आज की व्यस्त जीवनशैली में देर रात तक काम करना, मोबाइल पर समय बिताना या ओटीटी देखते हुए खाना खाना आम बात हो गई है। ऐसे में कई लोग रात 10–11 बजे या उससे भी देर से डिनर करते हैं। कभी-कभार देर से खाना खाने से आमतौर पर कोई बड़ी समस्या नहीं होती, लेकिन यदि यह रोज़ की आदत बन जाए तो इसका असर शरीर के मेटाबॉलिज्म, ब्लड शुगर नियंत्रण, नींद और लंबे समय में किडनी की सेहत पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर की सर्केडियन रिदम (जैविक घड़ी) दिन और रात के हिसाब से काम करती है। यही कारण है कि रात के समय भोजन को पचाने और ऊर्जा में बदलने की क्षमता दिन की तुलना में कम हो जाती है। देर रात खाना खाने पर शरीर में क्या होता है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, दिन के समय शरीर भोजन को बेहतर तरीके से पचाता है और ग्लूकोज का प्रभावी उपयोग करता है। लेकिन रात होते-होते इंसुलिन की संवेदनशीलता (Insulin Sensitivity) कम होने लगती है और मेटाबॉलिज्म भी धीमा पड़ जाता है। ऐसे में यदि देर रात भारी या अधिक कैलोरी वाला भोजन किया जाए, तो शरीर उसे उतनी कुशलता से प्रोसेस नहीं कर पाता। इसका परिणाम यह हो सकता है कि ब्लड शुगर अधिक समय तक बढ़ा रहे और अतिरिक्त कैलोरी शरीर में वसा (Fat) के रूप में जमा होने लगे। मेटाबॉलिज्म पर पड़ सकता है असर 1. ब्लड शुगर नियंत्रण प्रभावित हो सकता है रात के समय शरीर ग्लूकोज को नियंत्रित करने में अपेक्षाकृत कम सक्षम होता है। यदि लगातार देर रात भोजन किया जाए, खासकर रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और अधिक कैलोरी वाला भोजन, तो समय के साथ इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है। 2. इंसुलिन की कार्यक्षमता कम हो सकती है रात में शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो नींद की तैयारी करता है। इसी दौरान इंसुलिन की प्रभावशीलता कम हो सकती है। ऐसे समय भारी भोजन करने से शरीर को ब्लड शुगर नियंत्रित करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। क्या किडनी पर भी पड़ सकता है प्रभाव? देर रात खाना खाना सीधे तौर पर किडनी की बीमारी का कारण नहीं माना जाता, लेकिन यदि इस आदत की वजह से मोटापा, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं विकसित होती हैं, तो ये स्थितियां आगे चलकर किडनी पर भी नकारात्मक असर डाल सकती हैं। 1. बढ़ता वजन रात में अतिरिक्त कैलोरी लेने से शरीर अधिक वसा जमा कर सकता है। समय के साथ मोटापा बढ़ने पर किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। 2. डायबिटीज का खतरा यदि लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित न रहे और टाइप-2 डायबिटीज विकसित हो जाए, तो यह किडनी की महीन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है। 3. हाई ब्लड प्रेशर अनियमित खानपान और बढ़ता वजन उच्च रक्तचाप का जोखिम भी बढ़ा सकते हैं, जो किडनी रोग के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है। स्वस्थ रहने के लिए क्या करें? रात का भोजन सोने से कम से कम 2–3 घंटे पहले करें। रात में हल्का और संतुलित भोजन चुनें। अधिक तला-भुना और अत्यधिक मीठा भोजन सीमित करें। नियमित समय पर भोजन करने की आदत बनाएं। पर्याप्त नींद लें और रोज़ाना शारीरिक गतिविधि करें।
Gallbladder Stone Health Tips: गॉल ब्लैडर में स्टोन (पित्ताशय की पथरी) को अक्सर लोग एक सामान्य समस्या मानते हैं और ऑपरेशन के बाद इसे पूरी तरह खत्म हुई बीमारी समझ लेते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गॉल ब्लैडर में स्टोन केवल पित्ताशय की समस्या नहीं, बल्कि शरीर के बिगड़ते मेटाबॉलिज्म, बढ़ते वजन और फैटी लिवर का संकेत भी हो सकता है। समय रहते इस पर ध्यान न देने से भविष्य में हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और किडनी संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। क्यों बनती है गॉल ब्लैडर में स्टोन? गॉल ब्लैडर शरीर में लिवर द्वारा बनने वाले बाइल (पित्त) को स्टोर करने का काम करता है। जब शरीर में अतिरिक्त फैट जमा होने लगता है, तो बाइल में मौजूद कोलेस्ट्रॉल और अन्य तत्वों का संतुलन बिगड़ सकता है। धीरे-धीरे यही असंतुलन पथरी बनने का कारण बनता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गॉल ब्लैडर स्टोन कई बार यह संकेत देता है कि शरीर का मेटाबॉलिज्म सही तरीके से काम नहीं कर रहा है। ऐसे लोगों में आगे चलकर कई मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। किन बीमारियों का बढ़ सकता है खतरा? यदि गॉल ब्लैडर स्टोन के साथ मोटापा या फैटी लिवर भी मौजूद है, तो भविष्य में इन समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है— फैटी लिवर हाई ब्लड प्रेशर टाइप-2 डायबिटीज हृदय रोग किडनी से जुड़ी समस्याएं मेटाबॉलिक सिंड्रोम ऑपरेशन के बाद भी क्यों जरूरी है सावधानी? गॉल ब्लैडर निकालने की सर्जरी के बाद अधिकांश लोग सामान्य जीवन जी सकते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि समस्या की जड़ खत्म हो गई। यदि वजन, खानपान और जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया, तो फैटी लिवर और अन्य मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा बना रह सकता है। इसलिए ऑपरेशन के बाद भी हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना बेहद जरूरी है। फैमिली हिस्ट्री भी बढ़ा सकती है जोखिम यदि परिवार में माता-पिता या करीबी रिश्तेदारों को गॉल ब्लैडर स्टोन की समस्या रही है, तो अगली पीढ़ी में भी इसका खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में बचपन से ही संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ वजन बनाए रखना जरूरी है। किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें? पेट के दाईं ओर तेज दर्द तैलीय भोजन के बाद पेट दर्द मतली या उल्टी अपच और गैस पीठ या दाएं कंधे तक फैलने वाला दर्द यदि ये लक्षण बार-बार दिखाई दें, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। क्या खाएं? स्वस्थ गॉल ब्लैडर और लिवर के लिए इन चीजों को आहार में शामिल करें— हरी पत्तेदार सब्जियां मौसमी फल ओट्स और साबुत अनाज दालें और बीन्स लो-फैट दही ब्राउन राइस पर्याप्त पानी सीमित मात्रा में ड्राई फ्रूट्स किन चीजों से बचें? डीप फ्राइड फूड फास्ट फूड अधिक घी और मक्खन मीठे पेय और सॉफ्ट ड्रिंक्स अत्यधिक चीनी प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड कौन-सी एक्सरसाइज करें? रोजाना कम से कम 30–45 मिनट शारीरिक गतिविधि अपनाएं— तेज चाल से वॉक साइकिलिंग स्विमिंग योग सूर्य नमस्कार हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज एक्सपर्ट टिप्स वजन को नियंत्रित रखें। अचानक बहुत तेजी से वजन कम करने की कोशिश न करें। संतुलित और कम वसा वाला भोजन लें। रोजाना पर्याप्त पानी पिएं। नियमित हेल्थ चेकअप कराएं। लंबे समय तक पेट दर्द या पाचन संबंधी परेशानी को नजरअंदाज न करें। ध्यान रखें: गॉल ब्लैडर स्टोन केवल सर्जरी तक सीमित समस्या नहीं है। यह शरीर के मेटाबॉलिक स्वास्थ्य का संकेत भी हो सकता है। यदि समय रहते स्वस्थ खानपान, नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण पर ध्यान दिया जाए, तो कई गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है। किसी भी लक्षण या परेशानी की स्थिति में स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य चिकित्सक से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है.
Kidney Health Monsoon Diet: मानसून के मौसम में संक्रमण, डिहाइड्रेशन और खानपान की गड़बड़ी का असर किडनी की सेहत पर भी पड़ सकता है। ऐसे में संतुलित आहार के साथ कुछ हेल्दी सुपरफूड रेसिपीज डाइट का हिस्सा बनाकर किडनी की कार्यक्षमता को सपोर्ट किया जा सकता है। हालांकि, किडनी रोग से पीड़ित मरीज किसी भी डाइट में बदलाव से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह जरूर लें। मानसून में किडनी की देखभाल क्यों है जरूरी? बारिश के मौसम में नमी, दूषित पानी और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा कई लोग इस दौरान पानी कम पीते हैं, जिससे शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) हो सकती है। पर्याप्त पानी, संतुलित पोषण और ताजा भोजन किडनी के सामान्य कार्य को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। अगर आप स्वस्थ हैं, तो कुछ पोषक तत्वों से भरपूर रेसिपीज अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। 1. लौकी-मूंग दाल सूप आवश्यक सामग्री 1 कप लौकी (कटी हुई) ¼ कप धुली मूंग दाल 1 छोटा टुकड़ा अदरक काली मिर्च थोड़ा हरा धनिया बनाने की विधि मूंग दाल और लौकी को प्रेशर कुकर में पकाएं। ब्लेंड करके हल्का सूप तैयार करें और ऊपर से धनिया डालकर सर्व करें। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 120 kcal प्रोटीन: 8 ग्राम फाइबर: 4 ग्राम संभावित फायदे हल्का और आसानी से पचने वाला शरीर को हाइड्रेशन देने में मदद कम फैट वाला विकल्प 2. खीरा-दही रायता आवश्यक सामग्री 1 खीरा 1 कप लो-फैट दही भुना जीरा पुदीना बनाने की विधि खीरे को कद्दूकस कर दही में मिलाएं। ऊपर से जीरा और पुदीना डालें। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 90 kcal प्रोटीन: 6 ग्राम संभावित फायदे शरीर को ठंडक हाइड्रेशन में मदद पाचन को सपोर्ट 3. लाल शिमला मिर्च और पत्तागोभी सलाद आवश्यक सामग्री लाल शिमला मिर्च पत्तागोभी गाजर नींबू का रस काली मिर्च बनाने की विधि सभी सब्जियों को मिलाकर नींबू और काली मिर्च डालें। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 95 kcal फाइबर: 5 ग्राम संभावित फायदे विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स इम्यूनिटी को सपोर्ट 4. सेब-दालचीनी ओट्स बाउल आवश्यक सामग्री ½ कप ओट्स 1 छोटा सेब दालचीनी लो-फैट दूध बनाने की विधि ओट्स पकाएं, ऊपर से कटे सेब और दालचीनी डालें। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 220 kcal प्रोटीन: 8 ग्राम फाइबर: 6 ग्राम संभावित फायदे लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद संतुलित ऊर्जा 5. ब्लूबेरी या जामुन योगर्ट बाउल आवश्यक सामग्री 1 कप दही ब्लूबेरी या जामुन चिया सीड्स (कम मात्रा में) बनाने की विधि दही में फल मिलाकर तुरंत खाएं। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 160 kcal प्रोटीन: 8 ग्राम संभावित फायदे एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत हेल्दी स्नैक विकल्प 6. कद्दू और मूंग दाल खिचड़ी आवश्यक सामग्री मूंग दाल चावल (कम मात्रा) कद्दू हल्दी जीरा बनाने की विधि सभी सामग्री को प्रेशर कुकर में पकाकर हल्की खिचड़ी तैयार करें। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 240 kcal प्रोटीन: 10 ग्राम फाइबर: 5 ग्राम संभावित फायदे आसानी से पचने वाली संतुलित भोजन मानसून में आरामदायक मील मानसून में किडनी हेल्थ के लिए रखें इन बातों का ध्यान पर्याप्त मात्रा में साफ और सुरक्षित पानी पिएं। सड़क किनारे खुले खाद्य पदार्थ खाने से बचें। अधिक नमक और प्रोसेस्ड फूड सीमित रखें। ताजे फल और सब्जियां अच्छी तरह धोकर खाएं। नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद लें। ध्यान दें यह रेसिपीज सामान्य स्वस्थ लोगों के लिए संतुलित आहार का हिस्सा हो सकती हैं। यदि आपको किडनी की बीमारी, हाई क्रिएटिनिन, डायलिसिस, हाई पोटैशियम या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो इन खाद्य पदार्थों का सेवन डॉक्टर या रजिस्टर्ड डाइटिशियन की सलाह के अनुसार ही करें। कोई भी एक खाद्य पदार्थ अकेले किडनी को स्वस्थ नहीं रख सकता।
आजकल बदलती जीवनशैली, कम पानी पीने की आदत और असंतुलित खानपान के कारण पथरी (स्टोन) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। कई बार लोगों को पेट या कमर में तेज दर्द होता है, लेकिन वे इसे गैस या अपच समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि यह किडनी स्टोन या गॉलब्लैडर स्टोन का संकेत भी हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर सही पहचान और इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि दोनों तरह की पथरी में क्या अंतर होता है और इनके लक्षण कैसे अलग-अलग होते हैं। किडनी स्टोन और गॉलब्लैडर स्टोन में क्या अंतर है? किडनी स्टोन मूत्र तंत्र (यूरिनरी सिस्टम) से जुड़ी समस्या है। यह तब बनती है जब पेशाब में मौजूद कैल्शियम, यूरिक एसिड या अन्य खनिज मिलकर कठोर कण बना लेते हैं। वहीं गॉलब्लैडर स्टोन पाचन तंत्र से जुड़ी समस्या है। यह पित्ताशय (गॉलब्लैडर) में बनती है और आमतौर पर कोलेस्ट्रॉल या बिलीरुबिन जैसे तत्वों के जमने से विकसित होती है। कई मामलों में दोनों प्रकार की पथरी लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के भी रह सकती है। परेशानी तब शुरू होती है जब पथरी रास्ता रोकने लगती है। दर्द से कैसे करें पहचान? किडनी स्टोन के लक्षण कमर या पीठ के एक तरफ अचानक तेज दर्द होना। दर्द का पेट के निचले हिस्से या जांघ तक फैलना। दर्द का रुक-रुक कर तेज होना। पेशाब के दौरान दर्द या जलन महसूस होना। मतली या उल्टी की शिकायत होना। कुछ मामलों में पेशाब में खून भी आ सकता है। गॉलब्लैडर स्टोन के लक्षण दाईं ओर ऊपरी पेट या पसलियों के नीचे तेज दर्द। तला-भुना या ज्यादा वसायुक्त भोजन खाने के बाद दर्द बढ़ना। दर्द कई घंटों तक बना रह सकता है। मतली और उल्टी की समस्या। यदि पथरी पित्त नली में फंस जाए तो बुखार और पीलिया जैसी स्थिति भी हो सकती है। किन लोगों में अधिक होता है पथरी का खतरा? कुछ आदतें और स्वास्थ्य स्थितियां स्टोन बनने का जोखिम बढ़ा सकती हैं, जैसे- दिनभर पर्याप्त पानी न पीना। अधिक नमक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन। मोटापा या बढ़ता वजन। नियमित शारीरिक गतिविधि की कमी। परिवार में पहले किसी को किडनी स्टोन होने का इतिहास। असंतुलित खानपान और खराब जीवनशैली। कब डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें? यदि पेट, कमर या पसलियों के नीचे लगातार तेज दर्द हो, पेशाब में खून आए, तेज बुखार, पीलिया या बार-बार उल्टी जैसी समस्या हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। अल्ट्रासाउंड, यूरिन टेस्ट और अन्य जांचों के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि पथरी किडनी में है या गॉलब्लैडर में। समय पर पहचान और उचित उपचार से अधिकांश मरीज बिना किसी गंभीर जटिलता के स्वस्थ हो सकते हैं। नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
रांची। भगवान शिव की आराधना का पवित्र महीना सावन इस वर्ष 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। हिंदू धर्म में सावन को शिव भक्ति का सबसे शुभ समय माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र के जाप के माध्यम से भगवान भोलेनाथ की आराधना करते हैं। इस वर्ष सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं, जिन्हें विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। राजधानी रांची के प्रमुख शिव मंदिरों में भी सावन को लेकर विशेष तैयारियां शुरू हो गई हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। पहाड़ी मंदिर में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़ रातू रोड स्थित पहाड़ी मंदिर रांची के सबसे प्रसिद्ध शिवालयों में से एक है। लगभग 350 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 400 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। सावन की प्रत्येक सोमवारी को यहां विशेष जलाभिषेक, श्रृंगार और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां से रांची शहर का मनमोहक दृश्य भी दिखाई देता है। सुरेश्वर धाम और शिव शक्ति धाम में भी विशेष आयोजन चुटिया स्थित सुरेश्वर धाम मंदिर अपने 108 फीट ऊंचे विशाल शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। सावन के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं। वहीं, चिरौंदी स्थित शिव शक्ति धाम प्राकृतिक वातावरण और आध्यात्मिक शांति के लिए जाना जाता है। यहां सावन के दौरान भगवान शिव और मां शक्ति की विशेष पूजा-अर्चना होती है। आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनेंगे शिवालय सावन महीने में रांची के ये शिव मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति का भी प्रमुख केंद्र बन जाते हैं। श्रद्धालु मानते हैं कि इस पवित्र माह में भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा करने और इन शिवालयों के दर्शन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसी कारण हर वर्ष सावन में इन मंदिरों में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
गर्मियों के मौसम में शरीर से पसीने के रूप में बड़ी मात्रा में पानी बाहर निकलता है। यदि इस दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पिया जाए, तो शरीर में डिहाइड्रेशन की स्थिति बन सकती है, जिसका सीधा असर किडनी की सेहत पर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में किडनी स्टोन के मामलों में बढ़ोतरी का एक प्रमुख कारण शरीर में पानी की कमी है। कानपुर स्थित अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ. विनीत सिंह सोमवंशी के मुताबिक, जब शरीर में पानी की मात्रा कम हो जाती है तो पेशाब अधिक गाढ़ा हो जाता है। इससे उसमें मौजूद कैल्शियम, ऑक्सालेट और यूरिक एसिड जैसे तत्वों की सांद्रता बढ़ जाती है, जो आपस में मिलकर क्रिस्टल बनाते हैं। समय के साथ यही क्रिस्टल किडनी स्टोन का रूप ले लेते हैं। कैसे बनती है किडनी स्टोन? गर्म मौसम में अत्यधिक पसीना आने से शरीर से पानी तेजी से निकलता है। यदि इस पानी की भरपाई नहीं की जाती, तो पेशाब की मात्रा कम हो जाती है और उसमें मौजूद खनिज पदार्थ घुलने के बजाय जमा होने लगते हैं। यही जमा हुए कण धीरे-धीरे पथरी का रूप ले लेते हैं। किन लोगों को अधिक खतरा? विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ लोगों में किडनी स्टोन का जोखिम अधिक होता है, जैसे: लंबे समय तक धूप या गर्म वातावरण में काम करने वाले लोग पर्याप्त पानी पिए बिना ज्यादा व्यायाम करने वाले सॉफ्ट ड्रिंक्स, कैफीन और मीठे पेय पदार्थों का अधिक सेवन करने वाले बार-बार डिहाइड्रेशन का शिकार होने वाले पहले किडनी स्टोन की समस्या झेल चुके लोग खानपान भी बढ़ा सकता है जोखिम गर्मियों में प्रोसेस्ड फूड, अधिक नमक वाले स्नैक्स और शुगर युक्त पेय पदार्थों का सेवन किडनी स्टोन बनने की संभावना बढ़ा सकता है। ऐसे खाद्य पदार्थ शरीर के मिनरल संतुलन को प्रभावित करते हैं और पथरी बनने की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं। किडनी स्टोन के प्रमुख लक्षण किडनी स्टोन होने पर शरीर कई संकेत देता है, जिन पर ध्यान देना जरूरी है: पीठ, पेट या कमर के निचले हिस्से में तेज दर्द पेशाब करते समय जलन या दर्द पेशाब में खून आना या रंग बदलना बार-बार पेशाब की इच्छा होना मतली, उल्टी, बुखार या कंपकंपी पेशाब की मात्रा कम होना यदि इन लक्षणों के साथ बुखार भी हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि यह संक्रमण का संकेत हो सकता है। किडनी स्टोन से बचाव के आसान उपाय रोजाना कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पिएं। तरबूज, खीरा, खरबूजा और खट्टे फलों का सेवन बढ़ाएं। नमकीन, प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड से दूरी बनाएं। सॉफ्ट ड्रिंक्स, शराब और कैफीन का सीमित सेवन करें। प्यास लगने का इंतजार न करें, समय-समय पर पानी पीते रहें। धूप में काम करने या बाहर रहने पर पानी की मात्रा और बढ़ाएं। विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी स्टोन से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका शरीर को हाइड्रेटेड रखना है। गर्मियों में पानी पीने की आदत को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
क्रोनिक किडनी डिजीज से जूझ रहे मरीजों के लिए एक नई स्टडी ने अहम जानकारी सामने रखी है। Chronic Kidney Disease से जुड़ी खुजली, जिसे CKD-associated pruritus कहा जाता है, होम हीमोडायलिसिस लेने वाले मरीजों में भी एक आम और गंभीर समस्या बनी हुई है। करीब एक-तिहाई मरीज प्रभावित इस क्रॉस-सेक्शनल स्टडी में घर पर हीमोडायलिसिस करवा रहे 59 मरीजों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि करीब 31% मरीज (18 लोग) CKD-प्रुरिटस से प्रभावित थे। यह आंकड़ा उन मरीजों के बराबर है जो अस्पताल या डायलिसिस सेंटर में इलाज कराते हैं, जिससे साफ होता है कि घर पर इलाज करने के बावजूद यह समस्या बनी रहती है। जीवन की गुणवत्ता पर बड़ा असर स्टडी में यह भी सामने आया कि जिन मरीजों को खुजली की समस्या थी, उनकी जीवन गुणवत्ता (Quality of Life) काफी खराब पाई गई। EQ-5D स्कोर के अनुसार, प्रुरिटस वाले मरीजों का स्कोर 0.760 रहा, जबकि बिना इस समस्या वाले मरीजों का स्कोर 1.00 था। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह लक्षण रोजमर्रा के जीवन और मानसिक स्थिति पर गहरा प्रभाव डालता है। खुजली की तीव्रता और असर में नहीं मिला सीधा संबंध दिलचस्प बात यह है कि खुजली की गंभीरता (इंटेंसिटी) और मरीजों के अनुभव–जैसे एंग्जायटी, डिप्रेशन या नींद की समस्या–के बीच सीधा संबंध नहीं पाया गया। यानी हल्की खुजली भी मरीजों के जीवन पर बड़ा असर डाल सकती है, या फिर अन्य कारक भी उनकी स्थिति को प्रभावित कर रहे हो सकते हैं। इलाज और मैनेजमेंट पर नया फोकस जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि CKD-associated pruritus और मरीजों के अनुभव के बीच संबंध अभी पूरी तरह समझा नहीं गया है। इसलिए बड़े और लंबी अवधि वाले शोध की जरूरत है, ताकि बेहतर इलाज और मैनेजमेंट रणनीतियां विकसित की जा सकें। भविष्य के लिए अहम संकेत जैसे-जैसे होम हीमोडायलिसिस का चलन बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ऐसे लक्षणों की पहचान और उनका प्रभावी समाधान जरूरी हो गया है। मरीजों के समग्र स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए इस दिशा में और ध्यान देने की आवश्यकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।