झारखंड

JPSC Student Protest: Bollywood Actress Kunika Sadanand Supports Students

JPSC Student Protest: छात्रों के बीच पहुंचीं बॉलीवुड एक्ट्रेस कुनिका सदानंद, आंदोलन को दिया समर्थन

kalpana अगस्त 17, 2026 0
Bollywood actress and lawyer Kunika Sadanand meeting students during the JPSC-JSSC protest in Ranchi
Kunika Sadanand Supports JPSC-JSSC Student Protest in Ranchi

रांची: JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर रांची में जारी छात्र आंदोलन को अब बॉलीवुड अभिनेत्री और अधिवक्ता कुनिका सदानंद का भी समर्थन मिला है. कुनिका सदानंद आंदोलन स्थल पर पहुंचीं और छात्रों से मुलाकात कर उनकी मांगों को सुना. उन्होंने छात्रों की मांगों को जायज बताते हुए सरकार से संवेदनशीलता के साथ बातचीत कर समाधान निकालने की अपील की.

कुनिका सदानंद ने कहा कि नौकरी और शिक्षा से जुड़े मुद्दे युवाओं के भविष्य से सीधे जुड़े हैं. ऐसे में सरकार को छात्रों की बात गंभीरता से सुननी चाहिए और बातचीत के जरिये गतिरोध खत्म करने की कोशिश करनी चाहिए.

सरकार को 10-15 दिन का समय देने का सुझाव

कुनिका सदानंद ने कहा कि उन्हें लगता है कि झारखंड सरकार इस मामले में केंद्र सरकार की तुलना में अधिक संवेदनशील तरीके से पहल कर सकती है. उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार छात्रों की मांगों पर विचार करने के लिए 10 से 15 दिन का समय ले और इस दौरान ठोस समाधान निकालने की कोशिश करे.

उन्होंने कहा कि आंदोलन को लगातार लंबा खींचने के बजाय सरकार और छात्रों के बीच संवाद होना चाहिए, ताकि किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सके. उनके अनुसार, छात्रों की समस्याओं का समाधान बातचीत और सकारात्मक पहल से ही संभव है.

CID की जांच और कार्रवाई पर भी उठाये सवाल

छात्रों की ओर से की जा रही जांच की मांग के सवाल पर कुनिका सदानंद ने CID की भूमिका और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाये. उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में गिरफ्तारियां हुई हैं, तो जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा होनी चाहिए.

उन्होंने छात्रों की ओर से सीबीआई जांच की मांग का भी जिक्र किया. हालांकि उन्होंने आशंका जतायी कि जांच एजेंसी बदलने से प्रक्रिया और लंबी हो सकती है. उनका कहना था कि सबसे जरूरी बात यह है कि जांच निष्पक्ष और प्रभावी तरीके से आगे बढ़े तथा मामले का समाधान जल्द हो.

मुंबई से लगातार आंदोलन पर रख रही थीं नजर

कुनिका सदानंद ने बताया कि वह काफी समय से मुंबई से झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन को फॉलो कर रही थीं. झारखंड आने के बाद उन्होंने खुद आंदोलन स्थल पर पहुंचकर छात्रों से मिलने का फैसला किया.

उन्होंने बताया कि जिन लोगों ने झारखंड में उनकी मेहमाननवाजी की, उनसे भी उन्होंने कहा कि वह छात्रों के प्रदर्शन में जरूर जाना चाहती हैं. इसके बाद वह आंदोलन स्थल पहुंचीं और आंदोलनरत छात्रों के साथ बातचीत की.

दिल्ली और झारखंड के आंदोलन में बताया अंतर

कुनिका सदानंद ने दिल्ली के जंतर-मंतर और झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच अंतर का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है, इसलिए वहां होने वाले आंदोलनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना रहती है.

वहीं झारखंड के आंदोलन में बाहर से लोगों की संख्या कम दिखाई दे सकती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर छात्रों और युवाओं का समर्थन काफी महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि झारखंड में रोजगार और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल अचानक पैदा नहीं हुए हैं, बल्कि इनके पीछे लंबे समय की पृष्ठभूमि है.

झारखंड गठन के बाद भी रोजगार और शिक्षा के सवाल

अभिनेत्री ने झारखंड गठन के बाद रोजगार और शिक्षा से जुड़े सवालों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि राज्य के गठन के पीछे स्थानीय लोगों और आदिवासी समुदाय के अधिकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

उनके अनुसार, राज्य बनने के बाद भी रोजगार और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई सवाल पूरी तरह हल नहीं हो सके हैं. उन्होंने कहा कि इन समस्याओं की पूरी जिम्मेदारी केवल मौजूदा सरकार पर डालना उचित नहीं होगा, क्योंकि अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में भी ये मुद्दे बने रहे हैं.

नियमित नियुक्तियों की व्यवस्था पर जोर

कुनिका सदानंद ने सरकारी नौकरियों में बड़ी संख्या में पदों को एक साथ निकालने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि उनकी राय में सरकार को नियमित अंतराल पर रिक्तियों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए और लगातार नियुक्ति प्रक्रिया चलानी चाहिए.

उन्होंने सुझाव दिया कि हर साल या नियमित रूप से उपलब्ध पदों की स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों को लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे.

रद्द परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को उम्र में छूट की मांग

रद्द हुई परीक्षाओं में शामिल अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर भी उन्होंने चिंता जतायी. कुनिका सदानंद ने कहा कि जिन अभ्यर्थियों की कोई गलती नहीं थी, लेकिन परीक्षा रद्द होने के कारण उन्हें दोबारा परीक्षा प्रक्रिया में शामिल होना पड़ रहा है, उन्हें उम्र सीमा में उचित छूट दी जानी चाहिए.

उन्होंने कहा कि व्यवस्था की गलती का खामियाजा उन छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए, जिन्होंने अपनी तैयारी और समय परीक्षा के लिए लगाया था.

छात्रों की आवाज ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की कोशिश

कुनिका सदानंद ने कहा कि उनके पास जितनी भी पहचान और सामाजिक अनुभव है, उसका इस्तेमाल वह छात्रों की आवाज को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए करना चाहती हैं. उन्होंने सोशल मीडिया को भी आंदोलन से जुड़े मुद्दों और छात्रों की मांगों को लोगों तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बताया.

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य यह देखना है कि छात्रों की समस्याएं ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचें और सरकार तक भी उनकी बात मजबूती से पहुंचे. साथ ही उन्होंने कहा कि आंदोलन में कौन बॉलीवुड से आया और कौन नहीं आया, इस पर चर्चा करने के बजाय छात्रों के मुद्दों और उनके समाधान पर ध्यान दिया जाना चाहिए.

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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तीसरी सोमवारी पर आस्था का सैलाब, नाग पंचमी और संक्रांति के संयोग से बढ़ा उत्साह

देवघर: श्रावणी मेले की तीसरी सोमवारी पर बाबा नगरी देवघर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है. इस बार सावन की तीसरी सोमवारी के साथ नाग पंचमी और संक्रांति का विशेष संयोग बन रहा है. इसे लेकर कांवरियों और श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है. जिला प्रशासन ने करीब पांच लाख कांवरियों के देवघर पहुंचने का अनुमान लगाया है. इनमें साढ़े तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पैदल कांवरिया पथ से बाबा नगरी पहुंचने की संभावना जतायी गयी है. तीसरी सोमवारी को बाबा वैद्यनाथ को जल अर्पित करने के लिए रविवार से ही कांवरियों का देवघर पहुंचना शुरू हो गया. शाम होते-होते कांवरिया पथ, शिवगंगा घाट और मंदिर के आसपास श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गयी. हर तरफ ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष सुनाई दे रहे थे. पांचों पार्किंग स्थल और टेंट सिटी लगभग फुल संभावित भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड में है. रविवार शाम करीब छह बजे तक वाहनों के लिए बनाये गये पांचों पार्किंग स्थल, टेंट सिटी और कांवरियों के ठहरने के लिए निर्धारित स्थान लगभग भर चुके थे. अधिक भीड़ की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने मेला क्षेत्र और रूट लाइन में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है. डीसी, एसपी समेत जिले के वरीय अधिकारियों ने विभिन्न स्थानों का निरीक्षण किया और ड्यूटी पर तैनात दंडाधिकारियों, पुलिस पदाधिकारियों और जवानों को श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम जलार्पण को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये. सुबह चार बजे के बाद शुरू हुआ आम कांवरियों का जलार्पण रविवार को बाबा वैद्यनाथ मंदिर का पट खुलने के बाद सबसे पहले पुरोहित समाज की ओर से कांचा जल पूजा की गयी. इसके बाद पुजारी मिथिलेश झा ने षोडशोपचार विधि से बाबा भोलेनाथ की सरदारी पूजा करायी. इसके बाद सुबह करीब चार बजे आम कांवरियों के लिए जलार्पण शुरू कराया गया. पट खुलने से पहले ही कांवरियों की कतार बरमसिया चौक तक पहुंच गयी थी. हालांकि जलार्पण शुरू होने के बाद कतार धीरे-धीरे सिमटकर बीएड कॉलेज तक रह गयी. प्रशासन की ओर से कांवरियों को कतारबद्ध तरीके से मंदिर तक पहुंचाने और सुरक्षित जलार्पण कराने के लिए लगातार निगरानी की गयी. दो दिनों में 4.59 लाख श्रद्धालुओं ने चढ़ाया जल श्रावणी मेले के दौरान बाबा वैद्यनाथ पर जल चढ़ाने के लिए लगातार बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. शनिवार और रविवार को मिलाकर 4,59,703 श्रद्धालुओं ने बाबा वैद्यनाथ का जलाभिषेक किया. शनिवार को कुल 2,27,556 श्रद्धालुओं ने जल चढ़ाया. इनमें बाह्य अरघा से 1,03,583, मुख्य अरघा से 1,08,254 और कूपन व्यवस्था के माध्यम से 15,719 कांवरियों ने जलार्पण किया. वहीं रविवार को कुल 2,32,147 श्रद्धालुओं ने बाबा का जलाभिषेक किया. इनमें बाह्य अरघा से 1,07,353 और मुख्य अरघा से 1,24,794 श्रद्धालु शामिल रहे. कांवरिया पथ से शिवगंगा तक बोल बम की गूंज रविवार शाम बाबा नगरी की ओर कांवरियों के पहुंचने की रफ्तार और तेज हो गयी. कांवरिया पथ से लेकर शिवगंगा घाट तक श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी. दूर-दराज से पहुंचे कांवरिये नाचते-गाते और ‘बोल बम’ का जयघोष करते हुए बाबा नगरी की ओर बढ़ते रहे. तीसरी सोमवारी के साथ नाग पंचमी और संक्रांति के विशेष संयोग को लेकर श्रद्धालुओं में धार्मिक उत्साह और बढ़ गया है. प्रशासन भी संभावित भीड़ को देखते हुए रूट लाइन, पार्किंग, ठहराव स्थल और मंदिर परिसर में व्यवस्थाओं पर लगातार नजर रख रहा है.  

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Waterlogged road near Karandih Gate in Jamshedpur after heavy rainfall
हर बारिश में डूब रहा करनडीह, 10 दिन में समाधान नहीं हुआ तो सड़क जाम करेंगे ग्रामीण

जमशेदपुर: करनडीह सरजामटोला में जलजमाव और जर्जर नाली की समस्या को लेकर लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है. बारिश होते ही करनडीह फाटक के आसपास का इलाका पानी में डूब जाता है, जिससे स्थानीय लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है. लंबे समय से बनी इस समस्या का समाधान नहीं होने पर अब ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी है. करनडीह सरजामटोला अखड़ा में माझी बाबा सालखू माझी की अध्यक्षता में ग्रामसभा आयोजित की गयी. इसमें करनडीह के सभी 10 टोलों के लोगों के साथ परसुडीह-प्रमथनगर क्षेत्र के विभिन्न फ्लैटों में रहने वाले लोग भी शामिल हुए. बैठक में जलजमाव, नाली की जर्जर स्थिति और जल निकासी की व्यवस्था को लेकर विस्तार से चर्चा की गयी. करनडीह फाटक के पास सबसे ज्यादा परेशानी बैठक में ग्रामीणों और फ्लैटवासियों ने बताया कि करनडीह फाटक के पास लंबे समय से जलजमाव की समस्या बनी हुई है. बारिश के दिनों में नाली का पानी और बारिश का पानी आसपास के इलाकों में जमा हो जाता है. इससे सड़क पर आवाजाही प्रभावित होती है और लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. लोगों का कहना है कि जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण हर साल बारिश के मौसम में यही स्थिति पैदा होती है. समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है. प्रशासन पर लगाया औपचारिकता का आरोप ग्रामसभा में शामिल लोगों ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाये. ग्रामीणों का आरोप है कि जलजमाव और नाली की समस्या को लेकर कभी ग्रामसभा के लोगों के साथ तो कभी फ्लैटवासियों के साथ बैठक की जाती है, लेकिन धरातल पर स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाया गया. लोगों ने कहा कि केवल बैठक करने से समस्या दूर नहीं होगी. इसके लिए पुराने जल निकासी मार्ग और नाले को व्यवस्थित तरीके से खोलना जरूरी है, ताकि बारिश का पानी आसानी से बाहर निकल सके. आज बीडीओ और सीओ से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल ग्रामसभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि माझी बाबा सालखू माझी के नेतृत्व में ग्रामीणों और फ्लैटवासियों का एक प्रतिनिधिमंडल बीडीओ और सीओ से मुलाकात करेगा. प्रतिनिधिमंडल प्रशासन के सामने जलजमाव और नाली की समस्या रखेगा. लोग प्रशासन से मांग करेंगे कि पुराने जल निकासी मार्ग और नाले को दोबारा खोला जाए. ग्रामीणों का कहना है कि पहले इसी रास्ते से बारिश का पानी बाहर निकल जाता था, लेकिन अब इसके बंद या बाधित होने के कारण पानी आसपास के इलाकों में जमा हो रहा है. 10 दिन में समाधान नहीं हुआ तो मेन रोड जाम ग्रामसभा में लोगों ने प्रशासन को 10 दिनों का समय देने का फैसला किया है. ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि इस अवधि में यदि समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि 10 दिन के भीतर समाधान नहीं होने पर करनडीह मेन रोड जाम कर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा. लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से जलजमाव की समस्या झेल रहे हैं और अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा. ग्रामसभा में ग्रामीणों और फ्लैटवासियों ने एकजुट होकर कहा कि जल निकासी की समस्या का समाधान जल्द नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा. फिलहाल सबकी नजर प्रशासन के साथ होने वाली प्रतिनिधिमंडल की बैठक और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर है.  

kalpana अगस्त 17, 2026 0
New 20 MVA power substation and 33 kV electricity network planned in Balgadia, Dhanbad

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New watch towers planned at jails in Kolhan for 360-degree security surveillance
कोल्हान की जेलों की सुरक्षा होगी हाईटेक, 360 डिग्री निगरानी के लिए बनेंगे नए वॉच टावर

जमशेदपुर: कोल्हान क्षेत्र की जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिले की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए नए वॉच टावर और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण कराया जाएगा. इन वॉच टावरों के जरिए जेल परिसर के अंदर और बाहरी परिधि पर 360 डिग्री निगरानी रखने में मदद मिलेगी. गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जेलों में सुरक्षा से जुड़े विभिन्न निर्माण और सुदृढ़ीकरण कार्यों को स्वीकृति दी गयी है. नए वॉच टावर बनने के बाद सुरक्षा कर्मियों को जेल की चहारदीवारी, बैरकों और संवेदनशील इलाकों पर ऊंचाई से नजर रखने में आसानी होगी. इससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर समय रहते निगरानी और कार्रवाई की जा सकेगी. घाघीडीह सेंट्रल जेल में बनेंगे 6 नए वॉच टावर घाघीडीह सेंट्रल जेल, जमशेदपुर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए छह नए वॉच टावर बनाए जाएंगे. इनका निर्माण जेल की चहारदीवारी और बैरकों पर चारों ओर से निगरानी रखने के उद्देश्य से किया जाएगा. इस परियोजना पर करीब 79.91 लाख रुपये खर्च होंगे. निर्माण कार्य को चार महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. नए वॉच टावर बनने के बाद सुरक्षा प्रहरियों को जेल परिसर के बड़े हिस्से पर एक साथ नजर रखने में सुविधा होगी. खासकर चहारदीवारी और संवेदनशील स्थानों की निगरानी पहले की तुलना में बेहतर होने की उम्मीद है. चाईबासा जेल में 8 वॉच टावर, क्वार्टर की भी होगी मरम्मत चाईबासा मंडल कारा में सुरक्षा निगरानी बढ़ाने के लिए आठ नए वॉच टावरों का निर्माण कराया जाएगा. इन टावरों के निर्माण पर करीब 99.04 लाख रुपये खर्च होंगे. निर्माण कार्य को छह महीने में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके अलावा जेल के स्टाफ क्वार्टर की छतों का वाटरप्रूफिंग कार्य भी कराया जाएगा. इस पर करीब 7.38 लाख रुपये खर्च होंगे और इसे तीन महीने में पूरा करने की योजना है. इससे कर्मचारियों के आवास से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं में भी सुधार होगा. सरायकेला जेल में बनेगा नया प्रशासनिक भवन सरायकेला मंडल कारा में जेल के प्रशासनिक कामकाज को बेहतर बनाने के लिए नए प्रशासनिक भवन का निर्माण कराया जाएगा. इस भवन के निर्माण पर करीब 50 लाख रुपये खर्च होंगे. निर्माण कार्य को छह महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. नए प्रशासनिक भवन से जेल प्रबंधन से जुड़े कामकाज के लिए बेहतर आधारभूत सुविधा उपलब्ध होने की उम्मीद है. सिमडेगा और खूंटी की जेलों में भी होंगे निर्माण कार्य जेल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की योजना केवल कोल्हान तक सीमित नहीं है. सिमडेगा मंडल कारा में आठ वॉच टावर और मेन गेट शेड का निर्माण कराया जाएगा. वहीं खूंटी उपकारा में तीन वॉच टावर और मेन गेट शेड के साथ विभिन्न वार्ड, बैरक और क्वार्टरों की विशेष मरम्मत का काम भी कराया जाएगा. इसके अलावा गुमला मंडल कारा में मेन गेट शेड का निर्माण किया जाएगा. विभाग की ओर से इन सभी कार्यों के लिए अलग-अलग राशि स्वीकृत की गयी है. सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर जेलों में नए वॉच टावरों का निर्माण सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. ऊंचे स्थानों से निगरानी होने के कारण जेल की चहारदीवारी और आसपास के क्षेत्रों पर सुरक्षा कर्मियों की नजर बेहतर तरीके से बनी रह सकेगी. कोल्हान की प्रमुख जेलों में सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ प्रशासनिक भवन और कर्मचारियों के आवास की मरम्मत जैसे कार्य भी किए जा रहे हैं. इससे आने वाले समय में जेलों की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.  

kalpana अगस्त 17, 2026 0
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