Jharkhand में भीषण गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। राजधानी Ranchi समेत राज्य के कई जिलों में तेज धूप और गर्म हवाओं का असर लगातार बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने 22 और 23 मई को कई जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की है। गुरुवार को रांची का अधिकतम तापमान 38.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले 24 घंटों में 0.4 डिग्री बढ़ा है। वहीं Jamshedpur में तापमान 43.1 डिग्री, Bokaro में 41.1 डिग्री और Chaibasa में 41.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इन जिलों में गर्मी का ज्यादा असर शुक्रवार को रांची सहित कई जिलों में दोपहर तक तेज धूप और गर्मी का असर बना रहेगा। जिन जिलों में ज्यादा गर्मी पड़ने की संभावना जताई गई है, उनमें: गुमला सिमडेगा पूर्वी सिंहभूम पश्चिमी सिंहभूम रामगढ़ गिरिडीह बोकारो धनबाद सरायकेला देवघर जामताड़ा दुमका गोड्डा साहिबगंज पाकुड़ शामिल हैं। हालांकि मौसम विभाग के मुताबिक दोपहर बाद कुछ इलाकों में तेज हवा और हल्की बारिश भी हो सकती है, जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। रांची में 26 मई तक येलो अलर्ट Ranchi में मौसम का मिजाज अगले कुछ दिनों तक बदला हुआ रह सकता है। मौसम विभाग ने 26 मई तक येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान दोपहर बाद बादल छाने और कुछ इलाकों में बारिश होने की संभावना जताई गई है। मेदिनीनगर में पारा 45 डिग्री के पार Medininagar में गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। गुरुवार को यहां अधिकतम तापमान 45.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार 22 और 23 मई को: गढ़वा पलामू चतरा जिलों में लू चलने की प्रबल संभावना है। प्रशासन ने लोगों से दोपहर में बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर भीषण गर्मी और हीट स्ट्रोक के खतरे को देखते हुए Irfan Ansari ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने जरूरत पड़ने पर ही दिन में घर से बाहर निकलने की सलाह दी है। राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों, सदर अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। अस्पतालों में: ORS काउंटर जरूरी दवाइयां IV फ्लूइड्स इमरजेंसी बेड कूलिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही वाटर कूलर और बिजली व्यवस्था को भी दुरुस्त रखने को कहा गया है। गर्मी से बचने के लिए क्या करें? दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें ज्यादा पानी और ORS का सेवन करें हल्के और सूती कपड़े पहनें धूप में निकलते समय सिर ढकें बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें
रांची। विलुप्त प्रजाति के पशु के अंगों के तस्करी के आरोप में गिरफ्तार भाजपा नेता और रांची के विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों से जुड़े राजीव रंजन मिश्रा उर्फ चुन्नू मिश्रा को बेल मिल गई है। रांची सिविल कोर्ट ने शुक्रवार को उन्हें और उनके बेटे को जमानत पर छोड़ने का निर्देश दिया है। दरअसल मॉनिटर लिजर्ड की अवैध तस्करी मामले में राजीव रंजन मिश्रा, उनके बेटे अविनाश रंजन और अरुण राम को गिरफ्तार किया गया था। तीनो आरोपियों की जमानत याचिका पर एसीजेएम रवि नारायण की अदालत में सुनवाई हुई। वन विभाग की टीम ने 14 मई को डेली मार्केट थाना क्षेत्र स्थित एक होटल में छापेमारी कर तीनों को गिरफ्तार किया था।
खूंटी। खूंटी में सरकारी ट्रेजरी से जुड़े कथित गबन मामले में जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए एक लेखपाल और शुभम कुमार नामक व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि सरकारी खजाने से करीब 22.69 लाख रुपये अवैध रूप से निजी बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए। त्रिस्तरीय जांच में सामने आई गड़बड़ी मामले का खुलासा जिला प्रशासन द्वारा गठित त्रिस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के बाद हुआ। जांच टीम में मजिस्ट्रेट विपिन चंद्र विश्वास, ट्रेजरी ऑफिसर शिव कुमार सिंह और अपर समाहर्ता स्तर के अधिकारियों को शामिल किया गया था। जांच के दौरान वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी प्रक्रिया के उल्लंघन की पुष्टि हुई। रिपोर्ट में बताया गया कि सरकारी राशि को नियमों की अनदेखी कर शुभम कुमार के खाते में भेजा गया। इसके बाद प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। उपायुक्त के निर्देश पर दर्ज हुई FIR जांच रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपे जाने के बाद सौरभ कुमार भुवानिया के निर्देश पर संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी धन के दुरुपयोग के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस ने तेज की जांच ऋषभ गर्ग ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है। बैंक खातों, ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित गबन में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। ट्रेजरी सिस्टम पर उठे सवाल इस घटना के सामने आने के बाद सरकारी विभागों में हड़कंप मच गया है। सरकारी खजाने की राशि निजी खाते में पहुंचने से ट्रेजरी सिस्टम की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम अब पूरे नेटवर्क और संभावित साजिश की जांच में जुटी हुई है।
रांची। झारखंड में इन दिनों भीषण गर्मी और हीटवेव से लोग परेशान है। राजधानी रांची समेत राज्य के अधिकांश हिस्सों में सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं का असर देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने 27 मई तक राज्य में हीटवेव जारी रहने की चेतावनी दी है। 12 जिलों का तापमान 40 डिग्री के पार पिछले चार-पांच दिनों से राज्य के 12 जिलों का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया जा रहा है। सबसे ज्यादा गर्मी पलामू, गढ़वा और चतरा में पड़ रही है, जहां पारा 44 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है। मौसम विज्ञान केंद्र रांची के अनुसार अगले पांच दिनों तक तापमान में किसी बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है। कई जिलों में हीटवेव और यलो अलर्ट 22 मई को पलामू, गढ़वा, चतरा और लातेहार जिलों में हीटवेव चलने की संभावना जताई गई है। वहीं रांची, रामगढ़, हजारीबाग, बोकारो, खूंटी, धनबाद और आसपास के क्षेत्रों में तेज हवा और आकाशीय बिजली को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने बताया कि 23 मई को कुछ जिलों में ऑरेंज अलर्ट भी लागू रहेगा। बारिश के बावजूद नहीं मिली राहत हालांकि पिछले 24 घंटों में राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक 10.2 मिमी वर्षा धनबाद के पंचेत में रिकॉर्ड हुई, लेकिन इससे गर्मी से ज्यादा राहत नहीं मिली। डाल्टनगंज का अधिकतम तापमान 43.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि नामकुम में न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री रहा। ऐसा रहेगा रांची में अगले चार दिनों का तापमान 22 मई : अधिकतम 39 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस 23 मई : अधिकतम 39 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस 24 मई : अधिकतम 40 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस 25 मई : अधिकतम 40 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस तेज गर्मी को देखते हुए लोग सिर और चेहरे को कपड़ों से ढककर घरों से बाहर निकल रहे हैं। मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर में अनावश्यक बाहर निकलने से बचने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है।
रांची। राजधानी रांची के कोकर इलाके से 9 मई से लापता 18 माह की मासूम अदिति पांडेय की सकुशल बरामदगी की मांग को लेकर सदर थाना के समक्ष JLKM ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। इस दौरान पार्टी ने सदर थाना प्रभारी कुलदीप कुमार के द्वारा एसएसपी राकेश रंजन के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में जेएलकेएम पार्टी के केन्द्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र नाथ महतो, अदिति की माता अंकिता पांडेय, पिता मनीष पांडेय और बड़ी संख्या में महिला, सामाजिक कार्यकर्ता, युवाओं एवं आम नागरिकों ने भाग लेकर मासूम बच्ची की सुरक्षित वापसी की मांग को बुलंद किया। कानून व्यवस्था पर सवाल इस दौरान झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा कि पिछले 12 दिनों से एक 18 माह की मासूम बच्ची का लापता रहना अत्यंत गंभीर विषय है। यह केवल एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे समाज और कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल है
धनबाद। धनबाद जिले के रामकनाली ओपी क्षेत्र स्थित केशलपुर में अवैध कोयला खनन के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। गांव की मुखिया प्रेमलता कुमारी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अवैध खनन स्थलों पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने उन मुहानों को बंद करने की कोशिश की, जहां बोरे में बड़ी मात्रा में कोयला जमा किया गया था। बमबाजी से फैली दहशत ग्रामीणों के विरोध से बौखलाए अवैध कोयला कारोबारियों ने इलाके में दहशत फैलाने के लिए बमबाजी की। इस घटना के बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया। गुस्साए ग्रामीणों ने कथित तौर पर मजदूरों को ढोने वाली एक ऑटो में तोड़फोड़ भी की। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। भू-धंसान और हादसे का डर ग्रामीणों का कहना है कि अवैध कोयला खनन से उनके गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। लगातार जमीन के नीचे से कोयला निकाले जाने के कारण भू-धंसान का खतरा बढ़ रहा है। लोगों ने आशंका जताई कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सोनारडीह के टंडाबाड़ी जैसी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल अवैध खनन पर रोक लगाने की मांग की। पुलिस और ग्रामीणों के बीच बहस अवैध खनन बंद कराने की मांग को लेकर ग्रामीण रामकनाली ओपी पहुंचे, जहां पुलिस जवानों और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस हुई। कुछ समय तक ओपी परिसर में हंगामे जैसी स्थिति बनी रही। बाद में सूचना मिलने पर ओपी प्रभारी Alisha Kumari मौके पर पहुंचीं और लोगों को शांत कराया। शिकायत के बाद कार्रवाई ग्रामीणों की लिखित शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने अवैध उत्खनन पर रोक लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी। प्रशासन ने मामले की जांच और निगरानी बढ़ाने का आश्वासन दिया है।
रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा के पूर्व महासचिव एवं युवा मोर्चा के संस्थापक स्वर्गीय दुर्ग सोरेन की 17वीं पुण्यतिथि दुर्गा सोरेन चौक रांची पर मनाई गई। इस अवसर पर पार्टी के सैकड़ो कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और स्व. सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की। मौके पर राज्यसभा सांसद महुआ माजी, पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे, मुश्ताक आलम, अंतू तिर्की, उमेश यादव, रामशरण विश्वकर्मा, तारकेश्वर महतो, वीरू साहू, अभय ढूंढो, सुनील टीका, शांति चामू, बाग कुजूर, पवन तिर्की, बिहारी गोप, उत्तम यादव एवं पवन जेडिया समेत सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
रांची। राजधानी रांची में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ स्कूटी चलाते दिखे। उनके पीछे स्कूटी पर सवार थे केंद्रीय उड्डयन मंत्री। दरअसल रांची एयरपोर्ट पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे उड्डयन मंत्री को संजय सेठ ने स्कूटी की सवारी कराई। उन्हें स्कूटी से एयरपोर्ट से काजू बगान हेहल स्थित अपने आवास पर ले गए। वहां उन्होंने कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। फिर उन्हें लेकर एयरपोर्ट पहुंचे। स्कूटी संजय सेठ चला रहे थे। पीछे-पीछे सुरक्षाकर्मी और समर्थक चल रहे थे।
रांची। रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर उड़ान यात्री कैफे शुरू हो गया है। अब यहां यात्रियों को 10 रुपए में चाय मिलेगी। वहीं 20 रुपए में कॉफी और 20 रुपए में स्नैक्स मिलेगा। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापू ने इसका उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने किड्स प्ले जोन और फ्लाइब्रेरी (लाइब्रेरी) का भी उद्घाटन किया। अवसर आउटलेट भी शुरू रांची एयरपोर्ट पर अवसर आउटलेट भी शुरू की गई है, जहां झारखंड के सोहराई पेंटिंग और अन्य स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि रांची से जल्दी ही अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू होगी। दुमका, हजारीबाग, चाईबासा और डालटनगंज को भी जल्दी ही हवाई सेवा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
रांची। झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने राज्य पुलिस सेवा में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। बता दे एक साथ 201 डीएसपी स्तर के अधिकारियों का तबादला हुआ है। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से बुधवार, 20 मई को जारी अधिसूचना में कई जिलों के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ), यातायात डीएसपी, साइबर सेल, विशेष शाखा और पुलिस मुख्यालय में तैनात अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इसे राज्य में लंबे समय बाद हुआ सबसे बड़ा पुलिस प्रशासनिक फेरबदल माना जा रहा है। कई जिलों में बदले गए एसडीपीओ सरकार की ओर से जारी सूची के अनुसार, कई जिलों के एसडीपीओ को नई जगहों पर तैनात किया गया है। गढ़वा के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी नीरज कुमार को हटिया का डीएसपी बनाया गया है। वहीं, पुलिस मुख्यालय रांची में पदस्थापित दीपक कुमार को बेड़ो का डीएसपी बनाया गया है। हजारीबाग में झारखंड सशस्त्र पुलिस-7 में तैनात मनीष चंद्र लाल को सिल्ली का डीएसपी नियुक्त किया गया है। बसिया के एसडीपीओ नाजीर अख्तर को धनबाद मुख्यालय-2 भेजा गया है। बरही के एसडीपीओ अजित कुमार विमल को बाघमारा का अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बनाया गया है। इसके अलावा विशेष शाखा में कार्यरत लिलेश्वर महतो को निरसा और प्रकाश चंद्र महतो को सिंदरी का एसडीपीओ बनाया गया है। सरकार ने कई जिलों में लंबे समय से तैनात अधिकारियों को भी बदला है ताकि प्रशासनिक कार्यप्रणाली में नई ऊर्जा लाई जा सके। रांची और धनबाद में बड़े स्तर पर बदलाव राजधानी रांची और धनबाद जिले में भी व्यापक फेरबदल किया गया है। आलोक कुमार सिंह को सीसीआर रांची, अजय आर्यन को डीएसपी मुख्यालय-2 रांची और रामाकांत रजक को यातायात-4 रांची में तैनात किया गया है। ताराश सोरेन को यातायात-2 रांची की जिम्मेदारी मिली है, जबकि प्रदीप कुमार-2 को साइबर डीएसपी रांची बनाया गया है। धनबाद में कुमार विनोद को मुख्यालय-4 का डीएसपी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा ट्रैफिक, साइबर सेल और विशेष शाखा में भी कई अधिकारियों की नई पोस्टिंग की गई है। कानून-व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश सरकार के इस फैसले को राज्य में कानून-व्यवस्था मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार अपराध नियंत्रण, साइबर अपराध पर निगरानी, ट्रैफिक प्रबंधन और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बेहतर पुलिसिंग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह व्यापक बदलाव किया गया है। सरकार का मानना है कि नई तैनाती से पुलिस प्रशासन अधिक सक्रिय और जवाबदेह बनेगा। सभी संबंधित अधिकारियों को जल्द से जल्द नई जगह पर योगदान देने का निर्देश दिया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में राज्य की पुलिस व्यवस्था और अपराध नियंत्रण प्रणाली में इसका असर साफ दिखाई देगा।
रांची। Central University of Jharkhand ने पीजी एडमिशन 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा कर दी है। विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए आवेदन प्रक्रिया 20 मई से शुरू होगी। इस बार छात्रों को बड़ी राहत देते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एक ही रजिस्ट्रेशन फीस में तीन अलग-अलग पीजी कोर्स चुनने की सुविधा दी है। इससे छात्रों को अलग-अलग आवेदन फॉर्म भरने और बार-बार शुल्क जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, छात्र एक ही आवेदन फॉर्म के माध्यम से अपनी पसंद के तीन कोर्स का चयन कर सकेंगे। नई व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों को ज्यादा विकल्प देना और एडमिशन प्रक्रिया को सरल बनाना है। विश्वविद्यालय का मानना है कि इससे छात्रों का समय और पैसा दोनों बचेगा। CUET PG स्कोर के आधार पर मिलेगा दाखिला पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश CUET PG 2026 के स्कोर के आधार पर किया जाएगा। ऐसे में छात्रों के लिए पहले CUET PG परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य होगा। परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर ही मेरिट सूची तैयार की जाएगी और उसी के अनुसार दाखिला दिया जाएगा। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि केवल वही छात्र आवेदन कर सकेंगे जिनके पास वैध CUET PG स्कोर होगा। इसके साथ ही अभ्यर्थियों को संबंधित कोर्स के लिए निर्धारित पात्रता मानदंड भी पूरा करना होगा। आरक्षित वर्ग को शुल्क में राहत सीयूजे ने आर्थिक रूप से कमजोर और आरक्षित वर्ग के छात्रों को राहत देते हुए आवेदन शुल्क में छूट देने का फैसला लिया है। सामान्य वर्ग की तुलना में एससी, एसटी और अन्य आरक्षित वर्ग के छात्रों को कम रजिस्ट्रेशन फीस देनी होगी। विश्वविद्यालय के इस निर्णय को छात्रों के हित में बड़ा कदम माना जा रहा है। पूरी आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन विश्वविद्यालय की ओर से एडमिशन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन रखा गया है। छात्र CUJ Official Website पर जाकर आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के दौरान छात्रों को जरूरी दस्तावेज, CUET PG स्कोर कार्ड और कैटेगरी सर्टिफिकेट अपलोड करना होगा। हेल्पडेस्क से मिलेगी सहायता एडमिशन प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की समस्या आने पर छात्र विश्वविद्यालय की ओर से जारी हेल्पडेस्क नंबर और ईमेल के माध्यम से सहायता प्राप्त कर सकते हैं। विश्वविद्यालय ने छात्रों से समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है ताकि अंतिम समय की परेशानी से बचा जा सके।
रांची। रांची के मारवाड़ी कॉलेज की ऑटोनॉमी खत्म हो गई है। 17 वर्षों तक स्वायत्त संस्थान के रूप में संचालित होने के बाद अब शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कॉलेज रांची यूनिवर्सिटी की पारंपरिक व्यवस्था में लौट जाएगा। इसका सीधा असर कॉलेज के 15 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं पर पड़ेगा। अब परीक्षा, रिजल्ट, सिलेबस, मूल्यांकन प्रणाली और अकादमिक कैलेंडर तक का नियंत्रण फिर से रांची यूनिवर्सिटी के हाथों में होगा। रांची विवि की परीक्षा व्यवस्था सवालों मे रांची यूनिवर्सिटी की परीक्षा, रिजल्ट व्यवस्था और सेशन लेट को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में मारवाड़ी कॉलेज जैसे बड़े संस्थान की स्वायत्तता समाप्त होना केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं माना जा रहा, बल्कि एक बार फिर शैक्षणिक सत्र प्रभावित होने की आशंका भी बढ़ गई है। मारवाड़ी कॉलेज लंबे समय से झारखंड में ऑटोनॉमस शिक्षा मॉडल का बड़ा चेहरा माना जाता रहा है। यही कारण रहा कि कॉलेज ने राज्य के अन्य संस्थानों की तुलना में अपनी अलग शैक्षणिक पहचान बनाई। लेकिन, अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कॉलेज दोबारा उसी शैक्षणिक संकट में फंसेगा, जिससे वह पहले गुजर चुका है? क्योंकि, पिछली बार ऑटोनॉमी समाप्त होने के बाद कॉलेज का सत्र भी रांची यूनिवर्सिटी की तरह अव्यवस्थित हो गया था। 2009 में पहली बार मिली थी ऑटोनॉमी मारवाड़ी कॉलेज को पहली बार वर्ष 2009 में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन यानी यूजीसी ने ऑटोनॉमस स्टेटस दिया था। उस समय इसे झारखंड में उच्च शिक्षा सुधार की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना गया था। ऑटोनॉमी मिलने के बाद कॉलेज को कई शैक्षणिक अधिकार मिले। कॉलेज ने स्वयं परीक्षा आयोजित करनी शुरू की, अपने स्तर पर सिलेबस अपडेट और डिजाइन किया तथा कई नए प्रोफेशनल और जॉब ओरिएंटेड कोर्स शुरू किए। इसका सबसे बड़ा असर परीक्षा और रिजल्ट व्यवस्था पर पड़ा। 2021 में पहली बार खत्म हुई थी कॉलेज की ऑटोनॉमी पहली बार वर्ष 2021 में समाप्त हुई थी। तब कॉलेज की शैक्षणिक व्यवस्था पर सीधा असर पड़ा था। परीक्षा और रिजल्ट प्रक्रिया रांची यूनिवर्सिटी की व्यवस्था से जुड़ते ही सत्र गड़बड़ा गया था।बाद में जब कॉलेज को दोबारा ऑटोनॉमी मिली, तब कॉलेज प्रबंधन ने परीक्षा कैलेंडर को व्यवस्थित करने और सत्र नियमित करने पर विशेष फोकस किया। क्या पड़ेगा असर परीक्षा कार्यक्रम अब रांची यूनिवर्सिटी तय करेगी। सिलेबस, प्रश्नपत्र और मूल्यांकन प्रक्रिया अब रांची विश्वविद्यालय के अधीन होगी। रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया केंद्रीकृत होगी। मारवाड़ी कॉलेज खुद नए कोर्स शुरू करता था, पर अब लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा। अकादमिक कैलेंडर की स्वतंत्रता समाप्त हो जाएगी, रांची यूनिवर्सिटी के फैसला लागू होगा। मारवाड़ी कॉलेज का सफर 1963: मारवाड़ी शिक्षा ट्रस्ट ने मारवाड़ी कॉलेज की स्थापना की। 1980: मारवाड़ी कॉलेज रांची यूनिवर्सिटी की अंगीभूत इकाई बना। 2009: यूजीसी से पहली बार ऑटोनॉमी मिली। 2021: पहली बार स्वायत्तता समाप्त हुई। 2026: अप्रैल में फिर समाप्त हुई स्वायत्तता। यूजीसी को फिर से आवेदन देंगे: प्रिंसिपल मारवाड़ी कॉलेज के प्राचार्य डॉ मनोज कुमार ने कहा कि ऑटोनॉमी मिलने के बाद क्वालिटी एजुकेशन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिसके सकारात्मक परिणाम मिले हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोर्स की पढ़ाई शुरू करने वाला मारवाड़ी कॉलेज राज्य का पहला कॉलेज है। नैक के पुराने ग्रेडिंग के आधार पर मान्यता खत्म की गई है। लंबे समय से नैक का निरीक्षण नहीं हो रहा है। फिर से विचार करने के लिए यूजीसी को आवेदन देंगे।
रांची। दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार जैन ने रांची और हटिया रेलवे स्टेशन पर चल रहे रिडेवलपमेंट कार्यों का निरीक्षण किया। करीब दो घंटे तक दोनों स्टेशनों पर चल रहे निर्माण कार्यों की समीक्षा करने के दौरान उन्होंने यात्रियों की सुविधा को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। निरीक्षण के दौरान जीएम ने विशेष रूप से कहा कि रांची रेलवे स्टेशन पर बड़े और आधुनिक रेलवे स्टेशनों तथा मेट्रो स्टेशनों की तर्ज पर अंडरपासवे की व्यवस्था होनी चाहिए। यात्रियों को होगी सहुलियत इससे यात्रियों को एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक जाने में अधिक सहूलियत होगी और भीड़ प्रबंधन भी बेहतर तरीके से हो सकेगा। उन्होंने अधिकारियों से इस दिशा में संभावनाएं तलाशने को कहा। जून 2026 तक साउथ गेट भवन पूरा करने का लक्ष्य अधिकारियों ने जीएम को बताया कि रांची रेलवे स्टेशन के साउथ गेट पर बन रहे नए भवन का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इसे 30 जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि फिनिशिंग और आंतरिक कार्यों में अतिरिक्त समय लग सकता है। यह भी जानकारी दी गई कि नार्थ गेट स्थित कार्यालयों और अन्य व्यवस्थाओं को धीरे-धीरे साउथ गेट की ओर शिफ्ट किया जाएगा। रांची रेलवे स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है और यहां कुल छह प्लेटफार्म विकसित किए जा रहे हैं। भविष्य में कई प्रीमियम ट्रेनों का परिचालन भी यहीं से किया जाएगा। प्लेटफार्म पर शेड, टाइल्स और फॉल्स सीलिंग का काम बाकी निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि स्टेशन परिसर में प्लेटफार्म पर शेड लगाने, टाइल्स बिछाने, फाल्स सीलिंग, रेलिंग और अन्य सौंदर्यीकरण कार्य अभी शेष हैं। इन्हें चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। मंडल रेल प्रबंधक करुण निधि ने बताया कि स्टेशन पर स्वचालित सीढ़ियों और कानकोर्स की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे यात्रियों को प्लेटफार्म तक पहुंचने में आसानी होगी। साउथ गेट को जोड़ेगा रोड ओवरब्रिज मौके पर मौजूद इंजीनियरों ने बताया कि चुटिया ऑयल डिपो से साउथ गेट की ओर रोड ओवरब्रिज का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इसे अगले दो महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके शुरू होने के बाद साउथ गेट से आने-जाने वाले यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। हटिया स्टेशन में भी बड़े बदलाव की तैयारी इसके बाद जीएम ने हटिया रेलवे स्टेशन पर चल रहे निर्माण कार्यों का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि स्मार्ट सिटी की ओर हटिया स्टेशन का नया साउथ गेट बनाया जाएगा, जिससे धुर्वा और आसपास की बड़ी आबादी सीधे स्टेशन से जुड़ सकेगी। इसके अलावा 33 करोड़ रुपये की लागत से एक बड़े अंडरपासवे का निर्माण भी प्रस्तावित है। इसके बनने से धुर्वा की ओर से आने वाले यात्रियों को बिरसा चौक होकर नहीं आना पड़ेगा और वे सीधे हटिया स्टेशन के नार्थ गेट तक पहुंच सकेंगे। हटिया यार्ड में वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों के रखरखाव के लिए दो नई पिटलाइन भी बनाई जा रही हैं। निरीक्षण के दौरान जीएम ने सभी निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा करने का निर्देश दिया। मौके पर एडीआरएम, सीनियर डीसीएम, डीएससी समेत कई रेल अधिकारी मौजूद थे। रांची स्टेशन के साउथ गेट पर लगा स्वचालित सीढ़ी रांची रेलवे स्टेशन के साउथ गेट पर स्वचालित सीढ़ी को लगा दिया गया है। प्रवेश द्वार से आगे बढ़ने के बाद कानकार्स तक जाने के लिए इसकी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही एक लिफ्ट की व्यवस्था की गई है।
रांची। बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में महिला बंदी से जुड़े मामले ने अब नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। आरोप है कि जेल प्रशासन ने बिना किसी औपचारिक जांच टीम के गठन के ही महिला बंदी का प्रेग्नेंसी टेस्ट प्राइवेट लैब में करा दिया। इसे लेकर जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। जब जेल प्रशासन को महिला बंदी के गर्भवती होने की आशंका हुई, तब जेल डॉक्टरों की टीम के माध्यम से आनन-फानन में जांच कराई गई। सवाल यह उठ रहा है कि इतनी संवेदनशील स्थिति में बिना औपचारिक प्रक्रिया अपनाए प्राइवेट लैब में टेस्ट क्यों कराया गया। उस समय न तो कोई अधिकृत जांच टीम बनाई गई थी और न ही पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती गई। बताया गया कि पीड़िता ने शुरुआत में प्रेग्नेंसी टेस्ट कराने से साफ इंकार कर दिया था। बाद में उसे समझाने के बाद ब्लड सैंपल लिया गया। मामले के तूल पकड़ने के बाद जेल प्रबंधन ने अब सिविल सर्जन को पत्र लिखकर जांच कराने का आग्रह किया है। पत्र में महिला बंदी का ब्लड सैंपल लेने को कहा गया है। डीसी ने दिए जांच के आदेश रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने मामले को गंभीर मानते हुए आरोपों की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने एडीएम (विधि-व्यवस्था) और एसडीएम स्तर के अफसरों यह को जिम्मेदारी सौंपी है। प्रक्रिया का पालन नहीं, प्राइवेट लैब में जांच महिला बंदी का प्रेग्नेंसी टेस्ट जिस लैब में कराया गया, उसका इस्तेमाल आमतौर पर जेल प्रशासन तत्काल स्वास्थ्य जरूरतों में करता है। जेल सूत्रों के अनुसार, जब किसी कैदी की अचानक तबीयत बिगड़ती है या तुरंत मेडिकल रिपोर्ट की जरूरत होती है, तब इसी तरह की लैब से जांच कराई जाती है, ताकि प्राथमिक स्थिति का आकलन किया जा सके। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि ऐसे गंभीर और संवेदनशील मामलों में महिला बंदी की जांच के लिए पहले सिविल सर्जन को आग्रह पत्र भेजना जरूरी माना जाता है। आरोप है कि इस मामले में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। जेल के डॉक्टरों ने सीधे सैंपल लेकर उसे प्राइवेट लैब भेज दिया और जांच रिपोर्ट में महिला बंदी को गर्भवती नहीं बताया गया।
रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमवार 18 मई को सहायक आचार्य के पद पर नियुक्त 319 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। इसे लेकर प्रोजेक्ट भवन सभागार में नियुक्ति पत्र वितरण समारोह का आयोजन किया गया है। नियुक्त अभ्यर्थियों में 158 उम्मीदवारों का चयन इंटर प्रशिक्षित सहायक आचार्य तथा 161 अभ्यर्थियों का चयन स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्य के पदों पर किया गया है। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने इन अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा पिछले वर्ष दिसंबर में ही कर दी थी। 19 महिला पर्यवेक्षकों को भी मिलेगा नियुक्ति पत्र मुख्यमंत्री महिला एवं बाल विकास तथा सामाजिक सुरक्षा विभाग के लिए नियुक्त महिला पर्यवेक्षक के पदों पर चयनित 19 अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति पत्र प्रदान करेंगे। जिला स्तर पर काउंसिलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियुक्ति पत्र वितरण का निर्णय लिया गया।
रांची। झारखंड माध्यमिक शिक्षक संघ ने शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से अलग रखने की मांग की है। संघ ने कहा कि आठवीं पास करने के बाद नौवीं में बच्चों का हाई स्कूल में एडमिशन होता है। इनरोलमेंट बढ़ाने के लिए कम अंक वाले विद्याथियों का भी एडमिशन ले लिया जाता है। वे एक पैराग्राफ भी ढंग से नहीं लिख पाते हैं। नौवीं कक्षा में विद्यार्थियों का सेंटअप टेस्ट भी बंद कर दिया गया है। वे सीधे मैट्रिक की परीक्षा में शामिल होते हैं। दूसरी ओर शिक्षकों को साल भर गैर शैक्षणिक कार्यों जैसे चुनाव, ट्रेनिंग, सावित्री बाई फुले योजना, बैंक खाता खोलने और आय प्रमाण पत्र भरने जैसे काम में लगा दिया जाता है। अभी उन्हें जनगणना में लगाया गया है। इस कारण शिक्षक बच्चों पर पूरी तरह ध्यान नहीं दे पाते। यह भी रिजल्ट खराब होने का बड़ा कारण है। झारखंड राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ के सचिव रविंद्र कुमार चौधरी ने स्कूलों में सेंटअप टेस्ट शुरू करने और शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से अलग रखने की मांग की है।
रांची। राजधानी रांची में कानून-व्यवस्था का हाल जानने बीती देर रात एसएसपी राकेश रंजन खुद सड़कों पर निकले। उन्होंने शहर के कई प्रमुख थानों का औचक निरीक्षण कर पुलिस अधिकारियों और जवानों की मुस्तैदी का जायजा लिया। इस दौरान उनके साथ सिटी एसपी पारस राणा भी मौजूद रहे। पुलिस महकमे में हलचल आधी रात हुए इस निरीक्षण से पुलिस महकमे में हलचल मच गई। एसएसपी ने विभिन्न थानों में पहुंचकर वहां की सुरक्षा व्यवस्था, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की उपस्थिति, रिकॉर्ड संधारण और रात्रि गश्ती व्यवस्था की जांच की। उन्होंने थानेदारों और पुलिस पदाधिकारियों से क्षेत्र में अपराध नियंत्रण को लेकर जानकारी भी ली। लंबित मामलों की जानकारी ली इस दौरान एसएसपी ने थानों में लंबित मामलों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को मामलों के त्वरित निष्पादन का निर्देश दिया। साथ ही रात में गश्ती दल को और सक्रिय रहने तथा संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने को कहा। आम लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता एसएसपी ने पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया कि अपराध नियंत्रण और आम लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि रात्रि गश्ती में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वाहनों की जांच भी की निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर वाहनों की जांच और देर रात घूम रहे संदिग्ध लोगों से पूछताछ भी की गई। पुलिस अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है।
रांची। रांची के रिम्स (RIMS) में एमबीबीएस सेकंड ईयर के छात्र अक्षित कुजूर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। छात्र का शव उसके हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटका हुआ मिला। घटना से हॉस्टल और रिम्स परिसर में शोक का माहौल है। घटना का सिलसिला सूत्रों के अनुसार, अक्षित शुक्रवार रात खाना खाने के बाद अपने कमरे में सोने चला गया था। शनिवार सुबह जब उसके कुछ दोस्तों ने कमरे का दरवाजा खोला, तो देखा कि वह पंखे से फंदे के सहारे लटका हुआ है। साथी छात्रों ने तुरंत उसे नीचे उतारकर रिम्स ट्रॉमा सेंटर ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे बचाया नहीं जा सका। पुलिस जांच में जुटी बरियातू थाना की पुलिस ने घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने कमरे की जांच की और आसपास के छात्रों से पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, प्राथमिक दृष्टि से मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। मानसिक तनाव की आशंका रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार ने बताया कि अक्षित पढ़ाई में मेधावी छात्र था और वह फिलहाल मानसिक तनाव से गुजर रहा था। निदेशक ने कहा कि यह दुखद और हैरानी वाली घटना है कि हॉस्टल में साथ रहने वाले दोस्तों को भी उसके तनाव के बारे में पता नहीं चला। साथी छात्रों ने बताया कि अक्षित शांत स्वभाव का और पढ़ाई में ध्यान देने वाला छात्र था। इस घटना से हॉस्टल और रिम्स परिसर में गहरा दुख व्याप्त है।
रांची। झारखंड ट्रांसफर पोस्टिंग पर पूरी तरह रोक लग चुकी है। यह निर्देश चुनाव आयोग ने दिया है। चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट किया कि 20 जून से होने वाले SIR को देखते हुए लिया गया। बता दे ट्रांसफर पोस्टिंग साल में 2 बार यानी जून- जुलाई और दिसंबर होता है। झारखंड के अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सह अपर सचिव सुबोध कुमार ने सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव और उपायुक्तों को पत्र भेजकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पत्र में कहा गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य में लगे अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है और वर्तमान में उनसे प्री-एसआईआर का काम लिया जा रहा है। ऐसे में कार्य की निरंतरता बनाए रखने के लिए इनका स्थानांतरण आयोग की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता। एसडीओ, बीडीओ और सीओ स्तर के अधिकारी शामिल चुनाव संबंधी कार्यों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाले निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी के रूप में एसडीओ स्तर के अधिकारी कार्यरत हैं। वहीं सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी के तौर पर बीडीओ और सीओ स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा बीएलओ पर्यवेक्षक और बीएलओ भी इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा रहे हैं।चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन सभी पदों पर कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले से पहले आयोग की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। रिक्त पदों को जल्द भरने का निर्देश चुनाव आयोग ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि जो पद वर्तमान में रिक्त हैं, उन्हें भी आयोग की सहमति लेकर जल्द भरा जाए। आयोग का उद्देश्य है कि एसआईआर का कार्य तय समयसीमा के भीतर बिना किसी बाधा के पूरा हो सके। साल में दो बार होती है ट्रांसफर-पोस्टिंग प्रक्रिया राज्य में सामान्य तौर पर ट्रांसफर-पोस्टिंग की प्रक्रिया जून-जुलाई और दिसंबर में होती है। लेकिन इस बार चुनाव आयोग की सख्ती के कारण संबंधित विभागों को तबादले से पहले विशेष अनुमति लेनी होगी। एसआईआर को लेकर प्रशासन अलर्ट 20 जून से शुरू होने वाले विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। आयोग चाहता है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य पूरी पारदर्शिता और व्यवस्थित तरीके से पूरा हो, ताकि चुनाव प्रक्रिया प्रभावित न हो।
रांची। रांची को झरनों का शहर कहा जाता है। यहां की हरियाली, शांत वातावरण और प्राकृतिक खूबसूरती लोगों को बेहद आकर्षित करती है। पूरे हफ्ते काम की भागदौड़ के बाद वीकेंड पर लोग ऐसी जगह की तलाश करते हैं जहां कुछ समय सुकून से बिताया जा सके। रांची और उसके आसपास कई ऐसी खूबसूरत लोकेशन मौजूद हैं, जहां परिवार और दोस्तों के साथ यादगार समय बिताया जा सकता है। हुंडरू फॉल्स: प्रकृति का शानदार नजारा हुंडरू फॉल्स रांची से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित है। ऊंचाई से गिरता पानी और चारों ओर फैली हरियाली इस जगह को खास बनाती है। बारिश और सर्दियों में यहां की सुंदरता और बढ़ जाती है। पिकनिक, फोटोग्राफी और रिलैक्सिंग टाइम के लिए यह एक बेहतरीन जगह मानी जाती है। दशम फॉल्स: शांति और ठंडक का एहसास दशम फॉल्स रांची के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। यहां का शांत और ठंडा माहौल लोगों को शहर के शोर से दूर सुकून का अनुभव कराता है। वीकेंड पर यहां थोड़ी भीड़ जरूर रहती है, लेकिन झरने के आसपास बैठकर प्रकृति का आनंद लेना बेहद खास अनुभव होता है। जोन्हा फॉल्स: नेचर लवर्स के लिए जन्नत जोन्हा फॉल्स तक पहुंचने का रास्ता ही इसकी खूबसूरती का हिस्सा है। पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच से गुजरते हुए यहां पहुंचना एक शानदार रोड ट्रिप जैसा लगता है। साफ पानी, हरियाली और शांत वातावरण इसे पिकनिक और फैमिली ट्रिप के लिए परफेक्ट बनाते हैं। पतरातू वैली: घुमावदार रास्तों का रोमांच पतरातू वैली रांची से लगभग 40 किलोमीटर दूर है। यह जगह अपनी घुमावदार सड़कों और शानदार व्यू के लिए प्रसिद्ध है। बाइक राइड और लॉन्ग ड्राइव पसंद करने वालों के लिए यह किसी सपने से कम नहीं। सुबह और शाम के समय यहां का मौसम बेहद सुहावना हो जाता है। मैकलुस्कीगंज: शांति और पुरानी विरासत का संगम मैकलुस्कीगंज अपनी एंग्लो-इंडियन संस्कृति, पुरानी कोठियों और शांत माहौल के लिए जाना जाता है। जंगलों और प्राकृतिक सुंदरता के बीच बसा यह स्थान उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो शहर की भीड़ से दूर कुछ शांत पल बिताना चाहते हैं। रोड ट्रिप और रिलैक्सिंग वीकेंड के लिए यह एक शानदार विकल्प माना जाता है।
Jharkhand में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र का असर अब राज्य के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है। मौसम विभाग ने 16 से 21 मई तक झारखंड के कई जिलों में तेज आंधी, वज्रपात और बारिश की संभावना जताई है। इसे देखते हुए 17 और 18 मई के लिए कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। 17 मई को इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार 17 मई को Ranchi समेत धनबाद, कोडरमा, हजारीबाग, बोकारो, रामगढ़, गिरिडीह, देवघर, दुमका, जामताड़ा, पाकुड़, गोड्डा और साहिबगंज में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है। इसके साथ वज्रपात और बारिश की भी संभावना है। स्थिति को देखते हुए इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं राज्य के अन्य हिस्सों में बादल छाए रहने, 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने और कहीं-कहीं बारिश व वज्रपात को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। 18 मई को भी खराब रहेगा मौसम 18 मई को भी मौसम में ज्यादा राहत मिलने के संकेत नहीं हैं। मौसम विभाग ने रांची, धनबाद, कोडरमा, हजारीबाग, बोकारो, रामगढ़, चतरा, गिरिडीह, देवघर, जामताड़ा, दुमका, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज जिलों में तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई है। इन जिलों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है और वज्रपात की आशंका भी बनी हुई है। इसलिए इन क्षेत्रों के लिए फिर से ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। बाकी जिलों में येलो अलर्ट लागू रहेगा। इन जिलों में लू का असर एक तरफ जहां कई जिलों में बारिश और आंधी का खतरा है, वहीं दूसरी तरफ राज्य के कुछ हिस्सों में गर्मी का असर भी जारी रहेगा। Garhwa, Palamu और Latehar में 16 से 18 मई तक लू चलने की संभावना जताई गई है। वहीं 17 मई को चतरा जिले में भी हीटवेव की स्थिति बन सकती है। मेदिनीनगर के तापमान में बड़ी गिरावट लगातार मौसम बदलने के बीच Medininagar के तापमान में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। गुरुवार को यहां अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस था, लेकिन अगले 24 घंटों में तापमान करीब 5 डिग्री गिरकर 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और वज्रपात के समय खुले स्थानों से दूर रहने की अपील की है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।