बिहार

बिहार शिक्षक ट्रांसफर: 29 जुलाई से शुरू होगी प्रक्रिया, ई-शिक्षाकोष पोर्टल से ऑनलाइन होगा आवेदन

abhishek singh जुलाई 28, 2026 0
Bihar Teacher Transfer
Bihar Teacher Transfer Policy

पटना, एजेंसियां। बिहार में सरकारी शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर शिक्षा विभाग ने नई प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है। बिहार राज्य शिक्षक स्थानांतरण नियमावली 2026 के तहत शिक्षकों का ट्रांसफर अब ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया 29 जुलाई से ई-शिक्षाकोष (e-Shikshakosh) पोर्टल पर शुरू होगी।

 

5 साल की बाध्यता खत्म, शिक्षकों को मिलेगा विकल्प चुनने का मौका

 

नई ट्रांसफर नीति में शिक्षकों को बड़ी राहत दी गई है। अब स्थानांतरण के लिए पहले जैसी 5 साल की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। शिक्षक अपनी पसंद के स्कूल और स्थान के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। शिक्षकों को रिक्त पदों की सूची देखकर अपनी प्राथमिकता के आधार पर विकल्प चुनने का मौका मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार शिक्षक अधिकतम 30 विद्यालयों का विकल्प दे सकेंगे, जबकि जिला या प्रमंडल से बाहर स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षक कई जिलों को प्राथमिकता के रूप में चुन पाएंगे।

 

पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन

 

शिक्षा विभाग ने स्थानांतरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए इसे पूरी तरह ऑनलाइन रखने का फैसला किया है। आवेदन, विकल्प चयन और आगे की प्रक्रिया ई-शिक्षाकोष पोर्टल के माध्यम से पूरी की जाएगी। ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने से शिक्षकों को बार-बार विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।

 

महिला और पुरुष शिक्षकों के लिए अलग-अलग प्रावधान

 

नई नीति में महिला और पुरुष शिक्षकों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग व्यवस्था की गई है। महिला शिक्षकों को नजदीकी क्षेत्र में पोस्टिंग देने को प्राथमिकता देने की बात कही गई है, जबकि पुरुष शिक्षकों के लिए भी जिला स्तर पर सुविधाजनक स्थानांतरण के विकल्प रखे गए हैं। सरकार का उद्देश्य शिक्षकों की व्यक्तिगत परेशानियों को कम करने के साथ-साथ स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता को संतुलित करना है।

 

सितंबर में शुरू होगी पारस्परिक स्थानांतरण प्रक्रिया

 

सामान्य स्थानांतरण के बाद शिक्षकों के म्यूचुअल ट्रांसफर (आपसी स्थानांतरण) की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। इसके लिए सितंबर में अलग चरण निर्धारित किया गया है, जिसमें जिला, प्रमंडल और राज्य स्तर की समितियां आवेदन की जांच करेंगी। नई ट्रांसफर नीति से राज्य के लाखों सरकारी शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है। अब शिक्षकों की नजर 29 जुलाई से शुरू होने वाली ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया और आगे जारी होने वाले विभागीय दिशा-निर्देशों पर है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बिहार

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NEET Paper Leak Case
NEET पेपर लीक विवाद: बिहार सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस वापस लेने का फैसला किया, हिरासत में लिए गए युवाओं की रिहाई शुरू

पटना, एजेंसियां। NEET पेपर लीक मामले को लेकर बिहार में हुए छात्र आंदोलनों के बाद राज्य सरकार ने प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत दी है। बिहार सरकार ने प्रदर्शन के दौरान दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने और हिरासत में लिए गए युवाओं को रिहा करने का निर्णय लिया है।   प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस लेने की प्रक्रिया शुरू   बिहार सरकार ने कहा है कि NEET-UG परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज FIR, आपराधिक शिकायतों और अन्य कानूनी कार्रवाई को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार के इस फैसले के बाद उन छात्रों और युवाओं को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन पर आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई की गई थी।   बड़ी संख्या में युवाओं की हुई थी गिरफ्तारी   NEET विवाद को लेकर बिहार में हुए प्रदर्शनों के दौरान कई जगहों पर तनाव की स्थिति बनी थी। रिपोर्ट्स के अनुसार बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था और कुछ लोगों के खिलाफ पुलिस केस दर्ज किए गए थे। अब सरकार ने ऐसे मामलों की समीक्षा कर युवाओं को राहत देने का फैसला किया है।   छात्रों की मांगों के बाद लिया गया फैसला   छात्र संगठन लगातार मांग कर रहे थे कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले युवाओं पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं। सरकार के इस कदम को छात्रों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।   परीक्षा व्यवस्था सुधार पर भी उठी बहस   NEET विवाद के बाद देशभर में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग तेज हुई है। सरकार और संबंधित एजेंसियां परीक्षा सुधारों को लेकर कदम उठाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

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सिवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान AK-47 लहराने वाले पुलिसकर्मी पर कार्रवाई, कांस्टेबल निलंबित

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भारी बारिश में बह गया गोविंदपुर-चमरपुर मार्ग, ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी

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बिहार बंद विवाद: तेजस्वी यादव ने न्यायिक जांच की मांग दोहराई, सरकार और सीएम सम्राट चौधरी पर साधा निशाना

पटना। बिहार की राजनीति में छात्र आंदोलन और बिहार बंद के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सियासी घमासान जारी है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एक बार फिर आंदोलन के दौरान कथित AK-47 फायरिंग मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और फायरिंग के आदेश देने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।   फायरिंग मामले की न्यायिक जांच की मांग   तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान कथित तौर पर AK-47 का इस्तेमाल किया गया और इस मामले में केवल निचले स्तर के कर्मियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए ताकि जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान हो सके।   सरकार के 100 दिन पर उठाए सवाल   तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के 100 दिन पूरे होने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार जनता को बताए कि इस अवधि में आम लोगों के हित में क्या प्रमुख कार्य किए गए। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री और सरकार की कार्यशैली पर भी टिप्पणी की।   छात्रों की गिरफ्तारी पर जताई नाराजगी   आरजेडी नेता ने आरोप लगाया कि समझौते के बाद भी बड़ी संख्या में छात्रों को गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लिया जाना चाहिए और युवाओं के साथ सख्ती उचित नहीं है।   सरकार पर लगाए वादाखिलाफी के आरोप   तेजस्वी यादव ने भाजपा और राज्य सरकार पर चुनावी वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छात्रों, किसानों और महिलाओं से किए गए वादों को पूरा करने के बजाय सरकार विपक्ष और आंदोलनकारियों पर कार्रवाई करने में लगी है। वहीं, सरकार की ओर से इन आरोपों पर अलग रुख रखा गया है।

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बिहार में छात्र प्रदर्शन के बीच AK-47 फायरिंग का मामला, पुलिसकर्मी सस्पेंड; विभागीय जांच शुरू

सिवान। नीट पेपर लीक मामले को लेकर बिहार बंद के दौरान सिवान में हुए छात्र प्रदर्शन के बीच AK-47 से फायरिंग का कथित वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस मुख्यालय ने विशेष जांच दल (SIT) के सदस्य अभिषेक पटेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।   वायरल वीडियो में फायरिंग करते दिखा पुलिसकर्मी   सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों की दिशा में AK-47 से कई राउंड फायरिंग करता नजर आ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ा दी।   विभागीय जांच के आदेश   पुलिस मुख्यालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी है। जांच में वायरल वीडियो की सत्यता, फायरिंग की परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई के तरीके की जांच की जा रही है।   25 जुलाई को बिहार बंद के दौरान हुआ था तनाव   जानकारी के अनुसार, 25 जुलाई को नीट पेपर लीक के विरोध में आयोजित बिहार बंद के दौरान सिवान में छात्र संगठनों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बन गई थी। इसी दौरान फायरिंग का वीडियो सामने आया था।   कई जिलों में प्रदर्शन हुआ था उग्र   बिहार बंद के दौरान पटना, सिवान, सारण, औरंगाबाद और भागलपुर समेत कई जिलों में प्रदर्शन तेज हुआ था। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प की घटनाएं भी सामने आई थीं।   जांच रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई   पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने पर आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल निलंबित पुलिसकर्मी से जुड़े मामले की जांच जारी है।

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