतिक मूड को गंभीरता से समझना चाहिए। उन्होंने माना कि युवाओं की इस ऊर्जा को मुख्यधारा की राजनीति और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ना जरूरी है। कांग्रेस सांसद के मुताबिक, अगर यह भावना सही दिशा में आगे बढ़ती है तो भविष्य में यह वोट और राजनीतिक भागीदारी के जरिए बदलाव की ताकत बन सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह आंदोलन आगे चलकर किस रूप में सामने आएगा, लेकिन यह स्पष्ट है कि युवाओं में राजनीतिक असंतोष बढ़ रहा है। सोशल मीडिया पर लगातार बढ़ रही चर्चा बीते कुछ दिनों में “Cockroach Janata Party” सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड कर रही है। खासतौर पर युवाओं के बीच यह नाम मीम्स, व्यंग्य और राजनीतिक चर्चाओं के जरिए लोकप्रिय हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के डिजिटल ट्रेंड अब केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे युवाओं की राजनीतिक सोच और सिस्टम के प्रति उनके नजरिए को भी दिखा रहे हैं।
बेंगलुरु, एजेंसियां। CJI सूर्यकांत के कॉकरोच वाले बयान के विरोध में बनी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के सोशल मीडिया पर 6 दिन में लाखों फॉलोअर हो गए हैं। गुरुवार दोपहर 12:30 बजे तक यह आंकड़ा इंस्टाग्राम पर 1.23 करोड़ तक पहुंच गया। इंस्टाग्राम पर भाजपा के 87 लाख और कांग्रेस के 1.33 करोड़ फॉलोअर्स हैं। एक्स ने बैन किया एकाउंट वहीं, X पर 12 बजे तक पार्टी के करीब 1 लाख 93 हजार फॉलोअर्स थे। लेकिन अब एक्स ने पार्टी के अकाउंट को भारत में बैन कर दिया है। इन्होंने बनाई पार्टी कॉकरोच जनता पार्टी महाराष्ट्र के अभिजीत दीपके ने बनाई है। इसका नारा है- ‘सेक्युलर, सोशलिस्ट, डेमोक्रेटिक, लेजी।’ पार्टी के महज एक दिन में ही 40 लाख से ज्यादा फॉलोअर बढ़ चुके हैं। CJI ने बयान से किया इनकार दरअसल, 15 मई को कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि CJI सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी। CJI ने एक दिन बाद ही कहा कि उन्होंने ऐसा नहीं कहा। पार्टी की सदस्यता के लिए 4 योग्यताए पहली- बेरोजगारी। दूसरी- आलसी होना यानी डले रहो, पड़े रहो। तीसरी- ऑनलाइन रहने की लत। चौथी- प्रोफेशनली भड़ास निकालने की क्षमता। मैनिफेस्टो जारी, 5 वादे अगर CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी सरकार में आती है, तो रिटायरमेंट के बाद किसी भी CJI को राज्यसभा जाने का रिवॉर्ड नहीं मिलेगा। अगर कोई वैध वोट डिलीट किया जाएगा, तो मुख्य चुनाव आयुक्त को UAPA में गिरफ्तार किया जाएगा, क्योंकि किसी के वोटिंग का अधिकार छीनना आतंकवाद से कम नहीं। महिलाओं के लिए 50% का आरक्षण होगा, न कि 33%. इसके लिए सांसदों की संख्या भी नहीं बढ़ाई जाएगी। कैबिनेट में भी महिलाओं के लिए 50% आरक्षण होगा। अंबानी और अडाणी के सभी मीडिया संस्थानों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे, ताकि वास्तव में स्वतंत्र मीडिया को जगह मिल सके। गोदी मीडिया एंकरों के बैंक अकाउंट्स की जांच कराई जाएगी। अगर कोई विधायक या सांसद दलबदल कर दूसरी पार्टी में जाता है, तो उसके चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाई जाएगी। उसे अगले 20 साल तक किसी भी पब्लिक ऑफिस में पद नहीं दिया जाएगा। अभिजीत AAP में काम कर चुके, बताया कैसे आया आइडिया अभिजीत अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन की मास्टर डिग्री कर रहे हैं। वो 2020 से 2023 तक आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया टीम में वॉलंटियर भी रह चुके हैं। उन्होंने BBC को बताया, 'मैं X पर CJI का बयान देख रहा था, जहां पर वो सिस्टम की आलोचना करने और राय देने के लिए देश के युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवियों से कर रहे थे। सोशल मीडिया पर मैंने इस पर अपनी राय दी। मैंने पूछा कि सब कॉकरोच एक साथ आ जाएं तो क्या होगा। मुझे Gen Z और 25 साल तक के युवाओं के कमाल के जवाब मिले। उन्होंने कहा कि हमें साथ आना चाहिए और एक प्लेटफॉर्म बनाना चाहिए। फिर क्या था मैंने CJP बना ली। 16 मई को CJI ने कॉकरोच वाले बयान पर सफाई दी चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को अपनी पैरासाइट और कॉकरोच वाली टिप्पणी पर सफाई दी। उन्होनें कहा, 'मेरी टिप्पणी खास तौर पर उन लोगों के लिए थी, जो फर्जी और नकली डिग्रियों के सहारे वकालत जैसे पेशों में आ गए हैं। मीडिया, सोशल मीडिया और दूसरे सम्मानित पेशों में भी ऐसे लोग घुस आए हैं। वे परजीवियों जैसे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।