झारखंड में 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा यानी PT को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही CID को पूछताछ के दौरान कुछ अहम जानकारियां मिलने की बात सामने आई है। जांच के दायरे में आए तीन सफल अभ्यर्थियों पर आरोप है कि उन्होंने खुद परीक्षा में सफलता हासिल करने के साथ-साथ अन्य अभ्यर्थियों को भी अनुचित तरीके से सफल कराने के लिए एजेंट के रूप में काम किया। CID ने मंगलवार को उमाकांत उरांव, मनोज कुमार और रोशन केरकेट्टा को गिरफ्तार किया था। तीनों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में इनके कथित तौर पर अभय तिवारी और उसके सिंडिकेट से जुड़े कुछ लोगों के संपर्क में होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इन दावों की CID की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। खुद अभ्यर्थी और दूसरों के लिए एजेंट होने का आरोप जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, तीनों आरोपी खुद 14वीं JPSC PT में अभ्यर्थी थे। आरोप है कि उन्होंने परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए कथित तौर पर अनुचित साधनों का सहारा लिया और साथ ही दूसरे अभ्यर्थियों को भी पास कराने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि इस पूरे नेटवर्क में अभ्यर्थियों से बड़ी रकम लिए जाने की बात भी जांच के दौरान सामने आई है। हालांकि, किस अभ्यर्थी से कितनी रकम ली गई और परीक्षा में कथित तौर पर किस तरह मदद पहुंचाई गई, इसकी पूरी तस्वीर CID की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। इस मामले में फिलहाल सामने आई जानकारियां जांच सूत्रों पर आधारित हैं और आरोपों की न्यायिक पुष्टि होना बाकी है। तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी कहां से हुई? CID ने आरोपियों की गिरफ्तारी अलग-अलग स्थानों से की। उमाकांत उरांव मूल रूप से लोहरदगा के जुरियो स्थित कार्तिक नगर का रहने वाला बताया गया है। वह रांची के बरियातू में DIG ग्राउंड के पास रह रहा था, जहां से उसे गिरफ्तार किया गया। दूसरा आरोपी रोशन केरकेट्टा नगड़ी के हलहू का निवासी है और फिलहाल कोकर के हैदर गली रोड में रह रहा था। उसकी गिरफ्तारी उसके कोकर स्थित आवास से की गई। तीसरा आरोपी मनोज कुमार रांची के धुर्वा सेक्टर-3 स्थित एक क्वार्टर में रहता था। उसे भी CID ने गिरफ्तार कर पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है। 2204 सफल अभ्यर्थियों की OMR शीट की जांच 14वीं JPSC PT में कुल 2204 अभ्यर्थी सफल घोषित हुए थे। अब CID इन सभी सफल अभ्यर्थियों की OMR शीट की जांच कर रही है। अब तक 1750 अभ्यर्थियों की OMR शीट CID को प्राप्त होने की जानकारी है। जिन 454 अभ्यर्थियों की OMR शीट अभी जांच एजेंसी को नहीं मिली है, उनके संबंध में भी अलग से जांच की जाएगी। CID का लक्ष्य इस सप्ताह उपलब्ध सभी OMR शीट की जांच पूरी करना बताया जा रहा है। गिरफ्तार तीनों आरोपियों की OMR शीट और उत्तर पुस्तिकाओं की भी जांच की जा रही है, ताकि उनके प्रदर्शन और कथित अनियमितताओं के बीच किसी तरह का संबंध सामने आता है या नहीं, इसका पता लगाया जा सके। JSSC सचिव से लगातार तीसरे दिन पूछताछ इधर, जांच का दायरा केवल सफल अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है। CID ने JSSC सचिव सुधीर कुमार गुप्ता से लगातार तीसरे दिन पूछताछ की। परीक्षा की प्रक्रिया, प्रशासनिक व्यवस्था और संभावित गड़बड़ियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर उनसे जानकारी ली जा रही है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा प्रक्रिया में कहीं किसी स्तर पर ऐसी कमी या लापरवाही हुई थी, जिसका फायदा कथित तौर पर आरोपियों या किसी संगठित नेटवर्क ने उठाया। अब जांच में आगे क्या होगा? 14वीं JPSC PT मामले में अब CID की जांच कई स्तरों पर आगे बढ़ रही है। एक तरफ गिरफ्तार अभ्यर्थियों से पूछताछ जारी है, वहीं दूसरी तरफ सफल अभ्यर्थियों की OMR शीट की जांच की जा रही है। साथ ही परीक्षा से जुड़े अधिकारियों और जिम्मेदार पदाधिकारियों से भी पूछताछ हो रही है। यदि जांच में सफल अभ्यर्थियों और कथित एजेंट नेटवर्क के बीच ठोस संबंध सामने आते हैं, तो मामले का दायरा और बढ़ सकता है। फिलहाल CID की जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने का इंतजार है। 14वीं JPSC PT का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे राज्य की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक की विश्वसनीयता से जुड़ा है। ऐसे में जांच एजेंसी की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होना जरूरी होगा कि कथित अनियमितता कितनी व्यापक थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।
रांची: झारखंड में JPSC-JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. राज्य सरकार ने TDPL के पूर्ण या आंशिक रूप से शामिल रहने वाली 22 परीक्षाओं को रद्द कर दिया है. इनमें JSSC CGL (10/2023) और JPSC 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा भी शामिल हैं. वहीं, 23 अन्य परीक्षाओं की जांच CID से कराने का आदेश जारी किया गया है. सरकार की ओर से यह फैसला सीआईडी/एसआईटी जांच में सामने आए तथ्यों और प्राप्त शिकायतों के आधार पर लिया गया है. 18 अगस्त को कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की. फैसले के बाद उन अभ्यर्थियों और कर्मचारियों की चिंता बढ़ गई है, जो रद्द की गयी परीक्षाओं के जरिए चयनित होकर सरकारी सेवा में कार्यरत हैं. JSSC CGL से नियुक्त 1975 कर्मियों की नौकरी पर संकट JSSC CGL परीक्षा रद्द होने के बाद इस परीक्षा से चयनित करीब 1975 कर्मचारी सबसे बड़े असमंजस में हैं. ये अभ्यर्थी पिछले कई महीनों से अलग-अलग सरकारी विभागों में सेवा दे रहे हैं. परीक्षा रद्द होने के फैसले के बाद उनकी नियुक्ति की वैधता पर सवाल खड़ा हो गया है. कई चयनित अभ्यर्थियों ने पहले ही सरकार के फैसले के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाने की बात कही है. उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने और नियुक्ति मिलने के बाद उन्होंने सरकारी सेवा में योगदान दिया है. कई अभ्यर्थियों ने दूसरी नौकरियां छोड़कर JSSC CGL के पद पर योगदान किया था. JPSC 11वीं-13वीं के 342 अफसरों का भविष्य भी अधर में सरकार के आदेश का असर JPSC की 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा पर भी पड़ा है. इस परीक्षा में सफल होकर करीब 342 अधिकारी वर्तमान में नौकरी कर रहे हैं. परीक्षा रद्द होने के बाद इन अधिकारियों की नियुक्ति और भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं. इसके अलावा 64 सीडीपीओ और 56 फूड सेफ्टी अफसरों की नियुक्तियां भी प्रभावित हो सकती हैं, क्योंकि जिन परीक्षाओं के माध्यम से इनकी नियुक्ति हुई, उन्हें सरकार ने रद्द कर दिया है. 23 परीक्षाओं की अब CID करेगी जांच सरकार ने 22 परीक्षाओं को रद्द करने के साथ-साथ 23 अन्य परीक्षाओं की जांच CID से कराने का आदेश दिया है. इनमें कई पुरानी JPSC परीक्षाएं भी शामिल हैं. जांच के दायरे में फूड एनालिस्ट, फैक्ट्री इंस्पेक्टर, बॉयलर इंस्पेक्टर, सिविल जज, सिविल सेवा परीक्षा, असिस्टेंट इंजीनियर, डेंटल डॉक्टर समेत कई पदों से जुड़ी परीक्षाएं शामिल हैं. जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है. फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की भी पहल JPSC और JSSC में अनियमितता और कदाचार से जुड़े मामलों की सुनवाई जल्द पूरी कराने के लिए सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट से फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का आग्रह करने का निर्णय लिया है. इसके अलावा दोनों आयोगों में आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ गठित करने की भी बात कही गई है. सरकार का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में निगरानी बढ़ाना और भविष्य में गड़बड़ियों को रोकना है. रद्द की गई परीक्षाओं में कई बड़ी भर्तियां शामिल रद्द की गयी 22 परीक्षाओं में JPSC की कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां शामिल हैं. इनमें सिविल जज जूनियर डिविजन, सहायक वन संरक्षक, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, एपीपी, सिविल सेवा परीक्षा, फूड सेफ्टी ऑफिसर, सीडीपीओ और झारखंड पात्रता परीक्षा जैसी परीक्षाएं शामिल हैं. सरकार के इस फैसले के बाद जहां परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों में संतोष है, वहीं नियुक्त हो चुके अभ्यर्थियों के सामने नौकरी बचाने की चुनौती खड़ी हो गयी है. अब इस पूरे मामले में CID जांच, सरकार के अगले कदम और अदालत में संभावित कानूनी चुनौती पर सबकी नजर रहेगी.
दुमका: जिले के विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है. दुमका में जल्द ही आधुनिक सुविधाओं से लैस स्टेट ऑफ द आर्ट जिला पुस्तकालय का निर्माण किया जाएगा. इसके निर्माण पर करीब 7.54 करोड़ रुपये खर्च होंगे. पुस्तकालय के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से 7 करोड़ 54 लाख 53 हजार 871 रुपये का टेंडर जारी किया गया है. निर्माण एजेंसी को काम पूरा करने के लिए 365 दिनों का समय दिया गया है. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को मिलेगा बड़ा फायदा आधुनिक जिला पुस्तकालय बनने के बाद विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए बेहतर और व्यवस्थित माहौल मिलने की उम्मीद है. खासकर JPSC, JSSC, UPSC, SSC, बैंकिंग, रेलवे और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए यह सुविधा काफी उपयोगी साबित हो सकती है. पुस्तकालय में विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए शांत वातावरण के साथ किताबों और संदर्भ सामग्री जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है. इससे उन छात्रों को विशेष लाभ मिल सकता है, जिन्हें घर पर पढ़ाई के लिए पर्याप्त जगह या अनुकूल वातावरण नहीं मिल पाता है. दुमका में पहले से राजकीय पुस्तकालय में पहुंचते हैं सैकड़ों छात्र दुमका संताल परगना का प्रमंडलीय मुख्यालय होने के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक केंद्र भी है. यहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं. दुमका के राजकीय पुस्तकालय में भी पिछले कुछ वर्षों में सुविधाओं का विस्तार किया गया है. वर्तमान में करीब 500 से 600 विद्यार्थी नियमित रूप से वहां पहुंचकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं. ऐसे में नए आधुनिक जिला पुस्तकालय की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी. नया पुस्तकालय बनने के बाद विद्यार्थियों के लिए अध्ययन के अतिरिक्त स्थान और बेहतर संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे. श्रीरामकृष्ण आश्रम परिसर में निर्माण की तैयारी प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आधुनिक जिला पुस्तकालय के निर्माण के लिए श्रीरामकृष्ण आश्रम उच्च विद्यालय परिसर में खाली जमीन का चयन किया गया है. स्कूल का पूरा परिसर करीब 17 बीघा 17 कट्ठा में फैला हुआ है. विद्यालय परिसर में पहले से ही कई विकास कार्य चल रहे हैं. प्लस टू स्तर पर उत्क्रमित होने के बाद अतिरिक्त कक्षाओं के निर्माण का काम चल रहा है. इसके अलावा डायट के लिए मल्टीपर्पज बिल्डिंग, हॉस्टल और क्वार्टर का निर्माण भी कराया जा रहा है. इसी परिसर में आधुनिक जिला पुस्तकालय बनने से विद्यार्थियों को एक ही स्थान पर पढ़ाई के लिए कई बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है. एकलव्य स्कूल में भी बनेगा पुस्तकालय दुमका जिले के काठीकुंड स्थित एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल, फिटकोरिया के विद्यार्थियों के लिए भी पुस्तकालय की सुविधा विकसित करने की तैयारी है. इसके लिए 11 लाख 81 हजार 710 रुपये की लागत से टेंडर जारी किया गया है. यहां पुस्तकालय का निर्माण कार्य करीब तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. स्कूल का संचालन करीब दो साल पहले शुरू हुआ था और अब विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय समेत अन्य जरूरी शैक्षणिक संसाधन विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है. छात्रों के लिए बढ़ेगी पढ़ाई की सुविधा दुमका में जिला पुस्तकालय और एकलव्य स्कूल में पुस्तकालय निर्माण की पहल को जिले की शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. आधुनिक पुस्तकालयों के निर्माण से विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन माहौल, किताबों और संदर्भ सामग्री तक आसान पहुंच मिलेगी. खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए 7.54 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला आधुनिक जिला पुस्तकालय आने वाले समय में पढ़ाई और तैयारी का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है.
रांची: झारखंड सरकार के JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद अब मामला दो अलग-अलग पक्षों में बंटता नजर आ रहा है. एक ओर परीक्षा में कथित गड़बड़ी की शिकायत को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों ने फैसले का स्वागत किया है, वहीं दूसरी ओर इसी परीक्षा के जरिए चयनित होकर सरकारी नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है. कई चयनित अभ्यर्थी सरकार के फैसले के खिलाफ प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं और अब अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं. चयनित अभ्यर्थियों का छलका दर्द प्रदर्शन कर रहे चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नौकरी ज्वाइन की थी. एक अभ्यर्थी ने कहा कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले के बाद उनकी नियुक्ति हुई थी और मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख भी सामने आ चुका था. इसके बावजूद सरकार ने अचानक परीक्षा रद्द करने का फैसला ले लिया. अभ्यर्थी ने भावुक होकर कहा कि एक पल में वे बेरोजगार हो गए. उनका कहना है कि कई उम्मीदवारों ने JSSC-CGL में चयन के बाद अपनी पुरानी नौकरियां तक छोड़ दी थीं. अब परीक्षा रद्द होने के बाद उनके सामने दोबारा रोजगार हासिल करने का संकट खड़ा हो गया है. बोले- सरकार फैसले पर दोबारा करे विचार प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है. उनका कहना है कि यदि परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषी अभ्यर्थियों या जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए, लेकिन पूरी परीक्षा और सभी चयनित अभ्यर्थियों को एक साथ दोषी मानना उचित नहीं है. एक अभ्यर्थी ने कहा कि अगर जांच में कुछ लोगों की भूमिका सामने आती है तो केवल उन्हीं पर कार्रवाई की जानी चाहिए. चयनित अभ्यर्थियों का दावा है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की और नियुक्ति मिलने के बाद सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कोर्ट जाने की तैयारी में चयनित अभ्यर्थी सरकार के फैसले से नाराज चयनित अभ्यर्थियों ने कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया है. उनका कहना है कि वे पहले भी अदालत के माध्यम से अपनी नियुक्ति के चरण तक पहुंचे हैं और अब परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले को भी न्यायालय में चुनौती देंगे. अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका भविष्य सीधे तौर पर इस फैसले से प्रभावित हुआ है. खासकर उन उम्मीदवारों की परेशानी ज्यादा बढ़ गयी है, जिन्होंने JSSC-CGL में चयन के बाद दूसरी नौकरियां छोड़कर सरकारी सेवा ज्वाइन की थी. जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलनकारी छात्रों में खुशी इधर, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा JSSC-CGL और TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्रों ने फैसले का स्वागत किया. छात्रों ने इसे अपने आंदोलन की पहली बड़ी जीत बताया. छात्र नेता पीयूष कुमार ने कहा कि परीक्षा रद्द करना उनकी मांगों की दिशा में पहला कदम है. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है. छात्रों की CBI जांच और अन्य मांगें अभी बाकी हैं. उन्होंने कहा कि आगे की रणनीति पर छात्र नेता बैठक कर फैसला लेंगे. CBI जांच और अन्य मांगों पर आंदोलन जारी रखने का ऐलान आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि सिर्फ परीक्षा रद्द होने से उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हुई हैं. वे JSSC-CGL मामले की निष्पक्ष CBI जांच समेत अन्य विवादित मुद्दों पर भी सरकार से स्पष्ट कार्रवाई चाहते हैं. इस वजह से एक ही फैसले के बाद JSSC-CGL विवाद में दो अलग तस्वीरें सामने आई हैं. एक तरफ आंदोलनकारी छात्र परीक्षा रद्द होने को जीत मान रहे हैं, तो दूसरी तरफ चयनित अभ्यर्थी इसी फैसले को अपने रोजगार और भविष्य के लिए बड़ा झटका बता रहे हैं. अब इस पूरे मामले में सरकार के अगले कदम और अदालत की संभावित कार्रवाई पर सबकी नजर है.
रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से JSSC CGL और TDPL एजेंसी से जुड़ी भर्ती परीक्षाएं रद्द करने की घोषणा के बाद जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच खुशी का माहौल है. भारी बारिश के बावजूद छात्रों ने एक-दूसरे को गले लगाकर और मिठाई बांटकर सरकार के फैसले का स्वागत किया. छात्रों ने इसे लंबे संघर्ष की पहली बड़ी जीत बताया है. हालांकि, आंदोलनकारी छात्रों ने साफ कर दिया है कि परीक्षा रद्द होने के बावजूद उनका आंदोलन अभी खत्म नहीं होगा. परीक्षा रद्द होने पर छात्रों ने मनाया जीत का जश्न सरकार के फैसले की जानकारी मिलते ही धरना स्थल पर मौजूद छात्रों में उत्साह देखने को मिला. छात्रों ने कहा कि लंबे समय से वे परीक्षा में कथित गड़बड़ी और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे. परीक्षा रद्द करने का फैसला उनकी प्रमुख मांगों में से एक था, इसलिए इसे संघर्ष की बड़ी सफलता माना जा रहा है. हालांकि, छात्र नेताओं का कहना है कि अभी कई अहम मांगें बाकी हैं. इनमें सबसे प्रमुख मांग परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ी की सीबीआई जांच है. CBI जांच तक जारी रहेगा अनशन छात्र नेता रवींद्र पासवान ने कहा कि सरकार ने परीक्षा रद्द करने की मांग मान ली है, लेकिन छात्रों का आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष सीबीआई जांच का आदेश नहीं दिया जाता, तब तक छात्र धरना स्थल से नहीं हटेंगे. उन्होंने आंदोलन में साथ देने वाले छात्रों, अभिभावकों और मीडिया का भी आभार जताया. उनका कहना है कि छात्रों की लड़ाई केवल परीक्षा रद्द कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की भी है. पीयूष कुमार बोले- यह सिर्फ पहली जीत छात्र नेता पीयूष कुमार ने सरकार के फैसले को संघर्ष की पहली जीत बताया. उन्होंने कहा कि अभी 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा समेत कई दूसरे मुद्दे छात्रों के सामने हैं. इन मामलों को लेकर छात्र आगे की रणनीति पर विचार करेंगे. उनका कहना है कि जब तक भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सभी विवादित मुद्दों का समाधान नहीं होता और छात्रों की प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. देवेंद्र नाथ महतो ने कहा- बड़ी लड़ाई अभी बाकी अनशन की अगुवाई कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि छात्रों ने व्यवस्था में कथित गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई है. उन्होंने कहा कि परीक्षा रद्द होना महत्वपूर्ण फैसला है, लेकिन इससे छात्रों की पूरी मांग पूरी नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि शिक्षा और भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए अभी लंबी कानूनी और रणनीतिक लड़ाई बाकी है. आने वाले दिनों में आंदोलन की आगे की रणनीति तय कर सार्वजनिक की जाएगी. स्टेडियम में डटे रहेंगे छात्र छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल आंदोलनकारी जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में ही डटे रहेंगे. उनका कहना है कि सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए भी वे अपनी बाकी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटेंगे. अब इस आंदोलन की अगली दिशा सरकार के अगले कदम और सीबीआई जांच को लेकर होने वाले फैसले पर निर्भर करेगी. परीक्षा रद्द होने के बाद जहां सरकार और छात्रों के बीच गतिरोध कम होने की उम्मीद जगी है, वहीं सीबीआई जांच की मांग ने आंदोलन को पूरी तरह खत्म होने से रोक दिया है.
रांची: JSSC CGL परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले के बाद अब करीब 1975 चयनित अभ्यर्थियों का भविष्य सवालों के घेरे में आ गया है. ये अभ्यर्थी इसी परीक्षा के आधार पर राज्य के अलग-अलग सरकारी विभागों में नियुक्त होकर पिछले करीब सात महीने से काम कर रहे हैं. परीक्षा रद्द होने की घोषणा के बाद चयनित कर्मचारियों के बीच नौकरी जाने की चिंता बढ़ गयी है. चयनित कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने पूरी चयन प्रक्रिया से गुजरने के बाद नियुक्ति पायी और सरकार के अलग-अलग विभागों में योगदान देकर अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं. कई अभ्यर्थियों ने तो सरकारी नौकरी मिलने के बाद अपनी पुरानी नौकरी तक छोड़ दी थी. ऐसे में अब परीक्षा रद्द होने के फैसले ने उनके सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है. नियुक्ति के बाद सात महीने से कर रहे काम JSSC CGL के माध्यम से चयनित करीब 1975 अभ्यर्थियों को अलग-अलग सरकारी विभागों में नियुक्ति मिली थी. नियुक्ति के बाद सभी ने संबंधित विभागों में योगदान दिया और करीब सात महीने से सरकारी सेवा में काम कर रहे हैं. चयनित कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने केवल परीक्षा पास नहीं की, बल्कि नियुक्ति मिलने के बाद सरकार की ओर से निर्धारित प्रक्रिया पूरी की और अपने पद पर योगदान भी दिया. अब अचानक परीक्षा रद्द होने से उनकी नौकरी और भविष्य दोनों अनिश्चित हो गये हैं. कई लोगों ने छोड़ दी थी पुरानी नौकरी इस मामले में सबसे बड़ी चिंता उन अभ्यर्थियों की है, जिन्होंने JSSC CGL में चयन होने के बाद अपनी पुरानी नौकरी छोड़ दी थी. चयनित कर्मचारियों के अनुसार, कुछ लोगों ने निजी क्षेत्र में इंजीनियरिंग से जुड़ी नौकरियां छोड़ीं, जबकि कुछ अभ्यर्थियों ने रेलवे और दूसरी सेवाओं से इस्तीफा देकर सरकारी पद स्वीकार किया. अब अगर JSSC CGL की नियुक्ति पर भी संकट आता है, तो इन अभ्यर्थियों के लिए पुरानी नौकरी में वापस लौटना आसान नहीं होगा. यही वजह है कि चयनित कर्मचारी सरकार के फैसले को लेकर काफी चिंतित हैं. परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी भी बढ़ी चयनित कर्मचारियों का कहना है कि पिछले सात महीने से वे सरकारी नौकरी कर रहे हैं और इसी आय के आधार पर अपने परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी कर रहे हैं. कुछ लोगों ने नौकरी मिलने के बाद अपने रहने, स्थानांतरण और अन्य खर्चों को भी उसी के अनुसार व्यवस्थित किया. ऐसे में नौकरी पर अनिश्चितता का असर सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके परिवारों पर भी पड़ सकता है. कर्मचारियों का कहना है कि सरकार को कोई भी फैसला लेने से पहले उनके भविष्य और अब तक की सेवा को ध्यान में रखना चाहिए. सरकार के फैसले को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी परीक्षा रद्द होने के फैसले से नाराज चयनित कर्मचारियों ने अब कानूनी रास्ता अपनाने की तैयारी शुरू कर दी है. उनका कहना है कि वे अपनी नियुक्ति और सेवा की सुरक्षा के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे. चयनित कर्मचारियों का तर्क है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें नियुक्ति दी गयी, उन्होंने योगदान किया और करीब सात महीने तक सरकारी सेवा भी दी. ऐसे में अब परीक्षा रद्द करने के फैसले का उनकी नियुक्ति पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है. अब सरकार के सामने दोहरी चुनौती JSSC CGL विवाद अब दो अलग-अलग पक्षों में बंटता नजर आ रहा है. एक ओर परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे छात्र परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे थे. सरकार ने उनकी मांग मानते हुए परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है. वहीं दूसरी ओर इसी परीक्षा के आधार पर चयनित होकर सरकारी विभागों में काम कर रहे 1975 कर्मचारियों की नौकरी का भविष्य सामने आ गया है. अब सरकार के सामने यह चुनौती है कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच और परीक्षा रद्द करने की प्रक्रिया के साथ-साथ पहले से नियुक्त कर्मचारियों के हितों को किस तरह सुरक्षित किया जाए. कोर्ट के फैसले पर भी रहेगी नजर चयनित कर्मचारियों की ओर से यदि अदालत में याचिका दायर की जाती है, तो मामला और महत्वपूर्ण हो जाएगा. अदालत में यह सवाल उठ सकता है कि परीक्षा रद्द होने का पहले से नियुक्त और सेवा दे रहे कर्मचारियों की नौकरी पर क्या कानूनी असर पड़ेगा. फिलहाल चयनित कर्मचारियों की नजर सरकार के अगले कदम और संभावित न्यायिक कार्रवाई पर है. जिस परीक्षा को पास कर 1975 अभ्यर्थियों ने सरकारी नौकरी हासिल की, उसी परीक्षा के रद्द होने के बाद अब उनकी नौकरी बचाने की लड़ाई शुरू होती दिख रही है.
रांची: जेपीएससी-जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में JSSC CGL परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया है. इसके साथ ही TDPL एजेंसी के माध्यम से आयोजित की गयी अन्य भर्ती परीक्षाओं को भी रद्द करने की घोषणा की गयी है. प्रोजेक्ट भवन में कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद इसकी जानकारी दी. सरकार के इस फैसले के बाद रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच खुशी का माहौल देखने को मिला. छात्र लंबे समय से JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे. TDPL की सभी परीक्षाएं होंगी रद्द मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल JSSC CGL परीक्षा ही रद्द नहीं होगी, बल्कि TDPL एजेंसी के माध्यम से आयोजित की गयी सभी भर्ती परीक्षाओं को भी रद्द किया जाएगा. इसमें वे परीक्षाएं भी शामिल होंगी, जिनकी चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. सरकार ने JSSC CGL परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों की जांच कराने का भी फैसला लिया है. सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा. छात्रों के हित में सरकार ने लिया फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आंदोलन कर रहे सभी युवा राज्य के नौजवान हैं और सरकार उनके हितों के साथ खड़ी है. उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं होना चाहिए. सरकार के इस फैसले को लंबे समय से जारी छात्र आंदोलन को खत्म करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. छात्रों की ओर से JSSC CGL समेत विवादित परीक्षाओं को लेकर लगातार सवाल उठाये जा रहे थे. परीक्षा व्यवस्था में होंगे बड़े सुधार मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर पूर्व में तय एसओपी यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का पूरी सख्ती से पालन किया गया होता, तो परीक्षा व्यवस्था में इस तरह की खामियां सामने नहीं आतीं. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने परीक्षा में धांधली रोकने के लिए पहले ही कड़ा कानून बनाया है. अब भर्ती परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया में और सुधार किये जाएंगे, ताकि भविष्य में परीक्षा संचालन और नियुक्ति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो सके. अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में बनेगी उच्चस्तरीय कमेटी JSSC और JPSC की परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार ने उच्चस्तरीय कमेटी गठित करने का फैसला लिया है. मुख्यमंत्री के अनुसार वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अमिताभ कौशल के नेतृत्व में यह कमेटी काम करेगी. कमेटी प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन, चयन प्रक्रिया, परीक्षा संचालन और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों का अध्ययन करेगी. इसके बाद परीक्षा व्यवस्था में जरूरी सुधारों को लेकर अपनी सिफारिशें और दिशा-निर्देश देगी. 2014 से हुई नियुक्तियों की भी होगी जांच सरकार ने जांच का दायरा केवल JSSC CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं तक सीमित नहीं रखा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 से अब तक हुई छोटी-बड़ी नियुक्तियों में अगर किसी तरह की गड़बड़ी हुई है, तो उसकी भी जांच की जाएगी. इस फैसले से आने वाले दिनों में राज्य की पुरानी भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर भी जांच का दायरा बढ़ सकता है. सरकार का दावा है कि नियुक्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है. MMDR बिल पर विशेष सत्र की संभावना कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा पारित MMDR संशोधन कानून को लेकर भी राज्य सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि खनिज संपदा और राज्य के अधिकारों से जुड़े इस मुद्दे पर जल्द बैठक की जाएगी. उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर MMDR कानून में हुए बदलावों पर चर्चा और विचार-विमर्श के लिए झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र भी बुलाया जा सकता है. छात्रों की मांगों पर सरकार का बड़ा फैसला JSSC CGL परीक्षा रद्द करने, TDPL की अन्य परीक्षाओं को कैंसल करने और भर्ती प्रक्रिया की जांच के फैसले को आंदोलनरत छात्रों की प्रमुख मांगों पर सरकार की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है. अब छात्रों की नजर सरकार की ओर से घोषित जांच और परीक्षा सुधारों के अगले कदम पर है. फिलहाल JSSC CGL रद्द होने के साथ ही 23 दिनों से जारी छात्र आंदोलन में एक बड़ा मोड़ आ गया है. सरकार और छात्रों के बीच आगे की बातचीत में आंदोलन समाप्त करने और नई भर्ती प्रक्रिया को लेकर फैसला अहम होगा.
रांची: JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर रांची में जारी छात्र आंदोलन को अब बॉलीवुड अभिनेत्री और अधिवक्ता कुनिका सदानंद का भी समर्थन मिला है. कुनिका सदानंद आंदोलन स्थल पर पहुंचीं और छात्रों से मुलाकात कर उनकी मांगों को सुना. उन्होंने छात्रों की मांगों को जायज बताते हुए सरकार से संवेदनशीलता के साथ बातचीत कर समाधान निकालने की अपील की. कुनिका सदानंद ने कहा कि नौकरी और शिक्षा से जुड़े मुद्दे युवाओं के भविष्य से सीधे जुड़े हैं. ऐसे में सरकार को छात्रों की बात गंभीरता से सुननी चाहिए और बातचीत के जरिये गतिरोध खत्म करने की कोशिश करनी चाहिए. सरकार को 10-15 दिन का समय देने का सुझाव कुनिका सदानंद ने कहा कि उन्हें लगता है कि झारखंड सरकार इस मामले में केंद्र सरकार की तुलना में अधिक संवेदनशील तरीके से पहल कर सकती है. उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार छात्रों की मांगों पर विचार करने के लिए 10 से 15 दिन का समय ले और इस दौरान ठोस समाधान निकालने की कोशिश करे. उन्होंने कहा कि आंदोलन को लगातार लंबा खींचने के बजाय सरकार और छात्रों के बीच संवाद होना चाहिए, ताकि किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सके. उनके अनुसार, छात्रों की समस्याओं का समाधान बातचीत और सकारात्मक पहल से ही संभव है. CID की जांच और कार्रवाई पर भी उठाये सवाल छात्रों की ओर से की जा रही जांच की मांग के सवाल पर कुनिका सदानंद ने CID की भूमिका और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाये. उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में गिरफ्तारियां हुई हैं, तो जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा होनी चाहिए. उन्होंने छात्रों की ओर से सीबीआई जांच की मांग का भी जिक्र किया. हालांकि उन्होंने आशंका जतायी कि जांच एजेंसी बदलने से प्रक्रिया और लंबी हो सकती है. उनका कहना था कि सबसे जरूरी बात यह है कि जांच निष्पक्ष और प्रभावी तरीके से आगे बढ़े तथा मामले का समाधान जल्द हो. मुंबई से लगातार आंदोलन पर रख रही थीं नजर कुनिका सदानंद ने बताया कि वह काफी समय से मुंबई से झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन को फॉलो कर रही थीं. झारखंड आने के बाद उन्होंने खुद आंदोलन स्थल पर पहुंचकर छात्रों से मिलने का फैसला किया. उन्होंने बताया कि जिन लोगों ने झारखंड में उनकी मेहमाननवाजी की, उनसे भी उन्होंने कहा कि वह छात्रों के प्रदर्शन में जरूर जाना चाहती हैं. इसके बाद वह आंदोलन स्थल पहुंचीं और आंदोलनरत छात्रों के साथ बातचीत की. दिल्ली और झारखंड के आंदोलन में बताया अंतर कुनिका सदानंद ने दिल्ली के जंतर-मंतर और झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच अंतर का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है, इसलिए वहां होने वाले आंदोलनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना रहती है. वहीं झारखंड के आंदोलन में बाहर से लोगों की संख्या कम दिखाई दे सकती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर छात्रों और युवाओं का समर्थन काफी महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि झारखंड में रोजगार और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल अचानक पैदा नहीं हुए हैं, बल्कि इनके पीछे लंबे समय की पृष्ठभूमि है. झारखंड गठन के बाद भी रोजगार और शिक्षा के सवाल अभिनेत्री ने झारखंड गठन के बाद रोजगार और शिक्षा से जुड़े सवालों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि राज्य के गठन के पीछे स्थानीय लोगों और आदिवासी समुदाय के अधिकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. उनके अनुसार, राज्य बनने के बाद भी रोजगार और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई सवाल पूरी तरह हल नहीं हो सके हैं. उन्होंने कहा कि इन समस्याओं की पूरी जिम्मेदारी केवल मौजूदा सरकार पर डालना उचित नहीं होगा, क्योंकि अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में भी ये मुद्दे बने रहे हैं. नियमित नियुक्तियों की व्यवस्था पर जोर कुनिका सदानंद ने सरकारी नौकरियों में बड़ी संख्या में पदों को एक साथ निकालने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि उनकी राय में सरकार को नियमित अंतराल पर रिक्तियों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए और लगातार नियुक्ति प्रक्रिया चलानी चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि हर साल या नियमित रूप से उपलब्ध पदों की स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों को लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे. रद्द परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को उम्र में छूट की मांग रद्द हुई परीक्षाओं में शामिल अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर भी उन्होंने चिंता जतायी. कुनिका सदानंद ने कहा कि जिन अभ्यर्थियों की कोई गलती नहीं थी, लेकिन परीक्षा रद्द होने के कारण उन्हें दोबारा परीक्षा प्रक्रिया में शामिल होना पड़ रहा है, उन्हें उम्र सीमा में उचित छूट दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि व्यवस्था की गलती का खामियाजा उन छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए, जिन्होंने अपनी तैयारी और समय परीक्षा के लिए लगाया था. छात्रों की आवाज ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कुनिका सदानंद ने कहा कि उनके पास जितनी भी पहचान और सामाजिक अनुभव है, उसका इस्तेमाल वह छात्रों की आवाज को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए करना चाहती हैं. उन्होंने सोशल मीडिया को भी आंदोलन से जुड़े मुद्दों और छात्रों की मांगों को लोगों तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बताया. उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य यह देखना है कि छात्रों की समस्याएं ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचें और सरकार तक भी उनकी बात मजबूती से पहुंचे. साथ ही उन्होंने कहा कि आंदोलन में कौन बॉलीवुड से आया और कौन नहीं आया, इस पर चर्चा करने के बजाय छात्रों के मुद्दों और उनके समाधान पर ध्यान दिया जाना चाहिए.
BPSC Exam Preparation: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए इतिहास महत्वपूर्ण विषयों में शामिल है। खासकर प्रीलिम्स में भारतीय इतिहास और बिहार के इतिहास से जुड़े सवालों की तैयारी पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। ऐसे में पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र यानी PYQs अभ्यर्थियों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं। इनके अभ्यास से परीक्षा में पूछे जाने वाले सवालों के स्तर, महत्वपूर्ण विषयों और प्रश्न पूछने के तरीके को समझने में मदद मिलती है। BPSC में इतिहास की तैयारी पर दें विशेष ध्यान BPSC की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को इतिहास पढ़ते समय भारतीय इतिहास के साथ बिहार के इतिहास पर भी फोकस करना चाहिए। प्राचीन भारत में मगध साम्राज्य, मौर्य और गुप्त काल, बौद्ध एवं जैन धर्म जैसे विषय महत्वपूर्ण हैं। वहीं आधुनिक इतिहास में 1857 का विद्रोह, चंपारण सत्याग्रह, स्वतंत्रता आंदोलन और बिहार से जुड़े प्रमुख आंदोलनों को अच्छी तरह तैयार करना जरूरी है। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का अभ्यास करने से यह पता चलता है कि आयोग अलग-अलग ऐतिहासिक घटनाओं, व्यक्तियों और महत्वपूर्ण तथ्यों से किस तरह सवाल पूछता है। पिछले वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण सवाल 1. 1857 के विद्रोह में बिहार का नेतृत्व किसने किया था? उत्तर: बाबू कुंवर सिंह 2. महात्मा गांधी को चंपारण आने का निमंत्रण किसने दिया था? उत्तर: राजकुमार शुक्ल 3. बिहार प्रोविंशियल किसान सभा की स्थापना किसने की थी? उत्तर: स्वामी सहजानंद सरस्वती 4. 1922 के गया कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की थी? उत्तर: देशबंधु चित्तरंजन दास 5. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जयप्रकाश नारायण किस जेल से फरार हुए थे? उत्तर: हजारीबाग सेंट्रल जेल 6. नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना किस गुप्त शासक के समय से जोड़ी जाती है? उत्तर: कुमारगुप्त प्रथम 7. 1934 में बनी बिहार कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के पहले सचिव कौन थे? उत्तर: जयप्रकाश नारायण 8. सम्राट अशोक के अभिलेखों को पढ़ने का श्रेय किसे दिया जाता है? उत्तर: जेम्स प्रिंसेप PYQs से ऐसे करें इतिहास की तैयारी इतिहास के पुराने प्रश्न पत्रों को केवल सवाल-जवाब याद करने के लिए इस्तेमाल करने के बजाय उनके पीछे के पूरे विषय को समझना चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर किसी PYQ में चंपारण सत्याग्रह से जुड़ा सवाल है, तो अभ्यर्थी आंदोलन का वर्ष, कारण, प्रमुख व्यक्ति और उससे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को भी पढ़ें। इतिहास के प्राचीन, मध्यकालीन, आधुनिक और बिहार इतिहास में बांटकर पढ़ना तैयारी को व्यवस्थित करने में मदद कर सकता है। साथ ही महत्वपूर्ण तिथियों, घटनाओं और व्यक्तियों के छोटे नोट्स बनाकर नियमित रिवीजन करें। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का करें नियमित अभ्यास BPSC की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को उपलब्ध पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को नियमित रूप से हल करना चाहिए। इससे कमजोर विषयों की पहचान करने और परीक्षा में समय प्रबंधन बेहतर करने में मदद मिल सकती है। PYQs के साथ BPSC के अधिकारी सिलेबस, मानक अध्ययन सामग्री और मॉक टेस्ट को भी तैयारी का हिस्सा बनाएं। केवल पुराने सवालों को याद करने के बजाय उनसे जुड़े विषयों की समझ विकसित करना ज्यादा उपयोगी रहेगा।
रांची: JSSC CGL परीक्षा में कथित धांधली के मामले में जांच के दौरान TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी के बयान से नया मोड़ आ गया है. अभय तिवारी ने CID को दिए बयान में दावा किया है कि उसे परीक्षा से पहले ही JSSC CGL के प्रश्न और उत्तर उपलब्ध करा दिए गए थे. हालांकि, CID ने अभय तिवारी के दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और पूरे मामले में तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है. अभय तिवारी के बयान के मुताबिक, कथित तौर पर पहले से प्रश्न-उत्तर उपलब्ध होने की वजह से उसका और कुछ अन्य अभ्यर्थियों का चयन हुआ. इस बयान के बाद जांच एजेंसी परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसियों, लोगों और अभ्यर्थियों के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही है. परीक्षा से पहले प्रश्न-उत्तर मिलने का दावा CID की पूछताछ में अभय तिवारी ने कथित तौर पर बताया कि TDPL को पहले JSSC की परीक्षाओं के संचालन का काम मिलता था. उसके अनुसार, कंपनी ने कम दर पर परीक्षा संचालन करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद TDPL को काम से हटा दिया गया और परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी वेबल नामक एजेंसी को दी गयी. अभय ने आरोप लगाया कि वेबल एजेंसी से जुड़े लोगों के माध्यम से उसे JSSC CGL परीक्षा के प्रश्न और उत्तर पहले ही उपलब्ध कराये गये थे. 15 अभ्यर्थियों को सवाल-जवाब रटवाने का आरोप अभय तिवारी ने अपने बयान में दावा किया कि वेबल एजेंसी से जुड़े लोगों ने बोकारो स्थित एक आवास में करीब 15 अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्न और उत्तर तैयार कराये थे. उसने आरोप लगाया कि इन अभ्यर्थियों को करीब 65 प्रश्नों के प्रश्न-उत्तर उपलब्ध कराये गये और इसके बदले प्रत्येक अभ्यर्थी से 12-12 लाख रुपये लिये गये. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और CID पूरे मामले में साक्ष्यों का सत्यापन कर रही है. अपने, भाई और पत्नी के चयन का भी किया जिक्र अभय तिवारी ने कथित तौर पर CID को बताया कि इसी व्यवस्था के कारण उसका, उसके भाई अक्षय तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी का चयन हुआ. जानकारी के अनुसार, अभय तिवारी की नियुक्ति प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के रूप में पोडैयाहाट में हुई थी. वहीं उसके भाई और पत्नी के सरकारी विभागों में कार्यरत होने की बात सामने आयी है. CID अब इन दावों से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है. TDPL के अकाउंटेंट रक्षक सिंह भी गिरफ्तार इसी मामले में TDPL के अकाउंटेंट रक्षक सिंह के खिलाफ भी CID ने कार्रवाई की है. उसे छह अगस्त को गिरफ्तार किया गया था. आरोप है कि TDPL में कर्मचारी रहते हुए उसने कथित तौर पर JPSC PT परीक्षा दी और उसमें सफल हुआ. CID ने रक्षक सिंह को रिमांड पर लेकर पूछताछ की. रिमांड अवधि पूरी होने के बाद सोमवार को उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. CID बोली- केवल बयान से निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता अभय तिवारी के बयान के बाद जांच में कई नए सवाल सामने आये हैं, लेकिन CID ने फिलहाल उसके आरोपों को प्रमाणित नहीं माना है. जांच एजेंसी का कहना है कि सिर्फ किसी व्यक्ति के बयान के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. सभी आरोपों और दावों का उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सत्यापन किया जा रहा है. अब जांच एजेंसी की नजर परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसियों, उनके कर्मचारियों, अभ्यर्थियों और कथित वित्तीय लेन-देन पर है. यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो JSSC CGL परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर मामला और गंभीर हो सकता है.
रायपुर: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में आरोपी रिटायर्ड IAS अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव को बड़ा झटका लगा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं का पेपर लीक करना हत्या से भी अधिक गंभीर अपराध है, क्योंकि इससे लाखों मेहनती युवाओं का भविष्य और पूरे भर्ती तंत्र पर लोगों का भरोसा प्रभावित होता है। पूर्व IAS अधिकारी को नहीं मिली राहत 62 वर्षीय जीवन किशोर ध्रुव वर्ष 2020 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) में सचिव के पद पर तैनात थे। इसी दौरान हुई कथित भर्ती अनियमितताओं के मामले में CBI ने सितंबर 2025 में उन्हें गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए भर्ती परीक्षा की गोपनीय प्रक्रिया में अनियमितताएं कीं। बेटे पर भी लगे हैं आरोप CBI जांच में जीवन किशोर ध्रुव के बेटे सुमित ध्रुव को भी आरोपी बनाया गया है। जांच के अनुसार, जिस CGPSC भर्ती परीक्षा की जांच चल रही है, उसमें सुमित ध्रुव का चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ था। इसी कारण उन्हें भी मामले में आरोपी बनाया गया है। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी जमानत याचिका खारिज करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक केवल एक कानूनी अपराध नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों और समाज के भरोसे पर सीधा हमला है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि: "प्रतियोगी परीक्षाओं का पेपर लीक कराने वाला व्यक्ति लाखों मेहनती युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करता है। हत्या से एक परिवार प्रभावित होता है, लेकिन पेपर लीक से लाखों युवाओं का भविष्य और पूरे समाज का विश्वास प्रभावित होता है।" कोर्ट को मिले प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मामले की सुनवाई जस्टिस बिभू दत्ता गुरु की एकल पीठ ने की। अदालत ने कहा कि प्रारंभिक जांच में ऐसे पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं, जिनसे प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि जीवन किशोर ध्रुव ने CGPSC के सचिव रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग किया। उन पर आरोप है कि उन्होंने 2021 की मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र अपने पास रखे और उन्हें अपने बेटे तक पहुंचाया। 31 जुलाई को पूरी हुई थी सुनवाई हाईकोर्ट ने 31 जुलाई को जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद 5 अगस्त को अदालत ने फैसला सुनाते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी और कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को इस स्तर पर राहत नहीं दी जा सकती। युवाओं के भविष्य से जुड़ा मामला CGPSC पेपर लीक मामला छत्तीसगढ़ की सबसे चर्चित भर्ती अनियमितताओं में से एक है। इस मामले की जांच CBI कर रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था और युवाओं के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई से ही भर्ती प्रणाली पर लोगों का विश्वास कायम रखा जा सकता है।
झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। एक ओर सरकार ने चार मंत्रियों की समिति बनाकर बातचीत के जरिए समाधान निकालने का भरोसा दिया है, वहीं आंदोलनकारी छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। गुरुवार को कई मंत्रियों ने इस पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी, जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी आंदोलनरत छात्रों से फोन पर बातचीत कर उनका पक्ष जाना। 'पेपर लीक पूरे देश की चुनौती' : चमरा लिंडा झारखंड के कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि पेपर लीक केवल झारखंड की समस्या नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। उनके मुताबिक, संगठित परीक्षा माफिया का नेटवर्क प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि केवल सरकार को दोष देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरे सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत है। सरकार गंभीर, चार मंत्रियों की समिति गठित : इरफान अंसारी स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि सरकार युवाओं की समस्याओं को लेकर पूरी तरह गंभीर है। छात्रों से बातचीत के लिए चार मंत्रियों की समिति बनाई जा चुकी है, जो प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता कर समाधान तलाशेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित चेयरमैन से इस्तीफा लिया और अब तक 12 लोगों को जेल भेजा जा चुका है। योग्य अभ्यर्थियों के हित सुरक्षित रहेंगे : दीपिका पांडेय सिंह ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि सरकार दोषियों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन अभ्यर्थियों ने पूरी ईमानदारी और योग्यता के आधार पर सफलता हासिल की है, उनके हितों की रक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी की है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। छात्रों की चार प्रमुख मांगें आंदोलन कर रहे छात्रों ने सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं— टीडीपीएल द्वारा आयोजित JPSC की सभी विवादित परीक्षाएं तत्काल रद्द की जाएं, जिनमें 14वीं JPSC, JPSC बैकलॉग-2023 और FRO परीक्षा शामिल हैं। जिन परीक्षाओं में अभय तिवारी की भूमिका या संलिप्तता रही है, उन्हें भी रद्द किया जाए। इनमें JSSC CGL और झारखंड PGT भर्ती-2025 जैसी परीक्षाएं शामिल हैं। पूरे मामले की CBI और ED से जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कड़ा कानून बनाया जाए। वार्ता पर अभी भी संशय गुरुवार देर शाम रांची सदर एसडीओ कुमार रजत और एडीएम (लॉ एंड ऑर्डर) धनंजय कुमार आंदोलन स्थल पहुंचे और छात्रों से मुलाकात की। प्रशासन का कहना है कि वार्ता को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है क्योंकि प्रतिनिधिमंडल की अंतिम सूची नहीं मिली है। वहीं आंदोलनकारी छात्रों का दावा है कि उन्होंने अपनी डेलिगेशन लिस्ट पहले ही प्रशासन को भेज दी है। ऐसे में वार्ता की तारीख को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। राहुल गांधी ने छात्रों से की बातचीत कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी आंदोलनरत छात्रों से फोन पर बातचीत की। उन्होंने छात्र पीयूष और रविंद्र से कांग्रेस नेता कुमार राजा के फोन के माध्यम से बात कर उनकी मांगों और आंदोलन की स्थिति की जानकारी ली। राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि चाहे केंद्र सरकार हो, राज्य सरकार हो या कांग्रेस, सभी को युवाओं के भविष्य और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदारी निभानी चाहिए। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने भी झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन की पूरी जानकारी ली है। क्या आगे होगा? अब सबकी नजर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली संभावित वार्ता पर है। यदि बातचीत सफल होती है तो आंदोलन को नया मोड़ मिल सकता है, लेकिन यदि मांगों पर सहमति नहीं बनती है तो छात्रों के आंदोलन के और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
नालंदा/पटना: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) भर्ती परीक्षा घोटाले की जांच में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को बड़ी सफलता मिली है। जांच एजेंसी ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में कार्यरत टेक्निकल असिस्टेंट रोशन कुमार को मुंबई से गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने परीक्षा शुरू होने से पहले आंसर-की हासिल कर उसे आगे पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। मुंबई के BARC परिसर से हुई गिरफ्तारी EOU की विशेष टीम ने गुप्त अभियान चलाकर मुंबई के ट्रॉम्बे स्थित BARC परिसर से रोशन कुमार को गिरफ्तार किया। वह नालंदा जिले के कंकड़िया गांव का रहने वाला है। जांच एजेंसी के अनुसार, तीन सदस्यीय टीम 3 अगस्त को पटना से मुंबई पहुंची थी और अब आरोपी को पूछताछ के लिए पटना लाया जा रहा है। जैमर कंपनी के स्टाफ बनकर परीक्षा केंद्र में घुसने का आरोप जांच में सामने आया है कि परीक्षा के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर जैमर कंपनी के कर्मचारी के रूप में परीक्षा केंद्र में प्रवेश किया। EOU अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र की आंसर-की उसके पास कैसे पहुंची, किसने उपलब्ध कराई और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे। पहले भी हो चुकी हैं कई गिरफ्तारियां इस मामले में इससे पहले बायोमेट्रिक सिस्टम से जुड़ी कंपनी के सिटी को-ऑर्डिनेटर ब्रजेश यादव को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं नालंदा के सोहसराय स्थित पीएल साहू हाई स्कूल परीक्षा केंद्र से एक अभ्यर्थी और बायोमेट्रिक कंपनी के दो कर्मचारियों को भी पकड़ा गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि परीक्षा में संगठित तरीके से धांधली की गई। 11 लाख अभ्यर्थियों पर पड़ा असर 14 से 21 अप्रैल 2026 के बीच नौ पालियों में आयोजित AEDO भर्ती परीक्षा 935 पदों के लिए हुई थी, जिसमें करीब 11 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। पेपर लीक और ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल के आरोप सामने आने के बाद पूरी परीक्षा रद्द कर दी गई। अब तक मुंगेर, नालंदा, गया, बेगूसराय, वैशाली और समस्तीपुर समेत छह जिलों में मामले दर्ज किए जा चुके हैं। जांच के दौरान तीन दर्जन से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि EOU पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
नई दिल्ली: सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए इंश्योरेंस सेक्टर में नौकरी पाने का मौका है। नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (NICL) ने Assistant Recruitment 2026 के तहत 500 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की है। योग्य उम्मीदवार 7 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तारीख नजदीक है, इसलिए इच्छुक अभ्यर्थियों को आखिरी समय का इंतजार करने के बजाय जल्द आवेदन पूरा करने की सलाह दी जाती है। आवेदन आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से किया जा सकता है। NICL की आधिकारिक वेबसाइट 500 असिस्टेंट पदों पर होगी भर्ती इस भर्ती अभियान के जरिए देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 500 Assistant पद भरे जाएंगे। उम्मीदवारों को आवेदन करते समय राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का चयन सावधानी से करना होगा, क्योंकि अभ्यर्थी केवल एक राज्य के लिए आवेदन कर सकता है। महत्वपूर्ण तारीखें भर्ती प्रक्रिया तारीख ऑनलाइन आवेदन शुरू 18 जुलाई 2026 आवेदन की अंतिम तारीख 7 अगस्त 2026 आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तारीख 7 अगस्त 2026 फेज-1 यानी प्रारंभिक परीक्षा 27 अगस्त 2026 फेज-2 यानी मुख्य परीक्षा 30 अक्टूबर 2026 कौन कर सकता है आवेदन? NICL Assistant Recruitment 2026 के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए। इसके अलावा उम्मीदवार की ग्रेजुएशन की परीक्षा का परिणाम 1 जुलाई 2026 तक घोषित हो चुका होना जरूरी है। आयु सीमा आवेदन करने वाले उम्मीदवार की उम्र: न्यूनतम आयु: 21 वर्ष अधिकतम आयु: 30 वर्ष आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। कितनी देनी होगी आवेदन फीस? आवेदन शुल्क उम्मीदवार की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग है। SC, ST, PwBD और Ex-Servicemen: शुल्क नहीं अन्य सभी उम्मीदवार: 850 रुपये आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तारीख भी 7 अगस्त 2026 है। कैसे करें ऑनलाइन आवेदन? उम्मीदवार नीचे दिए गए आसान चरणों के जरिए आवेदन कर सकते हैं: NICL की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। Assistant Recruitment 2026 से संबंधित लिंक खोलें। पहले रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करें। लॉगिन करके आवेदन फॉर्म भरें। आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। अपनी श्रेणी के अनुसार आवेदन शुल्क जमा करें। फॉर्म को अंतिम रूप से सबमिट करें। भविष्य की जरूरत के लिए आवेदन फॉर्म का प्रिंटआउट या डिजिटल कॉपी सुरक्षित रखें। 7 अगस्त के बाद नहीं मिलेगा आवेदन का मौका NICL Assistant Recruitment 2026 के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 7 अगस्त 2026 निर्धारित है। इसके बाद आवेदन विंडो बंद हो जाएगी। उम्मीदवारों को अंतिम दिन वेबसाइट पर ज्यादा ट्रैफिक या तकनीकी समस्या से बचने के लिए समय रहते आवेदन पूरा कर लेना चाहिए। जरूरी सलाह: आवेदन करने से पहले आधिकारिक भर्ती नोटिफिकेशन में अपनी पात्रता, राज्यवार रिक्तियां, आयु सीमा, परीक्षा पैटर्न और अन्य शर्तों को ध्यान से जांच लें।
नई दिल्ली: सफलता अक्सर एक दिन में नहीं मिलती, बल्कि वर्षों की मेहनत, धैर्य और निरंतर प्रयास का परिणाम होती है। इसका ताजा उदाहरण हैं मध्य प्रदेश की आस्था दमेले, जिन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 23वीं रैंक हासिल कर अफसर बनने का सपना पूरा किया। मध्य प्रदेश के पलेरा तहसील के एक छोटे से गांव से आने वाली आस्था की यह सफलता आसान नहीं थी। करीब पांच वर्षों के संघर्ष, कई असफलताओं और लगातार मेहनत के बाद उन्हें यह मुकाम मिला। हर रात अगले दिन की पढ़ाई का बनाती थीं प्लान आस्था ने बताया कि उनकी तैयारी की सबसे अहम रणनीति थी कि वे हर रात सोने से पहले अगले दिन की पढ़ाई का पूरा शेड्यूल लिखती थीं। इससे सुबह उठते ही उन्हें पता होता था कि दिनभर क्या पढ़ना है और समय का बेहतर उपयोग कैसे करना है। उनका मानना है कि एक स्पष्ट योजना पढ़ाई में अनुशासन बनाए रखने में मदद करती है। मेंटल हेल्थ को भी दिया बराबर महत्व आस्था का कहना है कि सिविल सेवा जैसी लंबी तैयारी में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी है। इसी वजह से वह नियमित रूप से मेडिटेशन करती थीं, जिससे तनाव कम होता था और पढ़ाई पर बेहतर फोकस बना रहता था। BPSC अभ्यर्थियों को दी खास सलाह आस्था के अनुसार, BPSC और अन्य सिविल सेवा परीक्षाओं में प्रीलिम्स केवल क्वालिफाइंग चरण होता है, इसलिए उम्मीदवारों को शुरुआत से ही मेन्स परीक्षा की तैयारी पर अधिक ध्यान देना चाहिए। उन्होंने अभ्यर्थियों को सलाह दी कि: सीमित स्टडी मटेरियल का चयन करें। उसी सामग्री का बार-बार रिवीजन करें। रोजाना उत्तर लेखन (Answer Writing) का अभ्यास करें। लगातार अभ्यास और रिवीजन को प्राथमिकता दें। उनका मानना है कि सफलता का सबसे मजबूत आधार कम स्रोत, ज्यादा रिवीजन और नियमित उत्तर लेखन है। छोटे गांव से शुरू हुआ सफर आस्था का बचपन मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव में बीता, जहां बेहतर शिक्षा की सुविधाएं सीमित थीं। उनकी मां ने शुरुआत से ही यह सुनिश्चित किया कि बेटी की पढ़ाई में कोई कमी न रहे। आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें छतरपुर भेजा गया, जहां उन्होंने 12वीं तक की शिक्षा पूरी की और हमेशा पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। UPSC था पहला सपना आस्था ने वर्ष 2021 में UPSC की तैयारी शुरू की। हालांकि उनका पहला लक्ष्य UPSC था, लेकिन उन्होंने साथ-साथ विभिन्न राज्यों की लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं भी देना जारी रखा। 21 परीक्षाएं दीं, फिर मिली सफलता आस्था की सफलता की सबसे प्रेरणादायक बात यह है कि उन्होंने करीब 21 प्रतियोगी परीक्षाएं दीं, जिनमें केवल 7 से 8 परीक्षाओं में ही सफलता मिली। दो बार UPPSC प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं हो पाया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। हर असफलता से सीख लेते हुए तैयारी जारी रखी। आखिरकार BPSC 70वीं परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने 23वीं रैंक हासिल की। जब खुद पर होने लगा था शक लगातार पांच साल तक तैयारी के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब आस्था को अपनी क्षमता पर संदेह होने लगा था। लेकिन परिवार ने उनका मनोबल कभी टूटने नहीं दिया। उनके भाई हमेशा कहते थे, "तुम रोज पढ़ रही हो, यही तुम्हारी असली सफलता है।" वहीं उनके पिता की सीख— "मेहनत करो, फल की चिंता मत करो।" —ने उन्हें हर मुश्किल दौर में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। "परीक्षा जिंदगी का हिस्सा है, पूरी जिंदगी नहीं" आस्था का मानना है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा को अपनी पूरी जिंदगी नहीं बना लेना चाहिए। उन्होंने अभ्यर्थियों को सलाह दी कि: अपनी मेहनत के छोटे-छोटे पड़ावों का जश्न मनाएं। खुद की तुलना दूसरों से न करें। प्रतियोगी परीक्षाओं से बाहर भी कुछ अच्छे दोस्त रखें। नकारात्मक माहौल और लोगों से दूरी बनाएं। खुद पर विश्वास बनाए रखें। आस्था का संदेश है कि अगर मेहनत ईमानदारी से लगातार की जाए, तो सफलता देर से जरूर मिलती है, लेकिन मिलती जरूर है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य पेपर लीक, परीक्षा में नकल और संगठित धांधली पर रोक लगाना तथा देश की परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है। पेपर लीक करने वालों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान नए संशोधन में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित नियमों के तहत दोषियों को कड़ी जेल की सजा और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। संगठित तरीके से पेपर लीक करने वाले गिरोहों पर और सख्त कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। फास्ट ट्रैक जांच और सुनवाई पर जोर सरकार ने परीक्षा से जुड़े अपराधों की जांच और सुनवाई को तेज करने के लिए विशेष व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत पेपर लीक मामलों में तेजी से जांच और समयबद्ध सुनवाई का प्रावधान किया गया है, ताकि छात्रों को जल्द न्याय मिल सके। संसद में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष ने इसे छात्रों के हित में बड़ा सुधार बताया। वहीं विपक्ष ने परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही, पेपर लीक की घटनाओं और छात्रों के भरोसे से जुड़े मुद्दे उठाए। विपक्षी नेताओं ने कहा कि केवल कानून बनाने के साथ-साथ व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है। छात्रों के भविष्य और परीक्षा की विश्वसनीयता पर फोकस सरकार का दावा है कि नया कानून प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखने में मदद करेगा और मेहनत करने वाले छात्रों के हितों की रक्षा करेगा। पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाना इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य बताया गया है।
New Law Against Paper Leak: देशभर में पेपर लीक के मामलों और छात्रों के जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को और सुरक्षित बनाने के लिए कानून को सख्त करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, सरकार 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' में संशोधन कर पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के खिलाफ कड़े प्रावधान जोड़ सकती है। प्रस्तावित संशोधन को शुक्रवार (24 जुलाई) की केंद्रीय कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिल सकती है। क्या होंगे नए प्रावधान? सूत्रों के मुताबिक, संशोधित कानून के तहत पेपर लीक या उससे जुड़ी साजिश में दोषी पाए जाने वालों के लिए 10 साल तक की कैद और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य संगठित पेपर लीक गिरोहों पर सख्त कार्रवाई करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना है। हालांकि, इन प्रावधानों की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। मौजूदा कानून को और बनाया जाएगा सख्त केंद्र सरकार पहले से लागू सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि हाल के महीनों में सामने आए पेपर लीक मामलों और देशभर में छात्रों के प्रदर्शन के बाद सरकार कानून को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह कदम उठा रही है। पीएम मोदी ने भी किया नए बिल का जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात छात्रों के नाम जारी वीडियो संदेश में कहा कि सरकार ने पिछले ढाई महीनों में पेपर लीक के खिलाफ कई अहम कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने फास्ट-ट्रैक कोर्ट से जुड़े प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए थे और संबंधित विभागों ने मसौदा सरकार को सौंप दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस प्रस्ताव पर कैबिनेट बैठक में चर्चा होगी। कैबिनेट की मंजूरी और सहयोगियों के सुझावों के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि संसद के अगले सप्ताह से शुरू होने वाले दूसरे चरण में इस विधेयक को जल्द से जल्द पेश कर पारित कराने का प्रयास किया जाएगा। छात्रों के आंदोलन के बीच सरकार की पहल नीट पेपर लीक समेत विभिन्न परीक्षा अनियमितताओं को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष भी परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है। ऐसे में सरकार का यह प्रस्तावित संशोधन शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि, कानून का अंतिम स्वरूप कैबिनेट की मंजूरी और संसद में चर्चा के बाद ही स्पष्ट होगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। नीट समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। छात्र संगठन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कदम और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। दिल्ली समेत कई राज्यों में छात्रों ने प्रदर्शन कर सरकार से शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की मांग उठाई है। छात्रों की प्रमुख मांगें- पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और सख्त कानून प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से लाखों मेहनती अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। छात्र संगठनों ने मांग की है कि परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी और प्रशासनिक सुधार लागू करने की मांग भी की जा रही है। सरकार ने संवाद और सुधारों का दिया भरोसा छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने कहा है कि युवाओं के हितों और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कदम उठाने और नए कानून की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही है। सरकार ने फास्ट-ट्रैक अदालतों के जरिए ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई की बात भी कही है। केंद्र और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत पर नजर प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की कोशिश भी जारी है। दोनों पक्षों के बीच होने वाली वार्ता से उम्मीद है कि परीक्षा सुधार, छात्रों की शिकायतों और आंदोलन को लेकर कोई समाधान निकल सकता है। हालांकि छात्र संगठन अपनी मांगों पर कायम हैं और ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
Top Olympiad Exams in India: आज के दौर में केवल स्कूल की पढ़ाई में अच्छे अंक हासिल करना ही सफलता की गारंटी नहीं है। बदलते शिक्षा परिदृश्य में छात्रों के लिए ऐसी प्रतियोगी परीक्षाओं का महत्व तेजी से बढ़ा है, जो उनकी कॉन्सेप्ट की समझ, तार्किक सोच और समस्या समाधान क्षमता को विकसित करें। ओलंपियाड परीक्षाएं (Olympiad Exams) इसी उद्देश्य को पूरा करती हैं। स्कूलों में अक्सर शिक्षकों द्वारा छात्रों को ओलंपियाड में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, क्योंकि ये परीक्षाएं केवल रटने की क्षमता नहीं, बल्कि Analytical Thinking, Logical Reasoning, Problem Solving Skills और Concept Clarity का मूल्यांकन करती हैं। इन परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्रों को मेडल, प्रमाणपत्र, स्कॉलरशिप और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल करने का अवसर मिलता है। अगर आपका बच्चा स्कूल में पढ़ता है या आप खुद छात्र हैं, तो इन पांच प्रमुख ओलंपियाड परीक्षाओं के बारे में जानकारी जरूर होनी चाहिए। 1. इंटरनेशनल मैथमेटिक्स ओलंपियाड (IMO) International Mathematics Olympiad (IMO) गणित में रुचि रखने वाले छात्रों के बीच सबसे लोकप्रिय ओलंपियाड परीक्षाओं में से एक है। स्कूल स्तर पर इसका आयोजन Science Olympiad Foundation (SOF) द्वारा किया जाता है। इसमें क्या परखा जाता है? गणितीय अवधारणाओं की समझ तार्किक सोच समस्या समाधान क्षमता स्पीड और एक्यूरेसी पात्रता: कक्षा 1 से 12 तक के छात्र आयु वर्ग: लगभग 6 से 18 वर्ष 2. नेशनल साइंस ओलंपियाड (NSO) National Science Olympiad (NSO) विज्ञान विषय में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षा है। इस परीक्षा में छात्रों की वैज्ञानिक सोच, विश्लेषण क्षमता और कॉन्सेप्ट आधारित समझ का मूल्यांकन किया जाता है। मुख्य विषय Physics Chemistry Biology Environmental Science Scientific Reasoning पात्रता: कक्षा 1 से 12 आयु वर्ग: 6–18 वर्ष 3. इंटरनेशनल इंग्लिश ओलंपियाड (IEO) अगर आप अंग्रेजी भाषा में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं, तो International English Olympiad (IEO) बेहतरीन विकल्प है। इसमें शामिल विषय Grammar Vocabulary Reading Comprehension Language Skills बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को प्रमाणपत्र, मेडल और पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। पात्रता: कक्षा 1 से 12 आयु वर्ग: 6–18 वर्ष 4. नेशनल साइबर ओलंपियाड (NCO) डिजिटल युग में तकनीकी ज्ञान का महत्व लगातार बढ़ रहा है। National Cyber Olympiad (NCO) छात्रों की कंप्यूटर, आईटी और साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी समझ का मूल्यांकन करता है। मुख्य विषय Computer Fundamentals Information Technology Cyber Security Logical Reasoning पात्रता: कक्षा 1 से 12 आयु वर्ग: 6–18 वर्ष 5. इंटरनेशनल जनरल नॉलेज ओलंपियाड (IGKO) सामान्य ज्ञान और करेंट अफेयर्स में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए International General Knowledge Olympiad (IGKO) एक शानदार विकल्प है। मुख्य विषय Current Affairs General Knowledge History Geography Environment Civics पात्रता: कक्षा 1 से 10 आयु वर्ग: लगभग 6–16 वर्ष ओलंपियाड की तैयारी कैसे करें? अगर आप बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें— NCERT और स्कूल की किताबों से बेसिक कॉन्सेप्ट मजबूत करें। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र हल करें। नियमित मॉक टेस्ट दें। टाइम मैनेजमेंट का अभ्यास करें। रटने की बजाय कॉन्सेप्ट आधारित पढ़ाई करें। रोजाना 30–60 मिनट ओलंपियाड की तैयारी के लिए निर्धारित करें। क्या कॉलेज के छात्रों के लिए भी ओलंपियाड होते हैं? यहां बताए गए IMO, NSO, IEO, NCO और IGKO मुख्य रूप से कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों के लिए आयोजित किए जाते हैं। वहीं कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर के विद्यार्थियों के लिए अलग प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं, जैसे— ACM ICPC ICPC Programming Contest National Innovation Challenges GATE आधारित प्रतियोगिताएं International Collegiate Competitions ओलंपियाड देने के फायदे कॉन्सेप्ट मजबूत होते हैं। तार्किक और विश्लेषणात्मक सोच विकसित होती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी आसान होती है। मेडल, प्रमाणपत्र और स्कॉलरशिप पाने का अवसर मिलता है। आत्मविश्वास बढ़ता है। JEE, NEET, CLAT, NDA जैसी परीक्षाओं के लिए मजबूत आधार तैयार होता है। ध्यान रखें :- ओलंपियाड परीक्षा का उद्देश्य केवल रैंक हासिल करना नहीं, बल्कि छात्रों की सोचने, समझने और समस्याओं का समाधान करने की क्षमता को विकसित करना है। यदि छात्र स्कूल स्तर से ही इन परीक्षाओं की तैयारी शुरू करते हैं, तो भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर के लिए मजबूत नींव तैयार हो सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देशभर में परीक्षा प्रणाली को लेकर बढ़ती चिंता और पेपर लीक के मामलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी है। संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की बैठक में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकार छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी है और पेपर लीक जैसी घटनाओं में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पेपर लीक को बताया गंभीर राष्ट्रीय चिंता का विषय बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया को प्रधानमंत्री के संदेश की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने पेपर लीक को देश के भविष्य और युवाओं के विश्वास से जुड़ा गंभीर विषय बताया। उन्होंने इस मुद्दे पर राजनीति से बचने की अपील करते हुए कहा कि छात्रों के हित सर्वोपरि हैं और उनकी मेहनत के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह बयान हाल ही में पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र प्रदर्शनों और राजनीतिक विवादों के बीच सामने आया है। संसद में दूसरे दिन भी जारी रहा हंगामा मानसून सत्र के दूसरे दिन भी लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के कारण बार-बार बाधित रही। पहले दिन की तरह दूसरे दिन भी विभिन्न मुद्दों पर हंगामे के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष ने कई राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा, जबकि सरकार ने अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखा। किसानों के हितों पर भी दिया भरोसा बैठक में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर किसानों की चिंताओं पर भी चर्चा हुई। किरेन रिजिजू ने बताया कि प्रधानमंत्री ने एनडीए सांसदों को भरोसा दिलाया कि सरकार किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यापारिक समझौते में किसानों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। सरकार ने संकेत दिए कि युवाओं और किसानों से जुड़े मुद्दों पर वह संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ आगे बढ़ेगी।
पटना: बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी अपडेट सामने आई है। Bihar Public Service Commission ने ऑडिटर भर्ती परीक्षा 2026 की तारीख आधिकारिक रूप से घोषित कर दी है। पंचायती राज विभाग के अंतर्गत ऑडिटर के 102 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का इंतजार अब खत्म हो गया है। आयोग द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, विज्ञापन संख्या 09/2026 के तहत आयोजित होने वाली प्रारंभिक परीक्षा 5 जुलाई 2026 को आयोजित की जाएगी। 5 जुलाई को होगी परीक्षा BPSC के कार्यक्रम के अनुसार ऑडिटर भर्ती की प्रारंभिक (ऑब्जेक्टिव) परीक्षा: परीक्षा तिथि: 5 जुलाई 2026 (रविवार) समय: सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक परीक्षा अवधि: 2 घंटे कुल पद: 102 उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा की तैयारी को अंतिम चरण में पहुंचाएं और महत्वपूर्ण विषयों का दोहराव शुरू कर दें। 28 जून से डाउनलोड होंगे एडमिट कार्ड आयोग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा के लिए ई-एडमिट कार्ड डाउनलोड करने की प्रक्रिया 28 जून 2026 से शुरू होगी। उम्मीदवार BPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉगिन कर अपना प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकेंगे। 2 जुलाई से मिलेगी परीक्षा केंद्र की जानकारी BPSC ने बताया है कि परीक्षा केंद्र से जुड़ी विस्तृत जानकारी 2 जुलाई 2026 से उम्मीदवारों के डैशबोर्ड पर उपलब्ध होगी। अभ्यर्थी अपने लॉगिन क्रेडेंशियल्स के माध्यम से परीक्षा केंद्र का पूरा विवरण देख सकेंगे। परीक्षा के दिन इन नियमों का रखें ध्यान आयोग ने उम्मीदवारों को कुछ महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए हैं: ई-एडमिट कार्ड की अतिरिक्त प्रति साथ लेकर जाएं। अतिरिक्त कॉपी पर परीक्षा के दौरान निर्धारित स्थान पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य होगा। एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के बाद फोटो और QR Bar Code स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है या नहीं, इसकी जांच जरूर करें। किसी भी तकनीकी समस्या या त्रुटि की स्थिति में तुरंत आयोग से संपर्क करें। भर्ती क्यों है खास? यह भर्ती पंचायती राज विभाग में ऑडिटर के 102 पदों को भरने के लिए आयोजित की जा रही है। सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है, क्योंकि ऑडिटर पद वित्तीय निरीक्षण और लेखा परीक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्वों वाला पद है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा से पहले एडमिट कार्ड, पहचान पत्र और परीक्षा केंद्र संबंधी सभी जानकारियां समय पर जांच लें, ताकि अंतिम समय में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।