स्वास्थ्य

Symptoms of Depression: थकान समझकर नजरअंदाज न करें, ये 5 संकेत हो सकते हैं डिप्रेशन की शुरुआत

anjali kumari अगस्त 19, 2026 0
Symptoms of Depression
Symptoms of Depression

नई दिल्ली, एजेंसियां। रोजमर्रा की व्यस्त जिंदगी में थकान, चिड़चिड़ापन, नींद में बदलाव या किसी काम में मन न लगना अक्सर सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन अगर ये बदलाव लगातार कई दिनों या हफ्तों तक बने रहें और आपकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो इन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है। ये डिप्रेशन के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

 

डिप्रेशन केवल उदासी तक सीमित नहीं होता। इसका असर व्यक्ति के मूड, ऊर्जा, नींद, भूख, एकाग्रता और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता पर भी पड़ सकता है। समय रहते लक्षणों को पहचानकर विशेषज्ञ से सलाह लेना मददगार हो सकता है।

 

1. लगातार उदासी या निराशा

 

लंबे समय तक उदास, खालीपन या निराशा महसूस करना डिप्रेशन का प्रमुख संकेत हो सकता है। कई बार व्यक्ति को अपनी स्थिति का स्पष्ट कारण भी समझ नहीं आता। भविष्य को लेकर नकारात्मक विचार बढ़ना और पहले की तरह खुशी महसूस न होना भी इसके लक्षण हो सकते हैं।

 

2. पसंदीदा कामों में रुचि खत्म होना

 

अगर व्यक्ति उन गतिविधियों में भी रुचि खोने लगे, जिन्हें वह पहले पसंद करता था, तो यह ध्यान देने वाला संकेत है। दोस्तों से मिलना, घूमना, फिल्म देखना या किसी शौक में समय बिताना बोझ जैसा लग सकता है। व्यक्ति धीरे-धीरे सामाजिक गतिविधियों से दूरी बनाने लगता है।

 

3. आराम के बाद भी लगातार थकान

 

पर्याप्त नींद और आराम के बावजूद हर समय थकान या ऊर्जा की कमी महसूस होना भी डिप्रेशन से जुड़ा हो सकता है। सामान्य काम करने में भी ज्यादा मेहनत लगना, सुबह उठने में परेशानी या पढ़ाई-ऑफिस के काम में ऊर्जा न लगना इसके संकेत हो सकते हैं।

 

4. नींद और भूख में बदलाव

 

डिप्रेशन का असर नींद और खाने की आदतों पर भी पड़ सकता है। कुछ लोगों को नींद आने में परेशानी होती है या बार-बार नींद टूटती है, जबकि कुछ लोग जरूरत से ज्यादा सोने लगते हैं। इसी तरह भूख कम या ज्यादा हो सकती है और इसके कारण वजन में बदलाव भी देखने को मिल सकता है।

 

5. ध्यान लगाने और फैसले लेने में दिक्कत

 

डिप्रेशन के दौरान व्यक्ति को किसी काम पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी हो सकती है। पढ़ाई या ऑफिस के काम में मन न लगना, चीजें भूलना और छोटे-छोटे फैसले लेने में कठिनाई महसूस होना भी इसके संकेत हो सकते हैं।

 

कब लेनी चाहिए विशेषज्ञ की सलाह?

 

अगर ये लक्षण लगातार बने हुए हैं, बढ़ रहे हैं या आपकी पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहे हैं, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेना उचित है। सिर्फ थकान मानकर लंबे समय तक इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

 

नोट: ये लक्षण डिप्रेशन का निश्चित निदान नहीं हैं। अलग-अलग कारणों से भी ऐसी परेशानियां हो सकती हैं। सही आकलन और उपचार के लिए योग्य डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें।

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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थायरॉइड की दवा लेने के बाद तुरंत नाश्ता करना पड़ सकता है भारी, हार्मोन लेवल पर पड़ सकता है असर

थायरॉइड की दवा रोजाना लेने वाले मरीजों के लिए सिर्फ दवा खाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे सही समय और सही तरीके से लेना भी बेहद जरूरी है। खासकर लेवोथायरोक्सिन लेने के तुरंत बाद खाना-पीना शुरू कर देने से दवा के शरीर में अवशोषण पर असर पड़ सकता है और हार्मोन लेवल को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। खाली पेट दवा लेने की सलाह क्यों? हाइपोथायरायडिज्म में आमतौर पर लेवोथायरोक्सिन दी जाती है। इसे नियमित समय पर खाली पेट, नाश्ते से करीब 30 से 60 मिनट पहले लेने की सलाह दी जाती है। भोजन के साथ लेने पर दवा का अवशोषण प्रभावित हो सकता है। दवा के तुरंत बाद किन चीजों से बचें? दवा लेने के बाद तुरंत इन चीजों का सेवन करने से बचने की सलाह दी जाती है: दूध और डेयरी उत्पाद कैल्शियम सप्लीमेंट आयरन सप्लीमेंट सोया और सोया मिल्क हाई-फाइबर भोजन कॉफी एंटासिड और कुछ एसिडिटी की दवाएं विशेष रूप से कैल्शियम और आयरन सप्लीमेंट को लेवोथायरोक्सिन से अलग समय पर लेने की जरूरत पड़ सकती है। कई स्रोत इन्हें लगभग चार घंटे के अंतर से लेने की सलाह देते हैं, लेकिन व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह सर्वोपरि है। नाश्ता कब करें? आमतौर पर दवा लेने के बाद कम से कम 30 मिनट और बेहतर अवशोषण के लिए करीब 60 मिनट बाद नाश्ता करने की सलाह दी जाती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रोजाना दवा लेने का तरीका और समय एक जैसा रखा जाए। क्या ब्रेड पूरी तरह बंद करनी होगी? नहीं। थायरॉइड की दवा लेने वाले व्यक्ति को सामान्य रूप से ब्रेड खाने से परहेज करने की जरूरत नहीं होती। समस्या तब हो सकती है जब हाई-फाइबर ब्रेड या कैल्शियम वाले डेयरी उत्पाद दवा लेने के तुरंत बाद लिए जाएं। नाश्ते में क्या ले सकते हैं? दवा लेने के उचित अंतराल के बाद संतुलित नाश्ते में उबले अंडे या ऑमलेट, बेसन का चीला, ओट्स या दलिया, फल और सूखे मेवे जैसे विकल्प शामिल किए जा सकते हैं।  

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सावन सोमवार व्रत में तला-भुना फलाहार पड़ सकता है भारी, डायबिटीज और BP मरीज रखें खास सावधानी

नई दिल्ली, एजेंसियां। सावन सोमवार के व्रत में लोग फल, दूध, मखाना, साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन खाते हैं। हालांकि फलाहार के नाम पर साबूदाना वड़ा, कुट्टू की पूरी और आलू के पकौड़े जैसी तली-भुनी चीजों का ज्यादा सेवन सेहत के लिए परेशानी बढ़ा सकता है।   ज्यादा तला-भुना खाना क्यों नुकसानदायक?     साबूदाना वड़ा, कुट्टू की पूरी और पकौड़ों को ज्यादा तेल में तलने से इनमें कैलोरी और वसा की मात्रा बढ़ जाती है। इससे व्रत के दौरान पेट भारी होना, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए फलाहार में कम तेल में तैयार किए गए व्यंजनों को प्राथमिकता देना बेहतर है।     साबूदाना और कुट्टू को ऐसे खाएं     डीप फ्राई किए गए साबूदाना वड़े की जगह साबूदाना खिचड़ी और कुट्टू की पूरी के बजाय कुट्टू का चीला या सिंघाड़े के आटे की रोटी बेहतर विकल्प हो सकते हैं। इससे व्रत की डाइट अपेक्षाकृत हल्की रखी जा सकती है।     फल और तरल पदार्थ भी जरूरी     व्रत में ताजे फल, दूध, दही, मखाना और नारियल पानी जैसे विकल्प शामिल किए जा सकते हैं। लंबे समय तक कुछ न खाने से कमजोरी या चक्कर की समस्या हो सकती है, इसलिए स्वास्थ्य और दिनचर्या के अनुसार पर्याप्त तरल लेना जरूरी है।     डायबिटीज और BP मरीज रहें सावधान     डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, किडनी, लिवर या हृदय संबंधी बीमारी वाले लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक व्रत रखने या अचानक डाइट बदलने से बचना चाहिए। लंबे समय तक खाना न खाने से कुछ लोगों में लो ब्लड शुगर, कमजोरी और डिहाइड्रेशन हो सकता है।   डायबिटीज मरीजों को खासतौर पर लंबे अंतराल और ज्यादा मीठे फलाहार से सावधान रहना चाहिए। वहीं ज्यादा नमक वाला और तला-भुना भोजन ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए भी परेशानी बढ़ा सकता है।   बारिश के मौसम में रखें साफ-सफाई का ध्यान     सावन में बारिश और नमी के कारण भोजन जल्दी खराब हो सकता है। ऐसे में व्रत के दौरान ताजा, साफ-सुथरा और अच्छी तरह तैयार भोजन ही खाना चाहिए।  

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