रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने रांची सदर अस्पताल पहुंचकर JPSC अभ्यर्थियों के आंदोलन के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद भर्ती कराए गए छात्र राहुल क्रांतिकारी से मुलाकात की। उन्होंने छात्र का हालचाल जाना और इलाज कर रहे चिकित्सकों से उसकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली।
राहुल क्रांतिकारी आमरण अनशन पर बैठे थे। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्वास्थ्य मंत्री ने मेडिकल टीम को छात्र के इलाज में किसी तरह की कमी नहीं रखने का निर्देश दिया। डॉक्टरों के अनुसार, राहुल की स्थिति फिलहाल स्थिर है और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्र सरकार के अपने बच्चे हैं और उनका जीवन, स्वास्थ्य व सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र के जीवन को खतरे में नहीं पड़ने दिया जाएगा।
उन्होंने आंदोलनरत छात्रों से अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में संवाद और सकारात्मक बातचीत के जरिए ही समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। सरकार छात्रों की जायज मांगों और चिंताओं को गंभीरता से सुनने के लिए तैयार है।
डॉ. इरफान अंसारी ने छात्रों से अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि “आपका जीवन अनमोल है। जान है तो जहान है।” मंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों के साथ है और उनकी समस्याओं को समझते हुए समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और छात्रों के बीच सार्थक बातचीत से सम्मानजनक और सकारात्मक समाधान निकलेगा। मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार युवाओं के भविष्य, शिक्षा, रोजगार और अधिकारों को लेकर संवेदनशील है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपने स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने के बजाय अपनी ऊर्जा भविष्य और झारखंड के विकास में लगाएं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले में प्रिंस खान गिरोह के संदिग्ध सदस्यों के खिलाफ पुलिस का अभियान तेज हो गया है। बड़कागांव थाना क्षेत्र में पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान गिरोह से जुड़े संदिग्ध आरोपी अंकित कुमार पांडेय को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, जवाबी फायरिंग में आरोपी के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। मामला बड़कागांव के 13 माइल ट्रांसपोर्ट रोड पर दो हाइवा वाहनों पर हुई गोलीबारी से जुड़ा है। पुलिस ने आरोपी के पास से एक देसी पिस्तौल, 7.62 एमएम का एक खोखा, एक मिस फायर गोली, एक जिंदा गोली, एक देसी बम और चार धमकी भरे पर्चे बरामद किए हैं। पूछताछ में सामने आया गैंग से कनेक्शन हजारीबाग पुलिस के अनुसार, एनटीपीसी कोल परिवहन में लगे वाहनों पर फायरिंग के मामले में जांच के दौरान पिपराडीह निवासी अंकित कुमार पांडेय संदिग्ध पाया गया। उसे पूछताछ के लिए थाने लाया गया था। पुलिस ने उसके मोबाइल की जांच की, जिसमें टेलीग्राम के जरिए गैंगस्टर प्रिंस खान और उसके गिरोह के सदस्यों से कथित बातचीत सामने आई। पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने 25 जुलाई की रात 13 माइल ट्रांसपोर्ट रोड पर अपने साथियों के साथ फायरिंग करने और प्रिंस खान गिरोह के नाम से धमकी भरे पर्चे छोड़ने की बात स्वीकार की। बरामदगी के दौरान पुलिस पर फायरिंग का आरोप पुलिस के मुताबिक, आरोपी की निशानदेही पर हथियार और बम बरामद करने के लिए टीम गैस प्लांट के पास पहुंची थी। इसी दौरान अंकित ने एक जवान को धक्का देकर बरामद पिस्तौल से पुलिस टीम पर गोली चलाने और मौके से भागने की कोशिश की। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें आरोपी के पैर में गोली लगी। घायल अंकित को पहले बड़कागांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए हजारीबाग स्थित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया। एसपी ने की कार्रवाई की पुष्टि हजारीबाग एसपी अमन कुमार ने बताया कि ट्रांसपोर्टिंग वाहनों पर फायरिंग करने वाले प्रिंस खान गिरोह से जुड़े संदिग्ध अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने मुठभेड़ में आरोपी के घायल होने और गिरफ्तारी की पुष्टि की है। मामले में पुलिस जल्द ही विस्तृत जानकारी और प्रेस वार्ता के जरिए पूरे घटनाक्रम का खुलासा कर सकती है।
रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों से सिर्फ पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहने, बल्कि प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने की अपील की है. उन्होंने कहा कि केवल पौधारोपण के ठेके देने से पर्यावरण की स्थिति नहीं बदलेगी. इसके लिए हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी. तेजी से बढ़ती आबादी और प्रकृति के साथ लगातार हो रही छेड़छाड़ का असर अब झारखंड में भी दिखाई दे रहा है. मुख्यमंत्री शुक्रवार को खेलगांव परिसर में आयोजित 77वें वन महोत्सव के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने पौधारोपण कर अभियान की शुरुआत की और वन विभाग के साथ मिलकर पर्यावरण एवं वन संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया. कार्यक्रम में करीब दो हजार लोग मौजूद थे. हर व्यक्ति अपने घर के आसपास लगाए एक पौधा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से अपने-अपने घर के आसपास कम से कम एक पौधा लगाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक विभाग या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है. जब तक आम लोग इसमें अपनी भागीदारी नहीं निभायेंगे, तब तक बड़े स्तर पर बदलाव संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि पर्यावरण में हो रहा बदलाव केवल झारखंड की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया की चुनौती बन चुका है. जलवायु और पर्यावरण में बदलाव का असर हर जगह देखने को मिल रहा है. ऐसे में स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे प्रयासों के जरिये प्रकृति को बचाने की दिशा में काम करना जरूरी है. प्रकृति से छेड़छाड़ का असर झारखंड में भी मुख्यमंत्री ने कहा कि इंसानों ने विकास के नाम पर जंगलों और प्राकृतिक क्षेत्रों में लगातार हस्तक्षेप किया है. इसका असर अब मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष के रूप में भी देखने को मिल रहा है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इंसान हाथियों के प्राकृतिक आवास तक पहुंच गया है. जंगल और पेड़ काटकर नये शहर और बस्तियां बसायी जा रही हैं. ऐसे में हाथियों का इंसानी इलाकों में आना और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं बढ़ना स्वाभाविक है. सीएम ने यह भी कहा कि केवल सुंदर दिखने वाले पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है. कुछ ऐसे पौधे भी लगाये जा रहे हैं, जो स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए उपयोगी नहीं हैं. इसलिए झारखंड में अब ऐसे पौधों को प्राथमिकता दी जायेगी, जो स्थानीय पर्यावरण और जैव विविधता के लिए उपयोगी हों. एक पौधा लगाने पर शहरों में मिलेगी पांच यूनिट मुफ्त बिजली मुख्यमंत्री ने बताया कि शहरों में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए पौधारोपण को प्रोत्साहित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि शहरों में एक पौधा लगाने पर पांच यूनिट बिजली मुफ्त देने की व्यवस्था की जा रही है. इसका उद्देश्य लोगों को पौधारोपण के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाना है. उन्होंने कहा कि पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है. केवल पौधे लगा देने से पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य पूरा नहीं होगा. वन, पर्यावरण और वन्यजीवन जीवन का अभिन्न हिस्सा वन विभाग के सचिव अबु बक्कर सिद्दीख ने कहा कि वन, पर्यावरण और वन्यजीवन मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं. इनके बिना स्वस्थ समाज की कल्पना नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि पर्यावरण और वन्यजीवों का संरक्षण केवल नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व भी है. पीसीसीएफ हॉफ संजीव कुमार ने कहा कि पर्यावरण में हो रहे बदलाव से पूरी दुनिया प्रभावित है. अगर इस वैश्विक चुनौती से निपटना है, तो स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने होंगे. छोटे स्तर पर किये गये प्रयास ही आगे चलकर बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं. ओपन सफारी को दिखाई हरी झंडी वन महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी सह गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने ओपन सफारी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. कार्यक्रम में वन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे. पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने वालों का सम्मान कार्यक्रम के दौरान वन एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया गया. सम्मानित होने वालों में पी बर्नादित कुजूर, टिकैत चंद्र प्रधान, बुद्धदेव चालक, पौथी राम हांसदा, रमेश नायक, तारकेश्वर मुंडा, निरोज टेटे, लक्ष्मण मुरमू, कृष्णा सिंह, मिथिलेश कुमार, खुर्शीद आलम, गुड्डल सिंह, मनोज राणा, सुरेंद्र पासवान, सोनी देवी, राजीव रंजन प्रसाद, मुनेश्वर मेहता, मो जुनैल अंसारी, राजू कोरबा और नासिर खान समेत अन्य लोग शामिल रहे. कार्यक्रम में पीसीसीएफ विश्वनाथ साह, एटी मिश्रा, एपीसीसीएफ वेंकटेश्वरलू, डीएफओ श्रीकांत वर्मा समेत वन विभाग के कई अधिकारी उपस्थित थे.
रांची। झारखंड के चर्चित शराब घोटाला मामले की जांच में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में एजेंसी ने कथित मामले में आरोपी IAS अधिकारी विनय चौबे के करीबी और नेक्सजेन कंपनी के सीईओ अरुण कुमार सिंह से लंबी पूछताछ की। जांच का फोकस कथित घोटाले के मनी ट्रेल, उत्पाद नीति में संभावित अनियमितताओं और वित्तीय लेन-देन पर है। व्यावसायिक संबंध और लेन-देन पर पूछताछ सूत्रों के अनुसार, अरुण कुमार सिंह गुरुवार दोपहर ACB मुख्यालय पहुंचे, जहां अधिकारियों ने उनसे कई घंटे तक पूछताछ की। जांच टीम ने उनसे तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय चौबे के साथ उनके संबंधों, संभावित व्यावसायिक लेन-देन, धन के आदान-प्रदान और कथित घोटाले से जुड़े वित्तीय प्रवाह के बारे में सवाल किए। बताया जा रहा है कि जांचकर्ताओं ने यह भी जानने का प्रयास किया कि कथित घोटाले से जुड़े धन का इस्तेमाल किन-किन उद्देश्यों के लिए किया गया और क्या उससे जमीन या अन्य संपत्तियां खरीदी गईं। हालांकि, ACB ने पूछताछ में सामने आई जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। डिजिटल फोरेंसिक और दस्तावेजों के आधार पर जांच ACB अब डिजिटल फोरेंसिक, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर जांच के अगले चरण में आगे बढ़ रही है। एजेंसी ने JSBCL के आईटी प्रबंधक अमर कुमार महतो को पूछताछ के लिए तलब किया है। उनसे ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम, डिजिटल निगरानी व्यवस्था, सिस्टम लॉग और शराब आपूर्ति की डिजिटल ट्रैकिंग से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर सवाल किए जाएंगे। 10 अगस्त को फिर बुलाए गए तीन अधिकारी ACB ने पहले जारी समन का पालन नहीं करने वाले प्लेसमेंट हेल्थकेयर एंड रिसर्च सेंटर प्रा. लि. के संयुक्त सहायक निदेशक विकास अग्रवाल तथा A-2-Z इंफ्रा सर्विसेज लिमिटेड के निदेशक मनोज तिवारी और अरुण गौर को 10 अगस्त को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया है। मनी ट्रेल की कड़ियां जोड़ने में जुटी ACB एजेंसी का कहना है कि दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों, वित्तीय अभिलेखों और गवाहों के बयानों के आधार पर सभी संबंधित लोगों से विस्तृत पूछताछ की जाएगी। जांच का उद्देश्य कथित शराब घोटाले में धन के प्रवाह, निर्णय प्रक्रिया और संभावित अनियमितताओं की पूरी श्रृंखला का पता लगाना है।