पटना, एजेंसियां। बिहार के सरकारी स्कूलों में शनिवार को हाफ-डे (आधा दिन) व्यवस्था फिर से लागू करने को लेकर शिक्षा विभाग में मंथन शुरू हो गया है। राज्य सरकार इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है और अगले कुछ दिनों में इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। यदि मंजूरी मिलती है तो शनिवार को स्कूलों के समय में बदलाव किया जा सकता है। शिक्षा विभाग ने मांगी राय, शिक्षकों और छात्रों की सुविधा पर चर्चा सरकार की ओर से शनिवार की पढ़ाई को लेकर नई व्यवस्था बनाने पर विचार किया जा रहा है। इसमें छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की सुविधा को ध्यान में रखा जा रहा है। माना जा रहा है कि शनिवार को आधे दिन की कक्षाएं होने से छात्रों और शिक्षकों को राहत मिल सकती है। साथ ही स्कूलों में अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए भी समय मिल सकेगा। पहले लागू थी हाफ-डे व्यवस्था बिहार के कई सरकारी स्कूलों में पहले शनिवार को आधे दिन तक पढ़ाई की व्यवस्था रही है। बाद में स्कूलों के समय में बदलाव और शैक्षणिक कैलेंडर में संशोधन के कारण इस व्यवस्था में परिवर्तन किया गया था। अब इसे दोबारा लागू करने की मांग कई स्तरों पर उठ रही थी। इसी को देखते हुए सरकार इस पर विचार कर रही है। 7 दिन में लिया जा सकता है फैसला रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में शिक्षा विभाग और सरकार के स्तर पर चर्चा चल रही है। अगले 7 दिनों के भीतर इस पर निर्णय आने की संभावना जताई जा रही है। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो स्कूलों के संचालन समय, पढ़ाई के घंटे और शिक्षकों की जिम्मेदारियों को लेकर नए निर्देश जारी किए जा सकते हैं। शिक्षकों के संगठन भी रख सकते हैं अपनी मांगें शनिवार की व्यवस्था में बदलाव को लेकर शिक्षक संगठनों की राय भी महत्वपूर्ण होगी। कुछ शिक्षक संगठन लंबे समय से स्कूलों के समय और कार्यदिवस को लेकर अपनी मांगें सरकार के सामने रखते रहे हैं। सरकार का उद्देश्य स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ छात्रों और शिक्षकों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करना है। अब सभी की नजर शिक्षा विभाग के अंतिम फैसले पर है।
पटना, एजेंसियां। बिहार विधानसभा का मानसून सत्र समाप्त हो गया है। सत्र के दौरान सदन में कुल 20 विधेयक पारित किए गए। सरकार ने जहां इसे राज्य के विकास और प्रशासनिक सुधारों के लिए महत्वपूर्ण बताया, वहीं विपक्ष ने कई मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और सदन के अंदर विरोध प्रदर्शन भी किया। कई महत्वपूर्ण विधेयकों को मिली मंजूरी मानसून सत्र के दौरान सरकार की ओर से पेश किए गए कई विधेयकों पर चर्चा के बाद उन्हें मंजूरी दी गई। इन विधेयकों में प्रशासनिक व्यवस्था, शिक्षा, कानून और राज्य के विकास से जुड़े विषय शामिल रहे। सरकार का कहना है कि पारित किए गए विधेयकों से राज्य में बेहतर प्रशासन और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। छात्र आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा छाया रहा सत्र के दौरान शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा में पारदर्शिता और छात्र संगठनों के प्रदर्शन का मुद्दा प्रमुखता से उठा। विपक्ष ने पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामलों को लेकर सरकार से जवाब मांगा। विपक्षी नेताओं ने मांग की कि परीक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए और छात्रों की शिकायतों का जल्द समाधान किया जाए। विपक्ष ने सरकार पर लगाए कई आरोप विधानसभा सत्र में विपक्ष ने कानून व्यवस्था, रोजगार, शिक्षा और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। कई बार सदन में नारेबाजी और हंगामे की स्थिति भी बनी। विपक्ष का आरोप था कि सरकार जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है। वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। सरकार ने बताया सत्र को उपलब्धिपूर्ण सत्र समाप्त होने के बाद सरकार की ओर से कहा गया कि विधानसभा में जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई और आवश्यक कानूनों को मंजूरी दी गई। सत्तापक्ष ने कहा कि पारित किए गए विधेयक बिहार के विकास और प्रशासनिक सुधारों को गति देने में सहायक होंगे। आगे विधानसभा में नए मुद्दों पर होगी चर्चा मानसून सत्र समाप्त होने के बाद अब सरकार द्वारा पारित विधेयकों को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। वहीं विपक्ष आने वाले समय में शिक्षा, रोजगार और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर को समर्थन देने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद बिहार की सियासत में नई चर्चा शुरू हो गई है। तेज प्रताप ने कहा- बदलाव के लिए प्रशांत किशोर का साथ तेज प्रताप यादव ने कहा कि बांकीपुर सीट लंबे समय से एक ही राजनीतिक दल के प्रभाव में रही है और अब बदलाव की जरूरत है। उन्होंने प्रशांत किशोर को समर्थन देने की बात कही और जनता से उनके पक्ष में मतदान करने की अपील की। JJD उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद लिया फैसला तेज प्रताप यादव की पार्टी के उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद पार्टी ने बांकीपुर उपचुनाव में अपना प्रत्याशी नहीं उतारा। इसके बाद तेज प्रताप यादव ने प्रशांत किशोर को समर्थन देने का फैसला किया। प्रशांत किशोर पहली बार चुनाव मैदान में जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के जरिए पहली बार सीधे चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। उन्होंने बिहार की राजनीति में बदलाव और नई राजनीतिक व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए चुनाव लड़ने का फैसला किया है। बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज प्रताप यादव और प्रशांत किशोर का साथ आना बिहार की राजनीति में नए समीकरणों के रूप में देखा जा रहा है। तेज प्रताप यादव पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से जुड़े रहे हैं और बाद में उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाई। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, बांकीपुर उपचुनाव में यह समर्थन प्रशांत किशोर के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि तेज प्रताप यादव की अपनी राजनीतिक पहचान और समर्थक वर्ग है। आगे की रणनीति पर नजर अब सभी की नजर इस बात पर है कि तेज प्रताप यादव का समर्थन चुनावी परिणामों को कितना प्रभावित करता है और क्या यह बिहार की राजनीति में भविष्य के नए गठजोड़ की शुरुआत है।
पटना, एजेंसियां। बिहार में NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर बुलाए गए प्रदर्शन के दौरान जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। तेज प्रताप युवाओं के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे, जहां पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। युवाओं के समर्थन में सड़क पर उतरे तेज प्रताप तेज प्रताप यादव ने NEET पेपर लीक मामले और छात्रों की समस्याओं को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान कहा कि युवाओं के अधिकारों और भविष्य के लिए वह संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। पटना में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई बिहार बंद के दौरान पटना समेत कई जगहों पर प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति भी बनी। पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई लोगों को हिरासत में लिया। तेज प्रताप यादव को भी प्रदर्शन स्थल से पुलिस अपने साथ ले गई। हालांकि, उन्हें बाद में छोड़ा गया या नहीं, इसकी जानकारी अधिकारियों की ओर से स्पष्ट नहीं की गई है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई तेज प्रताप यादव इससे पहले भी NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। बिहार की राजनीति में बढ़ी हलचल तेज प्रताप यादव के सड़क पर उतरने के बाद बिहार की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। वह लगातार युवाओं और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर हमला कर रहे हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। हरियाली तीज का पर्व सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है और यह विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की समृद्धि के लिए निर्जला या फलाहार व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से दांपत्य जीवन में प्रेम, सौहार्द और स्थिरता बनी रहती है। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में तृतीया तिथि 14 अगस्त की शाम 6:46 बजे से शुरू होकर 15 अगस्त की शाम 5:28 बजे तक रहेगी। चूंकि व्रत और पर्व उदयातिथि के आधार पर मनाए जाते हैं, इसलिए हरियाली तीज 15 अगस्त 2026, शनिवार को मनाई जाएगी। जानें शुभ मुहूर्त और व्रत के नियम हरियाली तीज के दिन पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:50 से 5:35 बजे तक, अभिजित मुहूर्त 12:17 से 1:08 बजे तक और विजय मुहूर्त 2:51 से 3:42 बजे तक रहेगा। वहीं गोधूलि मुहूर्त 7:06 से 7:29 बजे और अमृत काल रात 8:18 से 9:53 बजे तक रहेगा। चौघड़िया के अनुसार शुभ, लाभ और अमृत काल भी पूजा के लिए अनुकूल माने गए हैं। इस दिन महिलाओं को क्या पहना चाहिए ? इस दिन महिलाओं को हरे या लाल रंग के वस्त्र पहनने, सोलह श्रृंगार करने और हाथों में मेहंदी रचाने की परंपरा है। पूजा में मायके से प्राप्त श्रृंगार सामग्री का उपयोग शुभ माना जाता है। व्रत के दौरान विवाद और नकारात्मकता से दूर रहने, शुभ मुहूर्त से पहले पारण न करने तथा रात्रि में भजन-कीर्तन और शिव-पार्वती के जागरण का विशेष महत्व बताया गया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पंजाब सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में हरियाली तीज बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। इस अवसर पर मायके से विवाहित बेटियों को वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, घेवर, मिठाइयां और उपहार भेजने की परंपरा भी निभाई जाती है, जो पारिवारिक स्नेह और रिश्तों की मजबूती का प्रतीक मानी जाती है।
पटना, एजेंसियां। बिहार के करीब 6 लाख सरकारी शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने शिक्षकों के स्थानांतरण (Transfer) की प्रक्रिया का नया शेड्यूल जारी कर दिया है। इसके तहत सबसे पहले म्यूचुअल ट्रांसफर (आपसी सहमति से तबादला) किए जाएंगे, जबकि विशेष श्रेणी के शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाएगी। पहले होगा आपसी सहमति वाला तबादला शिक्षा विभाग की योजना के अनुसार, ट्रांसफर प्रक्रिया की शुरुआत उन शिक्षकों से होगी जो आपसी सहमति से एक-दूसरे के स्थान पर जाना चाहते हैं। इससे लंबे समय से तबादले का इंतजार कर रहे शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है। विशेष श्रेणी के शिक्षकों को मिलेगी प्राथमिकता नई प्रक्रिया में दिव्यांग, गंभीर बीमारी से पीड़ित, महिला शिक्षक और अन्य विशेष परिस्थितियों वाले शिक्षकों को प्राथमिकता दिए जाने की तैयारी है। विभाग का उद्देश्य है कि जरूरतमंद शिक्षकों को उनके सुविधाजनक स्थान पर तैनाती मिल सके। लगभग 78 हजार स्कूलों पर लागू होगी प्रक्रिया बिहार के करीब 78 हजार सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए यह प्रक्रिया लागू होगी। शिक्षा विभाग ने ट्रांसफर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था और निर्धारित नियमों के तहत काम करने की तैयारी की है। शिक्षकों को लंबे इंतजार से मिलेगी राहत पिछले कई वर्षों से बिहार के शिक्षक तबादले की मांग कर रहे थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद शिक्षकों को पारिवारिक, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत कारणों से स्थानांतरण का अवसर मिल सकेगा। विभाग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों और पारदर्शिता के साथ पूरी की जाएगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन की समय-पूर्व रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला 1994 में गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी. कृष्णैया की हत्या से जुड़ा है, जिसमें आनंद मोहन को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। बिहार सरकार के फैसले को दी गई थी चुनौती आनंद मोहन को वर्ष 2023 में बिहार सरकार द्वारा जेल नियमों में बदलाव के बाद समय से पहले रिहा किया गया था। इस रिहाई को जी. कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि रिहाई की प्रक्रिया में नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उठाए कई सवाल सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान रिमिशन (सजा में छूट) प्रक्रिया, जेल नियमों में बदलाव और रिहाई के आधार को लेकर कई सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि लोक सेवक की हत्या जैसे गंभीर अपराध में समय से पहले रिहाई देने के फैसले पर पुनर्विचार जरूरी है। क्या है पूरा मामला? 1994 में गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी. कृष्णैया की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी। इस मामले में आनंद मोहन को दोषी ठहराया गया और उन्हें उम्रकैद की सजा मिली थी। बाद में बिहार सरकार ने जेल नियमावली में बदलाव किया, जिसके बाद अप्रैल 2023 में उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया। अब फैसले का इंतजार अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर है। यदि अदालत बिहार सरकार के रिहाई आदेश को बरकरार रखती है तो आनंद मोहन की रिहाई जारी रहेगी, जबकि याचिका स्वीकार होने की स्थिति में उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी का अमेरिका दौरा चर्चा का विषय बन गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के कुछ ही दिनों बाद जैदी ने वाशिंगटन पहुंचकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। विश्लेषकों के अनुसार, यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, इसलिए इसे इराक की संतुलित कूटनीति के रूप में देखा जा रहा है। ईरानी दबाव के बावजूद अमेरिका पहुंचे? मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान ने इराकी प्रधानमंत्री और उनकी टीम से अमेरिका की यात्रा टालने का आग्रह किया था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, जैदी ने अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा के लिए वाशिंगटन जाने का फैसला बरकरार रखा। कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने इसे इराक की स्वतंत्र विदेश नीति और "इराक फर्स्ट" दृष्टिकोण का संकेत बताया है। ट्रंप ने की इराकी प्रधानमंत्री की सराहना ओवल ऑफिस में हुई मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अली अल-जैदी का स्वागत करते हुए उनकी प्रशंसा की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। मुलाकात के दौरान ट्रंप ने उनके सम्मान में आधिकारिक लंच का भी आयोजन किया। आर्थिक सहयोग और सुरक्षा पर रही चर्चा रिपोर्टों के अनुसार, इराकी प्रधानमंत्री ने अपनी यात्रा के दौरान ईरान से जुड़े विवादों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने अमेरिका के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और इराक से अमेरिकी सैनिकों की प्रस्तावित वापसी जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। दोनों देशों के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौती इराक लंबे समय से अमेरिका और ईरान दोनों के साथ संबंध बनाए रखने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में मौजूदा हालात में बगदाद के लिए दोनों देशों के बीच संतुलन बनाए रखना बड़ी कूटनीतिक चुनौती माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के साथ संवाद बढ़ाने का अर्थ यह नहीं है कि इराक ने ईरान से दूरी बना ली है। फिलहाल इराक दोनों देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखने की नीति पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।
समस्तीपुर, एजेंसियां। बिहार के समस्तीपुर जिले में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की तैयारी चल रही है। शहर के पुराने 56 साल पुराने रोड ओवरब्रिज (ROB) की जगह अब एक नए 4-लेन रोड ओवरब्रिज के निर्माण की योजना बनाई गई है। इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। पुराने पुल पर बढ़ रहा यातायात का दबाव समस्तीपुर का मौजूदा रोड ओवरब्रिज कई दशक पुराना हो चुका है। बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या में लगातार वृद्धि और शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव के कारण इस पुल पर अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। रेलवे लाइन के ऊपर बने इस पुल से रोजाना बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। नए ROB में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं प्रस्तावित 4-लेन रोड ओवरब्रिज को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। नए पुल के बनने से यातायात सुगम होगा और शहर के प्रमुख इलाकों के बीच आवागमन का समय कम होगा। परियोजना में बेहतर सड़क डिजाइन, चौड़ी लेन और सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा जाएगा। केंद्र की मंजूरी के बाद शुरू होगा काम रेलवे और संबंधित विभागों की ओर से इस परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया गया है। अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। शहर के विकास को मिलेगी नई गति स्थानीय लोगों का कहना है कि नया ROB बनने से समस्तीपुर में जाम की समस्या काफी हद तक कम होगी और व्यापारिक गतिविधियों को भी फायदा मिलेगा। यह परियोजना शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
बिहारशरीफ, एजेंसियां। बिहार के नालंदा जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। पुलिस वाहन की टक्कर से एक 23 वर्षीय युवक की मौत हो गई। घटना से नाराज लोगों ने शव को सड़क पर रखकर NH-20 जाम कर दिया और कई वाहनों में तोड़फोड़ की। हादसे के बाद भड़का लोगों का गुस्सा प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए और सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया और पुलिस पर पथराव भी हुआ। आठ पुलिसकर्मी घायल हंगामे के दौरान हुई पत्थरबाजी में दो इंस्पेक्टर समेत आठ पुलिसकर्मी घायल हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया और काफी मशक्कत के बाद यातायात बहाल कराया गया। जांच शुरू, एक व्यक्ति हिरासत में पुलिस ने हादसे और उसके बाद हुई हिंसा, दोनों मामलों में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्र में तनाव, प्रशासन सतर्क घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। पोस्टमार्टम के बाद युवक का शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
खगड़िया, एजेंसियां। बिहार के खगड़िया जिले में वाहन जांच अभियान के दौरान पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हो गई। इस दौरान एक आरोपी ने पुलिसकर्मी की पिस्टल छीनकर भागने की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने 'ऑपरेशन लंगड़ा' के तहत फायरिंग की, जिसमें आरोपी के पैर में गोली लगी और वह घायल हो गया। वाहन जांच के दौरान हुआ घटनाक्रम पुलिस टीम नियमित वाहन जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान संदिग्ध युवक को रोककर पूछताछ की गई। जांच के दौरान आरोपी ने अचानक पुलिसकर्मी की सरकारी पिस्टल छीन ली और मौके से भागने का प्रयास किया। पुलिस ने तत्काल उसका पीछा किया। जवाबी कार्रवाई में आरोपी के पैर में लगी गोली पुलिस के अनुसार, आरोपी को कई बार आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी गई, लेकिन उसने भागने का प्रयास जारी रखा। इसके बाद आत्मरक्षा और आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस ने फायरिंग की। गोली आरोपी के पैर में लगी, जिससे वह घायल होकर गिर पड़ा। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अस्पताल में चल रहा इलाज घायल आरोपी को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। पुलिस ने आरोपी के पास से हथियार बरामद कर लिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। फरार साथी की तलाश में छापेमारी पुलिस का कहना है कि घटना में आरोपी का एक अन्य साथी भी शामिल था, जो मौके से फरार हो गया। उसकी गिरफ्तारी के लिए विभिन्न स्थानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था की मजबूत घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और जांच टीम को जल्द रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
पटना, एजेंसियां। बिहार के चर्चित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार अभिषेक कुमार 'बंटी' का टिकट कटने के बाद उनके पिता रविंद्र प्रसाद का दर्द सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे के खिलाफ सोची-समझी साजिश रची गई और परिवार का नाम पुराने चारा घोटाला मामले से जोड़कर चुनाव से बाहर करने की कोशिश की गई। 'परिवार और पार्टी की छवि बचाने के लिए लिया फैसला' रविंद्र प्रसाद ने कहा कि अभिषेक ने परिवार और भाजपा की छवि को नुकसान से बचाने के लिए चुनाव मैदान से हटने का फैसला किया। उनके मुताबिक, जब परिवार का नाम फिर से चारा घोटाला मामले से जोड़ा जाने लगा तो अभिषेक ने स्वयं नामांकन वापस लेने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि अभिषेक लंबे समय से पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं और उन्होंने संगठन के हित को प्राथमिकता दी। '11 लाख के मामले को 125 करोड़ बताकर बदनाम किया गया' रविंद्र प्रसाद ने मीडिया रिपोर्टों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिस मामले में उनका नाम है, उसमें सिर्फ 11 लाख रुपये का आरोप था, लेकिन इसे 125 करोड़ रुपये के घोटाले की तरह पेश किया गया। उन्होंने कहा कि मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है और वे हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती दे चुके हैं। साथ ही उन्होंने गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी। भाजपा ने उतारा नया उम्मीदवार अभिषेक कुमार के नामांकन वापस लेने के बाद भाजपा ने नीरज कुमार सिन्हा को बांकीपुर उपचुनाव का नया उम्मीदवार बनाया है। पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि अभिषेक ने पारिवारिक कारणों से चुनाव न लड़ने का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार करते हुए नया प्रत्याशी घोषित किया गया। इस घटनाक्रम के बाद बांकीपुर उपचुनाव का राजनीतिक मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।
पटना, एजेंसियां। बिहार में 15 जुलाई से जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी तरह बदलने जा रही है। राज्य सरकार सभी निबंधन कार्यालयों में पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। नई व्यवस्था के तहत जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े सभी दस्तावेजों की प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से पूरी होगी। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। सरकार का उद्देश्य रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और सुविधाजनक बनाना है। सर्विस प्रोवाइडर करेंगे पूरी ऑनलाइन प्रक्रिया नई व्यवस्था में लाइसेंसधारी दस्तावेज नवीस (कातिब), प्रशिक्षु दस्तावेज नवीस, स्टांप वेंडर और रजिस्ट्री कार्य से जुड़े अधिवक्ताओं को सर्विस प्रोवाइडर के रूप में कार्य करने की अनुमति दी गई है। बिहार स्टांप नियमावली-2026 के तहत इन्हें निर्धारित शैक्षणिक और अन्य योग्यताओं में विशेष छूट भी दी गई है, ताकि अनुभवी लोगों को नई डिजिटल प्रणाली से जोड़ा जा सके। सर्विस प्रोवाइडर आईआरएस पोर्टल पर जमीन खरीदने और बेचने वाले पक्षों का पूरा विवरण ऑनलाइन दर्ज करेंगे। इसके साथ ही ई-फाइलिंग, ई-साइन, बायोमेट्रिक सत्यापन, संपत्ति का सरकारी मूल्यांकन, स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क का निर्धारण भी ऑनलाइन किया जाएगा। रजिस्ट्री के लिए स्लॉट बुकिंग और ई-स्टांप कोड जारी करने की जिम्मेदारी भी इन्हीं की होगी। समय की बचत और बढ़ेगी पारदर्शिता सरकार का मानना है कि पेपरलेस व्यवस्था लागू होने से लोगों को कागजी कार्यवाही से राहत मिलेगी और रजिस्ट्री की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और पारदर्शी होगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पूरी प्रक्रिया पूरी होने से कार्यालयों में भीड़ कम होगी और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा। बांका के जिला अवर निबंधक हेमंत कुमार के अनुसार, 15 जुलाई से नई व्यवस्था लागू करने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि जिले में हर वर्ष हजारों दस्तावेजों का निबंधन होता है और डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद लोगों को अधिक सरल, सुरक्षित और सुविधाजनक सेवाएं मिलेंगी। सरकार को उम्मीद है कि यह पहल निबंधन सेवाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
बगहा, एजेंसियां। बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बगहा में करीब 15 घंटे तक बिजली आपूर्ति ठप रहने से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लंबे समय तक बिजली नहीं आने से नाराज ग्रामीण सड़क पर उतर आए और बिजली विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। बारिश से बाधित हुई बिजली आपूर्ति बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार, लगातार हुई बारिश के कारण कई जगह तकनीकी खराबी आ गई थी, जिससे आपूर्ति बाधित हुई। विभाग की टीमें रातभर मरम्मत कार्य में जुटी रहीं, लेकिन फॉल्ट अधिक होने के कारण बिजली बहाल करने में काफी समय लग गया। लोगों को झेलनी पड़ी भारी परेशानी बिजली कटौती के कारण लोगों को पेयजल, मोबाइल चार्जिंग और अन्य दैनिक जरूरतों के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उमस भरी गर्मी में घंटों बिजली नहीं रहने से बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों की परेशानी और बढ़ गई। स्थानीय लोगों ने बिजली व्यवस्था में स्थायी सुधार की मांग करते हुए कहा कि मानसून के दौरान ऐसी समस्या बार-बार उत्पन्न होती है।
Healthy Breakfast Ideas: स्वाद और सेहत का बेहतरीन कॉम्बिनेशन, मिनटों में तैयार करें साबूदाने की आसान रेसिपी अगर आप रोज-रोज एक जैसा नाश्ता खाकर बोर हो चुके हैं और कुछ हल्का, स्वादिष्ट व पौष्टिक ट्राई करना चाहते हैं, तो साबूदाना आपके ब्रेकफास्ट के लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है। कार्बोहाइड्रेट से भरपूर साबूदाना शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है और जब इसे दही, सब्जियों और मूंगफली जैसी पौष्टिक चीजों के साथ बनाया जाता है, तो यह एक संतुलित और हेल्दी नाश्ता बन जाता है। यहां जानिए साबूदाने से बनने वाली 3 आसान और स्वादिष्ट रेसिपी। 1. साबूदाना उपमा आवश्यक सामग्री 1 कप भीगा हुआ साबूदाना 1 उबला आलू (कटा हुआ) 2 बड़े चम्मच भुनी मूंगफली (दरदरी पिसी) 1–2 बारीक कटी हरी मिर्च 1 छोटा चम्मच जीरा 8–10 करी पत्ते 1 बड़ा चम्मच घी या तेल स्वादानुसार नमक नींबू का रस हरा धनिया झटपट विधि: घी में जीरा और करी पत्ता तड़काएं। आलू और हरी मिर्च भूनें। साबूदाना और मूंगफली मिलाकर 4–5 मिनट पकाएं। अंत में नींबू और हरा धनिया डालकर परोसें। कुकिंग टिप: साबूदाने को उतने ही पानी में भिगोएं जितने में वह बस डूब जाए, इससे वह चिपचिपा नहीं होगा। 2. साबूदाना वेज चीला आवश्यक सामग्री 1 कप भीगा हुआ साबूदाना ½ कप दही 1 कद्दूकस की हुई गाजर 2 बड़े चम्मच बारीक कटा पालक 1 हरी मिर्च 1 छोटा चम्मच जीरा स्वादानुसार नमक थोड़ा तेल झटपट विधि: साबूदाना और दही को हल्का पीस लें। इसमें सभी सामग्री मिलाकर बैटर तैयार करें और तवे पर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंक लें। कुकिंग टिप: बैटर की कंसिस्टेंसी मध्यम रखें ताकि चीला आसानी से पलटे और कुरकुरा बने। 3. साबूदाना दही बाउल आवश्यक सामग्री 1 कप भीगा या उबला साबूदाना 1 कप ताजा दही 2 बड़े चम्मच अनार के दाने 1 बारीक कटा खीरा ½ छोटा चम्मच भुना जीरा पाउडर काली मिर्च पाउडर स्वादानुसार नमक हरा धनिया झटपट विधि: दही को अच्छी तरह फेंटें। उसमें साबूदाना, खीरा और अनार मिलाएं। ऊपर से मसाले और हरा धनिया डालकर तुरंत सर्व करें। कुकिंग टिप: दही हमेशा गाढ़ा और ठंडा इस्तेमाल करें तथा नमक परोसने से ठीक पहले डालें। क्यों फायदेमंद हैं ये रेसिपी? शरीर को तुरंत ऊर्जा देती हैं। लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है। मूंगफली, दही और सब्जियों से प्रोटीन व फाइबर मिलता है। हल्की होने के कारण पाचन में भी मददगार हैं। व्यस्त सुबह के लिए जल्दी बनने वाला हेल्दी ब्रेकफास्ट विकल्प।
पटना, एजेंसियां। नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब बिहार में भी दिखाई देने लगा है। सीमावर्ती क्षेत्रों से होकर बहने वाली गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा गहराने लगा है। हालांकि फिलहाल नदी खतरे के निशान से नीचे बह रही है, लेकिन जल प्रवाह में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार, नेपाल में बारिश के कारण वाल्मीकीनगर बराज पर पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसी के मद्देनजर शुक्रवार को चरणबद्ध तरीके से पानी का डिस्चार्ज बढ़ाया गया। सुबह लगभग 79,900 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिसके बाद सुबह 10 बजे यह बढ़कर करीब 86,000 क्यूसेक और दोपहर 12 बजे तक 90,600 क्यूसेक पहुंच गया। बढ़ते डिस्चार्ज का सीधा असर गंडक नदी के जलस्तर पर देखा जा रहा है। प्रशासन ने नदी के किनारे बसे गांवों और तटीय क्षेत्रों में निगरानी तेज कर दी है। स्थानीय अधिकारियों और इंजीनियरों को चौबीसों घंटे स्थिति पर नजर रखने तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में बाढ़ सुरक्षा तटबंधों और जल प्रवाह की लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल बाढ़ जैसी स्थिति नहीं बनी है और हालात नियंत्रण में हैं। हालांकि यदि नेपाल में बारिश का सिलसिला जारी रहा और वाल्मीकीनगर बराज से पानी छोड़ने की मात्रा और बढ़ी, तो गंडक नदी का जलस्तर तेजी से खतरे के निशान के करीब पहुंच सकता है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। साथ ही स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने तथा किसी भी आपात स्थिति में तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना देने को कहा गया है। सरकार का कहना है कि संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पहले से कर ली गई हैं।
पटना, एजेंसियां। बिहार के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने खेती और सिंचाई को आसान बनाने के लिए कृषि फीडर से रोजाना सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक 12 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को इस व्यवस्था को लागू करने के लिए कहा है। किसानों को दिन में मिलेगी बिजली, सिंचाई में होगी आसानी अब किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए रात में बिजली का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सरकार के इस फैसले से खासकर धान रोपाई और खरीफ सीजन में किसानों को बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है। कृषि फीडर के माध्यम से दिन के समय बिजली मिलने से खेती की लागत और परेशानियां कम होंगी। सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को दिए निर्देश मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राज्य के सभी जिलों में किसानों को तय समय के अनुसार बिजली उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने बिजली आपूर्ति में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने को कहा है। सस्ती दर पर मिल रही है कृषि बिजली बिहार में कृषि कार्य के लिए किसानों को सब्सिडी वाली बिजली उपलब्ध कराई जाती है। सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को कम लागत में पर्याप्त बिजली मिले, जिससे सिंचाई व्यवस्था बेहतर हो और कृषि उत्पादन बढ़े। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने पर भी जोर बैठक में सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और पीएम-कुसुम योजना को तेजी से लागू करने पर भी चर्चा की। सरकार का लक्ष्य किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई सुविधाओं से जोड़ना है, जिससे भविष्य में बिजली पर निर्भरता कम हो सके। किसानों को मिलेगी बड़ी सुविधा कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर बिजली उपलब्ध होने से किसान बेहतर तरीके से सिंचाई कर पाएंगे और फसलों की गुणवत्ता में सुधार आ सकता है। सरकार के इस फैसले को खरीफ सीजन से पहले किसानों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पटना, एजेंसियां। बिहार में मानसून के सक्रिय होने और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के बीच गंगा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इसे देखते हुए पटना जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग ने तटवर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। संवेदनशील घाटों और निचले क्षेत्रों पर विशेष नजर रखी जा रही है, जबकि बाढ़ से निपटने के लिए संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ नियंत्रण विभाग ने बढ़ाई निगरानी जल संसाधन विभाग के केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष की ओर से गंगा समेत प्रमुख नदियों के जलस्तर की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। अधिकारियों को तटबंधों की नियमित निगरानी, संभावित कटाव वाले स्थानों का निरीक्षण और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। निचले इलाकों पर प्रशासन की विशेष नजर पटना के नदी किनारे बसे इलाकों और घाटों पर प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। स्थानीय अधिकारियों को लोगों को समय-समय पर स्थिति से अवगत कराने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। राहत एवं बचाव दलों को भी अलर्ट मोड में रखा गया है। नेपाल की बारिश का बिहार पर असर नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण गंगा की सहायक नदियों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रही तो बिहार की कई नदियों में जलस्तर और बढ़ सकता है, इसलिए प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। लोगों से सतर्क रहने की अपील प्रशासन ने गंगा किनारे रहने वाले लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने की अपील की है। साथ ही नदी में अनावश्यक रूप से प्रवेश न करने तथा जलस्तर बढ़ने की स्थिति में प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
दरभंगा, एजेंसियां। बिहार के दरभंगा जिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अवैध मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में देशी हथियार, अर्धनिर्मित हथियार, कारतूस और हथियार बनाने के उपकरण बरामद किए गए। इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है और पुलिस अब इस अवैध हथियार नेटवर्क के राजनीतिक एवं आपराधिक संबंधों की जांच में जुट गई है। गुप्त सूचना पर हुई कार्रवाई पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि जिले के एक इलाके में अवैध रूप से हथियार बनाने का काम चल रहा है। इसके बाद विशेष टीम ने छापेमारी कर मौके से मिनी गन फैक्ट्री का खुलासा किया। कार्रवाई के दौरान हथियार निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनें, लोहे के पुर्जे, बैरल, कारतूस और अन्य सामान जब्त किए गए। कई हथियार और उपकरण बरामद छापेमारी में पुलिस ने कई तैयार और अर्धनिर्मित पिस्टल, देसी कट्टे, कारतूस तथा हथियार बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरण बरामद किए। बरामद सामग्री को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। राजनीतिक और आपराधिक नेटवर्क की जांच पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन हथियारों की आपूर्ति किन आपराधिक गिरोहों तक की जाती थी और क्या इस नेटवर्क के तार किसी राजनीतिक संरक्षण या संगठित अपराध से जुड़े हैं। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की वित्तीय और आपराधिक कड़ियों की भी जांच कर रही है। अन्य जिलों तक फैले नेटवर्क की आशंका प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह गिरोह केवल दरभंगा तक सीमित नहीं था, बल्कि बिहार के अन्य जिलों में भी हथियारों की आपूर्ति करता था। इसी को देखते हुए पुलिस ने आसपास के जिलों में भी निगरानी बढ़ा दी है। जांच जारी, और गिरफ्तारियां संभव पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और पूछताछ के आधार पर जल्द ही कुछ अन्य संदिग्धों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। बरामद हथियारों और आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच कर पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है।
पटना, एजेंसियां। बिहार के पटना-गया रेलखंड पर चोरों ने रेलवे की 25 हजार वोल्ट क्षमता वाली ओवरहेड इलेक्ट्रिक (OHE) तार चोरी कर ली, जिससे इस व्यस्त रेल मार्ग पर करीब तीन घंटे तक ट्रेनों का परिचालन प्रभावित रहा। घटना के बाद रेलवे प्रशासन और आरपीएफ में हड़कंप मच गया और मामले की जांच तेज कर दी गई। क्या है पूरा मामला? रेलवे अधिकारियों के अनुसार, चोरों ने देर रात रेलखंड के एक हिस्से से OHE वायर काटकर चोरी कर ली। सुबह ट्रैक निरीक्षण के दौरान तार गायब होने का पता चला। इसके बाद सुरक्षा कारणों से इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। तीन घंटे तक प्रभावित रहा परिचालन तार चोरी होने के कारण कई यात्री और एक्सप्रेस ट्रेनें निर्धारित समय से देरी से चलीं, जबकि कुछ ट्रेनों को रास्ते में रोकना पड़ा। रेलवे की तकनीकी टीम ने मौके पर पहुंचकर नई OHE तार लगाई, जिसके बाद करीब तीन घंटे में रेल परिचालन सामान्य किया गया। रेलवे और आरपीएफ ने शुरू की जांच घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे अधिकारियों, आरपीएफ और जीआरपी की टीम मौके पर पहुंची। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और चोरी में शामिल लोगों की पहचान के लिए विशेष जांच शुरू कर दी गई है। रेलवे ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई इस घटना के बाद रेलवे ने पटना-गया रेलखंड पर गश्त बढ़ाने और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि रेलवे संपत्ति की चोरी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यात्रियों को हुई परेशानी सुबह के समय रेल परिचालन प्रभावित होने से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, तकनीकी मरम्मत पूरी होने के बाद सभी ट्रेनों का संचालन धीरे-धीरे सामान्य कर दिया गया है।
पटना, एजेंसियां। बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव इस बार राजनीतिक रूप से बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। सब पार्टियों के साथ प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज भी इस चुनाव में नई रणनीति के साथ मैदान में उतरी है। बता दे पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद इस बार भाजपा के लंबे समय से मजबूत गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर में प्रशांत किशोर अपनी किस्मत आजमाने जा रहे है और इसकी तैयारियां घर-घर पदयात्रा से शुरू कर चुके है। उनका दावा है कि यह सिर्फ एक उपचुनाव नहीं, बल्कि बिहार में नई राजनीतिक संस्कृति की शुरुआत का प्रयास है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर की चुनावी तस्वीर बदलना किसी भी दल के लिए आसान नहीं होगा। पदयात्रा के जरिए जनता तक पहुंचने की रणनीति बता दे चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने वार्ड 29 और 35 में पदयात्रा कर लोगों से सीधे संपर्क साधा। उन्होंने गली-गली और घर-घर जाकर मतदाताओं से मुलाकात की, हाथ जोड़कर अभिवादन किया और स्थानीय समस्याओं को सुना। उनके समर्थकों ने पूरे मार्ग में जन सुराज के पक्ष में नारे लगाए, जबकि प्रशांत किशोर ने अपेक्षाकृत शांत और संवाद आधारित प्रचार शैली अपनाई। उन्होंने बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं से भी मुलाकात कर व्यक्तिगत संपर्क बनाने का प्रयास किया। भाजपा का मजबूत वोट बैंक बड़ी चुनौती प्रशांत किशोर का प्रचार अभियान उन इलाकों पर केंद्रित है जहां भाजपा और राजद दोनों के समर्थकों की अच्छी संख्या मानी जाती है। करबिगहिया, चिरैयाटांड़, खासमहल और चांदमारी रोड जैसे क्षेत्रों में भाजपा का पारंपरिक वोट बैंक मजबूत माना जाता है। स्थानीय स्तर पर जलजमाव और बुनियादी सुविधाओं जैसी समस्याएं लगातार उठती रही हैं, लेकिन चुनावी मुकाबले में भाजपा का संगठन और उसका स्थायी समर्थन आधार उसे बढ़त दिलाता रहा है। तीन दशक से भाजपा का दबदबा बांकीपुर विधानसभा का राजनीतिक इतिहास भी काफी रोचक रहा है। यहां तीन दशकों से भाजपा का दबदबा है। पहले यह क्षेत्र पटना पश्चिम विधानसभा के नाम से जाना जाता था। यहां कायस्थ और वैश्य समुदाय के मतदाता चुनावी परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। वर्ष 1967 में इसी क्षेत्र के मतदाताओं ने तत्कालीन मुख्यमंत्री के.बी. सहाय को हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था। हालांकि, 1989 के बाद से कायस्थ मतदाताओं का बड़ा वर्ग भाजपा के साथ जुड़ गया और तब से यह सीट भाजपा का मजबूत गढ़ बनी हुई है। क्या बदल पाएंगे चुनावी समीकरण? राजनीतिक जानकारों का कहना है कि प्रशांत किशोर के सामने सबसे बड़ी चुनौती भाजपा के पारंपरिक वोटरों का भरोसा जीतना है। सोशल मीडिया और जनसभाओं में उनकी लोकप्रियता को अब मतदान में बदलना होगा। कई मतदाताओं के लिए सामाजिक स्थिरता, सुरक्षा और मजबूत संगठन आज भी प्रमुख मुद्दे हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रशांत किशोर विपक्ष के साझा उम्मीदवार होते तो मुकाबला अधिक रोचक हो सकता था। फिलहाल जन सुराज बदलाव का संदेश लेकर मैदान में है, जबकि भाजपा अपने तीन दशक पुराने संगठनात्मक नेटवर्क और मजबूत जनाधार के भरोसे इस सीट को बचाने की तैयारी में जुटी है। ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव बिहार की राजनीति की दिशा तय करने वाले अहम मुकाबलों में से एक माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।