राष्ट्रीय

Rijiju Targets Opposition Over Anti-Paper Leak Bill

Anti Paper Leak Bill: रिजिजू का विपक्ष पर हमला, बोले- बिल पर चर्चा से बच रही कांग्रेस, राहुल गांधी अभद्र भाषा का कर रहे इस्तेमाल

kalpana जुलाई 29, 2026 0
Union Minister Kiren Rijiju speaking in Parliament during the debate on the Anti-Paper Leak Bill 2026
Kiren Rijiju Criticizes Opposition During Anti-Paper Leak Bill Debate

संसद में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 (Anti Paper Leak Bill) पर चर्चा के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और विपक्षी दल विधेयक के प्रावधानों पर चर्चा करने के बजाय केवल राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने राहुल गांधी पर संसद में अभद्र भाषा के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया।

रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्रों की मांगों को ध्यान में रखते हुए पेपर लीक रोकने के लिए यह महत्वपूर्ण विधेयक लेकर आई है, लेकिन विपक्ष इस पर रचनात्मक चर्चा करने से बच रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि सभी दल अपने सुझाव दें ताकि परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाया जा सके।

'राहुल गांधी बिल पर बोलें, सुझाव दें'

केंद्रीय मंत्री ने कहा, "हमें उम्मीद है कि आज राहुल गांधी और विपक्ष के अन्य नेता इस विधेयक पर अपनी बात रखेंगे। यह कानून छात्रों के हित में लाया गया है और प्रधानमंत्री के फैसले से छात्रों में भरोसा बढ़ा है। अगर कांग्रेस के पास परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के सुझाव हैं, तो सरकार उनका स्वागत करेगी।"

उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप करना उचित नहीं है और विपक्ष को रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए।

राहुल गांधी की भाषा पर भी जताई आपत्ति

किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी की भाषा को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसद में लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन होना चाहिए।

उन्होंने कहा, "राहुल गांधी जिस तरह की अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह संसदीय लोकतंत्र की गरिमा के अनुरूप नहीं है। मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन संवाद हमेशा सभ्य भाषा में होना चाहिए। ऐसी भाषा लोकतंत्र और देश दोनों के लिए ठीक नहीं है।"

प्रियंका गांधी पर भी साधा निशाना

रिजिजू ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने मंगलवार को चर्चा में हिस्सा तो लिया, लेकिन उनका पूरा भाषण विधेयक के दायरे से बाहर के मुद्दों पर केंद्रित रहा।

उन्होंने कहा, "विपक्ष के लगभग सभी सांसदों ने बिल के मूल प्रावधानों पर चर्चा करने के बजाय दूसरे विषय उठाए। हमें उम्मीद है कि राहुल गांधी अपने भाषण में कम से कम कुछ समय इस महत्वपूर्ण विधेयक और परीक्षा सुधार के सुझावों पर जरूर बोलेंगे।"

क्या है Anti Paper Leak Bill?

लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है। प्रस्तावित कानून में पेपर लीक और परीक्षा में धोखाधड़ी के मामलों में कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इस कानून से भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा छात्रों का भरोसा मजबूत होगा।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

kalpana

राष्ट्रीय

View more
Search Operation in Uri Sector
LoC पर बारूदी सुरंग विस्फोट में सेना के दो जवान घायल, उरी सेक्टर में सर्च ऑपरेशन तेज

गश्त के दौरान हुआ हादसा   श्रीनगर, एजेंसियां। जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के उरी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास बारूदी सुरंग (लैंडमाइन) में विस्फोट होने से भारतीय सेना के दो जवान घायल हो गए। यह हादसा कमालकोट सब-सेक्टर स्थित अपर गढ़ फॉरवर्ड पोस्ट के पास गश्त के दौरान हुआ। दोनों जवानों को तत्काल सुरक्षित निकालकर हेलीकॉप्टर से श्रीनगर के सेना के बेस अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार, दोनों की हालत स्थिर है।   बारिश के बीच हादसे की आशंका   प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह विस्फोट संभवतः एक पुरानी लैंडमाइन के सक्रिय होने से हुआ। रक्षा अधिकारियों का कहना है कि मानसून के दौरान भारी बारिश और मिट्टी के कटाव के कारण LoC के आसपास बिछाई गई बारूदी सुरंगें अपनी जगह से खिसक जाती हैं, जिससे ऐसे हादसों का खतरा बढ़ जाता है। घटना के सही कारणों की जांच की जा रही है।   इलाके में सर्च और सैनिटाइजेशन अभियान   घटना के तुरंत बाद सेना ने पूरे इलाके में सर्च और सैनिटाइजेशन ऑपरेशन शुरू कर दिया। जवान यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आसपास कहीं अन्य सक्रिय विस्फोटक या बारूदी सुरंगें तो नहीं हैं। सुरक्षा एजेंसियां पूरे क्षेत्र की गहन जांच कर रही हैं ताकि आगे किसी तरह की दुर्घटना न हो।   सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ाई गई   इस घटना के बाद नियंत्रण रेखा के संवेदनशील इलाकों में सेना ने गश्त और निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों ने कहा कि सीमा पर तैनात जवानों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि जांच पूरी होने के बाद हादसे के कारणों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

abhishek singh जुलाई 29, 2026 0
Farmers protest in Bhopal demanding 100% government procurement of moong and an end to the token system for fertilizer distribution

Bhopal Farmers Protest: भोपाल में Gen-Z किसानों का बड़ा आंदोलन, CM हाउस मार्च की तैयारी; मूंग खरीदी और खाद वितरण पर अड़े किसान

Mallikarjun Kharge and JP Nadda during a heated debate in the Rajya Sabha over the CJP protest

राज्यसभा में CJP प्रदर्शन पर घमासान, खरगे-नड्डा आमने-सामने; बोले- 'एक्टिविस्ट बनेंगे तो जेल जाना पड़ेगा'

Rahul Gandhi and Priyanka Gandhi addressing the media during the Parliament session while criticizing Education Minister Prahlad Joshi

राहुल-प्रियंका का शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पर हमला, बोले- 'बलात्कारियों का बचाव करने वाले को बनाया मंत्री'

CJP leaders addressing the media over FIR withdrawal and warning the Centre against backtracking on its assurances
CJP ने केंद्र सरकार को दी चेतावनी, बोली- सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ में छात्रों से धोखा न करे सरकार

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार पर छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने के वादे को पूरा न करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने लिखित आश्वासन नहीं दिया और अपने वादे से पीछे हटी, तो देशभर में एक बार फिर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि सरकार ने अब तक छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने तथा भविष्य में कोई कार्रवाई नहीं करने का लिखित भरोसा नहीं दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी का सहारा लेकर अपने वादे से पीछे हटने की कोशिश कर सकती है। 'सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का राजनीतिक इस्तेमाल न हो' CJP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि पार्टी को आशंका है कि केंद्र सरकार और भाजपा शासित राज्य 20 जुलाई के प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर जारी रखने और उन्हें परेशान करने के लिए कर सकते हैं। पार्टी ने कहा कि अदालत की टिप्पणी का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए और इसे छात्रों के साथ किए गए वादे से मुकरने का आधार नहीं बनाया जा सकता। 'छात्रों के भरोसे के साथ धोखा नहीं होना चाहिए' सौरभ दास ने कहा कि हजारों छात्रों और युवा प्रदर्शनकारियों को जो भरोसा दिया गया था, उसे बाद की कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर कमजोर या निष्प्रभावी नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से युवाओं का सरकार और व्यवस्था पर विश्वास टूटेगा। उन्होंने दावा किया कि अंतरिम आदेश में ऐसा कुछ भी नहीं है, जो केंद्र या राज्य सरकारों को एफआईआर वापस लेने या शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई रोकने से रोकता हो। ऐसे में सरकार को अपने वादे से पीछे हटने के लिए अदालत के आदेश का हवाला नहीं देना चाहिए। देशव्यापी आंदोलन की दी चेतावनी CJP ने कहा कि यदि सरकार ने अपने आश्वासन का पालन नहीं किया, तो संगठन के पास दोबारा देशव्यापी आंदोलन शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। पार्टी ने अपने बयान में कहा, "जो सरकार अपना वादा तोड़ती है, वह युवाओं से चुप रहने की उम्मीद नहीं कर सकती। यदि छात्रों को दी गई गारंटी का सम्मान नहीं किया गया, तो देश की सड़कें एक बार फिर युवाओं की आवाज बनेंगी।" मंगलवार तक दिया था अल्टीमेटम सौरभ दास ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि सरकार को मंगलवार तक का समय दिया गया था, लेकिन तय समय सीमा समाप्त होने से पहले भी कोई लिखित आश्वासन नहीं मिला। उन्होंने दोहराया कि CJP ऐसा कोई फैसला स्वीकार नहीं करेगा, जो सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों को दिए गए आश्वासन के विपरीत हो।  

kalpana जुलाई 29, 2026 0
Paytm Payments Bank logo with Delhi High Court after the court ordered the bank's winding up

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: Paytm Payments Bank होगा बंद, पूर्व SBI अधिकारी बने आधिकारिक लिक्विडेटर

Rajasthan Tiger Reserve

राजस्थान को जल्द मिलेगा नया टाइगर रिजर्व, बाघों के संरक्षण के लिए बढ़ेगा वन क्षेत्र

Yoga guru Baba Ramdev speaking at a public event in Haridwar while commenting on the Jantar Mantar student protest

बाबा रामदेव का छात्र आंदोलन पर निशाना, बोले- 'Gen Z ने जंतर-मंतर पर भारत को किया बदनाम'

RSS Chief Mohan Bhagwat
RSS प्रमुख मोहन भागवत बोले- शादी से आता है अनुशासन, परिवार व्यवस्था समाज की मजबूती का आधार

परिवार और सामाजिक व्यवस्था पर दिया बयान   नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने विवाह और परिवार व्यवस्था को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि शादी जीवन में अनुशासन लाती है और व्यक्ति को जिम्मेदारियों का एहसास कराती है। उन्होंने परिवार को समाज की मूल इकाई बताते हुए कहा कि मजबूत परिवार व्यवस्था से समाज भी मजबूत होता है।   विवाह को बताया जिम्मेदारी का माध्यम   मोहन भागवत ने कहा कि विवाह केवल व्यक्तिगत संबंध नहीं बल्कि जिम्मेदारी और कर्तव्यों से जुड़ी व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि शादी के बाद व्यक्ति अपने जीवन में अधिक अनुशासन और संतुलन लाने का प्रयास करता है।   परिवार व्यवस्था पर दिया जोर   RSS प्रमुख ने कहा कि भारतीय संस्कृति में परिवार का विशेष महत्व रहा है। परिवार व्यक्ति को संस्कार, सहयोग और सामाजिक मूल्यों से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के बेहतर निर्माण के लिए परिवार व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना जरूरी है।   युवाओं को लेकर भी रखी बात   मोहन भागवत ने युवाओं से जीवन में जिम्मेदारी, संयम और मूल्यों को महत्व देने की अपील की। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में बदलाव के बावजूद परिवार और सामाजिक संबंधों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।   बयान पर शुरू हुई चर्चा   मोहन भागवत के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोगों ने इसे पारिवारिक मूल्यों से जोड़कर देखा, जबकि कुछ लोगों ने इसे व्यक्तिगत जीवन से जुड़े विषय पर टिप्पणी बताया।

abhishek singh जुलाई 29, 2026 0
मानहानि मामले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ जमानती वारंट जारी

मानहानि मामले में मल्लिकार्जुन खरगे की बढ़ी मुश्किलें, कोर्ट ने जारी किया जमानती वारंट

Congress MP Shashi Tharoor speaking in the Lok Sabha during the debate on the Anti-Paper Leak Bill

Parliament Session: एंटी पेपर लीक बिल पर शशि थरूर के सवाल, बोले- सिर्फ सजा नहीं, लीक रोकने का पुख्ता इंतजाम भी हो

Union Minister Kiren Rijiju speaking in Parliament during the debate on the Anti-Paper Leak Bill 2026

Anti Paper Leak Bill: रिजिजू का विपक्ष पर हमला, बोले- बिल पर चर्चा से बच रही कांग्रेस, राहुल गांधी अभद्र भाषा का कर रहे इस्तेमाल

0 Comments

Top week

Prime Minister Narendra Modi announces fast-track courts and strict action against those involved in paper leak cases.
राष्ट्रीय

PM मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक के दोषियों पर सख्ती, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा

kalpana जुलाई 23, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?