CJP

Assam government announces withdrawal of cases against student protesters and plans to release detained students
बिहार के बाद असम सरकार का बड़ा फैसला, छात्र प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस होंगे वापस; रिहाई की भी तैयारी

बिहार के बाद अब असम सरकार ने भी छात्र आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों को राहत देने का फैसला लिया है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि आंदोलन के दौरान गिरफ्तार छात्रों को रिहा किया जाएगा और उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब CJP (Cockroach Janta Party) ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो देशव्यापी आंदोलन फिर शुरू किया जाएगा। सरकार ने शुरू की कानूनी प्रक्रिया सूत्रों के मुताबिक, असम सरकार ने आंदोलन से जुड़े मामलों की समीक्षा शुरू कर दी है। जिन छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर केवल विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप हैं, उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। साथ ही हिरासत में लिए गए छात्रों की रिहाई भी सुनिश्चित की जाएगी। CJP ने दी थी आंदोलन की चेतावनी CJP ने हाल ही में केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएं और गिरफ्तार छात्रों को बिना शर्त रिहा किया जाए। संगठन ने चेतावनी दी थी कि मांगें नहीं मानी गईं तो जंतर-मंतर से फिर राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। बिहार के बाद असम ने उठाया कदम इससे पहले बिहार सरकार ने भी छात्र प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और गिरफ्तार छात्रों को रिहा करने का फैसला लिया था। अब असम सरकार के इसी तरह के फैसले को छात्र आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम का अहम कदम माना जा रहा है। छात्र संगठनों ने फैसले का किया स्वागत सरकार के इस फैसले के बाद छात्र संगठनों और आंदोलन से जुड़े कई समूहों ने इसे सकारात्मक पहल बताया है। हालांकि उनका कहना है कि सभी मामलों की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए और किसी भी निर्दोष छात्र पर भविष्य में कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। सरकार की ओर से मामले वापस लेने और रिहाई की प्रक्रिया को लेकर विस्तृत आदेश जल्द जारी किए जाने की संभावना है।  

kalpana जुलाई 28, 2026 0
CJP spokesperson addressing media over the viral celebration video after the NEET-UG protest
जश्न के वीडियो पर CJP की सफाई, बोली- 5 स्टार पार्टी नहीं, 37 दिन आंदोलन करने वाले वॉलंटियर्स का सम्मान था

CJP Celebration Video: NEET-UG पेपर लीक आंदोलन के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए जश्न के वीडियो को लेकर उठे विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपनी सफाई दी है। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि वायरल वीडियो को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उनके मुताबिक, यह कोई 5 स्टार होटल में आयोजित पार्टी नहीं, बल्कि 37 दिनों तक आंदोलन में जुटे वॉलंटियर्स के सम्मान और उनके अनुभव जानने के लिए आयोजित कार्यक्रम था। '5 स्टार होटल नहीं, बेसमेंट हॉल में हुआ कार्यक्रम' सौरव दास ने कहा कि जिस स्थान को सोशल मीडिया पर 5 स्टार होटल बताया जा रहा है, वह अधिकतम 2 या 3 स्टार श्रेणी का स्थल था। उन्होंने बताया कि पूरा कार्यक्रम एक बेसमेंट हॉल में आयोजित किया गया था, जहां आंदोलन से जुड़े स्वयंसेवक एकत्र हुए थे। 150 से 200 वॉलंटियर्स हुए शामिल CJP के अनुसार, कार्यक्रम में करीब 150 से 200 वॉलंटियर्स शामिल हुए थे, जिनमें से आधे से अधिक दूसरे राज्यों से आए थे और लगातार 37 दिनों तक आंदोलन का हिस्सा रहे। सौरव दास ने कहा कि कई स्वयंसेवक अपने-अपने घर लौटने वाले थे, इसलिए संगठन ने उनके सम्मान और अनुभव साझा करने के लिए यह आयोजन किया। उन्होंने दावा किया कि कार्यक्रम में पहले लंबा फीडबैक सेशन और चर्चा हुई, जिसमें आंदोलन की समीक्षा की गई। हालांकि सोशल मीडिया पर केवल डांस और जश्न वाले वीडियो वायरल हुए, जिससे पूरे कार्यक्रम की गलत तस्वीर पेश की गई। सरकार को दिया गया 24 घंटे का अल्टीमेटम बरकरार CJP ने साफ किया कि सरकार को दिया गया 24 घंटे का अल्टीमेटम अब भी लागू है। सौरव दास के मुताबिक, सरकार ने तीसरे दौर की बातचीत में प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी FIR वापस लेने और भविष्य में कोई कार्रवाई नहीं करने का लिखित आश्वासन देने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि यदि तय समय के भीतर लिखित आश्वासन नहीं मिला, तो CJP दिल्ली में एक और राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने का ऐलान करेगी। बिहार फायरिंग और शिक्षा सुधार विधेयक पर भी उठाए सवाल सौरव दास ने बिहार के सीवान में प्रदर्शन के दौरान कथित AK-47 फायरिंग के मामले में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) से सार्वजनिक माफी की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे मामले में जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने संसद में पेश शिक्षा सुधार विधेयक पर व्यापक चर्चा की मांग की। उनका कहना है कि पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर संसद में गंभीर बहस होनी चाहिए, ताकि युवाओं का शिक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा मजबूत हो सके।  

kalpana जुलाई 28, 2026 0
Candle March
सीजेपी के आह्वान पर आज देशभर में कैंडल मार्च, छात्र आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में होगा शांतिपूर्ण प्रदर्शन

नई दिल्ली, एजेंसियां। छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आज (26 जुलाई) शाम देशभर में साइलेंट कैंडल मार्च आयोजित करने का आह्वान किया है। संगठन ने अपने समर्थकों और छात्रों से शाम 6 बजे अपने-अपने जिला कलेक्टर कार्यालयों के बाहर एकत्र होकर शांतिपूर्ण तरीके से मोमबत्तियां जलाने की अपील की है। CJP का कहना है कि यह मार्च छात्र आंदोलन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई और घायल छात्रों के समर्थन में आयोजित किया जा रहा है।   शांतिपूर्ण विरोध के जरिए सरकार तक पहुंचेगा संदेश   CJP नेताओं के अनुसार, कैंडल मार्च का उद्देश्य किसी तरह का टकराव नहीं बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना है। संगठन ने सभी प्रतिभागियों से कानून-व्यवस्था का पालन करने और शांतिपूर्ण ढंग से मार्च निकालने की अपील की है। प्रदर्शन के दौरान छात्र पुलिस कार्रवाई में घायल हुए लोगों के प्रति एकजुटता भी जताएंगे।   सरकार से लिखित आश्वासन की मांग बरकरार   शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने आंदोलन वापस लेने की घोषणा की है, लेकिन संगठन का कहना है कि उसकी दो प्रमुख मांगों पर अभी भी सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलना बाकी है। CJP नेताओं का कहना है कि जब तक इन मांगों पर औपचारिक निर्णय नहीं होता, तब तक प्रतीकात्मक कार्यक्रमों के जरिए दबाव बनाए रखा जाएगा।   देशभर के जिलों में होगा आयोजन   CJP ने अपने सभी राज्य और जिला इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे स्थानीय प्रशासन की अनुमति और नियमों का पालन करते हुए कैंडल मार्च आयोजित करें। संगठन का दावा है कि यह कार्यक्रम देश के अनेक जिलों में एक साथ होगा और छात्र समुदाय अपनी एकजुटता का संदेश देगा।

abhishek singh जुलाई 26, 2026 0
CJP Protest
सीजेपी ने 36 दिन का छात्र आंदोलन किया समाप्त, सरकार के प्रमुख फैसलों के बाद प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान

नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय स्तर पर पिछले 36 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आंदोलन समाप्त करने का ऐलान कर दिया है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा उनकी प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन को वापस लिया जा रहा है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक अपने घर लौटने की अपील की।   सरकार के फैसले के बाद खत्म हुआ आंदोलन   सीजेपी ने कहा कि सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और आंदोलन से जुड़ी अन्य प्रमुख मांगों पर सहमति जताई है। इन फैसलों के बाद संगठन ने आंदोलन को अपनी बड़ी जीत बताते हुए औपचारिक रूप से समाप्त करने की घोषणा की। आंदोलन के समापन के साथ ही दिल्ली के जंतर-मंतर समेत विभिन्न शहरों में चल रहे धरने और प्रदर्शन भी खत्म होने लगे।   36 दिन के आंदोलन का हुआ समापन   पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन देश के कई राज्यों तक फैल गया था। इस दौरान हजारों छात्रों ने प्रदर्शन में भाग लिया और कई दौर की बातचीत के बाद केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण फैसले लिए। आंदोलन समाप्त होने के बाद सीजेपी नेताओं ने इसे युवाओं की लोकतांत्रिक जीत बताया और कहा कि भविष्य में भी शिक्षा सुधार से जुड़े मुद्दों पर उनकी आवाज जारी रहेगी।

abhishek singh जुलाई 26, 2026 0
टाइफाइड से पीड़ित होने के बावजूद छात्र आंदोलन जारी रखने का ऐलान करते CJP संस्थापक अभिजीत दिपके
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके को हुआ टाइफाइड, बीमारी के बावजूद आंदोलन जारी रखने का ऐलान

नई दिल्ली, एजेंसियां। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके टाइफाइड से संक्रमित हो गए हैं। उन्होंने शनिवार को अपनी तबीयत की जानकारी देते हुए बताया कि उनका इलाज चल रहा है और उन्हें रोजाना IV ड्रिप दी जा रही है। इसके बावजूद उन्होंने छात्र मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलन को जारी रखने की बात कही है।   बीमारी के बीच भी प्रदर्शन जारी रखने का फैसला   अभिजीत दिपके ने कहा कि स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद उनका संघर्ष नहीं रुकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों से जुड़े मुद्दों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।   धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन   CJP की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है। अभिजीत दिपके ने कहा कि बीमारी उनके आंदोलन के रास्ते में बाधा नहीं बनेगी और वे अपनी मांगों को लेकर मजबूती से खड़े रहेंगे।   सोशल मीडिया पर साझा की थी तबीयत की जानकारी   इससे पहले अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर IV ड्रिप लगी तस्वीर साझा की थी और अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने समर्थकों से मिले सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया।   CJP प्रदर्शन पहले भी रहा चर्चा में   CJP का आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर समेत कई जगहों पर चर्चा में रहा है। इससे पहले अभिजीत दिपके ने आंदोलन के दौरान अनशन भी किया था और बाद में प्रदर्शन को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभाली थी।   फर्जी मौत की खबर पर दिल्ली पुलिस ने किया था खंडन   इससे पहले सोशल मीडिया पर अभिजीत दिपके की मौत से जुड़ी एक फर्जी खबर भी वायरल हुई थी, जिसे दिल्ली पुलिस ने गलत बताते हुए कहा था कि वह सुरक्षित और स्वस्थ हैं।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
Abhijit Dipke
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अभिजीत दिपके का पहला बयान, बोले- 'हमने कर दिखाया, यह युवाओं की जीत है'

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफा सौंपने के बाद CJP (Cockroach Janata Party) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे देशभर के छात्रों और युवाओं के आंदोलन की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक मंत्री के इस्तीफे की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत है।   'झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए'   अभिजीत दिपके ने अपने बयान में कहा, "झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए। हमने कर दिखाया।" उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन और देशभर के युवाओं की एकजुटता ने सरकार को बड़ा फैसला लेने के लिए मजबूर किया। उनके अनुसार यह उन छात्रों की जीत है, जो पिछले कई दिनों से परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे थे। दिपके ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं था, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय कराना था। उन्होंने सभी छात्रों, अभिभावकों और समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि यह सफलता पूरे देश के युवाओं की है।   'लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई'   अभिजीत दिपके ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आंदोलन की एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन यह संघर्ष का अंत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब CJP की मांगें केवल मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने सरकार से पेपर लीक के सभी मामलों की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए सख्त कार्रवाई, प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में व्यापक और स्थायी सुधार, शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज सभी FIR वापस लेने, प्रदर्शन के दौरान घायल छात्रों को मुआवजा, और पेपर लीक व परीक्षा विवादों के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता देने की मांग दोहराई। दिपके ने कहा कि जब तक इन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

abhishek singh जुलाई 25, 2026 0
CJP Press Conference
सरकार से बातचीत से पहले CJP करेगी प्रेस कॉन्फ्रेंस, आंदोलन की रणनीति पर देगी जानकारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। CJP (Cockroach Janta Party) ने सरकार के साथ प्रस्तावित बातचीत से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का फैसला किया है। संगठन इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए अपनी मांगों, आंदोलन की मौजूदा स्थिति और सरकार के साथ होने वाली वार्ता को लेकर अपना पक्ष रखेगा।   बातचीत से पहले रखेगी अपना रुख   CJP नेताओं का कहना है कि सरकार के साथ बातचीत से पहले वह स्पष्ट करना चाहते हैं कि आंदोलन किन मुद्दों को लेकर चल रहा है और उनकी प्रमुख मांगें क्या हैं। इसमें परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई और छात्रों से जुड़े मुद्दे प्रमुख बताए जा रहे हैं।   सरकार के साथ वार्ता पर सबकी नजर   CJP और सरकार के बीच होने वाली बातचीत को लेकर राजनीतिक और छात्र संगठनों की नजर बनी हुई है। प्रदर्शनकारी पक्ष का कहना है कि बातचीत तभी सार्थक होगी जब छात्रों की मांगों पर ठोस कदम उठाए जाएंगे।   प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगे की रणनीति का ऐलान संभव   माना जा रहा है कि CJP प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंदोलन जारी रखने या बातचीत के बाद आगे की रणनीति को लेकर जानकारी दे सकती है। सरकार की ओर से भी छात्रों की चिंताओं पर चर्चा की तैयारी की जा रही है।

abhishek singh जुलाई 24, 2026 0
Salman Khan
सलमान खान ने CJP प्रदर्शन पर दी प्रतिक्रिया, छात्रों से की आंदोलन खत्म कर घर लौटने की अपील

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने CJP (Cockroach Janta Party) से जुड़े छात्र प्रदर्शन और पेपर लीक विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। सलमान खान ने सोशल मीडिया के जरिए छात्रों के संघर्ष की सराहना की और कहा कि युवाओं की आवाज को सुना जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने और छात्रों से अपने परिवारों के पास लौटने की अपील की।   सलमान ने छात्रों के साहस की तारीफ की   सलमान खान ने अपने संदेश में प्रदर्शन में शामिल छात्रों की हिम्मत और एकजुटता की तारीफ की। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं गंभीर मुद्दा हैं और युवाओं के भविष्य से जुड़ी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।   सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील   सलमान खान ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील करते हुए कहा कि सरकार की ओर से सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया गया है। उन्होंने भावनात्मक अंदाज में वांगचुक से कहा कि अब आंदोलन को आगे बढ़ाने के बजाय समाधान की दिशा में बढ़ना चाहिए।   "छात्र अपने घर लौटें" संदेश   अभिनेता ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों से भी अपील की कि वे अपने परिवारों के पास लौटें और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की प्रक्रिया को मौका दें। सलमान ने छात्रों की सुरक्षा और भविष्य को प्राथमिकता देने की बात कही।   सलमान के बयान पर सोशल मीडिया में चर्चा   सलमान खान के बयान के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग उनके छात्रों के समर्थन वाले रुख की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग उनके संदेश को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं।

abhishek singh जुलाई 24, 2026 0
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, जिन्होंने सोनम वांगचुक का अनशन खत्म होने के बाद छात्रों का आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया
अभिजीत दीपके का नया संदेश, बोले- सोनम वांगचुक का अनशन खत्म हुआ लेकिन छात्रों की लड़ाई जारी रहेगी

नई दिल्ली, एजेंसियां। CJP (Cockroach Janta Party) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक के 26 दिन के अनशन खत्म करने के बाद नया संदेश जारी किया है। दीपके ने कहा कि वांगचुक का अनशन खत्म होना राहत की बात है, लेकिन छात्रों के मुद्दों और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा।   "विद्यार्थियों का त्याग व्यर्थ नहीं जाने देंगे"   अभिजीत दीपके ने कहा कि इस आंदोलन में छात्रों ने जो संघर्ष और त्याग किया है, उसे बेकार नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को आगे बढ़ाने की अपील की।   शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कायम CJP   दीपके ने स्पष्ट किया कि सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने के बाद भी CJP का आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि संगठन अभी भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, पेपर लीक मामलों में जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग पर कायम है।   सरकार के साथ बातचीत, लेकिन आंदोलन जारी रखने का ऐलान   अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन जब तक छात्रों की मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा। CJP का कहना है कि केवल नए कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करनी होगी।   CJP आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं अभिजीत दीपके   अभिजीत दीपके CJP आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं। पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया और जमीनी प्रदर्शन के जरिए युवाओं को जोड़ने का अभियान चलाया है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 24, 2026 0
CJP leaders respond to PM Modi's NEET announcement, demanding Education Minister Dharmendra Pradhan's resignation.
CJP का PM मोदी को जवाब: "फास्ट-ट्रैक कोर्ट नहीं, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहिए"

NEET पेपर लीक मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार के प्रस्ताव को अपर्याप्त बताते हुए अपनी मांगों पर कायम रहने का ऐलान किया है। CJP ने कहा कि उनकी प्राथमिक मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। साथ ही प्रधानमंत्री से छात्रों से सार्वजनिक माफी मांगने और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार करने की भी मांग की गई है। प्रमुख बातें PM मोदी ने पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया। CJP ने कहा- "फास्ट-ट्रैक कोर्ट नहीं, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहिए।" संगठन ने प्रधानमंत्री से छात्रों से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की। जंतर-मंतर पर CJP का आंदोलन लगातार जारी। सरकार और CJP दोनों ने बातचीत की इच्छा जताई। PM के ऐलान पर CJP की प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट के तुरंत बाद CJP ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केवल फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने से छात्रों की मांगें पूरी नहीं होंगी। संगठन ने कहा कि सरकार को सबसे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना चाहिए। CJP ने अपने पोस्ट में लिखा कि सरकार को भ्रष्ट परीक्षा व्यवस्था में सुधार करना चाहिए और छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। "युवाओं की आवाज सुनी जाए" CJP ने अपने पोस्ट में कहा, "सबसे पहले युवाओं की मांग स्वीकार कीजिए। हमें धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहिए। भ्रष्ट सिस्टम को सुधारा जाए और सभी छात्रों से माफी मांगी जाए। ये आपके देश के युवा हैं, जो अपने भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं।" संगठन ने प्रधानमंत्री के पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। जंतर-मंतर पर जारी है प्रदर्शन NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के विरोध में CJP का धरना जंतर-मंतर पर लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार, जवाबदेही तय करने और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे हैं। बातचीत के लिए तैयार दोनों पक्ष छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने बातचीत की इच्छा जताई है। वहीं CJP नेताओं अभिजीत दीपके और सौरभ दास ने भी कहा है कि वे वार्ता के लिए तैयार हैं। हालांकि, उनका कहना है कि सरकार का प्रतिनिधि जंतर-मंतर या किसी तटस्थ स्थान पर आकर बातचीत करे। सरकार की ओर से क्या कहा गया? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि पेपर लीक के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी सोशल मीडिया पर छात्रों के हितों की रक्षा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात दोहराई।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
CJP Protest
CJP Protest: छात्रों के समर्थन में उतरे दिलजीत दोसांझ, कई बॉलीवुड सितारों ने उठाई आवाज

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के जंतर-मंतर से संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई के बाद मनोरंजन जगत के कई प्रमुख कलाकार छात्रों के समर्थन में सामने आए हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसमें 118 से अधिक पुलिसकर्मी और करीब 60 प्रदर्शनकारी घायल हुए। घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई फिल्मी हस्तियों ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए शांतिपूर्ण संवाद और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग की।   दिलजीत बोले- छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए छात्रों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ सख्ती नहीं बरती जानी चाहिए और प्रशासन को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। दिलजीत ने यह भी याद दिलाया कि किसानों के आंदोलन के दौरान समर्थन करने पर उन्हें आलोचना और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था तथा कई बार उन्हें 'राष्ट्र-विरोधी' कहा गया।   वीर दास ने कलाकारों की चुप्पी पर उठाए सवाल कॉमेडियन और अभिनेता वीर दास ने कलाकारों से सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बोलने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि कलाकार जनता के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चुप रहते हैं, तो बाद में उनसे समर्थन और टिकट खरीदने की उम्मीद करना उचित नहीं है। उनके अनुसार, युवाओं का भरोसा और समर्थन ही लाइव एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की सबसे बड़ी ताकत है।   हुमा, भूमि और अन्य सितारों ने जताई चिंता अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने घटना की तस्वीरों को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि ऐसे दृश्य लंबे समय तक याद रहेंगे। उन्होंने बल प्रयोग के बजाय संवाद और धैर्य की आवश्यकता पर जोर दिया। भूमि पेडनेकर ने लिखा कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है और लोकतंत्र में बातचीत सबसे प्रभावी रास्ता है। अनुराग कश्यप ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि अदिति राव हैदरी, सोनाक्षी सिन्हा, सोहा अली खान, रितेश देशमुख और जेनेलिया ने भी छात्रों के समर्थन में अपनी बात रखी। कलाकारों की इन प्रतिक्रियाओं ने एक बार फिर लोकतांत्रिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और युवाओं की आवाज को लेकर राष्ट्रीय बहस को तेज कर दिया। 

anjali kumari जुलाई 21, 2026 0
Parliament March
संसद मार्च के बाद सरकार पर सीजेपी का हमला, अभिजीत दीपके बोले- ‘हमें बातचीत के बहाने उलझाया गया’

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद मार्च के दौरान हुए घटनाक्रम के बाद  (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बातचीत के लिए उनकी पार्टी के प्रतिनिधियों को बुलाया, लेकिन चर्चा के बजाय उन्हें कई घंटों तक आवास पर ही नजरबंद रखा गया। दीपके के अनुसार, इस दौरान उनके प्रतिनिधियों के फोन भी ले लिए गए, जिससे पार्टी का उनसे संपर्क टूट गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के बहाने उन्हें उलझाया गया, जबकि बाहर प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।   लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने आवश्यकता से अधिक बल का इस्तेमाल किया। उनका कहना है कि यदि भीड़ को नियंत्रित करना उद्देश्य था तो पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया जा सकता था, लेकिन इसके बजाय आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लिया गया। उन्होंने दावा किया कि कई छात्र घायल हुए और इस कार्रवाई से अनावश्यक हिंसा हुई।   महिला प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप दीपके ने दिल्ली पुलिस के कुछ पुरुष कर्मियों पर महिला प्रदर्शनकारियों और छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार तथा हिंसा का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ बल प्रयोग किया गया। हालांकि, इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।   सोनम वांगचुक जारी रखेंगे अनशन दीपके ने बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जो अनशन समाप्त करने पर विचार कर रहे थे, अब इसे जारी रखेंगे। उनके अनुसार, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कथित कार्रवाई से वांगचुक आहत हैं और उन्होंने अपनी पत्नी के माध्यम से संदेश भेजकर अनशन जारी रखने का निर्णय लिया है। सीजेपी ने यह भी स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन फिलहाल समाप्त नहीं होगा और संगठन जल्द ही अपने अगले आंदोलन की रणनीति की घोषणा करेगा।

anjali kumari जुलाई 21, 2026 0
Police and protesters clash during the CJP 'Chalo Parliament' march in New Delhi
CJP के ‘चलो संसद’ मार्च में हिंसा, 50 से अधिक पुलिस और पैरामिलिट्री जवान घायल

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस घटना में 50 से अधिक पुलिस और अर्द्धसैनिक बल (पैरामिलिट्री) के जवान घायल हुए हैं। घायलों में आईपीएस और DANIPS कैडर के करीब 10 अधिकारी भी शामिल बताए गए हैं। सभी घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बैरिकेड तोड़ने की कोशिश, पुलिस ने किया बल प्रयोग जानकारी के अनुसार, हजारों प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने संसद मार्ग के पास लगाए गए बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी मौके पर डटे रहे और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी जारी रखी। मार्च में बड़ी संख्या में छात्र और अन्य लोग भी शामिल हुए थे। पथराव और आगजनी का आरोप दिल्ली पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव किया और कई स्थानों पर पुलिस वाहनों में आग लगा दी। हिंसा के बाद सुरक्षा बलों ने स्थिति पर नियंत्रण पाया। पुलिस ने अलग-अलग स्थानों से कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। साथ ही घटनास्थल के सीसीटीवी और वीडियो फुटेज के आधार पर हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, मामले में कई एफआईआर दर्ज की जा रही हैं और कानूनी कार्रवाई जारी है। वांगचुक की पत्नी से मारपीट के आरोप पर विवाद CJP ने आरोप लगाया कि संसद मार्च के दौरान सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि एंग्मो के साथ पुलिसकर्मियों ने धक्का-मुक्की और मारपीट की। संगठन का यह भी दावा है कि प्रदर्शन के दौरान 12 वर्षीय एक लड़की सहित 40 से 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पुलिस का कहना है कि गीतांजलि एंग्मो के साथ किसी तरह की मारपीट नहीं हुई और लोगों से अपील की गई है कि वे बिना पुष्टि के भ्रामक जानकारी साझा न करें। जांच जारी दिल्ली पुलिस ने कहा है कि हिंसा की पूरी घटना की जांच की जा रही है। वीडियो साक्ष्यों और अन्य सबूतों के आधार पर दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं, प्रदर्शन से जुड़े आरोप-प्रत्यारोपों की भी जांच की जा रही है।  

kalpana जुलाई 21, 2026 0
CJP Delegation J.P. Nadda
CJP प्रतिनिधिमंडल की जे.पी. नड्डा से मुलाकात, छात्रों के मुद्दों पर सरकार को सौंपा ज्ञापन

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद मार्च और उससे जुड़े घटनाक्रम के बाद CJP (छात्र संगठन) और केंद्र सरकार के बीच पहली औपचारिक बातचीत हुई। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मुलाकात कर छात्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर एक ज्ञापन सौंपा। लगभग 10 मिनट तक चली इस बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने अपनी प्रमुख मांगों को विस्तार से रखा और उन पर शीघ्र कार्रवाई की मांग की।   बैठक के बाद CJP नेताओं ने बताया बैठक के बाद CJP नेताओं ने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने उनकी सभी मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और कहा कि इन मुद्दों पर सरकार तथा पार्टी नेतृत्व के साथ आंतरिक स्तर पर चर्चा की जाएगी। हालांकि, बैठक में किसी भी मांग पर तत्काल फैसला या लिखित आश्वासन नहीं दिया गया। सरकार की ओर से भी इस मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।   CJP ने सरकार के सामने रखीं ये प्रमुख मांगें    केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल पद से हटाया जाए।   सोनम वांगचुक को तुरंत रिहा किया जाए।   परीक्षा विवाद के बाद जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।   परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। संगठन का कहना है कि इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई होने तक उसका आंदोलन जारी रहेगा।   यह बैठक ऐसे समय हुई जब संसद के मानसून सत्र के पहले दिन CJP ने ‘चलो संसद’ मार्च आयोजित किया था। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए और कार्रवाई की। इस दौरान कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया, जिनमें संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके भी शामिल बताए गए।   बैठक के बाद सौरव दास ने कहा बैठक के बाद सौरव दास ने कहा कि सरकार ने संवाद की शुरुआत की है, लेकिन अब निर्णय सरकार को लेना है। वहीं आशुतोष रांका ने कहा कि छात्रों और युवाओं के हितों से जुड़े मुद्दों पर संगठन अपना संघर्ष जारी रखेगा। फिलहाल सरकार ने केवल मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में इन मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है और क्या यह बातचीत किसी ठोस समाधान का मार्ग प्रशस्त कर पाती है।

abhishek singh जुलाई 21, 2026 0
CJP Protest
संसद मार्च के दौरान बवाल, प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में रविवार को आयोजित 'संसद चलो' मार्च के दौरान जंतर-मंतर से बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी संसद भवन की ओर बढ़े। प्रदर्शन के बीच स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब आंदोलनकारी प्रतिनिधियों और सरकार के बीच बातचीत की कोशिशें भी जारी थीं।   CJP का दावा  CJP का दावा है कि निर्धारित मार्च शुरू होने से पहले ही जंतर-मंतर और उसके आसपास करीब 20 हजार लोग जुट चुके थे। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर जनता का बढ़ता समर्थन दिखाता है।   इस बीच, लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने कहा कि यदि सरकार या विपक्ष के नेता अस्पताल जाकर वांगचुक को भरोसा दिलाते हैं कि संसद के मानसून सत्र में शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही का मुद्दा उठाया जाएगा, तो वे अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर देंगे। वांगचुक फिलहाल सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं और समर्थकों के अनुसार उनका अनशन अब भी जारी है।   प्रदर्शन को कई विपक्षी दलों और सामाजिक हस्तियों का समर्थन मिला आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया जंतर-मंतर पहुंचे, जबकि समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव समेत अन्य नेताओं ने भी मार्च में भाग लिया। तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा, सीपीआई(एम) की वृंदा करात, अभिनेता प्रकाश राज और अभिनेत्री शबाना आजमी ने भी आंदोलन के प्रति एकजुटता जताई।   CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने समर्थकों से पूरे आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को संसद तक पहुंचाना ही इस अभियान का उद्देश्य है। फिलहाल प्रदर्शन और सरकार के साथ बातचीत दोनों पर देशभर की नजर बनी हुई है।

abhishek singh जुलाई 20, 2026 0
CJP Protest
जंतर-मंतर पर संसद मार्च से पहले हंगामा, पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने

नई दिल्ली, एजेंसियां। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित संसद मार्च से पहले सोमवार सुबह जंतर-मंतर पर भारी हंगामा देखने को मिला। पुलिस ने मार्च को रोकने के लिए इलाके में कड़ी बैरिकेडिंग की थी और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। इसके विरोध में भीड़ ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। मौके पर बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं।   पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा CJP का संसद मार्च सुबह नौ बजे शुरू होना था, लेकिन बैरिकेडिंग के कारण इसमें देरी हुई। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि उन्हें कोई नहीं रोक सकता और वे हर हाल में संसद तक पहुंचेंगे। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी, इसलिए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका गया।   इसी बीच, 23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने अनशन समाप्त करने के लिए सरकार के सामने तीन शर्तें रखी हैं। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक की जिम्मेदारी तय करने, CJP प्रतिनिधिमंडल को संसद जाने की अनुमति देने तथा सांसदों से मुद्दा उठाने का आश्वासन मांगा है। स्वास्थ्य कारणों से ऐसा संभव न होने पर उन्होंने सांसदों से सफदरजंग अस्पताल आकर आश्वासन देने की मांग की है।

abhishek singh जुलाई 20, 2026 0
Social activist Sonam Wangchuk being taken to Safdarjung Hospital from Jantar Mantar
जंतर-मंतर से हटाए गए सोनम वांगचुक, अस्पताल में भर्ती; CJP ने लगाया लाठीचार्ज का आरोप

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले 21 दिनों से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी लगातार बिगड़ती सेहत को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने तत्काल चिकित्सकीय निगरानी में भर्ती करने का निर्देश दिया था। कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर पहुंची और उन्हें अस्पताल लेकर गई। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, फिलहाल सोनम वांगचुक की तबीयत स्थिर बताई जा रही है। उन्हें सफदरजंग अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है, जहां उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जंतर-मंतर पर तैनात रहा भारी पुलिस बल शनिवार सुबह कोर्ट के आदेश के बाद जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस की मौजूदगी के बीच वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया। इस दौरान उनके समर्थकों ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया और इसे आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश बताया। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों में वांगचुक की सेहत को लेकर भी चिंता साफ दिखाई दी। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन समाप्त करने और जंतर-मंतर खाली करने की अपील की। पुलिस का कहना है कि हाई कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए वांगचुक को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल ले जाया गया है। 21 दिनों से आमरण अनशन पर हैं वांगचुक सोनम वांगचुक पिछले तीन सप्ताह से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे हैं। लंबे समय से भोजन न लेने के कारण उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी, जिसके बाद मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराने का निर्देश दिया। CJP ने लगाया लाठीचार्ज का आरोप इस बीच सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे CJP समर्थकों पर लाठीचार्ज किया। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ बल प्रयोग किया गया। हालांकि, इस आरोप पर दिल्ली पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल सोनम वांगचुक का इलाज डॉक्टरों की निगरानी में जारी है। वहीं, उनके समर्थक आंदोलन को जारी रखने की बात कह रहे हैं। अब सभी की नजर वांगचुक की सेहत और आंदोलन के अगले कदम पर बनी हुई है।  

kalpana जुलाई 18, 2026 0
CJP founder Abhijeet Deepke addresses protesters at Jantar Mantar in New Delhi amid rain, claiming his social media video was blocked after seeking permission for temporary shelters.
बारिश में टेंट की मांग वाला वीडियो ब्लॉक होने का दावा, अभिजीत दीपके ने सरकार पर उठाए सवाल

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया उनका एक वीडियो ब्लॉक कर दिया गया है। उनका कहना है कि वीडियो में उन्होंने केवल दिल्ली पुलिस से प्रदर्शनकारियों को बारिश से बचाने के लिए टेंट लगाने की अनुमति देने की अपील की थी। 20वें दिन भी जारी रहा प्रदर्शन जंतर-मंतर पर CJP का विरोध प्रदर्शन लगातार 20वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान दिल्ली में हुई बारिश के बीच प्रदर्शनकारी खुले आसमान के नीचे डटे रहे। अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि बारिश के बावजूद प्रदर्शन स्थल पर तिरपाल या टेंट लगाने की अनुमति नहीं दी गई। वीडियो ब्लॉक होने का किया दावा दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि उनका वीडियो भारत में ब्लॉक कर दिया गया है। उन्होंने मूल पोस्ट और ब्लॉक होने का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए लिखा कि वीडियो में केवल बारिश से बचाव के लिए टेंट लगाने की अपील की गई थी। हालांकि, वीडियो ब्लॉक किए जाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। दिल्ली पुलिस पर लगाए आरोप अभिजीत दीपके का आरोप है कि भारी बारिश के दौरान प्रदर्शनकारी पूरी तरह भीग गए, जबकि पुलिसकर्मी सुरक्षित स्थान पर मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि बारिश के कारण कई छात्र बीमार पड़ गए और उनका सामान, गद्दे तथा चादरें भी भीग गईं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूरी रात छात्रों को जागकर बितानी पड़ी क्योंकि बारिश से उनका सामान खराब हो गया था। छात्रों की स्थिति पर जताई चिंता दीपके ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल अधिकांश छात्र 19-20 वर्ष की आयु के हैं और लगातार बारिश के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने प्रशासन से प्रदर्शनकारियों के लिए न्यूनतम सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। सोनम वांगचुक की सेहत बिगड़ने का दावा इस विरोध प्रदर्शन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर भी चिंता जताई गई है। पीटीआई के हवाले से जारी एक मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, भूख हड़ताल शुरू होने के बाद उनका वजन 7 किलोग्राम से अधिक कम हो गया है। रिपोर्ट में बताया गया कि उनका वजन 59.40 किलोग्राम दर्ज किया गया, जबकि हृदय गति 74 बीट प्रति मिनट, ब्लड ग्लूकोज 75 mg/dL और ऑक्सीजन सैचुरेशन 98 प्रतिशत रहा। डॉक्टरों के अनुसार, फिलहाल उनके शरीर में पानी का स्तर सामान्य है। मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार वीडियो ब्लॉक होने और प्रदर्शन स्थल पर टेंट लगाने की अनुमति नहीं मिलने संबंधी आरोपों पर फिलहाल सरकार या दिल्ली पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले को लेकर आगे की स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।  

Deepshikha जुलाई 10, 2026 0
CJP Delhi High Court
दिल्ली हाई कोर्ट से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को राहत, X अकाउंट बहाल करने का आदेश

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) को बड़ी राहत देते हुए उसके X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट को बहाल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत अकाउंट को ब्लॉक किया गया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध कानून द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप ही लगाया जा सकता है और उसकी न्यायिक समीक्षा आवश्यक है।   NEET परीक्षा के संदर्भ में ब्लॉक किया गया था अकाउंट सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि NEET परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की अफवाह, भ्रम या अशांति फैलने से रोकने के उद्देश्य से अकाउंट को अस्थायी रूप से ब्लॉक किया गया था। सरकार का तर्क था कि दोबारा परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं को नियंत्रित करना जरूरी था।   हालांकि अदालत ने माना कि NEET परीक्षा से जुड़ी परिस्थितियां अब बदल चुकी हैं और जिस आधार पर अकाउंट ब्लॉक किया गया था, वह अब प्रासंगिक नहीं रहा। इसी आधार पर कोर्ट ने ब्लॉक आदेश निरस्त कर अकाउंट बहाल करने का निर्देश दिया।   जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 18 दिनों से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। संगठन की मांग है कि NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय की जाए तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पूरी की जाए। इस आंदोलन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल हैं, जो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।   राजनीतिक दल बनने की अटकलें तेज सोशल मीडिया पर चर्चा के बीच संगठन के भविष्य को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि CJP के संस्थापक ने फिलहाल इसे युवाओं का एक दबाव समूह बताया है और कहा है कि अभी राजनीतिक दल बनाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। वहीं, यदि भविष्य में संगठन चुनाव आयोग में पंजीकरण कराता है, तो चुनाव चिह्न का फैसला आयोग के नियमों और उपलब्धता के आधार पर किया जाएगा। फिलहाल हाई कोर्ट के फैसले के बाद संगठन का X अकाउंट फिर से सक्रिय होगा, जबकि उसका आंदोलन पहले की तरह जारी रहेगा।

abhishek singh जुलाई 7, 2026 0
Sonam Wangchuk
भूख हड़ताल के तीसरे दिन सोनम वांगचुक का शुगर लेवल घटा

नई दिल्ली, एजेंसियां। नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहा विरोध प्रदर्शन मंगलवार को अपने 11वें दिन में पहुंच गया। यह आंदोलन शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, पर्यावरण संरक्षण और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चलाया जा रहा है। इसी प्रदर्शन के तहत पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का आज तीसरा दिन है। लगातार उपवास के चलते उनका ब्लड शुगर लेवल घटकर 66 तक पहुंच गया है, जो सामान्य स्तर से काफी नीचे है। इससे उनके समर्थकों और डॉक्टरों की चिंता बढ़ गई है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के अनुसार, वांगचुक पिछले तीन दिनों से सिर्फ पानी और नमक के सहारे भूख हड़ताल पर हैं, और डॉक्टर नियमित रूप से उनकी नाड़ी, ब्लड प्रेशर तथा अन्य स्वास्थ्य संकेतकों की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने आगाह किया कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो मामला गंभीर हो सकता है।   छात्र, शिक्षक, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता आंदोलन के 11वें दिन भी बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता धरना स्थल पर पहुंचे और शांतिपूर्ण तरीके से नारेबाजी करते हुए सरकार से ठोस कदम उठाने की अपील की। आयोजकों का कहना है कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि देश के छात्रों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा है।   प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता   प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई और सरकारी भर्तियों में जवाबदेही की मांग के साथ-साथ पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों को भी उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अच्छी शिक्षा और सुरक्षित पर्यावरण दोनों देश के विकास के लिए जरूरी हैं। धरना स्थल पर रोज विभिन्न राज्यों से लोग पहुंचकर समर्थन दे रहे हैं, कुछ सांकेतिक उपवास रख रहे हैं तो कुछ कई दिनों से डटे हुए हैं। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा।

abhishek singh जून 30, 2026 0
Cockroach Janata Party founder Abhijeet Deepke allegedly assaulted during NEET paper leak protest at Jaipur's Shaheed Smarak.
जयपुर में प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके की पिटाई, दो युवक हिरासत में

  जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में सोमवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो युवकों को हिरासत में ले लिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। यह घटना जयपुर के शहीद स्मारक पर हुई, जहां बड़ी संख्या में युवा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) पेपर लीक, बेरोजगारी और युवाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। भीड़ के बीच पहुंचे थे अभिजीत दीपके पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अभिजीत दीपके अपने समर्थकों के कंधों पर सवार होकर प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे थे। इसी दौरान भीड़ में मौजूद कुछ युवकों ने कथित तौर पर उनके साथ धक्का-मुक्की की और उन्हें थप्पड़ मार दिए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। दीपके के समर्थकों ने कथित आरोपियों को पकड़ लिया और उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों को अलग किया। दो युवक हिरासत में, जांच जारी पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले में दो युवकों को हिरासत में लिया गया है। उनसे पूछताछ की जा रही है और घटना के पीछे की वजहों का पता लगाया जा रहा है। साथ ही, घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि यदि किसी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत दी जाती है, तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने पेपर लीक, भ्रष्टाचार और बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्रवाई की मांग करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की भी मांग की। पुलिस के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और युवाओं के रोजगार संबंधी मुद्दों को उठाना था। सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई घटना के बाद शहीद स्मारक और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।  

Deepshikha जून 16, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 23, 2026 0