नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को लेकर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि छात्रों से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए शुरू किया गया यह अभियान युवाओं और आम जनता के बीच उतना प्रभाव पैदा नहीं कर सका, जितनी उम्मीद की जा रही थी। छात्र मुद्दों पर कांग्रेस को आत्ममंथन की जरूरत थरूर के मुताबिक, कांग्रेस को यह विचार करना चाहिए कि राहुल गांधी के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान की पहुंच जनता के बीच अपेक्षित स्तर तक क्यों नहीं बन पाई। उन्होंने छात्र मुद्दों पर हुए अन्य विरोध प्रदर्शनों के मुकाबले इसके प्रभाव को कम बताया। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब परीक्षा में कथित गड़बड़ी, पेपर लीक, बेरोजगारी और युवाओं से जुड़े मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बने हुए हैं। कांग्रेस के भीतर बयान पर सियासी चर्चा थरूर की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस के भीतर और बाहर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, बाद में थरूर ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी को कांग्रेस या राहुल गांधी पर हमला नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी बात का उद्देश्य पार्टी पर निशाना साधना नहीं था। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि विपक्षी दलों को जनता तक अपने मुद्दे प्रभावी तरीके से पहुंचाने के तरीकों पर विचार करना चाहिए। राहुल गांधी का ‘दर्द, डेटा और दौलत’ संदेश इसी बीच राहुल गांधी ने प्रयागराज के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं के मुद्दों पर ‘दर्द, डेटा और दौलत’ का संदेश दिया। उन्होंने बेरोजगारी, महंगी शिक्षा, परीक्षा पेपर लीक, ऋण तक सीमित पहुंच और AI के कारण रोजगार पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव जैसे मुद्दे उठाए। थरूर का बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे कांग्रेस के भीतर युवा मुद्दों और उनके राजनीतिक संप्रेषण को लेकर बहस तेज हो सकती है।
पंजाब में फार्मेसी ऑफिसर परीक्षा पर घमासान, पेपर लीक नहीं बल्कि हाईटेक नकल का मामला चंडीगढ़, एजेंसियां। पंजाब में फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। 19 जुलाई 2026 को आयोजित भर्ती परीक्षा के दौरान पुलिस ने हाईटेक नकल के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया था। इसके बाद विपक्ष ने सरकार पर परीक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, सरकार और पुलिस के मुताबिक प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले लीक नहीं हुआ था। परीक्षा के दौरान पकड़ा गया नकल का रैकेट पुलिस ने परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए नकल कराने की कोशिश का खुलासा किया। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों के पास छोटे कैमरे और वायरलेस उपकरण पाए गए थे। पुलिस कार्रवाई में कई अभ्यर्थियों और कथित गिरोह से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया गया। मामले में इस्तेमाल किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए गए हैं। विपक्ष ने सरकार को घेरा घटना सामने आने के बाद पंजाब में राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए मामले में जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई की मांग की। विपक्ष ने भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए परीक्षा में गड़बड़ी के मुद्दे को उठाया है। CM भगवंत मान बोले- पेपर लीक नहीं हुआ मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पंजाब में पिछले कई वर्षों में कोई भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ है। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने भी इसे पेपर लीक के बजाय परीक्षा के दौरान पकड़ा गया नकल का मामला बताया है। इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल विवाद परीक्षा में पकड़े गए हाईटेक नकल रैकेट और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर है।
पेपर लीक और संगठित परीक्षा घोटालों पर होगी कड़ी कार्रवाई, संसद के दोनों सदनों से विधेयक को मिली मंजूरी नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद ने Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 को पारित कर दिया है। राज्यसभा से मंजूरी मिलने के बाद यह विधेयक संसद के दोनों सदनों से पास हो गया। इस संशोधन का उद्देश्य सरकारी भर्ती और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, संगठित नकल और परीक्षा माफिया पर सख्त कार्रवाई करना है। कड़े दंड का प्रावधान संशोधित कानून के तहत पेपर लीक, प्रश्नपत्र चोरी, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से नकल और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी जैसे अपराधों पर पहले से अधिक कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी तथा लाखों अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा होगी। सदन में तीखी बहस राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विपक्ष ने हाल के वर्षों में हुए विभिन्न पेपर लीक मामलों को लेकर सरकार से जवाब मांगा, जबकि सरकार ने कहा कि नया कानून परीक्षा माफिया के खिलाफ प्रभावी हथियार साबित होगा। बहस के दौरान विपक्ष के कुछ सदस्यों ने वॉकआउट भी किया। सरकार का 'जीरो टॉलरेंस' संदेश विधेयक पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी करने वालों के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि नया कानून युवाओं के भविष्य की रक्षा करेगा और ईमानदार अभ्यर्थियों को निष्पक्ष अवसर सुनिश्चित करेगा।
20 हजार पन्नों से ज्यादा की चार्जशीट, परीक्षा में गड़बड़ी के नेटवर्क का किया खुलासा नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। मामले की जांच के बाद सीबीआई ने आरोपियों पर पेपर लीक, साजिश और परीक्षा में अनियमितता से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं। अदालत ने सीबीआई की चार्जशीट को रिकॉर्ड पर ले लिया है और अब मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। कई स्तरों पर जुड़े लोगों पर आरोप सीबीआई की जांच में पेपर लीक मामले में कथित तौर पर पेपर उपलब्ध कराने वाले लोगों, बिचौलियों और अन्य सहयोगियों की भूमिका सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, आरोपियों में कुछ विषय विशेषज्ञ भी शामिल हैं, जिन पर प्रश्नपत्र तक पहुंच और उसे साझा करने में भूमिका का आरोप लगाया गया है। चार्जशीट में हजारों दस्तावेज शामिल सीबीआई ने अदालत में बड़ी मात्रा में दस्तावेज, गवाहों के बयान और जांच से जुड़े रिकॉर्ड पेश किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, चार्जशीट लगभग 20,000 पन्नों से अधिक की है, जिसके सभी दस्तावेज अदालत में जमा करने के लिए जांच एजेंसी को अतिरिक्त समय भी दिया गया। परीक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल NEET पेपर लीक मामले ने देशभर में परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर बड़े सवाल खड़े किए थे। सरकार और जांच एजेंसियां लगातार यह दावा कर रही हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। अब अदालत में चलेगी आगे की कार्रवाई CBI की चार्जशीट दाखिल होने के बाद आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अदालत में सबूतों की जांच और आरोप तय करने की प्रक्रिया के बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी।
विधेयक के प्रावधानों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा में एंटी पेपर लीक विधेयक पर जोरदार बहस देखने को मिली। सरकार ने इसे देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया। वहीं, विपक्ष ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की भी जरूरत है। सरकार ने बताया सख्त कानून की जरूरत बहस के दौरान सरकार ने कहा कि हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित किया है। ऐसे मामलों पर रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए यह विधेयक लाया गया है। सरकार का दावा है कि नए कानून से परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता मजबूत होगी। विपक्ष ने उठाए कई सवाल विपक्षी दलों ने विधेयक का समर्थन करते हुए भी इसके कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई। विपक्ष का कहना था कि पेपर लीक रोकने के लिए केवल सख्त सजा पर्याप्त नहीं है, बल्कि परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय करने, तकनीकी सुरक्षा बढ़ाने और भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की भी आवश्यकता है। छात्रों की उम्मीदें बढ़ीं पेपर लीक की घटनाओं से प्रभावित लाखों अभ्यर्थियों की नजर अब इस विधेयक पर टिकी है। यदि यह कानून पूरी तरह लागू होता है, तो प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का रास्ता और मजबूत होगा। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य ईमानदार अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करना और परीक्षा प्रणाली में जनता का भरोसा कायम रखना है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अब वरिष्ठ भाजपा नेता प्रह्लाद जोशी को सौंप दी है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने की मंजूरी दी। प्रह्लाद जोशी संभालेंगे शिक्षा मंत्रालय का कामकाज प्रह्लाद जोशी पहले से ही केंद्र सरकार में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब उनके पास शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। शिक्षा मंत्रालय ऐसे समय में प्रह्लाद जोशी को सौंपा गया है, जब परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, छात्रों की मांगों और शिक्षा सुधार जैसे मुद्दे राष्ट्रीय चर्चा में हैं। नए शिक्षा मंत्री के सामने छात्रों का भरोसा बहाल करना और परीक्षा प्रणाली में सुधार बड़ी चुनौती होगी। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुआ बदलाव धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद सरकार ने तेजी से मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंपने का फैसला किया। कौन हैं प्रह्लाद जोशी? प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ से लोकसभा सांसद हैं और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वह इससे पहले संसदीय कार्य, कोयला और खनन जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। संगठन और प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें केंद्र सरकार में एक अनुभवी नेता माना जाता है। शिक्षा क्षेत्र में होंगी बड़ी चुनौतियां प्रह्लाद जोशी के सामने नई शिक्षा नीति को आगे बढ़ाना, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना, विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता सुधारना और छात्रों से जुड़े मुद्दों का समाधान करना प्रमुख जिम्मेदारियां होंगी। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि नए शिक्षा मंत्री किन प्राथमिकताओं के साथ मंत्रालय का संचालन करते हैं।
मुंबई/पटना, एजेंसियां। महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित मुख्य आरोपी बिजेंद्र कुमार गुप्ता को बिहार से गिरफ्तार कर लिया है। भिवंडी पुलिस की टीम ने यह कार्रवाई की है। आरोपी पर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक करने और उसे बेचने के नेटवर्क में शामिल होने का आरोप है। बिहार में छिपा था आरोपी, कई दिनों से पुलिस कर रही थी तलाश जांच एजेंसियों के अनुसार, महाराष्ट्र TET पेपर लीक मामले में बिजेंद्र गुप्ता को मुख्य आरोपी बताया जा रहा था। पुलिस उसकी तलाश में कई जगहों पर छापेमारी कर रही थी। आखिरकार उसे बिहार से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को आगे की पूछताछ के लिए महाराष्ट्र लाया जा रहा है। 28 जून को सामने आया था पेपर लीक मामला महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से पहले पेपर लीक होने की जानकारी सामने आई थी। जांच में पुलिस को प्रश्नपत्र से जुड़ी गड़बड़ी के सबूत मिले थे, जिसके बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। इस मामले की जांच के लिए पुलिस ने विशेष टीम बनाई थी और अब तक कई लोगों पर कार्रवाई की जा चुकी है। कई राज्यों तक फैला था पेपर लीक का नेटवर्क जांच में इस मामले का कनेक्शन बिहार और अन्य राज्यों से जुड़ता नजर आया। पुलिस ने इससे पहले भी कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि पेपर लीक कैसे हुआ, किन लोगों तक पहुंचा और इसमें कितने लोग शामिल थे। शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा सुरक्षा पर फिर उठे सवाल TET जैसी शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों की मांग है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए। आगे की जांच में हो सकते हैं बड़े खुलासे पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पेपर लीक मामले से जुड़े अन्य लोगों और पूरे गिरोह के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्र संगठनों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ सख्ती बरती जा रही है और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं और छात्रों को अपनी मांग रखने का पूरा अधिकार है। सोशल मीडिया पर सरकार को घेरा राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा कि छात्रों पर बल प्रयोग और हिरासत जैसी घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की। पेपर लीक और परीक्षा सुधार का उठाया मुद्दा कांग्रेस नेता ने कहा कि छात्र लंबे समय से पेपर लीक, परीक्षा में अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार, इन मुद्दों का समाधान करने के बजाय प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों पर सरकार को संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए। सरकार का पक्ष भी आया सामने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। प्रशासन के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है तथा कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की गई है। राजनीतिक बहस हुई तेज राहुल गांधी के बयान के बाद छात्र आंदोलन और परीक्षा सुधार का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। विपक्ष सरकार पर छात्रों की आवाज अनसुनी करने का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, फर्जीवाड़े और संगठित परीक्षा घोटालों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए दिल्ली पुलिस ने विशेष टास्क फोर्स (Special Task Force-STF) का गठन किया है। इस विशेष इकाई का उद्देश्य परीक्षा से जुड़े अपराधों की तेजी से जांच करना, संगठित गिरोहों पर कार्रवाई करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है। पेपर लीक और साइबर अपराधों की करेगी जांच नई एसटीएफ पेपर लीक, प्रश्नपत्रों की अवैध खरीद-बिक्री, डिजिटल माध्यमों से नकल, फर्जी अभ्यर्थियों की नियुक्ति और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अन्य अपराधों की जांच करेगी। इसके अलावा साइबर माध्यम से संचालित परीक्षा रैकेट पर भी विशेष नजर रखी जाएगी। साइबर और तकनीकी विशेषज्ञ भी होंगे शामिल दिल्ली पुलिस के अनुसार, एसटीएफ में अनुभवी पुलिस अधिकारियों के साथ साइबर एक्सपर्ट, डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञ और तकनीकी जांच अधिकारी भी शामिल किए गए हैं। यह टीम इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और डिजिटल साक्ष्यों की मदद से अपराधियों तक तेजी से पहुंचने का काम करेगी। अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर करेगी कार्रवाई एसटीएफ आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA), केंद्रीय जांच एजेंसियों और राज्य पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर संयुक्त कार्रवाई करेगी। अंतरराज्यीय गिरोहों की पहचान कर उनके खिलाफ अभियान चलाया जाएगा ताकि पूरे नेटवर्क को खत्म किया जा सके। परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने पर जोर दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। एसटीएफ के गठन से पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले संगठित नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और लाखों अभ्यर्थियों का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास और मजबूत होगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच आज तीसरे दौर की वार्ता होगी। इससे पहले हुई दो बैठकों में कई मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई है, लेकिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अब भी दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी है। इन मांगों पर बनी सिद्धांततः सहमति सरकार ने छात्र प्रतिनिधियों की कुछ मांगों पर सिद्धांततः सहमति (In-Principle Approval) जताई है। इनमें प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों (FIR) की समीक्षा और उन्हें वापस लेने पर विचार, प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने पर चर्चा तथा परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों पर संवाद जारी रखने का आश्वासन शामिल है। सरकार ने इन मुद्दों पर आगे की प्रक्रिया जारी रखने की बात कही है। इस मांग पर अब भी नहीं बनी सहमति वार्ता में सबसे बड़ा गतिरोध केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बना हुआ है। छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि पेपर लीक मामलों की नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए शिक्षा मंत्री को पद छोड़ना चाहिए, जबकि सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया है और इस पर निर्णय के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। यही मुद्दा बातचीत में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। परीक्षा सुधारों पर रहेगा फोकस आज की बैठक में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा मजबूत करने, डिजिटल निगरानी बढ़ाने और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कानूनी एवं प्रशासनिक सुधारों पर भी चर्चा होने की संभावना है। बैठक के नतीजों पर छात्रों की नजर देशभर के लाखों छात्र और अभ्यर्थी इस बैठक के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच शेष मुद्दों पर भी सहमति बनती है, तो परीक्षा सुधारों और नई नीतियों को लागू करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी धांधली पर सख्ती बढ़ाते हुए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ऐसे मामलों में कड़ी सजा और त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नए विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखना तथा अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत करना है। पेपर लीक मामलों की होगी फास्ट-ट्रैक सुनवाई प्रस्तावित विधेयक के तहत पेपर लीक और संगठित परीक्षा घोटालों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की व्यवस्था की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि ऐसे मामलों का निपटारा तीन महीने के भीतर किया जाए, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके। 10 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान विधेयक के मसौदे में संगठित तरीके से पेपर लीक कराने, परीक्षा में धांधली करने या इसमें शामिल गिरोहों के लिए अधिकतम 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यह सजा व्यक्तियों के साथ-साथ संगठित नेटवर्क और संस्थानों पर भी लागू हो सकेगी, यदि उनकी संलिप्तता साबित होती है। परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था के तहत परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और डिजिटल निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। इसके साथ ही परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही बढ़ाने तथा आधुनिक तकनीक के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। युवाओं का भरोसा मजबूत करना सरकार का लक्ष्य केंद्र सरकार का मानना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ी है। नए विधेयक के संसद से पारित होने के बाद भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा अभ्यर्थियों का विश्वास बहाल करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पटना, एजेंसियां। बिहार में छात्र आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक मामलों पर कार्रवाई और छात्रों की मांगों को लेकर चल रहा विरोध अब राज्य के कई जिलों तक फैल गया है। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी किया है। 18 जिलों में पहुंचा आंदोलन, पुलिस की छुट्टियां रद्द छात्र आंदोलन के विस्तार को देखते हुए बिहार पुलिस को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 18 जिलों में प्रदर्शन की गतिविधियां सामने आई हैं। पुलिस बल को 24 घंटे अलर्ट रहने और सोशल मीडिया पर नजर रखने को कहा गया है। पटना में प्रदर्शन के दौरान तनाव, पुलिस और छात्रों में टकराव राजधानी पटना में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की। दरभंगा में पथराव, पुलिस अधिकारियों को लगी चोट दरभंगा में छात्र प्रदर्शन के दौरान पथराव की घटना सामने आई। इस दौरान सिटी एसपी और एक पुलिसकर्मी के घायल होने की खबर है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। पटना में कई FIR दर्ज, छात्रों पर कार्रवाई शुरू प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामलों में पटना पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने कई थानों में FIR दर्ज की हैं और कुछ छात्र नेताओं समेत कई छात्रों को हिरासत में लिया गया है। सरकार और छात्रों के बीच बातचीत पर नजर छात्र संगठनों की मांग है कि परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए और पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। वहीं सरकार की ओर से भी व्यवस्था सुधारने और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। CJP (Cockroach Janta Party) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक के 26 दिन के अनशन खत्म करने के बाद नया संदेश जारी किया है। दीपके ने कहा कि वांगचुक का अनशन खत्म होना राहत की बात है, लेकिन छात्रों के मुद्दों और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा। "विद्यार्थियों का त्याग व्यर्थ नहीं जाने देंगे" अभिजीत दीपके ने कहा कि इस आंदोलन में छात्रों ने जो संघर्ष और त्याग किया है, उसे बेकार नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को आगे बढ़ाने की अपील की। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कायम CJP दीपके ने स्पष्ट किया कि सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने के बाद भी CJP का आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि संगठन अभी भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, पेपर लीक मामलों में जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग पर कायम है। सरकार के साथ बातचीत, लेकिन आंदोलन जारी रखने का ऐलान अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन जब तक छात्रों की मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा। CJP का कहना है कि केवल नए कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करनी होगी। CJP आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं अभिजीत दीपके अभिजीत दीपके CJP आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं। पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया और जमीनी प्रदर्शन के जरिए युवाओं को जोड़ने का अभियान चलाया है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। नीट समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। छात्र संगठन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कदम और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। दिल्ली समेत कई राज्यों में छात्रों ने प्रदर्शन कर सरकार से शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की मांग उठाई है। छात्रों की प्रमुख मांगें- पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और सख्त कानून प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से लाखों मेहनती अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। छात्र संगठनों ने मांग की है कि परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी और प्रशासनिक सुधार लागू करने की मांग भी की जा रही है। सरकार ने संवाद और सुधारों का दिया भरोसा छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने कहा है कि युवाओं के हितों और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कदम उठाने और नए कानून की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही है। सरकार ने फास्ट-ट्रैक अदालतों के जरिए ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई की बात भी कही है। केंद्र और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत पर नजर प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की कोशिश भी जारी है। दोनों पक्षों के बीच होने वाली वार्ता से उम्मीद है कि परीक्षा सुधार, छात्रों की शिकायतों और आंदोलन को लेकर कोई समाधान निकल सकता है। हालांकि छात्र संगठन अपनी मांगों पर कायम हैं और ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने देश में चल रहे छात्र आंदोलन और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कथित पेपर लीक मामले को गंभीर मुद्दा बताते हुए छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन की सराहना की। सलमान खान ने कहा कि छात्रों का आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर है और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। छात्रों के समर्थन में आए सलमान खान सलमान खान ने सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि युवाओं का भविष्य शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर निर्भर करता है। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल छात्रों और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि परीक्षा प्रणाली में किसी भी तरह की गड़बड़ी से छात्रों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। पेपर लीक को बताया बड़ी चिंता अभिनेता ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं मेहनत करने वाले छात्रों के साथ अन्याय करती हैं। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया को मजबूत बनाने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया। आंदोलन को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाने की अपील सलमान खान ने कहा कि छात्रों की मांगों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक विवाद से अलग रखा जाना चाहिए। उन्होंने अपील की कि आंदोलन का मुख्य उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों की रक्षा होना चाहिए। बॉलीवुड से आई पहली बड़ी प्रतिक्रिया छात्र आंदोलन और परीक्षा विवाद पर बॉलीवुड की ओर से सलमान खान की यह प्रतिक्रिया चर्चा में है। इससे पहले भी कई सामाजिक मुद्दों पर फिल्म जगत के कलाकार अपनी राय रखते रहे हैं। सलमान के बयान के बाद शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा सुधार और छात्रों की मांगों को लेकर बहस और तेज हो गई है। सरकार से सुधार की उम्मीद जताई सलमान खान ने उम्मीद जताई कि सरकार और संबंधित संस्थाएं छात्रों की चिंताओं पर ध्यान देंगी और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जरूरी कदम उठाएंगी। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य युवाओं से जुड़ा है, इसलिए उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से होना चाहिए।
नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके और युवाओं का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा मजबूत हो। सरकार ने स्पष्ट किया कि लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। युवाओं के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक केवल एक अपराध नहीं, बल्कि देश के युवाओं के सपनों पर सीधा हमला है। उन्होंने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों की जांच तय समय-सीमा में पूरी की जाए और अदालतों में मुकदमों का जल्द निपटारा सुनिश्चित किया जाए। केंद्र और राज्यों के बीच होगा बेहतर समन्वय सरकार ने बताया कि पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा। जांच एजेंसियों, परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं और राज्य पुलिस के बीच सूचना साझा करने की व्यवस्था को भी बेहतर बनाया जाएगा, ताकि संगठित गिरोहों पर तेजी से कार्रवाई हो सके। परीक्षा प्रणाली को बनाया जाएगा अधिक सुरक्षित सरकार परीक्षा प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रही है। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, डिजिटल निगरानी, डेटा सुरक्षा और परीक्षा केंद्रों पर कड़ी मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है। साथ ही, राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख परीक्षाओं के संचालन में पारदर्शिता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा। छात्र संगठनों ने फैसले का किया स्वागत प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद कई छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों ने इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यदि फास्ट-ट्रैक कोर्ट के माध्यम से मामलों का शीघ्र निपटारा होता है और दोषियों को समय पर सजा मिलती है, तो भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। सरकार ने दिया सख्त संदेश सरकार का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक में शामिल किसी भी व्यक्ति, संस्था या गिरोह के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि युवाओं के विश्वास और देश की परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनी रहे।
मेडिकल प्रवेश परीक्षा में धोखाधड़ी रोकने के लिए सरकार का सख्त कदम राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) 2026 से जुड़े कथित पेपर लीक और नकल रैकेट पर कार्रवाई करते हुए केंद्र सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram की सेवाओं पर अस्थायी रोक लगा दी है। सरकार के अनुसार यह प्रतिबंध 22 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा। शिक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि Telegram का इस्तेमाल संगठित गिरोहों द्वारा मेडिकल प्रवेश परीक्षा के उम्मीदवारों को धोखा देने और परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी फैलाने के लिए किया जा रहा था। इसी वजह से यह फैसला लिया गया है। आईटी कानून के तहत जारी हुआ आदेश सरकार ने Telegram पर यह प्रतिबंध सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कानून के एक विशेष प्रावधान के तहत लगाया है। यह प्रावधान देश की संप्रभुता, अखंडता और सार्वजनिक हित की रक्षा के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंच सीमित करने की अनुमति देता है। सरकारी बयान के मुताबिक यह कदम सीमित अवधि और विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखकर उठाया गया है। NEET 2026 पेपर लीक के बाद बढ़ी सख्ती पिछले महीने NEET 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया गया था, जब जांच एजेंसियों को प्रश्नपत्र लीक होने के संकेत मिले थे। इस घटना के बाद देशभर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। अब सरकार ने 21 जून 2026 को पुनर्परीक्षा आयोजित करने का फैसला किया है। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। NTA ने बताया क्यों उठाना पड़ा यह कदम शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली National Testing Agency (NTA) ने कहा कि Telegram का उपयोग कुछ संगठित नकल गिरोहों द्वारा NEET पुनर्परीक्षा के अभ्यर्थियों को गुमराह करने और धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था। एजेंसी के अनुसार, प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक सामग्री हटाने के लिए पहले भी प्रयास किए गए थे, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। इसके बाद अस्थायी प्रतिबंध को "अंतिम विकल्प" के रूप में लागू किया गया। लाखों उपयोगकर्ताओं पर पड़ेगा असर भारत Telegram का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है और यहां करोड़ों लोग इस ऐप का उपयोग करते हैं। शिक्षा, व्यवसाय, समाचार, ऑनलाइन समुदाय और व्यक्तिगत संचार के लिए Telegram व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। सरकार ने स्वीकार किया है कि इस कदम से बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं को असुविधा होगी, लेकिन परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह फैसला जरूरी बताया गया है। टेलीकॉम और टेक कंपनियों की प्रतिक्रिया का इंतजार फिलहाल प्रमुख दूरसंचार कंपनियों और टेक प्लेटफॉर्म्स की ओर से इस फैसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां जैसे Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea (Vi) इस आदेश को लागू करने की प्रक्रिया में हैं या नहीं, इस पर भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं Google Play Store और Apple App Store की ओर से भी फिलहाल कोई बयान जारी नहीं किया गया है। 21 जून की परीक्षा पर टिकी निगाहें अब छात्रों और अभिभावकों की नजर 21 जून को होने वाली NEET पुनर्परीक्षा पर है। सरकार का कहना है कि परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। Telegram पर लगाया गया यह अस्थायी प्रतिबंध हाल के वर्षों में किसी बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के खिलाफ उठाए गए सबसे सख्त कदमों में से एक माना जा रहा है।
NEET-UG paper leak controversy मामले के बाद मेडिकल प्रवेश परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की मांग तेज हो गई है। People's Health Organization India (PHO) ने कहा है कि NEET परीक्षा में अब इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE की तरह मजबूत सुरक्षा व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। संगठन का कहना है कि लगातार सामने आ रहे विवादों और पेपर लीक की घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली पर लोगों का भरोसा कमजोर कर दिया है। PHO ने मेडिकल परीक्षा प्रक्रिया में तत्काल ढांचागत सुधार की मांग की है। “स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ेगा असर” पीएचओ ने कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो इसका असर भविष्य में देश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है। हर साल करीब 22 लाख छात्र मेडिकल प्रवेश परीक्षा में शामिल होते हैं, जबकि देश के 824 मेडिकल कॉलेजों में लगभग 1.3 लाख सीटें ही उपलब्ध हैं। ऐसे में प्रतियोगिता बेहद कठिन हो चुकी है। मेडिकल शिक्षा के व्यवसायीकरण पर चिंता पीएचओ के संस्थापक Ishwar Gilada ने कहा कि देश में उपलब्ध मेडिकल सीटों में आधे से ज्यादा निजी संस्थानों में हैं, जहां फीस 1 करोड़ से 2 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि असली समस्या मेडिकल शिक्षा का तेजी से बढ़ता व्यवसायीकरण है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या अभी भी मांग के मुकाबले काफी कम है, जिसके कारण छात्रों और अभिभावकों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ता है। JEE जैसी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग संगठन ने सुझाव दिया कि NEET परीक्षा में भी JEE की तरह डिजिटल निगरानी, सुरक्षित प्रश्नपत्र वितरण, परीक्षा केंद्रों पर कड़ी जांच और तकनीकी सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सके। पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है।
National Testing Agency (NTA) ने NEET UG 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया है। एजेंसी ने कहा कि जांच एजेंसियों से मिले इनपुट और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद यह फैसला लिया गया। अब परीक्षा दोबारा कराई जाएगी, जिसकी नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी। इस बीच बिहार और राजस्थान से सामने आए खुलासों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। बिहार में एक बड़े सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें एक MBBS छात्र को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। बिहार में सक्रिय था सॉल्वर गैंग Bihar के Nalanda जिले में पुलिस ने NEET परीक्षा से पहले एक संगठित सॉल्वर गैंग का खुलासा किया। जांच में सामने आया कि यह गिरोह मेडिकल प्रवेश परीक्षा में पास कराने के नाम पर 50 से 60 लाख रुपये तक की डील करता था। पुलिस के मुताबिक गिरोह का मुख्य आरोपी विम्स मेडिकल कॉलेज का MBBS छात्र अवधेश कुमार है। अब तक इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। गाड़ी चेकिंग के दौरान खुला पूरा नेटवर्क 3 मई की रात पावापुरी थाना पुलिस वाहन जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान स्कॉर्पियो-एन और ब्रेजा जैसी दो लग्जरी गाड़ियों को रोका गया। तलाशी के दौरान पुलिस को कई संदिग्ध दस्तावेज, पहचान पत्र और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री मिली। इसके बाद तीन लोगों को हिरासत में लिया गया। मुख्य आरोपी अवधेश कुमार के मोबाइल फोन की जांच में कई अहम चैट, कॉन्टैक्ट और पैसों के लेन-देन से जुड़े सबूत मिले। इसके बाद पुलिस ने Muzaffarpur, Jamui और Aurangabad समेत कई जिलों में छापेमारी की। 50-60 लाख रुपये में तय होती थी डील पुलिस पूछताछ में सामने आया कि गिरोह असली उम्मीदवार की जगह सॉल्वर बैठाने की तैयारी करता था। इसके लिए पहले 1.5 से 2 लाख रुपये एडवांस लिए जाते थे, जबकि पूरी डील 50 से 60 लाख रुपये तक में तय होती थी। जांच एजेंसियों के मुताबिक उज्ज्वल राज उर्फ राजा बाबू, अवधेश कुमार और अमन कुमार सिंह इस नेटवर्क के प्रमुख सदस्य थे। डॉक्टर का बेटा समेत कई आरोपी गिरफ्तार गिरफ्तार आरोपियों में Sitamarhi के डॉक्टर नरेश कुमार दास का बेटा हर्षराज भी शामिल है। इसके अलावा मनोज कुमार, गौरव कुमार और सुभाष कुमार समेत कई अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि नेटवर्क से जुड़े कई लोग अब भी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है। राजस्थान से भी मिले पेपर लीक के संकेत Rajasthan में भी NEET पेपर लीक को लेकर बड़े संकेत मिले हैं। जांच एजेंसियों को कुछ छात्रों के पास हाथ से लिखे गए सवाल मिले, जो कथित तौर पर असली प्रश्नपत्र से मेल खाते थे। Rajasthan Special Operations Group (SOG) ने Dehradun, Sikar और Jhunjhunu में कार्रवाई करते हुए 13 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि परीक्षा से दो दिन पहले ही करीब 600 नंबर के सवाल छात्रों तक पहुंच गए थे। जांच एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि कथित क्वेश्चन बैंक केरल के एक मेडिकल छात्र के जरिए राजस्थान तक कैसे पहुंचा। NTA ने क्यों लिया परीक्षा रद्द करने का फैसला? NTA के अनुसार 8 मई से ही पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दी गई थी। जांच रिपोर्ट में परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठे, जिसके बाद परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। एजेंसी ने कहा कि लाखों छात्रों के हित और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए री-एग्जाम जरूरी था। छात्रों को दोबारा आवेदन नहीं करना होगा NTA ने साफ किया है कि छात्रों को फिर से रजिस्ट्रेशन करने की जरूरत नहीं होगी। पुराने परीक्षा केंद्रों को ही बरकरार रखा जाएगा और नए एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। साथ ही परीक्षा शुल्क वापस करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। एजेंसी जल्द ही नई परीक्षा तिथि और एडमिट कार्ड से जुड़ी जानकारी जारी करेगी।
NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर देशभर में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पेपर लीक के आरोपों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है। अब मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंप दी गई है और जांच पूरी होने के बाद दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा रद्द होने की घोषणा के बाद छात्रों का गुस्सा सड़कों पर देखने को मिला। दिल्ली से लेकर केरल तक छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दिल्ली में NSUI का प्रदर्शन, केरल में पुलिस से झड़प दिल्ली में National Students' Union of India (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने परीक्षा प्रणाली और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। वहीं Thiruvananthapuram में Students' Federation of India (SFI) ने कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड तोड़कर परिसर में घुस गए, जिसके बाद पुलिस और छात्रों के बीच झड़प की स्थिति बन गई। नासिक से पेपर लीक का आरोपी गिरफ्तार पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। महाराष्ट्र के Nashik से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी की पहचान शुभम खैरनार के रूप में हुई है। नासिक क्राइम ब्रांच ने राजस्थान पुलिस के अनुरोध पर यह कार्रवाई की। अधिकारियों के मुताबिक आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है। विपक्ष ने सरकार पर बोला हमला कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने कहा कि देश में लगातार पेपर लीक की घटनाएं हो रही हैं और इससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने कहा कि “NEET अब परीक्षा नहीं, बल्कि नीलामी बन चुकी है।” उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के सपनों के लिए मौजूदा व्यवस्था सबसे बड़ा खतरा बन गई है। वहीं Arvind Kejriwal ने दावा किया कि देश में पेपर लीक एक संगठित नेटवर्क के तहत हो रहा है। उन्होंने छात्रों से अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करने की अपील की। तेजस्वी यादव ने उठाए सवाल Tejashwi Yadav ने कहा कि NEET परीक्षा रद्द होने से करीब 23 लाख छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि लगातार हो रही पेपर लीक घटनाएं प्रशासनिक विफलता को दिखाती हैं। NTA महानिदेशक बोले- सभी दोषियों को जेल भेजेंगे राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के महानिदेशक Abhishek Singh ने कहा कि पेपर लीक मामले में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोबारा होने वाली परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष होगी और छात्रों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। ऐसे सामने आया पेपर लीक का मामला अभिषेक सिंह के मुताबिक 7 मई की रात एजेंसी को एक मुखबिर से सूचना मिली थी कि परीक्षा से पहले कुछ प्रश्न व्हाट्सएप पर साझा किए गए थे। जांच में पाया गया कि 3 मई की परीक्षा से पहले कुछ मोबाइल फोन पर प्रश्नपत्र की पीडीएफ फाइलें भेजी गई थीं। जांच के दौरान कई सवाल असली प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए, जिसके बाद पेपर लीक की आशंका मजबूत हो गई। अब CBI यह पता लगाने में जुटी है कि 1 और 2 मई को ये फाइलें किन-किन लोगों तक पहुंची थीं और पूरे नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।