नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध मंगलवार को और बढ़ गया। NDA सांसदों ने संसद के मकर द्वार की ओर मार्च कर विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन किया। NDA सांसदों ने आरोप लगाया कि विपक्ष झारखंड में छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर संसद में चर्चा से बच रहा है, जबकि सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह के चर्चा में जवाब देने की तैयारी जताई गई है। ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद निकला मार्च NDA सांसदों का यह मार्च गठबंधन की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद हुआ। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और NDA के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे। बैठक के बाद NDA सांसद हाथों में पोस्टर और तख्तियां लेकर संसद की ओर बढ़े। प्रदर्शन के दौरान विपक्ष पर छात्र आंदोलन के मुद्दे पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया गया। विपक्ष पर चर्चा से भागने का आरोप NDA नेताओं का कहना है कि सरकार संसद में छात्रों के प्रदर्शन और उस दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर चर्चा के लिए तैयार है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कहा है कि गृह मंत्री अमित शाह इस मुद्दे पर सदन में विस्तृत जवाब देने के लिए तैयार हैं। NDA सांसदों ने इसी आधार पर विपक्ष से सदन की कार्यवाही चलने देने की मांग की। उनका आरोप है कि विपक्ष लगातार हंगामा करके चर्चा और संसदीय कामकाज को बाधित कर रहा है। विपक्ष की मांग अलग, संसद में जारी गतिरोध दूसरी ओर विपक्ष छात्र आंदोलन में पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब मांग रहा है। विपक्षी सांसदों की मांग है कि गृह मंत्री अमित शाह इस मामले पर संसद में बयान दें और पुलिस कार्रवाई से जुड़े सवालों का जवाब दें। लोकसभा में विपक्षी सांसदों के विरोध के कारण कार्यवाही प्रभावित हुई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी विपक्षी दलों से प्रदर्शन समाप्त कर सदन को सुचारु रूप से चलने देने की अपील की। इसके बावजूद गतिरोध जारी रहा। संसद के बाहर भी आमने-सामने सत्ता पक्ष और विपक्ष छात्र आंदोलन का मुद्दा अब संसद के अंदर की राजनीति से निकलकर संसद परिसर के विरोध-प्रदर्शन तक पहुंच गया है। एक ओर NDA सांसद विपक्ष पर चर्चा से बचने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं विपक्ष पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है। ऐसे में मानसून सत्र के दौरान आने वाले दिनों में भी छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और संसद में चर्चा को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव जारी रहने के आसार हैं।
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी के महिला सशक्तिकरण को लेकर दिए गए संदेश के बाद महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सियासी बहस फिर तेज हो गई है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट को साझा करते हुए पार्टी पर राजनीतिक तंज कसा और उम्मीद जताई कि कांग्रेस अब महिला आरक्षण विधेयक का बिना किसी शर्त के समर्थन करेगी। रिजिजू की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कांग्रेस ने राहुल गांधी का एक वीडियो साझा किया है, जिसमें उन्होंने भारतीय महिलाओं की ऊर्जा, क्षमता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को देश की प्रगति से जोड़ते हुए अपनी बात रखी। कांग्रेस ने शेयर किया राहुल गांधी का वीडियो कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी का एक वीडियो पोस्ट किया। इसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता महिलाओं की क्षमताओं और समाज में उनकी भूमिका को लेकर अपनी बात रखते दिखाई दे रहे हैं। राहुल गांधी का कहना है कि भारत की महिलाओं के भीतर मौजूद ऊर्जा और क्षमता को अभी पूरी तरह सामने आने का अवसर नहीं मिला है। उनके मुताबिक, महिलाओं को अपनी बात रखने, अपने सपने देखने और अपनी क्षमताओं के मुताबिक आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। राहुल ने अपने संदेश में महिला सशक्तिकरण को देश की प्रगति से जोड़ते हुए कहा कि महिलाओं की स्वतंत्र अभिव्यक्ति और भागीदारी के बिना भारत अपनी पूरी क्षमता हासिल नहीं कर सकता। राहुल के बयान को रिजिजू ने महिला आरक्षण बिल से जोड़ा राहुल गांधी के इस संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस के पोस्ट को साझा किया। उन्होंने इसे पार्टी की ओर से आया सकारात्मक संदेश बताया। रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी के महिलाओं को लेकर विचारों में बदलाव दिखाई दे रहा है। इसी आधार पर उन्होंने उम्मीद जताई कि कांग्रेस अब महिला आरक्षण विधेयक का बिना किसी शर्त के समर्थन करेगी। रिजिजू की टिप्पणी सीधे तौर पर कांग्रेस के महिला सशक्तिकरण के राजनीतिक संदेश को संसद में महिला प्रतिनिधित्व के मुद्दे से जोड़ती है। महिला आरक्षण पर फिर आमने-सामने सत्ता पक्ष और विपक्ष महिला आरक्षण का मुद्दा भारतीय राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी प्राथमिकताएं और रणनीतियां रही हैं। रिजिजू के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है। एक ओर कांग्रेस महिलाओं की क्षमता, स्वतंत्र अभिव्यक्ति और राजनीतिक भागीदारी की बात कर रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी नेतृत्व इस राजनीतिक संदेश को संसद में महिला प्रतिनिधित्व से जोड़कर कांग्रेस से स्पष्ट समर्थन की मांग कर रहा है। राहुल गांधी ने महिलाओं की अभिव्यक्ति को बताया जरूरी राहुल गांधी के अनुसार, किसी भी देश की वास्तविक क्षमता तभी सामने आती है, जब उसकी आधी आबादी को अपनी प्रतिभा और विचारों को खुलकर सामने रखने का अवसर मिले। उन्होंने महिलाओं की ऊर्जा को समाज और देश की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि महिलाओं की आवाज और उनकी स्वतंत्र अभिव्यक्ति को दबाकर कोई देश पूरी क्षमता से आगे नहीं बढ़ सकता। उनका यह संदेश कांग्रेस की महिला सशक्तिकरण से जुड़ी राजनीतिक लाइन का हिस्सा माना जा रहा है। रिजिजू के बयान का राजनीतिक संदेश क्या है? रिजिजू का बयान केवल राहुल गांधी के वीडियो पर प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि इसे कांग्रेस को राजनीतिक रूप से घेरने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। उन्होंने राहुल गांधी के महिला सशक्तिकरण वाले विचारों को आधार बनाकर कांग्रेस से यह सवाल उठाया है कि यदि पार्टी महिलाओं को राजनीतिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की बात करती है, तो उसे महिला आरक्षण विधेयक पर भी स्पष्ट और बिना शर्त समर्थन देना चाहिए। इस तरह महिला सशक्तिकरण का मुद्दा एक बार फिर संसद और राजनीति के केंद्र में आता दिखाई दे रहा है। अब आगे क्या? फिलहाल रिजिजू के बयान पर कांग्रेस की ओर से इस विशेष टिप्पणी का जवाब सामने नहीं आया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस महिला आरक्षण विधेयक को लेकर अपने रुख को किस तरह स्पष्ट करती है। राजनीतिक रूप से देखें तो महिला सशक्तिकरण और संसद में महिलाओं की भागीदारी आने वाले समय में दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमों के लिए अहम मुद्दा बन सकती है। राहुल गांधी का संदेश और रिजिजू की प्रतिक्रिया इसी व्यापक राजनीतिक बहस की अगली कड़ी है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद में प्रस्तावित परिसीमन से जुड़े विधेयक को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच बातचीत तेज हो गई है। इसी सिलसिले में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से फिर बातचीत की है। सरकार की कोशिश है कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर विपक्ष के साथ सहमति बनाई जाए। सरकार ने विपक्ष से संवाद बढ़ाया परिसीमन और उससे जुड़े संवैधानिक प्रावधानों को लेकर सरकार लगातार विपक्षी दलों के साथ बातचीत कर रही है। किरण रिजिजू की राहुल गांधी से बातचीत को इसी संवाद प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार चाहती है कि विधेयक को लेकर विपक्ष की चिंताओं को सुना जाए और संसद में इसे लेकर व्यापक चर्चा हो। वहीं कांग्रेस इस मुद्दे पर अपने सवालों और आपत्तियों को सरकार के सामने रख रही है। परिसीमन का राज्यों की सीटों पर पड़ेगा असर परिसीमन का संबंध लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं तथा प्रतिनिधित्व के पुनर्निर्धारण से है। ऐसे में प्रस्तावित बदलाव का देश के अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक स्थिति और संसद में प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। खासकर दक्षिण भारतीय राज्यों की ओर से यह चिंता जताई जाती रही है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को परिसीमन के बाद राजनीतिक प्रतिनिधित्व में नुकसान नहीं होना चाहिए। महिला आरक्षण से भी जुड़ा मुद्दा परिसीमन की प्रक्रिया का संबंध महिला आरक्षण को लागू करने से भी जोड़ा जा रहा है। महिला आरक्षण कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है, लेकिन इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए परिसीमन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। इसी वजह से परिसीमन का मुद्दा आने वाले समय में संसद में बड़ी राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है। राहुल गांधी से बातचीत के बाद बढ़ी उम्मीदें किरण रिजिजू और राहुल गांधी के बीच बातचीत को सरकार और मुख्य विपक्षी दल के बीच सहमति बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से विधेयक को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए जा रहे हैं। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और कांग्रेस के बीच आगे होने वाली बातचीत में क्या सहमति बनती है और संसद में परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव पर दोनों पक्ष किस रुख के साथ आगे बढ़ते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू के बीच तीखी बहस देखने को मिली। छात्र प्रदर्शन और गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर विपक्ष के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई। इसी दौरान रिजिजू ने खड़गे से कहा कि विपक्ष के नेता सदन की कार्यवाही तय नहीं कर सकते। अमित शाह के बयान की मांग पर अड़ा विपक्ष राज्यसभा में विपक्षी सांसद छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे थे। विपक्ष का कहना था कि इस मामले पर सरकार को सदन में जवाब देना चाहिए। हंगामे के बीच खड़गे ने सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया और कहा कि विपक्ष को अपने मुद्दे उठाने का पूरा अधिकार है। विपक्षी सांसदों के विरोध के कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। रिजिजू ने खड़गे को दिया जवाब संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने खड़गे के रुख पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सदन की कार्यवाही सभापति के अधिकार क्षेत्र में आती है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता अपनी मांगों के आधार पर सदन की कार्यवाही तय नहीं कर सकते। रिजिजू ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही चलने देने और निर्धारित नियमों के तहत अपनी बात रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन सदन को लगातार बाधित करना उचित नहीं है। सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ा टकराव छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और गृह मंत्री के बयान की मांग को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है। विपक्ष इस मुद्दे को संसद में उठाकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि सदन की कार्यवाही नियमों के अनुसार चलनी चाहिए। राज्यसभा में हुई इस नोकझोंक ने मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक खींचतान को एक बार फिर सामने ला दिया है।
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में लगातार जारी गतिरोध के बीच सरकार और विपक्ष के बीच संवाद की नई पहल ने समाधान की उम्मीद जगाई है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर संसद की बाधित कार्यवाही को सामान्य करने पर चर्चा की। राजनीतिक मतभेदों के बीच यह पहल लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। कई मुद्दों पर टकराव, ठप रही संसद मानसून सत्र की शुरुआत NEET पेपर लीक और छात्र आंदोलन के माहौल में हुई थी। हालांकि आंदोलन समाप्त हो चुका है, लेकिन उससे जुड़े राजनीतिक मुद्दे अब भी संसद में गतिरोध का कारण बने हुए हैं। CJP के 'संसद चलो मार्च' के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई, राम मंदिर चंदा चोरी के आरोप और अन्य विवादों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। इसके चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है। बिना चर्चा पारित हुए कई विधेयक सत्र के दौरान अब तक लोकसभा में एक भी प्रश्नकाल पूरी तरह संचालित नहीं हो सका है। सरकार ने पांच विधेयक पारित कराए हैं, लेकिन अधिकांश पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी। लोक परीक्षा संशोधन विधेयक जैसे महत्वपूर्ण बिल पर भी पर्याप्त बहस नहीं हुई। संसदीय विशेषज्ञों का मानना है कि कानून बनाने की प्रक्रिया में व्यापक चर्चा लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। प्रश्नकाल क्यों है लोकतंत्र की ताकत? प्रश्नकाल संसद की जवाबदेही व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है। इसी दौरान विपक्ष सरकार से सीधे सवाल पूछता है और जनता से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाता है। इससे सरकार की नीतियों की समीक्षा होती है और आवश्यक सुधार का अवसर मिलता है। लगातार बाधित हो रहा प्रश्नकाल लोकतांत्रिक जवाबदेही को भी प्रभावित कर रहा है। बजट सत्र जैसा प्रदर्शन दोहराने की चुनौती पिछले बजट सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद होने के बावजूद लोकसभा की उत्पादकता 93 प्रतिशत और राज्यसभा की 110 प्रतिशत रही थी। इस बार भी उम्मीद जताई जा रही है कि संवाद के जरिए गतिरोध खत्म होगा और लंबित महत्वपूर्ण विधेयकों, जिनमें प्रस्तावित FCRA विधेयक और अन्य अहम बिल शामिल हैं, पर सार्थक चर्चा हो सकेगी। संवाद ही लोकतंत्र का सबसे मजबूत रास्ता लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण होती है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह विपक्ष से लगातार संवाद बनाए रखे, जबकि विपक्ष की भी जिम्मेदारी है कि विरोध के साथ-साथ बहस और चर्चा में सक्रिय भागीदारी करे। यदि दोनों पक्ष टकराव की बजाय संवाद को प्राथमिकता दें, तो संसद की कार्यवाही अधिक प्रभावी होगी और जनता से जुड़े मुद्दों पर बेहतर फैसले लिए जा सकेंगे।
संसद में हंगामा जारी: राहुल गांधी से किरण रिजिजू की मुलाकात, फिर भी नहीं थमा गतिरोध नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध को खत्म करने की कोशिशों के बीच बुधवार (5 अगस्त) को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। संसद परिसर में हुई इस वन-टू-वन बैठक को सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत की पहल के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि बैठक के बाद भी लोकसभा में विपक्ष का हंगामा जारी रहा और कार्यवाही कुछ ही मिनटों में स्थगित करनी पड़ी। राम मंदिर चढ़ावा और छात्र प्रदर्शन मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के आरोप और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले पर बयान की मांग कर रहा है। एक मिनट में स्थगित हुई लोकसभा कार्यवाही हंगामा बढ़ने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इसके चलते प्रश्नकाल और शून्यकाल भी नहीं चल सके। विपक्षी सांसद लगातार अपनी मांगों को लेकर सदन में विरोध करते रहे। राहुल गांधी से मुलाकात में प्रियंका गांधी भी रहीं मौजूद किरण रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से उनके कार्यालय में मुलाकात की। इस बैठक के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी भी मौजूद रहीं। बैठक का उद्देश्य संसद में जारी गतिरोध को खत्म कर सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने की कोशिश माना जा रहा है। ओम बिरला ने विपक्ष से की सदन चलाने की अपील लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हंगामा कर रहे सांसदों से प्रश्नकाल चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल जनता से जुड़े मुद्दे उठाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। बिरला ने विपक्ष को भरोसा दिलाया कि प्रश्नकाल के बाद उनके मुद्दों पर चर्चा का अवसर दिया जाएगा। मानसून सत्र में लगातार 13वें दिन कामकाज प्रभावित संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था। अलग-अलग मुद्दों को लेकर जारी हंगामे के कारण बुधवार को लगातार 13वें दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल प्रभावित रहे। सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत के प्रयासों के बावजूद सदन में गतिरोध खत्म नहीं हो पाया है।
संसद के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पर तीखा हमला बोला। दोनों नेताओं ने बिलकीस बानो मामले का जिक्र करते हुए जोशी पर गंभीर आरोप लगाए। वहीं सरकार ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कांग्रेस से माफी की मांग की है। राहुल गांधी ने साधा निशाना लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बनाया है, जो कथित तौर पर बलात्कारियों का बचाव करता है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास कई अन्य विकल्प थे, लेकिन शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को देना हैरान करने वाला फैसला है। प्रियंका गांधी ने भी उठाया बिलकीस बानो का मुद्दा लोकसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी बिलकीस बानो मामले से जुड़ी एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पर टिप्पणी की। हालांकि, उनकी इस टिप्पणी पर सत्तापक्ष के सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई, जिसके बाद सदन में कुछ समय तक हंगामा हुआ। बाद में लोकसभा अध्यक्ष ने संबंधित टिप्पणी को कार्यवाही से हटाने के निर्देश दिए। सरकार ने बताया निराधार आरोप संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बिना किसी सत्यापन के किसी मंत्री के चरित्र पर इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस सांसद अपने आरोपों को साबित नहीं कर सकतीं तो उन्हें सदन से माफी मांगनी चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी कहा कि संसद में तथ्यों के आधार पर ही बयान दिए जाने चाहिए और बिना प्रमाण के किसी पर आरोप लगाना उचित नहीं है। प्रह्लाद जोशी ने की कार्रवाई की मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि प्रियंका गांधी इस तरह निराधार आरोप लगाकर बच नहीं सकतीं। उन्होंने मांग की कि कांग्रेस सांसद सदन से माफी मांगें और उनके खिलाफ संसदीय नियमों के तहत कार्रवाई की जाए। वहीं प्रियंका गांधी ने कहा कि वह अपने आरोपों के समर्थन में उचित माध्यम से तथ्यों को सदन के सामने रखेंगी। संसद में इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
Parliament Session: संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में लोक परीक्षा (Prevention of Unfair Means) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा जारी है। सरकार इस विधेयक को पारित कराने की कोशिश में है, जबकि विपक्ष इसके कई प्रावधानों पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि सिर्फ कड़ी सजा का प्रावधान पर्याप्त नहीं है, बल्कि पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत और प्रभावी व्यवस्था भी बनाई जानी चाहिए। वहीं संसद के भीतर और बाहर विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष का विरोध प्रदर्शन भी जारी है। शशि थरूर ने उठाए अहम सवाल कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि विधेयक में दोषियों के लिए सख्त सजा और फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान तो किया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को पहले ही कैसे रोका जाएगा। उन्होंने कहा कि केवल सजा बढ़ाने से समस्या खत्म नहीं होगी। थरूर ने फास्ट ट्रैक अदालतों की मौजूदा स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले से ही इन अदालतों में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। यदि सरकार इस कानून को प्रभावी बनाना चाहती है तो नए जजों की नियुक्ति, अतिरिक्त अदालतों की स्थापना और पर्याप्त संख्या में अभियोजकों की व्यवस्था भी करनी होगी। संसद में हंगामे के बीच कार्यवाही प्रभावित लोकसभा की कार्यवाही विपक्ष के हंगामे के कारण कुछ समय के लिए दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष राम मंदिर चंदा मामले, जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई और अन्य मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है। लगातार नारेबाजी के चलते सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। राहुल गांधी से रिजिजू की अपील संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा में हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि यदि राहुल गांधी 20-30 मिनट बोलते हैं तो कम से कम पांच मिनट इस महत्वपूर्ण विधेयक पर भी अपने सुझाव दें। रिजिजू ने कहा कि छात्रों से जुड़े इतने अहम कानून पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए। पंजाब पेपर लीक मामले पर कांग्रेस का प्रदर्शन संसद परिसर में पंजाब कांग्रेस के सांसदों ने राज्य में कथित पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन किया। सांसदों ने पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस के इस्तीफे की मांग करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। जॉन ब्रिटास ने उठाया दिल्ली पुलिस का मुद्दा राज्यसभा में CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि छात्र नेता आइशी घोष की तलाश में दिल्ली पुलिस वामपंथी दल के कार्यालय पहुंची थी। उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्रीय राजनीतिक दल के कार्यालय में इस तरह पुलिस का पहुंचना गंभीर सवाल खड़े करता है। अमित शाह पेश करेंगे अहम विधेयक आज लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश करेंगे। इसके अलावा सदन में कई अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और पारित होने की संभावना है। सरकार की कोशिश है कि मानसून सत्र के दौरान प्रमुख विधायी कार्य पूरे किए जाएं, जबकि विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
संसद में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 (Anti Paper Leak Bill) पर चर्चा के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और विपक्षी दल विधेयक के प्रावधानों पर चर्चा करने के बजाय केवल राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने राहुल गांधी पर संसद में अभद्र भाषा के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया। रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्रों की मांगों को ध्यान में रखते हुए पेपर लीक रोकने के लिए यह महत्वपूर्ण विधेयक लेकर आई है, लेकिन विपक्ष इस पर रचनात्मक चर्चा करने से बच रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि सभी दल अपने सुझाव दें ताकि परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाया जा सके। 'राहुल गांधी बिल पर बोलें, सुझाव दें' केंद्रीय मंत्री ने कहा, "हमें उम्मीद है कि आज राहुल गांधी और विपक्ष के अन्य नेता इस विधेयक पर अपनी बात रखेंगे। यह कानून छात्रों के हित में लाया गया है और प्रधानमंत्री के फैसले से छात्रों में भरोसा बढ़ा है। अगर कांग्रेस के पास परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के सुझाव हैं, तो सरकार उनका स्वागत करेगी।" उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप करना उचित नहीं है और विपक्ष को रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। राहुल गांधी की भाषा पर भी जताई आपत्ति किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी की भाषा को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसद में लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी जिस तरह की अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह संसदीय लोकतंत्र की गरिमा के अनुरूप नहीं है। मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन संवाद हमेशा सभ्य भाषा में होना चाहिए। ऐसी भाषा लोकतंत्र और देश दोनों के लिए ठीक नहीं है।" प्रियंका गांधी पर भी साधा निशाना रिजिजू ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने मंगलवार को चर्चा में हिस्सा तो लिया, लेकिन उनका पूरा भाषण विधेयक के दायरे से बाहर के मुद्दों पर केंद्रित रहा। उन्होंने कहा, "विपक्ष के लगभग सभी सांसदों ने बिल के मूल प्रावधानों पर चर्चा करने के बजाय दूसरे विषय उठाए। हमें उम्मीद है कि राहुल गांधी अपने भाषण में कम से कम कुछ समय इस महत्वपूर्ण विधेयक और परीक्षा सुधार के सुझावों पर जरूर बोलेंगे।" क्या है Anti Paper Leak Bill? लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है। प्रस्तावित कानून में पेपर लीक और परीक्षा में धोखाधड़ी के मामलों में कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इस कानून से भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा छात्रों का भरोसा मजबूत होगा।
संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है और पहले ही दिन सरकार तथा विपक्ष के बीच तीखे टकराव के संकेत मिल रहे हैं। विपक्ष कई प्रमुख मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है, जबकि सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस ने अपने लोकसभा सांसदों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। कांग्रेस ने सांसदों की बुलाई अहम बैठक मानसून सत्र की शुरुआत से पहले कांग्रेस ने सुबह 10:30 बजे संसद परिसर स्थित कांग्रेस संसदीय दल (CPP) कार्यालय में अपने लोकसभा सांसदों की बैठक बुलाई है। बैठक में विपक्षी दलों की रणनीति, फ्लोर मैनेजमेंट और सदन में उठाए जाने वाले मुद्दों पर चर्चा होगी। इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी विपक्ष ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह कई अहम मुद्दों को सदन में उठाएगा। इनमें शामिल हैं– NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक सोनम वांगचुक का अनशन और संसद मार्च महंगाई मणिपुर की स्थिति किसानों से जुड़े मुद्दे चुनाव आयोग के कामकाज अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावे से जुड़ा मामला एथनॉल नीति कांग्रेस सांसद माणिकम टैगोर ने लोकसभा में NEET-UG पेपर लीक मामले पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस भी दिया है। सरकार का फोकस आठ विधेयकों पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि मानसून सत्र के लिए फिलहाल आठ विधेयकों को सूचीबद्ध किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई नया विधेयक लाया जाएगा तो उसकी जानकारी पहले कार्य मंत्रणा समिति और सभी राजनीतिक दलों को दी जाएगी। सरकार ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग की अपील भी की है। टीएमसी के बागी सांसदों की सीटें बदलीं लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था की गई है। इस बदलाव के तहत कुल 39 सांसदों की सीटों का पुनः आवंटन किया गया है। संसद परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी मानसून सत्र से पहले संसद भवन की सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक परीक्षण किया गया। सीआईएसएफ, दिल्ली पुलिस, सीआरपीएफ, एनएसजी, एनडीआरएफ और संसद सुरक्षा कर्मियों ने संयुक्त रूप से मॉक ड्रिल कर आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की। पहले दिन हंगामे के आसार संसद का यह सत्र राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष जहां विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं सरकार अपने विधायी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है। ऐसे में पहले ही दिन सदन में जोरदार बहस और हंगामे की संभावना जताई जा रही है।
मुंबई, एजेंसियां। 20 से 26 जुलाई के बीच OTT प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों के लिए मनोरंजन का भरपूर डोज़ तैयार है। इस सप्ताह कई नई फिल्में और वेब सीरीज़ रिलीज़ होने जा रही हैं, जिनमें 'Musafir Cafe', 'Adarsh Baal Vidyalaya' जैसे कई अन्य चर्चित टाइटल शामिल हैं। अलग-अलग जॉनर की इन रिलीज़ का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है। 'Musafir Cafe' पर टिकी दर्शकों की नजर इस हफ्ते की सबसे चर्चित रिलीज़ 'Musafir Cafe' मानी जा रही है। फिल्म दोस्ती, रिश्तों और जीवन के नए अनुभवों की कहानी को हल्के-फुल्के अंदाज़ में पेश करती है। ट्रेलर को सोशल मीडिया पर शानदार प्रतिक्रिया मिली है और दर्शकों के बीच इसे लेकर अच्छा उत्साह देखने को मिल रहा है। 'Adarsh Baal Vidyalaya' भी बटोर रही सुर्खियां स्कूल जीवन और सामाजिक मुद्दों पर आधारित 'Adarsh Baal Vidyalaya' भी इस सप्ताह की प्रमुख रिलीज़ में शामिल है। फिल्म की कहानी और विषय को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह है। रिलीज़ से पहले ही इसका ट्रेलर और पोस्टर चर्चा का विषय बने हुए हैं। हर जॉनर के दर्शकों के लिए विकल्प इस सप्ताह कॉमेडी, ड्रामा, फैमिली और थ्रिलर जैसे अलग-अलग जॉनर की कई नई फिल्में और सीरीज़ विभिन्न OTT प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज़ होंगी। ऐसे में दर्शकों को अपनी पसंद के अनुसार कई नए विकल्प मिलने वाले हैं। वीकेंड पर OTT दर्शकों की होगी मौज लगातार नई रिलीज़ के साथ यह सप्ताह OTT प्रेमियों के लिए बेहद खास रहने वाला है। दर्शक घर बैठे अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर नई फिल्मों और वेब सीरीज़ का आनंद ले सकेंगे, जिससे वीकेंड का मनोरंजन और भी शानदार होने की उम्मीद है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले केंद्र सरकार अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गई है। इसी कड़ी में आज शाम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नई दिल्ली स्थित आवास पर वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। बैठक में सरकार के विधायी एजेंडे, विपक्ष की रणनीति और संसद में पेश किए जाने वाले प्रमुख विधेयकों पर चर्चा होगी। मॉनसून सत्र की रणनीति पर होगा मंथन सूत्रों के अनुसार, बैठक में 20 जुलाई से शुरू होने वाले मॉनसून सत्र के लिए सरकार की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले संभावित मुद्दों और सरकार की जवाबी तैयारी पर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। सरकार चाहती है कि संसद का सत्र सुचारु रूप से चले और महत्वपूर्ण विधेयकों को समय पर पारित कराया जा सके। कई वरिष्ठ मंत्री हो सकते हैं शामिल बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है। विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े विधेयकों और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। सर्वदलीय बैठक से पहले सरकार की तैयारी यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब केंद्र सरकार 19 जुलाई को प्रस्तावित सर्वदलीय बैठक की तैयारी भी कर रही है। माना जा रहा है कि आज की बैठक में लिए गए फैसलों के आधार पर सरकार विपक्ष के साथ होने वाली चर्चा में अपना रुख स्पष्ट करेगी। मॉनसून सत्र में कई अहम विधेयक और राष्ट्रीय मुद्दे सदन में आने की संभावना है, इसलिए सरकार कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती है।
नई दिल्ली: कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी का रविवार को 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन पर भारत सरकार ने 13 जुलाई 2026 को पूरे देश में एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में आधिकारिक जानकारी जारी की है। पूरे देश में आधा झुका रहेगा तिरंगा विदेश मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय शोक के दौरान देशभर की सभी सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) आधा झुका रहेगा। इसके अलावा, इस दिन किसी भी प्रकार के आधिकारिक मनोरंजन या सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे। पीएम मोदी ने जताया गहरा शोक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर शोक व्यक्त करते हुए शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी को एक दूरदर्शी नेता बताया। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि शेख हमद ने कतर को आधुनिक और समृद्ध राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि भारत उन्हें हमेशा एक "सच्चे मित्र" के रूप में याद रखेगा। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि उन्हें फरवरी 2024 में कतर यात्रा के दौरान शेख हमद से मिलने का अवसर मिला था। उन्होंने कतर के वर्तमान अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी, शाही परिवार और कतर की जनता के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। भारत की ओर से कतर जाएंगे किरेन रिजिजू केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू भारत सरकार की ओर से कतर जाएंगे। वे वहां शाही परिवार से मुलाकात कर भारत की ओर से आधिकारिक संवेदना व्यक्त करेंगे। 18 वर्षों तक रहे कतर के अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी ने करीब 18 वर्षों तक कतर के अमीर के रूप में शासन किया। जून 2013 में उन्होंने स्वेच्छा से सत्ता अपने बेटे और वर्तमान अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी को सौंप दी थी। कतर को वैश्विक पहचान दिलाने का श्रेय अपने कार्यकाल के दौरान शेख हमद ने कतर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान दिलाई। उनके नेतृत्व में देश ने— कूटनीति, वैश्विक निवेश, मीडिया, खेल, और आर्थिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की। उनके शासनकाल में कतर खाड़ी क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली देशों में शामिल हुआ। भारत-कतर संबंधों में निभाई अहम भूमिका शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी को भारत और कतर के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का समर्थक माना जाता था। उनके कार्यकाल में दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, निवेश और रणनीतिक सहयोग में उल्लेखनीय विस्तार हुआ। भारत सरकार ने उनके निधन को दोनों देशों के संबंधों के लिए एक बड़ी क्षति बताया है।
केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi की विदेश यात्राओं को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बिना पूर्व सूचना दिए विदेश यात्रा करते हैं, जबकि नियमों के तहत सांसदों को अपनी यात्रा की जानकारी पहले देना अनिवार्य है। ‘तीन हफ्ते पहले सूचना देना जरूरी’ किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि किसी भी सांसद को विदेश यात्रा से कम से कम तीन सप्ताह पहले लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय को इसकी सूचना देनी होती है। उन्होंने कहा, “यह अनुमति लेने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि सूचना देने का नियम है। सांसद विदेश यात्रा कर सकते हैं, लेकिन उन्हें निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।” राहुल गांधी की यात्राओं पर उठाए सवाल रिजिजू ने दावा किया कि राहुल गांधी 2004 से सांसद हैं और अब तक उनकी 54 विदेश यात्राएं दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा कि केवल यात्राओं की संख्या ही नहीं, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि वह विदेश में कितने दिन रहे और उन यात्राओं पर कितना खर्च हुआ। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर कोई सांसद विदेश में किसी संस्था या संगठन की ओर से आतिथ्य स्वीकार करता है, तो वह मामला Foreign Contribution Regulation Act यानी FCRA के दायरे में आता है और इसकी जानकारी गृह मंत्रालय को देना जरूरी होता है। ‘कांग्रेस नियमों का पालन करे’ किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी से नियमों का पालन करने की अपील करते हुए कहा कि विदेश यात्रा से पहले लोकसभा अध्यक्ष और संबंधित एजेंसियों को आवश्यक जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने इतनी विदेश यात्राएं क्यों कीं, किसने उन्हें आमंत्रित किया और विदेश में उनके खर्च का वहन किसने किया।” ‘कानून सबके लिए समान’ केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यात्रा करना किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता है, लेकिन सभी नागरिकों और खासकर सांसदों को देश के कानूनों का पालन करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी मामले में जांच या कार्रवाई होती है, तो इसे किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं माना जाना चाहिए। “कानून सबके लिए बराबर है,” रिजिजू ने कहा।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। Narendra Modi, Mallikarjun Kharge और Kiren Rijiju के बीच चिट्ठियों का दौर इस बहस को और गर्म कर रहा है। आखिर खरगे ने PM मोदी को क्यों लिखा पत्र? कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में सरकार पर कई आरोप लगाए: सरकार जल्दबाजी में संशोधन लागू करना चाहती है चुनाव से पहले इसे राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है विपक्ष से पर्याप्त परामर्श नहीं किया गया खरगे का कहना है कि इतने अहम कानून पर व्यापक चर्चा जरूरी है, न कि जल्दबाजी में फैसला। रिजिजू का जवाब–“अभी सही समय है” इन आरोपों पर जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा: 16 मार्च 2026 से ही सभी दलों से बातचीत शुरू हो चुकी थी कई पार्टियों–जैसे Samajwadi Party, DMK, Trinamool Congress–से चर्चा की गई कई दलों ने समर्थन भी जताया रिजिजू ने जोर देकर कहा कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो 2029 चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करना मुश्किल हो सकता है। संसद सत्र क्यों बुलाया गया? सरकार ने 16–18 अप्रैल 2026 तक संसद सत्र बुलाया है, ताकि इस कानून में जरूरी संशोधन कर उसे लागू किया जा सके। सरकार इसे महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है। मुद्दा क्या है? नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) पहले ही 2023 में संसद से पास हो चुका है। अब सरकार चाहती है कि इसके कार्यान्वयन की प्रक्रिया तेज की जाए, जबकि विपक्ष टाइमिंग और प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है।
केंद्र सरकार ने 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाकर एक बड़ा राजनीतिक और संवैधानिक कदम उठाने की तैयारी की है। इस सत्र में नारी वंदन अधिनियम, 2023 यानी महिला आरक्षण कानून में संशोधन प्रस्ताव लाया जा सकता है। इस प्रस्ताव को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है और सरकार व विपक्ष आमने-सामने हैं। क्या है सरकार का प्रस्ताव? सूत्रों के मुताबिक, सरकार महिला आरक्षण कानून में दो बड़े बदलाव करने पर विचार कर रही है: परिसीमन (Delimitation) के लिए नई जनगणना की बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाना लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों की संख्या में लगभग 50% तक बढ़ोतरी अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो: उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटें 80 से बढ़कर 120 हो सकती हैं बिहार में 40 से 60 तमिलनाडु में 39 से 58 इस तरह कुल लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर करीब 816 तक पहुंच सकती हैं, जिनमें लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। सरकार का क्या कहना है? केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने स्पष्ट किया है कि इस संशोधन को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य महिला प्रतिनिधित्व को तेजी से लागू करना और प्रक्रिया को सरल बनाना है, ताकि 2029 तक इसे लागू किया जा सके। विपक्ष क्यों कर रहा विरोध? विपक्ष इस कदम को चुनावी रणनीति बता रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार महिला वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है राजीव शुक्ला ने इसे चुनावी लाभ के लिए उठाया गया कदम बताया कांग्रेस का दावा है कि महिला आरक्षण की पहल पहले उसी ने की थी OBC महिलाओं के आरक्षण की मांग समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल ने इस मुद्दे को और आगे बढ़ाते हुए OBC महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग उठाई है। उनका कहना है कि: केवल सामान्य महिला आरक्षण पर्याप्त नहीं है पिछड़ी जातियों की महिलाओं को अलग से प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए क्या है असली सियासी गणित? विशेषज्ञों के अनुसार, यह संशोधन कई स्तरों पर असर डाल सकता है: महिला वोट बैंक को प्रभावित करेगा राज्यों में सीटों के पुनर्वितरण से राजनीतिक समीकरण बदलेंगे 2029 चुनाव से पहले बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है पास होने में क्या है चुनौती? चूंकि यह एक संवैधानिक संशोधन है, इसलिए इसे संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। हालांकि कोई भी पार्टी खुले तौर पर महिला आरक्षण का विरोध नहीं कर रही, लेकिन: परिसीमन के आधार OBC आरक्षण समय और मंशा इन मुद्दों पर तीखी बहस तय मानी जा रही है। निष्कर्ष महिला आरक्षण बिल में प्रस्तावित संशोधन सिर्फ एक कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक बदलाव साबित हो सकता है। जहां सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी रणनीति करार दे रहा है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राजनीति में एक बड़ा और दिलचस्प मोड़ देखने को मिला है। भारत के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी Leander Paes ने औपचारिक रूप से Bharatiya Janata Party (BJP) का दामन थाम लिया है। उनकी एंट्री ऐसे समय पर हुई है जब राज्य में चुनावी माहौल तेजी से गरमा रहा है और सभी पार्टियां अपने-अपने स्तर पर रणनीति को धार दे रही हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुआ औपचारिक स्वागत Leander Paes को पार्टी में शामिल करने के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju और भाजपा नेता Sukanta Majumdar मौजूद रहे। Kiren Rijiju ने पेस की उपलब्धियों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भारत को अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर पहचान दिलाई और अब वे राजनीति के जरिए देश की सेवा करेंगे। “अब देश और युवाओं की सेवा का समय” BJP में शामिल होने के बाद Leander Paes ने भावुक अंदाज में कहा कि उन्होंने पिछले 40 वर्षों में खेल के जरिए देश का प्रतिनिधित्व किया है और अब वे युवाओं और देश की सेवा के लिए राजनीति में कदम रख रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृह मंत्री Amit Shah और पार्टी नेतृत्व का आभार भी जताया। खेल से राजनीति तक का सफर Leander Paes भारत के सबसे सफल टेनिस खिलाड़ियों में से एक रहे हैं: 1996 बार्सिलोना ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल डेविस कप और ग्रैंड स्लैम में शानदार प्रदर्शन विंबलडन समेत कई अंतरराष्ट्रीय खिताब उनकी लोकप्रियता और पहचान को देखते हुए BJP को उम्मीद है कि यह कदम खासकर युवाओं और शहरी वोटर्स के बीच असर डाल सकता है। चुनावी समीकरण पर क्या असर? Leander Paes की एंट्री को BJP के लिए एक “स्टार पावर” रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। इससे पार्टी की छवि को मजबूती मिल सकती है युवा मतदाताओं को आकर्षित करने में मदद मिल सकती है विपक्ष पर मनोवैज्ञानिक दबाव भी बन सकता है हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी लोकप्रियता वोट में कितनी तब्दील होती है। निष्कर्ष पश्चिम बंगाल की राजनीति में Leander Paes की एंट्री ने चुनावी मुकाबले को और रोमांचक बना दिया है। खेल के मैदान से राजनीति के मैदान तक उनका यह सफर BJP के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा, इसका जवाब आने वाले चुनावी नतीजे ही देंगे।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक प्रतिनिधिमंडल ने Election Commission of India से मुलाकात कर राज्य में चुनावी माहौल को लेकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि मतदाताओं को डराकर चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। क्या है पूरा मामला? बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग को सौंपी याचिका में दावा किया कि राज्य के कई इलाकों में मतदाताओं को घर-घर जाकर धमकाया जा रहा है। इस मुलाकात के बाद केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju ने कहा कि: लोगों को बीजेपी को वोट न देने के लिए दबाव डाला जा रहा है चुनाव प्रक्रिया को “हाईजैक” करने की कोशिश हो रही है मतदाताओं को डराकर और दबाकर प्रभावित किया जा रहा है ममता सरकार पर सीधे आरोप रिजिजू ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और उनकी पार्टी All India Trinamool Congress (TMC) पर निशाना साधते हुए कहा कि: पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को धमका रहे हैं पिछले चुनावों में भी इसी तरह के तरीके अपनाए गए राज्य का पुलिस और प्रशासन TMC के प्रभाव में काम कर रहा है चुनाव आयोग का जवाब चुनाव आयोग ने बीजेपी प्रतिनिधिमंडल की शिकायतों को गंभीरता से सुनने के बाद आश्वासन दिया कि: राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किए जाएंगे सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे कब होंगे चुनाव? पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर: मतदान: 23 अप्रैल और 29 अप्रैल मतगणना: 4 मई इस बीच, राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होते जा रहे हैं, जिससे चुनावी माहौल और अधिक संवेदनशील बनता दिख रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।