NEET paper leak

Congress MP Gaurav Gogoi speaking in the Lok Sabha during the debate on the Anti Paper Leak Bill
संसद में गौरव गोगोई का सरकार पर हमला, बोले- "21 छात्रों की मौत के लिए केंद्र जिम्मेदार"

लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की खामियों के कारण हुई 21 छात्रों की मौत के लिए सरकार जिम्मेदार है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि सरकार शिक्षा सुधार को लेकर गंभीर नहीं है। "पुराने कानून से भी नहीं बदली स्थिति" एएनआई के मुताबिक, गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार दो वर्ष पहले भी पेपर लीक रोकने के लिए कानून लेकर आई थी, लेकिन उससे कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार और पेपर लीक की घटनाएं लगातार सामने आती रहीं, जबकि सरकार प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही। NEET पेपर लीक मामले का किया जिक्र गोगोई ने NEET-UG 2024 पेपर लीक मामले का हवाला देते हुए कहा कि आरोपपत्र में शामिल 45 आरोपियों में से 44 को जमानत मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि इससे जांच और सरकारी कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े होते हैं। "21 छात्रों की मौत पर जवाब दे सरकार" कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों और बढ़ते मानसिक दबाव के कारण 21 छात्रों ने आत्महत्या की। उन्होंने कहा कि जिस मंत्री के कार्यकाल में यह सब हुआ, उनके इस्तीफे के बाद सदन में उनका स्वागत किया गया, जो सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। "शिक्षा सुधार नहीं, इंस्टाग्राम पर ज्यादा ध्यान" गौरव गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को कैबिनेट बैठकों में पेपर लीक माफिया पर कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों की समस्याओं पर चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान शिक्षा सुधार की बजाय सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम जैसे मुद्दों पर अधिक दिखाई देता है। असम के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग अपने भाषण के दौरान गोगोई ने असम में आई भीषण बाढ़ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में बाढ़ से करीब 70 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से असम के लिए विशेष आर्थिक राहत पैकेज देने और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने की मांग की। सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा माफिया, पेपर लीक गिरोह और परीक्षा केंद्रों में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक भी शिक्षा व्यवस्था की मूल समस्याओं का समाधान नहीं कर पाएगा, जब तक परीक्षा प्रणाली में व्यापक और पारदर्शी सुधार नहीं किए जाते।  

kalpana जुलाई 29, 2026 0
Rahul Gandhi raises questions in Parliament over alleged police action during CJP march
CJP मार्च विवाद: राहुल गांधी ने अमित शाह से पूछा- छात्रों पर कार्रवाई का आदेश किसने दिया?

Parliament Session 2026: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने CJP के 'संसद चलो' मार्च के दौरान छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पत्र में सवाल उठाया कि 20 जुलाई को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग का आदेश किसने दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया गया और सरकार को इस पूरे घटनाक्रम पर जवाब देना चाहिए। राहुल गांधी ने गृह मंत्री से पूछे कई सवाल राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा कि 20 जुलाई को CJP के नेतृत्व में निकाले गए 'संसद चलो' मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ कठोर व्यवहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई में कई छात्र और प्रदर्शनकारी घायल हुए। कांग्रेस सांसद के अनुसार, इस कार्रवाई में कुछ लोगों के हाथ, पैर और पसलियां टूट गईं। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन जैसे घातक हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। 'अगर अमित शाह ने आदेश नहीं दिया तो किसने दिया?' राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा कि दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करती हैं। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि यदि छात्रों पर बल प्रयोग और कथित पैलेट गन के इस्तेमाल की मंजूरी गृह मंत्री अमित शाह ने नहीं दी, तो फिर इसकी अनुमति किस अधिकारी या एजेंसी ने दी। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी की। 19 वर्षीय छात्र का किया जिक्र राहुल गांधी ने अपने पत्र में 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचब का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि साहिल कथित तौर पर पैलेट गन की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हुआ है और उसकी एक आंख की रोशनी जाने का खतरा है। राहुल गांधी ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। धर्मेंद्र प्रधान के बाद विपक्ष का अगला निशाना अमित शाह NEET-UG पेपर लीक विवाद और छात्रों के आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष अब गृह मंत्री अमित शाह को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। कांग्रेस और INDIA गठबंधन का कहना है कि आंदोलन खत्म होने के बावजूद छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा संसद और सड़क दोनों जगह उठाया जाएगा। विपक्ष का आरोप है कि सरकार को इस मामले में राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही तय करनी चाहिए। संसद में बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव मानसून सत्र के दौरान NEET-UG पेपर लीक, परीक्षा सुधार, छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और CJP मार्च का मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है। विपक्ष इन मामलों पर सरकार से विस्तृत जवाब और चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार और नए कानूनों के जरिए व्यवस्था मजबूत करने की बात कह रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद के भीतर इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और टकराव देखने को मिल सकता है।  

kalpana जुलाई 27, 2026 0
Opposition MPs protest in Parliament during Monsoon Session over NEET paper leak issue
Parliament Session: हंगामे के बीच लोकसभा-राज्यसभा दोपहर 12 बजे तक स्थगित, पेपर लीक बिल पर आज होगी अहम चर्चा

Parliament Monsoon Session 2026: संसद के मानसून सत्र में सोमवार (27 जुलाई) को शुरुआत से ही भारी हंगामा देखने को मिला। NEET-UG पेपर लीक मामले, छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और जंतर-मंतर लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष के विरोध के बीच लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। दूसरी ओर, केंद्र सरकार आज पब्लिक एग्जामिनेशन (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करने जा रही है, जिसका उद्देश्य पेपर लीक पर और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है। विपक्ष का संसद परिसर में प्रदर्शन संसद के मकर द्वार पर कांग्रेस समेत INDIA गठबंधन के सांसदों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई विपक्षी नेता शामिल हुए। विपक्ष ने 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई को मुद्दा बनाते हुए गृह मंत्री से जवाब और पूरे मामले पर संसद में चर्चा की मांग की। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया और कथित लाठीचार्ज, आंसू गैस तथा पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की। पवन खेड़ा ने सरकार से मांगी माफी कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि यदि छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ है तो सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेते हुए देश से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने परीक्षा सुधारों के लिए गठित नई टास्क फोर्स पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार पुराने सुझावों को लागू करने के बजाय नई समितियां बनाकर समय बिता रही है। राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट पर सरकार से सवाल सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने सरकार से पूछा कि दो वर्ष पहले गठित राधाकृष्णन समिति की 184 पन्नों की रिपोर्ट का क्या हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नई टास्क फोर्स बनाकर मूल मुद्दों से ध्यान भटका रही है, जबकि जरूरत परीक्षा प्रणाली में वास्तविक सुधार लागू करने की है। पेपर लीक विधेयक पर सरकार का जोर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि आज संसद में पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून वाला विधेयक पेश किया जाएगा। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि हंगामे की बजाय इस महत्वपूर्ण कानून पर गंभीर चर्चा करें ताकि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सके। TMC और अन्य दलों की प्रतिक्रिया टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का स्वागत किया, लेकिन कहा कि विपक्ष की सभी मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से माफी और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के मामले में जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई। वहीं, टीएमसी सांसद महुआ माजी ने कहा कि नया कानून पूरी तरह दोषमुक्त होना चाहिए ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और निर्दोष छात्रों को परेशानी का सामना न करना पड़े। बीजेपी ने विधेयक का किया समर्थन बीजेपी सांसद अभिजीत गांगुली ने पब्लिक एग्जामिनेशन (संशोधन) विधेयक, 2026 का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार ने तेजी से सही कदम उठाया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सदन में इस पर सकारात्मक चर्चा होगी और देश को मजबूत परीक्षा व्यवस्था देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाएगा। आज संसद में पेश होंगे दो अहम विधेयक आज के संसदीय कार्यसूची में दो महत्वपूर्ण विधेयक शामिल हैं— लोकसभा: पब्लिक एग्जामिनेशन (संशोधन) विधेयक, 2026, जिसे केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह पेश करेंगे। राज्यसभा: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राष्ट्रीय सम्मान का अपमान (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करेंगे, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान से जुड़े कानून को और प्रभावी बनाना है। संसद में टकराव के आसार बरकरार हालांकि CJP ने अपनी प्रमुख मांगें स्वीकार होने के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया है, लेकिन कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे NEET विवाद, छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और परीक्षा सुधारों के मुद्दे पर सरकार को संसद के भीतर और बाहर घेरते रहेंगे। ऐसे में दिनभर संसद में तीखी बहस और राजनीतिक टकराव जारी रहने के आसार हैं।  

kalpana जुलाई 27, 2026 0
NDA MPs welcome former Education Minister Dharmendra Pradhan at Parliament amid NEET controversy
'धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद' के नारों से गूंजा संसद परिसर, NDA सांसदों ने किया जोरदार स्वागत

Parliament Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार (27 जुलाई) को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके धर्मेंद्र प्रधान का संसद परिसर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों ने जोरदार स्वागत किया। मकर द्वार पर पहले से मौजूद सांसदों ने उन्हें पारंपरिक पाग पहनाकर सम्मानित किया और 'धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद' के नारों के बीच संसद भवन तक उनके साथ पहुंचे। इस दौरान संसद परिसर में कुछ देर के लिए राजनीतिक उत्साह और शक्ति प्रदर्शन का माहौल देखने को मिला। पारंपरिक सम्मान के साथ संसद पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान न्यूज एजेंसी एएनआई द्वारा जारी वीडियो में देखा जा सकता है कि जैसे ही धर्मेंद्र प्रधान संसद परिसर पहुंचे, भाजपा और एनडीए के सांसदों ने तालियों और नारों के साथ उनका स्वागत किया। उन्हें पारंपरिक पाग पहनाकर सम्मानित किया गया और सांसदों ने उन्हें घेरकर संसद भवन के अंदर तक पहुंचाया। इस दौरान समर्थक सांसद लगातार 'धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद' के नारे लगाते रहे। बताया जा रहा है कि यह स्वागत ऐसे समय हुआ, जब नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बीच दो दिन पहले ही उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था। संसद परिसर में सत्ता और विपक्ष आमने-सामने धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत के तुरंत बाद संसद परिसर में विपक्षी दलों ने भी प्रदर्शन शुरू कर दिया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी सांसद तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। 'शिक्षा चोरी' के नारे, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेताओं ने संसद परिसर में 'शिक्षा चोरी' के नारे लगाए। विपक्ष का आरोप था कि सरकार परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने में विफल रही है, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। राहुल गांधी ने छात्रों पर कार्रवाई का उठाया मुद्दा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार के पास प्रदर्शन करते हुए 20 जुलाई को NEET-UG पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों के हाथों में एक बड़ा बैनर था, जिस पर लिखा था— "वोट चोरी, पेपर चोरी, चंदा चोरी" विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह से छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई को लेकर जवाब देने की मांग की। संसद का पहला दिन रहा राजनीतिक टकराव के नाम मानसून सत्र के पहले ही दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी और विरोध-प्रदर्शन देखने को मिले। एक ओर एनडीए सांसदों ने धर्मेंद्र प्रधान के समर्थन में एकजुटता दिखाई, वहीं विपक्ष ने NEET पेपर लीक, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है।  

kalpana जुलाई 27, 2026 0
Dharmendra Pradhan
धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री मोदी को सौंपा इस्तीफा, छात्र आंदोलन के बीच लिया बड़ा फैसला

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। देशभर में परीक्षा व्यवस्था, NEET पेपर लीक विवाद और छात्रों के लगातार जारी आंदोलन के बीच उनका यह फैसला सामने आया है। धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी अपना इस्तीफा सार्वजनिक करते हुए कहा कि यह निर्णय उन्होंने देश के युवाओं के हितों और लोकतांत्रिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए लिया है।   इस्तीफे में युवाओं का किया जिक्र   अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि छात्रों की चिंताओं और युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को लेकर जो स्थिति बनी है, उसे किसी भी तरह राष्ट्रविरोधी ताकतों द्वारा इस्तेमाल नहीं होने देना चाहिए। इसी भावना के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपने का फैसला किया।   लगातार बढ़ रहा था राजनीतिक और जनदबाव   पिछले कई सप्ताह से NEET पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्र आंदोलन जारी था। दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई शहरों में प्रदर्शन हुए, जबकि विपक्ष ने संसद के भीतर और बाहर लगातार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। आंदोलन को लेकर सरकार और छात्र संगठनों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई, लेकिन शिक्षा मंत्री का इस्तीफा प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग बना रहा।   अब सरकार के अगले कदम पर नजर   धर्मेंद्र प्रधान द्वारा इस्तीफा सौंपे जाने के बाद अब सभी की नजर प्रधानमंत्री कार्यालय पर है। समाचार लिखे जाने तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या राष्ट्रपति भवन की ओर से इस्तीफा स्वीकार किए जाने अथवा नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे मिलेगी, इस पर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

abhishek singh जुलाई 25, 2026 0
Supreme Court to hear petitions over alleged police lathicharge on NEET protestors
NEET Protest: छात्रों पर लाठीचार्ज मामले में SC सख्त, CJP की याचिकाओं पर सोमवार को होगी सुनवाई

NEET Protest: NEET-UG पेपर लीक के विरोध में संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के मामले में सुप्रीम कोर्ट सोमवार (27 जुलाई) को सुनवाई करेगा। अदालत ने पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है। याचिकाकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती की न्यायिक जांच और कार्रवाई की मांग की है। संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को दी चुनौती यह मामला प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष उठाया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान और गोपाल शंकरनारायणन ने याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। याचिकाओं में 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को चुनौती दी गई है। उस दिन CJP के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र और युवा कथित NEET पेपर लीक के विरोध में तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। परीक्षा सुधारों पर केंद्र और NTA से रिपोर्ट तलब इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को परीक्षा प्रणाली में किए जा रहे सुधारों पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार से इन प्रमुख बिंदुओं पर प्रगति रिपोर्ट मांगी है: परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुरक्षा व्यवस्था प्रशासनिक सुधार मानव संसाधन प्रबंधन कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) प्रणाली यह निर्देश फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) सहित अन्य याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया। स्थायी सुधारों पर सुप्रीम कोर्ट का जोर केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठा रही है तथा जल्द ही विस्तृत हलफनामा दाखिल करेगी। इस पर जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने कहा कि सुधार केवल अस्थायी उपायों तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि परीक्षा प्रणाली में स्थायी और संस्थागत बदलाव जरूरी हैं। NTA से 10 क्षेत्रों में मांगी जानकारी सुप्रीम कोर्ट ने NEET सुधारों के लिए गठित उच्चाधिकार समिति (HPC) की सिफारिशों को लागू करने की स्थिति रिपोर्ट भी मांगी है। अदालत ने परीक्षा के तीनों चरणों से जुड़े सुधारों पर जानकारी देने को कहा है— परीक्षा से पहले की व्यवस्था परीक्षा के दौरान सुरक्षा और निगरानी परीक्षा के बाद की प्रक्रिया इसके अलावा प्रश्नपत्रों की छपाई, परिवहन, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था तथा राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों की भूमिका पर भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। डिजिटल सुरक्षा और पहचान सत्यापन पर भी सवाल सुप्रीम कोर्ट ने प्रश्नपत्रों और परीक्षा डेटा की सुरक्षा को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर सुरक्षा में चूक पूरी परीक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकती है। अदालत ने डेटा ट्रांसफर, स्टोरेज, साइबर सुरक्षा और कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली की विस्तृत जानकारी मांगी है। साथ ही, उम्मीदवारों की पहचान सत्यापन के लिए डिजियात्रा जैसी तकनीकों के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी केंद्र सरकार से जवाब मांगा गया है। सुधार प्रक्रिया पर रहेगी सुप्रीम कोर्ट की नजर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह NEET परीक्षा प्रणाली में सुधार की पूरी प्रक्रिया की लगातार निगरानी करेगा। अदालत का कहना है कि उद्देश्य केवल वर्तमान विवाद का समाधान नहीं, बल्कि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत और विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है।  

kalpana जुलाई 25, 2026 0
Pakistan Foreign Ministry responds to questions on the CJP protest in India, calling it an internal matter
CJP आंदोलन पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया, बोला- यह भारत का आंतरिक मामला

Pakistan on CJP Protest: दिल्ली में नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर चल रहे CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के आंदोलन और छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज पर पाकिस्तान की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। पाकिस्तान ने इस पूरे विवाद को भारत का आंतरिक मामला बताते हुए किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। पाकिस्तान ने क्या कहा? पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी से प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पूछा गया कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को क्या वह मानवाधिकारों का उल्लंघन मानते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है और पाकिस्तान इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेगा। पेपर लीक पर सरकार की तैयारी नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों की तेज सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और दोषियों को जल्द सख्त सजा दिलाने की घोषणा की है। सरकार परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए कानून में संशोधन की तैयारी भी कर रही है। CJP ने उठाए व्यवस्था पर सवाल प्रधानमंत्री की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए CJP ने कहा कि केवल दोषियों को सजा देने से समस्या खत्म नहीं होगी। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि पेपर बार-बार लीक क्यों हो रहे हैं। रांका ने आरोप लगाया कि व्यवस्था में जवाबदेही की कमी है। उन्होंने कहा कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी, सिस्टम को मजबूत नहीं बनाया जाएगा और दोषियों के मन में कानून का डर पैदा नहीं होगा, तब तक पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं रुकेंगी। सरकार और CJP के बीच गतिरोध केंद्र सरकार का कहना है कि वह आंदोलनकारी छात्रों से बातचीत के लिए तैयार है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने दावा किया कि पिछले 24 घंटे के दौरान CJP को चार बार बातचीत का प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन संगठन की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों से उनके कार्यालय या आवास सहित किसी भी उपयुक्त स्थान पर चर्चा के लिए तैयार है। हिंसा में शामिल लोगों पर कार्रवाई की तैयारी सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान हिंसा में शामिल लोगों की पहचान के लिए दिल्ली पुलिस सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है। जिन लोगों की हिंसा में संलिप्तता सामने आएगी, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ पासपोर्ट रद्द करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। सुरक्षा के मद्देनजर बढ़ाई गई सतर्कता दिल्ली में प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में एहतियात के तौर पर कई दुकानें, कार्यालय और रेस्तरां निर्धारित समय से पहले बंद कराए गए हैं। वहीं CJP ने ऐलान किया है कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
Sonam Wangchuk addresses supporters after ending his 26-day hunger strike over NEET reforms
अनशन खत्म करने के बाद बोले सोनम वांगचुक- 'लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई, अब जवाबदेही की बारी'

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर 26 दिनों से जारी अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुक्रवार (24 जुलाई) को समाप्त कर दी। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि उनका अनशन भले खत्म हो गया हो, लेकिन जवाबदेही की लड़ाई अभी जारी रहेगी। वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो जारी कर बताया कि सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों से मिले आश्वासन के बाद उन्होंने यह फैसला लिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने संसद में परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही के मुद्दे पर चर्चा कराने का भरोसा दिया है। सरकार ने क्या आश्वासन दिया? सोनम वांगचुक के मुताबिक सरकार ने आश्वासन दिया है कि— परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही पर संसद में चर्चा होगी। कथित NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। "अनशन खत्म हुआ, संघर्ष नहीं" वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा, "मैंने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है, लेकिन अब असली काम जवाबदेही तय करने का है। सरकार से मिले आश्वासन के बाद मैंने यह फैसला लिया है। उम्मीद है कि भविष्य में NEET जैसी परीक्षाओं में गड़बड़ियां रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।" देर रात हुई थी मंत्रियों से मुलाकात गुरुवार (23 जुलाई) देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में सोनम वांगचुक से मुलाकात की। बैठक के दौरान सरकार की ओर से आवश्यक कदम उठाने का भरोसा दिया गया, जिसके बाद वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया। वांगचुक ने X पर लिखा कि उन्होंने जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह और लेह-लद्दाख एपेक्स बॉडी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त किया। पीएम मोदी ने की सेहत का ध्यान रखने की अपील सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि वांगचुक डॉक्टरों की सलाह का पालन करें और अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखें।  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
CJP founder Abhijeet Deepke addresses supporters during the ongoing protest at Jantar Mantar
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा CJP, अभिजीत दीपके बोले- जंतर-मंतर पर प्रदर्शन रहेगा जारी

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा 26 दिन का अनशन समाप्त किए जाने के बावजूद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने साफ कर दिया है कि जंतर-मंतर पर उनका आंदोलन जारी रहेगा। संगठन का कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक प्रदर्शन खत्म नहीं होगा। NEET प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर CJP के नेतृत्व में छात्र पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में सुधार, जवाबदेही तय करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अभिजीत दीपके ने क्या कहा? CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वांगचुक ने अपने साहस और त्याग से देश का ध्यान छात्रों के मुद्दों की ओर आकर्षित किया। उन्होंने लिखा कि देश के लिए सोनम वांगचुक का जीवन बेहद महत्वपूर्ण है और उनके अनशन खत्म होने से राहत मिली है। हालांकि दीपके ने स्पष्ट किया, "CJP का जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन अभी खत्म नहीं होगा। जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।" 'Charging up...' पोस्ट से बढ़ी चर्चा अभिजीत दीपके ने एक अन्य पोस्ट में "Charging up..." लिखते हुए एक तस्वीर साझा की, जिसमें एक व्यक्ति के हाथ में ड्रिप लगी हुई दिखाई दे रही है। इस पोस्ट को आंदोलन जारी रहने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। सोनम वांगचुक ने खत्म किया 26 दिन का अनशन सोनम वांगचुक ने गुरुवार (23 जुलाई) देर रात 26 दिनों से जारी अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से मिले आश्वासनों के बाद यह फैसला लिया गया। सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने, परीक्षा प्रणाली में सुधार पर चर्चा करने और कथित पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के परिवारों को राहत देने जैसे मुद्दों पर विचार करने का भरोसा दिया है। CJP अपनी मांगों पर कायम सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने के बावजूद CJP का कहना है कि उनका आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। संगठन का कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा।  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
Rahul Gandhi reacts to Prime Minister Narendra Modi's video message on the NEET paper leak controversy
पीएम मोदी के वीडियो संदेश से नहीं बदला राहुल गांधी का रुख, बोले- धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधी रात जारी वीडियो संदेश के बाद भी NEET पेपर लीक मामले पर सियासी घमासान थमता नहीं दिख रहा है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने छात्रों की सबसे बड़ी मांग—केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे—पर कोई जवाब नहीं दिया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री के वीडियो को साझा करते हुए कहा कि छात्र लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, ऐसे में आधी रात को वीडियो जारी कर उनकी भावनाओं और समझदारी का अपमान नहीं किया जाना चाहिए। राहुल गांधी ने रखीं तीन मांगें राहुल गांधी ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं— केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल पद से हटाया जाए। प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कार्रवाई करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। सरकार छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगे। पीएम मोदी ने क्या कहा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि उनकी सरकार प्रश्नपत्र लीक के मामलों से निपटने के लिए सख्त कानून लाने जा रही है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार (24 जुलाई) को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस विधेयक के मसौदे पर चर्चा होगी और उसे अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद अगले सप्ताह इसे संसद में पेश किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित कानून में पेपर लीक कराने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान होगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके और छात्रों का भरोसा कायम रहे। फास्ट ट्रैक कोर्ट शुरू होने का दावा अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के निर्देश दिए थे और अब इन अदालतों ने काम शुरू कर दिया है। उनका कहना था कि इससे दोषियों को जल्द सजा दिलाने में मदद मिलेगी। NEET परीक्षा पर सरकार का पक्ष प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाएं लाखों छात्रों और उनके परिवारों को प्रभावित करती हैं। उन्होंने बताया कि आरोप सामने आने के बाद सरकार ने कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा और छात्रों का शैक्षणिक वर्ष खराब न हो, इसके लिए जल्द दोबारा परीक्षा आयोजित कराई गई। प्रधानमंत्री के अनुसार, पुनः आयोजित NEET परीक्षा में 22 लाख से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया और उसका परिणाम 19 जुलाई को जारी किया गया। मुद्दे पर जारी है सियासी टकराव प्रधानमंत्री के नए कानून और फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा के बावजूद विपक्ष अपने रुख पर कायम है। कांग्रेस का कहना है कि जवाबदेही तय करने के लिए शिक्षा मंत्री का इस्तीफा जरूरी है, जबकि सरकार का दावा है कि वह परीक्षा प्रणाली में सुधार और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
Security tightened near Jantar Mantar as CJP protest continues and several Delhi Metro stations remain closed
CJP Protest Live: 17 मेट्रो स्टेशन बंद, आज सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच हो सकती है बातचीत

NEET पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहा CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) का आंदोलन शुक्रवार (24 जुलाई) को भी जारी है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन का आमरण अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन CJP ने साफ कर दिया है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक प्रदर्शन जारी रहेगा। इस बीच आज सरकार और CJP के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत होने की संभावना है। दिल्ली में 17 मेट्रो स्टेशन बंद सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने शुक्रवार सुबह 17 मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद कर दिया है। इससे पहले गुरुवार को 16 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा। आज सरकार और CJP के बीच हो सकती है बैठक एएनआई के मुताबिक, CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने बताया कि आज दोपहर 12:30 बजे सरकार के प्रतिनिधिमंडल और CJP के बीच बातचीत हो सकती है। हालांकि CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके पहले कह चुके हैं कि बातचीत केवल जंतर-मंतर पर ही होगी। बैठक का स्थान अभी स्पष्ट नहीं किया गया है। लिखित आश्वासन के बाद खत्म हुआ अनशन सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात वीडियो संदेश जारी कर कहा कि सरकार पहले भी आश्वासन दे रही थी, लेकिन इस बार उन्हें लिखित आश्वासन मिला है। इसके बाद उन्होंने 26 दिन से जारी अपना आमरण अनशन समाप्त करने का फैसला लिया। 25 से अधिक छात्र हिरासत में गुरुवार को जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे 25 से अधिक छात्रों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। इनमें जामिया मिल्लिया इस्लामिया और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र भी शामिल थे। पुलिस के अनुसार, छात्रों के पास प्रदर्शन से जुड़े पोस्टर थे और उन्हें एहतियात के तौर पर हिरासत में लेकर दिल्ली पुलिस अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जारी रहेगा आंदोलन CJP ने 20 जून से जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू किया था। हालांकि सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा।  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
Delhi High Court establishes a special fast-track court for paper leak and exam malpractice cases
पेपर लीक मामलों पर दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा एक्शन, फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित, अब होगी तेजी से सुनवाई

देशभर में पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर बढ़ते विवाद के बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक, नकल और अन्य अनियमितताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए हाई कोर्ट ने विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित कर दी है। इस अदालत का उद्देश्य ऐसे मामलों का समयबद्ध निपटारा कर दोषियों को जल्द सजा दिलाना है, ताकि परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा कायम रखा जा सके। लोक परीक्षा अधिनियम, 2024 के तहत होगी सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट प्रशासन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, न्यायिक अधिकारी अनु ग्रोवर बालीगा की अदालत को तत्काल प्रभाव से विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट घोषित किया गया है। यह अदालत लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 और उससे जुड़े अन्य आपराधिक मामलों की सुनवाई करेगी। अधिसूचना के मुताबिक यह अदालत दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर से संचालित होगी। पीएम मोदी की घोषणा के बाद उठाया गया कदम दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस घोषणा के बाद आया है, जिसमें उन्होंने पेपर लीक मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की बात कही थी। गुरुवार को छात्रों के नाम जारी अपने वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा था कि पेपर लीक केवल एक परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर अपराध है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे मामलों में जल्द न्याय सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। पेपर लीक रोकने के लिए बनेगा और सख्त कानून प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि केंद्र सरकार पेपर लीक के खिलाफ और कड़े प्रावधानों वाला कानून लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित विधेयक में दोषियों के लिए कड़ी सजा, आर्थिक दंड और मामलों के त्वरित निपटारे जैसी व्यवस्थाएं शामिल की जाएंगी। सरकार का कहना है कि इससे भविष्य में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जा सकेगा। जंतर-मंतर पर जारी है छात्रों का आंदोलन इस बीच कथित नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन लगातार जारी है। संगठन का कहना है कि केवल दोषियों को सजा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करना भी जरूरी है। सरकार ने चार बार भेजा बातचीत का प्रस्ताव केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को कहा कि सरकार आंदोलन कर रहे छात्रों और CJP से हर मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटे के दौरान सरकार ने चार बार बातचीत का प्रस्ताव भेजा, लेकिन अब तक दोनों पक्षों के बीच बैठक नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल नीट से जुड़े मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि आंदोलन से संबंधित सभी मांगों पर चर्चा करने को तैयार है। उन्होंने छात्रों से अपील करते हुए कहा कि संवाद ही किसी भी समस्या का सबसे बेहतर समाधान है। तेजी से सुनवाई पर रहेगी सबकी नजर दिल्ली हाई कोर्ट की ओर से विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए जाने को परीक्षा संबंधी अपराधों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि इन मामलों की सुनवाई कितनी तेजी से होती है और दोषियों के खिलाफ कब तक कानूनी कार्रवाई पूरी होती है। वहीं, दूसरी ओर छात्रों का आंदोलन और सरकार के साथ संभावित बातचीत भी आने वाले दिनों में इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है।  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
Sonia Gandhi criticizes the central government over its handling of student protests and education reforms
सोनिया गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, बोलीं- छात्रों के साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार कर रही सरकार

कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की शिक्षा नीति और छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे छात्रों के साथ सरकार ऐसा व्यवहार कर रही है, मानो वे देश के दुश्मन हों। सोनिया गांधी ने कहा कि छात्रों की आवाज दबाने के बजाय उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। 'शिक्षा व्यवस्था का पतन, युवा भारत की पीड़ा' शीर्षक से लिखा लेख अंग्रेजी दैनिक द हिंदू में प्रकाशित अपने लेख "An Education System's Collapse, Young India's Trauma" (शिक्षा व्यवस्था का पतन, युवा भारत की पीड़ा) में सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देशभर के छात्र केवल परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने उनके शांतिपूर्ण विरोध का जवाब "कायरता और अकारण क्रूरता" से दिया है। सोनिया गांधी ने लिखा कि छात्रों ने सरकार के शिक्षा सुधार संबंधी दावों की वास्तविकता उजागर कर दी है। उनका कहना है कि सरकार युवाओं को देश का भविष्य मानने के बजाय उनके साथ कठोर रवैया अपना रही है। 'शिक्षा व्यवस्था युवाओं को उम्मीद नहीं, निराशा दे रही' अपने लेख में सोनिया गांधी ने कहा कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था युवाओं को अवसर देने के बजाय निराशा और असुरक्षा की ओर धकेल रही है। उनके अनुसार, देश में चल रहा छात्र आंदोलन दो बड़ी वजहों का परिणाम है। पहली, ऐसी शिक्षा व्यवस्था जिसने छात्रों का भरोसा तोड़ दिया है और दूसरी, केंद्र सरकार का रवैया, जो जवाबदेही तय करने और सुधारात्मक कदम उठाने से लगातार बचता रहा है। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ खड़ा होना केवल राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज और लोकतंत्र के प्रति नैतिक एवं संवैधानिक दायित्व भी है। पुलिस कार्रवाई पर भी उठाए सवाल सोनिया गांधी ने छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाली दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर ऐसी कार्रवाई हुई हो। अपने लेख में उन्होंने 2020 के CAA-NRC विरोध प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी विश्वविद्यालय परिसरों में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की कार्रवाई हुई थी। इसके अलावा उन्होंने महिला पहलवानों के आंदोलन का भी जिक्र करते हुए कहा कि देश उन घटनाओं को भी नहीं भूला है। सरकार पर शिक्षा व्यवस्था कमजोर करने का आरोप कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण देश की शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और छात्रों में बढ़ती निराशा जैसे मुद्दे गंभीर चिंता का विषय हैं। सोनिया गांधी ने कहा कि सरकार को छात्रों की आवाज दबाने के बजाय उनकी मांगों को गंभीरता से सुनना चाहिए। उनका कहना था कि यदि समय रहते शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार नहीं किए गए, तो इसका असर केवल छात्रों के भविष्य पर ही नहीं, बल्कि देश के विकास और भविष्य पर भी पड़ेगा। छात्रों के समर्थन की अपील अपने लेख के अंत में सोनिया गांधी ने सभी राजनीतिक दलों और समाज से छात्रों के साथ खड़े होने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उनके मुताबिक, छात्रों की मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सुनना और उन पर कार्रवाई करना किसी भी जिम्मेदार सरकार का दायित्व होना चाहिए।  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
Indian Parliament during Monsoon Session as government prepares to introduce anti-paper leak bill
Parliament Monsoon Session Day 5: मानसून सत्र का पांचवां दिन आज, पेपर लीक पर सरकार ला सकती है खास बिल, कांग्रेस के रुख पर नजर

संसद के मानसून सत्र का आज (शुक्रवार, 24 जुलाई) पांचवां दिन है। पिछले चार दिनों तक विपक्ष के हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। आज सरकार पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़ा एक अहम विधेयक पेश कर सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक प्रस्तावित बिल का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस इस विधेयक का अध्ययन करने के बाद सदन में चर्चा में हिस्सा ले सकती है। ऐसे में आज का दिन संसद की कार्यवाही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पेपर लीक पर घमासान जारी नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी छात्र आंदोलन और संसद के भीतर विपक्ष के विरोध के बीच सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। विपक्ष लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह इस मुद्दे पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। सत्तापक्ष का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दे चुके हैं और सरकार परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। खरगे का पीएम मोदी पर निशाना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, "जब संसद चल रही होती है तो प्रधानमंत्री को संसद के पटल पर बयान देना होता है, देर रात वीडियो बनाकर संसद के बाहर एकतरफा 'मन की बात' नहीं करनी होती। पीएम मोदी, आज संसद में आने से पहले धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करके आइए।" खरगे का यह बयान प्रधानमंत्री मोदी के उस वीडियो संदेश के बाद आया, जिसमें उन्होंने पेपर लीक मामलों पर सख्त कानून और फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा की थी। निर्मला सीतारमण बोलीं- चर्चा के लिए सरकार तैयार गुरुवार को संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नीट पेपर लीक का मामला देश के छात्रों और उनके भविष्य से जुड़ा है, इसलिए सरकार इसे बेहद गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामले में शामिल कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और सरकार फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से जल्द कार्रवाई सुनिश्चित करना चाहती है। सीतारमण ने कहा, "पेपर लीक के बाद तुरंत दोबारा परीक्षा कराई गई और परिणाम भी घोषित किए गए। अब छात्र आगे की पढ़ाई की तैयारी कर रहे हैं। यदि विपक्ष चर्चा चाहता है तो सरकार संसद में इस विषय पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।" विपक्ष पर लगाया शर्तें बदलने का आरोप वित्त मंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि पहले उसने संसद में चर्चा की मांग की और जब सरकार ने सहमति दे दी, तब विपक्ष ने नई-नई शर्तें रखनी शुरू कर दीं। उन्होंने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा चाहती है, लेकिन संसद की कार्यवाही बाधित करने से किसी समस्या का समाधान नहीं होगा। आज के सत्र पर सबकी नजर मानसून सत्र के पांचवें दिन सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार पेपर लीक से जुड़ा प्रस्तावित विधेयक पेश करती है या नहीं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष चर्चा में शामिल होता है या शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना विरोध जारी रखता है। पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और छात्र आंदोलन के मुद्दे पर आज संसद में तीखी बहस होने के आसार हैं।  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
CJP leaders addressing media amid ongoing protest at Jantar Mantar over NEET paper leak and education reforms
CJP Protest: 'धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक नहीं रुकेगा आंदोलन', सरकार और CJP के बीच आज हो सकती है अहम बैठक

CJP Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर जारी आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर, सरकार और CJP के बीच शुक्रवार को बातचीत होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के प्रतिनिधि दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि सरकार की ओर से इस बैठक की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है। CJP का दावा- सरकार पर बढ़ा दबाव CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देर रात छात्रों के नाम वीडियो संदेश जारी करना इस बात का संकेत है कि सरकार पर आंदोलन का दबाव बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर है तो सबसे पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाना चाहिए। रांका ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं लेती। उन्होंने बताया कि सुबह 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद दोपहर में सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत प्रस्तावित है। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हो सकती है बातचीत सूत्रों के मुताबिक, CJP की मांग पर सरकार न्यूट्रल स्थान पर बातचीत के लिए तैयार हुई है और कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में बैठक होने की संभावना है। इस बैठक में आंदोलन से जुड़ी मांगों, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, कथित नीट पेपर लीक मामले और आगे की रणनीति पर चर्चा हो सकती है। CJP का कहना है कि वह केवल औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि लिखित आश्वासन और समयबद्ध कार्रवाई चाहता है। फास्ट-ट्रैक कोर्ट पर केजरीवाल का सवाल इस बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 के नीट पेपर लीक मामले में कथित मास्टरमाइंड संजीव मुखिया को जमानत मिल चुकी है और सीबीआई ने अदालत में उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं होने की बात कही थी। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि यदि असली दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी, तो केवल फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने सरकार पर पेपर लीक माफिया को बचाने का भी आरोप लगाया। बातचीत पर टिकी निगाहें जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। ऐसे में सरकार और CJP के बीच प्रस्तावित बैठक को आंदोलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि बातचीत से कोई ठोस समाधान निकलता है या प्रदर्शन आगे भी जारी रहता है। विपक्ष भी लगातार सरकार पर हमलावर है और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है।  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
Government planning stricter anti-paper leak law with up to 10 years imprisonment and ₹1 crore fine
10 साल की कैद, 1 करोड़ तक जुर्माना... पेपर लीक पर सख्त कानून लाने की तैयारी में सरकार

New Law Against Paper Leak: देशभर में पेपर लीक के मामलों और छात्रों के जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को और सुरक्षित बनाने के लिए कानून को सख्त करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, सरकार 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' में संशोधन कर पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के खिलाफ कड़े प्रावधान जोड़ सकती है। प्रस्तावित संशोधन को शुक्रवार (24 जुलाई) की केंद्रीय कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिल सकती है। क्या होंगे नए प्रावधान? सूत्रों के मुताबिक, संशोधित कानून के तहत पेपर लीक या उससे जुड़ी साजिश में दोषी पाए जाने वालों के लिए 10 साल तक की कैद और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य संगठित पेपर लीक गिरोहों पर सख्त कार्रवाई करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना है। हालांकि, इन प्रावधानों की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। मौजूदा कानून को और बनाया जाएगा सख्त केंद्र सरकार पहले से लागू सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि हाल के महीनों में सामने आए पेपर लीक मामलों और देशभर में छात्रों के प्रदर्शन के बाद सरकार कानून को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह कदम उठा रही है। पीएम मोदी ने भी किया नए बिल का जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात छात्रों के नाम जारी वीडियो संदेश में कहा कि सरकार ने पिछले ढाई महीनों में पेपर लीक के खिलाफ कई अहम कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने फास्ट-ट्रैक कोर्ट से जुड़े प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए थे और संबंधित विभागों ने मसौदा सरकार को सौंप दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस प्रस्ताव पर कैबिनेट बैठक में चर्चा होगी। कैबिनेट की मंजूरी और सहयोगियों के सुझावों के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि संसद के अगले सप्ताह से शुरू होने वाले दूसरे चरण में इस विधेयक को जल्द से जल्द पेश कर पारित कराने का प्रयास किया जाएगा। छात्रों के आंदोलन के बीच सरकार की पहल नीट पेपर लीक समेत विभिन्न परीक्षा अनियमितताओं को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष भी परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है। ऐसे में सरकार का यह प्रस्तावित संशोधन शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि, कानून का अंतिम स्वरूप कैबिनेट की मंजूरी और संसद में चर्चा के बाद ही स्पष्ट होगा।  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
NEET Paper Leak Protest
नीट पेपर लीक विवाद के बीच छात्रों का प्रदर्शन जारी, परीक्षा सुधार और जवाबदेही की मांग तेज

नई दिल्ली, एजेंसियां। नीट समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। छात्र संगठन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कदम और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। दिल्ली समेत कई राज्यों में छात्रों ने प्रदर्शन कर सरकार से शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की मांग उठाई है।   छात्रों की प्रमुख मांगें- पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और सख्त कानून   प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से लाखों मेहनती अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। छात्र संगठनों ने मांग की है कि परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी और प्रशासनिक सुधार लागू करने की मांग भी की जा रही है।   सरकार ने संवाद और सुधारों का दिया भरोसा   छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने कहा है कि युवाओं के हितों और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कदम उठाने और नए कानून की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही है। सरकार ने फास्ट-ट्रैक अदालतों के जरिए ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई की बात भी कही है।   केंद्र और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत पर नजर   प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की कोशिश भी जारी है। दोनों पक्षों के बीच होने वाली वार्ता से उम्मीद है कि परीक्षा सुधार, छात्रों की शिकायतों और आंदोलन को लेकर कोई समाधान निकल सकता है। हालांकि छात्र संगठन अपनी मांगों पर कायम हैं और ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

anjali kumari जुलाई 24, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi announces fast-track courts and strict action against those involved in paper leak cases.
PM मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक के दोषियों पर सख्ती, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा

देशभर में NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर जारी छात्र आंदोलनों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई और दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। प्रमुख बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों पर पहली बड़ी प्रतिक्रिया दी। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान। कहा- "युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।" संबंधित विभागों और अधिकारियों को जरूरी कार्रवाई के निर्देश। देशभर में NEET पेपर लीक को लेकर छात्र आंदोलन जारी। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। पीएम मोदी ने क्या कहा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा, "हमारे युवाओं के कल्याण और भविष्य से बढ़कर कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।" उन्होंने बताया कि सरकार ने संबंधित विभागों और अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं, ताकि पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों को जल्द सजा मिल सके। फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार पेपर लीक मामलों की तेजी से सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करेगी। उनका कहना है कि इससे दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में तेजी आएगी और छात्रों का शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होगा। छात्र आंदोलन के बीच आया बयान प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर सहित विभिन्न शहरों में प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता युवाओं का भविष्य प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार लगातार विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए फैसले ले रही है। उन्होंने दोहराया कि शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना सरकार की प्राथमिकता है और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। विपक्ष और आंदोलनकारी क्या मांग रहे हैं? NEET पेपर लीक विवाद के बाद विपक्ष और छात्र संगठनों ने सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और जवाबदेही तय करने की मांग की है। इसी बीच प्रधानमंत्री का यह बयान पूरे विवाद पर सरकार की पहली बड़ी सार्वजनिक प्रतिक्रिया माना जा रहा है।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
Rahul Gandhi reacts to PM Modi's statement on the NEET controversy, demanding action on students' key demands.
NEET विवाद पर राहुल गांधी का पलटवार: "युवाओं का भविष्य मोदी सरकार ने बर्बाद किया, पहले छात्रों की 3 मांगें पूरी करें"

NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश के युवाओं के भविष्य को सबसे अधिक नुकसान मोदी सरकार ने पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि केवल बयान देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि छात्रों की प्रमुख मांगों को स्वीकार करना होगा। राहुल गांधी ने क्या कहा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट के कुछ ही देर बाद राहुल गांधी ने X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को कमजोर होने दिया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्र लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है। छात्रों की तीन प्रमुख मांगें राहुल गांधी ने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्रों की तीन मुख्य मांगें हैं— केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए। देशभर के छात्रों से सार्वजनिक माफी मांगी जाए। प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कार्रवाई करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। राहुल गांधी का कहना है कि इन मांगों पर कार्रवाई किए बिना सरकार का कोई भी आश्वासन अधूरा रहेगा। PM मोदी ने क्या कहा था? इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और पेपर लीक के दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके। जयराम रमेश का भी हमला कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर संसद में चर्चा करने के बजाय सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन के बढ़ते दबाव के कारण प्रधानमंत्री को बयान देना पड़ा है। जयराम रमेश ने कहा कि संसद लोकतांत्रिक जवाबदेही का मंच है और प्रधानमंत्री को वहीं आकर विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए। NEET मुद्दे पर जारी है सियासी घमासान NEET पेपर लीक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। एक ओर सरकार फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त कार्रवाई की बात कर रही है, वहीं विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, जवाबदेही तय करने और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग पर अड़ा हुआ है। संसद के मानसून सत्र में भी यह मुद्दा लगातार हंगामे का कारण बना हुआ है।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
Former Pakistan cricketer Danish Kaneria reacts to the NEET protest, sparking widespread debate on social media.
NEET प्रदर्शन पर दानिश कनेरिया की टिप्पणी से विवाद, सोशल मीडिया पर घिरे पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर

Danish Kaneria on NEET Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे NEET परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों के प्रदर्शन पर पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर दानिश कनेरिया की टिप्पणी विवादों में आ गई है। कनेरिया ने सोशल मीडिया पर प्रदर्शन को लेकर अपनी राय व्यक्त की, जिसके बाद कई भारतीय यूजर्स ने उनकी आलोचना शुरू कर दी। क्या कहा दानिश कनेरिया ने? पूर्व पाकिस्तानी स्पिनर दानिश कनेरिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उन्हें भारत में होने वाले कई विरोध प्रदर्शन एक जैसे लगते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे प्रदर्शनों में नारेबाजी और अपशब्द अधिक होते हैं, जबकि समाधान और सार्थक चर्चा कम दिखाई देती है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मुद्दे पर तथ्य सामने आने से पहले विरोध शुरू हो जाता है और इस तरह का माहौल देश की प्रगति के लिए उचित नहीं है। सोशल मीडिया पर हुई तीखी प्रतिक्रिया कनेरिया के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उनकी आलोचना की। कुछ यूजर्स ने कहा कि भारत के आंतरिक मामलों पर किसी विदेशी नागरिक को टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, जबकि कुछ ने उनके क्रिकेट करियर और विवादों का भी जिक्र किया। कौन हैं दानिश कनेरिया? दानिश कनेरिया पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व लेग स्पिनर हैं। उन्होंने वर्ष 2000 से 2010 के बीच पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला। करियर की प्रमुख बातें: 61 टेस्ट मैच 261 टेस्ट विकेट पाकिस्तान के सबसे सफल टेस्ट स्पिनरों में शामिल हालांकि, वर्ष 2012 में इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने स्पॉट फिक्सिंग मामले में उन्हें आजीवन प्रतिबंधित कर दिया था। बाद में उन्होंने फिक्सिंग में शामिल होने की बात स्वीकार भी की थी। शाहिद अफरीदी पर लगाए थे गंभीर आरोप दानिश कनेरिया पहले भी सुर्खियों में रह चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान टीम के दौरान उनके साथ धार्मिक आधार पर भेदभाव किया गया। कनेरिया ने पूर्व कप्तान Shahid Afridi पर यह आरोप भी लगाया था कि वे उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव डालते थे और उनके साथ भोजन नहीं करते थे। NEET प्रदर्शन क्यों हो रहा है? दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र कथित NEET परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों और सरकार के बीच भी बयानबाजी जारी है।  

surbhi जुलाई 23, 2026 0
Paper Leak Controversy
पेपर लीक विवाद पर अन्ना हजारे का पीएम मोदी को पत्र, धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग

अहिल्यानगर, एजेंसियां। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शन, पेपर लीक के आरोपों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों के बीच जवाबदेही तय करना आवश्यक है। हजारे का कहना है कि मंत्री का इस्तीफा सरकार की कमजोरी नहीं, बल्कि सुशासन और जवाबदेही का संदेश होगा।   छात्रों की नाराजगी को गंभीरता से लेने की अपील   अपने पत्र में अन्ना हजारे ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और हालिया हिंसा व पुलिस कार्रवाई पर चिंता जताई। उन्होंने लिखा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसा और अत्यधिक बल प्रयोग किसी के हित में नहीं है। उनके अनुसार, देशभर के लाखों युवा पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से परेशान हैं, इसलिए उनकी नाराजगी को केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा मानकर नहीं देखा जाना चाहिए।   पेपर लीक और जवाबदेही पर उठाए सवाल   हजारे ने अपने पत्र में नीट परीक्षा से जुड़े विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में बार-बार सामने आ रही अनियमितताएं गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक विफलताओं की जिम्मेदारी तय करने के बजाय उसका दोष अधीनस्थ अधिकारियों पर डाल दिया जाता है, जबकि सफलता का श्रेय सरकार लेती है। उन्होंने कहा कि जवाबदेही तय करने के लिए शिक्षा मंत्री का इस्तीफा उचित कदम होगा।   'सरकार की ताकत नहीं घटेगी, व्यवस्था मजबूत होगी'   अन्ना हजारे ने कहा कि पिछले कई दिनों से छात्र और अभिभावक शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे हैं और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार, जवाबदेही के आधार पर मंत्री का इस्तीफा लेने से सरकार की शक्ति कम नहीं होगी, बल्कि अन्य मंत्रियों को भी अपने विभागों के बेहतर संचालन का संदेश मिलेगा और शासन व्यवस्था में सुधार आएगा।   संवाद को बताया लोकतंत्र का सबसे बेहतर रास्ता   हजारे ने पत्र में यह भी कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारियों से बातचीत करनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से जारी विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल के बावजूद सरकार की ओर से कोई वरिष्ठ प्रतिनिधि बातचीत के लिए आगे नहीं आया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद हमेशा टकराव से बेहतर विकल्प होता है और नागरिकों की आवाज को सम्मानपूर्वक सुनना ही लोकतांत्रिक मूल्यों की असली परीक्षा है।

anjali kumari जुलाई 23, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 23, 2026 0