Exam Reforms

Congress MP Shashi Tharoor speaking in the Lok Sabha during the debate on the Anti-Paper Leak Bill
Parliament Session: एंटी पेपर लीक बिल पर शशि थरूर के सवाल, बोले- सिर्फ सजा नहीं, लीक रोकने का पुख्ता इंतजाम भी हो

Parliament Session: संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में लोक परीक्षा (Prevention of Unfair Means) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा जारी है। सरकार इस विधेयक को पारित कराने की कोशिश में है, जबकि विपक्ष इसके कई प्रावधानों पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि सिर्फ कड़ी सजा का प्रावधान पर्याप्त नहीं है, बल्कि पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत और प्रभावी व्यवस्था भी बनाई जानी चाहिए। वहीं संसद के भीतर और बाहर विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष का विरोध प्रदर्शन भी जारी है। शशि थरूर ने उठाए अहम सवाल कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि विधेयक में दोषियों के लिए सख्त सजा और फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान तो किया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को पहले ही कैसे रोका जाएगा। उन्होंने कहा कि केवल सजा बढ़ाने से समस्या खत्म नहीं होगी। थरूर ने फास्ट ट्रैक अदालतों की मौजूदा स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले से ही इन अदालतों में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। यदि सरकार इस कानून को प्रभावी बनाना चाहती है तो नए जजों की नियुक्ति, अतिरिक्त अदालतों की स्थापना और पर्याप्त संख्या में अभियोजकों की व्यवस्था भी करनी होगी। संसद में हंगामे के बीच कार्यवाही प्रभावित लोकसभा की कार्यवाही विपक्ष के हंगामे के कारण कुछ समय के लिए दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष राम मंदिर चंदा मामले, जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई और अन्य मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है। लगातार नारेबाजी के चलते सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। राहुल गांधी से रिजिजू की अपील संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा में हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि यदि राहुल गांधी 20-30 मिनट बोलते हैं तो कम से कम पांच मिनट इस महत्वपूर्ण विधेयक पर भी अपने सुझाव दें। रिजिजू ने कहा कि छात्रों से जुड़े इतने अहम कानून पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए। पंजाब पेपर लीक मामले पर कांग्रेस का प्रदर्शन संसद परिसर में पंजाब कांग्रेस के सांसदों ने राज्य में कथित पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन किया। सांसदों ने पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस के इस्तीफे की मांग करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। जॉन ब्रिटास ने उठाया दिल्ली पुलिस का मुद्दा राज्यसभा में CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि छात्र नेता आइशी घोष की तलाश में दिल्ली पुलिस वामपंथी दल के कार्यालय पहुंची थी। उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्रीय राजनीतिक दल के कार्यालय में इस तरह पुलिस का पहुंचना गंभीर सवाल खड़े करता है। अमित शाह पेश करेंगे अहम विधेयक आज लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश करेंगे। इसके अलावा सदन में कई अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और पारित होने की संभावना है। सरकार की कोशिश है कि मानसून सत्र के दौरान प्रमुख विधायी कार्य पूरे किए जाएं, जबकि विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।  

kalpana जुलाई 29, 2026 0
Union Minister Kiren Rijiju speaking in Parliament during the debate on the Anti-Paper Leak Bill 2026
Anti Paper Leak Bill: रिजिजू का विपक्ष पर हमला, बोले- बिल पर चर्चा से बच रही कांग्रेस, राहुल गांधी अभद्र भाषा का कर रहे इस्तेमाल

संसद में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 (Anti Paper Leak Bill) पर चर्चा के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और विपक्षी दल विधेयक के प्रावधानों पर चर्चा करने के बजाय केवल राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने राहुल गांधी पर संसद में अभद्र भाषा के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया। रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्रों की मांगों को ध्यान में रखते हुए पेपर लीक रोकने के लिए यह महत्वपूर्ण विधेयक लेकर आई है, लेकिन विपक्ष इस पर रचनात्मक चर्चा करने से बच रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि सभी दल अपने सुझाव दें ताकि परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाया जा सके। 'राहुल गांधी बिल पर बोलें, सुझाव दें' केंद्रीय मंत्री ने कहा, "हमें उम्मीद है कि आज राहुल गांधी और विपक्ष के अन्य नेता इस विधेयक पर अपनी बात रखेंगे। यह कानून छात्रों के हित में लाया गया है और प्रधानमंत्री के फैसले से छात्रों में भरोसा बढ़ा है। अगर कांग्रेस के पास परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के सुझाव हैं, तो सरकार उनका स्वागत करेगी।" उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप करना उचित नहीं है और विपक्ष को रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। राहुल गांधी की भाषा पर भी जताई आपत्ति किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी की भाषा को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसद में लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी जिस तरह की अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह संसदीय लोकतंत्र की गरिमा के अनुरूप नहीं है। मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन संवाद हमेशा सभ्य भाषा में होना चाहिए। ऐसी भाषा लोकतंत्र और देश दोनों के लिए ठीक नहीं है।" प्रियंका गांधी पर भी साधा निशाना रिजिजू ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने मंगलवार को चर्चा में हिस्सा तो लिया, लेकिन उनका पूरा भाषण विधेयक के दायरे से बाहर के मुद्दों पर केंद्रित रहा। उन्होंने कहा, "विपक्ष के लगभग सभी सांसदों ने बिल के मूल प्रावधानों पर चर्चा करने के बजाय दूसरे विषय उठाए। हमें उम्मीद है कि राहुल गांधी अपने भाषण में कम से कम कुछ समय इस महत्वपूर्ण विधेयक और परीक्षा सुधार के सुझावों पर जरूर बोलेंगे।" क्या है Anti Paper Leak Bill? लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है। प्रस्तावित कानून में पेपर लीक और परीक्षा में धोखाधड़ी के मामलों में कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इस कानून से भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा छात्रों का भरोसा मजबूत होगा।  

kalpana जुलाई 29, 2026 0
NEET Paper Leak Protest
नीट पेपर लीक विवाद के बीच छात्रों का प्रदर्शन जारी, परीक्षा सुधार और जवाबदेही की मांग तेज

नई दिल्ली, एजेंसियां। नीट समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। छात्र संगठन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कदम और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। दिल्ली समेत कई राज्यों में छात्रों ने प्रदर्शन कर सरकार से शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की मांग उठाई है।   छात्रों की प्रमुख मांगें- पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और सख्त कानून   प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से लाखों मेहनती अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। छात्र संगठनों ने मांग की है कि परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी और प्रशासनिक सुधार लागू करने की मांग भी की जा रही है।   सरकार ने संवाद और सुधारों का दिया भरोसा   छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने कहा है कि युवाओं के हितों और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कदम उठाने और नए कानून की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही है। सरकार ने फास्ट-ट्रैक अदालतों के जरिए ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई की बात भी कही है।   केंद्र और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत पर नजर   प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की कोशिश भी जारी है। दोनों पक्षों के बीच होने वाली वार्ता से उम्मीद है कि परीक्षा सुधार, छात्रों की शिकायतों और आंदोलन को लेकर कोई समाधान निकल सकता है। हालांकि छात्र संगठन अपनी मांगों पर कायम हैं और ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

anjali kumari जुलाई 24, 2026 0
NEET aspirants appear for examination as calls grow for stronger security measures after paper leak controversy.
NEET परीक्षा में JEE जैसे सुरक्षा इंतजाम की मांग तेज, पेपर लीक के बाद उठे सवाल

NEET-UG paper leak controversy मामले के बाद मेडिकल प्रवेश परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की मांग तेज हो गई है। People's Health Organization India (PHO) ने कहा है कि NEET परीक्षा में अब इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE की तरह मजबूत सुरक्षा व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। संगठन का कहना है कि लगातार सामने आ रहे विवादों और पेपर लीक की घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली पर लोगों का भरोसा कमजोर कर दिया है। PHO ने मेडिकल परीक्षा प्रक्रिया में तत्काल ढांचागत सुधार की मांग की है। “स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ेगा असर” पीएचओ ने कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो इसका असर भविष्य में देश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है। हर साल करीब 22 लाख छात्र मेडिकल प्रवेश परीक्षा में शामिल होते हैं, जबकि देश के 824 मेडिकल कॉलेजों में लगभग 1.3 लाख सीटें ही उपलब्ध हैं। ऐसे में प्रतियोगिता बेहद कठिन हो चुकी है। मेडिकल शिक्षा के व्यवसायीकरण पर चिंता पीएचओ के संस्थापक Ishwar Gilada ने कहा कि देश में उपलब्ध मेडिकल सीटों में आधे से ज्यादा निजी संस्थानों में हैं, जहां फीस 1 करोड़ से 2 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि असली समस्या मेडिकल शिक्षा का तेजी से बढ़ता व्यवसायीकरण है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या अभी भी मांग के मुकाबले काफी कम है, जिसके कारण छात्रों और अभिभावकों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ता है। JEE जैसी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग संगठन ने सुझाव दिया कि NEET परीक्षा में भी JEE की तरह डिजिटल निगरानी, सुरक्षित प्रश्नपत्र वितरण, परीक्षा केंद्रों पर कड़ी जांच और तकनीकी सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सके। पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है।  

surbhi मई 25, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Prime Minister Narendra Modi announces fast-track courts and strict action against those involved in paper leak cases.
राष्ट्रीय

PM मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक के दोषियों पर सख्ती, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा

kalpana जुलाई 23, 2026 0