लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान घायल हुए एक युवक को मीडिया के सामने पेश कर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी का दावा है कि युवक शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा लेकर प्रदर्शन कर रहा था, तभी उस पर पैलेट गन चलाई गई, जिससे उसकी एक आंख की रोशनी चली गई। राहुल गांधी का सरकार पर हमला एएनआई के मुताबिक राहुल गांधी ने कहा कि सरकार पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार कर रही है, जबकि घायल युवक की एक आंख की रोशनी जा चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि हजारों छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का भी इस्तेमाल हुआ। राहुल गांधी ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों के साथ इस तरह की कार्रवाई बेहद गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पुलिस भर्ती परीक्षा और पेपर लीक का उठाया मुद्दा राहुल गांधी ने बताया कि घायल युवक ने पुलिस भर्ती परीक्षा दी थी, लेकिन पेपर लीक के कारण उसका भविष्य प्रभावित हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि नौकरी और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे युवाओं की आवाज को बल प्रयोग के जरिए दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने केंद्र सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पैलेट गन को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल भारत में पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर पहले भी विवाद होता रहा है। विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल के मामलों में कई लोगों की आंखों की रोशनी जाने की घटनाएं सामने आई थीं। मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी दलों ने समय-समय पर इसके इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। अब जंतर-मंतर में छात्र प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन इस्तेमाल किए जाने के आरोपों के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। सरकार और विपक्ष आमने-सामने राहुल गांधी के आरोपों के बाद छात्र आंदोलन का मुद्दा फिर राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार पहले ही प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों से इनकार कर चुकी है। फिलहाल इस मामले में आधिकारिक जांच और तथ्यों का इंतजार है। जांच के नतीजों के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रदर्शन के दौरान वास्तव में क्या हुआ था।
नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस महासचिव और सांसद कुमारी सैलजा ने छात्र आंदोलन और परीक्षा प्रणाली को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देशभर के छात्र लगातार अपनी समस्याएं और मांगें उठा रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी आवाज सुनने के बजाय उन्हें नजरअंदाज कर रही है। सैलजा ने सरकार से छात्रों के सवालों का जवाब देने और उनकी चिंताओं का समाधान करने की मांग की। परीक्षा सुधार और पारदर्शिता की मांग उठाई कुमारी सैलजा ने कहा कि पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही खामियों ने लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों के साथ संवाद स्थापित कर परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। पुलिस कार्रवाई पर भी उठाए सवाल कांग्रेस नेता ने छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है और उनकी आवाज को दबाने के बजाय सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। सरकार से मांगा स्पष्ट जवाब सैलजा ने कहा कि युवा रोजगार, निष्पक्ष परीक्षाओं और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से इन मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देने और छात्रों का भरोसा बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की। राजनीतिक बयानबाजी तेज कुमारी सैलजा के बयान के बाद छात्र आंदोलन और परीक्षा सुधार का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। कांग्रेस ने सरकार पर युवाओं की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधी रात जारी वीडियो संदेश के बाद भी NEET पेपर लीक मामले पर सियासी घमासान थमता नहीं दिख रहा है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने छात्रों की सबसे बड़ी मांग—केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे—पर कोई जवाब नहीं दिया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री के वीडियो को साझा करते हुए कहा कि छात्र लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, ऐसे में आधी रात को वीडियो जारी कर उनकी भावनाओं और समझदारी का अपमान नहीं किया जाना चाहिए। राहुल गांधी ने रखीं तीन मांगें राहुल गांधी ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं— केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल पद से हटाया जाए। प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कार्रवाई करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। सरकार छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगे। पीएम मोदी ने क्या कहा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि उनकी सरकार प्रश्नपत्र लीक के मामलों से निपटने के लिए सख्त कानून लाने जा रही है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार (24 जुलाई) को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस विधेयक के मसौदे पर चर्चा होगी और उसे अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद अगले सप्ताह इसे संसद में पेश किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित कानून में पेपर लीक कराने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान होगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके और छात्रों का भरोसा कायम रहे। फास्ट ट्रैक कोर्ट शुरू होने का दावा अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के निर्देश दिए थे और अब इन अदालतों ने काम शुरू कर दिया है। उनका कहना था कि इससे दोषियों को जल्द सजा दिलाने में मदद मिलेगी। NEET परीक्षा पर सरकार का पक्ष प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाएं लाखों छात्रों और उनके परिवारों को प्रभावित करती हैं। उन्होंने बताया कि आरोप सामने आने के बाद सरकार ने कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा और छात्रों का शैक्षणिक वर्ष खराब न हो, इसके लिए जल्द दोबारा परीक्षा आयोजित कराई गई। प्रधानमंत्री के अनुसार, पुनः आयोजित NEET परीक्षा में 22 लाख से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया और उसका परिणाम 19 जुलाई को जारी किया गया। मुद्दे पर जारी है सियासी टकराव प्रधानमंत्री के नए कानून और फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा के बावजूद विपक्ष अपने रुख पर कायम है। कांग्रेस का कहना है कि जवाबदेही तय करने के लिए शिक्षा मंत्री का इस्तीफा जरूरी है, जबकि सरकार का दावा है कि वह परीक्षा प्रणाली में सुधार और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।
कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की शिक्षा नीति और छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे छात्रों के साथ सरकार ऐसा व्यवहार कर रही है, मानो वे देश के दुश्मन हों। सोनिया गांधी ने कहा कि छात्रों की आवाज दबाने के बजाय उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। 'शिक्षा व्यवस्था का पतन, युवा भारत की पीड़ा' शीर्षक से लिखा लेख अंग्रेजी दैनिक द हिंदू में प्रकाशित अपने लेख "An Education System's Collapse, Young India's Trauma" (शिक्षा व्यवस्था का पतन, युवा भारत की पीड़ा) में सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देशभर के छात्र केवल परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने उनके शांतिपूर्ण विरोध का जवाब "कायरता और अकारण क्रूरता" से दिया है। सोनिया गांधी ने लिखा कि छात्रों ने सरकार के शिक्षा सुधार संबंधी दावों की वास्तविकता उजागर कर दी है। उनका कहना है कि सरकार युवाओं को देश का भविष्य मानने के बजाय उनके साथ कठोर रवैया अपना रही है। 'शिक्षा व्यवस्था युवाओं को उम्मीद नहीं, निराशा दे रही' अपने लेख में सोनिया गांधी ने कहा कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था युवाओं को अवसर देने के बजाय निराशा और असुरक्षा की ओर धकेल रही है। उनके अनुसार, देश में चल रहा छात्र आंदोलन दो बड़ी वजहों का परिणाम है। पहली, ऐसी शिक्षा व्यवस्था जिसने छात्रों का भरोसा तोड़ दिया है और दूसरी, केंद्र सरकार का रवैया, जो जवाबदेही तय करने और सुधारात्मक कदम उठाने से लगातार बचता रहा है। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ खड़ा होना केवल राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज और लोकतंत्र के प्रति नैतिक एवं संवैधानिक दायित्व भी है। पुलिस कार्रवाई पर भी उठाए सवाल सोनिया गांधी ने छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाली दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर ऐसी कार्रवाई हुई हो। अपने लेख में उन्होंने 2020 के CAA-NRC विरोध प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी विश्वविद्यालय परिसरों में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की कार्रवाई हुई थी। इसके अलावा उन्होंने महिला पहलवानों के आंदोलन का भी जिक्र करते हुए कहा कि देश उन घटनाओं को भी नहीं भूला है। सरकार पर शिक्षा व्यवस्था कमजोर करने का आरोप कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण देश की शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और छात्रों में बढ़ती निराशा जैसे मुद्दे गंभीर चिंता का विषय हैं। सोनिया गांधी ने कहा कि सरकार को छात्रों की आवाज दबाने के बजाय उनकी मांगों को गंभीरता से सुनना चाहिए। उनका कहना था कि यदि समय रहते शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार नहीं किए गए, तो इसका असर केवल छात्रों के भविष्य पर ही नहीं, बल्कि देश के विकास और भविष्य पर भी पड़ेगा। छात्रों के समर्थन की अपील अपने लेख के अंत में सोनिया गांधी ने सभी राजनीतिक दलों और समाज से छात्रों के साथ खड़े होने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उनके मुताबिक, छात्रों की मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सुनना और उन पर कार्रवाई करना किसी भी जिम्मेदार सरकार का दायित्व होना चाहिए।
संसद के मानसून सत्र का आज (शुक्रवार, 24 जुलाई) पांचवां दिन है। पिछले चार दिनों तक विपक्ष के हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। आज सरकार पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़ा एक अहम विधेयक पेश कर सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक प्रस्तावित बिल का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस इस विधेयक का अध्ययन करने के बाद सदन में चर्चा में हिस्सा ले सकती है। ऐसे में आज का दिन संसद की कार्यवाही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पेपर लीक पर घमासान जारी नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी छात्र आंदोलन और संसद के भीतर विपक्ष के विरोध के बीच सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। विपक्ष लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह इस मुद्दे पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। सत्तापक्ष का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दे चुके हैं और सरकार परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। खरगे का पीएम मोदी पर निशाना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, "जब संसद चल रही होती है तो प्रधानमंत्री को संसद के पटल पर बयान देना होता है, देर रात वीडियो बनाकर संसद के बाहर एकतरफा 'मन की बात' नहीं करनी होती। पीएम मोदी, आज संसद में आने से पहले धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करके आइए।" खरगे का यह बयान प्रधानमंत्री मोदी के उस वीडियो संदेश के बाद आया, जिसमें उन्होंने पेपर लीक मामलों पर सख्त कानून और फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा की थी। निर्मला सीतारमण बोलीं- चर्चा के लिए सरकार तैयार गुरुवार को संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नीट पेपर लीक का मामला देश के छात्रों और उनके भविष्य से जुड़ा है, इसलिए सरकार इसे बेहद गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामले में शामिल कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और सरकार फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से जल्द कार्रवाई सुनिश्चित करना चाहती है। सीतारमण ने कहा, "पेपर लीक के बाद तुरंत दोबारा परीक्षा कराई गई और परिणाम भी घोषित किए गए। अब छात्र आगे की पढ़ाई की तैयारी कर रहे हैं। यदि विपक्ष चर्चा चाहता है तो सरकार संसद में इस विषय पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।" विपक्ष पर लगाया शर्तें बदलने का आरोप वित्त मंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि पहले उसने संसद में चर्चा की मांग की और जब सरकार ने सहमति दे दी, तब विपक्ष ने नई-नई शर्तें रखनी शुरू कर दीं। उन्होंने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा चाहती है, लेकिन संसद की कार्यवाही बाधित करने से किसी समस्या का समाधान नहीं होगा। आज के सत्र पर सबकी नजर मानसून सत्र के पांचवें दिन सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार पेपर लीक से जुड़ा प्रस्तावित विधेयक पेश करती है या नहीं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष चर्चा में शामिल होता है या शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना विरोध जारी रखता है। पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और छात्र आंदोलन के मुद्दे पर आज संसद में तीखी बहस होने के आसार हैं।
संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन भी NEET पेपर लीक और छात्रों के मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा में जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए सदन की कार्यवाही बाधित की। हंगामे के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। खरगे की दो टूक: पहले इस्तीफा, फिर चर्चा राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष शुरू से ही NEET मामले पर चर्चा चाहता था, लेकिन सरकार ने पहले इस पर सहमति नहीं दी। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर पुलिस कार्रवाई हुई और विपक्षी नेताओं का अपमान किया गया। खरगे ने स्पष्ट कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक विपक्ष किसी भी चर्चा में शामिल नहीं होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्यसभा परिसर में उन्हें रोकने की कोशिश की गई, जिसे उन्होंने लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया। दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार स्थगित विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण गुरुवार को भी संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। राज्यसभा की कार्यवाही पहले 12 बजे और बाद में दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई। लोकसभा की कार्यवाही भी लगातार नारेबाजी के कारण पहले 12 बजे और फिर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। पीएम मोदी और अमित शाह का संदेश देशभर में जारी छात्र आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और पेपर लीक के दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी प्रधानमंत्री के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। रिजिजू का विपक्ष पर हमला संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार शुरू से ही NEET मामले पर चर्चा चाहती है, लेकिन विपक्ष नई-नई शर्तें रख रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी विषय पर खुली चर्चा के पक्ष में है, लेकिन सदन की कार्यवाही शर्तों के आधार पर नहीं चल सकती। राहुल गांधी ने सरकार को घेरा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने शिक्षा प्रणाली को कमजोर होने दिया और छात्र लगातार परेशान हैं। राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवाओं के भविष्य की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस मुद्दे पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। प्रियंका गांधी और महुआ मोइत्रा का विरोध प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद परिसर में विपक्ष के प्रदर्शन में हिस्सा लिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। महुआ मोइत्रा ने दिल्ली मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार विपक्ष और छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। सुरजेवाला ने नियम 267 के तहत दिया नोटिस कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने राज्यसभा में नियम 267 के तहत नोटिस देकर NEET पेपर लीक, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर तत्काल चर्चा की मांग की। उनका कहना है कि यह मुद्दा लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है और इसे प्राथमिकता के आधार पर सदन में उठाया जाना चाहिए।
NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश के युवाओं के भविष्य को सबसे अधिक नुकसान मोदी सरकार ने पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि केवल बयान देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि छात्रों की प्रमुख मांगों को स्वीकार करना होगा। राहुल गांधी ने क्या कहा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट के कुछ ही देर बाद राहुल गांधी ने X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को कमजोर होने दिया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्र लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है। छात्रों की तीन प्रमुख मांगें राहुल गांधी ने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्रों की तीन मुख्य मांगें हैं— केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए। देशभर के छात्रों से सार्वजनिक माफी मांगी जाए। प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कार्रवाई करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। राहुल गांधी का कहना है कि इन मांगों पर कार्रवाई किए बिना सरकार का कोई भी आश्वासन अधूरा रहेगा। PM मोदी ने क्या कहा था? इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और पेपर लीक के दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके। जयराम रमेश का भी हमला कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर संसद में चर्चा करने के बजाय सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन के बढ़ते दबाव के कारण प्रधानमंत्री को बयान देना पड़ा है। जयराम रमेश ने कहा कि संसद लोकतांत्रिक जवाबदेही का मंच है और प्रधानमंत्री को वहीं आकर विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए। NEET मुद्दे पर जारी है सियासी घमासान NEET पेपर लीक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। एक ओर सरकार फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त कार्रवाई की बात कर रही है, वहीं विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, जवाबदेही तय करने और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग पर अड़ा हुआ है। संसद के मानसून सत्र में भी यह मुद्दा लगातार हंगामे का कारण बना हुआ है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सबसे जरूरी है। राहुल गांधी ने पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं और छात्रों की परेशानियों को लेकर सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की। परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठाए सवाल राहुल गांधी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी से लाखों छात्रों का समय, मेहनत और भविष्य प्रभावित होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को परीक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए और छात्रों को भरोसेमंद व्यवस्था उपलब्ध करानी चाहिए। छात्र आंदोलनों को मिला विपक्ष का समर्थन दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई जगहों पर छात्रों के प्रदर्शन के बीच राहुल गांधी ने सरकार से छात्रों की आवाज सुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याओं को दबाने के बजाय उनके साथ संवाद कर समाधान निकालना चाहिए। NEET और पेपर लीक मुद्दे पर सरकार को घेरा विपक्ष लगातार NEET और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में विश्वास बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार ने उठाए सुधारात्मक कदम वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून, तकनीकी निगरानी और जांच प्रक्रिया को मजबूत करने की बात कही है। शिक्षा मुद्दे पर सियासी टकराव तेज छात्रों और परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर संसद के मानसून सत्र में भी राजनीतिक बहस तेज है। विपक्ष जहां सरकार पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि वह युवाओं के हितों की रक्षा और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
दिल्ली में छात्रों के मुद्दे और कथित नीट धांधली को लेकर विपक्ष के प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई सांसदों को पुलिस ने हिरासत में लिया। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च कर रहे विपक्षी नेताओं को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया, जिसके बाद प्रदर्शन स्थल पर धक्का-मुक्की और नारेबाजी का माहौल बन गया। PM आवास के बाहर धरने पर बैठे विपक्षी नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के 30 से अधिक सांसद प्रधानमंत्री आवास के बाहर सड़क पर बैठ गए। उनके साथ प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और कई अन्य नेता भी मौजूद थे। प्रदर्शनकारियों ने छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस से धक्का-मुक्की, राहुल के चेहरे पर चोट प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने नेताओं को हटाने के लिए सुरक्षा घेरा बनाया। इस दौरान राहुल गांधी और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। घटनास्थल की तस्वीरों में राहुल गांधी के चेहरे पर चोट के निशान भी दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर बस के जरिए वहां से हटाया। प्रियंका गांधी को अलग ले गई पुलिस महिला पुलिसकर्मियों ने प्रियंका गांधी वाड्रा को भी हिरासत में लिया। उन्हें राहुल गांधी से अलग मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन ले जाया गया। प्रियंका गांधी ने हिरासत के दौरान पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। विपक्ष की क्या थी मांग? विपक्षी दलों की मांग थी कि: संसद में नीट परीक्षा में कथित धांधली पर चर्चा कराई जाए। 20 जुलाई को संसद मार्च कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई की जांच हो। छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारियों पर सख्त कदम उठाए जाएं। हिरासत के बाद क्या है नियम? संसदीय परंपराओं के अनुसार, यदि किसी सांसद को हिरासत में लिया जाता है या गिरफ्तार किया जाता है, तो संबंधित एजेंसी को इसकी सूचना लोकसभा अध्यक्ष को देना आवश्यक होता है। प्रियंका गांधी का सरकार पर हमला रिहा होने के बाद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों की आवाज दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ किया गया व्यवहार पूरी तरह अनुचित और अस्वीकार्य है। देर रात हुई रिहाई राहुल गांधी को हिरासत में लेने के बाद उत्तर दिल्ली स्थित छत्रसाल स्टेडियम, जिसे अस्थायी हिरासत केंद्र बनाया गया था, ले जाया गया। करीब तीन घंटे बाद रात लगभग 10 बजे उन्हें रिहा कर दिया गया। वहीं, प्रियंका गांधी को मंदिर मार्ग थाने में रखा गया, जहां उनसे मिलने सोनिया गांधी भी पहुंचीं। इसके बाद रात करीब 9:45 बजे प्रियंका गांधी को भी रिहा कर दिया गया। क्या सांसदों को गिरफ्तारी से छूट मिलती है? सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और विधि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक हो, तो पुलिस किसी भी व्यक्ति को हिरासत में ले सकती है। सांसद होने के कारण किसी व्यक्ति को गिरफ्तारी या हिरासत से स्वतः छूट नहीं मिलती। छात्रों के मुद्दे पर हुए इस प्रदर्शन के बाद राजधानी दिल्ली का राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।
NEET पेपर लीक और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है। कांग्रेस के प्रदर्शन और प्रधानमंत्री आवास के पास धरने के बाद केंद्र सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। एक ओर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी पर वादा तोड़ने का आरोप लगाया, वहीं कांग्रेस ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने और संसद में चर्चा से बचने का आरोप लगाया है। जितेंद्र सिंह ने क्या कहा? केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ धरने पर बैठे थे। उन्होंने कहा कि सरकार ने बातचीत के लिए उन्हें और गृह सचिव गोविंद मोहन को भेजा था। जितेंद्र सिंह के मुताबिक, सरकार ने राहुल गांधी से अनुरोध किया कि निर्धारित स्थान के अलावा कहीं और धरना देने से आम लोगों को परेशानी हो रही है। सरकार का दावा- चर्चा की मांग मान ली थी केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी ने पहले शर्त रखी थी कि यदि सरकार NEET पेपर लीक और छात्रों के मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने के लिए तैयार हो जाए, तो वह धरना समाप्त कर देंगे। सरकार का दावा है कि इस मांग को तत्काल स्वीकार कर लिया गया और संसद में चर्चा के लिए सहमति भी दे दी गई। 'फिर बदल दी मांग' जितेंद्र सिंह का आरोप है कि सरकार की सहमति मिलने के बाद राहुल गांधी ने अपनी मांग बदल दी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की नई शर्त जोड़ दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने राहुल गांधी को याद दिलाया कि पहले केवल चर्चा की मांग की गई थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी मांग बदल दी। मंत्री ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया। राहुल गांधी का पलटवार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छात्रों पर की गई कार्रवाई हर भारतीय परिवार पर हमला है। राहुल गांधी ने लोगों से कांग्रेस के आंदोलन का समर्थन करने की अपील करते हुए कहा कि छात्रों को न्याय मिलने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी। कांग्रेस का आरोप कांग्रेस का कहना है कि सरकार संसद में NEET पेपर लीक और छात्रों के मुद्दे पर चर्चा से बच रही है। पार्टी नेताओं के मुताबिक, पिछले कई सप्ताह से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और संसद में चर्चा की मांग की जा रही थी, लेकिन जब सदन में बहस का मौका नहीं मिला तो विपक्ष को सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करना पड़ा। संसद से सड़क तक पहुंचा विवाद NEET पेपर लीक और छात्रों के विरोध प्रदर्शन का मुद्दा अब संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है। सरकार और विपक्ष दोनों एक-दूसरे पर लोकतांत्रिक मूल्यों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बना रह सकता है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने ‘शहीद दिवस’ रैली के मंच से भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील की। हालांकि, उनकी इस पहल पर कांग्रेस और माकपा (CPIM) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पुराने राजनीतिक मतभेदों और घटनाओं का हवाला दिया। ममता बनर्जी की अपील कोलकाता में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा को रोकने के लिए INDIA गठबंधन के सभी दलों को साथ आना चाहिए। उन्होंने कहा, "भाजपा के खिलाफ लड़ाई किसी व्यक्ति या पार्टी के अहंकार से बड़ी है। मेरे मन में किसी के प्रति कोई अहं नहीं है। सभी दल मतभेद भुलाकर लोकतंत्र बचाने के लिए एकजुट हों।" कांग्रेस का पलटवार ममता बनर्जी की अपील पर पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि 21 जुलाई 1993 का आंदोलन युवा कांग्रेस के बैनर तले हुआ था और तृणमूल कांग्रेस उसके इतिहास का अकेले श्रेय नहीं ले सकती। कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि ममता बनर्जी वास्तव में रिश्ते सुधारना चाहती हैं, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना चाहिए कि कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस बनाना उनकी राजनीतिक भूल थी। 'पहले गलती स्वीकार करें' शुभंकर सरकार ने कहा कि ममता बनर्जी को कांग्रेस के मंच पर आकर 21 जुलाई के शहीदों को श्रद्धांजलि देनी चाहिए और अतीत की गलतियों को स्वीकार करना चाहिए। तभी विपक्षी एकता की बात आगे बढ़ सकती है। माकपा ने भी साधा निशाना मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPIM) ने भी ममता बनर्जी की अपील पर सवाल उठाए। वाम नेताओं ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने कभी वाममोर्चा को हराने के लिए भाजपा और एनडीए के साथ गठबंधन किया था। उन्होंने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस के शासन में वामपंथी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को लगातार राजनीतिक हिंसा का सामना करना पड़ा। माकपा का कहना है कि अब जब तृणमूल कांग्रेस संगठनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है, तब उसे विपक्षी एकता की याद आ रही है। राजनीतिक मायने पश्चिम बंगाल में 21 जुलाई का शहीद दिवस तृणमूल कांग्रेस के सबसे बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जाता है। इस बार ममता बनर्जी की INDIA गठबंधन को लेकर की गई अपील और उस पर कांग्रेस व माकपा की तीखी प्रतिक्रिया से साफ है कि राज्य में भाजपा विरोधी दलों के बीच अब भी गहरे राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में आगामी चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल में विपक्षी एकता की राह आसान नहीं दिख रही है।
संसद के मानसून सत्र का मंगलवार (21 जुलाई) को दूसरा दिन है। पहले दिन विपक्ष के जोरदार हंगामे के बाद आज भी लोकसभा और राज्यसभा में तीखी बहस और टकराव के आसार हैं। विपक्ष NEET 2026 पेपर लीक, राम मंदिर चंदा विवाद और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, जबकि केंद्र सरकार महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में पेश कर अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी। अब तक के बड़े अपडेट NDA संसदीय दल की 'मंगल मिलन' बैठक शुरू संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले एनडीए संसदीय दल की बैठक शुरू हो गई है। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत एनडीए के वरिष्ठ मंत्री और सांसद शामिल हैं। माना जा रहा है कि बैठक में संसद की रणनीति, विपक्ष के हमलों का जवाब और आगामी विधायी एजेंडे पर चर्चा हो रही है। आज राज्यसभा में पेश हो सकता है वंदे मातरम बिल सरकार आज राज्यसभा में राष्ट्रीय सम्मान संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश कर सकती है। प्रस्तावित विधेयक में 'वंदे मातरम' का अपमान करने या इसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान है। यह बिल सोमवार को पेश होना था, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण इसे सूचीबद्ध नहीं किया जा सका। परीक्षा व्यवस्था पर चर्चा की मांग कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। उन्होंने NEET पेपर लीक समेत देश की परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं पर तत्काल चर्चा कराने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है। आज इन मुद्दों पर घमासान संभव NEET 2026 पेपर लीक राम मंदिर चंदा विवाद छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई शिक्षा व्यवस्था में सुधार सरकार के विधायी एजेंडे पर विपक्ष का विरोध सरकार की क्या है तैयारी? सरकार आज संसद में अपने लंबित विधेयकों को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी। इसके साथ ही विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों का जवाब देने और सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने पर भी सरकार का फोकस रहेगा। सरकार की कोशिश रहेगी कि हंगामे के बीच भी महत्वपूर्ण विधायी कार्य पूरे किए जा सकें। पहले दिन जमकर हुआ था हंगामा मानसून सत्र के पहले दिन विपक्ष ने कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा था, जिसके चलते दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। ऐसे में दूसरे दिन भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक गलियारों की नजर आज खासतौर पर वंदे मातरम बिल, NEET विवाद और विपक्ष की रणनीति पर रहेगी।
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की मांगें सुनने के बजाय उनके खिलाफ बल प्रयोग कर रही है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी "भारतीय इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री" हैं। 'शिक्षा मंत्री का इस्तीफा भी नहीं ले सकते' राहुल गांधी ने अपने वीडियो में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी एक "नाकाम शिक्षा मंत्री" से इस्तीफा तक नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवालों का जवाब देने के बजाय छात्रों पर कार्रवाई कर रही है। पेपर लीक पर सरकार को घेरा कांग्रेस नेता ने दावा किया कि देश में पिछले वर्षों में 152 पेपर लीक की घटनाओं से करीब 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए, लेकिन किसी भी दोषी को सजा नहीं मिली। उन्होंने कहा कि मेहनत करने वाले छात्रों को न्याय मिलने के बजाय उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है और उनकी आवाज दबाई जा रही है। 'छात्र अपराधी नहीं, अपने अधिकार मांग रहे हैं' राहुल गांधी ने कहा कि दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे छात्र अपराधी नहीं हैं, बल्कि निष्पक्ष और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर छात्र का अधिकार है कि उसे ऐसी शिक्षा व्यवस्था मिले जो ईमानदार, निष्पक्ष और जवाबदेह हो। लाठीचार्ज और आंसू गैस पर उठाए सवाल राहुल गांधी ने छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि सरकार को बल प्रयोग करने के बजाय छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था संकट में है और इस मुद्दे पर युवाओं का आक्रोश स्वाभाविक है। आरएसएस और सरकार पर भी लगाए आरोप अपने बयान में राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने शिक्षा व्यवस्था और शैक्षणिक संस्थानों पर प्रभाव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं की आवाज सुनने के बजाय उनका अपमान कर रही है। हालांकि, इन आरोपों पर केंद्र सरकार या शिक्षा मंत्रालय की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला अब संसद तक पहुंचने की तैयारी में है। कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि वह मानसून सत्र के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी। पार्टी का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। संसद में चर्चा की मांग करेगी कांग्रेस कांग्रेस नेताओं के अनुसार, राम मंदिर में मिले दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर उठ रहे सवालों पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। पार्टी का कहना है कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रमोद तिवारी ने लगाए गंभीर आरोप कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया कि मामले की जांच वास्तविक जिम्मेदार लोगों तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसे सामने लाया जाना चाहिए और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है। दान और चढ़ावे को लेकर बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष जहां मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दल विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बता रहे हैं। जांच पूरी होने का इंतजार मामले की जांच फिलहाल संबंधित एजेंसियों के स्तर पर जारी है। ऐसे में किसी भी तरह की अनियमितता या जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। मानसून सत्र में गरमा सकता है मुद्दा संसद के मानसून सत्र में यह मामला प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल हो सकता है। कांग्रेस समेत विपक्षी दल सरकार से इस विषय पर जवाब मांगने की तैयारी में हैं, जबकि सत्ता पक्ष के भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखने की संभावना है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है और पहले ही दिन सरकार तथा विपक्ष के बीच तीखे टकराव के संकेत मिल रहे हैं। विपक्ष कई प्रमुख मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है, जबकि सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस ने अपने लोकसभा सांसदों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। कांग्रेस ने सांसदों की बुलाई अहम बैठक मानसून सत्र की शुरुआत से पहले कांग्रेस ने सुबह 10:30 बजे संसद परिसर स्थित कांग्रेस संसदीय दल (CPP) कार्यालय में अपने लोकसभा सांसदों की बैठक बुलाई है। बैठक में विपक्षी दलों की रणनीति, फ्लोर मैनेजमेंट और सदन में उठाए जाने वाले मुद्दों पर चर्चा होगी। इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी विपक्ष ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह कई अहम मुद्दों को सदन में उठाएगा। इनमें शामिल हैं– NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक सोनम वांगचुक का अनशन और संसद मार्च महंगाई मणिपुर की स्थिति किसानों से जुड़े मुद्दे चुनाव आयोग के कामकाज अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावे से जुड़ा मामला एथनॉल नीति कांग्रेस सांसद माणिकम टैगोर ने लोकसभा में NEET-UG पेपर लीक मामले पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस भी दिया है। सरकार का फोकस आठ विधेयकों पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि मानसून सत्र के लिए फिलहाल आठ विधेयकों को सूचीबद्ध किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई नया विधेयक लाया जाएगा तो उसकी जानकारी पहले कार्य मंत्रणा समिति और सभी राजनीतिक दलों को दी जाएगी। सरकार ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग की अपील भी की है। टीएमसी के बागी सांसदों की सीटें बदलीं लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था की गई है। इस बदलाव के तहत कुल 39 सांसदों की सीटों का पुनः आवंटन किया गया है। संसद परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी मानसून सत्र से पहले संसद भवन की सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक परीक्षण किया गया। सीआईएसएफ, दिल्ली पुलिस, सीआरपीएफ, एनएसजी, एनडीआरएफ और संसद सुरक्षा कर्मियों ने संयुक्त रूप से मॉक ड्रिल कर आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की। पहले दिन हंगामे के आसार संसद का यह सत्र राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष जहां विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं सरकार अपने विधायी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है। ऐसे में पहले ही दिन सदन में जोरदार बहस और हंगामे की संभावना जताई जा रही है।
मुंबई, एजेंसियां। 20 से 26 जुलाई के बीच OTT प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों के लिए मनोरंजन का भरपूर डोज़ तैयार है। इस सप्ताह कई नई फिल्में और वेब सीरीज़ रिलीज़ होने जा रही हैं, जिनमें 'Musafir Cafe', 'Adarsh Baal Vidyalaya' जैसे कई अन्य चर्चित टाइटल शामिल हैं। अलग-अलग जॉनर की इन रिलीज़ का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है। 'Musafir Cafe' पर टिकी दर्शकों की नजर इस हफ्ते की सबसे चर्चित रिलीज़ 'Musafir Cafe' मानी जा रही है। फिल्म दोस्ती, रिश्तों और जीवन के नए अनुभवों की कहानी को हल्के-फुल्के अंदाज़ में पेश करती है। ट्रेलर को सोशल मीडिया पर शानदार प्रतिक्रिया मिली है और दर्शकों के बीच इसे लेकर अच्छा उत्साह देखने को मिल रहा है। 'Adarsh Baal Vidyalaya' भी बटोर रही सुर्खियां स्कूल जीवन और सामाजिक मुद्दों पर आधारित 'Adarsh Baal Vidyalaya' भी इस सप्ताह की प्रमुख रिलीज़ में शामिल है। फिल्म की कहानी और विषय को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह है। रिलीज़ से पहले ही इसका ट्रेलर और पोस्टर चर्चा का विषय बने हुए हैं। हर जॉनर के दर्शकों के लिए विकल्प इस सप्ताह कॉमेडी, ड्रामा, फैमिली और थ्रिलर जैसे अलग-अलग जॉनर की कई नई फिल्में और सीरीज़ विभिन्न OTT प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज़ होंगी। ऐसे में दर्शकों को अपनी पसंद के अनुसार कई नए विकल्प मिलने वाले हैं। वीकेंड पर OTT दर्शकों की होगी मौज लगातार नई रिलीज़ के साथ यह सप्ताह OTT प्रेमियों के लिए बेहद खास रहने वाला है। दर्शक घर बैठे अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर नई फिल्मों और वेब सीरीज़ का आनंद ले सकेंगे, जिससे वीकेंड का मनोरंजन और भी शानदार होने की उम्मीद है।
देहरादून, एजेंसियां। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' अभियान के तहत छात्रों और युवाओं से संवाद करेंगे। कार्यक्रम में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, बेरोज़गारी, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। कांग्रेस का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य देशभर के छात्रों की समस्याओं को सुनकर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर उठाना है। पेपर लीक को लेकर सरकार पर हमला कार्यक्रम से पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि "यह सिर्फ पेपर लीक नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य की चोरी है।" उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाली परीक्षा अनियमितताओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और सरकार इस समस्या पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही है। छात्रों से सीधे संवाद करेंगे राहुल कांग्रेस नेताओं के अनुसार, राहुल गांधी कार्यक्रम के दौरान छात्रों के सवालों का जवाब देंगे और भर्ती परीक्षाओं, रोजगार के अवसरों तथा शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर उनके सुझाव भी सुनेंगे। अभियान के तहत विभिन्न राज्यों में ऐसे संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि युवाओं की आवाज़ को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया जा सके। राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा कार्यक्रम विश्लेषकों के अनुसार, उत्तराखंड में आयोजित यह कार्यक्रम केवल छात्र संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे कांग्रेस के युवा संपर्क अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। आगामी राजनीतिक गतिविधियों और संसद के मानसून सत्र से पहले यह कार्यक्रम युवाओं के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
PoK Protests: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में सरकार विरोधी आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने बुधवार को मुजफ्फराबाद तक 'लॉन्ग मार्च' का आह्वान किया है। संभावित प्रदर्शन को देखते हुए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। सरकार के खिलाफ जारी है आंदोलन JAAC लंबे समय से अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई, सुरक्षा बलों की कार्रवाई रोकने, इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बहाल करने तथा बिजली और आवश्यक वस्तुओं की बेहतर उपलब्धता जैसी मांगों को लेकर आंदोलन चला रही है। संगठन का कहना है कि सरकार को पहले ही अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कई जिलों से मुजफ्फराबाद पहुंचेंगे प्रदर्शनकारी सूत्रों के मुताबिक रावलकोट, मीरपुर, कोटली, बाग समेत कई जिलों से बड़ी संख्या में लोग मुजफ्फराबाद पहुंच सकते हैं। प्रदर्शन के दौरान बाजार बंद रहने और कई प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रभावित होने की भी संभावना जताई गई है। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी संभावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की है। प्रमुख मार्गों और सरकारी प्रतिष्ठानों की निगरानी बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट पर है। JAAC की प्रमुख मांगें गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर रोक इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं की बहाली बिजली और आवश्यक वस्तुओं की बेहतर उपलब्धता शासन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में सुधार आंदोलन और तेज होने की चेतावनी JAAC ने कहा है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। संगठन का दावा है कि मौजूदा आंदोलन केवल बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजनीतिक सुधारों की मांग भी प्रमुख मुद्दा बनेगी। राजनीतिक असर पर नजर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़े पैमाने पर प्रदर्शन होता है, तो इससे पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक स्थिति और तनावपूर्ण हो सकती है। वहीं, प्रदर्शन के दौरान किसी भी प्रकार की सख्ती या बल प्रयोग की स्थिति पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रहेगी.
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने 16 जुलाई को अपने शीर्ष नेताओं और सांसदों की अहम रणनीतिक बैठक बुलाई है, जिसमें सत्र के दौरान सरकार को किन मुद्दों पर घेरा जाएगा, इस पर चर्चा होगी। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने 19 जुलाई को सभी राजनीतिक दलों की सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला किया है। सरकार और विपक्ष दोनों कर रहे तैयारी कांग्रेस महंगाई, बेरोजगारी, कृषि, राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य प्रमुख मुद्दों को संसद में उठाने की तैयारी कर रही है। वहीं सरकार भी मॉनसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने की रणनीति बना रही है। संविधान संशोधन विधेयक पर हो सकता है हंगामा सूत्रों के अनुसार, इस सत्र में प्रस्तावित 130वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। विपक्ष पहले से ही इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में जुटा है। 20 जुलाई से शुरू होगा मॉनसून सत्र संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने वाला है। इससे पहले होने वाली कांग्रेस की रणनीति बैठक और सर्वदलीय बैठक को सत्र की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक दल अपने-अपने एजेंडे को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं।
मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान आयोजित 'मेलबर्न मीट्स मोदी' कार्यक्रम को लेकर सियासी विवाद गहराता जा रहा है। कार्यक्रम के आयोजकों ने कांग्रेस के उन आरोपों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए लोगों को पैसे दिए गए थे। आयोजकों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी मांगने और आरोप वापस लेने की मांग की है। कांग्रेस नेताओं को भेजा पत्र कार्यक्रम के आयोजकों ने कांग्रेस नेतृत्व को पत्र लिखकर कहा कि 9 जुलाई को मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों को किसी भी तरह का भुगतान नहीं किया गया था। पत्र में कहा गया कि सिडनी से चार्टर फ्लाइट की व्यवस्था सामुदायिक सहयोग से की गई थी और इसका खर्च न तो भारतीय जनता पार्टी ने उठाया और न ही किसी सरकारी एजेंसी ने। क्या था कांग्रेस का आरोप? कार्यक्रम के बाद कांग्रेस नेताओं, जिनमें पवन खेड़ा भी शामिल थे, ने आरोप लगाया था कि यह एक "मैनेज्ड इवेंट" था। उनका दावा था कि लोगों को पैसे देकर कार्यक्रम में बुलाया गया और उनके लिए विशेष चार्टर फ्लाइट की व्यवस्था की गई। कांग्रेस नेताओं ने अपने आरोपों के समर्थन में कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्टों का भी हवाला दिया था। आयोजकों ने आरोपों को बताया निराधार कार्यक्रम के आयोजकों में शामिल अमित करंथ ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कांग्रेस के आरोप पूरी तरह निराधार और निराशाजनक हैं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी लोग अपनी इच्छा से पहुंचे थे और किसी को भी पैसे देकर नहीं बुलाया गया। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोगों ने अपने यात्रा, रहने और अन्य खर्च स्वयं वहन किए। कुछ लोगों की यात्रा व्यवस्था स्थानीय भारतीय समुदाय के स्वयंसेवकों और सामुदायिक सहयोग से हुई थी। 30 हजार लोगों ने लिया था हिस्सा आयोजकों के अनुसार, 9 जुलाई को मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में करीब 30 हजार लोग शामिल हुए थे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और विक्टोरिया की प्रीमियर जैसिंटा एलन ने भी लोगों को संबोधित किया। आयोजकों ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत और ऑस्ट्रेलिया के मजबूत होते संबंधों तथा ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय के योगदान का उत्सव था। माफी की मांग आयोजकों ने अपने पत्र में कांग्रेस नेताओं से मांग की है कि वे भीड़ को "पैसे देकर जुटाई गई" बताने वाले आरोप वापस लें और सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। उनका कहना है कि इस तरह के आरोपों से कार्यक्रम में शामिल हजारों भारतीय मूल के लोगों और स्वयंसेवकों का अपमान हुआ है।
नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़ा एक भावुक और कम चर्चित प्रसंग पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) एस.वाई. कुरैशी की आगामी पुस्तक India and I: A Hundred Memories, Not a Memoir में सामने आया है। कुरैशी के अनुसार, वर्ष 2012 में निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर कुछ मंत्रियों की टिप्पणी से नाराजगी जताने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उनसे मुलाकात में कहा था, "अगर आप ऐसा सोचते हैं तो मैं आत्महत्या कर लूंगा।" कैसे शुरू हुआ पूरा मामला? एस.वाई. कुरैशी के अनुसार, जनवरी 2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने चुनावी सभा में मुसलमानों के लिए आरक्षण बढ़ाने का वादा किया था। भारतीय जनता पार्टी ने इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई। लगातार चार दिनों तक सुनवाई हुई, जिसमें कांग्रेस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी और भाजपा की ओर से अरुण जेटली ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद निर्वाचन आयोग ने सलमान खुर्शीद की सार्वजनिक रूप से निंदा की। मंत्रियों के बयानों से आहत थे कुरैशी कुरैशी लिखते हैं कि आयोग के फैसले के बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं की ओर से निर्वाचन आयोग पर "अहंकारी" और "मनमाना" होने जैसे आरोप लगाए जाने लगे। उनका कहना है कि आलोचना से उन्हें परेशानी नहीं थी, लेकिन संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वाली बयानबाजी उन्हें बेहद आहत कर रही थी। PMO तक पहुंची नाराजगी ईद के अवसर पर आयोजित अपने वार्षिक मिलन समारोह में कुरैशी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री के प्रेस सचिव हरीश खरे से अपनी नाराजगी साझा की। हरीश खरे ने पूछा कि क्या वह यह बात प्रधानमंत्री तक पहुंचा दें। कुरैशी ने सहमति जताई। अगले ही दिन प्रधानमंत्री कार्यालय से उन्हें फोन आया और बताया गया कि प्रधानमंत्री उनसे तत्काल मिलना चाहते हैं। "अगर आप ऐसा सोचते हैं तो मैं आत्महत्या कर लूंगा" शाम को प्रधानमंत्री आवास पर हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए कुरैशी लिखते हैं कि मनमोहन सिंह स्वयं दरवाजे पर उनका इंतजार कर रहे थे। बैठते ही उन्होंने भावुक स्वर में कहा, "हरीश ने मुझे बताया कि आपने क्या कहा। अगर आप ऐसा सोचते हैं तो मैं आत्महत्या कर लूंगा।" कुरैशी के मुताबिक, यह सुनकर वह पूरी तरह स्तब्ध रह गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी शिकायत प्रधानमंत्री से नहीं, बल्कि कुछ मंत्रियों के व्यवहार को लेकर थी। "निर्वाचन आयोग लोकतंत्र की आत्मा है" कुरैशी के अनुसार, मनमोहन सिंह ने उनसे कहा कि यदि उन्हें इस पूरे मामले की जानकारी होती तो संबंधित मंत्रियों को तुरंत फटकार लगाते। उन्होंने आगे कहा, "निर्वाचन आयोग केवल भारत का गौरव नहीं है, यह हमारे लोकतंत्र की आत्मा है। अगर हमने इसे खो दिया तो हम सब कुछ खो देंगे।" प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में यदि ऐसी कोई समस्या हो तो वे सीधे उन्हें फोन करें। किताब में साझा किए कई संस्मरण एस.वाई. कुरैशी की पुस्तक India and I: A Hundred Memories, Not a Memoir में सार्वजनिक जीवन और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े कई अनुभवों का उल्लेख किया गया है। इस संस्मरण में मनमोहन सिंह को एक ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता रखते थे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।