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Rijiju Urges Congress to Back Women Reservation Bill

राहुल के ‘वूमेन पावर’ संदेश पर रिजिजू का कांग्रेस पर तंज, बोले- अब बिना शर्त महिला आरक्षण बिल का समर्थन करे पार्टी

surbhi अगस्त 8, 2026 0
Kiren Rijiju reacts to Rahul Gandhi’s women empowerment message and urges Congress to support women reservation bill
Rahul Gandhi Women Empowerment Message

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी के महिला सशक्तिकरण को लेकर दिए गए संदेश के बाद महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सियासी बहस फिर तेज हो गई है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट को साझा करते हुए पार्टी पर राजनीतिक तंज कसा और उम्मीद जताई कि कांग्रेस अब महिला आरक्षण विधेयक का बिना किसी शर्त के समर्थन करेगी।

रिजिजू की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कांग्रेस ने राहुल गांधी का एक वीडियो साझा किया है, जिसमें उन्होंने भारतीय महिलाओं की ऊर्जा, क्षमता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को देश की प्रगति से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

कांग्रेस ने शेयर किया राहुल गांधी का वीडियो

कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी का एक वीडियो पोस्ट किया। इसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता महिलाओं की क्षमताओं और समाज में उनकी भूमिका को लेकर अपनी बात रखते दिखाई दे रहे हैं।

राहुल गांधी का कहना है कि भारत की महिलाओं के भीतर मौजूद ऊर्जा और क्षमता को अभी पूरी तरह सामने आने का अवसर नहीं मिला है। उनके मुताबिक, महिलाओं को अपनी बात रखने, अपने सपने देखने और अपनी क्षमताओं के मुताबिक आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।

राहुल ने अपने संदेश में महिला सशक्तिकरण को देश की प्रगति से जोड़ते हुए कहा कि महिलाओं की स्वतंत्र अभिव्यक्ति और भागीदारी के बिना भारत अपनी पूरी क्षमता हासिल नहीं कर सकता।

राहुल के बयान को रिजिजू ने महिला आरक्षण बिल से जोड़ा

राहुल गांधी के इस संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस के पोस्ट को साझा किया। उन्होंने इसे पार्टी की ओर से आया सकारात्मक संदेश बताया।

रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी के महिलाओं को लेकर विचारों में बदलाव दिखाई दे रहा है। इसी आधार पर उन्होंने उम्मीद जताई कि कांग्रेस अब महिला आरक्षण विधेयक का बिना किसी शर्त के समर्थन करेगी।

रिजिजू की टिप्पणी सीधे तौर पर कांग्रेस के महिला सशक्तिकरण के राजनीतिक संदेश को संसद में महिला प्रतिनिधित्व के मुद्दे से जोड़ती है।

महिला आरक्षण पर फिर आमने-सामने सत्ता पक्ष और विपक्ष

महिला आरक्षण का मुद्दा भारतीय राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी प्राथमिकताएं और रणनीतियां रही हैं।

रिजिजू के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है।

एक ओर कांग्रेस महिलाओं की क्षमता, स्वतंत्र अभिव्यक्ति और राजनीतिक भागीदारी की बात कर रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी नेतृत्व इस राजनीतिक संदेश को संसद में महिला प्रतिनिधित्व से जोड़कर कांग्रेस से स्पष्ट समर्थन की मांग कर रहा है।

राहुल गांधी ने महिलाओं की अभिव्यक्ति को बताया जरूरी

राहुल गांधी के अनुसार, किसी भी देश की वास्तविक क्षमता तभी सामने आती है, जब उसकी आधी आबादी को अपनी प्रतिभा और विचारों को खुलकर सामने रखने का अवसर मिले।

उन्होंने महिलाओं की ऊर्जा को समाज और देश की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि महिलाओं की आवाज और उनकी स्वतंत्र अभिव्यक्ति को दबाकर कोई देश पूरी क्षमता से आगे नहीं बढ़ सकता।

उनका यह संदेश कांग्रेस की महिला सशक्तिकरण से जुड़ी राजनीतिक लाइन का हिस्सा माना जा रहा है।

रिजिजू के बयान का राजनीतिक संदेश क्या है?

रिजिजू का बयान केवल राहुल गांधी के वीडियो पर प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि इसे कांग्रेस को राजनीतिक रूप से घेरने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

उन्होंने राहुल गांधी के महिला सशक्तिकरण वाले विचारों को आधार बनाकर कांग्रेस से यह सवाल उठाया है कि यदि पार्टी महिलाओं को राजनीतिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की बात करती है, तो उसे महिला आरक्षण विधेयक पर भी स्पष्ट और बिना शर्त समर्थन देना चाहिए।

इस तरह महिला सशक्तिकरण का मुद्दा एक बार फिर संसद और राजनीति के केंद्र में आता दिखाई दे रहा है।

अब आगे क्या?

फिलहाल रिजिजू के बयान पर कांग्रेस की ओर से इस विशेष टिप्पणी का जवाब सामने नहीं आया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस महिला आरक्षण विधेयक को लेकर अपने रुख को किस तरह स्पष्ट करती है।

राजनीतिक रूप से देखें तो महिला सशक्तिकरण और संसद में महिलाओं की भागीदारी आने वाले समय में दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमों के लिए अहम मुद्दा बन सकती है। राहुल गांधी का संदेश और रिजिजू की प्रतिक्रिया इसी व्यापक राजनीतिक बहस की अगली कड़ी है।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Bus falls from hillside onto road in Chamba, killing seven people and injuring eleven in tragic accident
चंबा में दर्दनाक बस हादसा: पहाड़ी से सड़क पर गिरी बस, 7 लोगों की मौत, 11 घायल

चंबा, हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में शनिवार सुबह एक भीषण बस हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। तीसा-बैरागढ़ मार्ग पर चालुज मोड़ के पास एक बस अचानक पहाड़ी से नीचे सड़क पर जा गिरी। हादसा इतना गंभीर था कि बस के चालक और परिचालक समेत 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 11 लोग घायल बताए जा रहे हैं। दुर्घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया और पुलिस-प्रशासन को सूचना दी। घायलों को कड़ी मशक्कत के बाद दुर्घटनाग्रस्त बस से बाहर निकाला गया और उपचार के लिए सिविल अस्पताल तीसा भेजा गया। तीसा-बैरागढ़ रोड पर चालुज मोड़ के पास हादसा प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक बस बैरागढ़ से चंबा की ओर जा रही थी। इसी दौरान चालुज मोड़ के पास वह अचानक अनियंत्रित होकर पहाड़ी से नीचे सड़क पर जा गिरी। दुर्घटनाग्रस्त बस शर्मा बस कंपनी की बताई जा रही है। बस का नंबर HP73A-2101 है। हादसे के समय बस में करीब 15 से 20 लोग सवार होने की जानकारी सामने आई है। दुर्घटना के बाद बस की स्थिति देखकर हादसे की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। तस्वीरों में बस के चारों पहिए ऊपर की ओर दिखाई दे रहे हैं, जबकि उसकी छत सड़क से लगी हुई थी। 7 लोगों की मौत, चालक और परिचालक भी शामिल प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे में चार पुरुषों और तीन महिलाओं की मौत हुई है। मृतकों में बस चालक रूप सिंह और परिचालक तेज सिंह भी शामिल हैं। मृतकों की पहचान जगदेव शर्मा (50), देस राज (35), तेज सिंह (39), जगदेई (24), हरदेई (43), नीलम (34) और रूप सिंह (35) के रूप में हुई है। 11 लोग घायल हादसे में घायल हुए 11 लोगों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। घायलों में बच्चे भी शामिल हैं। घायलों की पहचान कर्ण सिंह उर्फ साहिल (18), सुष्मिता (32), प्रियंका (5), हर्षु (4), पानो देवी (41), काव्या (11), धन्नी (40), धर्मों देवी (62), अप्रित मंगल (11), नेहा (10) और विजय कुमार (34) के रूप में बताई गई है। घायलों को अस्पताल में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशासन की ओर से घायलों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। पुलिस ने शुरू की जांच हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग, पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। राहत और बचाव अभियान चलाकर बस में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। तीसा थाना के एडिशनल एसएचओ अनुभव शर्मा ने हादसे की पुष्टि की है। दुर्घटना आखिर किस वजह से हुई, इसका अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। पहाड़ी इलाकों में सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल चंबा जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाएं अक्सर गंभीर रूप ले लेती हैं। तीखे मोड़, संकरी सड़कें, ढलान और मौसम संबंधी परिस्थितियां वाहन चालकों के लिए चुनौती पैदा करती हैं। ऐसे में इस हादसे के बाद एक बार फिर पहाड़ी मार्गों पर सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा, सड़क की स्थिति और यातायात नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान राहत एवं बचाव कार्य और घायलों के इलाज पर है। हादसे के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।  

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India officially identifies 27 strategic places in Arunachal Pradesh amid ongoing China border naming dispute
अरुणाचल के नक्शे पर भारत का बड़ा कदम, 27 रणनीतिक जगहों को मिली आधिकारिक पहचान; चीन की नाम बदलने की कोशिश का जवाब

नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत और चीन के बीच लंबे समय से जारी कूटनीतिक और रणनीतिक खींचतान के बीच भारत ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्र सरकार के अनुसार, सर्वे ऑफ इंडिया के अपडेटेड मैप में अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों को आधिकारिक तौर पर मानकीकृत नाम और पहचान दी गई है। इनमें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती गांव, पहाड़ी दर्रे, एक ग्लेशियल झील और युद्ध से जुड़े स्मारक शामिल हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों के नाम बदलकर उन्हें अपने नक्शे और आधिकारिक दस्तावेजों में शामिल करने की कोशिश करता रहा है। भारत ने चीन की इस नीति का लगातार विरोध किया है और अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न हिस्सा बताया है। 27 जगहों की आधिकारिक पहचान क्यों महत्वपूर्ण? गृह मंत्रालय के मुताबिक, इन जगहों के नाम अरुणाचल प्रदेश सरकार के साथ विचार-विमर्श के बाद तय किए गए हैं। सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक मानचित्र में इनकी पहचान दर्ज करने का उद्देश्य स्थानों की सही पहचान सुनिश्चित करना और आधिकारिक रिकॉर्ड में स्पष्टता बनाए रखना है। सरकार के इस कदम को केवल नामकरण की प्रक्रिया के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। सीमा से जुड़े संवेदनशील इलाकों में किसी क्षेत्र की आधिकारिक पहचान और उसका मानचित्रण रणनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इन 27 स्थानों में कई ऐसे इलाके हैं, जिनका भारत-चीन सीमा विवाद और 1962 के युद्ध के इतिहास से सीधा संबंध रहा है। लोंगजू, माजा और बिसा जैसे सीमावर्ती गांव भी शामिल अपर सुबनसिरी जिले के तीन सीमावर्ती गांवों लोंगजू, माजा और बिसा को भी आधिकारिक पहचान दी गई है। ये क्षेत्र भारत-चीन सीमा के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं। इसी क्षेत्र में जो ला, रिजा ला और पुकुर ला जैसे पहाड़ी दर्रे भी शामिल हैं। तवांग जिले में स्थित थाग ला दर्रा भी इस सूची का हिस्सा है। थाग ला का संबंध 1962 के भारत-चीन युद्ध से रहा है। लोंगजू भी सीमा विवाद के शुरुआती संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल रहा है। इसलिए इन स्थानों को आधिकारिक भारतीय मानचित्र में स्पष्ट पहचान मिलना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 1962 के युद्ध की याद दिलाते हैं ये स्थान अरुणाचल प्रदेश के कई स्थान भारत-चीन युद्ध के इतिहास से जुड़े हुए हैं। तवांग का जसवंत गढ़ राइफलमैन जसवंत सिंह रावत की स्मृति से जुड़ा है, जिन्हें 1962 के युद्ध के दौरान उनके साहस के लिए याद किया जाता है। अपर सुबनसिरी में शेर-ए-थापा मेमोरियल भी इसी संघर्ष की स्मृति से जुड़ा है। हवलदार शेर थापा ने रियो ब्रिज क्षेत्र में चीनी सेना का मुकाबला किया था। थाग ला दर्रा भी ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है। इसी क्षेत्र से नमका चू घाटी का इलाका जुड़ा है, जहां 1962 के संघर्ष के दौरान भारत और चीन की सेनाओं के बीच गंभीर सैन्य टकराव हुआ था। कौन-कौन से इलाके सूची में हैं? 27 आधिकारिक रूप से पहचाने गए स्थानों में विभिन्न जिलों के इलाके शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से: अपर सुबनसिरी: लोंगजू, माजा, बिसा, छोटा रोपुक, बड़ा रोपुक, जो ला, रिजा ला और पुकुर ला तवांग: थाग ला और जसवंत गढ़ अंजाव: बारा कुंडन, छोटा कुंडन और धन बारी चांगलांग: प्रीतनगर, बुद्धमंदिर, जयरामपुर, टेरिटनगर और रामनगर वेस्ट कामेंग: सागर, पद्मा, ज्योतिनगर और बैसाखी लोहित: शिवाजी नगर, सुनपुरा और कामलांग नगर इनके अलावा सूची में सम्भो सरोवर नाम की एक ऊंचाई पर स्थित ग्लेशियल झील और युद्ध से जुड़े स्मारक भी शामिल हैं। चीन ने अप्रैल में बदले थे 23 जगहों के नाम भारत का यह कदम चीन की उस नीति की पृष्ठभूमि में आया है, जिसके तहत बीजिंग समय-समय पर अरुणाचल प्रदेश के अलग-अलग स्थानों के नाम बदलकर उन्हें अपने आधिकारिक दस्तावेजों में इस्तेमाल करता रहा है। अप्रैल में चीन ने अरुणाचल प्रदेश की 23 जगहों के लिए नए चीनी नाम घोषित किए थे। चीन अरुणाचल प्रदेश को 'दक्षिण तिब्बत' के रूप में दावा करता रहा है, जबकि भारत उसके इस दावे को स्पष्ट रूप से खारिज करता है। भारत का कहना है कि किसी स्थान का काल्पनिक नाम बदल देने से जमीन पर उसकी वास्तविक स्थिति नहीं बदलती। नई दिल्ली लगातार यह दोहराती रही है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। भारत का संदेश: नाम बदलने से जमीन की हकीकत नहीं बदलती अरुणाचल प्रदेश के स्थानों को भारतीय आधिकारिक मानचित्र में मानकीकृत नाम देना इसी व्यापक नीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसका संदेश यह है कि चीन द्वारा किसी भारतीय क्षेत्र या स्थान का नाम बदलने से उस क्षेत्र की संप्रभुता या प्रशासनिक स्थिति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। सीमा विवाद के बीच नक्शों और आधिकारिक दस्तावेजों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि दोनों देश अपने-अपने दावों को ऐतिहासिक रिकॉर्ड, मानचित्र और प्रशासनिक नियंत्रण के आधार पर पेश करते रहे हैं। भारत के लिए यह कदम विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अरुणाचल प्रदेश के कई सीमावर्ती इलाकों में सड़क, संचार और सैन्य बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ स्थानीय क्षेत्रों की स्पष्ट प्रशासनिक पहचान भी रणनीतिक प्राथमिकता बन चुकी है। आगे क्या? भारत-चीन सीमा विवाद का अंतिम समाधान केवल स्थानों के नाम बदलने या नए नक्शे जारी करने से नहीं होगा। वास्तविक चुनौती सीमा पर स्थिरता बनाए रखने, दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक संवाद जारी रखने तथा वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े मतभेदों का समाधान तलाशने की है। फिलहाल 27 स्थानों को भारतीय आधिकारिक मानचित्र में पहचान देने का कदम यह जरूर दिखाता है कि अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत अपने प्रशासनिक और कूटनीतिक दावे को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं छोड़ना चाहता। चीन की ओर से नाम बदलने की कोशिशों के जवाब में भारत का रुख साफ है—किसी स्थान का नाम बदलने से उसकी भौगोलिक स्थिति, प्रशासनिक नियंत्रण या वास्तविकता नहीं बदलती।  

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चमोली में गोशाला के पास मिला नवजात
चमोली में गोशाला के पास मिला नवजात, मुंह में रबर ठूंसी; समय पर इलाज मिलने से बची जान

चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले से मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। कोतवाली क्षेत्र के रांगतोली गांव में एक गोशाला के पास नवजात शिशु लावारिस हालत में मिला। उसके मुंह में रबर ठूंसी हुई थी। समय रहते ग्रामीणों और पुलिस की मदद से नवजात को अस्पताल पहुंचाया गया, जिससे उसकी जान बच गई। फिलहाल बच्चे का इलाज चल रहा है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।   महिला की नजर पड़ी, ग्रामीणों ने दी पुलिस को सूचना     जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह एक महिला गोशाला की ओर जा रही थी, तभी उसकी नजर नवजात पर पड़ी। महिला ने तुरंत ग्राम प्रधान संतोष गुसाईं और ग्राम प्रहरी को सूचना दी। इसके बाद ग्राम प्रधान ने मौके पर पहुंचकर पुलिस को घटना की जानकारी दी।     मुंह में ठूंसी थी रबर, सांसें चलती मिलीं     ग्राम प्रधान के अनुसार, जब वे मौके पर पहुंचे तो नवजात के मुंह में बाल बांधने वाली रबर ठूंसी हुई थी। रबर निकालने पर पता चला कि बच्चे की सांसें चल रही हैं। इसके बाद पुलिस ने तत्काल नवजात को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे बाल कल्याण समिति (CWC) की निगरानी में बेस अस्पताल श्रीकोट रेफर कर दिया गया।     ग्रामीणों में आक्रोश, कड़ी कार्रवाई की मांग     घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों और स्थानीय महिलाओं ने इस घटना को बेहद अमानवीय बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि किसी नवजात को इस तरह असहाय अवस्था में छोड़ना गंभीर अपराध है।     पुलिस ने शुरू की जांच     पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और नवजात को वहां छोड़ने वाले व्यक्ति या लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। आसपास के क्षेत्र के लोगों से पूछताछ की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।  

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