Indian Politics

लोकसभा सांसदों के आपराधिक मामलों से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट
लोकसभा के 251 सांसदों पर आपराधिक मामले, सुप्रीम कोर्ट में पेश रिपोर्ट से सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

नई दिल्ली, एजेंसियां। राजनीति के अपराधीकरण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश की गई ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि लोकसभा के 543 सदस्यों में से 251 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं, राज्यसभा के 233 सदस्यों में से 75 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं। इस तरह मौजूदा लोकसभा के करीब 46 प्रतिशत सांसद आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं।   170 लोकसभा सांसदों पर गंभीर आपराधिक मामले   सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता और न्यायमित्र विजय हंसारिया की ओर से दाखिल हलफनामे में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के आंकड़ों का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा के 251 सांसदों में से 170 सांसदों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन अपराधों में दोष सिद्ध होने पर पांच साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है। राज्यसभा के 75 सांसदों में से 40 के खिलाफ भी गंभीर आपराधिक मामले बताए गए हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज होना अपने आप में उसे दोषी साबित नहीं करता है और अंतिम निर्णय अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होता है।   सांसदों और विधायकों के 4,192 मामले लंबित   रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा और पूर्व सांसदों तथा विधायकों के खिलाफ देशभर में कुल 4,192 आपराधिक मामले लंबित हैं। न्यायमित्र ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की निगरानी के बावजूद वर्ष 2018 से सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की संख्या में अपेक्षित कमी नहीं आई है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में सांसदों और विधायकों से जुड़े 1,243 मामलों का निपटारा हुआ, जबकि इसी अवधि में 1,050 नए मामले दर्ज हुए। इससे लंबित मामलों के तेजी से निपटारे की चुनौती बनी हुई है।   केरल और झारखंड समेत कई राज्यों में स्थिति गंभीर   राज्यवार आंकड़ों में केरल सबसे ऊपर नजर आता है। रिपोर्ट के अनुसार, वहां 20 में से 19 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। तेलंगाना में 17 में से 14, ओडिशा में 21 में से 16 और झारखंड में 14 में से 10 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले बताए गए हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 28 राज्यों में से 14 मुख्यमंत्रियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। इनमें तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के खिलाफ सबसे अधिक 89 मामले बताए गए हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल के सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ 29 और कर्नाटक के डी.के. शिवकुमार के खिलाफ 19 मामले दर्ज बताए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में यह रिपोर्ट सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान पेश की गई है। रिपोर्ट के आंकड़ों ने देश में राजनीति के अपराधीकरण और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे को लेकर एक बार फिर बहस तेज कर दी है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 18, 2026 0
सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी की संपत्ति जांच से जुड़े मामले की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, राहुल गांधी की संपत्ति जांच पर CBI-ED की रिपोर्ट दाखिल करने पर रोक

नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी से जुड़ी कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले में CBI और ED को इलाहाबाद हाई कोर्ट में जांच रिपोर्ट दाखिल करने से रोक दिया है। साथ ही शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में चल रही इस मामले की कार्यवाही को अगली सुनवाई तक स्थगित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश 17 अगस्त को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने राहुल गांधी की याचिका पर सुनाया।   हाई कोर्ट के आदेश को राहुल गांधी ने दी थी चुनौती     यह मामला कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की याचिका से जुड़ा है। याचिका में राहुल गांधी पर ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के आरोप लगाए गए थे और CBI तथा ED से जांच की मांग की गई थी।   इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पहले केंद्रीय जांच एजेंसियों को इन आरोपों की जांच और प्रगति से संबंधित जानकारी देने के निर्देश दिए थे। राहुल गांधी ने हाई कोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।   CBI-ED को रिपोर्ट दाखिल करने से रोका     सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान CBI और ED को हाई कोर्ट के निर्देश के तहत कोई रिपोर्ट दाखिल नहीं करने को कहा। अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को भी मामले में आगे की कार्यवाही फिलहाल टालने का निर्देश दिया है।   सुप्रीम कोर्ट की पीठ में CJI सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। अदालत ने मामले में याचिकाकर्ता, CBI और ED को नोटिस भी जारी किया है।   सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों से पूछा सवाल     सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाया। अदालत ने पूछा कि यदि आरोप इतने गंभीर हैं तो संबंधित एजेंसी ने खुद से कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की और क्या उसे जांच के लिए अदालत के निर्देश की जरूरत थी।   मामले में अगली सुनवाई तक इलाहाबाद हाई कोर्ट की कार्यवाही स्थगित रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से राहुल गांधी को फिलहाल अंतरिम राहत मिली है, हालांकि यह आदेश आरोपों को सही या गलत ठहराने वाला अंतिम फैसला नहीं है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 18, 2026 0
Shehzad Poonawalla announces resignation from BJP and national spokesperson post citing personal and financial reasons
शहजाद पूनावाला ने बीजेपी से दिया इस्तीफा, बोले- ‘पार्टी की व्यवस्था छोड़ रहा हूं, विचार और व्यक्ति नहीं’

नई दिल्ली: बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन को पत्र लिखकर अपना इस्तीफा स्वीकार करने की अपील की है। पूनावाला के इस्तीफे के बाद बीजेपी की आंतरिक राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पूनावाला के मुताबिक, उन्होंने इससे पहले 30 जुलाई 2026 को आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों का हवाला देते हुए पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफे की पेशकश की थी। उस समय पार्टी ने उनका इस्तीफा तुरंत स्वीकार नहीं किया था और उन्हें अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कहा था। लंबी चर्चा के बाद लिया अंतिम फैसला अपने ताजा पत्र में शहजाद पूनावाला ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ विचार-विमर्श और गंभीर मंथन के बाद उन्होंने अपने फैसले पर कायम रहने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में हुई घटनाओं और जिन लोगों के बारे में उन्होंने पार्टी नेतृत्व को जानकारी दी थी, उसके बाद उन्होंने इस्तीफा देने का अंतिम फैसला किया। इस तरह पूनावाला अब बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद के साथ-साथ सक्रिय प्राथमिक सदस्यता से भी अलग होने की प्रक्रिया में हैं। पीएम मोदी समेत वरिष्ठ नेताओं का जताया आभार इस्तीफे के पत्र में पूनावाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संगठन महामंत्री बीएल संतोष के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं के प्रति उनके मन में किसी तरह की नाराजगी या आहत भावना नहीं है। पिछले पांच वर्षों में पार्टी की ओर से मिले मंच और अवसरों के लिए उन्होंने नेतृत्व का धन्यवाद किया। निजी क्षेत्र में जाने की तैयारी पूनावाला ने अपने इस्तीफे की वजह मुख्य रूप से आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों को बताया है। उन्होंने कहा कि अब वह निजी क्षेत्र में प्रवेश करेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बीजेपी से संगठनात्मक रूप से अलग होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के दृष्टिकोण तथा कार्यों का समर्थन करते रहेंगे। ‘व्यवस्था छोड़ रहा हूं, विचार और व्यक्ति नहीं’ शहजाद पूनावाला के इस्तीफे की सबसे अहम बात उनका यह बयान रहा कि वह “पार्टी की व्यवस्था छोड़ रहे हैं, लेकिन विचार और व्यक्ति नहीं।” इस बयान से साफ है कि पूनावाला ने संगठन से अलग होने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी की विचारधारा के प्रति अपना समर्थन बरकरार रखने की बात कही है। अब देखना होगा कि बीजेपी नेतृत्व उनके इस्तीफे को किस तरह स्वीकार करता है और आगे पार्टी में उनकी भूमिका क्या रहती है।  

surbhi अगस्त 17, 2026 0
Government and opposition clash in Parliament over Amit Shah's response to police action during Delhi student protests.
संसद में फिर आमने-सामने सरकार और विपक्ष, अमित शाह के जवाब को लेकर सियासी घमासान; NDA की 'मंगल मिलन' रणनीति से राहुल गांधी पर निशाना

Parliament Monsoon Session 2026: संसद के मॉनसून सत्र में दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध लगातार जारी है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले पर संसद में जवाब मांग रहे हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि गृह मंत्री इस मुद्दे पर सदन में चर्चा का जवाब देने के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष को जवाब के दौरान सदन में मौजूद रहकर शांतिपूर्ण तरीके से चर्चा सुननी चाहिए। इसी राजनीतिक टकराव के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA ने विपक्ष को घेरने की रणनीति तैयार की है। मंगलवार को होने वाली गठबंधन की 'मंगल मिलन' बैठक के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी की गई है। NDA की बैठक में बनेगी विपक्ष को घेरने की रणनीति मॉनसून सत्र के दौरान NDA संसदीय दल की 'मंगल मिलन' बैठक आयोजित की गई। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत गठबंधन के सांसदों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक के बाद NDA सांसद ऐसे पोस्टर लेकर सामने आ सकते हैं, जिनमें सरकार का संदेश होगा कि गृह मंत्री चर्चा और जवाब के लिए तैयार हैं, जबकि विपक्ष चर्चा से पीछे हट रहा है। यह रणनीति सीधे तौर पर कांग्रेस और राहुल गांधी के उस रुख का जवाब है, जिसमें वे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री से संसद में जवाब की मांग कर रहे हैं। सरकार का दावा- गृह मंत्री जवाब देने के लिए तैयार संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से कहा है कि सरकार छात्रों के आंदोलनों और उनसे जुड़ी घटनाओं पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह इस चर्चा का जवाब देने के लिए भी तैयार हैं। हालांकि सरकार की शर्त है कि गृह मंत्री के जवाब के दौरान विपक्ष सदन में व्यवधान पैदा न करे। सरकार का कहना है कि चर्चा के बाद जवाब देने के दौरान विपक्षी सांसदों का सदन से बाहर चले जाना उचित नहीं होगा। सरकार चाहती है कि गृह मंत्री को बिना व्यवधान अपनी बात रखने का अवसर मिले। राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना दूसरी ओर, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री संसद में आकर विपक्ष के सवालों का सामना करने से बच रहे हैं। राहुल गांधी का कहना है कि पिछले कई दिनों से छात्रों के साथ हुई कार्रवाई पर सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। राहुल गांधी ने यह भी सवाल उठाया कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति किसने दी। राहुल गांधी की मुख्य मांग क्या है? राहुल गांधी का कहना है कि विपक्ष की मांग किसी सामान्य संसदीय भाषण की नहीं है। उनका जोर इस बात पर है कि गृह मंत्री छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर स्पष्ट जवाब दें। उनके मुताबिक, सरकार को यह बताना चाहिए कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था और गृह मंत्रालय को इस कार्रवाई की जानकारी थी या नहीं। राहुल गांधी ने दावा किया कि यदि गृह मंत्री को इसकी जानकारी थी तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यदि उन्हें जानकारी नहीं थी तो भी यह गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़ा करता है। छात्रों के प्रदर्शन को लेकर क्यों है विवाद? दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। विपक्ष इस घटना की जिम्मेदारी तय करने और संसद में सरकार से जवाब की मांग कर रहा है। सरकार दूसरी तरफ चर्चा के लिए तैयार होने की बात कह रही है। यही अंतर अब संसद में राजनीतिक गतिरोध का प्रमुख कारण बना हुआ है। दोनों पक्षों के दावे आमने-सामने पूरे विवाद में सरकार और विपक्ष के रुख में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। सरकार का पक्ष: सरकार का कहना है कि छात्र आंदोलनों और संबंधित घटनाओं पर संसद में विस्तृत चर्चा की जा सकती है और गृह मंत्री अमित शाह चर्चा का जवाब देने के लिए तैयार हैं। सरकार विपक्ष से जवाब के दौरान सदन में मौजूद रहने की अपील कर रही है। विपक्ष का पक्ष: राहुल गांधी और कांग्रेस इस मुद्दे पर गृह मंत्री से सीधे जवाब और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं। उनका मुख्य सवाल छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और कथित पैलेट गन के इस्तेमाल के आदेश को लेकर है। 'मंगल मिलन' के जरिए राजनीतिक संदेश देने की तैयारी NDA की 'मंगल मिलन' बैठक को केवल संसदीय समन्वय तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इस बैठक के जरिए गठबंधन विपक्ष पर राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति भी आगे बढ़ा सकता है। यदि NDA सांसद 'गृह मंत्री चर्चा के लिए तैयार, विपक्ष भाग रहा' जैसे संदेश वाले पोस्टर लेकर सामने आते हैं, तो यह सरकार और विपक्ष के बीच चल रहे विवाद को संसद से बाहर भी राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश होगी। वहीं विपक्ष इस पूरे मामले को छात्रों के अधिकार, पुलिस कार्रवाई और सरकार की जवाबदेही से जोड़कर देख रहा है। संसद में गतिरोध कब खत्म होगा? फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। सरकार चर्चा और जवाब के लिए तैयार होने का दावा कर रही है, जबकि विपक्ष गृह मंत्री से छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जवाब चाहता है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही के दौरान यह मुद्दा राजनीतिक टकराव का केंद्र बना रह सकता है। गतिरोध तभी खत्म होने की संभावना है जब दोनों पक्ष चर्चा के तरीके और गृह मंत्री के जवाब को लेकर किसी साझा रास्ते पर पहुंचें।  

surbhi अगस्त 11, 2026 0
Supriya Sule and Prime Minister Narendra Modi amid political discussions over FCRA Bill and delimitation proposals.
FCRA विधेयक पर बढ़ी सियासी हलचल, सुप्रिया सुले की पीएम मोदी से मुलाकात पर नजर; DMK-NCP (SP) को साधने की कोशिश

नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होने वाला है और अब उसके अंतिम चार दिनों में लंबित महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक यानी एफसीआरए विधेयक और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनाने की कोशिशें तेज होती दिखाई दे रही हैं। इसी क्रम में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने वाली हैं। उनके साथ पार्टी सांसदों का प्रतिनिधिमंडल भी रहेगा। बैठक को महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ संसद में लंबित महत्वपूर्ण विधेयकों के संदर्भ में भी अहम माना जा रहा है। एफसीआरए विधेयक पर एनसीपी (एसपी) का स्पष्ट विरोध सुप्रिया सुले ने प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक के मौजूदा स्वरूप पर अपनी पार्टी की आपत्ति स्पष्ट कर दी है। उनका कहना है कि एनसीपी (एसपी) इस विधेयक का वर्तमान रूप में समर्थन नहीं करती। पार्टी की मांग है कि विधेयक को या तो वापस लिया जाए या फिर इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजकर विस्तृत जांच और चर्चा कराई जाए। इस रुख से संकेत मिलता है कि सरकार को विधेयक को लेकर विपक्षी दलों के बीच सहमति बनाने के लिए राजनीतिक स्तर पर बातचीत करनी पड़ सकती है। परिसीमन विधेयक पर सुले ने साधी सावधानी परिसीमन से जुड़े प्रस्तावित संविधान संशोधन को लेकर सुप्रिया सुले ने फिलहाल कोई अंतिम रुख जाहिर नहीं किया है। उनका कहना है कि संबंधित विधेयक अभी सामने नहीं आया है और इसके बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। महिला आरक्षण से जुड़े परिसीमन प्रस्ताव को राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है। सुले ने संकेत दिया है कि इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेने से पहले वह इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों से बातचीत करेंगी। इस प्रस्ताव को संसद में पारित कराने के लिए सरकार को व्यापक राजनीतिक समर्थन की आवश्यकता होगी, क्योंकि संविधान संशोधन के लिए विशेष बहुमत की जरूरत पड़ती है। सरकार के लिए डीएमके और एनसीपी (एसपी) क्यों अहम? संसद के मौजूदा सत्र के अंतिम सप्ताह में एफसीआरए संशोधन विधेयक को सोमवार के लोकसभा एजेंडे में शामिल नहीं किया गया है। इससे राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हुई है कि सरकार फिलहाल इस मुद्दे पर व्यापक सहमति बनाने की कोशिश कर सकती है। डीएमके और एनसीपी (एसपी) जैसी पार्टियां एफसीआरए विधेयक के मौजूदा प्रावधानों पर सवाल उठा रही हैं। वहीं, परिसीमन जैसे संवैधानिक मुद्दे पर सरकार को अधिक व्यापक समर्थन की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे में दोनों दलों के साथ संवाद को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक पर नजर सोमवार को लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक भी होने वाली है। इसी बैठक में आने वाले दिनों के विधायी एजेंडे और विभिन्न विधेयकों पर चर्चा के लिए समय तय किया जाता है। अगर सरकार एफसीआरए विधेयक को मौजूदा मानसून सत्र में पारित कराने के लिए आगे बढ़ती है, तो उसके लिए चर्चा और मतदान का समय निर्धारित करना जरूरी होगा। फिलहाल सोमवार के लोकसभा एजेंडे में चार विधेयकों का उल्लेख है, लेकिन एफसीआरए संशोधन विधेयक इसमें शामिल नहीं है। इस वजह से यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में सरकार इस विधेयक को सदन में लाती है या नहीं। एफसीआरए विधेयक को लेकर विपक्ष की आपत्ति क्या है? एफसीआरए यानी विदेशी अंशदान विनियमन कानून का उद्देश्य भारत में विदेशों से मिलने वाले धन और चंदे को नियंत्रित करना तथा उसके इस्तेमाल में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। मौजूदा कानून के तहत विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए पंजीकरण और नियामकीय प्रावधान लागू होते हैं। प्रस्तावित संशोधनों में एफसीआरए पंजीकरण समाप्त होने या संस्था द्वारा पंजीकरण वापस करने की स्थिति में विदेशी अंशदान और उससे जुड़े मामलों के प्रबंधन के लिए एक विशेष व्यवस्था का प्रस्ताव है। विपक्ष को आशंका है कि नए प्रावधानों से गैर सरकारी संगठनों और सामुदायिक संगठनों की कार्यप्रणाली पर अतिरिक्त नियंत्रण बढ़ सकता है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी विधेयक को लेकर आपत्ति जताई है। विपक्ष की ओर से यह आरोप लगाया गया है कि प्रस्तावित बदलावों का असर कुछ सामाजिक और धार्मिक संगठनों पर पड़ सकता है। हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों और आशंकाओं पर सरकार का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा। चार दिन में तय होगी विधेयक की दिशा संसद का मानसून सत्र अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। ऐसे में एफसीआरए विधेयक को लेकर सरकार की रणनीति और विपक्षी दलों के रुख पर लगातार नजर रहेगी। सुप्रिया सुले की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रस्तावित मुलाकात को इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले चार दिनों में बातचीत, बिजनेस एडवाइजरी कमेटी के फैसले और सदन के एजेंडे से स्पष्ट होगा कि एफसीआरए विधेयक पर सरकार आगे बढ़ती है या इसे आगे की चर्चा के लिए टाल दिया जाता है। साथ ही परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने की कोशिशें भी संसद के अंतिम दिनों की बड़ी राजनीतिक गतिविधियों में शामिल रहेंगी।  

surbhi अगस्त 10, 2026 0
Indian Parliament building as government prepares Kerala name change and NCDC funding bills amid opposition protests.
शाह के बयान पर विपक्ष अड़ा, आज ‘केरलम’ नाम और एनसीडीसी फंडिंग पर 2 बड़े विधेयक; संसद में फिर टकराव के आसार

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के अंतिम दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग पर विपक्ष अब भी कायम है। इसी बीच केंद्र सरकार सोमवार को लोकसभा में दो महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इनमें पहला केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने से संबंधित है, जबकि दूसरा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम यानी एनसीडीसी की वित्तीय शक्तियों का विस्तार करने से जुड़ा है। मॉनसून सत्र के अब केवल कुछ दिन शेष हैं। ऐसे में विपक्ष की मांग और सरकार के विधायी एजेंडे के बीच टकराव की स्थिति बनने की संभावना जताई जा रही है। अमित शाह के बयान की मांग पर विपक्ष अड़ा कांग्रेस समेत विपक्षी दल 20 जुलाई को संसद तक मार्च कर रहे छात्रों और युवाओं के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से संसद में बयान की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि इस मुद्दे पर गृह मंत्री की चुप्पी स्वीकार्य नहीं है। विपक्ष का कहना है कि संसद में इस मामले पर सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। जयराम रमेश ने 13 दिसंबर 2023 को संसद में हुए सुरक्षा उल्लंघन का भी उल्लेख किया। उनका आरोप है कि उस समय भी विपक्ष ने गृह मंत्री के बयान की मांग की थी, लेकिन उनकी ओर से सदन में बयान नहीं दिया गया था। विपक्ष का कहना है कि इस बार भी ऐसी स्थिति नहीं दोहराई जानी चाहिए। मानसून सत्र के आखिरी दिनों में बढ़ सकता है हंगामा संसद के मानसून सत्र में पहले से ही कई मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस और गतिरोध देखने को मिला है। अब सत्र के अंतिम चरण में गृह मंत्री के बयान की मांग के साथ दो महत्वपूर्ण विधेयकों को लोकसभा में पेश किए जाने की तैयारी है। ऐसे में सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वहीं विपक्ष अपनी मांग को लेकर दबाव बनाए रखने की रणनीति पर आगे बढ़ सकता है। केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव सरकार सोमवार को लोकसभा में ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ पेश करने की तैयारी में है। इसके जरिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन करने का प्रस्ताव है। प्रस्ताव पारित होने के बाद राज्य का आधिकारिक नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ किए जाने का रास्ता साफ होगा। केरल विधानसभा पहले ही राज्य का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित कर चुकी है। इसके बाद केंद्र सरकार की ओर से भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दी जा चुकी है। अब अंतिम प्रक्रिया संसद की मंजूरी से जुड़ी है। यदि विधेयक संसद से पारित होता है और आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होती है, तो राज्य का आधिकारिक नाम ‘केरलम’ हो जाएगा। एनसीडीसी की फंडिंग शक्तियों में बड़ा बदलाव दूसरा महत्वपूर्ण प्रस्ताव राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 है। इसके जरिए एनसीडीसी की वित्तीय सहायता व्यवस्था का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव है। मौजूदा व्यवस्था में एनसीडीसी मुख्य रूप से सहकारी समितियों से जुड़ी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है। प्रस्तावित बदलाव के बाद वह सहकारी विकास से जुड़ी अन्य संस्थाओं को भी सीधे ऋण और अनुदान उपलब्ध करा सकेगा। इसके अलावा केंद्र सरकार की मंजूरी से ऐसी संस्थाओं में इक्विटी निवेश का रास्ता भी खुल सकता है। किन संस्थाओं को मिल सकता है लाभ? सरकार का तर्क है कि सहकारी क्षेत्र के विस्तार के साथ ऐसी कई संस्थाएं सामने आई हैं, जो सहकारी समितियों को तकनीक, बुनियादी ढांचे, प्रसंस्करण, विपणन और वित्तीय सेवाओं जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं। प्रस्तावित संशोधन के बाद ऐसी संस्थाओं को भी वित्तीय सहायता के दायरे में लाने की व्यवस्था की जा सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं होगा कि हर संस्था स्वतः एनसीडीसी की फंडिंग के लिए पात्र हो जाएगी। संस्था का सहकारी विकास से जुड़ा होना जरूरी होगा। फंड के इस्तेमाल पर निगरानी की व्यवस्था प्रस्तावित बदलावों में वित्तीय सहायता के उपयोग की निगरानी के लिए ऑडिट और रिपोर्टिंग जैसी व्यवस्थाओं पर भी जोर दिया गया है। इसके अलावा खाद्य वस्तुओं की परिभाषा का दायरा बढ़ाने और औद्योगिक वस्तुओं की वित्तीय सहायता से जुड़ी कुछ भौगोलिक पाबंदियों को हटाने का भी प्रस्ताव है। एनसीडीसी को बैंकों और वित्तीय संस्थानों से ऋण संबंधी जानकारी जुटाने और साझा करने की शक्ति दिए जाने का भी प्रावधान प्रस्तावित है। अब नजर संसद की कार्यवाही पर एक तरफ विपक्ष अमित शाह के बयान की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर सरकार के एजेंडे में केरल के नाम परिवर्तन और एनसीडीसी की फंडिंग शक्तियों से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक शामिल हैं। ऐसे में सोमवार की संसद कार्यवाही राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब देखना होगा कि विपक्ष की मांग और सरकार के विधायी एजेंडे के बीच सदन में सहमति बनती है या एक बार फिर जोरदार हंगामे के कारण कार्यवाही प्रभावित होती है।  

surbhi अगस्त 10, 2026 0
Sayeoni Ghosh meets Prime Minister Narendra Modi for the first time and calls the meeting a memorable moment
पीएम मोदी से पहली मुलाकात पर सायोनी घोष का पोस्ट, बोलीं- ‘याद रखने वाला पल’; बदले सियासी समीकरणों के बीच बढ़ी चर्चा

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सांसद सायोनी घोष की पहली मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। मुलाकात के बाद सायोनी घोष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी तस्वीरें और वीडियो साझा किए। उन्होंने इस मुलाकात को ‘याद रखने वाला पल’ बताया। सायोनी घोष ने अपनी पोस्ट में लिखा, “माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के साथ मेरी पहली मुलाकात। एक यादगार पल!” इसके साथ साझा किए गए वीडियो में वह प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत करती हुई नजर आ रही हैं। यह मुलाकात इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि सायोनी घोष का राजनीतिक रुख हाल के दिनों में बदला है। रिपोर्ट के मुताबिक, वह तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर 20 सांसदों वाले एक नए राजनीतिक गुट का हिस्सा बनी हैं, जिसने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI के साथ जाने का ऐलान किया है। पहली मुलाकात, लेकिन राजनीतिक मायने बड़े प्रधानमंत्री मोदी और सायोनी घोष की यह पहली मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। सायोनी घोष पहले तृणमूल कांग्रेस के साथ सक्रिय राजनीति में रही हैं। अब उनके नए राजनीतिक गुट के NDA के साथ काम करने की बात सामने आने के बाद प्रधानमंत्री से उनकी मुलाकात को राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि, सिर्फ मुलाकात और सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर किसी नए राजनीतिक फैसले का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। सायोनी ने अपनी पोस्ट में मुख्य रूप से मुलाकात को यादगार बताया है। 20 सांसदों वाले बागी गुट की चर्चा रिपोर्टों के मुताबिक, सायोनी घोष उन 20 सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर NCPI के साथ जाने की जानकारी लोकसभा अध्यक्ष को दी थी। इस समूह में सुदीप बंद्योपाध्याय, काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, यूसुफ पठान, दीपक अधिकारी और जून मालिया जैसे नामों की भी चर्चा है। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें तेज कर दी हैं। NDA के साथ काम करने की बात इस नए गुट की ओर से NDA के साथ काम करने की बात भी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, गुट के कुछ नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाले NDA के साथ सहयोग की बात कही है। NCPI के सांसदों के NDA की संसदीय बैठक में शामिल होने की खबरों ने भी इस राजनीतिक समीकरण को और चर्चा में ला दिया है। ऐसे में सायोनी घोष की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात को विपक्षी राजनीति से अलग होकर नए राजनीतिक गठजोड़ की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। सायोनी घोष क्यों हैं अहम चेहरा? सायोनी घोष को पश्चिम बंगाल की राजनीति में जाना-पहचाना चेहरा माना जाता है। तृणमूल कांग्रेस के साथ उनके राजनीतिक सफर के बाद अब नए गुट में उनकी भूमिका को लेकर भी चर्चा है। जून में सामने आई रिपोर्टों में उन्हें इस बागी गुट के प्रमुख चेहरों में गिना गया था। ऐसे में प्रधानमंत्री के साथ उनकी पहली मुलाकात और उसके बाद सार्वजनिक की गई तस्वीरें राजनीतिक तौर पर स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन गई हैं। सोशल मीडिया पोस्ट ने बढ़ाई हलचल मुलाकात के बाद सायोनी घोष का छोटा-सा सोशल मीडिया संदेश भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया। उन्होंने इसे सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात के रूप में पेश करने के बजाय ‘यादगार पल’ बताया। अब सवाल यह है कि क्या यह मुलाकात केवल एक शिष्टाचार भेंट थी या बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच इसके आगे भी कोई बड़ा राजनीतिक संदेश निकलता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 सांसदों के गुट और NDA के बीच बढ़ती नजदीकी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में इस गुट की भूमिका और सायोनी घोष की राजनीतिक दिशा पर नजर रहेगी।  

surbhi अगस्त 8, 2026 0
Shashi Tharoor discusses CJP protest effectiveness on paper leaks compared with Congress student outreach campaign
पेपर लीक आंदोलन पर शशि थरूर का बड़ा बयान, बोले- CJP का प्रदर्शन कांग्रेस से ज्यादा असरदार रहा

नई दिल्ली: प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और युवाओं के मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलनों के बीच कांग्रेस नेता शशि थरूर के बयान ने पार्टी की रणनीति पर नई बहस छेड़ दी है। थरूर ने स्वीकार किया कि जंतर-मंतर पर CJP की ओर से किया गया विरोध प्रदर्शन कांग्रेस के छात्र संपर्क अभियान ‘छात्रों की गूंज’ की तुलना में ज्यादा प्रभावी रहा। थरूर के इस बयान को कांग्रेस के लिए आत्ममंथन के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने माना कि जिन मुद्दों को CJP ने अपने आंदोलन में प्रमुखता से उठाया, कांग्रेस भी उन्हें पहले से उठा रही थी। इसके बावजूद पार्टी का अभियान युवाओं और छात्रों के बीच वैसा प्रभाव नहीं बना सका, जैसा CJP के आंदोलन ने बनाया। ‘हमने पहले ही उठाए थे ये मुद्दे’ शशि थरूर के मुताबिक, जंतर-मंतर पर CJP ने जिन मुद्दों को लेकर आवाज उठाई, वे कांग्रेस के छात्र संपर्क अभियान का भी हिस्सा थे। उन्होंने बताया कि ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों से पेपर लीक जैसे मुद्दों पर बातचीत की थी। थरूर ने यह सवाल भी उठाया कि जब कांग्रेस पहले से इन मुद्दों को उठा रही थी, तो आखिर CJP का आंदोलन ज्यादा प्रभावशाली क्यों साबित हुआ। उनके अनुसार, पार्टी को इस अंतर को समझने और अपनी रणनीति की समीक्षा करने की जरूरत है। कांग्रेस के लिए बड़ा सवाल: युवाओं तक क्यों नहीं पहुंचा संदेश? थरूर का बयान कांग्रेस के सामने एक अहम राजनीतिक चुनौती को रेखांकित करता है। युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सरकारी भर्ती जैसे मुद्दे बेहद संवेदनशील हैं। कांग्रेस ने इन मुद्दों को राजनीतिक मंचों पर उठाया है, लेकिन थरूर के मुताबिक पार्टी को यह समझना होगा कि उसका संदेश जमीनी स्तर पर युवाओं तक उतनी मजबूती से क्यों नहीं पहुंच पाया। उन्होंने संकेत दिया कि कांग्रेस को यह भी विचार करना चाहिए कि क्या वह छात्रों की वास्तविक चिंताओं को पर्याप्त प्रभावी ढंग से सुन और समझ पा रही है या नहीं। साथ ही, Gen Z की राजनीतिक सोच और विरोध के नए तरीकों को समझना भी पार्टी के लिए जरूरी हो सकता है। 20 जून से CJP का आंदोलन CJP ने NEET-UG 2026 में कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर 20 जून से विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। आंदोलन में छात्रों की मांगों के साथ जवाबदेही और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। धीरे-धीरे यह आंदोलन व्यापक छात्र विरोध के रूप में सामने आया और इसे ‘Gen Z Protest’ के तौर पर भी चर्चा मिली। आंदोलन को शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन भी मिला। आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक ने छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। इसके बाद कई छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता भी इस अभियान से जुड़े। संसद मार्च के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद CJP ने 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान किया था। आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हुआ। विपक्षी दलों ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। इसी दौरान पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया। सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच छात्रों की मांगों को लेकर देशभर में चर्चा बढ़ी। थरूर का बयान कांग्रेस के लिए क्यों अहम? शशि थरूर का बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने अपनी ही पार्टी के अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठाया है। आम तौर पर राजनीतिक दल अपने अभियानों को सफल बताने की कोशिश करते हैं, लेकिन थरूर ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि एक छात्र आंदोलन उसी मुद्दे पर कांग्रेस से ज्यादा असर पैदा करने में सफल रहा। इससे कांग्रेस के सामने दो बड़े सवाल खड़े होते हैं। पहला, युवाओं के मुद्दों को उठाने के लिए पार्टी की रणनीति कितनी प्रभावी है? दूसरा, क्या कांग्रेस बदलती युवा राजनीति और सोशल मीडिया आधारित आंदोलनों की भाषा को पर्याप्त तेजी से समझ पा रही है? आंदोलन से आगे की राजनीति पर नजर पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा देश के लाखों छात्रों और अभ्यर्थियों से जुड़ा है। ऐसे में यह सिर्फ एक राजनीतिक दल या संगठन का मुद्दा नहीं रह जाता। CJP के आंदोलन की प्रभावशीलता को लेकर थरूर की स्वीकारोक्ति कांग्रेस के लिए रणनीति बदलने का संकेत भी हो सकती है। अगर पार्टी युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहती है, तो केवल मुद्दे उठाना पर्याप्त नहीं होगा। उसे छात्रों के साथ लगातार संवाद, जमीनी संगठन और उनकी समस्याओं पर स्पष्ट राजनीतिक अभियान की जरूरत होगी। फिलहाल थरूर का बयान कांग्रेस के भीतर इस बहस को तेज कर सकता है कि पार्टी युवाओं की आवाज उठाने में पीछे क्यों रह गई और आने वाले समय में उसे अपनी रणनीति में क्या बदलाव करना चाहिए।  

surbhi अगस्त 8, 2026 0
Kiren Rijiju reacts to Rahul Gandhi’s women empowerment message and urges Congress to support women reservation bill
राहुल के ‘वूमेन पावर’ संदेश पर रिजिजू का कांग्रेस पर तंज, बोले- अब बिना शर्त महिला आरक्षण बिल का समर्थन करे पार्टी

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी के महिला सशक्तिकरण को लेकर दिए गए संदेश के बाद महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सियासी बहस फिर तेज हो गई है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट को साझा करते हुए पार्टी पर राजनीतिक तंज कसा और उम्मीद जताई कि कांग्रेस अब महिला आरक्षण विधेयक का बिना किसी शर्त के समर्थन करेगी। रिजिजू की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कांग्रेस ने राहुल गांधी का एक वीडियो साझा किया है, जिसमें उन्होंने भारतीय महिलाओं की ऊर्जा, क्षमता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को देश की प्रगति से जोड़ते हुए अपनी बात रखी। कांग्रेस ने शेयर किया राहुल गांधी का वीडियो कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी का एक वीडियो पोस्ट किया। इसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता महिलाओं की क्षमताओं और समाज में उनकी भूमिका को लेकर अपनी बात रखते दिखाई दे रहे हैं। राहुल गांधी का कहना है कि भारत की महिलाओं के भीतर मौजूद ऊर्जा और क्षमता को अभी पूरी तरह सामने आने का अवसर नहीं मिला है। उनके मुताबिक, महिलाओं को अपनी बात रखने, अपने सपने देखने और अपनी क्षमताओं के मुताबिक आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। राहुल ने अपने संदेश में महिला सशक्तिकरण को देश की प्रगति से जोड़ते हुए कहा कि महिलाओं की स्वतंत्र अभिव्यक्ति और भागीदारी के बिना भारत अपनी पूरी क्षमता हासिल नहीं कर सकता। राहुल के बयान को रिजिजू ने महिला आरक्षण बिल से जोड़ा राहुल गांधी के इस संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस के पोस्ट को साझा किया। उन्होंने इसे पार्टी की ओर से आया सकारात्मक संदेश बताया। रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी के महिलाओं को लेकर विचारों में बदलाव दिखाई दे रहा है। इसी आधार पर उन्होंने उम्मीद जताई कि कांग्रेस अब महिला आरक्षण विधेयक का बिना किसी शर्त के समर्थन करेगी। रिजिजू की टिप्पणी सीधे तौर पर कांग्रेस के महिला सशक्तिकरण के राजनीतिक संदेश को संसद में महिला प्रतिनिधित्व के मुद्दे से जोड़ती है। महिला आरक्षण पर फिर आमने-सामने सत्ता पक्ष और विपक्ष महिला आरक्षण का मुद्दा भारतीय राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी प्राथमिकताएं और रणनीतियां रही हैं। रिजिजू के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है। एक ओर कांग्रेस महिलाओं की क्षमता, स्वतंत्र अभिव्यक्ति और राजनीतिक भागीदारी की बात कर रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी नेतृत्व इस राजनीतिक संदेश को संसद में महिला प्रतिनिधित्व से जोड़कर कांग्रेस से स्पष्ट समर्थन की मांग कर रहा है। राहुल गांधी ने महिलाओं की अभिव्यक्ति को बताया जरूरी राहुल गांधी के अनुसार, किसी भी देश की वास्तविक क्षमता तभी सामने आती है, जब उसकी आधी आबादी को अपनी प्रतिभा और विचारों को खुलकर सामने रखने का अवसर मिले। उन्होंने महिलाओं की ऊर्जा को समाज और देश की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि महिलाओं की आवाज और उनकी स्वतंत्र अभिव्यक्ति को दबाकर कोई देश पूरी क्षमता से आगे नहीं बढ़ सकता। उनका यह संदेश कांग्रेस की महिला सशक्तिकरण से जुड़ी राजनीतिक लाइन का हिस्सा माना जा रहा है। रिजिजू के बयान का राजनीतिक संदेश क्या है? रिजिजू का बयान केवल राहुल गांधी के वीडियो पर प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि इसे कांग्रेस को राजनीतिक रूप से घेरने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। उन्होंने राहुल गांधी के महिला सशक्तिकरण वाले विचारों को आधार बनाकर कांग्रेस से यह सवाल उठाया है कि यदि पार्टी महिलाओं को राजनीतिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की बात करती है, तो उसे महिला आरक्षण विधेयक पर भी स्पष्ट और बिना शर्त समर्थन देना चाहिए। इस तरह महिला सशक्तिकरण का मुद्दा एक बार फिर संसद और राजनीति के केंद्र में आता दिखाई दे रहा है। अब आगे क्या? फिलहाल रिजिजू के बयान पर कांग्रेस की ओर से इस विशेष टिप्पणी का जवाब सामने नहीं आया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस महिला आरक्षण विधेयक को लेकर अपने रुख को किस तरह स्पष्ट करती है। राजनीतिक रूप से देखें तो महिला सशक्तिकरण और संसद में महिलाओं की भागीदारी आने वाले समय में दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमों के लिए अहम मुद्दा बन सकती है। राहुल गांधी का संदेश और रिजिजू की प्रतिक्रिया इसी व्यापक राजनीतिक बहस की अगली कड़ी है।  

surbhi अगस्त 8, 2026 0
Opposition leaders, including Rahul Gandhi and Priyanka Gandhi, march inside Parliament premises demanding Amit Shah's resignation during the Monsoon Session.
संसद परिसर में विपक्ष का मार्च, अमित शाह के इस्तीफे की मांग; कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी

संसद के मानसून सत्र का 13वां दिन भी हंगामेदार रहने के आसार हैं। मंगलवार को हुए तीखे विरोध-प्रदर्शन के बाद बुधवार (5 अगस्त) को भी विपक्ष केंद्र सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने संसद परिसर में मार्च निकालकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। विपक्ष का आरोप है कि छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई, राम मंदिर चढ़ावा मामले और अन्य मुद्दों पर सरकार जवाब देने से बच रही है। राहुल-प्रियंका समेत विपक्ष का संसद परिसर में मार्च संसद परिसर में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई विपक्षी सांसदों ने प्रेरणा स्थल स्थित गांधी प्रतिमा से मकर द्वार तक मार्च निकाला। इस दौरान विपक्ष ने 20 जुलाई को छात्र संगठन CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई, अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा में कथित गड़बड़ी और अन्य मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। विपक्षी नेताओं ने इन मामलों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की और सरकार से सदन में जवाब देने की मांग की। जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन पर चर्चा की मांग कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर तत्काल चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए और गृह मंत्री अमित शाह को सदन में विस्तृत बयान देना चाहिए। दल-बदल कानून पर नई बहस की मांग कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया। उन्होंने अवसरवाद से प्रेरित बड़े पैमाने पर होने वाले राजनीतिक दल-बदल पर चिंता जताते हुए नए और अधिक प्रभावी दल-बदल विरोधी कानून पर चर्चा कराने की मांग की। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए पर्याप्त नहीं है। E20 पेट्रोल के मुद्दे पर राज्यसभा में नोटिस आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने नियम 267 के तहत नोटिस देकर E20 पेट्रोल को अनिवार्य रूप से लागू किए जाने के मुद्दे पर चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा कि इस फैसले से उपभोक्ताओं के अधिकार, वाहन मालिकों की चिंताएं और आम जनता पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव जैसे गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिन पर सरकार को सदन में जवाब देना चाहिए। आज भी हंगामे के आसार मानसून सत्र के दौरान विपक्ष लगातार सरकार को कई मुद्दों पर घेर रहा है। ऐसे में बुधवार को भी लोकसभा और राज्यसभा में तीखी नोकझोंक और हंगामे की संभावना बनी हुई है। विपक्ष छात्र आंदोलन, राम मंदिर चढ़ावा मामले, E20 पेट्रोल नीति और दल-बदल कानून जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है, जबकि सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी।  

kalpana अगस्त 5, 2026 0
Senior Congress leader Salman Khurshid speaking at a book launch event in New Delhi
बाबरी विध्वंस पर सलमान खुर्शीद का बड़ा बयान, बोले- रणनीतिक संयम कई बार, बाद में गलत भी साबित हो सकता है

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि 1992 की यह घटना देश के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। नई दिल्ली में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में उन्होंने बाबरी विध्वंस को देश के शरीर पर एक "दर्दनाक और बदसूरत फोड़े" की संज्ञा दी और कहा कि सरकारें कई बार परिस्थितियों को देखते हुए रणनीतिक संयम का रास्ता अपनाती हैं, लेकिन समय बीतने के बाद वही फैसले गलत भी लग सकते हैं। सलमान खुर्शीद लेखक और वकील जावेद गाया की पुस्तक "हार्टलैंड राइजिंग: द मेकिंग ऑफ मेजॉरिटेरियन इंडिया" के विमोचन कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने बाबरी मस्जिद विध्वंस, 2002 के गुजरात दंगे, देश के विभाजन और उत्तर प्रदेश की राजनीति जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी। बाबरी मस्जिद विध्वंस पर क्या बोले सलमान खुर्शीद? कार्यक्रम की संचालक मालविका राजकोटिया ने सलमान खुर्शीद से पूछा कि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव की सरकार ने रणनीतिक संयम क्यों अपनाया था। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि किसी एक घटना को अलग करके देखने पर वह बहुत बड़ी, दर्दनाक और भयावह दिखाई देती है, लेकिन समय के साथ परिस्थितियों को व्यापक संदर्भ में समझना भी जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि पीछे मुड़कर देखने पर यह कहना आसान होता है कि कौन-सा फैसला सही था और कौन-सा गलत। लेकिन जब कोई सरकार सत्ता में होती है, तब उसे उसी समय उपलब्ध परिस्थितियों और सीमित विकल्पों के आधार पर निर्णय लेना पड़ता है। 'संयम नहीं रखते तो हालात और ज्यादा बिगड़ सकते थे' सलमान खुर्शीद ने कहा कि उस समय कई लोगों की राय थी कि रणनीतिक संयम ही सबसे बेहतर विकल्प था। उनका मानना था कि अगर सरकार ने तत्काल सख्त कार्रवाई की होती, तो देश में हालात और अधिक बिगड़ सकते थे और बड़े स्तर पर हिंसा फैल सकती थी। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि संभव है, जिस रणनीतिक संयम को उस समय सही समझा गया, वही बाद में हालात को और गंभीर बनाने का कारण भी बना हो। उन्होंने कहा कि इतिहास का मूल्यांकन हमेशा बाद में होता है और समय बीतने के बाद फैसलों पर अलग नजरिया बन सकता है। देश के विभाजन का भी दिया उदाहरण अपने जवाब के दौरान सलमान खुर्शीद ने भारत के विभाजन का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि आज भी कई लोग देश के विभाजन के लिए जवाहरलाल नेहरू को जिम्मेदार ठहराते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उस समय यह फैसला लिया जा सकता था कि विभाजन नहीं होगा, भले ही देश गृहयुद्ध की स्थिति में पहुंच जाए। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठी सरकारों के सामने कई कठिन परिस्थितियां होती हैं और उन्हें उपलब्ध विकल्पों में से सबसे उपयुक्त फैसला लेना पड़ता है। बाद में उन फैसलों की आलोचना करना अपेक्षाकृत आसान होता है। उत्तर प्रदेश की राजनीति को बताया सबसे अहम उत्तर प्रदेश की राजनीति पर बोलते हुए सलमान खुर्शीद ने कहा कि देश के लोकतांत्रिक भविष्य की दिशा काफी हद तक उत्तर प्रदेश तय करेगा। उनके मुताबिक यदि भारत को संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना है, तो इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश से हो सकती है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का मानना है कि देश में राजनीतिक बदलाव संभव नहीं है, जबकि कुछ लोग इसे पूरी तरह संभव मानते हैं। वहीं, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि बदलाव भारतीय जनता पार्टी के भीतर से आएगा, जबकि अन्य का कहना है कि उत्तर प्रदेश में गठबंधन की राजनीति भविष्य की दिशा तय कर सकती है। कई अहम मुद्दों पर रखी राय कार्यक्रम के दौरान सलमान खुर्शीद ने बाबरी मस्जिद विध्वंस के अलावा 2002 के गुजरात दंगों, भारत के विभाजन और मौजूदा राजनीतिक माहौल पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि इतिहास की घटनाओं को केवल एक नजरिए से नहीं देखा जा सकता। किसी भी बड़े फैसले का आकलन उस समय की परिस्थितियों, चुनौतियों और उपलब्ध विकल्पों को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद, संवैधानिक मूल्यों और संस्थाओं की मजबूती सबसे महत्वपूर्ण है। सरकारों के फैसलों का मूल्यांकन समय के साथ बदल सकता है, लेकिन इतिहास से सीख लेकर भविष्य की दिशा तय करना अधिक जरूरी है।  

kalpana अगस्त 5, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi attends the NDA parliamentary party's Mangal Milan meeting during the Monsoon Session 2026.
Parliament Live: संसद में NDA संसदीय दल की 'मंगल मिलन' बैठक शुरू, पीएम मोदी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद

Parliament Monsoon Session 2026: संसद के मानसून सत्र के बीच मंगलवार को एनडीए (NDA) संसदीय दल की साप्ताहिक बैठक 'मंगल मिलन' संसद की लाइब्रेरी बिल्डिंग में शुरू हो गई। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों और एनडीए के वरिष्ठ सांसदों ने हिस्सा लिया। माना जा रहा है कि बैठक में मानसून सत्र की रणनीति, विपक्ष के हमलों का जवाब और आगामी विधायी कार्यों पर चर्चा की जाएगी। पीएम मोदी की मौजूदगी में रणनीति पर मंथन बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए संसदीय दल की इस अहम बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए। संसद के मौजूदा सत्र में सरकार की रणनीति, विभिन्न विधेयकों को पारित कराने की तैयारी और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। कई वरिष्ठ नेता बैठक में शामिल बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी पहुंचे। उनके साथ केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, बीजेपी सांसद विनोद तावड़े और संजय जायसवाल समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। सभी नेताओं ने संसद परिसर स्थित जीएमसी बालयोगी ऑडिटोरियम और लाइब्रेरी बिल्डिंग में आयोजित बैठक में हिस्सा लिया। विपक्ष के हंगामे के आसार संसद का मानसून सत्र मंगलवार को भी हंगामेदार रहने के आसार हैं। विपक्ष राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले और NEET आंदोलन के दौरान छात्रों पर पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में एनडीए की यह बैठक सरकार की संसदीय रणनीति तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पहली बार बैठक में पहुंचे सुदीप बंद्योपाध्याय एनसीपीआई सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय भी संसद परिसर स्थित लाइब्रेरी बिल्डिंग में आयोजित 'मंगल मिलन' बैठक में शामिल होने पहुंचे। उन्होंने कहा कि वह पहली बार एनडीए संसदीय दल की बैठक में शामिल हो रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि वह देश के वरिष्ठ सांसदों में से एक हैं और उनकी पार्टी पूरी तरह एकजुट है। अब संसद की कार्यवाही के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों पर तीखी बहस और हंगामे की संभावना बनी हुई है।  

kalpana अगस्त 4, 2026 0
BJP MP Sakshi Maharaj speaks during an event while commenting on Congress leader Rahul Gandhi.
राहुल गांधी पर साक्षी महाराज का विवादित बयान, 'विदेशी मूल' की टिप्पणी से गरमाई सियासत

Sakshi Maharaj on Rahul Gandhi: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद साक्षी महाराज ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने राहुल गांधी की नागरिकता और उनकी मां सोनिया गांधी के विदेशी मूल का जिक्र करते हुए कहा कि "विदेशी महिला से पैदा हुआ बालक कभी राष्ट्रभक्त नहीं हो सकता और उसे देश की बागडोर नहीं दी जा सकती।" उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। 'विदेशी मूल' को लेकर की टिप्पणी साक्षी महाराज ने अपने बयान में राहुल गांधी की मां सोनिया गांधी के विदेशी मूल का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशी महिला से जन्मा व्यक्ति देश का सच्चा राष्ट्रभक्त नहीं हो सकता। उन्होंने शायराना अंदाज में कहा, "दिल बहलाने के लिए गालिब ये ख्याल अच्छा है," और राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की चर्चाओं को केवल कल्पना बताया। उन्होंने कहा कि देश का नेतृत्व ऐसे व्यक्ति के हाथों में नहीं होना चाहिए, जिसकी पृष्ठभूमि पर सवाल उठते हों। हालांकि, उन्होंने अपने बयान के समर्थन में कोई कानूनी या संवैधानिक आधार प्रस्तुत नहीं किया। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो साक्षी महाराज का यह बयान सामने आने के बाद इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। कई लोगों ने इस टिप्पणी का समर्थन किया, जबकि विपक्षी नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स के एक वर्ग ने इसे व्यक्तिगत और आपत्तिजनक टिप्पणी बताते हुए आलोचना की। राजनीतिक माहौल हुआ गर्म बीजेपी सांसद के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस और बीजेपी के बीच पहले से जारी राजनीतिक टकराव के बीच इस बयान ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान आने वाले समय में दोनों दलों के बीच जुबानी जंग को और तेज कर सकते हैं। पहले भी विवादों में रहे हैं साक्षी महाराज यह पहली बार नहीं है जब साक्षी महाराज अपने बयानों को लेकर चर्चा में आए हों। इससे पहले भी वे कई बार अपने विवादित और तीखे राजनीतिक बयानों के कारण सुर्खियों में रह चुके हैं। इस बार राहुल गांधी और उनके परिवार को लेकर की गई टिप्पणी ने एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।  

kalpana अगस्त 3, 2026 0
Abhijit Deepke explains scholarship and education loan used for US studies
अमेरिका में पढ़ाई का खर्च कहां से आया? अभिजीत दीपके ने दी सफाई, बोले- स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन से पूरी हुई पढ़ाई

Abhijit Deepke News: कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अमेरिका में अपनी पढ़ाई के खर्च को लेकर उठ रहे सवालों पर पहली बार विस्तार से प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनकी उच्च शिक्षा का खर्च बोस्टन यूनिवर्सिटी से मिली स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन के जरिए पूरा हुआ था। उन्होंने उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें विदेश में पढ़ाई के लिए परिवार की अज्ञात संपत्ति या आर्थिक स्रोत का इस्तेमाल किए जाने की बात कही जा रही थी। RTI एक्टिविस्ट की शिकायत के बाद सामने आई सफाई दरअसल, सूरत के रहने वाले RTI एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने महाराष्ट्र सरकार और कई अन्य सरकारी विभागों को शिकायत भेजकर अभिजीत दीपके के परिवार की आर्थिक स्थिति की जांच कराने की मांग की थी। शिकायत में कहा गया था कि अमेरिका में हुई उनकी पढ़ाई के खर्च और उसके वित्तीय स्रोत की जांच की जानी चाहिए। अमित तिवारी ने अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके की आर्थिक स्थिति की भी जांच की मांग की है। भगवानराव दीपके महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MIDC) में जूनियर इंजीनियर के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। 'स्कॉलरशिप और लोन से हुई पढ़ाई' वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त को दिए इंटरव्यू में अभिजीत दीपके ने स्पष्ट कहा कि उनकी पढ़ाई पूरी तरह वैध तरीके से हुई और इसके लिए उन्हें विश्वविद्यालय से आर्थिक सहायता मिली थी। उन्होंने कहा, "मेरी पढ़ाई का खर्च बोस्टन यूनिवर्सिटी की ओर से मिली स्कॉलरशिप से पूरा हुआ था। इसके अलावा मैंने एजुकेशन लोन भी लिया था, जिसे अब मुझे चुकाना है।" दीपके ने कहा कि उनकी शिक्षा को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, वे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और बिना किसी सबूत के उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। परिवार की संपत्ति को लेकर भी उठे सवाल शिकायत में अभिजीत दीपके के परिवार की आय और संपत्ति की जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि विदेश में उच्च शिक्षा के लिए बड़ी रकम खर्च होती है, इसलिए इसके स्रोत की पारदर्शी जांच होनी चाहिए। हालांकि, इस मामले में अब तक संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। CJP की फंडिंग पर भी दिया जवाब इंटरव्यू के दौरान अभिजीत दीपके ने अपनी पार्टी कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) की फंडिंग को लेकर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि पार्टी किसी बड़े उद्योगपति या कॉर्पोरेट फंडिंग पर निर्भर नहीं रहेगी। उन्होंने बताया कि पार्टी क्राउडफंडिंग मॉडल अपनाएगी, जिसमें आम नागरिक स्वेच्छा से आर्थिक सहयोग करेंगे। उन्होंने दावा किया कि पार्टी की पूरी फंडिंग प्रक्रिया पारदर्शी होगी और हर आर्थिक योगदान का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाएगा। राजनीतिक हलकों में तेज हुई चर्चा अभिजीत दीपके की सफाई ऐसे समय आई है जब उनकी पार्टी लगातार चर्चा में बनी हुई है। अमेरिका में पढ़ाई के खर्च और पार्टी की फंडिंग को लेकर उठे सवालों के बाद अब यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। हालांकि, दीपके का कहना है कि उनकी शिक्षा और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर फैलाए जा रहे सभी भ्रम का जवाब तथ्यों के साथ दिया जाएगा।  

kalpana अगस्त 3, 2026 0
Sanjay Raut criticizes Amit Shah over Jammu and Kashmir Kulgam terror attack
'गृहमंत्रालय नहीं, गैंग चला रहे हैं', अमित शाह पर संजय राउत का हमला; कुलगाम आतंकी हमले पर मांगा इस्तीफा

Sanjay Raut On Amit Shah: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पुणे दौरे, संसद में 'वंदे मातरम्' पर चर्चा और जम्मू-कश्मीर में हालिया आतंकी घटनाओं को लेकर राउत ने सरकार को घेरते हुए गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की। अमित शाह के पुणे दौरे पर साधा निशाना मीडिया से बातचीत में संजय राउत ने कहा, "रात के अंधेरे में गृह मंत्री पुणे आए। भारतीय जनता पार्टी ने उनके स्वागत में बड़े-बड़े बैनर लगाए कि देश के चाणक्य का पुणे में आगमन हुआ है।" उन्होंने आगे कहा, "यह सवाल गृह मंत्री से पूछा जाना चाहिए। वह गृह मंत्रालय नहीं चला रहे हैं, बल्कि गैंग चला रहे हैं। वह व्यापारियों और गुंडों के गैंग को चला रहे हैं और विपक्ष को खत्म करने का काम कर रहे हैं।" जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा पर उठाए सवाल राउत ने जम्मू-कश्मीर में हालिया आतंकी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि निर्दोष लोगों की मौत और आतंकियों की घुसपैठ के लिए गृह मंत्री जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा, "जम्मू-कश्मीर में निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं, आतंकी लगातार घुसपैठ कर रहे हैं। इसकी पूरी जिम्मेदारी देश के गृह मंत्री की है।" 'वंदे मातरम्' पर सरकार को घेरा संजय राउत ने संसद में 'वंदे मातरम्' पर हुई चर्चा का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब इस विषय पर चर्चा हो रही थी, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सदन में मौजूद नहीं थे। उन्होंने कहा, "वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष सत्र बुलाया गया, लेकिन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री चर्चा के दौरान सदन में नहीं थे। क्या यह वंदे मातरम् का अपमान नहीं है?" राउत ने आगे कहा कि यदि सरकार राष्ट्रभक्ति की बात करती है, तो उसे ऐसे महत्वपूर्ण अवसर पर सदन में उपस्थित रहना चाहिए था। कुलगाम आतंकी हमले पर मांगा इस्तीफा जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हुए आतंकी हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने कहा कि इस मामले पर गृह मंत्री को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमने पुलवामा देखा, पहलगाम देखा और अब कुलगाम में फिर लोग मारे गए। इसके बावजूद गृह मंत्री इस पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। अब उन्हें सरकार में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।" संजय राउत के इन बयानों के बाद एक बार फिर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। फिलहाल गृह मंत्री अमित शाह या भारतीय जनता पार्टी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

kalpana अगस्त 1, 2026 0
Halterneck tops styled with jeans, cargo pants and skirts for a glamorous Y2K inspired summer fashion look
टैंक टॉप से हो गए हैं बोर? इस सीजन हॉल्टरनेक टॉप से पाएं अपने वॉर्डरोब को Y2K ग्लैमर का ट्विस्ट

गर्मियों में टैंक टॉप और स्पेगेटी-स्ट्रैप कैमिसोल भले ही सबसे आसान फैशन विकल्प हों, लेकिन लगातार इन्हीं बेसिक्स को पहनते-पहनते अगर आपका वॉर्डरोब बोरिंग लगने लगा है, तो अब स्टाइल बदलने का समय है। इस सीजन फैशन की दुनिया में हॉल्टरनेक टॉप एक बार फिर जोरदार वापसी कर रहा है। कंधों को खुला रखने वाली इसकी खास नेकलाइन साधारण आउटफिट में भी तुरंत ग्लैमर और पर्सनैलिटी जोड़ देती है। खास बात यह है कि इसे स्टाइल करने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं पड़ती। सिल्क स्कर्ट हो, बैगी बास्केटबॉल शॉर्ट्स हों या स्लाउची कार्गो ट्राउजर—हॉल्टरनेक लगभग हर तरह के बॉटम के साथ आसानी से स्टाइल किया जा सकता है। Y2K फैशन से है खास कनेक्शन हॉल्टरनेक टॉप का आकर्षण सिर्फ इसके मॉडर्न लुक तक सीमित नहीं है। इसके पीछे Y2K दौर की मजबूत फैशन नॉस्टैल्जिया भी जुड़ी हुई है। 1990 के दशक के आखिर और 2000 के शुरुआती वर्षों में हॉल्टरनेक फैशन का एक अहम हिस्सा बन चुका था। Chloé में Stella McCartney के दौर के दौरान स्कार्फ-स्टाइल और राइनस्टोन हॉल्टरनेक रनवे पर खूब नजर आए। उस समय Charlize Theron जैसे सितारों ने भी इस स्टाइल को अपनाया। इसके बाद Paris Hilton के 2000s वाले ग्लैमरस फैशन ने हॉल्टरनेक को पार्टी और नाइट-आउट स्टाइल का हिस्सा बना दिया। वहीं, 2002 की फिल्म Bend It Like Beckham में Keira Knightley के किरदार द्वारा पहना गया मेटैलिक टाइगर-स्ट्राइप्ड काउल-नेक हॉल्टरनेक आज भी इस ट्रेंड के यादगार लुक्स में गिना जाता है। अब नए अंदाज में लौट रहा है हॉल्टरनेक आज का हॉल्टरनेक अपने पुराने Y2K अवतार की तुलना में थोड़ा ज्यादा मिनिमल और सॉफिस्टिकेटेड नजर आ रहा है। जहां पहले इसमें ग्लिटर, बीड्स और स्टड्स का भरपूर इस्तेमाल होता था, वहीं अब डिजाइन ज्यादा साफ-सुथरे और पहनने में आसान हैं। रेड कार्पेट पर भी इस ट्रेंड की वापसी दिखाई दे रही है। Zoë Kravitz ने Saint Laurent के स्लिंकी हॉल्टरनेक गाउन में इस सिल्हूट को अपनाया, जबकि Alexa Demie Chanel के LBD में हॉल्टरनेक स्टाइल को एक मॉडर्न और ग्लैमरस रूप देती नजर आईं। इससे साफ है कि हॉल्टरनेक अब सिर्फ Y2K nostalgia तक सीमित नहीं है। यह मौजूदा फैशन ट्रेंड में भी अपनी जगह बना चुका है। रोजमर्रा के लुक को भी बना सकता है खास हॉल्टरनेक की सबसे बड़ी खासियत इसकी versatility है। इसे केवल पार्टी या नाइट-आउट के लिए पहनना जरूरी नहीं है। अगर आप कैजुअल लुक चाहती हैं, तो हॉल्टरनेक टॉप को बैगी जींस, कार्गो पैंट या शॉर्ट्स के साथ पेयर किया जा सकता है। वहीं, शाम की आउटिंग के लिए इसे सिल्क या फ्लोई स्कर्ट के साथ स्टाइल करके ज्यादा ग्लैमरस लुक पाया जा सकता है। यानी जिस तरह एक बेसिक टैंक टॉप बिना ज्यादा सोचे पहना जा सकता है, हॉल्टरनेक भी लगभग उतना ही आसान विकल्प है, लेकिन इसका प्रभाव कहीं ज्यादा स्टाइलिश दिखाई देता है। सेलिब्रिटी स्टाइल से लें इंस्पिरेशन हॉल्टरनेक की वापसी को सेलिब्रिटी फैशन भी मजबूती दे रहा है। Zoë Kravitz और Alexa Demie जैसे स्टार्स के रेड कार्पेट लुक्स दिखाते हैं कि यह नेकलाइन आज के मिनिमल लेकिन ग्लैमरस फैशन के साथ कितनी आसानी से फिट हो सकती है। अगर आप अपने समर वॉर्डरोब में बिना बहुत ज्यादा बदलाव किए कुछ नया जोड़ना चाहती हैं, तो हॉल्टरनेक टॉप एक आसान विकल्प हो सकता है। इस सीजन कैसे अपनाएं हॉल्टरनेक ट्रेंड? हॉल्टरनेक को अपने स्टाइल में शामिल करने के कुछ आसान तरीके हैं: कैजुअल डे लुक: हॉल्टरनेक टॉप के साथ बैगी जींस या कार्गो पैंट पहनें। नाइट आउट: स्लिंकी हॉल्टरनेक को मिनी या सिल्क स्कर्ट के साथ पेयर करें। Y2K लुक: राइनस्टोन, स्टडेड या मेटैलिक हॉल्टरनेक के साथ लो-राइज बॉटम चुनें। मिनिमल स्टाइल: सिंपल हॉल्टरनेक को न्यूट्रल ट्राउजर और मिनिमल एक्सेसरीज के साथ पहनें। फेस्टिव या पार्टी लुक: ग्लैमरस हॉल्टरनेक को स्टेटमेंट ज्वेलरी और हील्स के साथ स्टाइल करें। वर्तमान फैशन ट्रेंड में हॉल्टरनेक की वापसी उन लोगों के लिए खास तौर पर दिलचस्प है, जो अपने रोजमर्रा के वॉर्डरोब में बिना ज्यादा मेहनत किए थोड़ा ग्लैमर जोड़ना चाहते हैं। यह टैंक टॉप की तरह आसान है, लेकिन इसकी shoulder-baring neckline पूरे लुक को ज्यादा considered और fashion-forward बना देती है। अगर इस सीजन आपका वॉर्डरोब आपको नीरस लगने लगा है, तो शायद आपको नए कपड़ों की नहीं, सिर्फ एक नए सिल्हूट की जरूरत है—और हॉल्टरनेक वही छोटा लेकिन असरदार बदलाव हो सकता है।  

surbhi अगस्त 1, 2026 0
Opposition MPs stage a symbolic protest over the Ram Mandir donation controversy in Parliament premises.
'मंदिर दान' प्रदर्शन पर घिरे पप्पू यादव, संसद परिसर में एक्टिंग के बाद थाने में दर्ज हुई शिकायत

Ram Mandir Donation Row: संसद परिसर में राम मंदिर के चंदे में कथित गड़बड़ी के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन करना पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को भारी पड़ता नजर आ रहा है। शुक्रवार (31 जुलाई) को संसद परिसर में किए गए उनके सांकेतिक प्रदर्शन को लेकर दिल्ली के जहांगीरपुरी थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया गया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। नुक्कड़ नाटक के जरिए किया था विरोध संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान राम मंदिर के चंदे में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाने के लिए नुक्कड़ नाटक (स्ट्रीट थिएटर) का सहारा लिया गया। प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव साधु के वेश में नजर आए। उनके सामने एक दानपात्र रखा गया था, जिसमें विपक्षी सांसदों ने सांकेतिक रूप से चढ़ावा डाला। इस प्रदर्शन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई सांसद भी शामिल हुए। जहांगीरपुरी थाने में दर्ज हुई शिकायत रिपोर्ट के अनुसार, सूर्य मैथिल नाम के व्यक्ति ने दिल्ली के जहांगीरपुरी थाने में पप्पू यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संसद परिसर में किए गए प्रदर्शन से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया गया। शिकायतकर्ता ने लगाए ये आरोप समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में शिकायतकर्ता सूर्य मैथिल ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव ने भगवा रंग का अपमान किया। उनका आरोप है कि भगवान रामलला विराजमान की तस्वीर को पैरों के नीचे रखा गया, जिससे सनातन समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस प्रदर्शन को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, डिंपल यादव, अवधेश प्रसाद और INDIA गठबंधन के अन्य सांसदों का समर्थन प्राप्त था। संसद परिसर में प्रदर्शन से मचा था सियासी घमासान शुक्रवार को संसद परिसर में हुए इस विरोध प्रदर्शन ने राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा बटोरी। विपक्ष ने राम मंदिर के चंदे में कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की, जबकि सत्तापक्ष ने प्रदर्शन के तरीके पर कड़ी आपत्ति जताई। फिलहाल पुलिस को शिकायत सौंप दी गई है। मामले में अब तक पप्पू यादव या उनके कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिकायत के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई और तथ्यों की जांच करेगी।  

kalpana अगस्त 1, 2026 0
Pappu Yadav dressed as a priest during Opposition protest over alleged Ram Mandir donation irregularities in Parliament
संसद परिसर में 'चढ़ावा चोरी' मामले पर अनोखा प्रदर्शन, पुजारी बने पप्पू यादव; राहुल गांधी ने दानपात्र में डाला चढ़ावा

Ram Mandir Donation Row: संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को राम मंदिर में कथित चढ़ावा गबन के मुद्दे पर विपक्ष ने अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव साधु-पुजारी के वेश में संसद परिसर पहुंचे और उनके सामने एक दानपात्र रखा गया। विपक्षी सांसदों ने इसमें सांकेतिक रूप से चढ़ावा डालकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। इस प्रदर्शन की सबसे अधिक चर्चा तब हुई जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी वहां पहुंचे और दानपात्र में पैसे डालकर प्रदर्शन का समर्थन किया। इस दौरान विपक्षी सांसदों ने "चढ़ावा चोर, गद्दी छोड़" के नारे लगाए और राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। दानपात्र से पैसे जेब में रखने की सांकेतिक एक्टिंग प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव ने व्यंग्यात्मक अंदाज में दानपात्र में रखे पैसों को अपनी जेब में रखने की सांकेतिक एक्टिंग भी की। इस प्रतीकात्मक प्रदर्शन के जरिए विपक्ष ने कथित चढ़ावा गबन के आरोपों को मुद्दा बनाते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की। इस दौरान विपक्षी सांसदों के बीच हल्का हंसी-मजाक भी देखने को मिला, लेकिन उनका मुख्य संदेश मामले की निष्पक्ष जांच की मांग रहा। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो संसद परिसर में हुए इस विरोध प्रदर्शन के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित आरोप करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े हैं, इसलिए पूरे मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक पुष्टि या जांच के अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आए हैं। ऐसे में आरोपों की सत्यता की पुष्टि होना बाकी है।  

kalpana जुलाई 31, 2026 0
Shehzad Poonawalla after changes to his X profile sparks speculation over BJP resignation
शहजाद पूनावाला ने दिया बीजेपी से इस्तीफा? X प्रोफाइल में बदलाव के बाद अटकलें तेज, आधिकारिक पुष्टि नहीं

Shehzad Poonawalla Resignation News: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे शहजाद पूनावाला को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर उनकी प्रोफाइल में हुए बदलाव के बाद उनके बीजेपी छोड़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, अब तक न तो बीजेपी और न ही शहजाद पूनावाला की ओर से इस्तीफे की कोई आधिकारिक पुष्टि की गई है। X प्रोफाइल से हटाया बीजेपी का जिक्र चर्चा की शुरुआत तब हुई जब शहजाद पूनावाला ने अपने X अकाउंट की प्रोफाइल अपडेट की। नई प्रोफाइल में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का कोई उल्लेख नहीं किया है। हालांकि, उन्होंने खुद को "Lifelong Follower of Prime Minister Narendra Modi" बताया है। प्रोफाइल में हुए इस बदलाव के बाद सोशल मीडिया पर उनके इस्तीफे को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाने लगे। सूत्रों के हवाले से इस्तीफे का दावा कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि शहजाद पूनावाला ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए बीजेपी नेतृत्व को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, शहजाद पूनावाला ने भी सार्वजनिक रूप से इस दावे की पुष्टि या खंडन नहीं किया है। ऐसे में फिलहाल इस्तीफे की खबर को आधिकारिक तौर पर पुष्टि किया गया घटनाक्रम नहीं माना जा सकता। 2017 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में हुए थे शामिल शहजाद पूनावाला ने वर्ष 2017 में कांग्रेस छोड़ दी थी। उस समय उन्होंने कांग्रेस के संगठनात्मक चुनावों और आंतरिक लोकतंत्र को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी सौंपी। टीवी डिबेट और राजनीतिक मुद्दों पर आक्रामक तरीके से पार्टी का पक्ष रखने वाले नेताओं में उनकी पहचान बनी। सोशल मीडिया पोस्ट से पहले भी दिए थे संकेत पिछले कुछ समय से शहजाद पूनावाला अपने X अकाउंट पर ऐसे वीडियो साझा कर रहे थे, जिन्हें सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने के संकेत के तौर पर देखा गया। उन्होंने अपने पुराने इंटरव्यू के वीडियो बिना किसी कैप्शन के पोस्ट किए, जिनमें वह राजनीति, सार्वजनिक जीवन और समाज सेवा को लेकर अपनी सोच रखते नजर आए। 'राजनीतिक लक्ष्य और चुनावी लक्ष्य अलग होते हैं' जनवरी 2025 के एक वीडियो क्लिप में शहजाद पूनावाला ने कहा था कि "राजनीतिक लक्ष्य और चुनावी लक्ष्य अलग-अलग होते हैं। यदि कोई सांसद या विधायक नहीं बनता, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह देश और समाज की सेवा नहीं कर सकता।" उन्होंने कहा था कि सार्वजनिक जीवन में योगदान देने के कई रास्ते होते हैं और राजनीति केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है। 2024 चुनाव को बताया था आखिरी चुनाव एक अन्य वीडियो में उन्होंने कहा था कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से अलग होने का फैसला कर लिया था। हालांकि, उन्होंने पश्चिम बंगाल, दिल्ली, हरियाणा, बिहार और महाराष्ट्र जैसे अहम चुनावों तक पार्टी के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि अब वह सार्वजनिक जीवन में किसी दूसरी भूमिका पर ध्यान देना चाहते हैं। आधिकारिक बयान का इंतजार फिलहाल शहजाद पूनावाला के बीजेपी छोड़ने की चर्चा सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में जरूर है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में उनके इस्तीफे को लेकर अंतिम स्थिति तभी स्पष्ट होगी, जब बीजेपी या स्वयं शहजाद पूनावाला इस संबंध में औपचारिक बयान जारी करेंगे।  

kalpana जुलाई 31, 2026 0
Rahul Gandhi responds to a journalist during the Monsoon Session of Parliament after being questioned about the student protest issue
Parliament Session: पत्रकार के सवाल पर राहुल गांधी का जवाब- "क्या आप BJP के हैं?"

संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार (31 जुलाई) को लोकसभा और राज्यसभा में कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होने की संभावना है. सरकार जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 और सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को सदन में पेश कर सकती है. वहीं, सत्र की शुरुआत से पहले और दौरान राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही. लोकसभा की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित शुक्रवार सुबह हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. इसके बाद सदन की बैठक फिर से शुरू होगी. पत्रकार के सवाल पर राहुल गांधी का पलटवार लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से CJP छात्र आंदोलन के दौरान घायल हुए दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिजनों की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर सवाल पूछा गया. जवाब देने के बजाय राहुल गांधी ने पत्रकार से ही पूछा, "क्या आप BJP के हैं?" उनके इस जवाब को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है. मोदी-शाह पर राहुल गांधी का हमला इससे पहले राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों नेता देश की नई पीढ़ी (Gen Z) को डराने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "आप भारत का अतीत हैं, इसलिए देश के भविष्य यानी युवाओं के साथ संभलकर पेश आइए." राहुल ने युवाओं के अधिकारों और उनके भविष्य की रक्षा की बात भी कही. झारखंड के भाजपा सांसदों का संसद में प्रदर्शन झारखंड के भाजपा सांसदों ने संसद परिसर में मौन प्रदर्शन किया. उन्होंने JPSC और JSSC-CGL भर्ती परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए CBI जांच की मांग की. सांसदों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और दोषियों पर कार्रवाई के लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है. निशिकांत दुबे का कांग्रेस पर हमला भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि "12 साल सत्ता से बाहर रहने के कारण कांग्रेस का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है." उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी लगातार बिना तथ्य के बयान दे रहे हैं. रामगोपाल यादव ने पीएम के संदेश का किया स्वागत समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने परीक्षा सुधार और पेपर लीक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि पेपर लीक में शामिल किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाना चाहिए. वहीं, वंदे मातरम् विधेयक पर उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए, क्योंकि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोग 'वंदे मातरम्' का नारा लगाते हुए जेल गए और बलिदान दिया.  

kalpana जुलाई 31, 2026 0
Mallikarjun Kharge and JP Nadda during a heated debate in the Rajya Sabha over the CJP protest
राज्यसभा में CJP प्रदर्शन पर घमासान, खरगे-नड्डा आमने-सामने; बोले- 'एक्टिविस्ट बनेंगे तो जेल जाना पड़ेगा'

संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को राज्यसभा में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया, जबकि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पुलिस की कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया। छात्रों पर कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगा राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जिन लोगों ने छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि पुलिस कार्रवाई का आदेश किसने दिया और जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। खरगे ने कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान किसी ने नियमों का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है, लेकिन छात्रों पर कथित अत्याचार करने वालों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान देने की मांग की। नड्डा बोले- कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हुई कार्रवाई सरकार की ओर से जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कानून के दायरे में रहकर सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह कानून-व्यवस्था से जुड़ा सामान्य मामला था और इसे अनावश्यक रूप से सनसनीखेज बनाया जा रहा है। नड्डा ने कहा, "जो भी छात्र एक्टिविस्ट बनेगा, उसे ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।" उन्होंने अपने छात्र जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान छात्र आंदोलन में हिस्सा लेने के कारण उन्हें भी कई बार गिरफ्तार किया गया था। आपातकाल का दिया उदाहरण जेपी नड्डा ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान लगाए गए आपातकाल में उन्हें कक्षा से गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलनों में शामिल लोगों को कई बार कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है और इसे असामान्य नहीं माना जाना चाहिए। विपक्ष पर लगाया मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप नड्डा ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस मामले को राजनीतिक रंग देकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की थी और इसे लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। राज्यसभा में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई, जबकि सरकार ने अपने रुख का बचाव करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है।  

kalpana जुलाई 29, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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JPSC नियुक्ति घोटाला: अभय तिवारी से जुड़े सिंडिकेट का नेटवर्क कई राज्यों तक, दर्जनों परीक्षाएं जांच के घेरे में

kalpana अगस्त 13, 2026 0