रांची। झारखंड की राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के पूर्व निदेशक डॉ. राजकुमार ने पद छोड़ने के एक दिन बाद शुक्रवार को अपने गृह राज्य उत्तर प्रदेश के लिए रवाना हो गए। रवाना होने से पहले उन्होंने संस्थान की प्रशासनिक जिम्मेदारियां नव नियुक्त प्रभारी निदेशक डॉ. दीपेंद्र कुमार (डीके) सिन्हा को सौंप दीं। हाल ही में सीआईडी जांच और प्रशासनिक विवादों के बीच उनके इस्तीफे के बाद यह घटनाक्रम सामने आया है। प्रभारी निदेशक को सौंपा कार्यभार, खाली किया सरकारी आवास शुक्रवार सुबह डॉ. राजकुमार रिम्स निदेशक कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने सभी प्रशासनिक दस्तावेज और कार्यभार डॉ. डीके सिन्हा को विधिवत हस्तांतरित किया। इसके बाद उन्होंने निदेशक आवास भी खाली कर उसकी चाबी संबंधित अधिकारियों को सौंप दी। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई। कार्यभार सौंपने के बाद वे लखनऊ के लिए रवाना हो गए। बेटे को भी साथ ले गए, इस्तीफे की चर्चा तेज डॉ. राजकुमार अपने बेटे को भी अपने साथ ले गए, जिनकी रिम्स में ट्यूटर पद पर नियुक्ति को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। सूत्रों के अनुसार, संभावना है कि वे अपने बेटे से भी रिम्स की नौकरी से इस्तीफा दिला सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। गुरुवार को दिया था इस्तीफा डॉ. राजकुमार ने गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी को अपना इस्तीफा सौंपा था। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने तत्काल प्रभाव से उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए अधिसूचना जारी की और रिम्स के सर्जरी विभाग के प्राध्यापक डॉ. दीपेंद्र कुमार सिन्हा को अगले आदेश तक संस्थान का प्रभारी निदेशक नियुक्त कर दिया। रिम्स में हाल में हुई सीआईडी जांच और प्रशासनिक मामलों के बीच हुए इस बदलाव को संस्थान के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
रांची। झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में CID जांच के बाद बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। रिम्स के निदेशक डॉ. राजकुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने विभागीय मंत्री इरफान अंसारी की मंजूरी के बाद उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। साथ ही रिम्स के सर्जरी विभाग के प्राध्यापक डॉ. दीपेंद्र कुमार (डीके) सिन्हा को अगले आदेश तक संस्थान के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। इस संबंध में विभाग की ओर से आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। सीआईडी की दो टीमों ने की थी जांच 24 जून को CID की दो अलग-अलग टीमें रिम्स पहुंची थीं। जांच का केंद्र वर्ष 2025 में कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुए एमबीबीएस नामांकन और सफाई कार्य से जुड़े टेंडर में कथित अनियमितताओं के आरोप थे। जांच के दौरान अधिकारियों ने रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार, डीन, चिकित्सा अधीक्षक सहित कई अधिकारियों से पूछताछ की और संबंधित दस्तावेजों की जांच की। CID टीम आवश्यक अभिलेखों और शिकायतों से जुड़े दस्तावेजों की प्रतियां भी अपने साथ ले गई। इस्तीफे पर दिनभर बनी रही चर्चा रिम्स में पूरे दिन डॉ. राजकुमार के इस्तीफे की चर्चा होती रही, हालांकि उन्होंने इस मुद्दे पर मीडिया से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वहीं, रिम्स के प्रो. डी.आर. शिशिर कुमार ने कहा कि संस्थान में CID की कार्रवाई से वे आहत हैं। देर शाम स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने डॉ. राजकुमार का इस्तीफा मिलने और उसे स्वीकार किए जाने की पुष्टि की। पहले भी रद्द हो चुका है नामांकन गौरतलब है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नामांकन के मामले में रिम्स प्रशासन पहले ही एमबीबीएस और बीडीएस की एक-एक छात्रा का दाखिला रद्द कर चुका है। जिला प्रशासन की जांच में दोनों के जाति प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए थे। अब CID की जांच के बाद पूरे मामले में आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव परिणामों के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनाव के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री Irfan Ansari ने भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें हार का उतना दुख नहीं है, जितना “अपनों द्वारा भरोसा तोड़े जाने” का दर्द है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। भाजपा पर धनबल और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप इरफान अंसारी ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि इस चुनाव में धनबल, छल और सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। उनके अनुसार, यदि सभी सहयोगी दल एकजुट रहते तो परिणाम अलग हो सकता था। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की जीत जनभावनाओं की नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत और संसाधनों के इस्तेमाल की जीत है। “दिल आहत है, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी” मंत्री ने कहा कि उनका मन आहत जरूर है, लेकिन वह निराश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में हार-जीत सामान्य प्रक्रिया है और यह स्थायी नहीं होती। अंसारी ने भरोसा जताया कि जनता का समर्थन उनके साथ है और वे संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि परिस्थितियां भले ही आज उनके पक्ष में नहीं हैं, लेकिन भविष्य में बदलाव संभव है। “आज उनका दिन है, कल हमारा भी आएगा” अपने संदेश में इरफान अंसारी ने कहा कि राजनीति में किसी की जीत स्थायी नहीं होती। उन्होंने कहा कि आज भाजपा का समय है, लेकिन आने वाले समय में हालात बदलेंगे। उनकी इस प्रतिक्रिया को महागठबंधन के भीतर बढ़ती असहमति और राजनीतिक असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद झारखंड की राजनीति में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है।
रांची। झारखंड के मधुपुर में ईद-उल-अजहा (बकरीद) के मौके पर गुरुवार को धार्मिक उत्साह और भाईचारे का माहौल देखने को मिला। खलासी मोहल्ला स्थित मदीना ईदगाह में बड़ी संख्या में लोगों ने नमाज अदा की। इस अवसर पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और जामताड़ा विधायक Dr. Irfan Ansari भी शामिल हुए। नमाज के बाद उन्होंने लोगों से गले मिलकर बकरीद की मुबारकबाद दी और राज्य व देश में अमन-चैन की दुआ मांगी। बकरीद को बताया त्याग और खुशियों का पर्व नमाज के बाद अपने संबोधन में डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि बकरीद केवल धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि त्याग, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सभी मिल-जुलकर त्योहार मनाएं और समाज में प्रेम व सद्भाव का संदेश फैलाएं। मंत्री ने कहा कि “खाएं-खिलाएं और खुशियां बांटें, यही इस पर्व की असली भावना है।” उन्होंने देश में बढ़ती नफरत की राजनीति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि जो लोग समाज में विभाजन फैलाने की कोशिश करते हैं, उन्हें भी प्यार और भाईचारे के साथ अपने घर बुलाना चाहिए, ताकि वे इंसानियत और सद्भाव की ताकत को समझ सकें। झारखंड और देश की खुशहाली की दुआ डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि उन्होंने अल्लाह से झारखंड और पूरे देश की तरक्की, शांति और खुशहाली की दुआ मांगी है। उन्होंने कहा कि हर घर में सुख-शांति बनी रहे और समाज में आपसी सौहार्द कायम रहे, यही बकरीद का संदेश है। मदीना ईदगाह में नमाज का समय सुबह 7 बजे निर्धारित किया गया था। त्योहार को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। ईदगाह परिसर और आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई थी, जिससे लोगों ने सुरक्षित माहौल में नमाज अदा की।
रांची। झारखंड के हर नागरिक को अब हेल्थ की गारंटी मिलेगी। साथ ही यहां पैदा होनेवाले हर नवजात का हेल्थ कार्ड भी बनेगा। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने यह घोषणा की है। उन्होंने कहा की विदेशों में ऐसा होता है। अगर उनका बच्चा बीमार पड़ जाए तो उसका इलाज कैसे होगा, इसी बात से माता-पिता चिंतित रहते थे। अब उनकी परेशानी खतम हो जाएगी। ये सुविधा राज्य में सभी के लिए लागू की जाएगी। स्वास्थ्य गारंटी कार्ड लागू होगा स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य में जल्द ही 'स्वास्थ्य गारंटी कार्ड' लागू किया जाएगा। इसके जरिए हर नागरिक को सुलभ और बेहतर इलाज की सुविधा सुनिश्चित की जाएगी। नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (एनक्वास) रैंकिंग में झारखंड ने देशभर में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। 247 नए एडवांस एंबुलेंस की खरीद होगी स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य में 1200 स्थायी चिकित्सकों की नियुक्ति होगी। 7500 एएनएम और जीएनएम की भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी। केवल यहीं नहीं, राज्य को जल्द 247 नई एंबुलेंस मिलेगी।
रांची। रांची में झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन किसानों और धान खरीद के मुद्दे पर जोरदार बहस देखने को मिली। इस दौरान राजनीतिक बयानबाजी भी खूब हुई। अनंत प्रताप देव ने उठाए धान खरीद के मुद्दे विधायक अनंत प्रताप देव ने गढ़वा क्षेत्र में धान खरीद की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अब तक किसानों से 50 प्रतिशत धान की भी खरीद नहीं हो पाई है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धान खरीद केंद्रों पर बायोमेट्रिक प्रणाली के तहत अंगूठा लगाने की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे किसानों को परेशानी हो रही है। इरफान अंसारी का जवाब और तंज इस पर जवाब देते हुए मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि गढ़वा में धान खरीद की स्थिति बेहतर है। उन्होंने बताया कि 2 लाख क्विंटल के लक्ष्य के मुकाबले 2.5 लाख क्विंटल धान की खरीद हो चुकी है।इसी दौरान उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “आपके क्षेत्र में किसान कम और नेता ज्यादा हैं।” उनका यह बयान सदन में चर्चा का विषय बन गया। मंत्री ने यह भी बताया कि पूरे राज्य में 60 लाख क्विंटल के लक्ष्य के मुकाबले लगभग 80 प्रतिशत धान की खरीद पूरी हो चुकी है और किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान किया जाएगा। नए विधायकों की ट्रेनिंग पर सुझाव इरफान अंसारी ने सदन में नए विधायकों को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि नए सदस्यों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, क्योंकि कई बार वे यह नहीं समझ पाते कि कब और कहां बोलना है, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित होती है। पीडीएस व्यवस्था में सुधार की बात विधायक अमित यादव के सवाल पर मंत्री ने पीडीएस व्यवस्था की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पीडीएस दुकानदारों को प्रति किलो डेढ़ रुपये का कमीशन मिलता है, जबकि अन्य वस्तुओं पर एक रुपये का कमीशन दिया जाता है।साथ ही, बटखरा सत्यापन हर दो साल में किया जाता है और अब इलेक्ट्रॉनिक वेटिंग मशीन लगाने की योजना भी बनाई जा रही है। मुआवजा विवाद पर जांच के निर्देश विधायक मथुरा महतो ने भारतमाला परियोजना के तहत मुआवजा भुगतान में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया। इस पर मंत्री दीपक बिरूआ ने आश्वासन दिया कि मामले की दोबारा जांच कराई जाएगी।उन्होंने कहा कि अगर जांच में गड़बड़ी पाई गई, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सदन में बहस के बीच राजनीतिक नोकझोंक कुल मिलाकर, बजट सत्र के अंतिम दिन विधानसभा में जहां किसानों के मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई, वहीं नेताओं के बीच तंज और आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिले, जिसने माहौल को और गर्म कर दिया।
झारखंड में रामनवमी, सरहूल और ईद जैसे प्रमुख त्योहारों पर डीजे बजाने को लेकर सियासत गरमा गई है। विधानसभा के बाहर दिए गए एक बयान ने इस मुद्दे को और तूल दे दिया है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं। “डीजे हर हाल में बजेगा” - मंत्री का बड़ा बयान राज्य के स्वास्थ्य एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री इरफान अंसारी ने साफ शब्दों में कहा कि झारखंड में त्योहारों के दौरान डीजे बजेगा और हर साल बजेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार ने कभी डीजे पर पूरी तरह रोक लगाने की बात नहीं कही, बल्कि इसके संभावित दुष्परिणामों को लेकर लोगों को जागरूक करने की कोशिश की गई थी। मंत्री ने यह भी बताया कि जुलूसों के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सिविल सर्जनों को साथ रहने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट के आदेश बनाम राजनीतिक बयानबाजी सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि वह कोर्ट के निर्देशों का पालन कर रही है, जबकि विपक्ष इसे आम लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता में दखल बता रहा है। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफिजुल हसन ने भी साफ किया कि सरकार किसी भी त्योहार के खिलाफ नहीं है और केवल नियमों का पालन करवा रही है। विपक्ष का विरोध, जुलूस निकालने की चेतावनी विधायक निर्मल महतो, मनीष प्रसाद और रौशन लाल चौधरी समेत कई नेताओं ने जुलूस पर किसी भी तरह की रोक का विरोध किया है। उनका कहना है कि: रामनवमी और अन्य त्योहारों के जुलूस हर हाल में निकलेंगे सरकार को अनुमति देनी ही होगी यदि अनुमति नहीं मिली, तो भी जुलूस निकाला जाएगा “धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिश”-सरकार का पलटवार मंत्री दीपिका सिंह पांडेय ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा अफवाह और धार्मिक उन्माद फैलाकर राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को नियमों पर आपत्ति है, तो वह संबंधित संस्थाओं से अनुमति ले सकता है। बाबूलाल मरांडी का बड़ा बयान प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि किसी भी धार्मिक आयोजन पर रोक लगाना गलत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक सड़कों पर जुलूस निकालना सभी का अधिकार है और किसी भी डर या दबाव में इसे रोका नहीं जाना चाहिए। “सरकार लोगों को कर रही परेशान”-नीरा यादव विधायक नीरा यादव ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर ऐसे फैसले ले रही है, जिससे आम लोगों को परेशानी हो। उन्होंने कहा कि सभी लोग मिलकर त्योहार मनाएंगे और डीजे भी बजाएंगे। मुद्दा बना राजनीतिक टकराव का कारण यह विवाद अब सिर्फ प्रशासनिक या कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। सत्ता पक्ष कोर्ट के आदेश और सुरक्षा व्यवस्था की बात कर रहा है विपक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़ रहा है
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। स्वास्थ्य मंत्री Irfan Ansari ने बुधवार को सदन में कहा कि अब राज्य में गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड मुफ्त कराया जाएगा, ताकि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जा सके। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की तैयारी मंत्री ने बताया कि राज्य की 42 हजार सहियाओं को काम को बेहतर बनाने के लिए टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम से लैस 237 हाईटेक एंबुलेंस खरीदी जाएंगी। इन एंबुलेंस के संचालन के लिए Dumka और Jamtara में कॉल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए ANM और GNM के 7500 पदों पर नियुक्ति की जाएगी, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन के लिए अतिरिक्त 10,500 मैनपावर की बहाली भी की जाएगी। प्रमुख अस्पतालों में कैथलैब की स्थापना सरकार ने राज्य के बड़े अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने का भी फैसला किया है। इसके तहत MGM Hospital, Shaheed Nirmal Mahto Medical College and Hospital और Sadar Hospital में कैथलैब स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा हर पंचायत में उपस्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने की योजना भी सरकार ने बनाई है। राज्य सरकार ने वर्ष 2029 तक झारखंड को थैलेसिमिया मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए सभी जिलों में थैलेसिमिया की जांच कराई जाएगी। साथ ही नर्सिंग निदेशालय के गठन की भी घोषणा की गई है। डीजे प्रतिबंध को लेकर विधानसभा में हंगामा बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में Hazaribagh में Ram Navami जुलूस के दौरान डीजे बजाने पर लगाए गए प्रतिबंध का मुद्दा उठने पर सदन में ज़ोरदार हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक आमने-सामने आ गए और नारेबाजी करने लगे। स्थिति को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष Rabindra Nath Mahato ने सदन की कार्यवाही 25 मिनट के लिए स्थगित कर दी। इस दौरान दोपहर 12:25 बजे से 12:50 बजे तक सदन की कार्यवाही बाधित रही। भाजपा विधायक ने उठाया मुद्दा भाजपा विधायक Naveen Jaiswal ने हजारीबाग में रामनवमी जुलूस के दौरान डीजे बजाने पर रोक का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य में अन्य धर्मों के त्योहारों पर ऐसे प्रतिबंध नहीं लगाए जाते, जबकि हिंदू त्योहारों के दौरान प्रशासन कई तरह की पाबंदियां लगा देता है। मंत्री का जवाब इस पर संसदीय कार्य मंत्री Radhakrishna Kishore ने कहा कि डीजे का किसी धर्म से कोई संबंध नहीं है। रात 10 बजे के बाद डीजे बजाने पर रोक अदालत के आदेश के तहत है और इसमें सरकार या प्रशासन की मनमानी नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में केवल हिंदू ही नहीं बल्कि पूरा हिंदुस्तान कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी साइकिल चलाकर विधानसभा पहुंचे। मंत्री के इस अंदाज ने राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ आम लोगों का भी ध्यान खींचा। विधानसभा परिसर पहुंचने के बाद उन्होंने कहा कि साइकिल से आने का उद्देश्य सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना भी है। फिटनेस के लिए साइकिलिंग को बताया बेहतर विकल्प स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में साइकिल चलाना एक आसान और प्रभावी व्यायाम हो सकता है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच साइकिल एक सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल साधन भी है। नियमित रूप से साइकिल चलाने से शरीर फिट रहता है और कई बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में साइकिलिंग को शामिल करें। स्वास्थ्य बजट पर सकारात्मक चर्चा की उम्मीद इरफान अंसारी ने बताया कि बुधवार को विधानसभा में स्वास्थ्य विभाग के बजट पर भी चर्चा प्रस्तावित है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सदन में इस विषय पर सकारात्मक और सार्थक बहस होगी। मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य राज्य के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है और बजट में कई ऐसे प्रस्ताव लाए जाएंगे जो स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में मदद करेंगे। महंगाई को लेकर जताई चिंता इस दौरान मंत्री ने देश में बढ़ती महंगाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि एलपीजी गैस सहित कई जरूरी वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे आम लोगों, खासकर महिलाओं को काफी परेशानी हो रही है। उनके अनुसार महंगाई का असर सीधे तौर पर आम परिवारों के बजट पर पड़ रहा है। रामनवमी के मुद्दे पर भाजपा पर हमला रामनवमी जुलूस में डीजे बजाने को लेकर चल रहे विवाद पर भी स्वास्थ्य मंत्री ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर भाजपा का धरना और विरोध केवल राजनीतिक नाटक है। मंत्री ने कहा कि भारत सभी धर्मों और समुदायों का देश है और समाज में आपसी भाईचारा तथा सौहार्द बनाए रखना सबसे जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि धार्मिक आयोजनों को राजनीति से दूर रखते हुए शांति और सद्भाव के साथ मनाया जाए।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।