Women Reservation Bill

Ritu Chaudhary
"महिला आरक्षण सिर्फ दिखावा हैं ”, राष्ट्रीय प्रवक्ता ऋतू चौधरी ने भाजपा पर साधा निशाना

रांची। रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता ऋतू चौधरी  ने केंद्र की भाजपा सरकार पर महिला आरक्षण को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को अधिकार देने के बजाय इस मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है। उनके अनुसार, महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने में जानबूझकर देरी की जा रही है।   परिसीमन और जनगणना को लेकर उठी आपत्ति रितु चौधरी ने कहा कि सरकार ने महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से जोड़कर इसे टालने की रणनीति अपनाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि असल उद्देश्य परिसीमन के जरिए राजनीतिक समीकरण बदलना था, जिसे विपक्ष ने समय रहते रोक दिया। उनका कहना था कि यदि सरकार की नीयत साफ होती, तो इसे 2024 चुनाव से पहले ही लागू कर दिया जाता।   ओबीसी महिलाओं के अधिकारों की मांग कांग्रेस प्रवक्ता ने ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षण की वकालत की। उन्होंने कहा कि आबादी के अनुपात में उन्हें प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, लेकिन वर्तमान सरकार इस दिशा में गंभीर नहीं दिखती। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे सामाजिक न्याय प्रभावित हो रहा है।   कांग्रेस ने अपने प्रयास गिनाए कांग्रेस की ओर से यह भी कहा गया कि पार्टी लंबे समय से महिला आरक्षण के समर्थन में रही है। Sonia Gandhi और Rahul Gandhi द्वारा पहले भी इस मुद्दे को उठाया गया था। कांग्रेस का दावा है कि उसने लगातार इस कानून को लागू कराने के लिए प्रयास किए हैं।   तुरंत लागू करने की मांग रितु चौधरी ने सरकार से मांग की कि महिला आरक्षण कानून को बिना देरी के लागू किया जाए। उनका कहना है कि यदि इसे जल्द लागू किया जाता है, तो 2029 के लोकसभा चुनाव में संसद में महिलाओं की भागीदारी काफी बढ़ सकती है। इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस के कई नेता भी मौजूद रहे।

Anjali Kumari अप्रैल 22, 2026 0
Priyanka Gandhi in Parliament over Delimitation Bill debate
परिसीमन बिल पर संसद में घमासान, प्रियंका गांधी  ने कहा - ‘चाणक्य भी चौंक जाते’

नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र में पेश किए गए परिसीमन (Delimitation) बिल को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। महिला आरक्षण कानून को परिसीमन से जोड़ने के प्रस्ताव पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi ने सरकार पर तीखा हमला बोला, वहीं प्रधानमंत्री Narendra Modi ने साफ कहा कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। प्रियंका गांधी का हमला, ‘चाणक्य भी चौंक जाते’ संसद में बहस के दौरान प्रियंका गांधी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर आज चाणक्य होते तो सरकार की रणनीति देखकर चौंक जाते। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल अगले चुनाव को ध्यान में रखकर लाया गया है और इसका मकसद राजनीतिक फायदा उठाना है। पीएम मोदी का जवाब, ‘नहीं होगा अन्याय’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ महिलाओं को उनका हक दिलाना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि परिसीमन प्रक्रिया में किसी राज्य या क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। क्या है विवाद की जड़? दरअसल, सरकार ने महिला आरक्षण को लागू करने के लिए इसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ दिया है। लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू होने के लिए नई जनगणना और परिसीमन जरूरी यही वजह है कि विपक्ष का कहना है कि सरकार महिला आरक्षण को टाल रही है, जबकि सरकार इसे जरूरी प्रक्रिया बता रही है। दक्षिण भारत में बढ़ा विरोध दक्षिण भारत के कई राज्यों में इस बिल का विरोध तेज हो गया है। M. K. Stalin और उनकी पार्टी DMK ने विरोध प्रदर्शन किया BRS ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ संघर्ष का ऐलान किया इन राज्यों को डर है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। संसद के अंदर और बाहर सियासी जंग कांग्रेस नेता Shashi Tharoor ने इस बिल की तुलना ‘डिमोनेटाइजेशन’ से कर दी, जबकि अन्य विपक्षी दलों ने भी इसे लेकर सवाल उठाए। वहीं सरकार का कहना है कि यह ऐतिहासिक सुधार है, जो देश की लोकतांत्रिक संरचना को मजबूत करेगा। आगे क्या? परिसीमन बिल पर संसद में बहस जारी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है। यह देखना अहम होगा कि सरकार विपक्ष की आपत्तियों का कैसे जवाब देती है और क्या यह बिल मौजूदा स्वरूप में पास हो पाता है या इसमें बदलाव होते हैं।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
Anurag Thakur addressing media on women’s reservation bill ahead of Parliament special session
महिला आरक्षण पर सियासी घमासान: अनुराग ठाकुर का विपक्ष पर हमला, TMC पर भी साधा निशाना

  नई दिल्ली: महिला आरक्षण को लेकर संसद के विशेष सत्र से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अनुराग ठाकुर ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि “महिला-विरोधी सोच” रखने वाली पार्टियां ही इस बिल का विरोध कर रही हैं। ‘महिला-विरोधी मानसिकता वाले कर रहे विरोध’ आईएएनएस से बातचीत में अनुराग ठाकुर ने कहा कि जो दल महिला आरक्षण का विरोध कर रहे हैं, उनकी विचारधारा महिलाओं के खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि महिलाओं को 33% आरक्षण देने का रास्ता साफ किया जा चुका है और अब इसे लागू करने की दिशा में काम हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि 1971 के आधार पर सीटों का निर्धारण पहले ही हो चुका है और दक्षिण भारतीय राज्यों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला हुआ है। विपक्षी नेताओं पर सीधा निशाना भाजपा सांसद ने कई बड़े नेताओं पर सीधे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी ममता बनर्जी डीएमके और अन्य विपक्षी दल महिला आरक्षण का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उनकी सोच महिलाओं के हित में नहीं है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि अपने शासनकाल में वह इस बिल को पारित नहीं करा पाई। संसद सत्र में होगी अहम चर्चा संसद के विस्तारित सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में संशोधन और परिसीमन विधेयक पर चर्चा होने की संभावना है। इसका उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करना है। बंगाल चुनाव पर भी दिया बड़ा बयान अनुराग ठाकुर ने पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस की हार तय है 4 मई को सत्ता परिवर्तन होगा ममता बनर्जी अपनी उपलब्धियां गिनाने में असफल रही हैं उन्होंने ममता सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद राज्य को “भ्रष्टाचार, कमीशन और अवैध घुसपैठ” से मुक्त किया जाएगा। सियासी टकराव तेज महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। संसद के आगामी सत्र में इस मुद्दे पर तीखी बहस और राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Women reservation bill
महिला आरक्षणः 3 संशोधन बिल लोकसभा में पेश

नई दिल्ली, एजेंसियां। महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े 3 बिल 16 अप्रैल को लोकसभा में पेश किए गए। डेढ़ घंटे बाद वोटिंग हुई कि बिलों पर चर्चा की जाए या नहीं। पक्ष में 251 वोट पड़े,185 सांसदों ने विरोध किया। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने बिलों का विरोध करते हुए कहा कि सरकार संविधान को हाईजैक करना चाहती है। इसके बाद सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने विरोध किया। कहा कि जब तक मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया जाएगा। तब तक इसका मतलब नहीं है। इस पर अमित शाह ने कहा- मुस्लिमों को धर्म के आधार पर आरक्षण गैर संवैधानिक है, इसका सवाल ही पैदा नहीं होता। अखिलेश यादव ने कहा- पूरा देश आधी आबादी को आरक्षण चाहता है। मैं जानना चाहता हूं कि मुस्लिम महिलाओं के लिए क्या। इस पर अमित शाह ने जवाब दिया कि समाजवादी पार्टी पूरी टिकटें मुस्लिम महिलाओं को दे दे, हमें कहां आपत्ति है। लोकसभा में सांसदों की संख्या 850 करने का प्रस्ताव संशोधन बिल में लोकसभा सांसदों की संख्या 850 करने का प्रस्ताव है। मौजूदा संख्या 543 है। राज्यों में 815 और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 तक सीटें होंगी। सीटों की सटीक संख्या तय करने के लिए परिसीमन भी किया जाएगा। 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

Anjali Kumari अप्रैल 16, 2026 0
Indian Parliament discussing Women’s Reservation Bill and delimitation during special session in New Delhi
महिला आरक्षण पर मंथन: 16–18 अप्रैल के विशेष सत्र में क्या होगा, और क्यों नाराज़ हैं दक्षिण के राज्य?

  नई दिल्ली: संसद के 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाले विशेष सत्र में महिला आरक्षण को लागू करने के तरीकों पर गहन चर्चा होने जा रही है। केंद्र सरकार 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को जल्द लागू करना चाहती है, लेकिन इसे लेकर अब सियासी टकराव तेज हो गया है। खासकर परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत के राज्यों में नाराज़गी बढ़ती दिख रही है। क्या है महिला आरक्षण कानून? सरकार ने 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान किया था। हालांकि, उस समय यह तय किया गया था कि आरक्षण जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होगा। अब सरकार इसे जल्द लागू करने के लिए संशोधन प्रस्ताव लाई है। जनगणना और परिसीमन से क्या है कनेक्शन? महिला आरक्षण को लागू करने का पूरा ढांचा दो प्रक्रियाओं पर निर्भर है: जनगणना (Census): हर 10 साल में होती है, जिससे आबादी का सटीक आंकड़ा मिलता है परिसीमन (Delimitation): जनगणना के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या और सीमाएं तय होती हैं 2021 में कोविड के कारण जनगणना नहीं हो पाई और अभी तक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। ऐसे में परिसीमन भी अटका हुआ है। सरकार का लक्ष्य है कि 2029 के चुनाव से पहले जनगणना और परिसीमन पूरा कर लिया जाए, ताकि उसी आधार पर महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित की जा सकें। सरकार का नया प्लान क्या है? सरकार चाहती है कि 2029 के आम चुनाव में महिला आरक्षण लागू हो जाए। इसके लिए प्रस्तावित संशोधनों में: नई जनगणना के आधार पर परिसीमन एक स्वतंत्र परिसीमन आयोग का गठन कुल सीटों में से 33% महिलाओं के लिए आरक्षित आरक्षित सीटों का रोटेशन सिस्टम (सीटें समय-समय पर बदलेंगी) विपक्ष क्यों कर रहा है विरोध?   विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन उसके लागू करने के तरीके पर सवाल उठा रहा है। मुख्य आपत्तियां: जनगणना के बिना जल्दबाजी में फैसला परिसीमन से दक्षिण भारत की सीटें घटने का डर महिला आरक्षण में OBC महिलाओं के लिए अलग कोटा की मांग कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार राजनीतिक फायदे के लिए नियम बदल रही है। दक्षिण के राज्य क्यों हैं नाराज़? तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा है कि यह कदम दक्षिण भारत के साथ अन्याय होगा। उनकी चिंता का मुख्य कारण: दक्षिण के राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया अगर सीटें आबादी के आधार पर बढ़ेंगी, तो उत्तर भारत के राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार) को ज्यादा सीटें मिलेंगी इससे दक्षिण भारत का राजनीतिक प्रतिनिधित्व घट सकता है स्टालिन ने चेतावनी दी है कि सरकार “आग से खेल रही है” और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। सरकार का पक्ष सरकार का कहना है कि उसका मकसद सिर्फ महिलाओं को उनका अधिकार देना है। किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं की जाएंगी सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है सभी राज्यों के हितों को ध्यान में रखकर फैसला लिया जाएगा सरकार का दावा है कि यह ऐतिहासिक कदम देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नई दिशा देगा। तीन दिन के इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण के स्वरूप और लागू करने के तरीके पर गहन बहस होगी। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है या यह मुद्दा और ज्यादा सियासी टकराव पैदा करता है।

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Indian Parliament session in progress discussing women’s reservation and delimitation bills
संसद का विशेष सत्र शुरू: महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर घमासान आसार

  नई दिल्ली: आज से संसद का विशेष सत्र शुरू हो गया है, जिसमें केंद्र सरकार बड़े संवैधानिक बदलावों से जुड़े अहम विधेयक पेश करने जा रही है। इस सत्र के दौरान महिला आरक्षण को लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने जैसे मुद्दों पर तीखी बहस और हंगामे की संभावना जताई जा रही है। संसद के बुलेटिन के अनुसार, सरकार गुरुवार को लोकसभा में तीन प्रमुख विधेयक पेश करेगी— संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 परिसीमन विधेयक, 2026 केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 इनमें से पहले दो विधेयक कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पेश करेंगे, जबकि तीसरा विधेयक गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सदन में रखा जाएगा। इन विधेयकों पर चर्चा के लिए लोकसभा में कुल 18 घंटे का समय निर्धारित किया गया है, जो शुक्रवार तक जारी रह सकती है। महिला आरक्षण पर सरकार का नया कदम केंद्र सरकार ने पहले 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के जरिए संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का फैसला किया था। हालांकि, उस समय इसे जनगणना और परिसीमन के बाद लागू करने की बात कही गई थी। अब सरकार इस प्रक्रिया को पहले लागू करने के लिए नया संशोधन प्रस्ताव लेकर आई है। परिसीमन विधेयक पर बढ़ा विवाद परिसीमन विधेयक को लेकर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया है। कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने इस विधेयक के खिलाफ लोकसभा में नोटिस दिया है। वहीं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस विधेयक की प्रति विरोध दर्ज कराया है। उनका आरोप है कि यह कानून दक्षिण भारतीय राज्यों, खासकर तमिलनाडु के हितों के खिलाफ है। विपक्ष की रणनीति बैठक संसद के विशेष सत्र के दौरान विपक्षी दल भी सक्रिय हो गए हैं। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यालय में विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर्स की बैठक होगी, जिसमें सरकार के प्रस्तावों के खिलाफ रणनीति तैयार की जाएगी। 16 से 18 अप्रैल तक चलेगा सत्र यह विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल तक चलेगा। सरकार का उद्देश्य इस दौरान महिला आरक्षण कानून में संशोधन को मंजूरी दिलाना है, जबकि विपक्ष इसे जल्दबाजी में लिया गया फैसला बता रहा है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Former President Pratibha Patil supports Women’s Reservation Bill in letter to PM Modi
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का समर्थन, PM मोदी को लिखा पत्र

केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण बिल) को लेकर राजनीतिक बहस के बीच अब देश की पूर्व राष्ट्रपति Pratibha Patil ने इसका समर्थन किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर इस विधेयक को “ऐतिहासिक” और “परिवर्तनकारी कदम” बताया है। उनके इस पत्र को राजनीतिक तौर पर सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। “लोकतंत्र को मजबूत करेगा यह कदम” Pratibha Patil ने अपने पत्र में कहा कि यह संवैधानिक संशोधन भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक समावेशी और संतुलित बनाएगा। उन्होंने कहा कि संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान उनकी भागीदारी सुनिश्चित करेगा, जिससे निर्णय प्रक्रिया में विविधता आएगी। महिलाओं की भागीदारी से बदलेगा नीति निर्माण पूर्व राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं के अलग-अलग अनुभव और दृष्टिकोण नीति निर्माण को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाएंगे। उनके अनुसार: महिला प्रतिनिधित्व बढ़ने से सामाजिक मुद्दों को बेहतर तरीके से समझा जाएगा नीतियां अधिक संतुलित और समावेशी बनेंगी लोकतंत्र में वास्तविक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा ग्रामीण और वंचित महिलाओं को मिलेगा लाभ Pratibha Patil ने विश्वास जताया कि यह अधिनियम खासकर ग्रामीण और वंचित वर्ग की महिलाओं के लिए नई संभावनाएं खोलेगा। उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा और वे समाज में अधिक सक्रिय भागीदारी कर सकेंगी। “लंबे समय का सपना होगा साकार” अपने पत्र के अंत में उन्होंने इस पहल को “लंबे समय से संजोए गए सपने को साकार करने” की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने इस विधेयक को ऐतिहासिक असमानताओं को कम करने और एक अधिक समान व समावेशी भारत के निर्माण की दिशा में निर्णायक बताया। राजनीतिक मायने पूर्व राष्ट्रपति का यह समर्थन ऐसे समय में आया है, जब महिला आरक्षण बिल को लेकर देश में राजनीतिक मतभेद देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में Pratibha Patil का यह पत्र सरकार के पक्ष में एक मजबूत नैतिक और राजनीतिक समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर बढ़ती बहस के बीच यह समर्थन बताता है कि यह सिर्फ एक विधेयक नहीं, बल्कि भारत में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Akhilesh Yadav speaking at a press briefing criticizing the women reservation bill and government policies.
महिला आरक्षण पर अखिलेश यादव का हमला, बोले– “PDA के हक को मारने की साजिश”

महिला आरक्षण को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने केंद्र सरकार की पहल पर सवाल उठाते हुए इसे “पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के अधिकारों को खत्म करने की साजिश” करार दिया है। केंद्र सरकार द्वारा इस मुद्दे पर तेजी दिखाते हुए विशेष संसदीय सत्र बुलाए जाने के बीच अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X (पूर्व में ट्विटर)’ पर लंबी पोस्ट लिखकर भाजपा पर तीखा हमला बोला। “जल्दबाजी में लाया जा रहा है बिल” Akhilesh Yadav ने कहा कि महिला आरक्षण को जिस तरह जल्दबाजी में लाया जा रहा है, उससे केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने लिखा कि भाजपा को अब “वोटरों का अकाल” पड़ गया है, इसलिए नए वर्गों को अपने पक्ष में लाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। “जब पुराने समर्थक भाजपा से दूर हो रहे हैं, तब हर बार नए लोगों को लुभाने के लिए ऐसे फैसले लिए जाते हैं,” उन्होंने कहा। जनगणना और जातिगत आरक्षण का मुद्दा सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जानबूझकर जनगणना टाल रही है। उनके मुताबिक, “अगर जनगणना होगी तो जातिगत जनगणना की मांग भी उठेगी और उसके आधार पर आरक्षण की बात भी सामने आएगी, जिसे भाजपा कभी लागू नहीं करना चाहती।” उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल इसी बड़े राजनीतिक समीकरण का हिस्सा है। PDA के अधिकारों पर चोट का आरोप अखिलेश यादव ने अपने “PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक)” फार्मूले का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें “A” यानी आधी आबादी (महिलाएं) भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल वास्तव में PDA वर्ग के अधिकारों को कमजोर करने की साजिश है, जिससे सामाजिक न्याय का संतुलन बिगड़ सकता है। महिलाओं की स्थिति पर भी उठाए सवाल सपा प्रमुख ने भाजपा सरकार में महिलाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महंगाई, बढ़ती गैस सिलेंडर कीमतें और रोजमर्रा के खर्चों ने महिलाओं की रसोई पर सीधा असर डाला है। “भाजपा सरकार में सबसे ज्यादा परेशान अगर कोई है, तो वो महिलाएं ही हैं,” उन्होंने कहा। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों की स्थिति खराब हो रही है, जिससे महिलाओं के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जमीनी उदाहरण देकर घेरा Akhilesh Yadav ने मेरठ और नोएडा की महिलाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उनके दर्द को समझना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर सरकार इस बिल को लेकर गंभीर है, तो इसे आम महिलाओं के बीच जाकर घोषित करना चाहिए, ताकि उनकी वास्तविक समस्याओं को समझा जा सके। “चुनावी चाल है महिला आरक्षण” सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा अक्सर चुनाव से पहले इस तरह के बड़े मुद्दे उठाकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि इस बार भी महिलाओं को केंद्र में रखकर वही “पुरानी राजनीतिक चाल” चली जा रही है, लेकिन जनता अब जागरूक हो चुकी है। महिला आरक्षण को लेकर Akhilesh Yadav का यह बयान स्पष्ट करता है कि आने वाले समय में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा चुनावी विमर्श बनने वाला है। सपा इसे सामाजिक न्याय और PDA के अधिकारों से जोड़कर पेश कर रही है, जबकि केंद्र सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण के रूप में सामने रख रही है।

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
PM Narendra Modi addressing Nari Shakti Vandan Conference at Vigyan Bhavan on women reservation bill announcement
“नारी शक्ति को समर्पित 21वीं सदी का सबसे बड़ा फैसला” – पीएम मोदी

Narendra Modi ने Vigyan Bhavan में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए महिला आरक्षण को 21वीं सदी के सबसे बड़े फैसलों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय देश की नारी शक्ति को समर्पित है और लोकतंत्र को नई मजबूती देगा। संसद रचने जा रही नया इतिहास प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है। यह फैसला सामाजिक न्याय को मजबूत करेगा महिलाओं की भागीदारी से लोकतंत्र और सशक्त होगा “समतामूलक भारत” के सपने को आगे बढ़ाएगा विशेष सत्र और बड़ा फैसला सरकार ने Parliament of India का विशेष सत्र 16–18 अप्रैल के बीच बुलाया है, जिसमें महिला आरक्षण से जुड़े अहम कदम उठाए जाएंगे। पीएम मोदी ने याद दिलाया कि Nari Shakti Vandan Adhiniyam 2023 को 2023 में सर्वसम्मति से पास किया गया था। “मैं उपदेश देने नहीं, आशीर्वाद लेने आया हूं” अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा: “मैं यहां किसी को उपदेश देने नहीं आया हूं” “मैं देश की माताओं-बहनों का आशीर्वाद लेने आया हूं” उन्होंने देशभर से आई महिलाओं का आभार जताया और इसे “नए युग की शुरुआत” बताया। दशकों का इंतजार खत्म होने की बात पीएम मोदी ने कहा कि: महिला आरक्षण पर करीब 4 दशक से चर्चा चल रही थी अब इसे लागू करने का समय आ गया है लक्ष्य है कि इसे 2029 तक हर हाल में लागू किया जाए सहयोग से आगे बढ़ने की अपील प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि इस मुद्दे पर: संवाद, सहयोग और सहभागिता से आगे बढ़ें संसद की गरिमा को नई ऊंचाई दें पीएम मोदी के बयान से साफ है कि सरकार महिला आरक्षण को बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मील का पत्थर बनाना चाहती है। अब नजर संसद के विशेष सत्र और विपक्ष के रुख पर रहेगी।  

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
Political debate in India over Nari Shakti Vandan Act with Narendra Modi, Kharge and Kiren Rijiju exchange letters
‘अभी नहीं तो देर हो जाएगी’–नारी शक्ति वंदन कानून पर सियासत तेज

नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। Narendra Modi, Mallikarjun Kharge और Kiren Rijiju के बीच चिट्ठियों का दौर इस बहस को और गर्म कर रहा है। आखिर खरगे ने PM मोदी को क्यों लिखा पत्र? कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में सरकार पर कई आरोप लगाए: सरकार जल्दबाजी में संशोधन लागू करना चाहती है चुनाव से पहले इसे राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है विपक्ष से पर्याप्त परामर्श नहीं किया गया खरगे का कहना है कि इतने अहम कानून पर व्यापक चर्चा जरूरी है, न कि जल्दबाजी में फैसला। रिजिजू का जवाब–“अभी सही समय है” इन आरोपों पर जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा: 16 मार्च 2026 से ही सभी दलों से बातचीत शुरू हो चुकी थी कई पार्टियों–जैसे Samajwadi Party, DMK, Trinamool Congress–से चर्चा की गई कई दलों ने समर्थन भी जताया रिजिजू ने जोर देकर कहा कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो 2029 चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करना मुश्किल हो सकता है। संसद सत्र क्यों बुलाया गया? सरकार ने 16–18 अप्रैल 2026 तक संसद सत्र बुलाया है, ताकि इस कानून में जरूरी संशोधन कर उसे लागू किया जा सके। सरकार इसे महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है। मुद्दा क्या है? नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) पहले ही 2023 में संसद से पास हो चुका है। अब सरकार चाहती है कि इसके कार्यान्वयन की प्रक्रिया तेज की जाए, जबकि विपक्ष टाइमिंग और प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है।  

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi addressing nation on women’s reservation bill and urging political support.
महिला आरक्षण बिल पर PM मोदी की अपील: सभी दलों से मांगा समर्थन, बताया क्यों है जरूरी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण बिल को लेकर एक खुला लेख लिखते हुए इसकी अहमियत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि यह बिल सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों और भविष्य से जुड़ा हुआ है। साथ ही, उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस बिल का समर्थन करने की अपील की है। क्यों जरूरी है महिला आरक्षण बिल? प्रधानमंत्री ने अपने लेख में लिखा कि: भारत की आबादी में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग आधी है राष्ट्र निर्माण में महिलाओं का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है इसके बावजूद राजनीति और विधायी संस्थाओं में उनका प्रतिनिधित्व कम है उन्होंने कहा कि जब महिलाएं निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल होती हैं, तो: शासन की गुणवत्ता बेहतर होती है नई सोच और अनुभव से नीतियां मजबूत बनती हैं सभी दलों से समर्थन की अपील PM मोदी ने कहा: यह मुद्दा किसी एक पार्टी या सरकार का नहीं, पूरे देश का है महिला सशक्तिकरण के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण है उन्होंने सभी सांसदों से आग्रह किया कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस बिल का समर्थन करें। 16 अप्रैल को संसद में चर्चा प्रधानमंत्री ने बताया कि: 16 अप्रैल को संसद सत्र बुलाया जाएगा इस दौरान महिला आरक्षण बिल पर चर्चा और पारित करने की प्रक्रिया होगी क्या है इसका महत्व? PM मोदी के अनुसार: यह बिल लोकतंत्र को और अधिक समावेशी बनाएगा महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी का बड़ा अवसर मिलेगा समाज तभी आगे बढ़ता है जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
Women Reservation Bill Amendment India Politics
महिला आरक्षण बिल में बड़ा संशोधन: किसे मिलेगा फायदा? सरकार vs विपक्ष में बढ़ी सियासी टकराहट

केंद्र सरकार ने 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाकर एक बड़ा राजनीतिक और संवैधानिक कदम उठाने की तैयारी की है। इस सत्र में नारी वंदन अधिनियम, 2023 यानी महिला आरक्षण कानून में संशोधन प्रस्ताव लाया जा सकता है। इस प्रस्ताव को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है और सरकार व विपक्ष आमने-सामने हैं। क्या है सरकार का प्रस्ताव? सूत्रों के मुताबिक, सरकार महिला आरक्षण कानून में दो बड़े बदलाव करने पर विचार कर रही है: परिसीमन (Delimitation) के लिए नई जनगणना की बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाना लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों की संख्या में लगभग 50% तक बढ़ोतरी अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो: उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटें 80 से बढ़कर 120 हो सकती हैं बिहार में 40 से 60 तमिलनाडु में 39 से 58 इस तरह कुल लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर करीब 816 तक पहुंच सकती हैं, जिनमें लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। सरकार का क्या कहना है? केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने स्पष्ट किया है कि इस संशोधन को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य महिला प्रतिनिधित्व को तेजी से लागू करना और प्रक्रिया को सरल बनाना है, ताकि 2029 तक इसे लागू किया जा सके। विपक्ष क्यों कर रहा विरोध? विपक्ष इस कदम को चुनावी रणनीति बता रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार महिला वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है राजीव शुक्ला ने इसे चुनावी लाभ के लिए उठाया गया कदम बताया कांग्रेस का दावा है कि महिला आरक्षण की पहल पहले उसी ने की थी OBC महिलाओं के आरक्षण की मांग समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल ने इस मुद्दे को और आगे बढ़ाते हुए OBC महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग उठाई है। उनका कहना है कि: केवल सामान्य महिला आरक्षण पर्याप्त नहीं है पिछड़ी जातियों की महिलाओं को अलग से प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए क्या है असली सियासी गणित? विशेषज्ञों के अनुसार, यह संशोधन कई स्तरों पर असर डाल सकता है: महिला वोट बैंक को प्रभावित करेगा राज्यों में सीटों के पुनर्वितरण से राजनीतिक समीकरण बदलेंगे 2029 चुनाव से पहले बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है पास होने में क्या है चुनौती? चूंकि यह एक संवैधानिक संशोधन है, इसलिए इसे संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। हालांकि कोई भी पार्टी खुले तौर पर महिला आरक्षण का विरोध नहीं कर रही, लेकिन: परिसीमन के आधार OBC आरक्षण समय और मंशा इन मुद्दों पर तीखी बहस तय मानी जा रही है। निष्कर्ष महिला आरक्षण बिल में प्रस्तावित संशोधन सिर्फ एक कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक बदलाव साबित हो सकता है। जहां सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी रणनीति करार दे रहा है।  

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Parliament debate on 33% women reservation bill with Lok Sabha seats expansion proposal before 2029 elections
2029 से पहले लागू होगा 33% महिला आरक्षण: लोकसभा सीटें बढ़कर 816, 273 सीटें महिलाओं के लिए

केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए संसद के मौजूदा सत्र में दो अहम बिल लाए जा सकते हैं। प्रस्ताव के मुताबिक, लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती हैं। इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। क्या होगा बड़ा बदलाव? सरकार महिला आरक्षण लागू करने की मौजूदा शर्तों में बदलाव करना चाहती है। अभी यह कानून नई जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होना है सरकार अब 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने पर विचार कर रही है इससे प्रक्रिया तेज होगी और 2029 से पहले आरक्षण लागू किया जा सकेगा   दो बिल लाने की तैयारी सरकार इस सत्र में दो अलग-अलग बिल ला सकती है: नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन परिसीमन कानून में बदलाव इन बिलों को पास कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा, इसलिए सरकार विपक्षी दलों से समर्थन जुटाने में लगी है। राजनीतिक सहमति बनाने की कोशिश गृहमंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर कई दलों के नेताओं के साथ बैठक की है, जिनमें- वाईएसआर कांग्रेस, सपा, एनसीपी (एसपी), आरजेडी, AIMIM, बीजेडी और शिवसेना (UBT) शामिल हैं। हालांकि, कांग्रेस के साथ अभी चर्चा बाकी है। सहमति बनने पर बिल इसी हफ्ते पेश किए जा सकते हैं। आरक्षण का फॉर्मूला क्या होगा? कुल 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित SC/ST वर्ग की महिलाओं को उनके कोटे के भीतर हिस्सा OBC महिलाओं के लिए अलग प्रावधान फिलहाल शामिल नहीं है इसी मॉडल को राज्यों की विधानसभाओं में भी लागू करने की योजना है। 2023 में पास हुआ था कानून, लेकिन लागू नहीं हुआ महिला आरक्षण बिल 2023 में संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पास हुआ था, जिसे “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” नाम दिया गया। लोकसभा में लगभग सर्वसम्मति से पास राज्यसभा में सर्वसम्मति से पास राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है फिर भी, यह अभी लागू नहीं हुआ है क्योंकि इसकी प्रक्रिया जनगणना और परिसीमन से जुड़ी है। इतिहास: कब शुरू हुई महिला आरक्षण की मांग 1931: पहली बार महिला आरक्षण पर चर्चा 1974: स्थानीय निकायों में आरक्षण की सिफारिश 1993: पंचायत और नगर निकायों में 33% आरक्षण लागू कई राज्यों में अब 50% तक आरक्षण लागू  

surbhi मार्च 24, 2026 0
Rajya Sabha Parliament session with NDA leaders celebrating majority after 2026 election results
राज्यसभा चुनाव 2026: NDA बहुमत के पार, BJP को बड़ा फायदा- 37 सीटों का पूरा विश्लेषण

राज्यसभा की 37 सीटों पर हुए चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बढ़त हासिल कर ली है। इस जीत के साथ ही उच्च सदन में NDA की कुल ताकत 135 के पार पहुंच गई है, जो बहुमत के आंकड़े से अधिक है। इससे केंद्र की सत्तारूढ़ सरकार को आने वाले समय में महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में बड़ी राहत मिलेगी।   चुनाव परिणाम का पूरा निचोड़ इन 37 सीटों में से 26 सीटों पर निर्विरोध चुनाव हुआ, जिनमें NDA को 13 सीटें मिलीं। वहीं, जिन 11 सीटों पर मतदान हुआ, उनमें से 9 पर NDA ने जीत दर्ज की। कुल मिलाकर NDA ने 37 में से 22 सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि विपक्ष के खाते में 15 सीटें आईं।   राज्यों में NDA का दबदबा राज्यों के हिसाब से देखें तो NDA का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा: महाराष्ट्र: 7 में से 6 सीटें   बिहार: सभी 5 सीटें   असम: सभी 3 सीटें   ओडिशा: 4 में से 3 सीटें   तमिलनाडु: 5 में से 2 सीटें   पश्चिम बंगाल: 5 में से 1 सीट   हरियाणा और छत्तीसगढ़: 2 में से 1-1 सीट   इसके अलावा, मनोनीत सदस्य के रूप में पूर्व CJI रंजन गोगोई का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उनकी सीट भी NDA के खाते में ही जुड़ने की संभावना है।   राज्यसभा में BJP और NDA की स्थिति मजबूत भारतीय जनता पार्टी (BJP) पहले ही 100 से अधिक सीटों के साथ राज्यसभा की सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई थी। ताजा नतीजों के बाद NDA गठबंधन की कुल संख्या 135 से ऊपर पहुंच गई है, जिससे अब सरकार को विधेयक पारित कराने के लिए विपक्ष पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।   कांग्रेस के लिए राहत की खबर हालांकि विपक्ष को कुल 15 सीटें मिली हैं, लेकिन कांग्रेस के लिए राहत की बात यह है कि वह राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा बनाए रखने में सफल रही है।   महिला आरक्षण बिल पर नजर इस मजबूत स्थिति का सीधा असर आगामी विधायी एजेंडे पर पड़ेगा। सरकार लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाले ‘नारी वंदन अधिनियम’ को जल्द लागू करने की दिशा में कदम तेज कर सकती है। संभावना है कि आगामी सत्र में इस संबंध में संवैधानिक संशोधन पर चर्चा हो।   सरकार का बढ़ा आत्मविश्वास राज्यसभा में बहुमत मिलने के बाद सरकार का आत्मविश्वास बढ़ा है। सूत्रों के अनुसार, सरकार विपक्षी दलों को साथ लेकर महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की रणनीति पर काम कर रही है।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0