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नीट पेपर लीक विवाद के बीच छात्रों का प्रदर्शन जारी, परीक्षा सुधार और जवाबदेही की मांग तेज

anjali kumari जुलाई 24, 2026 0
NEET Paper Leak Protest
NEET Paper Leak Protest

नई दिल्ली, एजेंसियां। नीट समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। छात्र संगठन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कदम और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। दिल्ली समेत कई राज्यों में छात्रों ने प्रदर्शन कर सरकार से शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की मांग उठाई है।

 

छात्रों की प्रमुख मांगें- पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और सख्त कानून

 

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से लाखों मेहनती अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। छात्र संगठनों ने मांग की है कि परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी और प्रशासनिक सुधार लागू करने की मांग भी की जा रही है।

 

सरकार ने संवाद और सुधारों का दिया भरोसा

 

छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने कहा है कि युवाओं के हितों और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कदम उठाने और नए कानून की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही है। सरकार ने फास्ट-ट्रैक अदालतों के जरिए ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई की बात भी कही है।

 

केंद्र और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत पर नजर

 

प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की कोशिश भी जारी है। दोनों पक्षों के बीच होने वाली वार्ता से उम्मीद है कि परीक्षा सुधार, छात्रों की शिकायतों और आंदोलन को लेकर कोई समाधान निकल सकता है। हालांकि छात्र संगठन अपनी मांगों पर कायम हैं और ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

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पेपर लीक मामलों पर दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा एक्शन, फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित, अब होगी तेजी से सुनवाई

देशभर में पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर बढ़ते विवाद के बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक, नकल और अन्य अनियमितताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए हाई कोर्ट ने विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित कर दी है। इस अदालत का उद्देश्य ऐसे मामलों का समयबद्ध निपटारा कर दोषियों को जल्द सजा दिलाना है, ताकि परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा कायम रखा जा सके। लोक परीक्षा अधिनियम, 2024 के तहत होगी सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट प्रशासन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, न्यायिक अधिकारी अनु ग्रोवर बालीगा की अदालत को तत्काल प्रभाव से विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट घोषित किया गया है। यह अदालत लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 और उससे जुड़े अन्य आपराधिक मामलों की सुनवाई करेगी। अधिसूचना के मुताबिक यह अदालत दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर से संचालित होगी। पीएम मोदी की घोषणा के बाद उठाया गया कदम दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस घोषणा के बाद आया है, जिसमें उन्होंने पेपर लीक मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की बात कही थी। गुरुवार को छात्रों के नाम जारी अपने वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा था कि पेपर लीक केवल एक परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर अपराध है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे मामलों में जल्द न्याय सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। पेपर लीक रोकने के लिए बनेगा और सख्त कानून प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि केंद्र सरकार पेपर लीक के खिलाफ और कड़े प्रावधानों वाला कानून लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित विधेयक में दोषियों के लिए कड़ी सजा, आर्थिक दंड और मामलों के त्वरित निपटारे जैसी व्यवस्थाएं शामिल की जाएंगी। सरकार का कहना है कि इससे भविष्य में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जा सकेगा। जंतर-मंतर पर जारी है छात्रों का आंदोलन इस बीच कथित नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन लगातार जारी है। संगठन का कहना है कि केवल दोषियों को सजा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करना भी जरूरी है। सरकार ने चार बार भेजा बातचीत का प्रस्ताव केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को कहा कि सरकार आंदोलन कर रहे छात्रों और CJP से हर मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटे के दौरान सरकार ने चार बार बातचीत का प्रस्ताव भेजा, लेकिन अब तक दोनों पक्षों के बीच बैठक नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल नीट से जुड़े मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि आंदोलन से संबंधित सभी मांगों पर चर्चा करने को तैयार है। उन्होंने छात्रों से अपील करते हुए कहा कि संवाद ही किसी भी समस्या का सबसे बेहतर समाधान है। तेजी से सुनवाई पर रहेगी सबकी नजर दिल्ली हाई कोर्ट की ओर से विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए जाने को परीक्षा संबंधी अपराधों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि इन मामलों की सुनवाई कितनी तेजी से होती है और दोषियों के खिलाफ कब तक कानूनी कार्रवाई पूरी होती है। वहीं, दूसरी ओर छात्रों का आंदोलन और सरकार के साथ संभावित बातचीत भी आने वाले दिनों में इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है।  

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नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने नीट पेपर लीक विवाद और छात्र आंदोलनों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की चिंताओं को सुनने के बजाय उनके विरोध को दबाने की कोशिश कर रही है। सोनिया गांधी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती समस्याएं और जवाबदेही की कमी युवाओं में निराशा पैदा कर रही है।   'सरकार का रवैया अहंकार भरा', छात्रों के समर्थन में उतरीं सोनिया गांधी   सोनिया गांधी ने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों के साथ संवाद होना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेने के बजाय उन्हें विरोधी नजरिए से देखा जा रहा है।   शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग   कांग्रेस नेता ने कहा कि छात्रों का आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की शिक्षा व्यवस्था, पारदर्शिता और भविष्य को लेकर चिंता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सरकार से परीक्षा प्रणाली में सुधार, संस्थागत जवाबदेही और युवाओं की समस्याओं पर गंभीर चर्चा करने की मांग की।   पेपर लीक मुद्दे पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने   सोनिया गांधी के बयान के बाद पेपर लीक मामले पर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। जहां विपक्ष सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगा रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

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हाईवे भूमि मुआवजा विवादों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र को कानून में बदलाव पर विचार करने का सुझाव

नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़े मुआवजा विवादों को लेकर केंद्र सरकार को कानून में बदलाव पर विचार करने का सुझाव दिया है। अदालत ने कहा कि भूमि मुआवजे से जुड़े मामलों की सुनवाई केवल प्रशासनिक अधिकारियों के भरोसे नहीं छोड़ी जानी चाहिए, बल्कि इसमें न्यायिक अधिकारियों की भूमिका बढ़ाई जानी चाहिए।    मुआवजा तय करने की प्रक्रिया पर उठाए सवाल   सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि हाईवे परियोजनाओं के लिए जमीन देने वाले किसानों और जमीन मालिकों को उचित मुआवजा मिलना जरूरी है। अदालत ने मौजूदा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि कई मामलों में मुआवजे को लेकर लंबे समय तक विवाद चलते रहते हैं, जिससे जमीन मालिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।    न्यायिक अधिकारियों को जिम्मेदारी देने पर जोर   अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम में संशोधन कर ऐसी व्यवस्था बनाई जा सकती है, जिसमें मुआवजा विवादों का निपटारा स्वतंत्र न्यायिक अधिकारियों द्वारा किया जाए। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और भूमि मालिकों को निष्पक्ष सुनवाई मिल सकेगी।    सड़क विकास और किसानों के अधिकारों में संतुलन की कोशिश   राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के विस्तार के साथ भूमि अधिग्रहण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विकास परियोजनाएं जरूरी हैं, लेकिन इसके साथ जमीन देने वाले लोगों के अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। अब केंद्र सरकार को इस सुझाव पर विचार कर आगे की कार्रवाई करनी होगी।

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