स्वास्थ्य

Brain and Kidney Health Linked to Blood Pressure

दिमाग की छोटी रक्त वाहिकाओं की बीमारी और किडनी की खराब सेहत के बीच मिला संबंध, हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है अहम कारण

surbhi अगस्त 19, 2026 0
Brain small vessel disease linked with kidney dysfunction, with high blood pressure emerging as a possible shared factor
Brain Small Vessel Disease and Kidney Health Link

एक नए अध्ययन में मस्तिष्क की छोटी रक्त वाहिकाओं की बीमारी (Cerebral Small Vessel Disease) और किडनी की कार्यक्षमता के बीच संबंध सामने आया है। शोध के अनुसार, बुजुर्ग लोगों में मस्तिष्क की छोटी रक्त वाहिकाओं से जुड़ी क्षति जितनी अधिक थी, किडनी की कार्यक्षमता खराब होने और पेशाब में एल्ब्यूमिन बढ़ने के संकेत भी उतने अधिक पाए गए।

हालांकि, यह अध्ययन यह साबित नहीं करता कि मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं की बीमारी सीधे किडनी की बीमारी का कारण बनती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इसके लिए लंबे समय तक किए जाने वाले अध्ययनों की जरूरत है।

239 लोगों पर किया गया अध्ययन

अध्ययन में 239 प्रतिभागियों को शामिल किया गया। सभी प्रतिभागियों के मस्तिष्क की एमआरआई जांच और किडनी से संबंधित परीक्षण किए गए।

मस्तिष्क की छोटी रक्त वाहिकाओं की बीमारी का आकलन 0 से 4 के स्कोर पर किया गया। इसमें सफेद पदार्थ में गंभीर बदलाव, छोटे स्ट्रोक जैसे घाव, मस्तिष्क में सूक्ष्म रक्तस्राव और रक्त वाहिकाओं के आसपास बढ़ी हुई जगह जैसे संकेतों को शामिल किया गया।

किडनी की स्थिति जानने के लिए ईजीएफआर, सीरम क्रिएटिनिन, सिस्टेटिन-सी और यूरिन एल्ब्यूमिन-टू-क्रिएटिनिन अनुपात जैसे मानकों का इस्तेमाल किया गया।

बीमारी का स्कोर बढ़ने पर किडनी की कार्यक्षमता कम मिली

शोध में पाया गया कि सेरेब्रल स्मॉल वेसल डिजीज के स्कोर में हर एक अंक की वृद्धि ईजीएफआर में औसतन लगभग 2.98 की कमी से जुड़ी थी।

इसके अलावा, बीमारी का अधिक स्कोर:

  • सीरम क्रिएटिनिन के बढ़ने से जुड़ा था।
  • सिस्टेटिन-सी के बढ़ने से संबंधित पाया गया।
  • पेशाब में एल्ब्यूमिन की मात्रा बढ़ने से जुड़ा था।
  • समग्र किडनी dysfunction की अधिक संभावना से संबंधित था।
  • एल्ब्यूमिन्यूरिया की संभावना भी अधिक पाई गई।

हालांकि, कम ईजीएफआर के साथ संबंध सांख्यिकीय रूप से निर्णायक नहीं था।

हाई ब्लड प्रेशर की भूमिका महत्वपूर्ण

अध्ययन का एक अहम निष्कर्ष हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर को लेकर सामने आया।

जब शोधकर्ताओं ने हाई ब्लड प्रेशर को विश्लेषण में शामिल किया, तो मस्तिष्क और किडनी से जुड़े कई संबंध कमजोर हो गए। शुरुआती मध्यस्थता विश्लेषण के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर ने इन संबंधों में लगभग 32% से 36.7% तक योगदान दिया हो सकता है।

इससे संकेत मिलता है कि लंबे समय तक बढ़ा हुआ रक्तचाप शरीर की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाली साझा प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, जिसका असर मस्तिष्क और किडनी दोनों पर पड़ सकता है।

क्या दिमाग की बीमारी से किडनी खराब होती है?

फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा।

यह अध्ययन क्रॉस-सेक्शनल था, यानी प्रतिभागियों का आकलन एक समय बिंदु पर किया गया। इसलिए इससे यह निर्धारित नहीं किया जा सकता कि मस्तिष्क की छोटी रक्त वाहिकाओं की बीमारी पहले हुई या किडनी की समस्या, अथवा दोनों के पीछे कोई साझा जोखिम कारक है।

शोधकर्ताओं ने भी स्पष्ट किया है कि इन निष्कर्षों की पुष्टि के लिए भविष्य में लंबे समय तक लोगों का अध्ययन करने वाले प्रॉस्पेक्टिव रिसर्च की आवश्यकता होगी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह शोध?

मस्तिष्क और किडनी दोनों ही शरीर की छोटी रक्त वाहिकाओं और रक्तचाप से प्रभावित होने वाले महत्वपूर्ण अंग हैं। इसलिए अध्ययन के निष्कर्ष यह संकेत देते हैं कि दोनों अंगों के स्वास्थ्य को अलग-अलग देखने के बजाय रक्तचाप और रक्त वाहिका स्वास्थ्य को व्यापक रूप से नियंत्रित करना महत्वपूर्ण हो सकता है।

फिर भी, इस अध्ययन के आधार पर किसी व्यक्ति को अपनी दवा या इलाज में बदलाव नहीं करना चाहिए। किडनी की कार्यक्षमता या रक्तचाप को लेकर चिंता होने पर चिकित्सकीय सलाह और उचित जांच जरूरी है।

 

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  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Health Tip: घंटों मोबाइल-लैपटॉप चलाने से बढ़ सकता है सिरदर्द का खतरा, डॉक्टर ने बताए बचाव के आसान तरीके

सावन सोमवार व्रत में फलाहार और तला-भुना भोजन

सावन सोमवार व्रत में तला-भुना फलाहार पड़ सकता है भारी, डायबिटीज और BP मरीज रखें खास सावधानी

Person with high fever, severe headache and stiff neck showing warning signs of possible meningitis infection
तेज बुखार के साथ उल्टी, सिरदर्द या गर्दन में अकड़न? इसे सामान्य वायरल फीवर न समझें, हो सकता है मेनिन्जाइटिस

तेज बुखार को अक्सर मौसम बदलने या वायरल संक्रमण से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन अगर बुखार के साथ लगातार तेज सिरदर्द, उल्टी, गर्दन में अकड़न, रोशनी से परेशानी या भ्रम जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। ये मेनिन्जाइटिस के संकेत हो सकते हैं। मेनिन्जाइटिस में मस्तिष्क और स्पाइनल कॉर्ड को ढकने वाली झिल्लियों में सूजन हो जाती है। यह वायरस, बैक्टीरिया, फंगस या अन्य संक्रमणों के कारण हो सकता है। इनमें बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस विशेष रूप से गंभीर माना जाता है और तेजी से बिगड़ सकता है। मेनिन्जाइटिस कितना खतरनाक है? मेनिन्जाइटिस के शुरुआती लक्षण कई बार सामान्य वायरल बुखार जैसे लगते हैं। यही वजह है कि लोग इलाज में देरी कर देते हैं। बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस तेजी से गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है और इसके कारण दौरे, बेहोशी, सुनने की क्षमता प्रभावित होना, स्थायी न्यूरोलॉजिकल नुकसान और मृत्यु तक का खतरा हो सकता है। इसलिए संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय जांच जरूरी है। इन शुरुआती लक्षणों पर रखें नजर मेनिन्जाइटिस में शुरुआत में ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं: तेज बुखार लगातार या बहुत तेज सिरदर्द उल्टी या मतली ठंड लगना शरीर में दर्द अत्यधिक थकान गर्दन में अकड़न अगर बुखार और सिरदर्द के साथ गर्दन अकड़ने लगे या तेज रोशनी सहन न हो, तो इसे सामान्य बुखार मानकर घर पर इलाज करते रहना उचित नहीं है। ये चेतावनी संकेत दिखें तो तुरंत अस्पताल जाएं कुछ लक्षण गंभीर संक्रमण की ओर इशारा कर सकते हैं: गर्दन में तेज अकड़न, असहनीय सिरदर्द, बार-बार उल्टी, रोशनी से परेशानी, भ्रम या बेहोशी, दौरे और त्वचा पर लाल-बैंगनी चकत्ते। विशेष रूप से मेनिंगोकोकल संक्रमण में त्वचा पर असामान्य चकत्ते गंभीर चेतावनी हो सकते हैं। वायरल और बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस में अंतर वायरल मेनिन्जाइटिस कई मामलों में अपेक्षाकृत कम गंभीर होता है और कुछ मरीज बिना विशेष उपचार के भी ठीक हो सकते हैं। इसके विपरीत बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस मेडिकल इमरजेंसी है। इसमें तत्काल चिकित्सकीय मूल्यांकन और उचित एंटीबायोटिक उपचार की जरूरत पड़ सकती है। इलाज में देरी होने पर गंभीर जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए घर पर केवल लक्षणों के आधार पर यह तय करना सही नहीं है कि संक्रमण वायरल है या बैक्टीरियल। किन लोगों में ज्यादा खतरा? मेनिन्जाइटिस का जोखिम कुछ समूहों में अधिक हो सकता है, जिनमें: नवजात और छोटे बच्चे किशोर और युवा बुजुर्ग कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग कुछ गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोग भीड़भाड़ वाले स्थानों या हॉस्टल में रहने वाले लोग जिनका आवश्यक टीकाकरण पूरा नहीं हुआ है बचाव कैसे करें? मेनिन्जाइटिस से हर मामले में पूरी तरह बचाव संभव नहीं है, लेकिन जोखिम कम किया जा सकता है। समय पर टीकाकरण, हाथों की स्वच्छता, खांसते-छींकते समय मुंह ढकना और संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क से बचना महत्वपूर्ण कदम हैं। सबसे जरूरी बात: समय बर्बाद न करें तेज बुखार के साथ सिर्फ उल्टी होना मेनिन्जाइटिस साबित नहीं करता, क्योंकि इसके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। लेकिन अगर बुखार के साथ तेज सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, रोशनी से परेशानी, भ्रम, दौरे या असामान्य चकत्ते दिखाई दें, तो तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है। खासकर बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस में बीमारी तेजी से गंभीर हो सकती है। इसलिए ऐसे लक्षणों में खुद से इलाज करने या इंतजार करने के बजाय डॉक्टर से तत्काल संपर्क करना सबसे सुरक्षित कदम है।  

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