Education News

Bihar government schools to get libraries with diverse books, digital resources and new librarian appointments
बिहार के 43 हजार सरकारी स्कूलों में खुलेंगी लाइब्रेरी, लाइब्रेरियन की होगी बहाली; 100 तरह की किताबों से बढ़ेगा पढ़ने का शौक

पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी पहल की तैयारी है। राज्य के 43 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में लाइब्रेरी विकसित की जाएंगी। इसके लिए सरकार ने 134 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। योजना के तहत स्कूलों में किताबों की सुविधा बढ़ाने के साथ खाली पड़े लाइब्रेरियन के पदों पर बहाली भी की जाएगी। नई लाइब्रेरी में केवल पाठ्यक्रम से जुड़ी किताबें ही नहीं होंगी, बल्कि साहित्य, कहानियों और बाल साहित्य की किताबें भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा लाइब्रेरी को डिजिटल रूप देने की भी योजना है, ताकि विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ने की सुविधा मिल सके। मिडिल स्कूलों में होगी लाइब्रेरियन की नियुक्ति राज्य के सरकारी स्कूलों में फिलहाल करीब 2 हजार लाइब्रेरियन कार्यरत हैं। बड़ी संख्या में स्कूलों में ये पद खाली हैं। योजना के तहत जिन मिडिल स्कूलों में लाइब्रेरी खोली जाएगी, वहां किताबों की व्यवस्था और संचालन के लिए लाइब्रेरियन की नियुक्ति की जाएगी। वहीं, प्राइमरी स्कूलों में अलग से लाइब्रेरियन नियुक्त करने के बजाय हेडमास्टर और शिक्षकों को लाइब्रेरी की जिम्मेदारी दी जाएगी। बच्चों को कक्षा के अनुसार किताबें उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। पहले से मौजूद लाइब्रेरी भी होंगी अपग्रेड इस योजना के तहत जिन सरकारी स्कूलों में पहले से लाइब्रेरी मौजूद हैं, उन्हें भी बेहतर सुविधाओं के साथ अपग्रेड किया जाएगा। नए लाइब्रेरी भवनों के निर्माण की जिम्मेदारी बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना निर्माण निगम को दी जाएगी। पूरी योजना केंद्र सरकार के समग्र शिक्षा अभियान के तहत लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य स्कूलों में पढ़ाई के साथ बच्चों में किताबें पढ़ने की आदत और रुचि को बढ़ावा देना है। 100 तरह की किताबों से सजेगी स्कूल लाइब्रेरी स्कूल लाइब्रेरी में विद्यार्थियों की उम्र और जरूरत के हिसाब से करीब 100 तरह की किताबें उपलब्ध कराने की योजना है। इनमें पाठ्यक्रम से जुड़ी पुस्तकों के अलावा साहित्य और मनोरंजन की सामग्री भी शामिल होगी। हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास और राजनीति शास्त्र जैसे विषयों से संबंधित किताबों के साथ बच्चों के लिए कहानियां और बाल साहित्य भी रखा जाएगा। विद्यार्थियों को मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, फणीश्वरनाथ रेणु, राहुल सांकृत्यायन, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' और अमृतलाल नागर जैसे प्रमुख साहित्यकारों की रचनाएं पढ़ने का अवसर मिलेगा। डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी मिलेगी सरकार की योजना लाइब्रेरी को केवल किताबों तक सीमित रखने की नहीं है। स्कूलों में मैनुअल लाइब्रेरी के साथ डिजिटल सुविधा विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा। इससे विद्यार्थी जरूरत के अनुसार ऑनलाइन किताबें और अध्ययन सामग्री भी पढ़ सकेंगे। इस पहल से राज्य के हजारों सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को स्कूल स्तर पर ही किताबों की बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, लाइब्रेरियन के पदों पर होने वाली बहाली शिक्षा क्षेत्र में नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
BIT Mesra campus in Ranchi where 50% seat quota for Jharkhand students is expected to return next academic session
BIT Mesra में फिर लागू होगा झारखंड के छात्रों का 50% कोटा, अगले सत्र से मिलेगा आरक्षण

रांची: झारखंड के विद्यार्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. राज्य सरकार अगले शैक्षणिक सत्र से बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT) मेसरा में झारखंड के विद्यार्थियों के लिए 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करेगी. उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की अवर सचिव मंजू कुमारी की ओर से जारी पत्र में इसकी जानकारी दी गयी है. पत्र के अनुसार, राज्य सरकार बीआइटी मेसरा की कुल सीटों में से 50 प्रतिशत सीटें झारखंड के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित कराने को लेकर आवश्यक कदम उठायेगी. यह निर्णय ऑल इंडिया मेरिट में झारखंड के विद्यार्थियों के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए लिया जायेगा. इस संबंध में सम्यक विचार-विमर्श के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जायेगी. 2026-27 में खत्म हो गया था होम स्टेट कोटा बीआइटी मेसरा में फिलहाल झारखंड के विद्यार्थियों को मिलने वाला 50 प्रतिशत होम स्टेट कोटा समाप्त कर दिया गया है. JoSAA 2026 के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से संस्थान में नामांकन ऑल इंडिया मेरिट के आधार पर किया जा रहा है. इस बदलाव के बाद झारखंड के विद्यार्थियों को पहले की तरह राज्य कोटे का लाभ नहीं मिल रहा है. इसे लेकर विद्यार्थियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से भी सवाल उठाये गये थे. राज्य सरकार और BIT Mesra के बीच समझौता हुआ था समाप्त विभाग की जानकारी के अनुसार, बीआइटी मेसरा और झारखंड सरकार के बीच हुआ समझौता करीब दो वर्ष पहले समाप्त हो गया था. समझौता समाप्त होने के बाद राज्य सरकार की ओर से मिलने वाला आर्थिक सहयोग भी लंबे समय से बकाया रहा. संस्थान की ओर से समझौते के नवीकरण को लेकर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को कई बार पत्र भेजे गये, लेकिन समझौते का नवीकरण नहीं हो सका. इसके बाद संस्थान ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 में सभी सीटों पर ऑल इंडिया मेरिट के आधार पर नामांकन लेने का फैसला किया. पहले करीब 650 बीटेक सीटों पर मिलता था लाभ पूर्व की व्यवस्था के तहत बीआइटी मेसरा में बीटेक की करीब 650 सीटों पर झारखंड के विद्यार्थियों को होम स्टेट कोटा का लाभ मिलता था. इसके अलावा बीसी-1 और बीसी-2 वर्ग के विद्यार्थियों के लिए भी अलग से सीटें आरक्षित रहती थीं. राज्य में इस कोटे को दोबारा लागू करने की मांग लगातार उठती रही है. अब सरकार के अगले सत्र से 50 प्रतिशत सीट आरक्षित कराने के निर्णय से झारखंड के विद्यार्थियों को बीआइटी मेसरा में नामांकन के लिए फिर से बड़ा अवसर मिलने की उम्मीद है. विधायक सुरेश कुमार बैठा ने भी मांगी थी जानकारी बीआइटी मेसरा में झारखंड के विद्यार्थियों का कोटा समाप्त किये जाने का कारण और आगे की व्यवस्था को लेकर विधायक सुरेश कुमार बैठा ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से जानकारी मांगी थी. विभाग की ओर से विधायक को भी इस संबंध में जानकारी उपलब्ध करायी गयी है. राज्य सरकार के ताजा रुख के बाद अब अगले शैक्षणिक सत्र से बीआइटी मेसरा में झारखंड के विद्यार्थियों के लिए 50 प्रतिशत सीटों की व्यवस्था बहाल होने की उम्मीद बढ़ गयी है.  

kalpana अगस्त 19, 2026 0
Students studying in a modern library as Dumka prepares to build a new district library
दुमका के छात्रों को बड़ी सौगात! 7.54 करोड़ से बनेगा आधुनिक जिला पुस्तकालय, बदल जाएगी पढ़ाई की तस्वीर

दुमका: जिले के विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है. दुमका में जल्द ही आधुनिक सुविधाओं से लैस स्टेट ऑफ द आर्ट जिला पुस्तकालय का निर्माण किया जाएगा. इसके निर्माण पर करीब 7.54 करोड़ रुपये खर्च होंगे. पुस्तकालय के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से 7 करोड़ 54 लाख 53 हजार 871 रुपये का टेंडर जारी किया गया है. निर्माण एजेंसी को काम पूरा करने के लिए 365 दिनों का समय दिया गया है. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को मिलेगा बड़ा फायदा आधुनिक जिला पुस्तकालय बनने के बाद विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए बेहतर और व्यवस्थित माहौल मिलने की उम्मीद है. खासकर JPSC, JSSC, UPSC, SSC, बैंकिंग, रेलवे और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए यह सुविधा काफी उपयोगी साबित हो सकती है. पुस्तकालय में विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए शांत वातावरण के साथ किताबों और संदर्भ सामग्री जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है. इससे उन छात्रों को विशेष लाभ मिल सकता है, जिन्हें घर पर पढ़ाई के लिए पर्याप्त जगह या अनुकूल वातावरण नहीं मिल पाता है. दुमका में पहले से राजकीय पुस्तकालय में पहुंचते हैं सैकड़ों छात्र दुमका संताल परगना का प्रमंडलीय मुख्यालय होने के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक केंद्र भी है. यहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं. दुमका के राजकीय पुस्तकालय में भी पिछले कुछ वर्षों में सुविधाओं का विस्तार किया गया है. वर्तमान में करीब 500 से 600 विद्यार्थी नियमित रूप से वहां पहुंचकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं. ऐसे में नए आधुनिक जिला पुस्तकालय की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी. नया पुस्तकालय बनने के बाद विद्यार्थियों के लिए अध्ययन के अतिरिक्त स्थान और बेहतर संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे. श्रीरामकृष्ण आश्रम परिसर में निर्माण की तैयारी प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आधुनिक जिला पुस्तकालय के निर्माण के लिए श्रीरामकृष्ण आश्रम उच्च विद्यालय परिसर में खाली जमीन का चयन किया गया है. स्कूल का पूरा परिसर करीब 17 बीघा 17 कट्ठा में फैला हुआ है. विद्यालय परिसर में पहले से ही कई विकास कार्य चल रहे हैं. प्लस टू स्तर पर उत्क्रमित होने के बाद अतिरिक्त कक्षाओं के निर्माण का काम चल रहा है. इसके अलावा डायट के लिए मल्टीपर्पज बिल्डिंग, हॉस्टल और क्वार्टर का निर्माण भी कराया जा रहा है. इसी परिसर में आधुनिक जिला पुस्तकालय बनने से विद्यार्थियों को एक ही स्थान पर पढ़ाई के लिए कई बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है. एकलव्य स्कूल में भी बनेगा पुस्तकालय दुमका जिले के काठीकुंड स्थित एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल, फिटकोरिया के विद्यार्थियों के लिए भी पुस्तकालय की सुविधा विकसित करने की तैयारी है. इसके लिए 11 लाख 81 हजार 710 रुपये की लागत से टेंडर जारी किया गया है. यहां पुस्तकालय का निर्माण कार्य करीब तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. स्कूल का संचालन करीब दो साल पहले शुरू हुआ था और अब विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय समेत अन्य जरूरी शैक्षणिक संसाधन विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है. छात्रों के लिए बढ़ेगी पढ़ाई की सुविधा दुमका में जिला पुस्तकालय और एकलव्य स्कूल में पुस्तकालय निर्माण की पहल को जिले की शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. आधुनिक पुस्तकालयों के निर्माण से विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन माहौल, किताबों और संदर्भ सामग्री तक आसान पहुंच मिलेगी. खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए 7.54 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला आधुनिक जिला पुस्तकालय आने वाले समय में पढ़ाई और तैयारी का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है.  

kalpana अगस्त 18, 2026 0
UPSC NDA 2 Exam 2026 scheduled for September 13 with 394 vacancies across National Defence Academy and Naval Academy.
UPSC NDA 2 Exam 2026: सितंबर में होगी परीक्षा, 394 पदों पर भर्ती; देखें पूरा शेड्यूल

नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने NDA और NA Exam 2, 2026 की परीक्षा तारीख तय कर दी है। आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) और नेवल एकेडमी (NA) की लिखित परीक्षा 13 सितंबर 2026 को आयोजित होगी। परीक्षा ऑफलाइन यानी पेन-पेपर मोड में होगी। इस परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को Mathematics और General Ability Test (GAT), दोनों पेपर देने होंगे। परीक्षा दो अलग-अलग शिफ्ट में आयोजित की जाएगी। 13 सितंबर को होगी NDA और NA परीक्षा UPSC NDA और NA 2 परीक्षा 2026 का आयोजन देशभर में निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर किया जाएगा। उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचने की सलाह दी गई है, ताकि प्रवेश और अन्य औपचारिकताओं में किसी तरह की परेशानी न हो। परीक्षा का पूरा शेड्यूल इस प्रकार है: पेपर समय अवधि Mathematics सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक 2 घंटे 30 मिनट General Ability Test (GAT) दोपहर 2:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक 2 घंटे Mathematics और GAT दोनों की तैयारी जरूरी NDA और NA की लिखित परीक्षा में दो पेपर होते हैं। पहले चरण में Mathematics की परीक्षा होगी, जबकि दूसरी शिफ्ट में General Ability Test यानी GAT लिया जाएगा। ऐसे में उम्मीदवारों के लिए दोनों विषयों की संतुलित तैयारी करना जरूरी है। केवल गणित या सामान्य ज्ञान पर फोकस करने से परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करना मुश्किल हो सकता है। परीक्षा से पहले कमजोर टॉपिक्स की दोबारा तैयारी और नियमित मॉक टेस्ट से प्रदर्शन बेहतर किया जा सकता है। पेन-पेपर मोड में होगी परीक्षा NDA और NA 2 की लिखित परीक्षा ऑफलाइन मोड में आयोजित की जाएगी। यानी अभ्यर्थियों को प्रश्नों के उत्तर पेन और पेपर के माध्यम से देने होंगे। उम्मीदवारों के लिए समय प्रबंधन भी महत्वपूर्ण रहेगा। तैयारी के दौरान मॉक टेस्ट को वास्तविक परीक्षा की तरह पेन-पेपर मोड में हल करना उपयोगी हो सकता है। 394 पदों के लिए होगी भर्ती इस भर्ती परीक्षा के जरिए कुल 394 पदों पर उम्मीदवारों का चयन किया जाना है। इनमें 370 पद पुरुष उम्मीदवारों के लिए और 24 पद महिला उम्मीदवारों के लिए निर्धारित हैं। सीमित पदों को देखते हुए अभ्यर्थियों को अब अपनी तैयारी को और मजबूत करने की जरूरत है। खासकर पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र, मॉक टेस्ट और महत्वपूर्ण विषयों के रिवीजन पर ध्यान देना फायदेमंद रहेगा। मई-जून में पूरी हो चुकी है आवेदन प्रक्रिया NDA और NA 2, 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया पहले ही समाप्त हो चुकी है। UPSC ने 20 मई 2026 से आवेदन शुरू किए थे और उम्मीदवारों को 11 जून 2026 तक आवेदन करने का अवसर दिया गया था। अब आवेदन कर चुके उम्मीदवारों को परीक्षा की तैयारी पर पूरा ध्यान देना चाहिए। परीक्षा से पहले आयोग की ओर से एडमिट कार्ड और अन्य जरूरी निर्देश जारी किए जाएंगे। परीक्षा से पहले इन बातों का रखें ध्यान उम्मीदवारों को परीक्षा के लिए अभी से जरूरी दस्तावेज और परीक्षा संबंधी निर्देशों की जानकारी रखनी चाहिए। साथ ही Mathematics और GAT के लिए अलग-अलग रणनीति बनाकर तैयारी करना बेहतर रहेगा। मॉक टेस्ट देते समय निर्धारित समय में पेपर पूरा करने का अभ्यास करें। इससे वास्तविक परीक्षा के दौरान समय का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।  

surbhi अगस्त 14, 2026 0
Bihar students attending online classes as government expands digital education support with teachers available until 11 PM.
बिहार के छात्रों के लिए बड़ी पहल! अब रात 11 बजे तक ऑनलाइन शिक्षक से पूछ सकेंगे सवाल, 15 अगस्त से शुरू होगी सुविधा

पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब विद्यार्थियों को पढ़ाई से जुड़े सवालों और विषयों की कठिनाइयों के समाधान के लिए केवल स्कूल के समय पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। 15 अगस्त से छात्र रात 11 बजे तक ऑनलाइन शिक्षकों से जुड़कर अपनी पढ़ाई से जुड़े सवाल पूछ सकेंगे। इस सुविधा का उद्देश्य सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान आने वाली समस्याओं का समय पर समाधान उपलब्ध कराना और डिजिटल माध्यम से शिक्षा को ज्यादा सुलभ बनाना है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में आयोजित AAGAAZ 2026 कार्यक्रम के दौरान इस पहल की जानकारी दी। रात 11 बजे तक ऑनलाइन शिक्षक रहेंगे उपलब्ध मुख्यमंत्री के मुताबिक बिहार में पहले से चल रहे बिहार स्कूल लाइव क्लासेस कार्यक्रम को अब और विस्तारित किया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत छात्र रात में भी ऑनलाइन शिक्षक से जुड़कर किसी विषय या टॉपिक से संबंधित अपनी शंका दूर कर सकेंगे। अगर किसी विद्यार्थी को पढ़ाई करते समय किसी सवाल को समझने में परेशानी होती है, तो उसे अगले दिन स्कूल खुलने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वह निर्धारित समय के भीतर ऑनलाइन शिक्षक से सहायता ले सकेगा। सरकार का लक्ष्य खास तौर पर सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराना है। 551 मॉडल स्कूलों में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं राज्य में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 19 जुलाई को 551 मॉडल स्कूलों का शुभारंभ किया गया था। इन स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, ई-लाइब्रेरी और तकनीक आधारित शिक्षण जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इनका फायदा खास तौर पर कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को मिलने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी आधुनिक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराना है। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए डिजिटल सुविधाओं का विस्तार विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है, क्योंकि उन्हें अतिरिक्त पढ़ाई के लिए हर बार बड़े शहरों या निजी संस्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। 211 ब्लॉकों में खुलेंगे डिग्री कॉलेज उच्च शिक्षा को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समीक्षा के दौरान राज्य के 211 ब्लॉकों में डिग्री कॉलेज नहीं होने की बात सामने आई थी। इसके बाद इन सभी ब्लॉकों में डिग्री कॉलेज स्थापित करने का निर्णय लिया गया। सरकार के अनुसार, इस दिशा में 15 जुलाई से काम शुरू कर दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए अपने क्षेत्र से दूर जाने की मजबूरी कम करना और ज्यादा से ज्यादा युवाओं को कॉलेज शिक्षा से जोड़ना है। कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर करने की तैयारी मुख्यमंत्री ने कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को लेकर भी सरकार की योजना बताई। उनके अनुसार, नियमित कॉलेजों में लंबे समय से शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है। 10 अगस्त से नवनियुक्त शिक्षकों ने अलग-अलग कॉलेजों में योगदान देना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक चिन्हित 211 कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति पूरी हो चुकी है और वहां पढ़ाई भी शुरू हो गई है। सरकार का लक्ष्य अगले तीन महीनों के भीतर राज्य के सभी कॉलेजों में स्थायी शिक्षकों की बहाली पूरी करना है। डिजिटल शिक्षा से सरकारी स्कूलों के छात्रों को फायदा बिहार सरकार की इन पहलों में स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक डिजिटल और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। रात 11 बजे तक ऑनलाइन शिक्षकों की उपलब्धता से विद्यार्थियों को घर पर पढ़ाई के दौरान आने वाली समस्याओं का समाधान मिलने की उम्मीद है। वहीं, मॉडल स्कूलों में आधुनिक सुविधाओं और नए डिग्री कॉलेजों के साथ शिक्षकों की नियुक्ति से स्कूली और उच्च शिक्षा दोनों स्तरों पर सुविधाओं को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।  

surbhi अगस्त 14, 2026 0
Supreme Court grants relief to 211 contractual special teachers in Jharkhand over J-TET eligibility requirement
झारखंड के 211 विशेष शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से राहत, J-TET की शर्त पर सरकार को फिर विचार का निर्देश

रांची: झारखंड के संविदा पर कार्यरत 211 विशेष शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इन शिक्षकों के दावों पर केवल J-TET पास नहीं होने के आधार पर फैसला न किया जाए। सरकार को संबंधित शिक्षकों की पात्रता पर सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश के आधार पर विचार कर दो महीने के भीतर उचित निर्णय लेने को कहा गया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए 7 मार्च 2025 को दिए गए अपने पूर्व आदेश का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि संविदा पर नियुक्त विशेष शिक्षकों के मामले में Rehabilitation Council of India (RCI) की निर्धारित योग्यता महत्वपूर्ण है। 211 में सिर्फ 33 शिक्षक J-TET के आधार पर पात्र सुप्रीम कोर्ट के समक्ष झारखंड सरकार की ओर से 1 अगस्त 2026 को दाखिल हलफनामे का भी उल्लेख किया गया। इसमें बताया गया कि राज्य में कार्यरत 211 संविदा विशेष शिक्षकों में केवल 33 को J-TET की योग्यता के आधार पर पात्र माना गया है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता और एमिकस क्यूरी ऋषि मल्होत्रा ने अदालत का ध्यान 7 मार्च 2025 के आदेश की ओर दिलाया। इस आदेश में विशेष शिक्षकों के लिए RCI की योग्यता को अहम माना गया था। इसके बाद पीठ ने स्पष्ट किया कि सभी 211 शिक्षकों के दावों पर उसी आदेश में तय मानकों के अनुसार विचार किया जाना चाहिए। केवल J-TET पास नहीं करने के आधार पर किसी शिक्षक को दावे के विचार से बाहर नहीं किया जा सकता। JSSC परीक्षा देने वाले शिक्षकों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि 211 विशेष शिक्षकों में से किसी ने JSSC की परीक्षा दी है, तो हर मामले में उनका भविष्य केवल उस परीक्षा के परिणाम के आधार पर तय नहीं होगा। ऐसे मामलों पर 7 मार्च 2025 के आदेश के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार विचार किया जाएगा। हालांकि, राहुल कौशिक की ओर से पेश आवेदकों के मामले में अदालत ने अलग व्यवस्था रखी है। इन आवेदकों का भविष्य JSSC परीक्षा के परिणाम के आधार पर तय किया जाएगा। सरकार को दो महीने में लेना होगा फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब झारखंड सरकार को 211 संविदा विशेष शिक्षकों के दावों पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत विचार करना होगा। अदालत ने सरकार को दो महीने के भीतर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया है। इस आदेश से उन शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें केवल J-TET की योग्यता पूरी नहीं करने के आधार पर पात्रता से बाहर किए जाने का खतरा था। बाकी रिक्त पद कानून के अनुसार भरे जा सकेंगे अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बाकी रिक्त पदों को लागू कानून और नियमों के अनुसार भरा जा सकता है। मामले से जुड़े दो अंतरिम आवेदन भी अदालत ने निपटा दिए। झारखंड के अलावा उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और दिल्ली के संविदा विशेष शिक्षकों से जुड़े मामले भी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन थे। झारखंड के 211 शिक्षकों के मामले में अब राज्य सरकार को अदालत के निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई करनी होगी।  

surbhi अगस्त 12, 2026 0
NEET UG 2026 counselling begins for MBBS, BDS and BHMS admissions in Jharkhand medical colleges
NEET UG 2026: झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन प्रक्रिया शुरू, 14 अगस्त को आएगी मेरिट लिस्ट

रांची: झारखंड में NEET UG 2026 के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई है। झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (JCECEB) ने राज्य स्तरीय मेडिकल काउंसलिंग का संशोधित शेड्यूल जारी कर दिया है। इसके तहत राज्य के मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS और BHMS पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाएगा। अभ्यर्थी अब 13 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसी दिन आवेदन में सुधार का मौका भी मिलेगा। NEET UG 2026 के स्कोर के आधार पर तैयार स्टेट मेरिट लिस्ट 14 अगस्त को जारी की जाएगी। 14 अगस्त से शुरू होगी पहले राउंड की काउंसलिंग मेरिट लिस्ट जारी होने के साथ ही 14 अगस्त से पहले राउंड की ऑनलाइन काउंसलिंग शुरू होगी। अभ्यर्थियों को अपनी पसंद के कॉलेज और पाठ्यक्रम के लिए ऑनलाइन च्वाइस फिलिंग करनी होगी। काउंसलिंग का प्रमुख शेड्यूल इस प्रकार है: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और च्वाइस फिलिंग: 14 से 19 अगस्त च्वाइस फिलिंग में संशोधन: 20 अगस्त सीट आवंटन और प्रोविजनल सीट अलॉटमेंट लेटर: 22 से 28 अगस्त डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन: 23 से 28 अगस्त अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे निर्धारित तारीखों के भीतर सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करें, ताकि सीट आवंटन में किसी तरह की परेशानी न हो। MBBS, BDS और BHMS में मिलेगा दाखिला राज्य स्तरीय काउंसलिंग के माध्यम से NEET UG 2026 में सफल अभ्यर्थियों को झारखंड के मेडिकल संस्थानों में MBBS, BDS और BHMS पाठ्यक्रमों में प्रवेश का अवसर मिलेगा। सीट आवंटन अभ्यर्थियों की मेरिट, च्वाइस और उपलब्ध सीटों के आधार पर किया जाएगा। जियोलॉजी छात्रों के लिए भी बड़ी राहत इधर, झारखंड के जियोलॉजी से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे छात्रों के लिए भी महत्वपूर्ण सूचना है। खान एवं भूतत्व विभाग के भूतत्व निदेशालय ने भूवैज्ञानिक जांच से संबंधित शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग के लिए आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ा दी है। पहले आवेदन की अंतिम तिथि 25 जुलाई थी, जिसे बढ़ाकर 14 अगस्त 2026 कर दिया गया है। इच्छुक और योग्य छात्र अब तय समयसीमा के भीतर आवेदन कर सकते हैं। इन संस्थानों के छात्र कर सकेंगे आवेदन ट्रेनिंग कार्यक्रम में झारखंड के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में जियोलॉजी की पढ़ाई कर रहे योग्य छात्रों को शामिल किया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से रांची विश्वविद्यालय, संत जेवियर कॉलेज, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, IIT-ISM धनबाद, नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय, कोल्हान विश्वविद्यालय, सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, सेंट्रल यूनिवर्सिटी और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय शामिल हैं। आवेदन करने वाले छात्रों को अपनी शैक्षणिक योग्यता से जुड़े प्रमाणपत्र जमा करने होंगे। आरक्षण का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों को संबंधित श्रेणी का प्रमाणपत्र भी देना होगा। 24 अगस्त तक जमा करने होंगे दस्तावेज भूतत्व निदेशालय के निर्देश के अनुसार, ट्रेनिंग के लिए चयनित छात्रों से संबंधित जरूरी दस्तावेज 24 अगस्त 2026 तक निदेशालय में उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। इसके बाद चयन और अन्य प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की जाएंगी।  

surbhi अगस्त 12, 2026 0
Seraikela DC Nitish Kumar Singh reviewing welfare department schemes and Eklavya school facilities
एकलव्य स्कूल और कल्याण विभाग के अस्पतालों का नियमित निरीक्षण करें: डीसी

सरायकेला: समाहरणालय सभागार में उपायुक्त नीतिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं और निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठक हुई. बैठक में उपायुक्त ने अधिकारियों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत योग्य लाभुकों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाने का निर्देश दिया. बैठक के दौरान प्री-मैट्रिक एवं पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति, साइकिल वितरण योजना, मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता योजना समेत कई योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गयी. उपायुक्त ने लंबित मामलों का जल्द निष्पादन सुनिश्चित करने को कहा. साइकिल वितरण में लापरवाही पर होगी कार्रवाई साइकिल वितरण योजना की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि वितरण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने संबंधित अधिकारियों को नियमित निगरानी और भौतिक सत्यापन करने को कहा. उन्होंने निर्देश दिया कि यदि जांच के दौरान किसी संवेदक की ओर से लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए. धूमकुड़िया भवन और जाहेरथान निर्माण की समीक्षा बैठक में धूमकुड़िया भवन, मांझीथान, शेड निर्माण और जाहेरथान समेत विभिन्न विकास एवं निर्माण योजनाओं की भी समीक्षा की गयी. उपायुक्त ने लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं की स्वीकृति या संचालन को तीन वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हुआ है, उनकी समीक्षा की जाए. जरूरत पड़ने पर नियमानुसार ऐसी योजनाओं को सरेंडर करने की प्रक्रिया पूरी करने का भी निर्देश दिया. एकलव्य विद्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों का होगा निरीक्षण एकलव्य विद्यालयों और कल्याण विभाग के स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था को लेकर उपायुक्त ने विशेष निर्देश जारी किए. उन्होंने प्रखंड कल्याण पदाधिकारियों को नियमित रूप से क्षेत्र का भ्रमण कर एकलव्य विद्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण करने को कहा. स्वास्थ्य केंद्रों में रोस्टर के अनुसार डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया, ताकि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लोगों को समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें. स्कूलों की समस्याओं के समाधान का निर्देश बैठक के दौरान एकलव्य विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं, बिजली आपूर्ति, भवन मरम्मत, आवश्यक संसाधनों और एप्रोच रोड से जुड़ी समस्याओं को उपायुक्त के सामने रखा. उपायुक्त ने संबंधित विभागीय अधिकारियों और कार्य एजेंसियों को समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है. बैठक में परियोजना निदेशक आईटीडीए उषा मुंडू, कार्यपालक अभियंता, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी सहित कल्याण विभाग से जुड़े अन्य अधिकारी मौजूद रहे.  

kalpana अगस्त 11, 2026 0
Students outside a school in East Singhbhum amid security measures during a student protest
पूर्वी सिंहभूम में छात्र आंदोलन का असर, आज सुबह 10:30 बजे तक बंद रहेंगे सभी स्कूल

जमशेदपुर: झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन और उससे उत्पन्न परिस्थितियों को देखते हुए पूर्वी सिंहभूम जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को 10 अगस्त की सुबह 10:30 बजे तक बंद रखने का निर्देश दिया गया है. विद्यार्थियों की सुरक्षा और जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने यह फैसला लिया है. जिला शिक्षा पदाधिकारी निशु कुमारी ने रविवार को जिले के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों के प्राचार्य और प्रधानाध्यापकों को इस संबंध में पत्र जारी किया. पत्र में स्पष्ट किया गया है कि छात्र आंदोलन को देखते हुए निर्धारित अवधि तक स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति नहीं होगी. सुरक्षा को देखते हुए लिया गया फैसला जिला शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि मौजूदा परिस्थितियों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया गया है. 10 अगस्त को सुबह 10:30 बजे तक जिले के सभी स्कूल बंद रहेंगे. यह आदेश सरकारी स्कूलों के साथ-साथ निजी विद्यालयों पर भी लागू होगा. स्कूल प्रबंधन को दिए गये निर्देश जिला शिक्षा पदाधिकारी ने सभी स्कूलों के प्राचार्य और प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया है कि आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें. निर्धारित अवधि के बाद भी विद्यार्थियों के लिए पठन-पाठन और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन को लेकर विभागीय निर्देशों का पालन करना होगा. छात्र आंदोलन को देखते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. विद्यार्थियों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए आगे के निर्णय लिए जा सकते हैं.  

kalpana अगस्त 10, 2026 0
Students preparing for the Company Secretary course with ICSI study material, corporate law books, and career guidance.
12वीं के बाद कैसे बनें Company Secretary? जानें CS बनने का पूरा रास्ता, पढ़ाई, ट्रेनिंग और करियर स्कोप

नई दिल्ली: अगर आप 12वीं के बाद कॉरपोरेट सेक्टर में एक प्रोफेशनल करियर बनाना चाहते हैं, तो Company Secretary यानी CS एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह सिर्फ कॉमर्स स्टूडेंट्स तक सीमित करियर नहीं है। मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास करने वाले विद्यार्थी इस प्रोफेशनल कोर्स की ओर आगे बढ़ सकते हैं। कंपनी सेक्रेटरी की भूमिका किसी कंपनी में कॉरपोरेट लॉ, कानूनी अनुपालन, कॉरपोरेट गवर्नेंस, बोर्ड मीटिंग और रेगुलेटरी मामलों से जुड़ी होती है। यह कोर्स Institute of Company Secretaries of India (ICSI) द्वारा संचालित किया जाता है। अगर आप भी CS बनने की तैयारी कर रहे हैं, तो पहले इसके पूरे रास्ते, योग्यता, परीक्षा और ट्रेनिंग को समझना जरूरी है। CS बनने के लिए कौन-कौन से चरण पूरे करने होते हैं? 12वीं के बाद CS की पढ़ाई शुरू करने वाले विद्यार्थियों को सामान्य तौर पर इन चरणों से गुजरना होता है: CSEET (Company Secretary Executive Entrance Test) CS Executive Programme प्रैक्टिकल ट्रेनिंग CS Professional Programme इन सभी चरणों को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद विद्यार्थी कंपनी सेक्रेटरी के रूप में करियर की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। CSEET क्या है? पहले CS कोर्स के शुरुआती स्तर को Foundation Programme के नाम से जाना जाता था, लेकिन ICSI ने अब इसकी जगह CSEET लागू किया है। 12वीं के बाद CS की पढ़ाई शुरू करने वाले विद्यार्थियों को निर्धारित पात्रता पूरी करने के बाद CSEET के रास्ते आगे बढ़ना होता है। वहीं, ग्रेजुएशन के बाद CS की पढ़ाई शुरू करने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रवेश का रास्ता अलग हो सकता है और उन्हें शुरुआती स्तर की परीक्षा से छूट मिलने के प्रावधान लागू हो सकते हैं। CS Executive में क्या पढ़ना होता है? CSEET के बाद अगला चरण CS Executive Programme है। यह CS की पढ़ाई का महत्वपूर्ण स्तर है, जिसमें विद्यार्थियों को कंपनी कानून, कॉरपोरेट से जुड़े नियमों और अन्य प्रोफेशनल विषयों की जानकारी दी जाती है। इस स्तर पर विद्यार्थियों को निर्धारित मॉड्यूल और विषयों की परीक्षा पास करनी होती है। परीक्षा की तैयारी में कॉन्सेप्ट समझने के साथ-साथ कानून और नियमों को नियमित रूप से पढ़ना महत्वपूर्ण होता है। CS Professional है अंतिम स्तर CS Professional Programme CS कोर्स का अंतिम शैक्षणिक चरण है। इस स्तर पर विद्यार्थियों को कॉरपोरेट और प्रोफेशनल क्षेत्र से जुड़े उन्नत विषयों की पढ़ाई करनी होती है। Professional Programme के निर्धारित मॉड्यूल और पेपर सफलतापूर्वक पास करने के बाद विद्यार्थी ट्रेनिंग और अन्य जरूरी प्रोफेशनल औपचारिकताओं को पूरा करके CS के रूप में करियर आगे बढ़ा सकते हैं। करीब 21 महीने की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग CS कोर्स में सिर्फ किताबों और परीक्षाओं की पढ़ाई ही नहीं होती। विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी करनी होती है, जिसमें उन्हें वास्तविक कॉरपोरेट वातावरण में काम से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी और कौशल सीखने का मौका मिलता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ट्रेनिंग की अवधि करीब 21 महीने हो सकती है। हालांकि ट्रेनिंग और अन्य प्रोफेशनल आवश्यकताओं के मौजूदा नियम ICSI के अनुसार जांचना जरूरी है। CS Course के लिए क्या है योग्यता? CS की पढ़ाई के लिए विद्यार्थी का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना जरूरी है। केवल कॉमर्स स्ट्रीम के विद्यार्थियों तक यह कोर्स सीमित नहीं है। हालांकि कॉमर्स बैकग्राउंड वाले विद्यार्थियों को अकाउंटिंग, बिजनेस और कॉमर्स से जुड़े कुछ कॉन्सेप्ट पहले से परिचित हो सकते हैं, लेकिन साइंस और आर्ट्स स्ट्रीम के विद्यार्थी भी पात्रता पूरी करने पर CS की पढ़ाई कर सकते हैं। इस करियर में सफलता के लिए नियमित अध्ययन, कानून और नियमों को समझने की क्षमता, धैर्य और निरंतर तैयारी महत्वपूर्ण है। CS के बाद कहां मिल सकता है करियर का मौका? कंपनी सेक्रेटरी बनने के बाद कॉरपोरेट सेक्टर में कई तरह की भूमिकाओं के अवसर मिल सकते हैं। CS प्रोफेशनल्स कंपनी के कॉरपोरेट लॉ, कानूनी अनुपालन, कॉरपोरेट गवर्नेंस, बोर्ड मीटिंग, रेगुलेटरी अफेयर्स और कंपनी से जुड़े वैधानिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बड़ी कंपनियों और प्रोफेशनल सर्विस फर्मों में भी CS से जुड़े अवसर मिल सकते हैं। कॉरपोरेट सेक्टर की प्रमुख कंपनियों में Deloitte, PwC, EY और KPMG जैसी बड़ी प्रोफेशनल सर्विस फर्मों में संबंधित भूमिकाओं के अवसर तलाशे जा सकते हैं। CS कोर्स पूरा करने में कितना समय लगता है? 12वीं के बाद CS की पढ़ाई शुरू करने पर इसे पूरा करने में लगभग चार साल या उससे अधिक समय लग सकता है। वास्तविक अवधि विद्यार्थी की परीक्षा पास करने की गति, ट्रेनिंग और लागू प्रोफेशनल आवश्यकताओं पर निर्भर करती है। CS की परीक्षाएं आम तौर पर जून और दिसंबर के सत्रों में आयोजित की जाती हैं। किसी स्तर पर परीक्षा पास नहीं होने की स्थिति में कोर्स पूरा करने में अतिरिक्त समय लग सकता है। CS किस तरह के विद्यार्थियों के लिए बेहतर विकल्प है? अगर आपको कंपनी कानून, कॉरपोरेट गवर्नेंस, नियम-कायदे, कानूनी अनुपालन और बिजनेस से जुड़े मामलों में रुचि है, तो CS आपके लिए एक उपयोगी करियर विकल्प हो सकता है। हालांकि सिर्फ डिग्री हासिल करने के उद्देश्य से इस कोर्स में प्रवेश लेने के बजाय इसकी पढ़ाई और प्रोफेशनल जिम्मेदारियों को समझना जरूरी है। लगातार पढ़ाई और अपडेटेड कानूनों व नियमों की जानकारी इस क्षेत्र में लंबे समय तक आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण है।  

surbhi अगस्त 9, 2026 0
Private school building representing fee regulation action after authorities fined schools for violating approved fee hike limits.
Private School Fee Hike: फीस बढ़ाने वाले 7 प्राइवेट स्कूलों पर ₹1-1 लाख जुर्माना, 45 स्कूलों को मिला था नोटिस

नोएडा: प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर गौतम बुद्ध नगर जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ाने या फीस संबंधी नियमों का उल्लंघन करने वाले सात निजी स्कूलों पर ₹1-1 लाख का जुर्माना लगाया गया है। यह फैसला जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम की अध्यक्षता में हुई जिला फीस रेगुलेटरी कमेटी की बैठक में लिया गया। कमेटी ने निजी स्कूलों की प्रस्तावित फीस बढ़ोतरी और फीस स्ट्रक्चर की समीक्षा करने के बाद नियमों के उल्लंघन की पुष्टि की। 6 स्कूलों ने तय सीमा से ज्यादा बढ़ाई फीस जिला प्रशासन के अनुसार, समीक्षा में सामने आया कि छह स्कूलों ने 2026-27 सत्र के लिए निर्धारित 7.23 प्रतिशत की अधिकतम सीमा से ज्यादा फीस बढ़ाई थी। वहीं, नोएडा के सेक्टर-21 स्थित एक अन्य स्कूल पर कंपोजिट फीस के अलावा अलग से वार्षिक शुल्क लेने का मामला सामने आया। इसके साथ ही स्कूल ने 2025-26 सत्र का फीस स्ट्रक्चर अपनी वेबसाइट पर भी उपलब्ध नहीं कराया था। कमेटी ने इन मामलों को संबंधित कानून के तहत पहली बार किए गए उल्लंघन के तौर पर माना। इसके बाद सभी सात स्कूलों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। 45 स्कूलों को पहले जारी हुआ था नोटिस प्रशासन ने बताया कि फीस नियमों के उल्लंघन को लेकर कार्रवाई अचानक नहीं की गई। तय सीमा से ज्यादा फीस बढ़ाने वाले 45 स्कूलों को पहले नोटिस जारी किए गए थे। इन स्कूलों को नियमों का पालन करने और फीस संबंधी अनियमितताओं को सुधारने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, नोटिस के बाद भी सात स्कूल निर्धारित नियमों के मुताबिक सुधार नहीं कर पाए। इसके बाद जिला फीस रेगुलेटरी कमेटी ने उनके खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की। प्राइवेट स्कूल मनमाने तरीके से नहीं बढ़ा सकते फीस जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश सेल्फ-फाइनांस्ड इंडिपेंडेंट स्कूल्स (फी रेगुलेशन) एक्ट के तहत निजी स्कूलों को निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी है। स्कूल प्रशासन अपनी मर्जी से तय सीमा से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकता और न ही नियमों के विपरीत अतिरिक्त शुल्क वसूल सकता है। फीस स्ट्रक्चर से जुड़ी जानकारी और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना भी जरूरी है। आगे भी जारी रहेगी निगरानी जिला प्रशासन ने कहा है कि निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर निगरानी जारी रहेगी। अगर भविष्य में कोई स्कूल निर्धारित नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है। फीस में लगातार बढ़ोतरी से परेशान अभिभावकों के लिए प्रशासन की यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे स्कूलों को फीस रेगुलेशन से जुड़े नियमों का पालन करने का स्पष्ट संदेश गया है।  

surbhi अगस्त 9, 2026 0
Bihar Education Department directs officials to clear pending salary and DA payments for TRE-1, TRE-2, TRE-3, and special category teachers.
बिहार के TRE-1, TRE-2 और TRE-3 शिक्षकों के लिए बड़ी राहत, लंबित वेतन और DA भुगतान पर शिक्षा विभाग सख्त

पटना: बिहार के लाखों नियोजित, बीपीएससी चयनित (TRE-1, TRE-2, TRE-3) और विशिष्ट शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। लंबे समय से लंबित वेतन और महंगाई भत्ता (DA) की अंतर राशि के भुगतान को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि लंबित मामलों का जल्द निपटारा कर योग्य शिक्षकों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। शिक्षा विभाग ने जारी किया अंतिम अल्टीमेटम जानकारी के अनुसार, कई जिलों में आवश्यक दस्तावेज और वेतन संबंधी विपत्र समय पर जमा नहीं होने के कारण भुगतान प्रक्रिया अटकी हुई है। इसे गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारियों ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) को अंतिम चेतावनी जारी की है। निर्देश में कहा गया है कि एक सप्ताह के भीतर सभी लंबित दस्तावेज जिला कार्यालय में उपलब्ध कराए जाएं। यदि तय समय सीमा के भीतर दस्तावेज जमा नहीं किए गए, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी। पहले भी दिए गए थे निर्देश शिक्षा विभाग ने बताया कि मई और जून 2026 में भी सभी प्रखंडों को आवश्यक दस्तावेज भेजने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कई स्थानों से अब तक पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके कारण हजारों शिक्षकों का वेतन और DA की अंतर राशि लंबित है। अब विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आखिर भुगतान क्यों रुका? विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, कई प्रखंडों से वेतन स्वीकृति से जुड़े आवश्यक विपत्र और अन्य दस्तावेज समय पर जिला कार्यालय नहीं भेजे गए। जब तक ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक वेतन और DA भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती। इसलिए सभी BEO को समयबद्ध तरीके से आवश्यक कागजात भेजने का निर्देश दिया गया है। शिक्षकों को भी दी गई अहम सलाह शिक्षा विभाग ने शिक्षकों से भी अपील की है कि वे बिना आवश्यक प्रक्रिया पूरी किए सीधे जिला कार्यालय में आवेदन न दें। पहले संबंधित प्रखंड स्तर पर सभी औपचारिकताएं पूरी करें, उसके बाद ही मामला जिला कार्यालय भेजें। इससे भुगतान प्रक्रिया में तेजी आएगी और अनावश्यक देरी से बचा जा सकेगा। पूरे बिहार के शिक्षकों को क्या होगा फायदा? हालांकि फिलहाल कार्रवाई जिला स्तर पर तेज की गई है, लेकिन इसका असर पूरे बिहार में देखने को मिल सकता है। राज्य के कई जिलों में TRE-1, TRE-2, TRE-3 और विशिष्ट शिक्षकों के वेतन एवं DA भुगतान से जुड़े मामले लंबित हैं। शिक्षा विभाग की सख्ती के बाद उम्मीद है कि लंबित फाइलों का तेजी से निपटारा होगा और हजारों शिक्षकों के खातों में जल्द वेतन तथा DA की अंतर राशि भेजी जाएगी। शिक्षा विभाग का साफ संदेश विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब वेतन भुगतान में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर लंबित दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। यदि ऐसा नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। हालांकि विभाग ने भुगतान की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन दस्तावेज पूरे होने के बाद भुगतान प्रक्रिया तेज होने की संभावना जताई गई है।  

surbhi अगस्त 7, 2026 0
JPSC scam investigation sees major action as 19 accused individuals are arrested by authorities.
पटना में सफाईकर्मियों की हड़ताल खत्म, सीधे खाते में मिलेगा वेतन और पहली बार बोनस का लाभ

पटना: राजधानी पटना में पिछले छह दिनों से जारी नगर निगम सफाईकर्मियों की हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई। नगर विकास एवं आवास विभाग, पटना नगर निगम और सफाईकर्मी संघर्ष समिति के बीच हुई वार्ता के बाद कई महत्वपूर्ण मांगों पर सहमति बनी। समझौते के बाद नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा और सफाईकर्मी प्रतिनिधियों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की। इस बैठक में पटना नगर निगम के नगर आयुक्त यशपाल मीणा भी मौजूद रहे। हड़ताल खत्म होने से शहर की सफाई व्यवस्था फिर से पटरी पर लौटने की उम्मीद है। पिछले कई दिनों से राजधानी के विभिन्न इलाकों में कूड़े के ढेर लगने से लोगों को बदबू, गंदगी और संक्रमण का खतरा झेलना पड़ रहा था। अब सीधे बैंक खाते में आएगा वेतन, पहली बार मिलेगा बोनस समझौते के तहत सबसे बड़ा फैसला यह लिया गया कि आउटसोर्सिंग और ठेका एजेंसियों के माध्यम से काम करने वाले सफाईकर्मियों का वेतन अब सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और कर्मचारियों को समय पर भुगतान मिल सकेगा। इसके साथ ही पहली बार सफाईकर्मियों को बोनस देने का भी निर्णय लिया गया है। ठेका एजेंसियों को उनका निर्धारित कमीशन मिलता रहेगा, लेकिन कर्मचारियों के वेतन भुगतान में किसी प्रकार की देरी या कटौती नहीं होगी। एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत यदि काम के दौरान सफाई वाहन खराब हो जाता है तो उस अवधि के लिए चालकों के वेतन में कटौती नहीं की जाएगी। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी। दैनिक कर्मियों को मिलेंगी स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं पटना नगर निगम कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश ने बताया कि राज्य सरकार नगर निकायों में कार्यरत सफाईकर्मियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि दैनिक कर्मियों को भविष्य में अवकाश, ग्रेच्युटी, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन तथा अन्य सेवा लाभ उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी, ताकि उन्हें स्थायी कर्मचारियों के समान सुविधाएं मिल सकें। 3816 कर्मचारियों के स्थायीकरण से बढ़ेगा वित्तीय भार नगर निगम की सशक्त स्थायी समिति ने 3816 दैनिक सफाईकर्मियों के स्थायीकरण की मांग को मंजूरी देकर विभाग को भेजने की अनुशंसा की है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो प्रत्येक कर्मचारी का प्रस्तावित मासिक वेतन 35,800 रुपये होगा। वर्तमान में इन कर्मचारियों पर प्रतिमाह लगभग 6.04 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जबकि स्थायीकरण के बाद यह खर्च बढ़कर 13.66 करोड़ रुपये प्रति माह हो जाएगा। इससे नगर निगम पर हर महीने लगभग 7.61 करोड़ रुपये और सालाना करीब 163.94 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। किस अंचल में कितने कर्मचारी कार्यरत पटना नगर निगम के आठ अंचलों और कार्यालयों में कुल 3816 दैनिक सफाईकर्मी कार्यरत हैं। नूतन राजधानी अंचल – 941 कर्मचारी पाटलिपुत्र अंचल – 700 अजीमाबाद – 585 बांकीपुर – 513 कंकड़बाग – 426 पटना सिटी – 405 जलापूर्ति अंचल – 199 मुख्यालय – 47 कर्मचारी अन्य मांगों पर बनेगी समिति नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने बताया कि कई मांगों पर सहमति बन गई है, जबकि अन्य लंबित मांगों पर विचार के लिए एक समिति गठित की जाएगी। उन्होंने कहा कि एसीपी और एमएससीपी योजना के लाभ पर लगी रोक हटाने के लिए विभाग स्तर पर पत्राचार किया जाएगा। जैसे ही यह रोक हटेगी, पात्र कर्मचारियों को योजना का लाभ दिया जाएगा। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था बहाल करने के लिए कर्मचारियों का काम पर लौटना बेहद आवश्यक था और समझौते से राजधानी को बड़ी राहत मिलेगी। शहर को मिली राहत हड़ताल के दौरान पटना के कई इलाकों में कूड़े के ढेर जमा हो गए थे, जिससे आम लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही थी। नगर निगम पर सफाई व्यवस्था बहाल करने का दबाव भी बढ़ गया था। अब हड़ताल समाप्त होने के बाद उम्मीद है कि शहर की सफाई व्यवस्था जल्द सामान्य हो जाएगी और लोगों को राहत मिलेगी।  

surbhi अगस्त 6, 2026 0
Jharkhand university teachers and employees facing PF fund irregularity financial loss issue
झारखंड के विश्वविद्यालयों में PF को लेकर बड़ा वित्तीय विवाद, 1800 शिक्षकों-कर्मियों को 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान!

झारखंड के सरकारी विश्वविद्यालयों और संबद्ध कॉलेजों में कार्यरत करीब 1800 शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के भविष्य निधि (PF) को लेकर गंभीर वित्तीय विसंगति सामने आई है। आरोप है कि कर्मचारियों के वेतन से हर महीने काटी जाने वाली PF राशि को निर्धारित भविष्य निधि खाते में जमा करने के बजाय साधारण बचत खाते में रखा जा रहा है। इससे कर्मचारियों को कम ब्याज मिलने के साथ-साथ अतिरिक्त आयकर का बोझ भी उठाना पड़ रहा है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार इस व्यवस्था से अब तक 100 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान हुआ है। PF खाते की जगह बचत खाते में जमा हो रही राशि जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय गठन के बाद से कर्मचारियों की PF राशि नियमित रूप से काटी जाती रही, लेकिन उसे भविष्य निधि खाते में स्थानांतरित करने के बजाय बचत खाते में रखा गया। इसके कारण कर्मचारियों को PF पर मिलने वाले अधिक ब्याज का लाभ नहीं मिल पाया। जहां भविष्य निधि खाते पर करीब 8.00 से 8.25 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिलता है, वहीं सामान्य बचत खाते में केवल 2.70 से 3.50 प्रतिशत ब्याज ही मिलता है। ब्याज दरों के इस बड़े अंतर से कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली राशि भी प्रभावित हुई है। कम ब्याज के साथ टैक्स का भी बोझ शिक्षकों और कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें केवल कम ब्याज का नुकसान ही नहीं उठाना पड़ रहा, बल्कि बचत खाते पर मिलने वाला ब्याज आयकर के दायरे में आने के कारण अतिरिक्त टैक्स भी देना पड़ रहा है। दूसरी ओर, निर्धारित सीमा तक PF पर मिलने वाला ब्याज सामान्यतः करमुक्त होता है। कर्मियों का आरोप है कि वर्षों तक उनकी मेहनत की कमाई पर उन्हें वह लाभ नहीं मिला, जिसके वे कानूनी और नैतिक रूप से हकदार हैं। एक कर्मचारी को सालाना कितना हो सकता है नुकसान? विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी कर्मचारी के खाते में 5 लाख रुपये जमा हैं, तो— PF खाते में 8% ब्याज के हिसाब से सालाना लगभग 40,000 रुपये ब्याज मिलता। बचत खाते में 2.7% ब्याज के हिसाब से केवल 13,500 रुपये मिलते। इस तरह केवल ब्याज में ही 26,500 रुपये का सालाना नुकसान होता है। यदि कर्मचारी 30 प्रतिशत आयकर स्लैब में आता है, तो बचत खाते के ब्याज पर लगभग 4,212 रुपये (टैक्स और सेस सहित) अतिरिक्त कर देना पड़ सकता है। यानी एक कर्मचारी को कुल मिलाकर करीब 30,700 रुपये प्रति वर्ष का नुकसान हो सकता है। ऑडिट और जांच की उठी मांग शिक्षक और कर्मचारी संगठनों ने इस पूरे मामले की वित्तीय और प्रशासनिक ऑडिट कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह पता लगाया जाए कि PF की राशि कितने समय तक बचत खातों में रखी गई, कर्मचारियों को वास्तविक रूप से कितना ब्याज मिलना चाहिए था और उन्हें कुल कितना आर्थिक नुकसान हुआ। संगठनों ने राज्य सरकार और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से इस व्यवस्था की समीक्षा कर दोषियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी की है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर भी पड़ा असर इस वित्तीय विसंगति का असर केवल वर्तमान कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। कई सेवानिवृत्त शिक्षक और कर्मचारी भी PF पर मिलने वाले अपेक्षित लाभ से वंचित रहे, जिससे उनकी आर्थिक सुरक्षा प्रभावित हुई है।  

surbhi अगस्त 6, 2026 0
CID officers investigating JPSC exam scam case with documents and files
JPSC परीक्षा घोटाले में CID की बड़ी कार्रवाई, अब तक 19 आरोपी गिरफ्तार; चयनित अभ्यर्थी और एजेंसी कर्मचारी भी शिकंजे में

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने कार्रवाई तेज कर दी है। बुधवार को रांची और उत्तर प्रदेश के लखनऊ में संयुक्त छापेमारी कर पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसके साथ ही इस मामले में अब तक कुल 19 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। CID के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में JPSC के अधिकारी, परीक्षा संचालन करने वाली निजी एजेंसी TDPL के निदेशक और कर्मचारी, चयनित अभ्यर्थी तथा कथित एजेंट शामिल हैं। किन-किन लोगों की हुई गिरफ्तारी? CID की जांच में अब तक जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें JPSC की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, TDPL के निदेशक रामवीर सिंह, मुख्य आरोपी और TDPL के मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी, तकनीकी प्रोग्रामर मोहम्मद उस्मान और मोहम्मद एबाद शामिल हैं। इसके अलावा TDPL के कर्मचारी हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह, संजय कुमार, JPSC कर्मचारी सोनू कुमार, मुख्य आरोपी का सहयोगी अरविंद कुमार, चयनित अभ्यर्थी सुमन सौरभ, उमाकांत उरांव, रोशन केरकेट्टा, मनोज कुमार, एजेंट उमेश कुमार, बुधेश्वर भगत, रमेश कुमार, आरोपी धर्मेंद्र कुमार तथा TDPL के अकाउंटेंट रक्षक सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है। CID जांच में क्या सामने आया? CID की जांच में दावा किया गया है कि उमाकांत उरांव ने 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में कथित रूप से अनुचित साधनों और धोखाधड़ी के जरिए सफलता हासिल की थी। जांच एजेंसी के अनुसार, वह अन्य अभ्यर्थियों को कथित रूप से अवैध सहायता उपलब्ध कराने के लिए एजेंट के रूप में भी काम करता था। इसी तरह रोशन केरकेट्टा और मनोज कुमार पर भी 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में कथित तौर पर अनुचित साधनों का इस्तेमाल कर सफल होने का आरोप है। TDPL के अकाउंटेंट की भूमिका भी जांच के दायरे में CID के मुताबिक, परीक्षा संचालन एजेंसी TDPL के अकाउंटेंट रक्षक सिंह की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि उसने भी कथित रूप से अनुचित साधनों का उपयोग कर 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा पास की थी। पूरे नेटवर्क की जांच जारी CID पूरे मामले में परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के नेटवर्क, एजेंटों की भूमिका, तकनीकी सहायता और परीक्षा संचालन से जुड़े अन्य पहलुओं की विस्तृत जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित अनियमितताओं का दायरा कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।  

surbhi अगस्त 6, 2026 0
Six NEET UG 2026 candidates file a petition in the Supreme Court alleging discrepancies in their OMR answer sheets
NEET UG 2026: OMR शीट में गड़बड़ी का आरोप, छह अभ्यर्थी पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

NEET UG 2026: नीट-यूजी 2026 परीक्षा एक बार फिर विवादों में है। छह अभ्यर्थियों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पर OMR शीट की स्कैन कॉपी में उत्तर बदलने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने काउंसिलिंग शुरू होने से पहले मामले की जल्द सुनवाई पर सहमति जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई को दी मंजूरी प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की उस मांग को स्वीकार किया, जिसमें काउंसिलिंग प्रक्रिया शुरू होने से पहले मामले की शीघ्र सुनवाई की अपील की गई थी। क्या है छात्रों का आरोप? याचिकाकर्ता छात्रों का कहना है कि परीक्षा के दौरान उन्होंने OMR शीट में जो उत्तर भरे थे, NTA की वेबसाइट पर अपलोड की गई स्कैन कॉपी में वे उत्तर अलग दिखाई दे रहे हैं। छात्रों के अनुसार: कई प्रश्नों के उत्तर बदले हुए या गलत दर्ज किए गए हैं। इससे उनके वास्तविक अंक प्रभावित हुए हैं। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो उनकी मेरिट रैंक और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पर असर पड़ सकता है। 600 से अधिक अंक पाने वाले छात्रों का दावा अदालत में छात्रों के वकील ने बताया कि याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा में 600 से 650 से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। उनका कहना है कि OMR शीट में कथित गड़बड़ी के कारण उन्हें नुकसान हुआ है और मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। NTA से संपर्क के बावजूद नहीं मिला समाधान याचिका के मुताबिक, छात्रों ने OMR शीट में कथित विसंगतियों को लेकर NTA को कई ईमेल भेजे और कुछ अभ्यर्थी व्यक्तिगत रूप से एजेंसी के कार्यालय भी पहुंचे। हालांकि, उनका आरोप है कि NTA की ओर से कोई संतोषजनक जवाब या समाधान नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। पहले भी उठ चुके हैं ऐसे सवाल NEET-UG 2026 में OMR शीट और परिणामों को लेकर इससे पहले भी कई कानूनी विवाद सामने आ चुके हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट, झारखंड हाईकोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में भी अभ्यर्थियों ने OMR शीट और घोषित अंकों में अंतर का आरोप लगाते हुए याचिकाएं दायर की थीं। पेपर लीक के बाद दोबारा हुई थी परीक्षा गौरतलब है कि NEET-UG 2026 की परीक्षा पहले 3 मई को आयोजित की गई थी। प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई और 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई गई। अब OMR शीट में कथित गड़बड़ी को लेकर परीक्षा एक बार फिर विवादों में आ गई है।  

kalpana अगस्त 5, 2026 0
Odisha government announces monthly stipends for eligible PG and PhD agriculture students at OUAT
PG और PhD छात्रों के लिए बड़ी राहत, हर महीने मिलेगा 15 हजार रुपये तक स्टाइपेंड; जानें किसे मिलेगा लाभ

भुवनेश्वर: उच्च शिक्षा और कृषि क्षेत्र में रिसर्च करने वाले छात्रों के लिए ओडिशा सरकार ने अहम पहल की है। ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी (OUAT) में कृषि और इससे जुड़े विषयों में नियमित पोस्ट-ग्रेजुएशन और PhD कर रहे छात्रों के लिए मासिक स्टाइपेंड देने का फैसला किया गया है। इस योजना के तहत योग्य PhD स्कॉलर्स को तीन साल तक हर महीने 15,000 रुपये, जबकि योग्य PG छात्रों को दो साल तक हर महीने 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी। सरकार का कहना है कि इस पहल का मकसद छात्रों पर आर्थिक दबाव कम करना और उन्हें पढ़ाई, रिसर्च तथा नवाचार पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर देना है। PhD छात्रों को तीन साल तक मिलेंगे 15 हजार रुपये नई स्टाइपेंड व्यवस्था के तहत कृषि में PhD कर रहे योग्य छात्रों को तीन साल तक हर महीने 15,000 रुपये दिए जाएंगे। इससे रिसर्च के दौरान छात्रों को अपनी पढ़ाई और शोध से जुड़े खर्चों को संभालने में मदद मिलने की उम्मीद है। यह आर्थिक सहायता खास तौर पर उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है जो उच्च शिक्षा के साथ-साथ लंबे समय तक रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। PG छात्रों को दो साल तक 10 हजार रुपये कृषि और इससे जुड़े विषयों में नियमित PG प्रोग्राम कर रहे योग्य छात्रों के लिए भी सरकार ने सहायता का ऐलान किया है। इन छात्रों को दो साल तक हर महीने 10,000 रुपये स्टाइपेंड दिया जाएगा। योजना OUAT में कृषि और संबंधित विषयों में पढ़ाई कर रहे नियमित PG छात्रों के लिए लागू होगी। इससे छात्रों को अपनी पढ़ाई के दौरान होने वाले व्यक्तिगत और अकादमिक खर्चों में कुछ आर्थिक राहत मिल सकती है। किस यूनिवर्सिटी के छात्रों को मिलेगा लाभ? यह स्टाइपेंड योजना ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी (OUAT) से जुड़ी है। योजना के दायरे में कृषि और इससे संबंधित विषयों में नियमित PG और PhD प्रोग्राम कर रहे पात्र छात्र शामिल होंगे। इसका मतलब यह नहीं है कि ओडिशा के सभी PG और PhD छात्रों को अपने आप स्टाइपेंड मिलेगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक योजना का दायरा OUAT में कृषि और संबंधित विषयों के नियमित छात्रों तक है। सरकार ने क्यों लिया यह फैसला? ओडिशा सरकार का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण रिसर्च को बढ़ावा देना और प्रतिभाशाली छात्रों को प्रोत्साहित करना है। सरकार के मुताबिक, आर्थिक सहायता मिलने से रिसर्च स्कॉलर्स को अपने खर्चों को लेकर कम चिंता करनी पड़ेगी और वे नए प्रयोग, तकनीकी नवाचार तथा कृषि क्षेत्र से जुड़े शोध पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे। कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों, बेहतर उत्पादन प्रणाली और किसानों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए उच्च गुणवत्ता वाले शोध की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि स्टाइपेंड जैसी आर्थिक मदद से छात्रों की रिसर्च में भागीदारी बढ़ेगी। ओडिशा के कृषि क्षेत्र को भी फायदा मिलने की उम्मीद राज्य सरकार के अनुसार, रिसर्च छात्रों को आर्थिक सहायता देने का असर केवल यूनिवर्सिटी तक सीमित नहीं रहेगा। इससे राज्य में कृषि से जुड़े शोध और नवाचार को बढ़ावा मिल सकता है। सरकार का मानना है कि मजबूत रिसर्च इकोसिस्टम से उन्नत कृषि तकनीक, बेहतर कृषि पद्धतियों और किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों पर काम करने में मदद मिलेगी। यानी इस पहल को छात्रों के लिए आर्थिक सहायता के साथ-साथ ओडिशा के कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। स्टाइपेंड का सार एक नजर में श्रेणी स्टाइपेंड अवधि कृषि एवं संबंधित विषयों के पात्र PhD छात्र ₹15,000 प्रति माह 3 साल कृषि एवं संबंधित विषयों के पात्र PG छात्र ₹10,000 प्रति माह 2 साल छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला? PG और PhD की पढ़ाई के दौरान फीस, किताबों, रिसर्च सामग्री, यात्रा और अन्य शैक्षणिक खर्चों का दबाव छात्रों पर रहता है। खासकर PhD रिसर्च लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया होती है। ऐसे में नियमित मासिक आर्थिक सहायता छात्रों को अपनी पढ़ाई और शोध जारी रखने में मदद कर सकती है। सरकार की उम्मीद है कि इस पहल से आर्थिक कारणों से रिसर्च पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सकेगा। हालांकि, छात्रों को स्टाइपेंड की पात्रता, भुगतान की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और आवेदन से जुड़े आधिकारिक नियमों की जानकारी OUAT या संबंधित सरकारी अधिसूचना से जरूर जांचनी चाहिए।  

surbhi अगस्त 5, 2026 0
International students walking on a US university campus amid discussions over a proposed OPT fee
US Student Visa: अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी करना होगा महंगा? विदेशी छात्रों से 1 लाख डॉलर शुल्क लेने पर विचार

US Student Visa News: अमेरिका में पढ़ाई करने के बाद नौकरी करने का सपना देखने वाले लाखों विदेशी छात्रों के लिए आने वाले समय में नियम काफी सख्त और महंगे हो सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, जिसके तहत पढ़ाई पूरी करने के बाद ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) के जरिए अमेरिका में नौकरी करने वाले विदेशी छात्रों से 1 लाख डॉलर (करीब 87 लाख रुपये) तक का शुल्क लिया जा सकता है। हालांकि इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। विदेशी छात्रों की बढ़ सकती है चिंता अमेरिका दुनिया भर के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का सबसे लोकप्रिय केंद्र माना जाता है। बेहतर विश्वविद्यालय, रिसर्च के अवसर और पढ़ाई के बाद नौकरी की संभावनाएं हर साल लाखों अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित करती हैं। खासकर भारत जैसे देशों के छात्र बड़ी संख्या में अमेरिकी विश्वविद्यालयों का रुख करते हैं। लेकिन द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन अब पढ़ाई के बाद अमेरिका में काम करने की प्रक्रिया को महंगा और अधिक नियंत्रित बनाने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित बदलाव लागू होने पर विदेशी छात्रों के लिए अमेरिका में करियर शुरू करना पहले की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। क्या है 1 लाख डॉलर वाला प्रस्ताव? रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रस्ताव Optional Practical Training (OPT) कार्यक्रम से जुड़ा है। OPT एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत F-1 स्टूडेंट वीजा पर पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में अपने विषय से संबंधित क्षेत्र में काम कर सकते हैं। फिलहाल नियमों के मुताबिक: सामान्य कोर्स करने वाले छात्रों को 12 महीने तक काम करने की अनुमति मिलती है। STEM (Science, Technology, Engineering and Mathematics) विषयों के छात्रों को यह अवधि बढ़ाकर 36 महीने तक मिल सकती है। इसी कार्यक्रम के तहत नौकरी करने की अनुमति के लिए 1 लाख डॉलर तक का शुल्क लगाने पर विचार किया जा रहा है। H-1B वीजा का भी बनता है रास्ता OPT कार्यक्रम विदेशी छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे उन्हें अमेरिकी कंपनियों में कार्य अनुभव मिलता है। यही अनुभव आगे चलकर H-1B वर्क वीजा हासिल करने की संभावनाओं को भी मजबूत करता है। यदि प्रस्तावित शुल्क लागू होता है, तो अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी की लागत काफी बढ़ सकती है। किसे देना होगा शुल्क? रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित 1 लाख डॉलर का शुल्क विदेशी छात्रों को स्वयं देना होगा या उन्हें नौकरी देने वाली कंपनियां इसका भुगतान करेंगी। इस मुद्दे पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग में चल रही चर्चा बताया गया है कि यह प्रस्ताव फिलहाल अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (Department of Homeland Security - DHS) के स्तर पर विचाराधीन है। अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक नियम या अधिसूचना जारी नहीं हुई है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो इसका सबसे अधिक असर भारत सहित उन देशों के छात्रों पर पड़ सकता है, जहां से बड़ी संख्या में छात्र हर साल उच्च शिक्षा और करियर के लिए अमेरिका जाते हैं। फिलहाल छात्र और विश्वविद्यालय प्रशासन सरकार के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं।  

kalpana जुलाई 31, 2026 0
Education loan reforms may enable faster approval, higher collateral-free limits and interest relief for students
Education Loan: अब 10 दिन में फाइनल हो सकता है एजुकेशन लोन, सरकार की बड़ी तैयारी; बिना गारंटी ज्यादा रकम मिलने की उम्मीद

देश में उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत के बीच छात्रों के लिए एजुकेशन लोन हासिल करना आसान बनाने की दिशा में केंद्र सरकार बड़े बदलावों की तैयारी कर रही है। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में एजुकेशन लोन बांटने की रफ्तार को करीब दोगुना करना है। इसके लिए लोन आवेदन की प्रक्रिया को तेज करने, बिना गारंटी मिलने वाले लोन की सीमा बढ़ाने और छात्रों को ब्याज में राहत देने जैसे कदमों पर काम किया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बैंकों को एजुकेशन लोन के आवेदन को 10 दिनों के भीतर अंतिम रूप देने का लक्ष्य दिया जा सकता है। इसके अलावा देशभर के करीब 50,000 कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों में बैंक कैंप लगाए जाने की तैयारी है, ताकि छात्रों को लोन की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी मौके पर ही मिल सके और आवेदन का निपटारा तेजी से हो। एजुकेशन लोन बांटने की रफ्तार दोगुनी करने का लक्ष्य सरकार की योजना अगले साल तक एजुकेशन लोन वितरण की रफ्तार को दोगुना करने की है। वित्त वर्ष 2025-26 में बैंकों ने करीब 39,000 करोड़ रुपये के एजुकेशन लोन वितरित किए थे। इसी अवधि में 3.80 लाख से ज्यादा एजुकेशन लोन आवेदन मंजूर किए गए। सरकार का मानना है कि लोन प्रक्रिया आसान और तेज होने से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को उच्च शिक्षा हासिल करने में मदद मिल सकती है। 10 दिन में पूरा करने की तैयारी प्रस्तावित बदलावों में सबसे अहम एजुकेशन लोन की प्रोसेसिंग टाइमलाइन को कम करना है। बैंकों को आवेदन मिलने के बाद करीब 10 दिनों के भीतर लोन पर फैसला लेने के लक्ष्य के साथ काम करने को कहा जा सकता है। इसका सीधा फायदा उन छात्रों को मिल सकता है, जिन्हें कॉलेज में एडमिशन, फीस जमा करने या विदेश में पढ़ाई की प्रक्रिया के दौरान जल्द वित्तीय सहायता की जरूरत होती है। 50 हजार कॉलेजों में बैंक लगाएंगे कैंप सरकार और बैंक छात्रों तक एजुकेशन लोन की सुविधा पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर कैंप लगाने की योजना बना रहे हैं। करीब 50,000 कॉलेजों और संस्थानों में बैंक कैंप आयोजित किए जाने की तैयारी है। इन कैंपों के जरिए छात्रों को लोन की पात्रता, ब्याज दर, दस्तावेज, गारंटी और आवेदन प्रक्रिया के बारे में जानकारी मिल सकेगी। कुछ संस्थानों में बैंक पहले से ही छात्रों को मौके पर लोन से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। बिना गारंटी लोन की सीमा बढ़ सकती है फिलहाल Credit Guarantee Fund Scheme for Education Loans (CGFSEL) के तहत 7.5 लाख रुपये तक के एजुकेशन लोन पर 75 फीसदी तक क्रेडिट गारंटी कवर उपलब्ध है। सरकार अब बिना किसी संपत्ति या अन्य सुरक्षा को गिरवी रखे मिलने वाले लोन की सीमा बढ़ाने पर विचार कर रही है। दिसंबर 2025 में एक संसदीय समिति ने इस सीमा को 7.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने की सिफारिश की थी। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो छात्रों को महंगी उच्च शिक्षा के लिए ज्यादा रकम का एजुकेशन लोन बिना कोलैटरल के हासिल करने में मदद मिल सकती है। सह-आवेदक की शर्त में भी बदलाव संभव सरकार एजुकेशन लोन के लिए गारंटी कवर मिलने वाले मामलों में सह-आवेदक की अनिवार्य शर्त को हटाने पर भी विचार कर रही है। इससे छात्रों और उनके परिवारों के लिए लोन प्रक्रिया और आसान हो सकती है। हालांकि, अंतिम नियम और पात्रता शर्तें संबंधित सरकारी फैसले और बैंकों की लागू व्यवस्था के आधार पर स्पष्ट होंगी। ब्याज में भी मिल सकती है राहत सरकार छात्रों के लिए ब्याज सब्सिडी की सुविधा को भी मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना (PM Vidyalaxmi Scheme) के तहत वित्त वर्ष 2024-25 से 2030-31 की अवधि के लिए ब्याज सब्सिडी के लिए 3,600 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य पात्र छात्रों पर उच्च शिक्षा के लिए लिए गए कर्ज का वित्तीय बोझ कम करना है। छोटे-मोटे बैंक चार्ज भी हटाने की तैयारी बैंकिंग स्तर पर छात्रों को अतिरिक्त राहत देने के लिए कुछ छोटे-मोटे शुल्क माफ किए जाने की व्यवस्था भी कई मामलों में देखने को मिल रही है। सरकार की व्यापक योजना लोन आवेदन से लेकर मंजूरी और वितरण तक की प्रक्रिया को ज्यादा सरल बनाने की है। छात्रों के लिए क्या बदलेगा? प्रस्तावित बदलाव लागू होने पर एजुकेशन लोन लेने वाले छात्रों के लिए कई स्तरों पर राहत मिल सकती है। 10 दिन: लोन आवेदन को अंतिम रूप देने का लक्ष्य 50,000: बैंक कैंप के लिए लक्षित कॉलेज और संस्थान 7.5 लाख रुपये: मौजूदा कोलैटरल-फ्री लोन सीमा 20 लाख रुपये: संसदीय समिति की प्रस्तावित नई सीमा 3,600 करोड़ रुपये: PM Vidyalaxmi के तहत ब्याज सब्सिडी का बजट 39,000 करोड़ रुपये: FY2025-26 में वितरित एजुकेशन लोन 3.80 लाख+: FY2025-26 में मंजूर किए गए एजुकेशन लोन आवेदन छात्रों के लिए क्यों अहम है यह बदलाव? आज उच्च शिक्षा की फीस, हॉस्टल, किताबों और अन्य खर्चों के कारण कई परिवारों के लिए पढ़ाई का खर्च उठाना चुनौती बन गया है। ऐसे में अगर एजुकेशन लोन की प्रक्रिया तेज होती है, बिना गारंटी ज्यादा रकम मिलती है और ब्याज पर राहत मिलती है, तो छात्रों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच आसान हो सकती है। हालांकि, छात्रों को लोन लेने से पहले ब्याज दर, कुल पुनर्भुगतान राशि, मोरेटोरियम अवधि, EMI, प्रोसेसिंग फीस और अन्य नियमों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था से राहत की उम्मीद जरूर है, लेकिन अंतिम नियम लागू होने के बाद ही इसकी पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।  

surbhi जुलाई 31, 2026 0
Medical students reviewing NEET UG 2026 counselling updates with new MCC online seat upgrade and resignation rules.
NEET Counselling 2026: MBBS एडमिशन के 3 बड़े नियम बदले, छात्रों को मिलेगी बड़ी राहत

NEET Counselling 2026: NEET UG 2026 के जरिए MBBS, BDS और अन्य अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में प्रवेश की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए बड़ी राहत की खबर है। Medical Counselling Committee (MCC) ने काउंसलिंग प्रक्रिया को पहले से अधिक आसान और पारदर्शी बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए नियमों के तहत अब सीट अपग्रेड कराने या सीट छोड़ने (Seat Resignation) के लिए उम्मीदवारों को संबंधित मेडिकल कॉलेज में जाकर फिजिकल रिपोर्टिंग नहीं करनी होगी। इसके अलावा NRI कोटा के तहत आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के लिए दस्तावेज अपलोड करने की प्रक्रिया भी पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार ये बदलाव 2026-27 शैक्षणिक सत्र से लागू होंगे। इसका उद्देश्य काउंसलिंग प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक, पारदर्शी और डिजिटल बनाना है। क्या हैं MCC के 3 बड़े बदलाव? 1. सीट अपग्रेड के लिए कॉलेज में रिपोर्टिंग की जरूरत नहीं पहले यदि किसी उम्मीदवार को किसी राउंड में सीट मिल जाती थी और वह अगले राउंड में बेहतर कॉलेज या बेहतर ब्रांच के लिए Upgrade विकल्प चुनता था, तो उसे पहले अलॉट हुए कॉलेज में जाकर रिपोर्ट करना पड़ता था। अब नए नियम के अनुसार, यदि उम्मीदवार Upgrade/Willing to Upgrade विकल्प चुनता है, तो उसकी सीट MCC पोर्टल पर सुरक्षित रहेगी और वह बिना कॉलेज जाए अगले राउंड की काउंसलिंग में शामिल हो सकेगा। फायदा यात्रा का खर्च बचेगा। समय की बचत होगी। दूसरे राज्यों के छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। 2. अब सीट रिजाइन (Seat Resignation) भी पूरी तरह ऑनलाइन पहले किसी मेडिकल सीट को छोड़ने के लिए संबंधित कॉलेज जाकर औपचारिक प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। अब उम्मीदवार MCC Counselling Portal पर निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन Seat Resignation Letter जमा कर सकेंगे। फायदा कॉलेज जाने की आवश्यकता नहीं। पूरी प्रक्रिया तेज और आसान। ऑनलाइन ट्रैकिंग की सुविधा। 3. NRI कोटा डॉक्यूमेंट्स अब ऑनलाइन अपलोड होंगे डीम्ड यूनिवर्सिटीज में NRI कोटा के तहत आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को पहले दस्तावेज सत्यापन के लिए अलग प्रक्रिया अपनानी पड़ती थी। अब सभी आवश्यक दस्तावेज सीधे MCC Portal पर अपलोड किए जा सकेंगे। फायदा अलग से दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं। वेरिफिकेशन प्रक्रिया अधिक सरल। समय और परेशानी दोनों कम। कॉलेजों और राज्यों के लिए MCC के निर्देश नई ऑनलाइन काउंसलिंग प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए MCC ने राज्य काउंसलिंग प्राधिकरणों, मेडिकल कॉलेजों और नोडल अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इसके अलावा राज्यों और मेडिकल कॉलेजों को निर्देश दिए गए हैं कि वे— सीटों की संख्या कॉलेज फीस पात्रता अन्य आवश्यक जानकारी समय पर सार्वजनिक करें ताकि उम्मीदवार सही निर्णय ले सकें। उम्मीदवार क्या करें? NEET UG 2026 काउंसलिंग शुरू होने से पहले उम्मीदवारों को— सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखें। MCC की आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित अपडेट देखें। रजिस्ट्रेशन और Choice Filling की तारीखों पर नजर रखें। केवल आधिकारिक नोटिफिकेशन के आधार पर ही प्रक्रिया पूरी करें। महत्वपूर्ण सरकारी लिंक MCC Official Website (NEET UG Counselling): https://mcc.nic.in Official Notices & Counselling Updates: https://mcc.nic.in/#/home ध्यान रखें :-  नई व्यवस्था का उद्देश्य मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया को अधिक डिजिटल, पारदर्शी और छात्र-अनुकूल बनाना है। हालांकि, प्रत्येक काउंसलिंग राउंड की समय-सीमा और नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। आवेदन या सीट संबंधी कोई भी निर्णय लेने से पहले MCC द्वारा जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन अवश्य पढ़ें।

anmol जुलाई 30, 2026 0
UGC का 1-वर्षीय PG कोर्स और 4 साल की UG डिग्री को लेकर फैसला
UGC का 1-वर्षीय PG कोर्स पर बड़ा फैसला, चार साल की UG डिग्री वालों को मिलेगा एक साल में मास्टर डिग्री का विकल्प

नई शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा में बदलाव, ऑनलाइन और डिस्टेंस मोड में भी शुरू किए जा सकेंगे 1-वर्षीय PG प्रोग्राम   नई दिल्ली, एजेंसियां। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एक वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट (PG) प्रोग्राम को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब चार वर्षीय स्नातक (UG) डिग्री पूरी करने वाले छात्रों को एक साल में PG डिग्री करने का विकल्प मिलेगा। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक लचीला बनाने की दिशा में उठाया गया है।   4 साल की UG डिग्री वालों को मिलेगा फायदा   UGC के नए प्रावधानों के अनुसार, जिन छात्रों ने चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम पूरा किया है, वे एक वर्षीय PG कोर्स में प्रवेश ले सकेंगे। वहीं, तीन वर्षीय UG डिग्री वाले छात्रों के लिए PG की अवधि दो वर्ष रहने का प्रावधान जारी रहेगा।   ऑनलाइन और डिस्टेंस मोड में भी उपलब्ध होगा विकल्प   UGC ने उच्च शिक्षा संस्थानों को एक वर्षीय PG कार्यक्रम ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ODL) और ऑनलाइन माध्यम से भी संचालित करने की अनुमति दी है। इससे नौकरी या अन्य कारणों से नियमित कॉलेज नहीं जा पाने वाले छात्रों को भी उच्च शिक्षा जारी रखने का अवसर मिलेगा।   NEP 2020 के तहत बदलेगा PG शिक्षा ढांचा   नई व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों को अपनी रुचि और करियर की जरूरत के अनुसार पढ़ाई चुनने की स्वतंत्रता देना है। UGC के अनुसार, नए PG ढांचे में क्रेडिट सिस्टम, मल्टीपल एंट्री-एग्जिट और अलग-अलग सीखने के विकल्पों को बढ़ावा दिया जा रहा है।   विश्वविद्यालयों को नए पाठ्यक्रम तैयार करने होंगे   एक वर्षीय PG कोर्स शुरू करने के लिए विश्वविद्यालयों को UGC के नियमों के अनुसार पाठ्यक्रम, क्रेडिट संरचना और प्रवेश प्रक्रिया तैयार करनी होगी। कई विश्वविद्यालयों ने नए अकादमिक सत्र से इस बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 30, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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