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Dhoni House Road Ranchi
रांची में धोनी के घर तक जाने वाली सड़क का होगा कायाकल्प, ₹2.75 करोड़ मंजूर

रांची। राजधानी रांची में महेंद्र सिंह धोनी के घर तक जाने वाली जर्जर सड़क का अब कायाकल्प किया जाएगा। एनएच-23 के पिस्का मोड़-कटहल मोड़ मार्ग के बीच ललित नारायण मिश्रा कॉलोनी से सिमलिया तक जाने वाली करीब 2.47 किलोमीटर लंबी सड़क को लगभग 2.75 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है। ग्रामीण कार्य विभाग ने सड़क निर्माण का काम शुरू कर दिया है।   धोनी और ईशान किशन के आवास से जुड़ती है सड़क   यह सड़क आगे रिंग रोड से जुड़ती है, जहां भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का आवास है। दूसरी ओर यह सड़क क्रिकेटर ईशान किशन के अपार्टमेंट समेत कई महत्वपूर्ण संस्थानों और रिहायशी इलाकों को भी जोड़ती है। इसी वजह से इस मार्ग को स्थानीय लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।   2.47 किमी सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे   लंबे समय से सड़क की हालत बेहद खराब थी। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे होने के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही थी। बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। रात के समय दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता था।   आए दिन हादसों से परेशान थे लोग   स्थानीय लोगों के अनुसार, जर्जर सड़क के कारण आए दिन बाइक सवार गिरकर घायल हो रहे थे। पैदल चलने वालों के साथ स्कूली बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। गर्मी में सड़क से उड़ने वाली धूल और बारिश में कीचड़ व जलजमाव ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी थीं।   बारिश के कारण फिलहाल काम धीमा   ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से सड़क निर्माण का काम शुरू कर दिया गया है। पिछले दो दिनों से भारी बारिश के कारण काम प्रभावित हुआ है। मौसम साफ होते ही निर्माण कार्य में तेजी लाने की बात कही गई है। सड़क बनने के बाद आसपास के लोगों के साथ-साथ इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

anjali kumari अगस्त 20, 2026 0
Konda Sushmitha challenges Telangana Chief Minister Revanth Reddy over Parakala Assembly election prospects
तेलंगाना कांग्रेस में बढ़ी कलह, मंत्री की बेटी ने रेवंत रेड्डी को दी चुनावी चुनौती

तेलंगाना कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आई है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की सरकार में मंत्री कोंडा सुरेखा की बेटी कोंडा सुष्मिता ने मुख्यमंत्री के खिलाफ सार्वजनिक रूप से तीखे बयान दिए हैं। पारकल में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मौजूदा विधायक रेवूरी प्रकाश रेड्डी को रेवंत रेड्डी का समर्थन मिलने पर सवाल उठाते हुए सीधे चुनावी चुनौती दे दी। 'पारकल की विधायक मैं ही बनूंगी' कोंडा सुष्मिता ने कहा कि अगर रेवूरी प्रकाश रेड्डी को दो साल बाद चुनाव लड़ना है तो अभी इस्तीफा देकर चुनाव मैदान में आना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव में पारकल विधानसभा सीट से वह ही विधायक बनेंगी। सुष्मिता ने मुख्यमंत्री के प्रभाव को चुनौती देते हुए कहा कि चाहे रेवंत रेड्डी खुद आएं या उनका परिवार, वह चुनाव लड़ने के अपने फैसले से पीछे नहीं हटेंगी। टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय लड़ने का ऐलान सुष्मिता ने यह भी कहा कि अगर कांग्रेस उन्हें टिकट नहीं देती है तो वह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि उनका टिकट तय करने का अधिकार मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के पास क्यों होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री पर अहंकार का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में कांग्रेस की पुरानी राजनीतिक पहचान कमजोर हुई है। सुष्मिता ने यह भी दावा किया कि पार्टी के कई पुराने नेता मौजूदा नेतृत्व से खुश नहीं हैं। रेवंत रेड्डी के परिवार पर भी लगाए आरोप अपने बयान के दौरान सुष्मिता ने रेवंत रेड्डी के भाई से जुड़े कथित 200 करोड़ रुपये के जमीन सौदे का आरोप भी लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर वह मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े अन्य कथित मामलों को भी सार्वजनिक कर सकती हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, सुष्मिता के बयानों से तेलंगाना कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी और टिकट को लेकर बढ़ते मतभेद एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
Congress president Mallikarjun Kharge expresses displeasure over leaders’ silence on Haldwani purification controversy
शुद्धिकरण विवाद पर खरगे की नाराजगी, CWC बैठक में बोले- नेताओं की चुप्पी से हुआ दुख

नई दिल्ली: हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद हुए कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस के भीतर भी चर्चा तेज हो गई है। बुधवार को दिल्ली में हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में खरगे ने इस मुद्दे पर पार्टी नेताओं की चुप्पी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खरगे ने बैठक में कहा कि उन्हें इस बात से दुख पहुंचा कि CWC के कई सदस्यों ने शुद्धिकरण की घटना की खुलकर निंदा करते हुए उनका समर्थन नहीं किया। हालांकि, उन्होंने किसी नेता का नाम लेकर शिकायत नहीं की। हल्द्वानी रैली के बाद हुआ था शुद्धिकरण मामला 8 अगस्त का है, जब मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की विजय शंखनाद रैली को संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद, 10 अगस्त को दक्षिणपंथी संगठन श्री राम सेना से जुड़े लोगों ने रैली स्थल पर शुद्धिकरण हवन किया था। इस घटना को लेकर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई थी। पार्टी नेताओं ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए आरोप लगाया था कि इस तरह की घटना के पीछे बीजेपी और आरएसएस से जुड़े लोगों की मानसिकता है। खरगे ने संसद में भी उठाया था मुद्दा शुद्धिकरण विवाद को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष पहले भी सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। मानसून सत्र के आखिरी दिन उन्होंने संसद में भी इस मुद्दे को उठाया था। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने CWC की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में इस घटना को अस्वीकार्य और निंदनीय बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाएं बीजेपी की मानसिकता को दर्शाती हैं। बीजेपी ने घटना से किया किनारा वहीं, बीजेपी ने शुद्धिकरण कार्यक्रम से खुद को अलग कर लिया था। पार्टी की ओर से इस अनुष्ठान की निंदा भी की गई थी। अब CWC बैठक में खरगे की नाराजगी सामने आने के बाद यह मामला कांग्रेस के अंदर भी चर्चा का विषय बन गया है। पार्टी अध्यक्ष की टिप्पणी से साफ है कि वे चाहते हैं कि ऐसे मुद्दों पर पार्टी के वरिष्ठ नेता सार्वजनिक रूप से एकजुट होकर अपनी प्रतिक्रिया दें।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
Tejashwi Yadav during Bihar tour from Patna to Madhubani and Darbhanga meeting families
तेजस्वी यादव का आज फिर बिहार दौरा, पटना से मधुबनी-दरभंगा तक 11 घंटे का कार्यक्रम; जानें पूरा रूट

पटना: बुधवार को राजभवन मार्च और प्रदर्शन के बाद बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव गुरुवार को फिर सड़क पर नजर आएंगे। 20 अगस्त को उनका पटना से मधुबनी और दरभंगा तक सड़क मार्ग से दौरा प्रस्तावित है। इस दौरान वे कई परिवारों से मुलाकात करेंगे और शोक संतप्त परिजनों से भी मिलेंगे। जारी कार्यक्रम के मुताबिक तेजस्वी यादव सुबह 10:45 बजे पटना के 1, पोलो रोड स्थित आवास से रवाना होंगे। उनका काफिला हाजीपुर, वैशाली होते हुए मधुबनी और फिर दरभंगा पहुंचेगा। देर रात करीब 10:05 बजे उनके पटना लौटने का कार्यक्रम है। सुबह 10:45 बजे पटना से रवाना होंगे तेजस्वी यादव गुरुवार सुबह अपने पटना स्थित आवास से निकलेंगे। करीब 11:45 बजे हाजीपुर में स्वर्गीय राम नरेश राय के आवास पर पहुंचेंगे। यहां वे परिवार के सदस्यों से मुलाकात करेंगे। इसके बाद दोपहर 12:15 बजे मधुबनी के लिए रवाना होंगे। पूरे दौरे के दौरान वे सड़क मार्ग से यात्रा करेंगे। दोपहर 3:30 बजे मधुबनी पहुंचने का कार्यक्रम तेजस्वी यादव का काफिला करीब 3:30 बजे मधुबनी जिला अतिथि गृह पहुंचेगा। यहां कुछ समय रुकने के बाद वे अगले कार्यक्रम के लिए निकलेंगे। शाम 4:15 बजे अतिथि गृह से रवाना होकर 4:50 बजे अरैर थाना क्षेत्र में स्वर्गीय रंजन कुमार यादव के आवास पर पहुंचेंगे। यहां वे परिजनों से मुलाकात करेंगे। शाम को दरभंगा जाएंगे तेजस्वी मधुबनी का कार्यक्रम पूरा करने के बाद तेजस्वी यादव करीब 5:20 बजे दरभंगा के लिए रवाना होंगे। शाम 6:30 बजे वे दरभंगा के पुरानी मुंसफी, वार्ड नंबर-25 पहुंचेंगे। यहां वे स्वर्गीय मो. फैज के पिता असद अहमद के आवास पर जाकर परिवार से मुलाकात करेंगे। रात 6:55 बजे दरभंगा से पटना के लिए निकलेंगे दरभंगा में कार्यक्रम पूरा करने के बाद तेजस्वी यादव शाम 6:55 बजे पटना के लिए रवाना होंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार वे रात करीब 10:05 बजे 1, पोलो रोड स्थित अपने आवास पहुंचेंगे। तेजस्वी यादव का आज का पूरा कार्यक्रम समय कार्यक्रम 10:45 AM पटना से प्रस्थान 11:45 AM हाजीपुर में राम नरेश राय के आवास पर मुलाकात 12:15 PM मधुबनी के लिए रवाना 3:30 PM मधुबनी जिला अतिथि गृह पहुंचेंगे 4:15 PM अतिथि गृह से प्रस्थान 4:50 PM अरैर में रंजन कुमार यादव के परिजनों से मुलाकात 5:20 PM मधुबनी से दरभंगा रवाना 6:30 PM दरभंगा में असद अहमद के परिवार से मुलाकात 6:55 PM दरभंगा से पटना के लिए रवाना 10:05 PM पटना स्थित आवास पहुंचने का कार्यक्रम बुधवार के प्रदर्शन के बाद आज अलग-अलग जिलों में रहेंगे तेजस्वी तेजस्वी यादव का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब बुधवार को पटना में RJD के राजभवन मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था और तेजस्वी यादव को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था। इसके अगले ही दिन तेजस्वी का कई जिलों का दौरा राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। हालांकि, जारी कार्यक्रम के मुताबिक गुरुवार की उनकी प्रमुख गतिविधियां लोगों और शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात पर केंद्रित रहेंगी। v

surbhi अगस्त 20, 2026 0
CJP founder Abhijit Dipke discusses Maharashtra government schools and speculation over 2029 Lok Sabha elections
2029 लोकसभा चुनाव लड़ेंगे अभिजीत दीपके? CJP संस्थापक ने दिया चौंकाने वाला जवाब

महाराष्ट्र में सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को लेकर अभियान चला रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 2029 लोकसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर फिलहाल कोई सीधा ऐलान नहीं किया है। हिंगोली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने चुनावी राजनीति की बजाय सरकारी स्कूलों की व्यवस्था सुधारने को अपनी प्राथमिकता बताया। ‘स्कूल सुधर गए तो चुनाव लड़ने का मुद्दा ही नहीं बचेगा’ अभिजीत दीपके से जब हिंगोली लोकसभा सीट से 2029 में चुनाव लड़ने की तैयारियों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अगर सरकार सभी सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधार देती है, तो उनके पास लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कोई मुद्दा ही नहीं बचेगा। उनका यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले सप्ताह ही उन्होंने महाराष्ट्र में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत वह ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों की समस्याओं को सामने ला रहे हैं। दीपके का कहना है कि कई ग्रामीण बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। उन्होंने सरकार से छात्रों के लिए आने-जाने की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई है। अधिकारियों और नेताओं के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की मांग दीपके ने महाराष्ट्र सरकार के सामने यह सवाल भी रखा कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों के लिए अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना अनिवार्य क्यों नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मंत्रियों और नेताओं से कम से कम एक दिन अपने बच्चों को गांव के सरकारी स्कूलों में भेजने की अपील की। उनके मुताबिक, ऐसा करने से उन्हें ग्रामीण छात्रों की वास्तविक समस्याओं और सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति को समझने का मौका मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार नहीं चाहते, क्योंकि गरीब परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलने से राजनीतिक समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है। स्कूल में शिक्षक के नशे में सोने का वीडियो किया था साझा दीपके ने हाल ही में एक जिला परिषद स्कूल का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था। उन्होंने दावा किया था कि वीडियो में स्कूल के प्रधानाध्यापक कथित तौर पर शराब के नशे में कक्षा में सोते नजर आए। उनके अनुसार, शिकायत के बाद अधिकारियों ने संबंधित शिक्षक को मंगलवार को निलंबित कर दिया। हालांकि, दीपके ने कहा कि जब तक स्कूल में नए शिक्षक की नियुक्ति नहीं होती, वह गांव नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने बताया कि स्कूल में चार शिक्षकों की आवश्यकता है, जबकि फिलहाल केवल दो शिक्षक कार्यरत हैं। उन्होंने दो और शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की है। साथ ही, आने वाले दिनों में चार-पांच अन्य स्कूलों का दौरा करने की बात भी कही है। चुनाव से ज्यादा शिक्षा पर फोकस? अभिजीत दीपके का ताजा बयान फिलहाल 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर किसी स्पष्ट राजनीतिक घोषणा के बजाय शिक्षा व्यवस्था को लेकर उनके अभियान पर केंद्रित दिखाई देता है। हालांकि, हिंगोली से उनका नाम चुनावी चर्चा में आने के बाद यह सवाल जरूर उठ रहा है कि क्या भविष्य में वह सीधे चुनावी राजनीति में उतरेंगे।  

surbhi अगस्त 19, 2026 0
Tamil Nadu government announces new cars and monthly financial support for state legislators and their staff
तमिलनाडु के विधायकों को मिलेगी नई कार, ड्राइवर के लिए ₹75 हजार और सहायक के लिए ₹25 हजार मासिक

तमिलनाडु: तमिलनाडु सरकार ने राज्य के सभी विधायकों को उनके विधानसभा क्षेत्रों में दौरे और जनसंपर्क के लिए नई कार उपलब्ध कराने का फैसला किया है. सरकार का कहना है कि विधायकों को अपने क्षेत्र में लगातार लोगों के बीच जाना पड़ता है और उनकी समस्याओं को समझने के लिए नियमित दौरे जरूरी हैं. इसी जरूरत को देखते हुए यह सुविधा देने की घोषणा की गयी है. विधानसभा में सरकार की ओर से बताया गया कि विधायकों को नई कार के साथ वाहन और ड्राइवर के खर्च के लिए हर महीने 75 हजार रुपये भी उपलब्ध कराये जाएंगे. इसके अलावा प्रत्येक विधायक के कार्यालय में एक सहायक रखने के लिए 25 हजार रुपये प्रतिमाह देने का प्रावधान किया गया है. यानी विधायकों को वाहन, ड्राइवर और कार्यालयी कामकाज के लिए अतिरिक्त सरकारी सहायता मिलेगी. विधानसभा क्षेत्र में आने-जाने में होगी सुविधा सरकार के अनुसार, विधायकों को अपने विधानसभा क्षेत्र में लगातार दौरे करने पड़ते हैं. उन्हें ग्रामीण इलाकों, स्थानीय कार्यक्रमों और जनता से जुड़े मुद्दों पर पहुंचना होता है. निजी वाहन या परिवहन की व्यवस्था पर निर्भर रहने के कारण कई बार उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है. नई कार मिलने के बाद विधायकों के लिए क्षेत्र में आवागमन आसान होगा. इससे वे जनता की समस्याओं को ज्यादा प्रभावी तरीके से सुन सकेंगे और स्थानीय स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों में भी आसानी से शामिल हो सकेंगे. विधायक जोतिमणि ने उठायी थी मांग सरकार का यह फैसला वीसीके विधायक जोतिमणि की उस मांग के बाद आया है, जिसमें उन्होंने विधायकों को सरकारी वाहन उपलब्ध कराने की मांग की थी. उनका कहना था कि स्थानीय निकायों के प्रमुखों को पहले से ही सरकारी वाहनों की सुविधा मिलती है. उन्होंने बताया कि नगर निकायों के अध्यक्ष, मेयर और डिप्टी मेयर को सरकारी गाड़ियां उपलब्ध करायी जाती हैं, जबकि विधायकों को ऐसी सुविधा नहीं मिलती. उनके मुताबिक, वाहन की व्यवस्था नहीं होने के कारण कई बार विधायकों के लिए अपने विधानसभा क्षेत्रों में समय पर पहुंचना मुश्किल हो जाता है. ड्राइवर और कार्यालय सहायक के लिए भी आर्थिक मदद सरकार के फैसले में केवल वाहन उपलब्ध कराने की बात नहीं है. विधायकों को गाड़ी और ड्राइवर के खर्च के लिए ₹75 हजार प्रति माह दिये जाएंगे. वहीं, विधायक कार्यालय में एक सहायक रखने के लिए ₹25 हजार मासिक की सहायता दी जाएगी. इस तरह क्षेत्रीय दौरे के साथ-साथ विधायक के कार्यालय के दैनिक कामकाज को व्यवस्थित करने के लिए भी सरकार की ओर से आर्थिक सहायता मिलेगी. पहले भी उठती रही है सरकारी कार की मांग मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विधायकों के लिए सरकारी वाहन उपलब्ध कराने की मांग पहले भी अलग-अलग सरकारों के सामने उठती रही है. डीएमके के एक वरिष्ठ विधायक ने बताया कि पहले भी इस तरह का प्रस्ताव सामने आया था, लेकिन आर्थिक स्थिति का हवाला देकर इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका. अब सरकार के इस फैसले के बाद तमिलनाडु के विधायकों को अपने विधानसभा क्षेत्रों में काम करने के लिए वाहन और कार्यालयी सहायता उपलब्ध होने का रास्ता साफ हो गया है.  

surbhi अगस्त 19, 2026 0
Prashant Kishor meets Bihar DGP after becoming Bankipur MLA to raise traffic, vendor extortion and drug concerns
बांकीपुर के विधायक बनते ही एक्शन में प्रशांत किशोर, DGP से मिले; ट्रैफिक, वेंडरों से कथित वसूली और नशे का मुद्दा उठाया

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव जीतकर विधायक बने प्रशांत किशोर ने शपथ लेने के अगले ही दिन क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं को लेकर सक्रियता दिखानी शुरू कर दी है। उन्होंने बिहार के डीजीपी विनय कुमार से मुलाकात कर बांकीपुर से जुड़े तीन अहम मुद्दे पुलिस प्रशासन के सामने रखे। प्रशांत किशोर ने ट्रैफिक व्यवस्था, वेंडरों से कथित वसूली और युवाओं में नशीले पदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर तत्काल कार्रवाई की जरूरत बताई। उनका कहना है कि इन समस्याओं का समाधान केवल तात्कालिक कार्रवाई से नहीं, बल्कि लंबे समय की ठोस योजना से होना चाहिए। ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने पर जोर डीजीपी के साथ बैठक में बांकीपुर की यातायात व्यवस्था प्रमुख मुद्दों में रही। प्रशांत किशोर ने कहा कि पटना के महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्रों में शामिल बांकीपुर में लगातार बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए दीर्घकालिक योजना बनाना जरूरी है। उन्होंने ट्रैफिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने और आने वाले वर्षों में स्थायी सुधार की दिशा में काम करने पर जोर दिया। वेंडरों से कथित वसूली का मामला उठाया प्रशांत किशोर ने क्षेत्र में अनियमित वेंडिंग व्यवस्था के साथ-साथ पुलिसकर्मियों द्वारा वेंडरों से कथित तौर पर पैसे लिए जाने की शिकायत भी डीजीपी के सामने रखी। उन्होंने इस मामले में उचित कार्रवाई और वेंडिंग व्यवस्था को व्यवस्थित करने की जरूरत बताई। प्रशांत किशोर के अनुसार, इस मुद्दे पर सरकार के साथ भी बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। युवाओं में नशे की समस्या पर चिंता बैठक में युवाओं और बच्चों के बीच नशीले पदार्थों के इस्तेमाल की शिकायत भी उठाई गई। प्रशांत किशोर ने पुलिस निगरानी मजबूत करने और ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की। उनका कहना है कि युवाओं को नशे से दूर रखना केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि क्षेत्र के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। विधायक बनने के बाद स्थानीय मुद्दों पर फोकस बांकीपुर उपचुनाव जीतने के बाद प्रशांत किशोर ने क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं को अपनी प्राथमिकता में शामिल किया है। रोजगार को लेकर भी वह पहले ही बड़ा दावा कर चुके हैं। उन्होंने बांकीपुर के कम से कम 10 हजार युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार दिलाने में मदद करने की बात कही है। अब देखना होगा कि डीजीपी के साथ हुई बैठक के बाद इन तीनों मुद्दों पर प्रशासन कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और बांकीपुर के लोगों को इसका कितना लाभ मिलता है।  

surbhi अगस्त 19, 2026 0
BJP President Nitin Nabin announces new national team with limited representation from Bihar leaders
नितिन नवीन की नई टीम में बिहार का प्रतिनिधित्व कमजोर? राष्ट्रीय संगठन में बड़े पद नहीं मिलने पर उठे सवाल

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा कर दी है। नई टीम को संगठनात्मक संतुलन और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर तैयार किए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन बिहार को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। बिहार से इस बार केवल तीन नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जगह मिली है। हालांकि, इनमें से किसी को भी राष्ट्रीय महामंत्री या राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसे शीर्ष पद की जिम्मेदारी नहीं मिली। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या बिहार को राष्ट्रीय संगठन में अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिला? बिहार से सिर्फ तीन नेताओं को जिम्मेदारी नई टीम में बिहार से वैश्य समुदाय से आने वाले सिद्धार्थ शंभू को राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया है। वहीं ऋतुराज सिन्हा को प्रकोष्ठ संकुल का सह संयोजक और शिवेश राम को अनुसूचित जाति मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी संगठन में ये महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं, लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चा इस बात को लेकर है कि बिहार से किसी नेता को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष या राष्ट्रीय महामंत्री का पद क्यों नहीं दिया गया। बिहार से लंबे समय से केंद्रीय संगठन में कई नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती रही हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद भी भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री रह चुके हैं। इसके बाद लंबे समय से बिहार के किसी नेता को इस स्तर की जिम्मेदारी नहीं मिली है। बांकीपुर चुनाव का ‘इफेक्ट’ होने की चर्चा नई टीम को लेकर राजनीतिक विश्लेषण का एक हिस्सा इसे हालिया बांकीपुर चुनाव के परिणामों से जोड़कर देख रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बांकीपुर में प्रशांत किशोर के जनसुराज को कुछ सवर्ण समुदायों के मतदाताओं का समर्थन मिलने की चर्चा भाजपा के भीतर भी हुई। हालांकि, यह कहना कि नई राष्ट्रीय टीम में किसी विशेष समुदाय को जगह नहीं मिलने का सीधा कारण चुनावी मतदान रहा, फिलहाल राजनीतिक आकलन और चर्चा के दायरे में है। भाजपा की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है जिसमें नई टीम के गठन को किसी खास चुनावी समूह के खिलाफ कार्रवाई से जोड़ा गया हो। बिहार के भूमिहार, राजपूत और ब्राह्मण प्रतिनिधित्व पर चर्चा नई टीम में बिहार से भूमिहार, राजपूत और ब्राह्मण समुदाय के नेताओं को शीर्ष राष्ट्रीय पद नहीं मिलने को लेकर भी राजनीतिक चर्चा शुरू हुई है। बिहार की राजनीति में जातीय और सामाजिक समीकरण हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं। भाजपा के लिए भी राज्य में अलग-अलग सामाजिक समूहों का समर्थन चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा रहा है। ऐसे में राष्ट्रीय संगठन में बिहार के प्रतिनिधित्व को लेकर पार्टी के अंदर अलग-अलग तरह के आकलन सामने आना स्वाभाविक है। लेकिन इसे सीधे तौर पर किसी समुदाय के खिलाफ राजनीतिक फैसला मानने से पहले पार्टी की आधिकारिक रणनीति और आने वाले समय में संगठनात्मक नियुक्तियों को देखना जरूरी होगा। पहले बिहार के कई नेताओं को मिली बड़ी जिम्मेदारियां बिहार से भाजपा के कई वरिष्ठ नेता राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। दिवंगत कैलाशपति मिश्र लंबे समय तक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे। पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और राधामोहन सिंह भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। रविशंकर प्रसाद राष्ट्रीय महामंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा रजनीश कुमार और ऋतुराज सिन्हा जैसे नेताओं को राष्ट्रीय मंत्री के स्तर पर संगठन में जिम्मेदारी मिली। रेणु देवी भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। इन नियुक्तियों के कारण बिहार की नई टीम में अपेक्षाकृत सीमित और छोटे पदों पर मौजूदगी को लेकर पार्टी के भीतर चर्चा होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्या बिहार को राष्ट्रीय संगठन में और जगह मिलेगी? नितिन नवीन की नई टीम में बिहार से तीन नेताओं की मौजूदगी जरूर है, लेकिन राष्ट्रीय महामंत्री और उपाध्यक्ष जैसे बड़े पदों पर प्रतिनिधित्व नहीं मिलने से पार्टी के प्रदेश नेताओं और समर्थकों के बीच सवाल उठ रहे हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले समय में संगठन में कोई अतिरिक्त नियुक्ति होती है या बिहार के नेताओं को दूसरी जिम्मेदारियों के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी भूमिका दी जाती है।  

surbhi अगस्त 18, 2026 0
Shehzad Poonawalla announces resignation from BJP and national spokesperson post citing personal and financial reasons
शहजाद पूनावाला ने बीजेपी से दिया इस्तीफा, बोले- ‘पार्टी की व्यवस्था छोड़ रहा हूं, विचार और व्यक्ति नहीं’

नई दिल्ली: बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन को पत्र लिखकर अपना इस्तीफा स्वीकार करने की अपील की है। पूनावाला के इस्तीफे के बाद बीजेपी की आंतरिक राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पूनावाला के मुताबिक, उन्होंने इससे पहले 30 जुलाई 2026 को आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों का हवाला देते हुए पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफे की पेशकश की थी। उस समय पार्टी ने उनका इस्तीफा तुरंत स्वीकार नहीं किया था और उन्हें अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कहा था। लंबी चर्चा के बाद लिया अंतिम फैसला अपने ताजा पत्र में शहजाद पूनावाला ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ विचार-विमर्श और गंभीर मंथन के बाद उन्होंने अपने फैसले पर कायम रहने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में हुई घटनाओं और जिन लोगों के बारे में उन्होंने पार्टी नेतृत्व को जानकारी दी थी, उसके बाद उन्होंने इस्तीफा देने का अंतिम फैसला किया। इस तरह पूनावाला अब बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद के साथ-साथ सक्रिय प्राथमिक सदस्यता से भी अलग होने की प्रक्रिया में हैं। पीएम मोदी समेत वरिष्ठ नेताओं का जताया आभार इस्तीफे के पत्र में पूनावाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संगठन महामंत्री बीएल संतोष के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं के प्रति उनके मन में किसी तरह की नाराजगी या आहत भावना नहीं है। पिछले पांच वर्षों में पार्टी की ओर से मिले मंच और अवसरों के लिए उन्होंने नेतृत्व का धन्यवाद किया। निजी क्षेत्र में जाने की तैयारी पूनावाला ने अपने इस्तीफे की वजह मुख्य रूप से आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों को बताया है। उन्होंने कहा कि अब वह निजी क्षेत्र में प्रवेश करेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बीजेपी से संगठनात्मक रूप से अलग होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के दृष्टिकोण तथा कार्यों का समर्थन करते रहेंगे। ‘व्यवस्था छोड़ रहा हूं, विचार और व्यक्ति नहीं’ शहजाद पूनावाला के इस्तीफे की सबसे अहम बात उनका यह बयान रहा कि वह “पार्टी की व्यवस्था छोड़ रहे हैं, लेकिन विचार और व्यक्ति नहीं।” इस बयान से साफ है कि पूनावाला ने संगठन से अलग होने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी की विचारधारा के प्रति अपना समर्थन बरकरार रखने की बात कही है। अब देखना होगा कि बीजेपी नेतृत्व उनके इस्तीफे को किस तरह स्वीकार करता है और आगे पार्टी में उनकी भूमिका क्या रहती है।  

surbhi अगस्त 17, 2026 0
BJP workers protest across India over Vande Mataram controversy involving Sonia Gandhi and Congress
वंदे मातरम् विवाद पर सियासी संग्राम तेज, सोनिया गांधी के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन; कांग्रेस ने कहा- माफी का सवाल नहीं

कोलकाता: स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर उठा विवाद अब राजनीतिक टकराव में बदल गया है। भारतीय जनता पार्टी और भारतीय जनता युवा मोर्चा ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन किया। बीजेपी ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी द्वारा वंदे मातरम् के गायन को बीच में रोकना राष्ट्रगीत का अपमान है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से इस आरोप को लेकर अलग रुख सामने आया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने सोनिया गांधी से माफी की मांग को खारिज करते हुए कहा कि माफी मांगने का सवाल ही नहीं उठता। इस बयान के बाद विवाद और तेज हो गया है। बंगाल में बीजेपी और भाजयुमो का विरोध प्रदर्शन वंदे मातरम् विवाद को लेकर पश्चिम बंगाल में बीजेपी और भाजयुमो ने कई जगह प्रदर्शन किए। उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी में भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने मशाल जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारियों ने सोनिया गांधी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के खिलाफ भी नारेबाजी की। कोलकाता में राज्य मंत्री इंद्रनील खां के नेतृत्व में भाजयुमो ने विरोध मार्च निकाला। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि राष्ट्रगीत की गरिमा के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। पुरुलिया में भी निकला विरोध मार्च पुरुलिया जिले के रघुनाथपुर में भी बीजेपी कार्यकर्ताओं ने विरोध मार्च निकाला। मार्च शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरते हुए खुदीराम मोड़ पहुंचा, जहां विरोध सभा आयोजित की गई। सभा में बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए वंदे मातरम् की गरिमा बनाए रखने की मांग की और कथित अपमान के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। बंकिम चंद्र के वंशज ने मांगी माफी विवाद के बीच राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने भी सोनिया गांधी से बिना शर्त माफी मांगने की अपील की है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी इस मामले पर कांग्रेस को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी की कार्रवाई से राष्ट्रगीत और उसके रचयिता दोनों का अपमान हुआ है। उन्होंने कहा कि इस घटना से बंगाल के लोगों में नाराजगी है। मिथुन चक्रवर्ती ने कहा- वंदे मातरम् देश का प्राण बीजेपी नेता और अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती से जब इस विवाद पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम् देश का प्राण है और जन गण मन देश की आत्मा।’ उन्होंने इस मुद्दे पर इससे ज्यादा टिप्पणी करने से इनकार किया। उनके बयान को भी बीजेपी के राष्ट्रवादी विमर्श के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है। राशिद अल्वी का पलटवार कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने बीजेपी की ओर से सोनिया गांधी से माफी की मांग को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी के माफी मांगने का सवाल ही नहीं उठता। अल्वी ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि 1937 में महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर के दौर में इसके दो अंतरों को अपनाए जाने की बात सामने आई थी। उनका तर्क है कि गीत के बाद के हिस्सों में धार्मिक संदर्भ हैं। विवाद के केंद्र में क्या है? दरअसल, स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के गायन को लेकर विवाद शुरू हुआ। बीजेपी का आरोप है कि सोनिया गांधी ने गीत के गायन को बीच में रुकवाया, जबकि कांग्रेस की ओर से इस घटना को लेकर बीजेपी के आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया है। अब यह विवाद राष्ट्रगीत की गरिमा, उसके ऐतिहासिक संदर्भ और राजनीतिक दलों के राष्ट्रवाद के दावों तक पहुंच गया है। बीजेपी इसे राष्ट्रीय सम्मान से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस इसके ऐतिहासिक और धार्मिक संदर्भों पर जोर दे रही है।  

surbhi अगस्त 17, 2026 0
Santosh Kumar Suman challenges Prashant Kishor over his promise to provide 10,000 jobs in Bankipur
चिराग के समर्थन पर संतोष सुमन का पलटवार, PK को दी 10 हजार नौकरी के वादे की चुनौती

पटना: बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर को लेकर एनडीए के भीतर अलग-अलग सुर सामने आने लगे हैं। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने प्रशांत किशोर के विकास और रोजगार के एजेंडे की तारीफ की, तो बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने उनके सामने सीधे तौर पर वादे पूरे करने की चुनौती रख दी। संतोष सुमन ने कहा कि प्रशांत किशोर ने बांकीपुर में विकास के नाम पर चुनाव नहीं जीता, बल्कि लोगों के बीच भ्रम पैदा करके जीत हासिल की। अब विधायक बनने के बाद उनकी असली परीक्षा शुरू हो गई है। उन्होंने खास तौर पर बांकीपुर के 10 हजार लोगों को रोजगार देने के वादे का जिक्र करते हुए कहा कि अब पीके को इसे जमीन पर उतारकर दिखाना चाहिए। चिराग ने किया था प्रशांत किशोर के एजेंडे का समर्थन स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पटना में चिराग पासवान ने प्रशांत किशोर को लेकर कहा था कि जो भी बिहार और बिहारियों के विकास तथा रोजगार की बात करेगा, वह उसका समर्थन करेंगे। चिराग के मुताबिक, प्रशांत किशोर जाति और धर्म की राजनीति से अलग विकास की बात कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि प्रशांत किशोर के सामने आने वाले वर्षों में कई चुनौतियां होंगी और उन्हें अपने वादों पर खरा उतरना होगा। संतोष सुमन बोले- विकास की बात आसान, लागू करना मुश्किल चिराग के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए संतोष सुमन ने कहा कि विकास की बात करना आसान है, लेकिन उसे जमीन पर उतारना बड़ी चुनौती है। उनके मुताबिक, प्रशांत किशोर ने बांकीपुर की जनता के सामने क्षेत्र के विकास को लेकर बड़े दावे किए हैं। अब अगले चार वर्षों में यह साबित करना होगा कि वे अपने वादों को कितना पूरा कर पाते हैं। 10 हजार नौकरियों का वादा बना सबसे बड़ा मुद्दा संतोष सुमन ने प्रशांत किशोर के रोजगार संबंधी वादे को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि अगर पीके ने बांकीपुर के 10 हजार लोगों को नौकरी देने की बात कही है, तो अब उन्हें यह करके दिखाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में 10 हजार लोगों को रोजगार मिलता है तो उन्हें भी खुशी होगी, क्योंकि जनता के हित में होने वाला हर काम लोकतंत्र के लिए सकारात्मक है। यानी संतोष सुमन का संदेश साफ है—चुनावी दावों और राजनीतिक भाषणों से आगे बढ़कर अब काम का परिणाम दिखाना होगा। 'सोना बनकर निकलेंगे या पिघल जाएंगे' प्रशांत किशोर के विधायक बनने को लेकर संतोष सुमन ने कहा कि अब उनकी वास्तविक राजनीतिक परीक्षा शुरू हुई है। उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि लोकतंत्र की परीक्षा में प्रशांत किशोर सोना बनकर निकलेंगे या पिघल जाएंगे, यह वक्त बताएगा। उनका कहना है कि चुनाव जीतना एक उपलब्धि हो सकती है, लेकिन जनता से किए वादों को पूरा करना उससे कहीं बड़ी जिम्मेदारी है। बांकीपुर में बीजेपी को हराकर विधायक बने हैं PK प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी को हराकर जीत दर्ज की और जन सुराज पार्टी के पहले विधायक बने। इस जीत के बाद बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका और प्रभाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वहीं, बीजेपी की हार के बाद एनडीए के भीतर भी रणनीति और भविष्य की राजनीति को लेकर मंथन शुरू हुआ है। ऐसे समय में चिराग पासवान का प्रशांत किशोर के विकास एजेंडे का समर्थन और संतोष सुमन का उन पर सवाल उठाना राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

surbhi अगस्त 17, 2026 0
Prashant Kishor addressing supporters during a political rally and targeting Bihar Chief Minister Samrat Choudhary
प्रशांत किशोर का बड़ा दावा: ‘बिहार में सरकार का चरित्र बदला, अब नेतृत्व भी बदलेगा’; सम्राट चौधरी पर साधा निशाना

पटना: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजे के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। जन सुराज के विधायक प्रशांत किशोर ने दावा किया है कि उपचुनाव के परिणाम ने बिहार सरकार के कामकाज और राजनीतिक रुख पर असर डाला है। उन्होंने कहा कि सरकार का चरित्र बदलना शुरू हो गया है और आने वाले समय में नेतृत्व में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। बांकीपुर में आभार यात्रा के दौरान आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि उपचुनाव के नतीजे के बाद सरकार के बयानों और प्राथमिकताओं में बदलाव नजर आने लगा है। ‘अब एनकाउंटर की बात नहीं हो रही’ प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम आने के बाद से बिहार में एनकाउंटर और ‘हाफ एनकाउंटर’ जैसे बयानों की चर्चा कम हुई है। उन्होंने दावा किया कि पहले जिस तरह जाति और धर्म के आधार पर कार्रवाई की बातें कही जा रही थीं, अब सरकार का फोकस दूसरी चीजों पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एनकाउंटर के नाम पर जिन लोगों की हत्या हुई, उनके परिवारों को अब मुआवजा और नौकरी देने की बात की जा रही है तथा दोषियों पर कार्रवाई की चर्चा हो रही है। हालांकि, प्रशांत किशोर के ये आरोप और दावे राजनीतिक बयान के तौर पर सामने आए हैं। इन पर सरकार या संबंधित पक्ष का विस्तृत जवाब इस खबर में उपलब्ध नहीं है। ‘अब फैक्ट्रियों और रोजगार की बात हो रही’ प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर के परिणाम के बाद सरकार के राजनीतिक संदेश में बदलाव दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक, अब मुख्यमंत्री की ओर से रात 11 बजे तक पढ़ाई की व्यवस्था और बिहार में फैक्ट्रियां लगाने तथा रोजगार पैदा करने जैसी बातें कही जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के रुख में बदलाव कितना स्थायी और कितना ईमानदार है, यह आने वाला समय बताएगा। लेकिन लोगों को यह बदलाव दिखाई देने लगा है। ‘सम्राट चौधरी को जाना ही पड़ेगा’ प्रशांत किशोर ने अपने भाषण में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर उपचुनाव से पहले ही उन्होंने कहा था कि यदि बीजेपी यहां से हारती है तो नेतृत्व में बदलाव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक गलियारों में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है और उनका मानना है कि सम्राट चौधरी को पद छोड़ना पड़ेगा। प्रशांत किशोर ने यह भी दावा किया कि अधिकतम उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव तक मौजूदा नेतृत्व को समय मिल सकता है, लेकिन उसके बाद बदलाव तय है। हालांकि, यह प्रशांत किशोर का राजनीतिक आकलन और दावा है। नेतृत्व परिवर्तन को लेकर सरकार या बीजेपी की ओर से किसी आधिकारिक फैसले की जानकारी इस रिपोर्ट में नहीं है। ‘लोगों के वोट की ताकत दिख रही है’ प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर के मतदाताओं के फैसले ने सरकार को अपना राजनीतिक रुख बदलने पर मजबूर किया है। उन्होंने इसे लोगों के वोट की ताकत बताया। उन्होंने कहा कि फिलहाल वह विधायक के तौर पर अपना काम शुरू करने से पहले क्षेत्र के लोगों का आभार व्यक्त कर रहे हैं। आने वाले समय में वह विधायक की भूमिका में सक्रिय रूप से काम करेंगे। बिहार की राजनीति में बढ़ेगी हलचल? प्रशांत किशोर के बयान ऐसे समय आए हैं जब बिहार की राजनीति में नेतृत्व, कानून-व्यवस्था, रोजगार और विकास जैसे मुद्दों पर राजनीतिक दल एक-दूसरे को घेर रहे हैं। उनका दावा कि सरकार का ‘चरित्र’ बदल रहा है और नेतृत्व भी बदलेगा, आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है। हालांकि, नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।  

surbhi अगस्त 17, 2026 0
Mallikarjun Kharge raises Haldwani purification ritual controversy in Rajya Sabha as J P Nadda assures investigation
मल्लिकार्जुन खरगे के मंच के ‘शुद्धिकरण’ पर संसद में हंगामा, बोले- SC होने के कारण हुआ अपमान; नड्डा ने दिया जांच का भरोसा

उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस की ‘विजय शंखनाद रैली’ के बाद रामलीला मैदान में कथित तौर पर कराए गए ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। 8 अगस्त को रैली में कांग्रेस के राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष Mallikarjun Kharge शामिल हुए थे। उनके कार्यक्रम के बाद मैदान में शुद्धिकरण यज्ञ कराए जाने का मामला गुरुवार को राज्यसभा में उठाया गया। खरगे ने सदन में कहा कि वह अपने अनुसूचित जाति होने को मुद्दा नहीं बनाते, लेकिन उनके जाने के बाद मंच का शुद्धिकरण किया जाना उनके सम्मान पर चोट है। उन्होंने इसे संविधान की भावना से भी जोड़ते हुए सवाल उठाया। खरगे बोले- शुद्धिकरण करके मेरा अपमान किया गया राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही खरगे ने हल्द्वानी की घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मैं अपने SC होने को मुद्दा नहीं बनाता, शुद्धिकरण करके मेरा अपमान किया गया।” खरगे के इस बयान के बाद सदन में कांग्रेस सांसदों ने विरोध जताया। उनका कहना था कि किसी व्यक्ति की जाति के आधार पर उसके जाने के बाद किसी सार्वजनिक स्थान का शुद्धिकरण किया जाना गंभीर सामाजिक और संवैधानिक सवाल खड़ा करता है। सभापति ने कहा- खरगे का अपमान सबका अपमान मामले पर राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर खरगे का अपमान हुआ है तो यह केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि सभी का अपमान है। इसके बाद खरगे ने कहा कि इस तरह की घटना संविधान का भी अपमान है। इस मुद्दे को लेकर सदन में कुछ देर तक राजनीतिक माहौल गरम रहा। जेपी नड्डा ने घटना की निंदा की केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता J. P. Nadda ने खरगे के आरोपों पर सरकार की ओर से प्रतिक्रिया दी। नड्डा ने कहा कि ऐसी गतिविधियों का बीजेपी समर्थन नहीं करती। उन्होंने घटना को दुखद बताते हुए कहा कि यह केवल कांग्रेस या खरगे से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि सभी के लिए चिंता का विषय है। नड्डा ने मामले की जांच कराने का भरोसा भी दिया। रैली के बाद क्यों कराया गया ‘शुद्धिकरण’? मामला 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई कांग्रेस की रैली से जुड़ा है। रैली समाप्त होने और खरगे के वहां से जाने के बाद श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास की ओर से कथित तौर पर शुद्धिकरण यज्ञ कराया गया। संगठन से जुड़े लोगों ने खरगे को सनातन और हिंदू संगठनों का विरोधी बताते हुए उनके पुराने कथित बयानों का हवाला दिया। उनका तर्क था कि जिस मैदान में रामलीला का आयोजन होता है, वहां ऐसे व्यक्ति के कार्यक्रम के बाद शुद्धिकरण किया जाना चाहिए। हालांकि, इस घटना को लेकर अब राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस इसे खरगे के अपमान, जातिगत भेदभाव और संविधान के मूल्यों से जोड़ रही है, जबकि संगठन अपने धार्मिक और वैचारिक तर्क दे रहा है। अब सरकार की ओर से जांच के भरोसे के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस पूरे मामले में जांच के दौरान क्या तथ्य सामने आते हैं। मामला क्यों अहम है? हल्द्वानी का यह विवाद केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम के बाद हुए कथित अनुष्ठान तक सीमित नहीं रह गया है। यह जातिगत सम्मान, धार्मिक आस्था, राजनीतिक बयानबाजी और संविधान में समानता के सिद्धांतों को लेकर नई बहस का कारण बन गया है। संसद में मामला उठने के बाद अब इस विवाद पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों की नजर भी बनी हुई है।  

surbhi अगस्त 13, 2026 0
Prashant Kishor addresses Bankipur voters and promises private sector jobs for 10,000 educated unemployed youths.
MLA बनते ही प्रशांत किशोर का बड़ा ऐलान, बांकीपुर के 10 हजार पढ़े-लिखे युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में नौकरी दिलाने का दावा

बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के युवाओं को लेकर बड़ा रोजगार वादा किया है। जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि वह बांकीपुर से विधायक बनते हैं, तो क्षेत्र के कम से कम 10 हजार पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को निजी क्षेत्र में नौकरी दिलाने की व्यवस्था करने की कोशिश करेंगे। प्रशांत किशोर ने कहा कि उनका फोकस सिर्फ चुनाव जीतने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने पर भी रहेगा। उन्होंने बांकीपुर के पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को निजी कंपनियों में रोजगार से जोड़ने की बात कही। 10 हजार युवाओं को रोजगार दिलाने का लक्ष्य जनता को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के कम से कम 10 हजार युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में नौकरी दिलाने की व्यवस्था करने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इसके लिए रोजगार उपलब्ध कराने वाली निजी कंपनियों और युवाओं के बीच संपर्क स्थापित करने की कोशिश की जाएगी। उनके इस ऐलान के बाद बांकीपुर के युवाओं के बीच रोजगार का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। खासकर पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं के लिए निजी क्षेत्र में नौकरी उपलब्ध कराने का दावा कितना प्रभावी होगा, यह आगे देखने वाली बात होगी। रोजगार के मुद्दे पर फोकस बिहार में बेरोजगारी और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर लंबे समय से राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे हैं। ऐसे में प्रशांत किशोर का यह ऐलान बांकीपुर के मतदाताओं के बीच रोजगार को केंद्र में लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि 10 हजार युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार दिलाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए किस तरह की योजना बनाई जाएगी, किन कंपनियों से संपर्क किया जाएगा और नौकरी के लिए किन योग्यताओं को आधार बनाया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। वीडियो में क्या बोले प्रशांत किशोर? जनता को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार की व्यवस्था करने की बात कही। उन्होंने कम से कम 10 हजार युवाओं को निजी क्षेत्र में नौकरी दिलाने की कोशिश का भरोसा जताया। अब इस घोषणा के बाद बांकीपुर के युवाओं की प्रतिक्रिया और राजनीतिक स्तर पर इसकी चर्चा पर नजर रहेगी। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि चुनावी वादे के रूप में किए गए इस ऐलान को आगे चलकर किस तरह की ठोस योजना में बदला जाता है।  

surbhi अगस्त 12, 2026 0
BJP leaders addressing a press conference over the Jharkhand student protest and police action
झारखंड के छात्र आंदोलन और लाठीचार्ज को राष्ट्रीय मुद्दा बनाएगी भाजपा, देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस

रांची: झारखंड में पिछले 16-17 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन और सोमवार को विधानसभा घेराव के दौरान हुए लाठीचार्ज को लेकर भाजपा अब आक्रामक रणनीति अपनाने जा रही है. पार्टी ने झारखंड के छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का फैसला किया है. भाजपा का आरोप है कि छात्रों की मांगों को सुनने के बजाय सरकार ने बल प्रयोग का रास्ता अपनाया. देशभर में भाजपा नेता करेंगे प्रेस कॉन्फ्रेंस भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर मंगलवार को देश के अलग-अलग राज्यों में पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. इसके जरिए झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन, JPSC-JSSC परीक्षा विवाद और विधानसभा घेराव के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा. पार्टी ने सभी प्रदेश इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे छात्र आंदोलन के समर्थन में अपनी बात मजबूती से रखें और झारखंड की घटना को देशभर के सामने रखें. राहुल गांधी और कांग्रेस को घेरने की तैयारी भाजपा ने इस पूरे मामले में कांग्रेस और राहुल गांधी को भी निशाने पर लेने की तैयारी की है. पार्टी नेताओं का कहना है कि झारखंड में कांग्रेस गठबंधन की सरकार है और ऐसे में छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर कांग्रेस को जवाब देना चाहिए. भाजपा का आरोप है कि राज्य सरकार युवाओं की मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है. पार्टी छात्र आंदोलन, कथित परीक्षा गड़बड़ी और लाठीचार्ज को लेकर सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ाने की तैयारी में है. झारखंड में भाजपा ने बुलाया बंद लाठीचार्ज के विरोध में भाजपा ने झारखंड बंद का आह्वान भी किया है. मंगलवार को पार्टी कार्यकर्ताओं के सड़कों पर उतरने की तैयारी है. भाजपा नेताओं ने छात्रों पर हुए बल प्रयोग की निंदा करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. पार्टी का कहना है कि JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से छात्र आंदोलन कर रहे हैं. ऐसे में उनकी मांगों का समाधान बातचीत और जांच के जरिए किया जाना चाहिए. विधानसभा घेराव के दौरान हुआ था लाठीचार्ज JPSC-JSSC परीक्षा विवाद और नियुक्ति प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी को लेकर छात्र पिछले करीब दो सप्ताह से आंदोलन कर रहे हैं. सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा घेराव के लिए रांची पहुंचे थे. प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी. स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस की ओर से लाठीचार्ज किया गया. इस कार्रवाई में कई छात्रों के घायल होने की बात सामने आयी. अब भाजपा इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर हमलावर है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर उठाकर कांग्रेस नेतृत्व को घेरने की रणनीति बना रही है.  

kalpana अगस्त 11, 2026 0
Bihar Chief Minister Samrat Choudhary leads Tiranga Yatra in Patna as JDU deputy CMs remain absent from the government event.
तिरंगा यात्रा पर सियासी सवाल: सरकारी कार्यक्रम में JDU के दोनों डिप्टी सीएम क्यों नहीं पहुंचे? सम्राट चौधरी के साथ मंच पर दिखी दूरी

पटना: बिहार में 'हर घर तिरंगा अभियान 2026' के तहत निकाली गई तिरंगा यात्रा अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। कार्यक्रम राज्य सरकार की ओर से आयोजित किया गया था और इसके लिए बिहार कैबिनेट ने 6 करोड़ 12 लाख रुपये के खर्च को मंजूरी दी थी। इसके बावजूद 10 अगस्त को पटना में आयोजित मुख्य तिरंगा यात्रा में जेडीयू कोटे के दोनों उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव नजर नहीं आए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में निकली इस यात्रा में दोनों उपमुख्यमंत्रियों की गैरमौजूदगी ने एनडीए गठबंधन के भीतर राजनीतिक समीकरणों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, दोनों नेताओं की अनुपस्थिति के अलग-अलग कारण बताए गए हैं और इसे लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है कि उनकी गैरमौजूदगी राजनीतिक असहमति की वजह से थी। सरकारी कार्यक्रम था, फिर भी JDU के दोनों डिप्टी CM अनुपस्थित यह तिरंगा यात्रा बीजेपी के संगठनात्मक कार्यक्रम के तौर पर नहीं, बल्कि राज्य सरकार के 'हर घर तिरंगा अभियान 2026' के तहत आयोजित की गई थी। बिहार कैबिनेट ने अभियान के लिए 6 करोड़ 12 लाख रुपये के व्यय को मंजूरी दी थी। कार्यक्रम के तहत पटना समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में तिरंगा यात्रा और रैलियां आयोजित करने की योजना बनाई गई थी। राजधानी पटना में 10 अगस्त को आयोजित मुख्य यात्रा का नेतृत्व मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया। यात्रा जेपी गोलंबर से शुरू होकर कारगिल चौक तक गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग और सरकारी तंत्र से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे, लेकिन जेडीयू के दोनों उपमुख्यमंत्रियों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया। नेम प्लेट लगी, फिर हटानी पड़ी कार्यक्रम स्थल पर विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव के नाम की नेम प्लेट लगाए जाने की बात भी सामने आई। इससे संकेत मिला कि दोनों नेताओं की कार्यक्रम में मौजूदगी की उम्मीद थी। लेकिन दोनों के नहीं पहुंचने के बाद उनकी नेम प्लेट हटा दी गई। इस घटनाक्रम को लेकर विपक्ष ने एनडीए सरकार पर सवाल उठाए और इसे गठबंधन के भीतर मतभेद से जोड़कर देखा। हालांकि, केवल किसी कार्यक्रम में नेताओं की अनुपस्थिति को राजनीतिक मतभेद का निश्चित प्रमाण नहीं माना जा सकता। दोनों नेताओं की गैरमौजूदगी के पीछे बताए गए व्यक्तिगत कारणों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव की गैरमौजूदगी की क्या वजह बताई गई? उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के बारे में बताया गया कि वह उस समय पटना से बाहर थे। वहीं, दूसरे उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के कार्यक्रम में शामिल नहीं होने के पीछे स्वास्थ्य संबंधी कारण बताया गया। यही वजह है कि फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों नेताओं ने जानबूझकर कार्यक्रम से दूरी बनाई। हालांकि, राजनीतिक हलकों में इसे लेकर सवाल जरूर उठ रहे हैं कि अगर यह पूरी तरह सरकारी कार्यक्रम था, तो गठबंधन के दोनों प्रमुख सहयोगी नेताओं की मौजूदगी क्यों नहीं हुई। कला एवं संस्कृति विभाग ने संभाली थी जिम्मेदारी तिरंगा यात्रा के आयोजन की जिम्मेदारी कला एवं संस्कृति विभाग को दी गई थी। विभाग की ओर से कार्यक्रम की रूपरेखा और आयोजन की तैयारियां की गई थीं। 10 अगस्त को पटना में आयोजित मुख्य यात्रा जेपी गोलंबर से शुरू हुई और कारगिल चौक तक पहुंची। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यात्रा का नेतृत्व किया। यानी आयोजन का स्वरूप सरकारी था, जबकि पिछले वर्ष आयोजित तिरंगा यात्रा का स्वरूप अलग था। 2025 में बीजेपी ने अपने स्तर पर निकाली थी तिरंगा यात्रा साल 2025 में भी बिहार में तिरंगा यात्रा निकाली गई थी, लेकिन उस समय इसका आयोजन बीजेपी की ओर से पार्टी स्तर पर किया गया था। उस वक्त बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार थे और सम्राट चौधरी तथा विजय कुमार सिन्हा उपमुख्यमंत्री थे। बीजेपी से जुड़े सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि उस समय पार्टी की ओर से यात्रा के लिए सरकारी फंड की मांग की गई थी, लेकिन सरकारी खर्च से आयोजन की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद बीजेपी ने अपने संगठनात्मक स्तर पर यात्रा आयोजित की। 2026 में स्थिति अलग है। इस बार 'हर घर तिरंगा अभियान' को राज्य सरकार के कार्यक्रम के तौर पर आयोजित किया गया और इसके लिए कैबिनेट से बजट को मंजूरी मिली। क्या JDU की दूरी के पीछे राजनीतिक संदेश है? यही वह सवाल है जिसने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक बहस का विषय बना दिया है। वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश अश्क के मुताबिक, जेडीयू लंबे समय से बीजेपी के साथ सत्ता में है, लेकिन पार्टी अपनी सेक्युलर छवि को लेकर सतर्क रहती है और ऐसे कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखती है, जहां उसे अपनी राजनीतिक पहचान प्रभावित होने की आशंका हो। हालांकि, यह एक राजनीतिक विश्लेषण है, आधिकारिक तौर पर जेडीयू ने यह नहीं कहा है कि दोनों उपमुख्यमंत्रियों की अनुपस्थिति का कारण वैचारिक या राजनीतिक असहमति थी। गठबंधन के लिए क्या मायने रखता है यह घटनाक्रम? एनडीए सरकार में बीजेपी और जेडीयू के बीच सत्ता साझेदारी के लिहाज से दोनों उपमुख्यमंत्रियों की अनुपस्थिति निश्चित तौर पर चर्चा का विषय बनी है। लेकिन इसके आधार पर गठबंधन में दरार की कोई ठोस पुष्टि नहीं होती। एक तरफ कार्यक्रम का सरकारी स्वरूप और दूसरी तरफ जेडीयू के दोनों प्रमुख चेहरों की गैरमौजूदगी राजनीतिक सवाल जरूर खड़े करती है। दूसरी ओर, दोनों नेताओं की अनुपस्थिति के लिए व्यक्तिगत कारण भी बताए गए हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले सरकारी और राजनीतिक कार्यक्रमों में बीजेपी और जेडीयू के प्रमुख नेताओं की भागीदारी किस तरह रहती है। यही घटनाक्रम बताएगा कि 10 अगस्त की तिरंगा यात्रा महज संयोग थी या इसके पीछे वास्तव में कोई राजनीतिक संदेश भी छिपा था।  

surbhi अगस्त 11, 2026 0
Indian Parliament building as government prepares Kerala name change and NCDC funding bills amid opposition protests.
शाह के बयान पर विपक्ष अड़ा, आज ‘केरलम’ नाम और एनसीडीसी फंडिंग पर 2 बड़े विधेयक; संसद में फिर टकराव के आसार

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के अंतिम दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग पर विपक्ष अब भी कायम है। इसी बीच केंद्र सरकार सोमवार को लोकसभा में दो महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इनमें पहला केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने से संबंधित है, जबकि दूसरा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम यानी एनसीडीसी की वित्तीय शक्तियों का विस्तार करने से जुड़ा है। मॉनसून सत्र के अब केवल कुछ दिन शेष हैं। ऐसे में विपक्ष की मांग और सरकार के विधायी एजेंडे के बीच टकराव की स्थिति बनने की संभावना जताई जा रही है। अमित शाह के बयान की मांग पर विपक्ष अड़ा कांग्रेस समेत विपक्षी दल 20 जुलाई को संसद तक मार्च कर रहे छात्रों और युवाओं के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से संसद में बयान की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि इस मुद्दे पर गृह मंत्री की चुप्पी स्वीकार्य नहीं है। विपक्ष का कहना है कि संसद में इस मामले पर सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। जयराम रमेश ने 13 दिसंबर 2023 को संसद में हुए सुरक्षा उल्लंघन का भी उल्लेख किया। उनका आरोप है कि उस समय भी विपक्ष ने गृह मंत्री के बयान की मांग की थी, लेकिन उनकी ओर से सदन में बयान नहीं दिया गया था। विपक्ष का कहना है कि इस बार भी ऐसी स्थिति नहीं दोहराई जानी चाहिए। मानसून सत्र के आखिरी दिनों में बढ़ सकता है हंगामा संसद के मानसून सत्र में पहले से ही कई मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस और गतिरोध देखने को मिला है। अब सत्र के अंतिम चरण में गृह मंत्री के बयान की मांग के साथ दो महत्वपूर्ण विधेयकों को लोकसभा में पेश किए जाने की तैयारी है। ऐसे में सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वहीं विपक्ष अपनी मांग को लेकर दबाव बनाए रखने की रणनीति पर आगे बढ़ सकता है। केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव सरकार सोमवार को लोकसभा में ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ पेश करने की तैयारी में है। इसके जरिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन करने का प्रस्ताव है। प्रस्ताव पारित होने के बाद राज्य का आधिकारिक नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ किए जाने का रास्ता साफ होगा। केरल विधानसभा पहले ही राज्य का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित कर चुकी है। इसके बाद केंद्र सरकार की ओर से भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दी जा चुकी है। अब अंतिम प्रक्रिया संसद की मंजूरी से जुड़ी है। यदि विधेयक संसद से पारित होता है और आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होती है, तो राज्य का आधिकारिक नाम ‘केरलम’ हो जाएगा। एनसीडीसी की फंडिंग शक्तियों में बड़ा बदलाव दूसरा महत्वपूर्ण प्रस्ताव राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 है। इसके जरिए एनसीडीसी की वित्तीय सहायता व्यवस्था का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव है। मौजूदा व्यवस्था में एनसीडीसी मुख्य रूप से सहकारी समितियों से जुड़ी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है। प्रस्तावित बदलाव के बाद वह सहकारी विकास से जुड़ी अन्य संस्थाओं को भी सीधे ऋण और अनुदान उपलब्ध करा सकेगा। इसके अलावा केंद्र सरकार की मंजूरी से ऐसी संस्थाओं में इक्विटी निवेश का रास्ता भी खुल सकता है। किन संस्थाओं को मिल सकता है लाभ? सरकार का तर्क है कि सहकारी क्षेत्र के विस्तार के साथ ऐसी कई संस्थाएं सामने आई हैं, जो सहकारी समितियों को तकनीक, बुनियादी ढांचे, प्रसंस्करण, विपणन और वित्तीय सेवाओं जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं। प्रस्तावित संशोधन के बाद ऐसी संस्थाओं को भी वित्तीय सहायता के दायरे में लाने की व्यवस्था की जा सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं होगा कि हर संस्था स्वतः एनसीडीसी की फंडिंग के लिए पात्र हो जाएगी। संस्था का सहकारी विकास से जुड़ा होना जरूरी होगा। फंड के इस्तेमाल पर निगरानी की व्यवस्था प्रस्तावित बदलावों में वित्तीय सहायता के उपयोग की निगरानी के लिए ऑडिट और रिपोर्टिंग जैसी व्यवस्थाओं पर भी जोर दिया गया है। इसके अलावा खाद्य वस्तुओं की परिभाषा का दायरा बढ़ाने और औद्योगिक वस्तुओं की वित्तीय सहायता से जुड़ी कुछ भौगोलिक पाबंदियों को हटाने का भी प्रस्ताव है। एनसीडीसी को बैंकों और वित्तीय संस्थानों से ऋण संबंधी जानकारी जुटाने और साझा करने की शक्ति दिए जाने का भी प्रावधान प्रस्तावित है। अब नजर संसद की कार्यवाही पर एक तरफ विपक्ष अमित शाह के बयान की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर सरकार के एजेंडे में केरल के नाम परिवर्तन और एनसीडीसी की फंडिंग शक्तियों से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक शामिल हैं। ऐसे में सोमवार की संसद कार्यवाही राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब देखना होगा कि विपक्ष की मांग और सरकार के विधायी एजेंडे के बीच सदन में सहमति बनती है या एक बार फिर जोरदार हंगामे के कारण कार्यवाही प्रभावित होती है।  

surbhi अगस्त 10, 2026 0
Tejashwi Yadav raises questions over alleged evidence and action in the Bihar Srijan scam during a political debate.
Srijan Scam: सृजन घोटाले पर तेजस्वी यादव का BJP पर बड़ा हमला, पूछा- सबूत मिले तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

पटना: बिहार का बहुचर्चित सृजन घोटाला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने इस मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सवाल उठाते हुए जांच में सामने आए कथित साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई नहीं होने का मुद्दा उठाया है। तेजस्वी यादव का आरोप है कि सृजन घोटाले की जांच के दौरान ऐसे दस्तावेज और साक्ष्य सामने आए थे, जिनसे घोटाले से जुड़े लोगों और कुछ प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों के बीच कथित संपर्क या लेनदेन के संकेत मिलते थे। उनका सवाल है कि अगर जांच एजेंसियों के पास ऐसे साक्ष्य मौजूद थे, तो संबंधित लोगों के खिलाफ आगे कार्रवाई क्यों नहीं की गई। हालांकि, ये दावे तेजस्वी यादव के राजनीतिक आरोप हैं और इनके संबंध में संबंधित भाजपा नेताओं या जांच एजेंसियों की विस्तृत प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के समय तक सामने नहीं आई है। सृजन घोटाले पर फिर गरमाई बिहार की राजनीति भागलपुर से सामने आया सृजन घोटाला बिहार के सबसे चर्चित वित्तीय घोटालों में शामिल रहा है। मामले में सरकारी विभागों और संस्थानों की रकम को कथित तौर पर फर्जी बैंक खातों और अन्य वित्तीय माध्यमों के जरिए स्थानांतरित किए जाने का आरोप सामने आया था। घोटाले का खुलासा होने के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हुआ। मामले की जांच आगे बढ़ी और केंद्रीय जांच एजेंसियां भी इसके अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल में शामिल हुईं। समय-समय पर विपक्ष इस मामले को लेकर तत्कालीन और मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व पर सवाल उठाता रहा है। अब तेजस्वी यादव के ताजा बयान ने पुराने मामले को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। तेजस्वी ने जांच और कार्रवाई के तरीके पर उठाया सवाल तेजस्वी यादव का मुख्य सवाल जांच के दौरान सामने आए कथित साक्ष्यों और उसके बाद हुई कार्रवाई को लेकर है। उनका कहना है कि यदि जांच के दौरान प्रभावशाली लोगों और सृजन घोटाले से जुड़े आरोपियों के बीच संबंधों के संकेत या प्रमाण मिले थे, तो कार्रवाई सभी संबंधित लोगों तक क्यों नहीं पहुंची। तेजस्वी ने इस आधार पर जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया और आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रभाव रखने वाले कुछ लोगों को कथित तौर पर बचाया गया। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक संलिप्तता या दोष सिद्ध होने का निष्कर्ष केवल राजनीतिक आरोपों के आधार पर नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए जांच एजेंसियों के आधिकारिक निष्कर्ष और न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण हैं। क्या है सृजन घोटाला? सृजन घोटाला मुख्य रूप से बिहार के भागलपुर में सरकारी धन के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा मामला है। आरोपों के मुताबिक सरकारी विभागों और संस्थानों की रकम को ऐसे बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया, जिनका संबंध सृजन महिला विकास सहयोग समिति से बताया गया। लंबे समय तक इन कथित वित्तीय अनियमितताओं का पता नहीं चल पाया। बाद में बैंक खातों और सरकारी रिकॉर्ड की जांच के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आने के बाद मामला गंभीर जांच के दायरे में आया। इसके बाद राज्य स्तर पर कार्रवाई के साथ केंद्रीय जांच एजेंसियों ने भी मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की। राजनीतिक आरोपों के बीच भाजपा के जवाब पर नजर तेजस्वी यादव के ताजा बयान के बाद अब भाजपा की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। राजनीतिक रूप से यह मुद्दा विपक्ष के लिए सरकार और जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाने का एक और आधार बन सकता है। दूसरी ओर, किसी भी आरोप की वास्तविकता तय करने के लिए जांच एजेंसियों की रिपोर्ट, दस्तावेजी साक्ष्य और अदालतों में हुई कार्रवाई को देखना जरूरी होगा। चुनावी माहौल में फिर बड़ा मुद्दा बन सकता है सृजन घोटाला बिहार में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के बीच सृजन घोटाले का दोबारा चर्चा में आना महत्वपूर्ण है। भ्रष्टाचार, सरकारी धन की सुरक्षा और जांच एजेंसियों की निष्पक्षता जैसे मुद्दे चुनावी राजनीति में पहले भी प्रमुख रहे हैं। तेजस्वी यादव के बयान से संकेत मिलता है कि RJD आने वाले समय में सृजन घोटाले को राजनीतिक मुद्दे के तौर पर और जोर से उठा सकती है। अब निगाहें भाजपा की प्रतिक्रिया और जांच एजेंसियों की ओर से सामने आने वाले आधिकारिक तथ्यों पर रहेंगी। यदि मामले में कोई नया दस्तावेज, जांच निष्कर्ष या न्यायिक कार्रवाई सामने आती है, तो सृजन घोटाले पर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है।  

surbhi अगस्त 10, 2026 0
Kiren Rijiju reacts to Rahul Gandhi’s women empowerment message and urges Congress to support women reservation bill
राहुल के ‘वूमेन पावर’ संदेश पर रिजिजू का कांग्रेस पर तंज, बोले- अब बिना शर्त महिला आरक्षण बिल का समर्थन करे पार्टी

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी के महिला सशक्तिकरण को लेकर दिए गए संदेश के बाद महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सियासी बहस फिर तेज हो गई है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट को साझा करते हुए पार्टी पर राजनीतिक तंज कसा और उम्मीद जताई कि कांग्रेस अब महिला आरक्षण विधेयक का बिना किसी शर्त के समर्थन करेगी। रिजिजू की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कांग्रेस ने राहुल गांधी का एक वीडियो साझा किया है, जिसमें उन्होंने भारतीय महिलाओं की ऊर्जा, क्षमता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को देश की प्रगति से जोड़ते हुए अपनी बात रखी। कांग्रेस ने शेयर किया राहुल गांधी का वीडियो कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी का एक वीडियो पोस्ट किया। इसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता महिलाओं की क्षमताओं और समाज में उनकी भूमिका को लेकर अपनी बात रखते दिखाई दे रहे हैं। राहुल गांधी का कहना है कि भारत की महिलाओं के भीतर मौजूद ऊर्जा और क्षमता को अभी पूरी तरह सामने आने का अवसर नहीं मिला है। उनके मुताबिक, महिलाओं को अपनी बात रखने, अपने सपने देखने और अपनी क्षमताओं के मुताबिक आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। राहुल ने अपने संदेश में महिला सशक्तिकरण को देश की प्रगति से जोड़ते हुए कहा कि महिलाओं की स्वतंत्र अभिव्यक्ति और भागीदारी के बिना भारत अपनी पूरी क्षमता हासिल नहीं कर सकता। राहुल के बयान को रिजिजू ने महिला आरक्षण बिल से जोड़ा राहुल गांधी के इस संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस के पोस्ट को साझा किया। उन्होंने इसे पार्टी की ओर से आया सकारात्मक संदेश बताया। रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी के महिलाओं को लेकर विचारों में बदलाव दिखाई दे रहा है। इसी आधार पर उन्होंने उम्मीद जताई कि कांग्रेस अब महिला आरक्षण विधेयक का बिना किसी शर्त के समर्थन करेगी। रिजिजू की टिप्पणी सीधे तौर पर कांग्रेस के महिला सशक्तिकरण के राजनीतिक संदेश को संसद में महिला प्रतिनिधित्व के मुद्दे से जोड़ती है। महिला आरक्षण पर फिर आमने-सामने सत्ता पक्ष और विपक्ष महिला आरक्षण का मुद्दा भारतीय राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी प्राथमिकताएं और रणनीतियां रही हैं। रिजिजू के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है। एक ओर कांग्रेस महिलाओं की क्षमता, स्वतंत्र अभिव्यक्ति और राजनीतिक भागीदारी की बात कर रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी नेतृत्व इस राजनीतिक संदेश को संसद में महिला प्रतिनिधित्व से जोड़कर कांग्रेस से स्पष्ट समर्थन की मांग कर रहा है। राहुल गांधी ने महिलाओं की अभिव्यक्ति को बताया जरूरी राहुल गांधी के अनुसार, किसी भी देश की वास्तविक क्षमता तभी सामने आती है, जब उसकी आधी आबादी को अपनी प्रतिभा और विचारों को खुलकर सामने रखने का अवसर मिले। उन्होंने महिलाओं की ऊर्जा को समाज और देश की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि महिलाओं की आवाज और उनकी स्वतंत्र अभिव्यक्ति को दबाकर कोई देश पूरी क्षमता से आगे नहीं बढ़ सकता। उनका यह संदेश कांग्रेस की महिला सशक्तिकरण से जुड़ी राजनीतिक लाइन का हिस्सा माना जा रहा है। रिजिजू के बयान का राजनीतिक संदेश क्या है? रिजिजू का बयान केवल राहुल गांधी के वीडियो पर प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि इसे कांग्रेस को राजनीतिक रूप से घेरने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। उन्होंने राहुल गांधी के महिला सशक्तिकरण वाले विचारों को आधार बनाकर कांग्रेस से यह सवाल उठाया है कि यदि पार्टी महिलाओं को राजनीतिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की बात करती है, तो उसे महिला आरक्षण विधेयक पर भी स्पष्ट और बिना शर्त समर्थन देना चाहिए। इस तरह महिला सशक्तिकरण का मुद्दा एक बार फिर संसद और राजनीति के केंद्र में आता दिखाई दे रहा है। अब आगे क्या? फिलहाल रिजिजू के बयान पर कांग्रेस की ओर से इस विशेष टिप्पणी का जवाब सामने नहीं आया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस महिला आरक्षण विधेयक को लेकर अपने रुख को किस तरह स्पष्ट करती है। राजनीतिक रूप से देखें तो महिला सशक्तिकरण और संसद में महिलाओं की भागीदारी आने वाले समय में दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमों के लिए अहम मुद्दा बन सकती है। राहुल गांधी का संदेश और रिजिजू की प्रतिक्रिया इसी व्यापक राजनीतिक बहस की अगली कड़ी है।  

surbhi अगस्त 8, 2026 0
Opposition MPs protest at Parliament’s Makar Dwar during the Monsoon Session, demanding answers from Home Minister Amit Shah.
संसद के मकर द्वार पर विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन, ‘अमित शाह जवाब दो’ के नारों से गूंजा परिसर

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो गया। विपक्षी सांसदों ने संसद भवन के मकर द्वार के सामने प्रदर्शन करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई और अयोध्या के राम मंदिर में दान से जुड़ी कथित वित्तीय गड़बड़ियों पर जवाब देने की मांग की। बारिश के बीच विपक्षी सांसद हाथों में तख्तियां और छाते लेकर संसद परिसर में जुटे। प्रदर्शन के दौरान ‘अमित शाह जवाब दो’ के नारे लगाए गए और सरकार से इन दोनों मुद्दों पर संसद में विस्तृत बयान देने की मांग की गई। छात्र प्रदर्शन पर सरकार को घेरा विपक्ष ने 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ सख्ती बरती गई और इस मामले में सरकार को जवाब देना चाहिए। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यदि सरकार युवाओं के हितों को लेकर गंभीर है तो गृह मंत्री अमित शाह को संसद में आकर इस मुद्दे पर बयान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के खिलाफ हुई कथित कार्रवाई के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए और सरकार को इस पर स्पष्ट रुख रखना चाहिए। राम मंदिर दान मामले पर चर्चा की मांग विपक्ष ने अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर इस विषय पर तत्काल चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर में नकद दान और कीमती सामान के कथित गबन से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं। विपक्ष का कहना है कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। लगातार बाधित हो रही संसद की कार्यवाही मानसून सत्र के पिछले दो सप्ताह से विभिन्न मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच लगातार गतिरोध बना हुआ है। छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। विपक्षी सांसदों का कहना है कि जब तक सरकार इन मुद्दों पर संसद में जवाब नहीं देती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।  

surbhi अगस्त 7, 2026 0
Members of Parliament interact in the Parliament corridors during the Monsoon Session, sharing light-hearted moments amid political discussions.
संसद के गलियारों की दिलचस्प कहानी: कहीं 'QR कोड' वाला तंज, कहीं नेताओं की मुस्कुराहट बनी चर्चा

नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र सिर्फ तीखी राजनीतिक बहसों और आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा। सदन के भीतर और गलियारों में कई ऐसे हल्के-फुल्के पल भी देखने को मिले, जिन्होंने राजनीतिक माहौल को अलग रंग दे दिया। कभी नेताओं के बीच तंज और हाजिरजवाबी चर्चा का विषय बनी तो कभी सत्ता और विपक्ष के नेताओं की मुस्कुराहट भरी मुलाकात ने सबका ध्यान खींचा। संसदीय परिसर में घटी ऐसी कई घटनाएं पूरे दिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी रहीं। महाराष्ट्र पर केंद्रीय मंत्री का तंज संसद परिसर में एक केंद्रीय मंत्री की मुलाकात महाराष्ट्र से आने वाले एनडीए के एक सहयोगी दल के सांसद से हुई। बातचीत के दौरान मंत्री ने हल्के अंदाज में कहा कि महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति बाकी राज्यों से अलग है। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में जब कोई केंद्रीय मंत्री दौरे पर जाता है तो वहां के सभी सांसद एक साथ मिलते हैं, बैठते हैं और रात्रिभोज भी करते हैं, लेकिन महाराष्ट्र में ऐसा कम देखने को मिलता है। इतना सुनते ही सांसद ने मुस्कुराते हुए मंत्री का हाथ पकड़ लिया और कहा कि उन्हें ऐसी किसी बैठक की जानकारी ही नहीं थी। मौके पर मौजूद पत्रकारों के सामने हुई यह बातचीत राजनीतिक तंज के रूप में पूरे दिन चर्चा में रही। 'QR कोड दे दीजिए' वाला जवाब बना चर्चा संसद परिसर में समाजवादी पार्टी के सांसद इन दिनों चंदा चोरी मामले को लेकर अनोखे अंदाज में विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। वे दानपात्र रखकर सांसदों से सहयोग राशि जुटा रहे हैं। सोमवार को दानपात्र खोलने पर 47,100 रुपये और मंगलवार को 33,050 रुपये के साथ दो चांदी के सिक्के मिले। इसी दौरान सपा सांसद अक्षय यादव ने दावा किया कि किसी भी भाजपा सांसद ने इसमें सहयोग नहीं किया। तभी वहां से गुजर रहे एक भाजपा सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री से उन्होंने श्रीराम के नाम पर चंदा देने का आग्रह किया। इस पर मंत्री ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "QR कोड दे दीजिए", और आगे बढ़ गए। उनका यह जवाब संसद परिसर में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। मेटा अधिकारियों से फेक वीडियो पर तीखे सवाल संसद की सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) संबंधी स्थायी समिति की बैठक में मेटा के अधिकारियों को भी सांसदों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी त्रुटि के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो गलती से हट गया था, क्योंकि फेक वीडियो हटाने वाली ऑटोमेटेड प्रणाली सक्रिय थी। इस पर समिति की एक महिला सांसद ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर मौजूद एक कथित फर्जी वीडियो दिखाते हुए सवाल किया कि जब उनका फेक वीडियो अब तक नहीं हटाया गया, तो फिर प्रधानमंत्री का वास्तविक वीडियो कैसे हट गया। इस सवाल के बाद बैठक में मेटा अधिकारियों को अपनी तकनीकी प्रक्रिया पर विस्तार से सफाई देनी पड़ी। सत्ता और विपक्ष के नेताओं की सौहार्दपूर्ण मुलाकात संसद भवन के मकर द्वार पर सत्ता और विपक्ष के नेताओं के बीच एक दिलचस्प मुलाकात भी देखने को मिली। कांग्रेस के एक राज्यसभा सांसद और भाजपा के एक लोकसभा सांसद, जो अक्सर टीवी डिबेट में एक-दूसरे के राजनीतिक विरोधी नजर आते हैं, संसद परिसर में मुस्कुराते हुए मिले। दोनों ने हाथ मिलाया, हालचाल पूछा और कुछ मिनट तक बातचीत की। इसी दौरान मौजूद एक पत्रकार ने दोनों नेताओं के सफेद परिधान पर टिप्पणी की। इस पर भाजपा सांसद ने मजाकिया अंदाज में कांग्रेस सांसद की ओर इशारा करते हुए कहा, "इनका जीवन भी बिल्कुल वाइट ही है।" इस टिप्पणी पर आसपास मौजूद लोग मुस्कुरा उठे। बातचीत के दौरान पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान का भी जिक्र हुआ। इस पर भाजपा सांसद ने हल्का राजनीतिक तंज किया, जबकि कांग्रेस सांसद ने शांत अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि उनकी पार्टी में हालात जल्द सामान्य हो जाएंगे। संसद की राजनीति का दूसरा चेहरा संसद की कार्यवाही के दौरान जहां एक ओर गंभीर मुद्दों पर तीखी बहस होती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे हल्के-फुल्के पल यह भी दिखाते हैं कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत स्तर पर नेताओं के बीच संवाद, हास्य और सौहार्द भी बना रहता है। यही संसदीय लोकतंत्र की एक अलग और कम दिखाई देने वाली तस्वीर भी पेश करता है।  

surbhi अगस्त 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana अगस्त 14, 2026 0