Irfan Ansari

Congress leaders address a press conference in Ranchi over JPSC-JSSC protests, SIR and the mining amendment bill
छात्र आंदोलन से SIR और माइनिंग बिल तक, कांग्रेस का केंद्र पर हमला; 18 अगस्त को आंदोलन की रणनीति होगी तय

रांची: झारखंड कांग्रेस मुख्यालय में सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने JPSC-JSSC छात्र आंदोलन, SIR और माइनिंग संशोधन बिल को लेकर केंद्र सरकार और बीजेपी पर जमकर निशाना साधा. प्रदेश प्रभारी के. राजू, प्रदेश सह प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने अलग-अलग मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखा. छात्र आंदोलन पर कांग्रेस ने कहा- बातचीत से निकले समाधान प्रदेश प्रभारी के. राजू ने कहा कि झारखंड में छात्रों का आंदोलन लंबे समय से चल रहा है. कांग्रेस छात्रों की मांगों के साथ खड़ी है और चाहती है कि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के जरिए जल्द समाधान निकले. उन्होंने राहुल गांधी द्वारा देशभर में छात्रों के मुद्दे उठाने और जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का जिक्र भी किया. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बातचीत के बाद छात्रों की मांगों पर चर्चा के लिए चार सदस्यीय मंत्रियों की कमेटी बनाई गई है. 80 फीसदी मांगों पर सहमति का दावा विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने दावा किया कि छात्रों की करीब 80 फीसदी मांगों पर सहमति बन चुकी है. उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर गंभीर है, लेकिन बीजेपी इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है. वहीं मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि JPSC की 14वीं परीक्षा और बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने को लेकर सहमति बनी है. TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को लेकर भी सरकार और छात्रों के बीच सहमति बनने की बात कही गई. हालांकि JSSC CGL परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग पर सहमति नहीं बन सकी है. मंत्री ने कहा कि CGL का रिजल्ट अदालत के निर्देश के बाद जारी हुआ था और कई चयनित अभ्यर्थी करीब एक साल से नौकरी कर रहे हैं. SIR को लेकर निर्वाचन आयोग पर सवाल कांग्रेस ने SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर भी निर्वाचन आयोग और बीजेपी पर निशाना साधा. के. राजू ने आरोप लगाया कि SIR के जरिए लोगों के वोट देने के अधिकार को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मुलाकात का समय मांगा था, लेकिन अभी तक समय नहीं मिला. कांग्रेस का दावा है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के फॉर्म लंबित हैं. मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि कई आदिवासी क्षेत्रों में लोग SIR का फॉर्म भरने से इनकार कर रहे हैं. उन्होंने ऐसे इलाकों में विशेष कैंप लगाकर मतदाताओं के नाम जोड़ने की मांग की. माइनिंग बिल पर केंद्र को घेरा प्रेस वार्ता में माइनिंग संशोधन बिल भी बड़ा मुद्दा रहा. के. राजू ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने बिल लाने से पहले राज्यों से पर्याप्त चर्चा नहीं की. कांग्रेस का कहना है कि इससे राज्यों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रपति से मुलाकात करेगी और बिल को कानून का रूप नहीं देने का आग्रह करेगी. प्रदीप यादव बोले- संघीय ढांचे पर हमला प्रदीप यादव ने माइनिंग संशोधन बिल को संघीय ढांचे पर प्रहार बताया. उन्होंने कहा कि राज्यों की राय लिए बिना खनन से जुड़े अधिकारों में बदलाव करना उचित नहीं है. उन्होंने बताया कि 18 अगस्त को कांग्रेस इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करेगी और जिला स्तर पर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी. 15 हजार करोड़ के नुकसान का दावा स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने आरोप लगाया कि माइनिंग संशोधन कानून से झारखंड को करीब 15 हजार करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है. उन्होंने कहा कि यदि राज्य के खनिज आधारित राजस्व पर असर पड़ता है, तो इसका प्रभाव सरकार की कई योजनाओं पर पड़ सकता है. तीनों मुद्दों पर आंदोलन जारी रखने का ऐलान कांग्रेस ने साफ किया कि छात्र आंदोलन, SIR और माइनिंग संशोधन बिल को लेकर पार्टी आगे भी सक्रिय रहेगी. 18 अगस्त को माइनिंग कानून के खिलाफ आंदोलन की रणनीति तय करने के बाद जिला स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाने की बात कही गई है. कुल मिलाकर, कांग्रेस ने एक ही प्रेस वार्ता में छात्र आंदोलन से लेकर मतदाता सूची और खनिज अधिकारों तक कई मुद्दों पर केंद्र और बीजेपी को घेरा और आने वाले दिनों में आंदोलन तेज करने के संकेत दिए हैं.  

kalpana अगस्त 18, 2026 0
Devendra Nath Mahto and other JPSC-JSSC protestors end their hunger strike at Ranchi Sadar Hospital
JPSC-JSSC आंदोलन खत्म, देवेंद्र नाथ महतो समेत अनशनकारियों ने तोड़ा अनशन; मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने पिलाया जूस

रांची: JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर झारखंड में लंबे समय से चल रहा छात्र आंदोलन मंगलवार को एक अहम पड़ाव पर पहुंच गया. रांची सदर अस्पताल में इलाजरत अनशनकारी देवेंद्र नाथ महतो समेत अन्य आंदोलनकारियों ने अपना अनशन समाप्त कर दिया. ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने आंदोलनकारियों को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया. इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और JLKM विधायक जयराम महतो भी अस्पताल में मौजूद रहे. लंबे समय तक अनशन पर रहने के कारण कई आंदोलनकारियों की तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था. लंबे समय से चल रहा था छात्र आंदोलन JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे थे. आंदोलनकारियों की ओर से विवादित परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के हित में आवश्यक कदम उठाने की मांग की जा रही थी. इन मांगों को लेकर देवेंद्र नाथ महतो समेत कई छात्र नेता और आंदोलनकारी लंबे समय से अनशन पर बैठे थे. लगातार अनशन के कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति खराब होने लगी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने पिलाया जूस मंगलवार को ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह रांची सदर अस्पताल पहुंचीं. उन्होंने अनशनकारी आंदोलनकारियों से मुलाकात कर उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली. इसके बाद बातचीत के बाद उन्होंने देवेंद्र नाथ महतो समेत अन्य आंदोलनकारियों को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया. मंत्री के साथ स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी भी मौजूद रहे. अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों से भी आंदोलनकारियों की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली गई. जयराम महतो ने भी की मुलाकात JLKM विधायक जयराम महतो भी रांची सदर अस्पताल पहुंचे और अनशनकारियों से मुलाकात की. इस दौरान आंदोलनकारियों ने JPSC-JSSC परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों और अपनी मांगों को उनके सामने रखा. अनशन समाप्त होने के बाद अब आंदोलनकारियों और सरकार के बीच आगे की बातचीत पर नजर रहेगी. अनशन खत्म हो गया है, लेकिन परीक्षा सुधार और कथित अनियमितताओं से जुड़े मुद्दों पर आगे क्या कार्रवाई होती है, यह महत्वपूर्ण होगा. अब सरकार के अगले कदम पर नजर छात्र आंदोलन के दौरान JPSC और JSSC की परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और विवादित परीक्षाओं को लेकर कई मांगें सामने आई थीं. अब अनशन समाप्त होने के बाद आंदोलनकारियों की मांगों पर सरकार की ओर से क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी. फिलहाल सदर अस्पताल में मंत्री के हाथों जूस पीने के साथ देवेंद्र नाथ महतो और अन्य आंदोलनकारियों का अनशन समाप्त हो गया है, जिससे लंबे समय से जारी आंदोलन में एक नया मोड़ आया है.  

kalpana अगस्त 18, 2026 0
Ferrari Luce
फेरारी की पहली EV ने बनाया रिकॉर्ड, नीलामी में 40 मिलियन डॉलर में बिकी ‘लूचे’

नई दिल्ली, एजेंसियां। लग्जरी कार निर्माता फेरारी की पहली पूरी तरह इलेक्ट्रिक कार Ferrari Luce ने बाजार में उतरने से पहले ही बड़ा रिकॉर्ड बना दिया है। लूचे के एक खास ‘Chassis 0’ संस्करण को अमेरिका के कैलिफोर्निया में आयोजित RM Sotheby’s की चैरिटी नीलामी में 4 करोड़ डॉलर (करीब ₹330 करोड़) में बेचा गया। यह किसी नई कार की नीलामी में अब तक की सबसे बड़ी कीमत है।   40 मिलियन डॉलर में बिकी कार   फेरारी लूचे के इस खास मॉडल की शुरुआती अनुमानित कीमत करीब 11 लाख डॉलर थी, लेकिन नीलामी में यह कीमत से लगभग 36 गुना अधिक रकम में बिकी। इससे पहले नई कार की नीलामी का रिकॉर्ड Ferrari Daytona SP3 के नाम था, जो 2025 में 2.6 करोड़ डॉलर में बिकी थी।   हालांकि, यह किसी भी कार की सबसे महंगी नीलामी का रिकॉर्ड नहीं है। उस रिकॉर्ड के लिए 1955 की Mercedes-Benz 300 SLR Uhlenhaut Coupé अभी भी करीब 13.5 करोड़ यूरो की बिक्री के साथ आगे है।   Ferrari Luce में क्या खास है?   Luce फेरारी की पहली पूरी तरह इलेक्ट्रिक कार है। इसके सामान्य मॉडल की कीमत लगभग 5.5 लाख यूरो से शुरू होती है। कार में चार इलेक्ट्रिक मोटर हैं और इसका आउटपुट 1,000 हॉर्सपावर से अधिक बताया गया है। इसका डिजाइन पूर्व Apple डिजाइन प्रमुख जॉनी आइव के स्टूडियो LoveFrom के साथ मिलकर तैयार किया गया है।   नीलामी की पूरी रकम जाएगी चैरिटी में   नीलामी में बिकी यह कार सामान्य उत्पादन मॉडल नहीं, बल्कि एक विशेष वन-ऑफ संस्करण है। इससे मिलने वाली पूरी 40 मिलियन डॉलर की रकम Ferrari Foundation के जरिए शिक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर खर्च की जाएगी। कार के खरीदार अमेरिकी अरबपति और लंबे समय से फेरारी कलेक्टर हर्बर्ट ए. वर्टहाइम हैं।   फेरारी के इलेक्ट्रिक सफर के लिए बड़ा संकेत   लूचे की शुरुआत को लेकर फेरारी के पारंपरिक प्रशंसकों के बीच डिजाइन और इलेक्ट्रिक पावरट्रेन को लेकर बहस जरूर हुई थी। लेकिन रिकॉर्ड कीमत में इसकी नीलामी से संकेत मिलता है कि अल्ट्रा-लक्जरी इलेक्ट्रिक कारों के लिए कलेक्टरों और अमीर ग्राहकों की मांग मजबूत हो सकती है। फेरारी अब इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और पारंपरिक इंजन वाली कारों को अपनी रणनीति का हिस्सा बनाए हुए है।

anjali kumari अगस्त 18, 2026 0
Congress ministers addressing a press conference on the JPSC-JSSC student protest and police lathi-charge in Ranchi
JPSC-JSSC आंदोलन पर कांग्रेस के चार मंत्रियों का बयान, लाठीचार्ज पर दीपिका पांडेय ने मांगी माफी

रांची: जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई का मामला अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है. छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर कांग्रेस के चार मंत्रियों ने प्रेस वार्ता कर भाजपा पर आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया. वहीं, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने लाठीचार्ज की घटना पर छात्रों से माफी भी मांगी. प्रेस वार्ता में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी शामिल हुए. चारों मंत्रियों ने भाजपा पर छात्रों के मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने और आंदोलन को राजनीतिक रूप देने का आरोप लगाया. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भाजपा पर साधा निशाना वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार छात्रों के मुद्दे पर चर्चा के लिए गंभीर थी. लेकिन भाजपा विधायकों ने सुबह मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरना शुरू कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की मंशा छात्रों की समस्याओं पर चर्चा कराने की बजाय आंदोलन को राजनीतिक मुद्दा बनाने की थी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों पर बल प्रयोग के पक्ष में नहीं थी और प्रशासन ने संयम बरतने की कोशिश की. हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान कुछ बाहरी उपद्रवी तत्व शामिल हो गये, जिनकी वजह से स्थिति बिगड़ी. लाठीचार्ज पर दीपिका पांडेय सिंह ने मांगी माफी ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि सरकार कभी भी छात्रों पर लाठीचार्ज के पक्ष में नहीं है. उन्होंने पुलिस कार्रवाई में घायल हुए छात्रों से माफी मांगते हुए कहा कि यदि किसी छात्र के साथ गलत हुआ है, तो सरकार इसे गंभीरता से देख रही है. मंत्री ने भाजपा पर परीक्षा गड़बड़ी के मामले में सीबीआई जांच की मांग के जरिए राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि राज्य में परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गयी है और अब तक कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं. इरफान अंसारी बोले- भाजपा ने छात्र आंदोलन को हाईजैक किया स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने आरोप लगाया कि भाजपा ने छात्रों के आंदोलन को हाईजैक करने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से करना चाहती है. उन्होंने बताया कि आंदोलन के दौरान अस्वस्थ हुए छात्रों के इलाज की व्यवस्था की जा रही है. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आंदोलन में घायल या बीमार छात्रों को इलाज में किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जायेगी. शिल्पी नेहा तिर्की ने भी भाजपा पर लगाया आरोप कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि भाजपा छात्र आंदोलन को हिंसक बनाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने दावा किया कि सरकार संवाद के माध्यम से छात्रों की मांगों का समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के हित में है और किसी भी राजनीतिक दल को युवाओं के भविष्य से जुड़े आंदोलन का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए नहीं करने दिया जायेगा. छात्रों की मांगों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है. छात्र परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. वहीं, सरकार का कहना है कि मामले में जांच और कार्रवाई जारी है. पुलिस कार्रवाई के बाद अब सरकार के मंत्रियों के बयान से यह मुद्दा और गरमा गया है. जहां कांग्रेस नेता भाजपा पर आंदोलन को राजनीतिक रूप देने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं विपक्ष सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगा रहा है.  

kalpana अगस्त 13, 2026 0
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी घायल छात्र नेताओं से अस्पताल में मिले
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने अस्पताल पहुंचकर घायल छात्र नेताओं का जाना हाल

रांची। झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा सुधार आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई में घायल हुए छात्र नेताओं से मिलने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायल छात्र नेताओं और अन्य प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली।   देवेंद्र नाथ महतो समेत घायल छात्रों से मुलाकात   मंत्री ने अस्पताल में भर्ती छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत अन्य घायल छात्रों का हाल जाना। महतो की तबीयत पुलिस लाठीचार्ज के बाद बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। मंत्री ने चिकित्सकों से भी घायलों के इलाज और स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली।   लाठीचार्ज के बाद अस्पताल पहुंचे थे छात्र   JPSC-JSSC परीक्षा सुधार की मांग को लेकर विधानसभा मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था। पुलिस कार्रवाई में कई छात्र घायल हुए थे। इसके बाद घायल छात्र नेताओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना को लेकर छात्र संगठनों में नाराजगी भी देखने को मिली।   अनशन कर रही छात्रा की भी बिगड़ी तबीयत   इसी आंदोलन के बीच रांची में भूख हड़ताल पर बैठी एक छात्रा की तबीयत भी बिगड़ने की खबर सामने आई है। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्वास्थ्य मंत्री के अस्पताल पहुंचने के बाद आंदोलनकारियों के स्वास्थ्य और इलाज को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी निगरानी बढ़ी है।   आंदोलन के बीच मंत्री के दौरे से बढ़ी सक्रियता   JPSC-JSSC विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री का अस्पताल पहुंचकर घायलों से मिलना सरकार की ओर से घायलों के इलाज और स्वास्थ्य व्यवस्था पर ध्यान देने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। आंदोलन की मांगों को लेकर सरकार और छात्रों के बीच गतिरोध अभी बना हुआ है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 12, 2026 0
Health Minister Dr Irfan Ansari visits hospitalized student Umme Habiba after her health deteriorates during hunger strike
रांची में भूख हड़ताल पर बैठी छात्रा की तबीयत बिगड़ी, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने अस्पताल पहुंचकर जाना हाल

रांची: प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों में शामिल उम्मे हबीबा की मंगलवार को तबीयत बिगड़ गई। पिछले आठ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठी छात्रा को इलाज के लिए रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। छात्रा की तबीयत खराब होने की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी सदर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने उम्मे हबीबा से मुलाकात कर उनका हाल जाना और डॉक्टरों से स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली। डॉक्टरों को बेहतर इलाज के निर्देश स्वास्थ्य मंत्री ने चिकित्सकों को छात्रा का समुचित इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने अस्पताल में भर्ती अन्य आंदोलनकारी छात्र-छात्राओं की सेहत पर भी लगातार नजर रखने को कहा। डॉ. अंसारी ने अधिकारियों से कहा कि इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। आंदोलन के दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का सामना कर रहे छात्रों को जरूरत के अनुसार तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। 'युवाओं को पीड़ा होगी तो हर हाल में मदद करूंगा' स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों और युवाओं की समस्याओं को लेकर संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि अगर युवाओं को किसी तरह की परेशानी होती है तो वह हर संभव मदद के लिए उनके बीच पहुंचेंगे। उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिकित्सा सहायता में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि दिन हो या रात, जरूरत पड़ने पर छात्रों की मदद के लिए स्वास्थ्य विभाग तैयार रहेगा। इलाज के खर्च की चिंता न करने की अपील सदर अस्पताल में भर्ती आंदोलनकारी छात्र-छात्राओं से मुलाकात के दौरान मंत्री ने उन्हें इलाज के खर्च को लेकर चिंता नहीं करने का भरोसा दिया। उन्होंने डॉक्टरों और अस्पताल अधिकारियों को नियमित स्वास्थ्य जांच और आवश्यक उपचार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। मंत्री ने कहा कि आंदोलन के कारण स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है और छात्रों को अपनी सेहत का भी ध्यान रखना चाहिए। भूख हड़ताल के तरीके पर पुनर्विचार की अपील डॉ. इरफान अंसारी ने छात्रों से अपील की कि वे अपनी मांगों को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाएं, लेकिन इसके लिए अपनी जिंदगी और स्वास्थ्य को खतरे में न डालें। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने आंदोलनकारियों से संवाद के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की। राहुल गांधी को बताया युवाओं की आवाज स्वास्थ्य मंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को युवाओं की आवाज बताते हुए कहा कि वह छात्रों के आंदोलन और उनकी स्थिति से जुड़ी जानकारी लगातार ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के अधिकार, न्याय और बेहतर भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस लगातार आवाज उठाती रही है। सरकार भी छात्रों की जायज मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है। बातचीत से समाधान निकालने पर जोर डॉ. अंसारी ने कहा कि किसी भी समस्या का स्थायी समाधान बातचीत और संवाद के जरिए ही निकाला जा सकता है। उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और किसी के बहकावे में नहीं आने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवा अकेले नहीं हैं। सरकार और स्वास्थ्य विभाग उनकी समस्याओं और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को लेकर संवेदनशील हैं। आंदोलनकारी छात्रों की स्थिति पर आगे भी नजर रखी जाएगी।  

surbhi अगस्त 12, 2026 0
JPSC Student Protest
बीमार JPSC छात्र से मिले इरफान अंसारी, बोले- संवाद से निकलेगा समाधान

रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने रांची सदर अस्पताल पहुंचकर JPSC अभ्यर्थियों के आंदोलन के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद भर्ती कराए गए छात्र राहुल क्रांतिकारी से मुलाकात की। उन्होंने छात्र का हालचाल जाना और इलाज कर रहे चिकित्सकों से उसकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली।   राहुल क्रांतिकारी आमरण अनशन पर बैठे थे। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्वास्थ्य मंत्री ने मेडिकल टीम को छात्र के इलाज में किसी तरह की कमी नहीं रखने का निर्देश दिया। डॉक्टरों के अनुसार, राहुल की स्थिति फिलहाल स्थिर है और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है।   छात्रों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता   स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्र सरकार के अपने बच्चे हैं और उनका जीवन, स्वास्थ्य व सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र के जीवन को खतरे में नहीं पड़ने दिया जाएगा।   उन्होंने आंदोलनरत छात्रों से अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में संवाद और सकारात्मक बातचीत के जरिए ही समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। सरकार छात्रों की जायज मांगों और चिंताओं को गंभीरता से सुनने के लिए तैयार है।   छात्रों से भावुक अपील   डॉ. इरफान अंसारी ने छात्रों से अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि “आपका जीवन अनमोल है। जान है तो जहान है।” मंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों के साथ है और उनकी समस्याओं को समझते हुए समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और छात्रों के बीच सार्थक बातचीत से सम्मानजनक और सकारात्मक समाधान निकलेगा। मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार युवाओं के भविष्य, शिक्षा, रोजगार और अधिकारों को लेकर संवेदनशील है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपने स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने के बजाय अपनी ऊर्जा भविष्य और झारखंड के विकास में लगाएं।

anjali kumari अगस्त 8, 2026 0
Dr. Rajkumar
रिम्स निदेशक पद से इस्तीफे के बाद लखनऊ लौटे डॉ. राजकुमार

रांची। झारखंड की राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के पूर्व निदेशक डॉ. राजकुमार ने पद छोड़ने के एक दिन बाद शुक्रवार को अपने गृह राज्य उत्तर प्रदेश के लिए रवाना हो गए। रवाना होने से पहले उन्होंने संस्थान की प्रशासनिक जिम्मेदारियां नव नियुक्त प्रभारी निदेशक डॉ. दीपेंद्र कुमार (डीके) सिन्हा को सौंप दीं। हाल ही में सीआईडी जांच और प्रशासनिक विवादों के बीच उनके इस्तीफे के बाद यह घटनाक्रम सामने आया है।   प्रभारी निदेशक को सौंपा कार्यभार, खाली किया सरकारी आवास शुक्रवार सुबह डॉ. राजकुमार रिम्स निदेशक कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने सभी प्रशासनिक दस्तावेज और कार्यभार डॉ. डीके सिन्हा को विधिवत हस्तांतरित किया। इसके बाद उन्होंने निदेशक आवास भी खाली कर उसकी चाबी संबंधित अधिकारियों को सौंप दी। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई। कार्यभार सौंपने के बाद वे लखनऊ के लिए रवाना हो गए।   बेटे को भी साथ ले गए, इस्तीफे की चर्चा तेज डॉ. राजकुमार अपने बेटे को भी अपने साथ ले गए, जिनकी रिम्स में ट्यूटर पद पर नियुक्ति को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। सूत्रों के अनुसार, संभावना है कि वे अपने बेटे से भी रिम्स की नौकरी से इस्तीफा दिला सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।   गुरुवार को दिया था इस्तीफा डॉ. राजकुमार ने गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी को अपना इस्तीफा सौंपा था। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने तत्काल प्रभाव से उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए अधिसूचना जारी की और रिम्स के सर्जरी विभाग के प्राध्यापक डॉ. दीपेंद्र कुमार सिन्हा को अगले आदेश तक संस्थान का प्रभारी निदेशक नियुक्त कर दिया। रिम्स में हाल में हुई सीआईडी जांच और प्रशासनिक मामलों के बीच हुए इस बदलाव को संस्थान के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

abhishek singh जून 26, 2026 0
Dr. Rajkumar
रिम्स के निदेशक डॉ. राजकुमार के इस्तीफा मंजूर , डॉ डीके सिन्हा डॉ. बने नए प्रभारी

रांची। झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में CID जांच के बाद बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। रिम्स के निदेशक डॉ. राजकुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने विभागीय मंत्री इरफान अंसारी की मंजूरी के बाद उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। साथ ही रिम्स के सर्जरी विभाग के प्राध्यापक डॉ. दीपेंद्र कुमार (डीके) सिन्हा को अगले आदेश तक संस्थान के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। इस संबंध में विभाग की ओर से आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।   सीआईडी की दो टीमों ने की थी जांच 24 जून को CID की दो अलग-अलग टीमें रिम्स पहुंची थीं। जांच का केंद्र वर्ष 2025 में कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुए एमबीबीएस नामांकन और सफाई कार्य से जुड़े टेंडर में कथित अनियमितताओं के आरोप थे। जांच के दौरान अधिकारियों ने रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार, डीन, चिकित्सा अधीक्षक सहित कई अधिकारियों से पूछताछ की और संबंधित दस्तावेजों की जांच की। CID टीम आवश्यक अभिलेखों और शिकायतों से जुड़े दस्तावेजों की प्रतियां भी अपने साथ ले गई।   इस्तीफे पर दिनभर बनी रही चर्चा रिम्स में पूरे दिन डॉ. राजकुमार के इस्तीफे की चर्चा होती रही, हालांकि उन्होंने इस मुद्दे पर मीडिया से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वहीं, रिम्स के प्रो. डी.आर. शिशिर कुमार ने कहा कि संस्थान में CID की कार्रवाई से वे आहत हैं। देर शाम स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने डॉ. राजकुमार का इस्तीफा मिलने और उसे स्वीकार किए जाने की पुष्टि की।   पहले भी रद्द हो चुका है नामांकन गौरतलब है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नामांकन के मामले में रिम्स प्रशासन पहले ही एमबीबीएस और बीडीएस की एक-एक छात्रा का दाखिला रद्द कर चुका है। जिला प्रशासन की जांच में दोनों के जाति प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए थे। अब CID की जांच के बाद पूरे मामले में आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

abhishek singh जून 26, 2026 0
Irfan Ansari
राज्यसभा चुनाव के बाद इरफान अंसारी भावुक, बोले— हार नहीं, अपनों का धोखा सबसे बड़ा दर्द

रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव परिणामों के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनाव के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री Irfan Ansari ने भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें हार का उतना दुख नहीं है, जितना “अपनों द्वारा भरोसा तोड़े जाने” का दर्द है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए।   भाजपा पर धनबल और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप इरफान अंसारी ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि इस चुनाव में धनबल, छल और सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। उनके अनुसार, यदि सभी सहयोगी दल एकजुट रहते तो परिणाम अलग हो सकता था। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की जीत जनभावनाओं की नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत और संसाधनों के इस्तेमाल की जीत है।   “दिल आहत है, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी” मंत्री ने कहा कि उनका मन आहत जरूर है, लेकिन वह निराश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में हार-जीत सामान्य प्रक्रिया है और यह स्थायी नहीं होती। अंसारी ने भरोसा जताया कि जनता का समर्थन उनके साथ है और वे संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि परिस्थितियां भले ही आज उनके पक्ष में नहीं हैं, लेकिन भविष्य में बदलाव संभव है।   “आज उनका दिन है, कल हमारा भी आएगा” अपने संदेश में इरफान अंसारी ने कहा कि राजनीति में किसी की जीत स्थायी नहीं होती। उन्होंने कहा कि आज भाजपा का समय है, लेकिन आने वाले समय में हालात बदलेंगे। उनकी इस प्रतिक्रिया को महागठबंधन के भीतर बढ़ती असहमति और राजनीतिक असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद झारखंड की राजनीति में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है।

abhishek singh जून 19, 2026 0
Irfan Ansari
मधुपुर में डॉ इरफान अंसारी ने अदा की बकरीद की नमाज

रांची। झारखंड के मधुपुर  में ईद-उल-अजहा (बकरीद) के मौके पर गुरुवार को धार्मिक उत्साह और भाईचारे का माहौल देखने को मिला। खलासी मोहल्ला स्थित मदीना ईदगाह में बड़ी संख्या में लोगों ने नमाज अदा की। इस अवसर पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और जामताड़ा विधायक Dr. Irfan Ansari भी शामिल हुए। नमाज के बाद उन्होंने लोगों से गले मिलकर बकरीद की मुबारकबाद दी और राज्य व देश में अमन-चैन की दुआ मांगी।   बकरीद को बताया त्याग और खुशियों का पर्व नमाज के बाद अपने संबोधन में डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि बकरीद केवल धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि त्याग, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सभी मिल-जुलकर त्योहार मनाएं और समाज में प्रेम व सद्भाव का संदेश फैलाएं। मंत्री ने कहा कि “खाएं-खिलाएं और खुशियां बांटें, यही इस पर्व की असली भावना है।” उन्होंने देश में बढ़ती नफरत की राजनीति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि जो लोग समाज में विभाजन फैलाने की कोशिश करते हैं, उन्हें भी प्यार और भाईचारे के साथ अपने घर बुलाना चाहिए, ताकि वे इंसानियत और सद्भाव की ताकत को समझ सकें।   झारखंड और देश की खुशहाली की दुआ डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि उन्होंने अल्लाह से झारखंड और पूरे देश की तरक्की, शांति और खुशहाली की दुआ मांगी है। उन्होंने कहा कि हर घर में सुख-शांति बनी रहे और समाज में आपसी सौहार्द कायम रहे, यही बकरीद का संदेश है। मदीना ईदगाह में नमाज का समय सुबह 7 बजे निर्धारित किया गया था। त्योहार को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। ईदगाह परिसर और आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई थी, जिससे लोगों ने सुरक्षित माहौल में नमाज अदा की।

Unknown मई 28, 2026 0
Jharkhand health guarantee scheme
झारखंडः हर नागरिक को मिलेगी नागरिकों को मिलेगी हेल्थ की गारंटी, हर नवजात का बनेगा हेल्थ कार्ड

रांची। झारखंड के हर नागरिक को अब हेल्थ की गारंटी मिलेगी। साथ ही यहां पैदा होनेवाले हर नवजात का हेल्थ कार्ड भी बनेगा। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने  यह घोषणा की है। उन्होंने कहा की विदेशों में  ऐसा होता है। अगर उनका बच्चा बीमार पड़ जाए तो उसका इलाज कैसे होगा, इसी बात से माता-पिता चिंतित रहते थे। अब उनकी परेशानी खतम हो जाएगी। ये सुविधा राज्य में सभी के लिए लागू की जाएगी।  स्वास्थ्य गारंटी कार्ड लागू होगा स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य में जल्द ही 'स्वास्थ्य गारंटी कार्ड' लागू किया जाएगा। इसके जरिए हर नागरिक को सुलभ और बेहतर इलाज की सुविधा सुनिश्चित की जाएगी। नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (एनक्वास) रैंकिंग में झारखंड ने देशभर में तीसरा स्थान प्राप्त किया है।  247 नए एडवांस एंबुलेंस की खरीद होगी स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य में 1200 स्थायी चिकित्सकों की नियुक्ति होगी। 7500 एएनएम और जीएनएम की भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी। केवल यहीं नहीं, राज्य को जल्द 247 नई एंबुलेंस मिलेगी।

Unknown अप्रैल 8, 2026 0
Irfan Ansari speech in Assembly
“किसान कम, नेता ज्यादा” - सदन में  इरफान अंसारी ने अनंत प्रताप देव पर साधा निशाना

रांची। रांची में झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन किसानों और धान खरीद के मुद्दे पर जोरदार बहस देखने को मिली। इस दौरान राजनीतिक बयानबाजी भी खूब हुई।   अनंत प्रताप देव ने उठाए धान खरीद के मुद्दे विधायक अनंत प्रताप देव ने गढ़वा क्षेत्र में धान खरीद की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अब तक किसानों से 50 प्रतिशत धान की भी खरीद नहीं हो पाई है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धान खरीद केंद्रों पर बायोमेट्रिक प्रणाली के तहत अंगूठा लगाने की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे किसानों को परेशानी हो रही है।   इरफान अंसारी का जवाब और तंज इस पर जवाब देते हुए मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि गढ़वा में धान खरीद की स्थिति बेहतर है। उन्होंने बताया कि 2 लाख क्विंटल के लक्ष्य के मुकाबले 2.5 लाख क्विंटल धान की खरीद हो चुकी है।इसी दौरान उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “आपके क्षेत्र में किसान कम और नेता ज्यादा हैं।” उनका यह बयान सदन में चर्चा का विषय बन गया। मंत्री ने यह भी बताया कि पूरे राज्य में 60 लाख क्विंटल के लक्ष्य के मुकाबले लगभग 80 प्रतिशत धान की खरीद पूरी हो चुकी है और किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान किया जाएगा।   नए विधायकों की ट्रेनिंग पर सुझाव इरफान अंसारी ने सदन में नए विधायकों को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि नए सदस्यों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, क्योंकि कई बार वे यह नहीं समझ पाते कि कब और कहां बोलना है, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित होती है।   पीडीएस व्यवस्था में सुधार की बात विधायक अमित यादव के सवाल पर मंत्री ने पीडीएस व्यवस्था की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पीडीएस दुकानदारों को प्रति किलो डेढ़ रुपये का कमीशन मिलता है, जबकि अन्य वस्तुओं पर एक रुपये का कमीशन दिया जाता है।साथ ही, बटखरा सत्यापन हर दो साल में किया जाता है और अब इलेक्ट्रॉनिक वेटिंग मशीन लगाने की योजना भी बनाई जा रही है।   मुआवजा विवाद पर जांच के निर्देश विधायक मथुरा महतो ने भारतमाला परियोजना के तहत मुआवजा भुगतान में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया। इस पर मंत्री दीपक बिरूआ ने आश्वासन दिया कि मामले की दोबारा जांच कराई जाएगी।उन्होंने कहा कि अगर जांच में गड़बड़ी पाई गई, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।   सदन में बहस के बीच राजनीतिक नोकझोंक कुल मिलाकर, बजट सत्र के अंतिम दिन विधानसभा में जहां किसानों के मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई, वहीं नेताओं के बीच तंज और आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिले, जिसने माहौल को और गर्म कर दिया।

Unknown मार्च 18, 2026 0
Jharkhand Assembly debate on DJ ban during festivals with leaders addressing media
‘डीजे हर हाल में बजेगा’-झारखंड विधानसभा में गूंजा बयान, त्योहारों को लेकर सियासत तेज

झारखंड में रामनवमी, सरहूल और ईद जैसे प्रमुख त्योहारों पर डीजे बजाने को लेकर सियासत गरमा गई है। विधानसभा के बाहर दिए गए एक बयान ने इस मुद्दे को और तूल दे दिया है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं। “डीजे हर हाल में बजेगा” - मंत्री का बड़ा बयान राज्य के स्वास्थ्य एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री इरफान अंसारी ने साफ शब्दों में कहा कि झारखंड में त्योहारों के दौरान डीजे बजेगा और हर साल बजेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार ने कभी डीजे पर पूरी तरह रोक लगाने की बात नहीं कही, बल्कि इसके संभावित दुष्परिणामों को लेकर लोगों को जागरूक करने की कोशिश की गई थी। मंत्री ने यह भी बताया कि जुलूसों के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सिविल सर्जनों को साथ रहने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट के आदेश बनाम राजनीतिक बयानबाजी सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि वह कोर्ट के निर्देशों का पालन कर रही है, जबकि विपक्ष इसे आम लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता में दखल बता रहा है। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफिजुल हसन ने भी साफ किया कि सरकार किसी भी त्योहार के खिलाफ नहीं है और केवल नियमों का पालन करवा रही है। विपक्ष का विरोध, जुलूस निकालने की चेतावनी विधायक निर्मल महतो, मनीष प्रसाद और रौशन लाल चौधरी समेत कई नेताओं ने जुलूस पर किसी भी तरह की रोक का विरोध किया है। उनका कहना है कि: रामनवमी और अन्य त्योहारों के जुलूस हर हाल में निकलेंगे सरकार को अनुमति देनी ही होगी यदि अनुमति नहीं मिली, तो भी जुलूस निकाला जाएगा   “धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिश”-सरकार का पलटवार मंत्री दीपिका सिंह पांडेय ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा अफवाह और धार्मिक उन्माद फैलाकर राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को नियमों पर आपत्ति है, तो वह संबंधित संस्थाओं से अनुमति ले सकता है। बाबूलाल मरांडी का बड़ा बयान प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि किसी भी धार्मिक आयोजन पर रोक लगाना गलत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक सड़कों पर जुलूस निकालना सभी का अधिकार है और किसी भी डर या दबाव में इसे रोका नहीं जाना चाहिए। “सरकार लोगों को कर रही परेशान”-नीरा यादव विधायक नीरा यादव ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर ऐसे फैसले ले रही है, जिससे आम लोगों को परेशानी हो। उन्होंने कहा कि सभी लोग मिलकर त्योहार मनाएंगे और डीजे भी बजाएंगे। मुद्दा बना राजनीतिक टकराव का कारण यह विवाद अब सिर्फ प्रशासनिक या कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। सत्ता पक्ष कोर्ट के आदेश और सुरक्षा व्यवस्था की बात कर रहा है विपक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़ रहा है

surbhi मार्च 18, 2026 0
free ultrasound for pregnant women
झारखंड विधानसभा बजट सत्र: गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड होगा मुफ्त, स्वास्थ्य सेवाओं में कई नई घोषणाएं

  झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। स्वास्थ्य मंत्री Irfan Ansari ने बुधवार को सदन में कहा कि अब राज्य में गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड मुफ्त कराया जाएगा, ताकि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जा सके।   स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की तैयारी मंत्री ने बताया कि राज्य की 42 हजार सहियाओं को काम को बेहतर बनाने के लिए टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम से लैस 237 हाईटेक एंबुलेंस खरीदी जाएंगी। इन एंबुलेंस के संचालन के लिए Dumka और Jamtara में कॉल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए ANM और GNM के 7500 पदों पर नियुक्ति की जाएगी, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन के लिए अतिरिक्त 10,500 मैनपावर की बहाली भी की जाएगी।   प्रमुख अस्पतालों में कैथलैब की स्थापना सरकार ने राज्य के बड़े अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने का भी फैसला किया है। इसके तहत MGM Hospital, Shaheed Nirmal Mahto Medical College and Hospital और Sadar Hospital में कैथलैब स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा हर पंचायत में उपस्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने की योजना भी सरकार ने बनाई है। राज्य सरकार ने वर्ष 2029 तक झारखंड को थैलेसिमिया मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए सभी जिलों में थैलेसिमिया की जांच कराई जाएगी। साथ ही नर्सिंग निदेशालय के गठन की भी घोषणा की गई है।   डीजे प्रतिबंध को लेकर विधानसभा में हंगामा बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में Hazaribagh में Ram Navami जुलूस के दौरान डीजे बजाने पर लगाए गए प्रतिबंध का मुद्दा उठने पर सदन में ज़ोरदार हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक आमने-सामने आ गए और नारेबाजी करने लगे। स्थिति को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष Rabindra Nath Mahato ने सदन की कार्यवाही 25 मिनट के लिए स्थगित कर दी। इस दौरान दोपहर 12:25 बजे से 12:50 बजे तक सदन की कार्यवाही बाधित रही।   भाजपा विधायक ने उठाया मुद्दा भाजपा विधायक Naveen Jaiswal ने हजारीबाग में रामनवमी जुलूस के दौरान डीजे बजाने पर रोक का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य में अन्य धर्मों के त्योहारों पर ऐसे प्रतिबंध नहीं लगाए जाते, जबकि हिंदू त्योहारों के दौरान प्रशासन कई तरह की पाबंदियां लगा देता है।   मंत्री का जवाब इस पर संसदीय कार्य मंत्री Radhakrishna Kishore ने कहा कि डीजे का किसी धर्म से कोई संबंध नहीं है। रात 10 बजे के बाद डीजे बजाने पर रोक अदालत के आदेश के तहत है और इसमें सरकार या प्रशासन की मनमानी नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में केवल हिंदू ही नहीं बल्कि पूरा हिंदुस्तान कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।  

surbhi मार्च 12, 2026 0
Jharkhand Health Minister Irfan Ansari arrives at Assembly riding a bicycle promoting fitness and healthy lifestyle.
साइकिल से विधानसभा पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी, फिटनेस का दिया संदेश; महंगाई और भाजपा पर भी बोले

  झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी साइकिल चलाकर विधानसभा पहुंचे। मंत्री के इस अंदाज ने राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ आम लोगों का भी ध्यान खींचा। विधानसभा परिसर पहुंचने के बाद उन्होंने कहा कि साइकिल से आने का उद्देश्य सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना भी है।   फिटनेस के लिए साइकिलिंग को बताया बेहतर विकल्प स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में साइकिल चलाना एक आसान और प्रभावी व्यायाम हो सकता है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच साइकिल एक सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल साधन भी है। नियमित रूप से साइकिल चलाने से शरीर फिट रहता है और कई बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में साइकिलिंग को शामिल करें।   स्वास्थ्य बजट पर सकारात्मक चर्चा की उम्मीद इरफान अंसारी ने बताया कि बुधवार को विधानसभा में स्वास्थ्य विभाग के बजट पर भी चर्चा प्रस्तावित है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सदन में इस विषय पर सकारात्मक और सार्थक बहस होगी। मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य राज्य के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है और बजट में कई ऐसे प्रस्ताव लाए जाएंगे जो स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में मदद करेंगे।   महंगाई को लेकर जताई चिंता इस दौरान मंत्री ने देश में बढ़ती महंगाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि एलपीजी गैस सहित कई जरूरी वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे आम लोगों, खासकर महिलाओं को काफी परेशानी हो रही है। उनके अनुसार महंगाई का असर सीधे तौर पर आम परिवारों के बजट पर पड़ रहा है।   रामनवमी के मुद्दे पर भाजपा पर हमला रामनवमी जुलूस में डीजे बजाने को लेकर चल रहे विवाद पर भी स्वास्थ्य मंत्री ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर भाजपा का धरना और विरोध केवल राजनीतिक नाटक है। मंत्री ने कहा कि भारत सभी धर्मों और समुदायों का देश है और समाज में आपसी भाईचारा तथा सौहार्द बनाए रखना सबसे जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि धार्मिक आयोजनों को राजनीति से दूर रखते हुए शांति और सद्भाव के साथ मनाया जाए।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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