नालंदा/पटना: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) भर्ती परीक्षा घोटाले की जांच में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को बड़ी सफलता मिली है। जांच एजेंसी ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में कार्यरत टेक्निकल असिस्टेंट रोशन कुमार को मुंबई से गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने परीक्षा शुरू होने से पहले आंसर-की हासिल कर उसे आगे पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। मुंबई के BARC परिसर से हुई गिरफ्तारी EOU की विशेष टीम ने गुप्त अभियान चलाकर मुंबई के ट्रॉम्बे स्थित BARC परिसर से रोशन कुमार को गिरफ्तार किया। वह नालंदा जिले के कंकड़िया गांव का रहने वाला है। जांच एजेंसी के अनुसार, तीन सदस्यीय टीम 3 अगस्त को पटना से मुंबई पहुंची थी और अब आरोपी को पूछताछ के लिए पटना लाया जा रहा है। जैमर कंपनी के स्टाफ बनकर परीक्षा केंद्र में घुसने का आरोप जांच में सामने आया है कि परीक्षा के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर जैमर कंपनी के कर्मचारी के रूप में परीक्षा केंद्र में प्रवेश किया। EOU अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र की आंसर-की उसके पास कैसे पहुंची, किसने उपलब्ध कराई और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे। पहले भी हो चुकी हैं कई गिरफ्तारियां इस मामले में इससे पहले बायोमेट्रिक सिस्टम से जुड़ी कंपनी के सिटी को-ऑर्डिनेटर ब्रजेश यादव को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं नालंदा के सोहसराय स्थित पीएल साहू हाई स्कूल परीक्षा केंद्र से एक अभ्यर्थी और बायोमेट्रिक कंपनी के दो कर्मचारियों को भी पकड़ा गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि परीक्षा में संगठित तरीके से धांधली की गई। 11 लाख अभ्यर्थियों पर पड़ा असर 14 से 21 अप्रैल 2026 के बीच नौ पालियों में आयोजित AEDO भर्ती परीक्षा 935 पदों के लिए हुई थी, जिसमें करीब 11 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। पेपर लीक और ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल के आरोप सामने आने के बाद पूरी परीक्षा रद्द कर दी गई। अब तक मुंगेर, नालंदा, गया, बेगूसराय, वैशाली और समस्तीपुर समेत छह जिलों में मामले दर्ज किए जा चुके हैं। जांच के दौरान तीन दर्जन से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि EOU पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
पंजाब में फार्मेसी ऑफिसर परीक्षा पर घमासान, पेपर लीक नहीं बल्कि हाईटेक नकल का मामला चंडीगढ़, एजेंसियां। पंजाब में फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। 19 जुलाई 2026 को आयोजित भर्ती परीक्षा के दौरान पुलिस ने हाईटेक नकल के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया था। इसके बाद विपक्ष ने सरकार पर परीक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, सरकार और पुलिस के मुताबिक प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले लीक नहीं हुआ था। परीक्षा के दौरान पकड़ा गया नकल का रैकेट पुलिस ने परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए नकल कराने की कोशिश का खुलासा किया। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों के पास छोटे कैमरे और वायरलेस उपकरण पाए गए थे। पुलिस कार्रवाई में कई अभ्यर्थियों और कथित गिरोह से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया गया। मामले में इस्तेमाल किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए गए हैं। विपक्ष ने सरकार को घेरा घटना सामने आने के बाद पंजाब में राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए मामले में जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई की मांग की। विपक्ष ने भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए परीक्षा में गड़बड़ी के मुद्दे को उठाया है। CM भगवंत मान बोले- पेपर लीक नहीं हुआ मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पंजाब में पिछले कई वर्षों में कोई भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ है। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने भी इसे पेपर लीक के बजाय परीक्षा के दौरान पकड़ा गया नकल का मामला बताया है। इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल विवाद परीक्षा में पकड़े गए हाईटेक नकल रैकेट और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG 2026 पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों को लेकर अहम स्पष्टीकरण दिया है। अदालत ने कहा कि दिल्ली और संबंधित राज्य सरकारें कानून के मुताबिक ऐसे मामलों में FIR वापस लेने या बंद करने पर विचार कर सकती हैं। हालांकि, गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी लोगों को इस राहत से बाहर रखा गया है। गंभीर अपराध के मामलों में नहीं मिलेगी राहत सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज हर मामले को स्वतः खत्म करने का निर्देश नहीं दिया गया है। जिन लोगों पर गंभीर अपराधों के आरोप हैं या जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है, उनके मामलों की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकती है। अदालत ने यह भी साफ किया कि पहले दिए गए आदेश में इस्तेमाल किए गए ‘criminal antecedents’ शब्द का मतलब गंभीर आपराधिक मामलों से है। इस स्पष्टीकरण के बाद राज्यों के लिए गैर-गंभीर मामलों में FIR वापस लेने का रास्ता साफ हुआ है। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, कोर्ट की चिंता सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल ऐसे युवा, जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक आरोप नहीं हैं, उन्हें मुकदमों के डर के कारण अपनी पढ़ाई जारी रखने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। अदालत का रुख छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए राहत देने वाला माना जा रहा है। यह मामला उन प्रदर्शनों से जुड़ा है जो NEET-UG 2026 पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के विरोध में दिल्ली समेत कई राज्यों में हुए थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई थीं। राज्यों को कानून के अनुसार फैसला लेने की छूट सुप्रीम कोर्ट के ताजा स्पष्टीकरण का मतलब यह है कि राज्य सरकारें संबंधित मामलों की प्रकृति को देखते हुए कानूनी प्रक्रिया के तहत FIR वापस लेने या केस बंद करने की कार्रवाई कर सकती हैं। यानी कोर्ट ने सभी मामलों को एक साथ खत्म करने का आदेश नहीं दिया है। इससे उन छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है जिनके खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने के कारण मामले दर्ज हुए थे, लेकिन उन पर गंभीर आपराधिक आरोप नहीं हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनुचित साधनों पर शिकंजा कसने के लिए लाया गया लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 अब कानून बन गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विधेयक को मंजूरी दे दी है। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के साथ ही इसे कानून का रूप मिल गया है। पेपर लीक और नकल पर सख्ती नए कानून का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली पेपर लीक, नकल और संगठित गड़बड़ियों पर रोक लगाना है। परीक्षा प्रणाली में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ पहले की तुलना में अधिक कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। दोषियों पर बढ़ेगी कानूनी कार्रवाई संशोधित कानून में पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों को बढ़ावा देने वाले मामलों में सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का लक्ष्य परीक्षा माफिया और संगठित नकल गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई कर परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाना है। फास्ट ट्रैक कोर्ट और विशेष जांच व्यवस्था कानून में परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच और सुनवाई को तेजी से पूरा करने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है। संसद में चर्चा के दौरान फास्ट ट्रैक कोर्ट और विशेष टास्क फोर्स जैसे प्रावधानों का उल्लेख किया गया था, ताकि मामलों का निपटारा लंबा न खिंचे। छात्रों के हित में परीक्षा व्यवस्था मजबूत करने का दावा सरकार का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है। नए कानून से प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का रास्ता मजबूत होगा और मेहनत के आधार पर चयन की प्रक्रिया में छात्रों का भरोसा बढ़ाने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परीक्षा सुधार कानून पर जारी नए वीडियो को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री के वीडियो पर सोशल मीडिया के जरिए तंज कसा है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर टिप्पणी करते हुए लिखा, "देश के भविष्य से ज्यादा आपकी स्किन चमक रही है।" दीपके का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर बहस जारी है। परीक्षा सुधार कानून को लेकर जारी किया था वीडियो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (30 जुलाई) को सेल्फी स्टाइल में एक वीडियो साझा किया था। इस वीडियो में उन्होंने हाल ही में पारित लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को देश की परीक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और भरोसेमंद बनाना है ताकि मेहनत करने वाले छात्रों के साथ न्याय हो सके। वीडियो में प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक कराने वाले "पेपर माफिया" को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार तकनीक के बेहतर इस्तेमाल और सख्त कानूनी प्रावधानों के जरिए परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। CJP लगातार उठा रही है पेपर लीक का मुद्दा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पिछले कई महीनों से परीक्षा पेपर लीक के मामलों को लेकर आंदोलन कर रही है। पार्टी का कहना है कि बार-बार होने वाली परीक्षा अनियमितताओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। CJP की मांग है कि पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और भर्ती परीक्षाओं में जवाबदेही तय की जाए। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री के वीडियो पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। संसद से मिला नए कानून को मंजूरी पेपर लीक की घटनाओं के बाद केंद्र सरकार द्वारा लाया गया लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 अब संसद से पारित हो चुका है। राज्यसभा ने गुरुवार को ध्वनिमत से इस विधेयक को मंजूरी दे दी। इससे पहले लोकसभा भी इसे पारित कर चुकी थी। नए कानून के तहत प्रश्नपत्र लीक करने, परीक्षा में संगठित धोखाधड़ी करने या ऐसी गतिविधियों में शामिल पाए जाने वालों के लिए 10 वर्ष तक की सजा और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य परीक्षा माफिया पर सख्त कार्रवाई कर युवाओं का विश्वास बहाल करना है। सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो और उस पर अभिजीत दीपके की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों को लेकर बहस तेज हो गई है। जहां एक ओर समर्थक परीक्षा सुधार कानून का स्वागत कर रहे हैं, वहीं विपक्षी दल और छात्र संगठनों का कहना है कि केवल कानून बनाने से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की भी आवश्यकता है।
लोकसभा में लोक परीक्षा (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को "कैमरे का एंगल नहीं, बल्कि दिल का एंगल बदलना पड़ेगा" और युवाओं से जुड़े सवालों का जवाब देना होगा। युवाओं पर कार्रवाई को लेकर सरकार से सवाल प्रियंका गांधी ने कहा कि देशभर में छात्रों के आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पैलेट गन और AK-47 जैसे हथियारों के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया। उन्होंने पूछा कि क्या यह फैसला प्रधानमंत्री या गृह मंत्री के स्तर पर लिया गया था और कहा कि पूरे देश के युवा इसका जवाब चाहते हैं। पेपर लीक और रोजगार के मुद्दे पर सरकार को घेरा कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि पिछले दस वर्षों में 152 पेपर लीक की घटनाओं ने करोड़ों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद पेपर लीक माफिया के खिलाफ कोई बड़ी और प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तथा किसी बड़े आरोपी को सजा नहीं मिली। उनके मुताबिक, इससे युवाओं का सरकार पर भरोसा लगातार कमजोर हुआ है। शिक्षा व्यवस्था पर लगाए गंभीर आरोप प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के जरिए परीक्षा प्रणाली का अत्यधिक केंद्रीकरण किया गया, जिससे कई नई समस्याएं सामने आईं। उन्होंने यह भी दावा किया कि शिक्षा संस्थानों में वैचारिक हस्तक्षेप बढ़ा है और शिक्षा का बजट वास्तविक रूप से घटता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है तो केवल सख्त कानून बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, जवाबदेह और भरोसेमंद बनाना होगा। पूर्व शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का भी किया जिक्र प्रियंका गांधी ने अपने भाषण में पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का उल्लेख करते हुए कहा कि जब देश के कई छात्र पेपर लीक से प्रभावित थे और कुछ परिवार गहरे संकट से गुजर रहे थे, तब सरकार का रवैया संवेदनशील नहीं दिखा। उन्होंने कहा कि सरकार को आत्ममंथन करने की जरूरत है ताकि छात्र दोबारा परीक्षा प्रणाली पर विश्वास कर सकें। एंटी पेपर लीक बिल पर जारी है चर्चा लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा जारी है। सरकार का कहना है कि नए कानून से परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा और पेपर लीक जैसे अपराधों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित होगी। वहीं विपक्ष का आरोप है कि केवल कड़ी सजा का प्रावधान पर्याप्त नहीं है, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और युवाओं के भरोसे की बहाली भी उतनी ही जरूरी है।
संसद में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 (Anti Paper Leak Bill) पर चर्चा के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और विपक्षी दल विधेयक के प्रावधानों पर चर्चा करने के बजाय केवल राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने राहुल गांधी पर संसद में अभद्र भाषा के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया। रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्रों की मांगों को ध्यान में रखते हुए पेपर लीक रोकने के लिए यह महत्वपूर्ण विधेयक लेकर आई है, लेकिन विपक्ष इस पर रचनात्मक चर्चा करने से बच रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि सभी दल अपने सुझाव दें ताकि परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाया जा सके। 'राहुल गांधी बिल पर बोलें, सुझाव दें' केंद्रीय मंत्री ने कहा, "हमें उम्मीद है कि आज राहुल गांधी और विपक्ष के अन्य नेता इस विधेयक पर अपनी बात रखेंगे। यह कानून छात्रों के हित में लाया गया है और प्रधानमंत्री के फैसले से छात्रों में भरोसा बढ़ा है। अगर कांग्रेस के पास परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के सुझाव हैं, तो सरकार उनका स्वागत करेगी।" उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप करना उचित नहीं है और विपक्ष को रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। राहुल गांधी की भाषा पर भी जताई आपत्ति किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी की भाषा को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसद में लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी जिस तरह की अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह संसदीय लोकतंत्र की गरिमा के अनुरूप नहीं है। मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन संवाद हमेशा सभ्य भाषा में होना चाहिए। ऐसी भाषा लोकतंत्र और देश दोनों के लिए ठीक नहीं है।" प्रियंका गांधी पर भी साधा निशाना रिजिजू ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने मंगलवार को चर्चा में हिस्सा तो लिया, लेकिन उनका पूरा भाषण विधेयक के दायरे से बाहर के मुद्दों पर केंद्रित रहा। उन्होंने कहा, "विपक्ष के लगभग सभी सांसदों ने बिल के मूल प्रावधानों पर चर्चा करने के बजाय दूसरे विषय उठाए। हमें उम्मीद है कि राहुल गांधी अपने भाषण में कम से कम कुछ समय इस महत्वपूर्ण विधेयक और परीक्षा सुधार के सुझावों पर जरूर बोलेंगे।" क्या है Anti Paper Leak Bill? लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है। प्रस्तावित कानून में पेपर लीक और परीक्षा में धोखाधड़ी के मामलों में कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इस कानून से भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा छात्रों का भरोसा मजबूत होगा।
Parliament Session: संसद के मानसून सत्र में कई दिनों के गतिरोध के बाद मंगलवार को लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू होने की संभावना है। पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान करने वाले इस विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार हैं। विपक्ष जहां छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और NEET विवाद जैसे मुद्दे उठाने की तैयारी में है, वहीं सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता के लिए उठाए गए कदमों का बचाव करेगी। लोकसभा में आज एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा लोकसभा में प्रस्तावित लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर करीब छह घंटे चर्चा होने की संभावना है। संसद के पहले सप्ताह में लगातार हंगामे के कारण विधायी कार्य प्रभावित हुआ था, लेकिन अब प्रमुख राजनीतिक दलों की सहमति के बाद इस महत्वपूर्ण बिल पर बहस का रास्ता साफ हुआ है। प्रस्तावित विधेयक में पेपर लीक, परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल और संगठित परीक्षा घोटालों के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। बिल के अनुसार, सामान्य मामलों में दोषियों को 5 से 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। वहीं, संगठित पेपर लीक गिरोहों के मामलों में 7 साल तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है। सरकार और विपक्ष के बीच होगी जोरदार बहस विपक्ष इस दौरान NEET विवाद, छात्रों के विरोध प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाने की तैयारी में है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि यह कानून परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा। संसद में शुरू हुई NDA की 'मंगल मिलन' बैठक इधर, संसद परिसर में एनडीए संसदीय दल की साप्ताहिक 'मंगल मिलन' बैठक शुरू हो गई है। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत एनडीए के कई वरिष्ठ नेता मौजूद हैं। बैठक में संसद के मौजूदा सत्र की रणनीति, प्रमुख विधेयकों और विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। पहली बार NCPI को मिला न्योता इस बार की 'मंगल मिलन' बैठक की खास बात यह है कि पहली बार NCPI को भी एनडीए की संसदीय बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। संसद पुस्तकालय भवन में आयोजित इस बैठक को आगामी विधायी एजेंडे और गठबंधन की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संसद के दोनों सदनों में आज की कार्यवाही पर सभी की नजर रहेगी, क्योंकि एंटी पेपर लीक बिल पर होने वाली चर्चा आने वाले समय में देश की परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Exam Reform Task Force: देश में लगातार सामने आए पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली पर उठे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए 6 सदस्यीय हाई-पावर्ड टास्क फोर्स के गठन का ऐलान किया है। इस समिति की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक और आधार परियोजना के प्रमुख वास्तुकार नंदन नीलेकणी करेंगे। सरकार का कहना है कि समिति परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों का रोडमैप तैयार करेगी और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को अधिक मजबूत बनाने के लिए सुझाव देगी। नंदन नीलेकणी को सौंपी गई बड़ी जिम्मेदारी डिजिटल गवर्नेंस और बड़े तकनीकी प्रोजेक्ट्स का लंबा अनुभव रखने वाले नंदन नीलेकणी इस टास्क फोर्स का नेतृत्व करेंगे। आधार जैसी दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान परियोजना को सफलतापूर्वक लागू करने का अनुभव उनके पास है। सरकार चाहती है कि भविष्य की परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, उम्मीदवारों की पहचान, परीक्षा संचालन, डेटा सुरक्षा और परिणाम प्रक्रिया में आधुनिक तकनीकों का अधिक उपयोग किया जाए, ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। समिति में शामिल हैं देश के शीर्ष विशेषज्ञ सरकार ने इस टास्क फोर्स में तकनीक, सुरक्षा, शिक्षा और प्रशासन से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञों को शामिल किया है। समिति के प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं— नंदन नीलेकणी – अध्यक्ष, इंफोसिस के सह-संस्थापक और आधार परियोजना के प्रमुख। डॉ. एस. सोमनाथ – इसरो (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष, जिन्हें बड़े तकनीकी और वैज्ञानिक प्रोजेक्ट्स का व्यापक अनुभव है। तपन डेका – पूर्व इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) निदेशक, जो परीक्षा सुरक्षा और पेपर लीक रोकने के उपायों पर सुझाव देंगे। प्रो. वी. कामकोटी – निदेशक, IIT मद्रास, जो साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटर सिस्टम के विशेषज्ञ हैं। अनीता करवाल – पूर्व CBSE अध्यक्ष और पूर्व स्कूल शिक्षा सचिव, जिन्होंने नई शिक्षा नीति (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे (NCF) के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अमृत लाल मीणा – वरिष्ठ IAS अधिकारी और बिहार के पूर्व मुख्य सचिव, जिन्हें बड़े प्रशासनिक ढांचे के संचालन का लंबा अनुभव है। क्या होंगे टास्क फोर्स के प्रमुख कार्य? सरकार के अनुसार यह समिति परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक, प्रशासनिक और तकनीकी सुधारों पर काम करेगी। टास्क फोर्स निम्नलिखित पहलुओं पर अपनी सिफारिशें देगी— प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को और मजबूत बनाना। पेपर लीक रोकने के लिए नई तकनीकों का उपयोग। उम्मीदवारों की डिजिटल पहचान सत्यापन प्रणाली विकसित करना। परीक्षा संचालन को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना। साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा के मानकों को मजबूत करना। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में सुधार और संस्थागत क्षमता बढ़ाना। परीक्षा प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक डिजिटल तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं पर सुझाव देना। पेपर लीक के बाद सरकार की बड़ी पहल पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़े असर को देखते हुए सरकार अब परीक्षा व्यवस्था में दीर्घकालिक और संस्थागत सुधार लागू करने की तैयारी कर रही है। सरकार का मानना है कि केवल सख्त कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से इतना मजबूत बनाना होगा कि प्रश्नपत्रों की गोपनीयता, डिजिटल सुरक्षा और परीक्षा संचालन में किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना न्यूनतम हो। भविष्य की परीक्षा प्रणाली तय करेगी समिति सरकार ने संकेत दिए हैं कि टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर भविष्य की परीक्षा प्रणाली, सुरक्षा मानकों और संचालन से जुड़े नए नियम तैयार किए जाएंगे। उम्मीद की जा रही है कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद NTA सहित देश की प्रमुख परीक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और तकनीक-संचालित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जाएगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अब वरिष्ठ भाजपा नेता प्रह्लाद जोशी को सौंप दी है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने की मंजूरी दी। प्रह्लाद जोशी संभालेंगे शिक्षा मंत्रालय का कामकाज प्रह्लाद जोशी पहले से ही केंद्र सरकार में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब उनके पास शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। शिक्षा मंत्रालय ऐसे समय में प्रह्लाद जोशी को सौंपा गया है, जब परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, छात्रों की मांगों और शिक्षा सुधार जैसे मुद्दे राष्ट्रीय चर्चा में हैं। नए शिक्षा मंत्री के सामने छात्रों का भरोसा बहाल करना और परीक्षा प्रणाली में सुधार बड़ी चुनौती होगी। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुआ बदलाव धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद सरकार ने तेजी से मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंपने का फैसला किया। कौन हैं प्रह्लाद जोशी? प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ से लोकसभा सांसद हैं और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वह इससे पहले संसदीय कार्य, कोयला और खनन जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। संगठन और प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें केंद्र सरकार में एक अनुभवी नेता माना जाता है। शिक्षा क्षेत्र में होंगी बड़ी चुनौतियां प्रह्लाद जोशी के सामने नई शिक्षा नीति को आगे बढ़ाना, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना, विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता सुधारना और छात्रों से जुड़े मुद्दों का समाधान करना प्रमुख जिम्मेदारियां होंगी। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि नए शिक्षा मंत्री किन प्राथमिकताओं के साथ मंत्रालय का संचालन करते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्र संगठनों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ सख्ती बरती जा रही है और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं और छात्रों को अपनी मांग रखने का पूरा अधिकार है। सोशल मीडिया पर सरकार को घेरा राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा कि छात्रों पर बल प्रयोग और हिरासत जैसी घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की। पेपर लीक और परीक्षा सुधार का उठाया मुद्दा कांग्रेस नेता ने कहा कि छात्र लंबे समय से पेपर लीक, परीक्षा में अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार, इन मुद्दों का समाधान करने के बजाय प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों पर सरकार को संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए। सरकार का पक्ष भी आया सामने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। प्रशासन के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है तथा कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की गई है। राजनीतिक बहस हुई तेज राहुल गांधी के बयान के बाद छात्र आंदोलन और परीक्षा सुधार का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। विपक्ष सरकार पर छात्रों की आवाज अनसुनी करने का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
पटना, एजेंसियां। बिहार में छात्र आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक मामलों पर कार्रवाई और छात्रों की मांगों को लेकर चल रहा विरोध अब राज्य के कई जिलों तक फैल गया है। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी किया है। 18 जिलों में पहुंचा आंदोलन, पुलिस की छुट्टियां रद्द छात्र आंदोलन के विस्तार को देखते हुए बिहार पुलिस को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 18 जिलों में प्रदर्शन की गतिविधियां सामने आई हैं। पुलिस बल को 24 घंटे अलर्ट रहने और सोशल मीडिया पर नजर रखने को कहा गया है। पटना में प्रदर्शन के दौरान तनाव, पुलिस और छात्रों में टकराव राजधानी पटना में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की। दरभंगा में पथराव, पुलिस अधिकारियों को लगी चोट दरभंगा में छात्र प्रदर्शन के दौरान पथराव की घटना सामने आई। इस दौरान सिटी एसपी और एक पुलिसकर्मी के घायल होने की खबर है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। पटना में कई FIR दर्ज, छात्रों पर कार्रवाई शुरू प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामलों में पटना पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने कई थानों में FIR दर्ज की हैं और कुछ छात्र नेताओं समेत कई छात्रों को हिरासत में लिया गया है। सरकार और छात्रों के बीच बातचीत पर नजर छात्र संगठनों की मांग है कि परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए और पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। वहीं सरकार की ओर से भी व्यवस्था सुधारने और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।
NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और देशभर में जारी छात्र आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात छात्रों के नाम वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि सरकार पेपर लीक को बेहद गंभीरता से ले रही है और 24 जुलाई को होने वाली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस मुद्दे पर और कड़े कानूनी प्रावधानों वाले मसौदे पर चर्चा की जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। सरकार दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। पेपर लीक पर बनेगा और सख्त कानून प्रधानमंत्री ने बताया कि संबंधित विभागों ने प्रस्तावित विधेयक का मसौदा तैयार कर लिया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे संसद के मौजूदा सत्र में पेश करने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि नए कानून में— पेपर लीक के आरोपियों के लिए कड़े दंड का प्रावधान होगा। मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित की जाएगी। परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए नए प्रावधान जोड़े जाएंगे। "22 लाख छात्रों का साल बचाना हमारी प्राथमिकता थी" प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार का पहला लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि छात्रों का एक साल बर्बाद न हो। इसी वजह से कम समय में दोबारा परीक्षा आयोजित कराई गई, जिसमें करीब 22 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि पुनर्परीक्षा का परिणाम भी घोषित किया जा चुका है। "दोषियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया" प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले ढाई महीनों में सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। पेपर लीक मामलों में शामिल कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है और जांच लगातार जारी है। उन्होंने दोहराया कि सरकार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेगी। CJP ने उठाए सवाल प्रधानमंत्री के संदेश के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने कहा कि केवल दोषियों को सजा देने की घोषणा पर्याप्त नहीं है। संगठन का कहना है कि असली सवाल यह है कि बार-बार पेपर लीक क्यों हो रहे हैं और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही कब तय होगी। CJP ने दोहराया कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी रहेगा। आशुतोष रांका बोले- समस्या की जड़ पर कार्रवाई हो CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया स्वागतयोग्य है, लेकिन इससे मूल समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि केवल दोषियों को सजा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जिससे भविष्य में पेपर लीक की घटनाएं ही न हों। उनके अनुसार, लगातार हो रहे पेपर लीक परीक्षा प्रणाली की गंभीर खामियों की ओर संकेत करते हैं। बातचीत पर भी CJP की शर्त CJP ने बताया कि सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव मिला है, लेकिन संगठन चाहता है कि बैठक जंतर-मंतर या किसी तटस्थ स्थान पर हो। संगठन का आरोप है कि सरकार केवल अपने कार्यालय में बैठक चाहती है, जिसे CJP ने स्वीकार नहीं किया। संगठन का कहना है कि बातचीत तभी सार्थक होगी, जब मांगों पर स्पष्ट निर्णय और उन्हें लागू करने की समयसीमा तय की जाए। 20 जून से जारी है आंदोलन CJP ने 20 जून से जंतर-मंतर पर कथित परीक्षा अनियमितताओं, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था। इस आंदोलन में विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी भागीदारी रही है।
देशभर में NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर जारी छात्र आंदोलनों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई और दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। प्रमुख बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों पर पहली बड़ी प्रतिक्रिया दी। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान। कहा- "युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।" संबंधित विभागों और अधिकारियों को जरूरी कार्रवाई के निर्देश। देशभर में NEET पेपर लीक को लेकर छात्र आंदोलन जारी। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। पीएम मोदी ने क्या कहा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा, "हमारे युवाओं के कल्याण और भविष्य से बढ़कर कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।" उन्होंने बताया कि सरकार ने संबंधित विभागों और अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं, ताकि पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों को जल्द सजा मिल सके। फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार पेपर लीक मामलों की तेजी से सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करेगी। उनका कहना है कि इससे दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में तेजी आएगी और छात्रों का शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होगा। छात्र आंदोलन के बीच आया बयान प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर सहित विभिन्न शहरों में प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता युवाओं का भविष्य प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार लगातार विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए फैसले ले रही है। उन्होंने दोहराया कि शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना सरकार की प्राथमिकता है और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। विपक्ष और आंदोलनकारी क्या मांग रहे हैं? NEET पेपर लीक विवाद के बाद विपक्ष और छात्र संगठनों ने सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और जवाबदेही तय करने की मांग की है। इसी बीच प्रधानमंत्री का यह बयान पूरे विवाद पर सरकार की पहली बड़ी सार्वजनिक प्रतिक्रिया माना जा रहा है।
NEET पेपर लीक मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार के प्रस्ताव को अपर्याप्त बताते हुए अपनी मांगों पर कायम रहने का ऐलान किया है। CJP ने कहा कि उनकी प्राथमिक मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। साथ ही प्रधानमंत्री से छात्रों से सार्वजनिक माफी मांगने और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार करने की भी मांग की गई है। प्रमुख बातें PM मोदी ने पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया। CJP ने कहा- "फास्ट-ट्रैक कोर्ट नहीं, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहिए।" संगठन ने प्रधानमंत्री से छात्रों से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की। जंतर-मंतर पर CJP का आंदोलन लगातार जारी। सरकार और CJP दोनों ने बातचीत की इच्छा जताई। PM के ऐलान पर CJP की प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट के तुरंत बाद CJP ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केवल फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने से छात्रों की मांगें पूरी नहीं होंगी। संगठन ने कहा कि सरकार को सबसे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना चाहिए। CJP ने अपने पोस्ट में लिखा कि सरकार को भ्रष्ट परीक्षा व्यवस्था में सुधार करना चाहिए और छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। "युवाओं की आवाज सुनी जाए" CJP ने अपने पोस्ट में कहा, "सबसे पहले युवाओं की मांग स्वीकार कीजिए। हमें धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहिए। भ्रष्ट सिस्टम को सुधारा जाए और सभी छात्रों से माफी मांगी जाए। ये आपके देश के युवा हैं, जो अपने भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं।" संगठन ने प्रधानमंत्री के पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। जंतर-मंतर पर जारी है प्रदर्शन NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के विरोध में CJP का धरना जंतर-मंतर पर लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार, जवाबदेही तय करने और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे हैं। बातचीत के लिए तैयार दोनों पक्ष छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने बातचीत की इच्छा जताई है। वहीं CJP नेताओं अभिजीत दीपके और सौरभ दास ने भी कहा है कि वे वार्ता के लिए तैयार हैं। हालांकि, उनका कहना है कि सरकार का प्रतिनिधि जंतर-मंतर या किसी तटस्थ स्थान पर आकर बातचीत करे। सरकार की ओर से क्या कहा गया? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि पेपर लीक के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी सोशल मीडिया पर छात्रों के हितों की रक्षा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात दोहराई।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने देश में चल रहे छात्र आंदोलन और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कथित पेपर लीक मामले को गंभीर मुद्दा बताते हुए छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन की सराहना की। सलमान खान ने कहा कि छात्रों का आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर है और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। छात्रों के समर्थन में आए सलमान खान सलमान खान ने सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि युवाओं का भविष्य शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर निर्भर करता है। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल छात्रों और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि परीक्षा प्रणाली में किसी भी तरह की गड़बड़ी से छात्रों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। पेपर लीक को बताया बड़ी चिंता अभिनेता ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं मेहनत करने वाले छात्रों के साथ अन्याय करती हैं। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया को मजबूत बनाने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया। आंदोलन को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाने की अपील सलमान खान ने कहा कि छात्रों की मांगों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक विवाद से अलग रखा जाना चाहिए। उन्होंने अपील की कि आंदोलन का मुख्य उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों की रक्षा होना चाहिए। बॉलीवुड से आई पहली बड़ी प्रतिक्रिया छात्र आंदोलन और परीक्षा विवाद पर बॉलीवुड की ओर से सलमान खान की यह प्रतिक्रिया चर्चा में है। इससे पहले भी कई सामाजिक मुद्दों पर फिल्म जगत के कलाकार अपनी राय रखते रहे हैं। सलमान के बयान के बाद शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा सुधार और छात्रों की मांगों को लेकर बहस और तेज हो गई है। सरकार से सुधार की उम्मीद जताई सलमान खान ने उम्मीद जताई कि सरकार और संबंधित संस्थाएं छात्रों की चिंताओं पर ध्यान देंगी और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जरूरी कदम उठाएंगी। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य युवाओं से जुड़ा है, इसलिए उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से होना चाहिए।
नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सबसे जरूरी है। राहुल गांधी ने पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं और छात्रों की परेशानियों को लेकर सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की। परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठाए सवाल राहुल गांधी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी से लाखों छात्रों का समय, मेहनत और भविष्य प्रभावित होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को परीक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए और छात्रों को भरोसेमंद व्यवस्था उपलब्ध करानी चाहिए। छात्र आंदोलनों को मिला विपक्ष का समर्थन दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई जगहों पर छात्रों के प्रदर्शन के बीच राहुल गांधी ने सरकार से छात्रों की आवाज सुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याओं को दबाने के बजाय उनके साथ संवाद कर समाधान निकालना चाहिए। NEET और पेपर लीक मुद्दे पर सरकार को घेरा विपक्ष लगातार NEET और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में विश्वास बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार ने उठाए सुधारात्मक कदम वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून, तकनीकी निगरानी और जांच प्रक्रिया को मजबूत करने की बात कही है। शिक्षा मुद्दे पर सियासी टकराव तेज छात्रों और परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर संसद के मानसून सत्र में भी राजनीतिक बहस तेज है। विपक्ष जहां सरकार पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि वह युवाओं के हितों की रक्षा और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके और युवाओं का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा मजबूत हो। सरकार ने स्पष्ट किया कि लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। युवाओं के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक केवल एक अपराध नहीं, बल्कि देश के युवाओं के सपनों पर सीधा हमला है। उन्होंने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों की जांच तय समय-सीमा में पूरी की जाए और अदालतों में मुकदमों का जल्द निपटारा सुनिश्चित किया जाए। केंद्र और राज्यों के बीच होगा बेहतर समन्वय सरकार ने बताया कि पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा। जांच एजेंसियों, परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं और राज्य पुलिस के बीच सूचना साझा करने की व्यवस्था को भी बेहतर बनाया जाएगा, ताकि संगठित गिरोहों पर तेजी से कार्रवाई हो सके। परीक्षा प्रणाली को बनाया जाएगा अधिक सुरक्षित सरकार परीक्षा प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रही है। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, डिजिटल निगरानी, डेटा सुरक्षा और परीक्षा केंद्रों पर कड़ी मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है। साथ ही, राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख परीक्षाओं के संचालन में पारदर्शिता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा। छात्र संगठनों ने फैसले का किया स्वागत प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद कई छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों ने इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यदि फास्ट-ट्रैक कोर्ट के माध्यम से मामलों का शीघ्र निपटारा होता है और दोषियों को समय पर सजा मिलती है, तो भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। सरकार ने दिया सख्त संदेश सरकार का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक में शामिल किसी भी व्यक्ति, संस्था या गिरोह के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि युवाओं के विश्वास और देश की परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनी रहे।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देशभर में परीक्षा प्रणाली को लेकर बढ़ती चिंता और पेपर लीक के मामलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी है। संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की बैठक में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकार छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी है और पेपर लीक जैसी घटनाओं में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पेपर लीक को बताया गंभीर राष्ट्रीय चिंता का विषय बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया को प्रधानमंत्री के संदेश की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने पेपर लीक को देश के भविष्य और युवाओं के विश्वास से जुड़ा गंभीर विषय बताया। उन्होंने इस मुद्दे पर राजनीति से बचने की अपील करते हुए कहा कि छात्रों के हित सर्वोपरि हैं और उनकी मेहनत के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह बयान हाल ही में पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र प्रदर्शनों और राजनीतिक विवादों के बीच सामने आया है। संसद में दूसरे दिन भी जारी रहा हंगामा मानसून सत्र के दूसरे दिन भी लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के कारण बार-बार बाधित रही। पहले दिन की तरह दूसरे दिन भी विभिन्न मुद्दों पर हंगामे के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष ने कई राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा, जबकि सरकार ने अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखा। किसानों के हितों पर भी दिया भरोसा बैठक में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर किसानों की चिंताओं पर भी चर्चा हुई। किरेन रिजिजू ने बताया कि प्रधानमंत्री ने एनडीए सांसदों को भरोसा दिलाया कि सरकार किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यापारिक समझौते में किसानों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। सरकार ने संकेत दिए कि युवाओं और किसानों से जुड़े मुद्दों पर वह संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ आगे बढ़ेगी।
दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अस्पताल से जारी एक नए संदेश में कहा है कि वे अपना लंबा भूख हड़ताल समाप्त करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए केंद्र सरकार को उनकी तीन शर्तों पर सकारात्मक कदम उठाने होंगे। वांगचुक का कहना है कि उनकी मांगें शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और लोकतांत्रिक संवाद से जुड़ी हैं। पहली शर्त: शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सोनम वांगचुक ने कहा कि यदि केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था में सामने आई गड़बड़ियों, विशेष रूप से कथित परीक्षा पेपर लीक मामलों की जिम्मेदारी स्वीकार करे और दोषियों की जवाबदेही तय करे, तो वह अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे। दूसरी शर्त: संसद तक जाने की अनुमति उन्होंने कहा कि यदि पहली मांग नहीं मानी जाती है, तो उन्हें और उनके साथियों को संसद तक जाने की अनुमति दी जाए, ताकि वे अपनी मांगें सीधे सांसदों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के सामने रख सकें। वांगचुक ने कहा कि यदि संसद में विभिन्न दलों के सांसद उन्हें भरोसा दिलाते हैं कि उनके मुद्दों को सदन में उठाया जाएगा, तो वे अपना निर्णय बदलने पर विचार कर सकते हैं। तीसरी शर्त: सांसद अस्पताल आकर दें आश्वासन सोनम वांगचुक ने कहा कि यदि स्वास्थ्य कारणों या किसी अन्य वजह से वे संसद नहीं जा पाते हैं, तो विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता अस्पताल आकर उन्हें यह भरोसा दें कि उनकी मांगों को संसद में उठाया जाएगा। ऐसी स्थिति में भी वे अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे। अस्पताल में रखने पर भी जताई आपत्ति अपने संदेश में वांगचुक ने यह भी दावा किया कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में रखा गया है। उन्होंने इसे "गैरकानूनी हिरासत" बताया और कहा कि वे अब भी अपनी मांगों पर कायम हैं तथा सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। मानसून सत्र के बीच बढ़ा मुद्दा गौरतलब है कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है। ऐसे में वांगचुक का यह बयान राजनीतिक और संसदीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल, उनकी मांगों पर केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
Rahul Gandhi on UGC-NET: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने UGC-NET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि परीक्षा से पहले एक पीडीएफ वायरल हुई थी, जिसमें शामिल कई प्रश्न वास्तविक परीक्षा से मेल खाते थे। सरकार या राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की ओर से राहुल गांधी के इन दावों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। UGC-NET को लेकर राहुल गांधी का दावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा कि हाल ही में आयोजित UGC-NET परीक्षा को लेकर सामने आए आरोप बेहद गंभीर हैं। उनका दावा है कि परीक्षा से पहले करीब 100 पन्नों की एक पीडीएफ प्रसारित हुई थी, जिसमें ऐसे प्रश्न थे जो बाद में परीक्षा में पूछे गए सवालों से काफी हद तक मेल खाते थे। राहुल गांधी के मुताबिक, यह पीडीएफ प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़ी थी और इसकी जानकारी केवल राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के पास होनी चाहिए थी। '90 सवाल असली पेपर से मेल खाते थे' राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि वायरल पीडीएफ में मौजूद लगभग 90 प्रश्न UGC-NET के समाजशास्त्र (Sociology) विषय के वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि यही प्रश्नपत्र बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान जैसे राज्यों में करीब 2.25 लाख रुपये में बेचे जाने की बात सामने आई है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अन्य परीक्षाओं को लेकर भी लगाए आरोप कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि कथित तौर पर इसी नेटवर्क ने CSIR-NET, HTET और ADA जैसी आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का भी दावा किया था। उन्होंने कहा कि यदि ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। केंद्र सरकार पर साधा निशाना राहुल गांधी ने कहा कि NEET और UGC-NET जैसी परीक्षाओं में लगातार विवाद सामने आने के बावजूद सरकार प्रभावी कदम उठाती नहीं दिख रही है। उन्होंने कहा कि लाखों छात्र वर्षों तक मेहनत करते हैं, लेकिन पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों के आरोप उनकी मेहनत और भविष्य दोनों पर असर डालते हैं। छात्रों से एकजुट होने की अपील अपने संदेश के अंत में राहुल गांधी ने छात्रों से एकजुट होकर अपनी आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए छात्रों और युवाओं की सामूहिक आवाज सबसे महत्वपूर्ण है। आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार फिलहाल राहुल गांधी के लगाए गए आरोपों पर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA), शिक्षा मंत्रालय या केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि इस मामले में कोई नई जानकारी या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है, तो उसके बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।