Ranchi News

CCTV tender scam rumours
झारखंड : थानों में CCTV लगाने के नाम पर घोटाले की आहट, टेंडर पर उठे सवाल

रांची। झारखंड में थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। करीब 100 से 115 करोड़ रुपये की इस परियोजना में कथित अनियमितताओं और बंदरबांट की आशंका जताई जा रही है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया को इस तरह तैयार किया गया है कि केवल एक खास कंपनी को लाभ मिल सके।जानकारी के अनुसार, इस योजना के लिए पहले भी दो बार टेंडर जारी किए गए थे, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण दोनों बार रद्द करना पड़ा। अब तीसरी बार टेंडर जारी किया गया है, लेकिन इस बार भी शर्तों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि टेंडर में ऐसे नियम शामिल किए गए हैं, जिससे बड़ी कंपनियां भी प्रक्रिया में भाग नहीं ले पा रही हैं।   जैप आईटी विभाग पर उठे सवाल टेंडर प्रक्रिया को लेकर जैप आईटी विभाग विवादों में आ गया है। पहले इसे झारखंड ई-प्राक्योरमेंट पोर्टल पर अपलोड किया गया, जबकि इसे जेम पोर्टल पर होना चाहिए था। बाद में इसे जेम पोर्टल पर डाला गया, लेकिन शर्तें सामने आते ही पूरे मामले पर संदेह गहरा गया।   10 हजार कैमरे लगाने की योजना इस योजना के तहत राज्य के विभिन्न थानों में करीब 10 हजार सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने हैं। इसमें डोम और बुलेट कैमरे शामिल हैं। इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस समेत कुल खर्च 115 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।   बाबूलाल मरांडी ने जताई बड़ी आशंका पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस टेंडर में भारी अनियमितता और कमीशनखोरी का आरोप लगाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह घोटाला शराब घोटाले से भी बड़ा साबित हो सकता है।   सरकार की छवि पर सवाल इस पूरे मामले ने एक बार फिर सरकारी कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या कदम उठाती है और जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।

Anjali Kumari अप्रैल 17, 2026 0
BJP protest Jharkhand
बिजली दर बढ़ोतरी पर भाजपा का JBVNL कार्यालय पर धरना

रांची। झारखंड में बिजली दरों में बढ़ोतरी और खराब आपूर्ति व्यवस्था के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी ने शुक्रवार को राज्यव्यापी प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालयों में झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के कार्यालयों के बाहर धरना दिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। राजधानी रांची में डोरंडा स्थित JBVNL कार्यालय के सामने भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे।   नेताओं ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप रांची में आयोजित प्रदर्शन का नेतृत्व विधायक सीपी सिंह और मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने किया। इस दौरान सीपी सिंह ने आरोप लगाया कि राजधानी में 24 घंटे बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही है और आम जनता बिजली संकट से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि वीआईपी और अधिकारियों को प्राथमिकता देकर आम लोगों की अनदेखी की जा रही है।   स्मार्ट मीटर और बिलिंग पर उठे सवाल नवीन जायसवाल ने कहा कि स्मार्ट मीटर लागू होने के बाद बिजली बिल में अनियमितता बढ़ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उपभोक्ताओं से जबरन वसूली की जा रही है और शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। बिजली कनेक्शन काटे जाने की घटनाओं से लोग और परेशान हो रहे हैं।   कई जिलों में हुआ प्रदर्शन यह आंदोलन केवल रांची तक सीमित नहीं रहा। खूंटी, गुमला, लोहरदगा, जमशेदपुर, पलामू, गढ़वा, कोडरमा, धनबाद, बोकारो, देवघर, दुमका और पाकुड़ सहित कई जिलों में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया।   आगे उग्र आंदोलन की चेतावनी भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि बिजली आपूर्ति और बिलिंग व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि सरकार को जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेना होगा, अन्यथा विरोध और व्यापक रूप ले सकता है।

Anjali Kumari अप्रैल 17, 2026 0
Ranchi airport flights
रांची एयरपोर्ट से बढ़ीं उड़ानें, मुंबई-दिल्ली-हैदराबाद के लिए अतिरिक्त उड़ानों का ऐलान

रांची। रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से हवाई सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। बढ़ती यात्रियों की संख्या और समर सीजन को देखते हुए मई महीने से अतिरिक्त उड़ानों का संचालन शुरू होगा। इससे खासकर मुंबई, नई दिल्ली और हैदराबाद जाने वाले यात्रियों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।   इंडिगो और एयर इंडिया बढ़ा रही सेवाएं IndiGo मुंबई रूट पर 1 मई से 29 मई तक विशेष समर फ्लाइट चलाएगी। यह सेवा सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को उपलब्ध रहेगी। वहीं Air India ने भी रांची से मुंबई, दिल्ली और हैदराबाद के लिए अतिरिक्त उड़ानें शुरू करने का निर्णय लिया है। ये उड़ानें अलग-अलग समय स्लॉट में संचालित होंगी, जिससे यात्रियों को सुविधा अनुसार विकल्प मिल सकेगा।   समय और सुविधा का बेहतर संतुलन नई व्यवस्था के तहत मुंबई के लिए शाम के समय, दिल्ली के लिए सुबह और हैदराबाद के लिए दोपहर में सीधी उड़ान उपलब्ध होगी। इससे बिजनेस ट्रैवलर्स और आपात यात्रा करने वाले लोगों को खास फायदा होगा। यात्रियों को अब ज्यादा फ्लेक्सिबल टाइमिंग और बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।   गर्मी की छुट्टियों में बढ़ती मांग का असर गर्मी की छुट्टियों के दौरान यात्रियों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होती है। ऐसे में अतिरिक्त उड़ानों से टिकट की उपलब्धता बेहतर होगी और किराए में भी संतुलन बने रहने की उम्मीद है। एयरपोर्ट अथॉरिटी के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।   मजबूत होगा रांची का हवाई नेटवर्क नई उड़ानों के शुरू होने से रांची का हवाई नेटवर्क और मजबूत होगा। इससे राज्य के यात्रियों को देश के प्रमुख शहरों तक पहुंचने के लिए अधिक विकल्प मिलेंगे। यह कदम न केवल यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास और कनेक्टिविटी को भी नई दिशा देगा।

Anjali Kumari अप्रैल 17, 2026 0
exam paper leak case
उत्पाद सिपाही पेपर लीक केस: 28 आरोपियों की जमानत पर सुनवाई, कोर्ट ने मांगी केस डायरी

रांची। रांची सिविल कोर्ट में उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। गुरुवार को इस केस में गिरफ्तार 28 आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई हुई। अपर न्याययुक्त योगेश कुमार की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस से केस डायरी पेश करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की विस्तृत सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।   पहले भी दायर हुई थीं जमानत याचिकाएं इससे पहले बुधवार को भी 20 आरोपियों ने जमानत के लिए आवेदन दिया था, जिसके बाद अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हुई। लगातार दायर हो रही याचिकाओं के कारण मामला न्यायिक स्तर पर और महत्वपूर्ण हो गया है।   छापेमारी में बड़े गिरोह का खुलासा पुलिस की जांच में इस पेपर लीक मामले में एक संगठित गिरोह के सक्रिय होने का खुलासा हुआ है। हाल ही में की गई बड़ी छापेमारी में कुल 164 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिससे पूरे नेटवर्क की गहराई का अंदाजा लगाया जा रहा है।   कई आरोपियों को भेजा गया जेल सोमवार को सभी आरोपियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। जांच में कई प्रमुख नाम सामने आए हैं, जिनमें अतुल वत्स, विकास कुमार, शेर सिंह, आशीष कुमार और योगेश प्रसाद शामिल हैं।   महिलाओं की संलिप्तता भी उजागर जांच में यह भी सामने आया है कि इस मामले में 7 महिलाओं की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। इस संबंध में तमाड़ थाना में कांड संख्या 21/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।   20 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी निगाहें अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में 20 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है। अदालत केस डायरी के आधार पर आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर आगे का फैसला ले सकती है, जिस पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं।

Anjali Kumari अप्रैल 17, 2026 0
justice amitabh gupta
झारखंड के नये लोकायुक्त होंगे जस्टिस अमिताभ गुप्ता, 5 साल से खाली है पद

रांची। झारखंड हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस अमिताभ गुप्ता झारखंड के नए लोकायुक्त होंगे। राज्यपाल की सहमति के बाद कागजी प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। गुरुवार को ही इससे संबंधित अधिसूचना जारी हो सकती है। इसके बाद लोकायुक्त के रूप में उन्हें शपथ दिलाने संबंधित प्रक्रिया पूरी की जाएगी। लोकायुक्त को राज्यपाल शपथ दिलाते हैं।   1997 से न्यायिक सेवा में हैं जस्टिस गुप्ता जस्टिस अमिताभ गुप्ता 1997 में न्यायिक सेवा में आए थे और संयुक्त बिहार के समय एडीजे के रूप में योगदान दिए थे। इसके बाद वे धनबाद, दुमका में भी पदस्थापित रहे। रांची में सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश पशुपालन रहे जस्टितस अमिताभ गुप्ता वर्ष 2013 में झारखंड हाईकोर्ट के जज बने थे और 30 मई 2021 को वहीं से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद आरआरडीए ट्रिब्यूनल के चेयरमैन के रूप में उन्होंने कार्य किया था। वे झारखंड सरकार के विधि सचिव भी रह चुके हैं। झारखंड सरकार के विधि सचिव भी रहे जानकारी के अनुसार वह झारखंड सरकार के विधि सचिव भी रह चुके हैं। 31 मई 1959 को जस्टिस अमिताभ गुप्ता का जन्म हुआ था। उन्होंने साहिबगंज के संत जेवियर्स स्कूल से पढ़ाई करने के बाद हिंदू कॉलेज से स्नातक व दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर व एलएलबी की पढ़ाई पूरी की थी। जून 2021 से खाली है पद झारखंड के लोकायुक्त का पद जून 2021 से रिक्त पड़ा है। तब जस्टिस डीएन उपाध्याय लोकायुक्त थे। कोरोना महामारी के चलते उनका निधन हो गया था, उसके बाद से ही यह पद रिक्त पड़ा है। पांच साल से लोकायुक्त का पद रिक्त रहने के कारण भ्रष्टाचार के करीब तीन हजार मामले लंबित पड़े हुए हैं।  लोकायुक्त का पद खाली रहने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल हुई थी, जिसपर सुनवाई चलती रही। 20 अप्रैल को अगली सुनवाई होनी है। बताया जा रहा है कि सुनवाई के पूर्व लोकायुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

Anjali Kumari अप्रैल 16, 2026 0
Jtet controversy
Jharkhand: भोजपुरी-मगही भाषा विवाद में फंसा JTET

रांची। झारखंड में भोजपुरी और मगही को लेकर भाषा विवाद एक बार फिर गहरा गया है। इसके कारण जेटेट नियमावली भी फंस गई है। बता दें कि जेटेट परीक्षा का इंतजार वर्षों से लाखों छात्र कर रहे हैं। वहीं जल्द लेने को लेकर सरकार पर झारखंड हाईकोर्ट का भी दबाव सरकार पर बना हुआ है।  2 मंत्रियों के विरोध से फंसा मामला झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी जेटेट की नियमावली को बीते बुधवार को कैबिनेट से पारित नहीं हो सका। जानकारी के अनुसार बैठक में वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर और ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने नियमावली में वर्ष 2012 के अनुरूप भाषाओं को शामिल करने की मांग की। पलामू में भोजपुरी व मगही और संताल परगना में अंगिका भाषा को शामिल करने की मांग की गई। दोनों मंत्री ने कैबिनेट में नियमावली में इन भाषाओं को शामिल करने की मांग रखी। इसके बाद नियमावली पर फैसला टाल दिया गया। अब इस पर आगे निर्णय लिया जाएगा।  अब जानिये क्या है पूरा मामला दरअसल, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली तैयार की गई है। नियमावली में जिलावार जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा का प्रावधान है। अभ्यर्थी के लिए इसमें से एक भाषा का चयन करना और  परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य है। परीक्षा की प्रक्रिया शुरू इधर, राज्य में झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कैबिनेट की स्वीकृति के उम्मीद में झारखंड एकेडमिक काउंसिल द्वारा परीक्षा के लिए विज्ञापन भी जारी किया गया है। परीक्षा के लिए 28 अप्रैल से आवेदन जमा लिया जाना है। 10 साल से नहीं हुई परीक्षा बताते चलें कि राज्य में 10 वर्षों से झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नहीं हुई है। राज्य में लगभग चार लाख से अधिक परीक्षार्थी परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में अगर 28 अप्रैल से पहले नियमावली को स्वीकृति नहीं मिली तो आवेदन जमा करने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाएगी।

Anjali Kumari अप्रैल 16, 2026 0
Jharkhand DA hike
झारखंड में राज्यकर्मियों का DA 5% बढ़ा

रांची। झारखंड सरकार ने राज्यकर्मियों के हित में बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने राज्यकर्मियों का महंगाई भत्ता 5 प्रतिशत बढ़ाने का फैसला किया है। झारखंड कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट सचिव वंदना दादेल ने बताया कि सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशन भोगियों के महंगाई भत्ते में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। इसके तहत इन सभी को 252 की जगह 257 प्रतिशत महंगाई भत्ता देय होगा। वहीं पांचवां वेतनमान के तहत वेतन और पेंशन लेने वालों के भी महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की गई है। इन्हें अब तक 466 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा था, जिसे बढ़ा कर 474 प्रतिशत कर दिया है।

Anjali Kumari अप्रैल 16, 2026 0
jharkhand illegal houses
झारखंड में अवैध मकान होंगे नियमित

रांची। झारखंड कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत राज्य में अवैध रूप से बने मकानों को नियमित करने निर्णय लिया गया है। नगर विकास विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए सरकार ने यह तय किया है कि रांची सहित पूरे राज्य में 10 मीटर ऊंचाई तक के आवासीय भवन, यानी जी प्लस टू तक के मकानों को नियमित किया जाएगा। यानी जिन मकानों का नक्शा नहीं है अब वे भी नियमित होंगे। इस योजना के तहत अधिकतम 300 वर्गमीटर क्षेत्रफल तक के भवन शामिल होंग नियमितीकरण के लिए शुल्क भी तय किया गया है। आवासीय भवनों के लिए न्यूनतम 10,000 रुपये और गैर-आवासीय भवनों के लिए 20,000 रुपये शुल्क रखा गया है। इस फैसले से हजारों मकान मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो अब तक कानूनी अड़चनों का सामना कर रहे थे।

Anjali Kumari अप्रैल 16, 2026 0
Hemant Soren
सीएम हेमंत बंगाल में ममता के समर्थन में करेंगे प्रचार

रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पश्चिम बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी यानी तृणमुल कांग्रेस के समर्थन में प्रचार करेंगे। वह 18 से 20 अप्रैल तक बंगाल दौरे पर रहेंगे, जहां वे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के समर्थन में ताबड़तोड़ चुनावी सभाएं करेंगे। उनकी सभी सभाएं आदिवासी बहुल क्षेत्रों में होंगी।  झामुमो के महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य के मुताबिक, यह दौरा तीन दिनों का होगा और इसमें कई महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया जाएगा।  पार्टी के अन्य नेता भी रहेंगे साथ हेमंत सोरेन खास तौर पर आदिवासी बहुल सीटों पर प्रचार करेंगे, जहां झामुमो का प्रभाव और पकड़ मजबूत है। इस दौरान उनके साथ पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहेंगे। कल्पना सोरेन के भी चुनाव प्रचार में शामिल होने की संभावना जताई गई है, हालांकि उनका कार्यक्रम अभी तय नहीं हुआ है। झामुमो नहीं लड़ रहा चुनाव झामुमो पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह बंगाल विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगा, बल्कि टीएमसी को समर्थन देगा। पार्टी का मानना है कि भाजपा को रोकने के लिए विपक्षी दलों के बीच एकजुटता जरूरी है। परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर केंद्र पर हमला झामुमो महासिचव सुप्रियो भट्टाचार्य ने संसद के विशेष सत्र और परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना कराए बिना परिसीमन और महिला आरक्षण लागू करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ अन्याय होगा।

Anjali Kumari अप्रैल 16, 2026 0
Jharkhand Weather
झारखंड में लू का अलर्ट, 3 से 5 डिग्री चढ़ेगा पारा

रांची। झारखंड में मौसम तेजी से बदल रहा है। तेज धूप अब झुलसाने लगी है। आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ेगी। अगले पांच दिनों में तापमान और बढ़ने की चेतवानी मौसम विभाग ने जारी की है। इसे देखते हुए राज्य के कई जिलों में लू को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।    17-18 अप्रैल को लू का असर अगले पांच दिनों में अधिकतम तापमान में तीन से पांच डिग्री सेल्सियस और बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए मौसम विभाग ने 17 और 18 अप्रैल को रांची, खूंटी, पश्चिम सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, लातेहार, पलामू, गढ़वा, चतरा और सरायकेला-खरसांवा में लू चलने की संभावना जताई है। झारखंड में 42 डिग्री सेल्सियस पार जाएगा पारा 17 अप्रैल को राज्य के उत्तर-पूर्वी भागों में आंशिक बादल छाए रहने के साथ कहीं-कहीं गर्जन के साथ बारिश होने की संभावना है। बाकी जगहों में भी कहीं-कहीं बादल छाए रह सकते हैं। 19 अप्रैल से आसमान साफ रहेगा और मौसम शुष्क बना रहेगा। इसके बाद पारा 42 डिग्री तक जा सकता है।  40 डिग्री पहुंचा पारा सरायकेला का अधिकतम तापमान मंगलवार को 40.6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। राज्य के अन्य जिलों का तापमान भी 40 डिग्री के आसपास पहुंच गया है। इससे पहले 4 अप्रैल को सरायकेला का तापमान 40.3 और मेदिनीनगर का तापमान 30 मार्च और 4 अप्रैल को 40.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।   राजधानी समेत अन्य जिलों का हाल रांची का अधिकतम तापमान 35.2 डिग्री सेल्सियस रहा। इसमें पिछले 24 घंटे में 0.4 डिग्री सेल्सियस की कमी दर्ज की गई, वहीं जमशेदपुर का अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस, मेदिनीनगर का 39.8 डिग्री सेल्सियस और बोकारो का 39.1 डिग्री सेल्सियस रहा। हजारीबाग का अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री सेल्सियस, गुमला का 35.5 डिग्री सेल्सियस और पाकुड़ का 37.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

Anjali Kumari अप्रैल 15, 2026 0
Supreme Court of India hearing Sabarimala case
सबरीमाला विवाद: “धर्म पर फैसला जज नहीं, संप्रदाय करेगा”– सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बड़ी बहस

केरल के Sabarimala Temple में महिलाओं के प्रवेश को लेकर Supreme Court of India में चल रही सुनवाई के दौरान मंगलवार को अहम संवैधानिक बहस देखने को मिली। त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील Abhishek Manu Singhvi ने दलील दी कि “किसी धर्म की प्रथा सही है या नहीं, यह तय करने का अधिकार उस संप्रदाय के पास होना चाहिए, न कि जजों के पास।” “धर्म समुदाय की आस्था से तय होगा” सिंघवी ने कोर्ट में कहा कि धर्म कोई व्यक्तिगत विचार नहीं, बल्कि एक समुदाय की साझा आस्था (System of Belief) है। उन्होंने जोर देकर कहा: किसी एक व्यक्ति के अधिकार को पूरे समुदाय की आस्था पर हावी नहीं होने दिया जा सकता धार्मिक प्रथाओं का मूल्यांकन उसी समुदाय के नजरिए से होना चाहिए कोर्ट को यह तय नहीं करना चाहिए कि कौन-सी प्रथा “सही” या “गलत” है उन्होंने यह भी कहा कि संविधान का अनुच्छेद 25 सभी धार्मिक प्रथाओं को संरक्षण देता है, चाहे वे “essential” (जरूरी) हों या नहीं। ‘Essential Practice Test’ पर सवाल सुनवाई के दौरान “Essential Religious Practices” (जरूरी धार्मिक प्रथाएं) के सिद्धांत पर भी बहस हुई। सिंघवी ने कहा कि: संविधान में “essential” शब्द का जिक्र नहीं है कोर्ट को सिर्फ यह देखना चाहिए कि कोई प्रथा धर्म से जुड़ी है या नहीं यह तय करना कि वह प्रथा कितनी जरूरी है, न्यायपालिका के दायरे से बाहर होना चाहिए वहीं, जजों ने सवाल उठाया कि अगर यह टेस्ट हटा दिया जाए, तो यह कैसे तय होगा कि कौन-सी प्रथा संवैधानिक संरक्षण के योग्य है। धार्मिक बनाम सेक्युलर गतिविधियों पर बहस सुनवाई के दौरान जस्टिसों ने यह अहम सवाल उठाया कि कौन-सी गतिविधि धार्मिक है और कौन-सी सेक्युलर (गैर-धार्मिक)। उदाहरण के तौर पर: पूजा के लिए सामग्री खरीदना श्रद्धालुओं के लिए बस की व्यवस्था करना सिंघवी ने जवाब दिया कि हर मामले को अलग-अलग परिस्थितियों में देखना होगा। उन्होंने कहा कि जहां धार्मिक आस्था जुड़ी हो, वहां हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए, लेकिन अगर उसमें भ्रष्टाचार या प्रशासनिक गड़बड़ी हो, तो राज्य दखल दे सकता है। पुजारियों की नियुक्ति पर भी चर्चा अर्चकों (पुजारियों) की नियुक्ति को लेकर भी कोर्ट में बहस हुई। सिंघवी ने कहा कि धार्मिक योग्यता जरूरी होनी चाहिए लेकिन केवल वंश या परंपरा के आधार पर नियुक्ति सही नहीं जजों ने इस पर टिप्पणी की कि नियुक्ति प्रक्रिया भले सेक्युलर हो, लेकिन नियुक्त व्यक्ति का कार्य धार्मिक होता है– इसलिए दोनों के बीच संतुलन जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के सामने बड़े सवाल यह मामला सिर्फ सबरीमाला तक सीमित नहीं है। संविधान पीठ कई बड़े मुद्दों पर फैसला करेगी, जैसे: सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री मस्जिदों में महिलाओं का प्रवेश पारसी महिलाओं का अग्नि मंदिर में प्रवेश दाऊदी बोहरा समुदाय में खतना प्रथा धार्मिक मामलों में जेंडर आधारित भेदभाव पिछले फैसले और मौजूदा स्थिति 1991 में केरल हाईकोर्ट ने 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगाई थी 2018 में Supreme Court of India ने इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए बैन हटा दिया अब पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 9 जजों की संविधान पीठ इन जटिल सवालों पर फैसला करेगी कोर्ट की अहम टिप्पणियां सुनवाई के दौरान जजों ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए: क्या कोर्ट तय कर सकता है कि क्या धार्मिक है और क्या नहीं? क्या किसी गैर-भक्त को धार्मिक परंपराओं को चुनौती देने का अधिकार है? क्या मंदिरों में प्रवेश रोकना समाज को बांटता है? जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी की कि धार्मिक स्थलों में प्रतिबंध समाज को विभाजित कर सकते हैं और इससे धर्म की व्यापकता प्रभावित हो सकती है। सबरीमाला मामला अब सिर्फ एक मंदिर या परंपरा का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह धार्मिक स्वतंत्रता, लैंगिक समानता और न्यायपालिका की सीमाओं जैसे बड़े संवैधानिक सवालों का केंद्र बन चुका है। Supreme Court of India का आने वाला फैसला न सिर्फ इस मामले की दिशा तय करेगा, बल्कि देश में धर्म और संविधान के बीच संतुलन की नई परिभाषा भी तय कर सकता है।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Raped in Ranchi
Raped in Ranchi: रांची में पार्टी के दौरान मेडिकल छात्रा से दुष्कर्म

रांची। झारखंड की राजधानी रांची में एक मेडिकल छात्रा के साथ दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। यह घटना 9 अप्रैल की रात एक अपार्टमेंट में हुई, जहां पीड़िता को जन्मदिन की पार्टी के लिए बुलाया गया था। आरोप है कि पार्टी के दौरान उसे खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर दिया गया, जिससे वह अर्धबेहोशी की हालत में चली गई।   पिज्जा में नशा देकर दिया गया वारदात को अंजाम पीड़िता के बयान के अनुसार, केक काटने के बाद उसे पिज्जा दिया गया, जिसे खाने के बाद उसे नशे जैसा महसूस होने लगा। इसके बाद वह एक कमरे में आराम करने चली गई। इसी दौरान आरोपी दानिश ने उसकी हालत का फायदा उठाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने बताया कि नशे की वजह से वह विरोध करने में असमर्थ थी।   सुबह खून से लथपथ मिली पीड़िता पीड़िता ने एफआईआर में बताया कि सुबह जब उसे होश आया तो वह खून से लथपथ हालत में थी। घटना के बाद पार्टी में मौजूद एक अन्य व्यक्ति ने उसे समझाकर हॉस्टल भेज दिया। वहां उसकी तबीयत और बिगड़ गई, जिसके बाद उसकी सहेली ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया और पुलिस को सूचना दी।   एफआईआर दर्ज, आरोपी गिरफ्तार होने की सूचना लालपुर थाना पुलिस ने पीड़िता के फर्द बयान के आधार पर केस दर्ज कर लिया है। मामला केस नंबर 66/26 के तहत दर्ज हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी दानिश को पश्चिम बंगाल के खड़गपुर से गिरफ्तार किए जाने की सूचना है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।   पुलिस जांच जारी पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और अन्य आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। यह घटना शहर में सुरक्षा व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

Anjali Kumari अप्रैल 14, 2026 0
Ranchi Education Department
रांची शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला: बिना PEN नंबर भी होगा छात्रों का नामांकन

रांची। रांची में झारखंड शिक्षा परियोजना ने एक अहम निर्देश जारी किया है कि अब किसी भी छात्र का नामांकन केवल PEN (Permanent Education Number) न होने की वजह से नहीं रोका जाएगा। यह आदेश सत्र 2026-27 के नामांकन प्रक्रिया को लेकर जारी किया गया है, जिसमें सभी सरकारी और निजी स्कूलों को सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला शिक्षा पदाधिकारी सह जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने सभी विद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि जिन विद्यार्थियों का PEN नंबर अभी तक जनरेट नहीं हुआ है, उनका भी नामांकन बिना किसी बाधा के स्वीकार किया जाए। कई मामलों में छात्रों का पिछला नामांकन गैर-मान्यता प्राप्त या बिना UDISE कोड वाले स्कूलों में हुआ था, जिसके कारण उनका PEN नंबर नहीं बन सका है, जिससे नई स्कूलों में दाखिले को लेकर परेशानी उत्पन्न हो रही थी।   शिक्षा विभाग ने क्या कहा?   शिक्षा विभाग ने इस स्थिति को देखते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी छात्र का भविष्य प्रशासनिक तकनीकी कारणों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। आदेश के अनुसार, जैसे ही UDISE PLUS पोर्टल सत्र 2026-27 के लिए सक्रिय होगा, सभी ऐसे छात्रों का PEN नंबर स्कूल या जिला स्तर पर जनरेट कर दिया जाएगा।फिलहाल नामांकन प्रक्रिया को सुचारु रखने के लिए सभी स्कूलों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि किसी भी छात्र को रोका न जाए। साथ ही अभिभावकों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने पूर्व विद्यालय से इस बात का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करें कि संबंधित छात्र का PEN नंबर पहले से जनरेट नहीं हुआ था। यह आदेश ज्ञापांक 552, दिनांक 13 अप्रैल 2026 के तहत जारी किया गया है। शिक्षा विभाग के इस कदम से स्पष्ट संकेत मिलता है कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है और किसी भी तकनीकी या प्रशासनिक बाधा के कारण नामांकन प्रक्रिया बाधित नहीं होने दी जाएगी।

Anjali Kumari अप्रैल 14, 2026 0
Jharkhand railway development
Jharkhand railway development

रांची । झारखंड के रेल यात्रियों के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। राज्य के मुरी-चांडिल रेलखंड पर जल्द ही ट्रेनों की लेटलतीफी बीते जमाने की बात हो जाएगी। रेलवे बोर्ड की ओर से इस महत्वपूर्ण रूट के दोहरीकरण (Double Line) को बहुत जल्द हरी झंडी मिलने की उम्मीद है। लगभग 800 करोड़ रुपये की इस महापरियोजना के धरातल पर उतरने से न केवल यात्रियों का सफर सुगम होगा, बल्कि क्षेत्र के औद्योगिक और व्यापारिक विकास को भी एक नई दिशा मिलेगी। यह परियोजना राज्य की यातायात व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।   68 किलोमीटर लंबे रेलखंड का होगा कायाकल्प दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) के जेडआरयूसीसी सदस्य अरुण जोशी ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। उन्होंने बताया कि मुरी से चांडिल तक का यह पूरा रेलखंड करीब 68 किलोमीटर लंबा है। वर्तमान में यहां सिंगल लाइन होने की वजह से ट्रेनों के परिचालन में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अक्सर क्रॉसिंग के चक्कर में ट्रेनों को बाहरी स्टेशनों पर घंटों खड़ा रहना पड़ता है, जिससे यात्रियों के समय की भारी बर्बादी होती है। इस दोहरीकरण परियोजना पर 800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान लगाया गया है, जिससे रेल नेटवर्क की क्षमता और सुरक्षा दोनों में भारी इजाफा होगा।   सिल्ली बाईपास और रेल ओवर रेल लाइन की विशेष सुविधा इस प्रोजेक्ट की खास बात केवल पटरियों का दोहरीकरण नहीं है, बल्कि इसमें कई आधुनिक तकनीकी सुधार भी शामिल किए गए हैं। परियोजना के अंतर्गत सिल्ली में एक विशेष बाईपास लाइन का निर्माण किया जाएगा, जो ट्रेनों की आवाजाही को और अधिक रफ्तार प्रदान करेगी। इसके अतिरिक्त, गुंडा विहार से चांडिल तक एक विशेष 'रेल ओवर रेल' लाइन बनाने की योजना पर भी तेजी से काम चल रहा है। इन तकनीकी बदलावों से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के बीच के दबाव को संतुलित करना आसान हो जाएगा, जिससे इस रूट पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह व्यवस्थित और सुगम हो जाएगी।   सांसद प्रदीप वर्मा की सक्रियता और फंड आवंटन की उम्मीद इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को रफ्तार देने में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी अहम भूमिका रही है। राज्यसभा सांसद प्रदीप वर्मा ने हाल ही में रेल मंत्री को पत्र लिखकर इस रूट की महत्ता बताई थी और इसके लिए विशेष बजट आवंटित करने की पुरजोर मांग की थी। सांसद की इस पहल के बाद रेल मंत्रालय में हलचल तेज हुई है। अधिकारियों का मानना है कि इसी अप्रैल माह के भीतर इस परियोजना को अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति मिल सकती है और आवश्यक फंड भी जारी कर दिया जाएगा। अरुण जोशी के अनुसार, यह प्रोजेक्ट झारखंड के आर्थिक ढांचे को मजबूती प्रदान करने के लिए मील का पत्थर साबित होगा।   औद्योगिक विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मिलेगा बल यह दोहरीकरण परियोजना झारखंड के लिए भविष्य में 'गेम चेंजर' साबित हो सकती है। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से जमशेदपुर और रांची के बीच का सफर न केवल कम समय में पूरा होगा, बल्कि स्थानीय उद्योगों के लिए माल ढुलाई भी काफी सस्ती और तेज हो जाएगी। वर्तमान में सिंगल लाइन की वजह से जो मालगाड़ियां घंटों फंसी रहती थीं, उन्हें अब क्लियर रास्ता मिलेगा। रेलवे के इस कदम से न केवल रेल यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि राज्य के समग्र आर्थिक और व्यावसायिक विकास में भी तेजी आने की प्रबल संभावना है।

Anjali Kumari अप्रैल 13, 2026 0
Jharkhand recruitment scam
झारखंड भर्ती घोटाला: पेपर लीक में 164 गिरफ्तार

रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित आबकारी सिपाही भर्ती प्रतियोगी परीक्षा 2023 में धांधली का एक बड़ा मामला सामने आया है। पेपर लीक होने के पुख्ता इनपुट के आधार पर पुलिस और प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रविवार को कुल 164 लोगों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए लोगों में 159 परीक्षार्थी शामिल हैं, जबकि 5 अन्य व्यक्ति उस अंतरराज्यीय सॉल्वर गैंग के सदस्य बताए जा रहे हैं जो प्रतियोगी परीक्षाओं में सेंध लगाने के लिए कुख्यात है। इस घटना के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है और विपक्षी दल भाजपा ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।   तमाड़ के रड़गांव में चल रही थी 'सेटिंग', गुप्त सूचना पर पुलिस की दबिश जेएसएससी (JSSC) के अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि रांची एसएसपी को तमाड़ थाना क्षेत्र के रड़गांव में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी। गुप्त जानकारी के अनुसार, वहां एक निजी इमारत में भारी संख्या में छात्र जमा हुए थे। पुलिस ने जब वहां छापेमारी की, तो मौके से 159 छात्रों को पकड़ा गया। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि इन अभ्यर्थियों को प्रश्न पत्रों के चार अलग-अलग सेट दिए गए थे। गिरोह का दावा था कि यही प्रश्न वास्तविक परीक्षा में पूछे जाएंगे। हालांकि, पुलिस द्वारा जब्त किए गए डिजिटल और प्रिंटेड प्रश्न पत्रों का मिलान जब मुख्य परीक्षा के पेपर से किया गया, तो वे पूरी तरह समान नहीं पाए गए।   10 से 15 लाख रुपये में हुआ सौदा, अभ्यर्थियों के चेक और मोबाइल जब्त पूछताछ और शुरुआती तफ्तीश में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। गिरोह के एजेंटों ने प्रत्येक उम्मीदवार से 10 से 15 लाख रुपये में परीक्षा पास कराने का सौदा किया था। पुलिस से बचने के लिए शातिर अपराधियों ने अभ्यर्थियों के मोबाइल फोन और ओरिजिनल एडमिट कार्ड अपने पास रख लिए थे। गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों में से एक बिहार के जहानाबाद का निवासी है। जांच में पता चला है कि यह आरोपी पहले भी राजस्थान क्लर्क भर्ती, NEET, बिहार स्वास्थ्य अधिकारी भर्ती और उत्तर प्रदेश की आरओ/एआरओ (RO/ARO) परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों में संलिप्त रहा है। पुलिस ने मौके से कई बैंक चेक भी बरामद किए हैं, जो अभ्यर्थियों ने गिरोह के सदस्यों के नाम जारी किए थे।   भड़की भाजपा, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन और दोबारा परीक्षा की मांग इस पेपर लीक कांड के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश सरकार पर हमला तेज कर दिया है। भाजपा की रांची महानगर सहित पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम इकाइयों ने राज्य के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला फूंका। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्तमान शासन में कोई भी परीक्षा पारदर्शी तरीके से संपन्न नहीं हो पा रही है। भाजपा ने इस धांधली को देखते हुए आबकारी सिपाही भर्ती परीक्षा को रद्द कर इसे नए सिरे से आयोजित करने की मांग की है। फिलहाल पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है।

Anjali Kumari अप्रैल 13, 2026 0
Sido Kanhu martyrs tribute
"जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संघर्ष हमारी प्रेरणा": मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शहीद सिदो-कान्हू को दी श्रद्धांजलि

रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के महान क्रांतिकारी वीर शहीद सिदो-कान्हू की जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। राजधानी रांची के मोरहाबादी स्थित सिदो-कान्हू उद्यान में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने वीर शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वाले इन सपूतों के योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि झारखंड की मिट्टी वीरों की भूमि रही है और यहां के महापुरुषों का संघर्ष आज भी समाज को नई ऊर्जा प्रदान करता है।   आदिवासियों और मूलवासियों के हक की ऐतिहासिक लड़ाई श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड का इतिहास संघर्षों की गाथाओं से भरा हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य के आदिवासी एवं मूलवासी समाज ने अपने अधिकारों और अपनी पहचान के लिए उस दौर में बिगुल फूंका था, जब पूरे देश में आजादी की चेतना भी व्यापक रूप से जागृत नहीं हुई थी। मुख्यमंत्री के अनुसार, जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए हमारे पूर्वजों ने जो बलिदान दिए हैं, वे अद्वितीय हैं। उन्होंने बताया कि सिदो-कान्हू जैसे नायकों ने समाज को एकजुट कर अन्याय के खिलाफ खड़ा होना सिखाया, जिसका परिणाम है कि आज झारखंड अपनी विशिष्ट पहचान के साथ देश के मानचित्र पर मजबूती से खड़ा है।   अन्याय और शोषण के विरुद्ध साहस का प्रतीक मुख्यमंत्री ने सिदो-कान्हू के नेतृत्व में हुए विद्रोह की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन वीर भाइयों ने ब्रिटिश हुकूमत और तत्कालीन दमनकारी व्यवस्था के खिलाफ ऐतिहासिक बिगुल फूंका था। उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष केवल सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि शोषण और अत्याचार को जड़ से खत्म करने के लिए था। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सिदो-कान्हू द्वारा दिखाया गया साहस और स्वाभिमान का मार्ग आज के युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। उनका व्यक्तित्व हमें यह सीख देता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी अपने हक के लिए कैसे डटा रहा जाता है। सरकार इन महापुरुषों के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।   राष्ट्रीय स्तर पर अमिट पहचान और गौरवशाली विरासत कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि सिदो-कान्हू की शहादत और उनकी जयंती का दिन भारत के इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने रेखांकित किया कि आज केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि समूचे देश में लोग इन महान क्रांतिकारियों की जन्मस्थली, प्रतिमाओं और शहादत स्थलों पर जाकर अपना सम्मान प्रकट कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे वीर सपूतों पर पूरे राष्ट्र को गर्व है जिन्होंने समाज को एक नई दिशा देने का कार्य किया। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारी भावी पीढ़ियों को इन महापुरुषों के पदचिन्हों पर चलकर समाज के कल्याण और विकास में अपना योगदान देना चाहिए।   झारखंड के सपूतों के सपनों का राज्य बनाने का संकल्प समापन के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों का आह्वान किया कि वे शहीदों के सपनों का झारखंड बनाने के संकल्प को दोहराएं। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है और इसमें आदिवासियों-मूलवासियों के हितों को सर्वोपरि रखा गया है। माल्यार्पण कार्यक्रम में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी शहीदों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने अंत में दोहराया कि सिदो-कान्हू जैसे महापुरुषों की विरासत ही झारखंड की असली ताकत है और उनकी शिक्षाएं हमेशा राज्य के विकास की नीति का आधार बनी रहेंगी। इस अवसर पर भारी संख्या में लोग मोरहाबादी मैदान पहुंचे थे, जहां सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखी गई थीं।

Anjali Kumari अप्रैल 11, 2026 0
Jharkhand treasury scam
झारखंड में बड़ा ट्रेजरी घोटाला: पुलिसकर्मियों के 12 साल के वेतन भुगतान की होगी जांच, सरकार ने दिए सख्त आदेश

रांची। झारखंड के पुलिस महकमे में वेतन निकासी के नाम पर करोड़ों रुपये के संभावित फर्जीवाड़े को लेकर राज्य सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा अभियान छेड़ने का निर्णय लिया है। बोकारो और हजारीबाग जैसे जिलों के ट्रेजरी (कोषागार) से अवैध तरीके से पैसे निकालने के मामले उजागर होने के बाद, प्रशासन ने अब पूरे प्रदेश में पुलिसकर्मियों के वेतन भुगतान की फाइलों को खंगालने का निर्देश दिया है। इस व्यापक जांच के दायरे में पिछले 12 वर्षों का रिकॉर्ड शामिल किया गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सिस्टम में कहां और किस स्तर पर सेंधमारी की गई है।   राज्यव्यापी ऑडिट और 12 वर्षों के रिकॉर्ड का मिलान वित्त विभाग और पुलिस मुख्यालय के समन्वय से शुरू होने वाली इस जांच का मुख्य केंद्र बिंदु यह पता लगाना है कि कहीं कागजी पुलिसकर्मियों के नाम पर वेतन की निकासी तो नहीं की जा रही थी। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी जिलों और विभिन्न पुलिस इकाइयों में तैनात रहे कर्मियों के वेतन डेटा का मिलान करें। जांच दल वर्ष 2014 से लेकर अब तक के सभी वित्तीय लेन-देन, आवंटित बजट और वास्तविक भुगतान की कड़ियों को जोड़ेगा।   प्रारंभिक रिपोर्टों में कुछ विशेष क्षेत्रों में गंभीर विसंगतियां पाई गई हैं, जिसके बाद यह तय किया गया कि केवल वर्तमान भुगतान प्रक्रिया की जांच पर्याप्त नहीं होगी। अधिकारियों के अनुसार, पिछले एक दशक से अधिक समय के दस्तावेजों को खंगालने से इस सिंडिकेट की कार्यप्रणाली और इसमें शामिल रसूखदारों का चेहरा सामने आ सकेगा।   डीडीओ की भूमिका और बैंक खातों का होगा सूक्ष्म सत्यापन इस पूरे घोटाले की पड़ताल के लिए आहरण एवं वितरण अधिकारियों (DDO) की भूमिका की विशेष रूप से समीक्षा की जाएगी। विभाग का मानना है कि बिना उच्चाधिकारियों या संबंधित बाबू की मिलीभगत के ट्रेजरी से अवैध निकासी संभव नहीं है। जांच के दौरान वेतन बिलों की स्वीकृति प्रक्रिया, पासिंग सिस्टम और सबसे महत्वपूर्ण बात—उन बैंक खातों की जांच होगी जिनमें पैसा ट्रांसफर किया गया है। जांच के दौरान उन कर्मियों के सेवा अभिलेखों (Service Records) का भी भौतिक सत्यापन किया जाएगा जिनके नाम पर भारी-भरकम राशि का भुगतान हुआ है। यह देखा जाएगा कि क्या संबंधित कर्मी उस अवधि में वाकई उस जिले या यूनिट में तैनात थे या केवल फाइलों में उनका नाम चल रहा था। यदि किसी भी स्तर पर दस्तावेजों में विसंगति या संदिग्ध लेन-देन पाया जाता है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब-तलब कर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी।   पारदर्शिता बहाल करने और सिंडिकेट को ध्वस्त करने की तैयारी सरकार के इस कदम का प्राथमिक उद्देश्य सरकारी खजाने की लूट को रोकना और भविष्य के लिए भुगतान प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित बनाना है। वित्त मंत्रालय को संदेह है कि इस फर्जीवाड़े के पीछे एक संगठित सिंडिकेट काम कर रहा है, जो तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर वर्षों से सक्रिय है। बोकारो में वित्त विभाग की टीम पहले ही डेरा डाल चुकी है और वहां मिले सुरागों के आधार पर ही राज्यव्यापी जांच का खाका तैयार किया गया है।   विभागीय अधिकारियों ने सभी जिलों से एक निश्चित समय सीमा के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है। इस रिपोर्ट के आधार पर न केवल दोषियों पर एफआईआर दर्ज की जाएगी, बल्कि राज्य की ट्रेजरी प्रणाली में बड़े सुधारात्मक बदलाव भी किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि जनता की गाढ़ी कमाई का एक-एक पैसा सही हकदार तक पहुंचे और भ्रष्टाचार की हर गुंजाइश को जड़ से खत्म किया जा सके।

Anjali Kumari अप्रैल 11, 2026 0
LRDC report controversy
जमीन विवाद में रांची LRDC की रिपोर्ट पर भड़का हाईकोर्ट, 27 अप्रैल को अधिकारी की सशरीर पेशी का आदेश

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने राजधानी के हरमू क्षेत्र में स्थित एक विवादित भूखंड के मामले में प्रशासनिक ढुलमुल रवैये पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की पीठ ने रांची के भूमि सुधार उप समाहर्ता (LRDC) द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट को बेहद गंभीरता से लिया है। न्यायालय ने इस मामले में स्पष्टता की कमी और विरोधाभासों को देखते हुए एलआरडीसी को आगामी 27 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने का निर्देश जारी किया है। यह मामला सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली और भूमि विवादों के निपटारे में होने वाली विसंगतियों को उजागर करता है।   जमीन की पहचान न होने के दावे पर अदालत की नाराजगी अदालत की इस तल्ख टिप्पणी और समन के पीछे एलआरडीसी द्वारा दाखिल किया गया वह शपथ पत्र है, जिसमें उन्होंने विवादित जमीन को चिन्हित करने में असमर्थता जताई थी। दरअसल, पूर्व की सुनवाई में हाईकोर्ट ने रांची उपायुक्त (DC) को निर्देश दिया था कि वे विवादित जमीन की उचित नापी करवाकर विस्तृत रिपोर्ट सौंपें। इस निर्देश के अनुपालन में एलआरडीसी ने हलफनामा दायर कर कोर्ट को बताया कि जमीन कहां स्थित है, इसका 'आइडेंटिफिकेशन' या पहचान नहीं की जा सकती। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करने के बजाय अधिकारी को खुद पेश होकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।   पुलिस और अंचल अधिकारी पर मिलीभगत के गंभीर आरोप यह पूरा विवाद साकेत नगर, ग्राम अरगोड़ा (वार्ड नंबर 25) स्थित 6.25 डिसमिल जमीन से जुड़ा है। प्रार्थी जितेश कुमार सोनी और नितेश कुमार सोनी ने हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट दाखिल कर आरोप लगाया है कि अरगोड़ा के अंचल अधिकारी (CO) और स्थानीय पुलिस ने प्रतिवादी महेंद्र सोनी एवं अमित कुमार के साथ सांठगांठ की है। याचिका के अनुसार, इस मिलीभगत के जरिए न केवल प्रार्थियों की जमीन का म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) रद्द कर दिया गया, बल्कि बलपूर्वक प्रतिवादियों को उस भूमि पर कब्जा भी दिलवा दिया गया। प्रार्थियों का तर्क है कि दोनों पक्षों की जमीन की चौहद्दी पूरी तरह अलग है, फिर भी उनके हक को दबाने की कोशिश की जा रही है।   जांच अधिकारी बदलते ही बदल गई पुलिस की रिपोर्ट मामले में पुलिसिया जांच के तरीके पर भी सवाल उठाए गए हैं। जानकारी के अनुसार, फरवरी 2023 में इस जमीन को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अरगोड़ा थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। प्रारंभिक जांच में अनुसंधानकर्ता ने प्रतिवादी महेंद्र सोनी और अमित कुमार के दावों को झूठा करार देते हुए अदालत में फाइनल फॉर्म दाखिल कर दिया था। हालांकि, बाद में अनुसंधान अधिकारी (IO) के बदलते ही मामला फिर से खुल गया। नए सिरे से हुई जांच में पुलिस ने प्रतिवादियों के पक्ष में रिपोर्ट दी, जिसके आधार पर अंचल कार्यालय ने प्रार्थियों का म्यूटेशन निरस्त कर दिया। इसी निर्णय को अब हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।   न्याय की उम्मीद और प्रशासनिक जवाबदेही हाईकोर्ट द्वारा अधिकारी को तलब किए जाने के बाद अब सबकी निगाहें 27 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी हैं। प्रार्थियों का कहना है कि वे अपनी वैध खरीदी गई जमीन के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, जबकि सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। कोर्ट के इस सख्त रुख से उम्मीद जताई जा रही है कि जमीन विवादों में राजस्व अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और निष्पक्ष जांच के जरिए वास्तविक भू-स्वामी को उसका हक मिल सकेगा। यह आदेश उन अधिकारियों के लिए भी एक चेतावनी है जो रिपोर्टों में अस्पष्टता रखकर मामलों को लटकाने का प्रयास करते हैं।

Anjali Kumari अप्रैल 11, 2026 0
Murder case bail rejected
प्रेम प्रसंग में हत्या के आरोपी को राहत नहीं, कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की

रांची। तमाड़ थाना क्षेत्र में हुई महिला की हत्या के मामले में आरोपी मांगा मुंडा को फिलहाल राहत नहीं मिली है। अपर न्याययुक्त संजीव झा की अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे जेल में ही रखने का फैसला सुनाया।   प्रेम संबंध बना विवाद की वजह मामले की पृष्ठभूमि में पारिवारिक असहमति और प्रेम संबंध का विवाद सामने आया है। नावाडीह निवासी जम्बी कुमारी का अपने ही रिश्तेदार मांगा मुंडा के साथ संबंध था, जिसे लेकर परिवार सहमत नहीं था। इसी को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता गया।   पहले पति की मौत, फिर मायके में रह रही थी युवती जानकारी के अनुसार, जम्बी कुमारी की शादी खूंटी जिले के टोटवादा निवासी लाचू पाहन से हुई थी, लेकिन शादी के कुछ ही समय बाद सड़क दुर्घटना में पति की मौत हो गई। इसके बाद वह मायके में रहने लगी थी, जहां से यह पूरा घटनाक्रम शुरू हुआ।   शादी के लिए दबाव और धमकी का आरोप परिवार के विरोध के बावजूद आरोपी मांगा मुंडा शादी के लिए दबाव बना रहा था। प्राथमिकी के मुताबिक, उसने युवती और उसकी मां को जान से मारने की धमकी भी दी थी।   रात में घर पहुंचकर की वारदात घटना 16 जनवरी 2026 की रात की है, जब परिवार के लोग घर में सो रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान मांगा मुंडा घर पहुंचा और युवती की मां पर कुल्हाड़ी से हमला कर उसकी हत्या कर दी।   मामला दर्ज, जांच जारी इस संबंध में तमाड़ थाना में कांड संख्या 6/2026 दर्ज किया गया था। पुलिस मामले की जांच कर रही है, जबकि अदालत ने आरोपी को फिलहाल जमानत देने से इनकार कर दिया है।

Anjali Kumari अप्रैल 11, 2026 0
Jharkhand stalled projects
झारखंड में करोड़ों की योजनाएं ठप, बजट होने के बावजूद खर्च नहीं

रांची। झारखंड में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान किसानों और ग्रामीण विकास के लिए बनाई गई कई महत्वाकांक्षी योजनाएं जमीन पर उतर ही नहीं सकीं। कृषि, पशुपालन और सहकारिता विभाग की करीब डेढ़ दर्जन योजनाएं फाइलों में ही अटकी रह गईं। इन योजनाओं के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, लेकिन कई योजनाओं पर एक रुपया तक खर्च नहीं हुआ।   कृषि योजनाओं में दिखी बड़ी लापरवाही कृषि, उद्यान एवं भूमि संरक्षण विभाग की कई अहम योजनाएं पूरी तरह ठप रहीं। पोस्ट हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट योजना के लिए 7 करोड़ रुपये, बीज एवं रोपण सामग्री योजना के लिए 12.05 करोड़ रुपये और परंपरागत कृषि विकास योजना के लिए 17.35 करोड़ रुपये तय किए गए थे, लेकिन इन पर कोई खर्च नहीं हुआ। इससे किसानों को मिलने वाली सुविधाएं प्रभावित हुईं।   पशुपालन और डेयरी योजनाएं भी ठप पशुपालन विभाग की कई योजनाएं भी फाइलों से बाहर नहीं निकल सकीं। अंडा उत्पादन, नस्ल सुधार, दूध उत्पादन प्रोत्साहन और राष्ट्रीय पशुधन मिशन जैसी योजनाओं के लिए बड़े बजट का प्रावधान था, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ। 130 करोड़ रुपये की अंडा उत्पादन योजना और 82.66 करोड़ रुपये की दूध प्रोत्साहन योजना भी अधर में लटकी रहीं।   एग्री एक्सपोर्ट और बांस मिशन भी प्रभावित किसानों के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने वाली एग्री एक्सपोर्ट योजना भी शुरू नहीं हो सकी। इसके अलावा राष्ट्रीय बांस मिशन और कृषि मशीनीकरण जैसी योजनाएं भी फंड के अभाव में ठप रहीं।   विभागीय खर्च में असमानता हालांकि कुछ विभागों ने बेहतर प्रदर्शन किया। सहकारिता विभाग ने 96.5 प्रतिशत, डेयरी विभाग ने 95 प्रतिशत और फिशरी विभाग ने 89 प्रतिशत बजट खर्च किया। वहीं कृषि विभाग 70 प्रतिशत और भूमि संरक्षण निदेशालय 65 प्रतिशत खर्च ही कर सका।   विकास पर पड़ा असर इन योजनाओं के लागू न होने से किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास के लक्ष्य प्रभावित हुए हैं। यह स्थिति सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

Anjali Kumari अप्रैल 10, 2026 0
Sukhdevnagar demolition case
सुखदेवनगर में बुलडोजर एक्शन पर हाईकोर्ट की सख्ती, CO से मांगा जवाब

रांची। Jharkhand High Court ने रांची के सुखदेवनगर अतिक्रमण हटाव मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन से जवाब तलब किया है। महादेव उरांव की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने हेहल के सर्किल ऑफिसर (CO) की कार्रवाई पर सवाल उठाया कि कब्जा हटाने के बजाय निर्माण को क्यों ध्वस्त किया गया। इस पर अदालत ने नाराजगी जाहिर की।   सीओ की ओर से कोर्ट में सफाई हेहल अंचल के सर्किल ऑफिसर की ओर से कोर्ट में शो-कॉज दाखिल किया गया। इसमें कहा गया कि संबंधित पक्षों को तीन बार नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उन्होंने जमीन से जुड़े जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए। इसके बाद नियमों के तहत निर्माण को हटाने की कार्रवाई की गई। प्रशासन का कहना है कि यह कदम प्रक्रिया का पालन करते हुए उठाया गया।   प्रार्थी से भी कोर्ट के तीखे सवाल सुनवाई के दौरान अदालत ने केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि प्रार्थी से भी जवाब मांगा। कोर्ट ने पूछा कि रिट याचिका दाखिल करते समय हस्तक्षेपकर्ताओं के साथ हुए समझौते और पैसों के लेन-देन की जानकारी क्यों छुपाई गई। इस पर प्रार्थी को विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया गया है।   हस्तक्षेपकर्ताओं को मिली राहत बरकरार कोर्ट ने हस्तक्षेपकर्ताओं की याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें मामले में प्रतिवादी बना लिया है। साथ ही पहले से दी गई अंतरिम राहत को अगले आदेश तक बरकरार रखा गया है। इसका मतलब है कि फिलहाल उनके खिलाफ कोई नई कार्रवाई नहीं की जाएगी।   8 मई को अगली सुनवाई यह मामला रांची के सुखदेवनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से जुड़ा है। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 8 मई तय की है। अब इस मामले में प्रशासन और प्रार्थी दोनों के जवाब के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

Anjali Kumari अप्रैल 10, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Ranchi University protest
शिक्षा

लेट सेशन के खिलाफ रांची यूनिवर्सिटी में छात्रों का प्रदर्शन

Anjali Kumari अप्रैल 13, 2026 0