Ranchi News

Jharkhand PSC controversy
जेपीएससी की विवादित परीक्षाकी सीबीआई जांच एवं पूरी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो: आजसू

आज दिनांक 6/7/2026 को अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू ) के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता लगातार गंभीर सवालों के घेरे में है। जेपीएससी की हालिया प्रतियोगी परीक्षाओं एवं उनके परिणामों ने लाखों अभ्यर्थियों के मन में गहरा अविश्वास पैदा किया है। वर्तमान परिस्थितियों में जेपीएससी योग्यता और निष्पक्ष चयन का माध्यम बनने के बजाय अव्यवस्था, अपारदर्शिता और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का प्रतीक बनता जा रहा है। हालिया सिविल सेवा परीक्षा में 103 पदों के विरुद्ध 2204 अभ्यर्थियों को सफल घोषित कर दिया गया, लेकिन आज तक कटऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए गए। इतना ही नहीं, मेरिट सूची पर आयोग के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर तक नहीं होने से पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। इसी प्रकार बैकलॉग पीटी परीक्षा में 832 अभ्यर्थियों का रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं होने से पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई है। यह कोई सामान्य प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य के साथ किया जा रहा गंभीर अन्याय है। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाएं अब प्रतिभा की नहीं, बल्कि अनिश्चितता, भ्रम और मानसिक प्रताड़ना की परीक्षा बन गई हैं। वर्षों तक परीक्षाएं आयोजित नहीं होतीं और जब परिणाम आते हैं तो वे विवादों में घिर जाते हैं। कभी मॉडल उत्तर-पुस्तिका पर सवाल उठते हैं, कभी कटऑफ सार्वजनिक नहीं किया जाता, कभी मेरिट सूची पर आवश्यक हस्ताक्षर नहीं होते और कभी सैकड़ों अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड ही संदिग्ध हो जाते हैं। ओएमआर शीट के मूल्यांकन में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जिनमें किसी अभ्यर्थी को प्रथम प्रश्नपत्र में 100 में से 48 अंक प्राप्त हुए, जबकि सफल होने के लिए दूसरे प्रश्नपत्र में 100 में से 97 अंक प्राप्त करना आवश्यक हो जाता है। परीक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति अत्यंत असामान्य और संदेहास्पद है। इससे पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं।इन परिस्थितियों को देखते हुए आजसू माँग करती है कि  जेपीएससी की हालिया पीटी पूरी परीक्षा प्रक्रिया एवं हालिया विवादित परिणामों की सीबीआई जांच कराई जाए। सभी परीक्षाओं के कटऑफ, मेरिट निर्धारण की प्रक्रिया, मूल्यांकन प्रणाली एवं ओएमआर मूल्यांकन का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाए। राज्य के सभी प्रतियोगी छात्रों से अपील है कि यह संघर्ष किसी एक परीक्षा या एक बैच का नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य और उनके अधिकारों का प्रश्न है। सभी छात्र लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं। अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू)  प्रत्येक उस छात्र के साथ मजबूती से खड़ी है, जिसके भविष्य के साथ सरकार और जेपीएससी द्वारा अन्याय किया गया है। आजसू  युवाओं के अधिकार, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और निष्पक्ष चयन सुनिश्चित कराने के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
Khelgaon Shooting Range
खेलगांव शूटिंग रेंज पहुंचे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, खिलाड़ियों से मिले

रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को रांची के खेलगांव स्थित टिकैत उमराव सिंह शूटिंग रेंज का औचक निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और प्रशिक्षण के लिए उपलब्ध सुविधाओं, उपकरणों तथा सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान शूटिंग रेंज की जर्जर आधारभूत संरचना और खराब उपकरणों पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई तथा अधिकारियों को समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर रेंज का आधुनिकीकरण करने के निर्देश दिए।   मुख्यमंत्री ने 10 मीटर, 25 मीटर और 50 मीटर शूटिंग रेंज का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रशिक्षण व्यवस्था, आधुनिक तकनीकी उपकरणों, सुरक्षा मानकों और खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने कहा कि झारखंड खेल प्रतिभाओं की भूमि है और राज्य के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और आधुनिक खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना है।   निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री  निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को शूटिंग रेंज में आधुनिक उपकरण लगाने, खराब संसाधनों की मरम्मत, फायर सेफ्टी व्यवस्था मजबूत करने, नियमित मॉक ड्रिल कराने और सीसीटीवी निगरानी प्रणाली को दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वयं शूटिंग राइफल से निशाना भी साधा और खिलाड़ियों से प्रशिक्षण के दौरान आने वाली कठिनाइयों के बारे में विस्तार से जानकारी ली।   मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को बेहतर अवसर और संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में झारखंड का नाम रोशन कर सकें।   क्या है मामला? गौरतलब है कि हाल ही में आयोजित रांची जिला शूटिंग चैंपियनशिप के दौरान शूटिंग रेंज की बदहाल स्थिति को लेकर खिलाड़ियों ने शिकायत की थी। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के खराब होने और आधुनिक सुविधाओं की कमी से अभ्यास प्रभावित हो रहा था। मुख्यमंत्री के निरीक्षण के बाद खिलाड़ियों को उम्मीद है कि लंबे समय से लंबित आधारभूत सुविधाओं का विकास होगा और झारखंड की शूटिंग प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण वातावरण मिल सकेगा। निरीक्षण के दौरान खेल मंत्री सुदिव्य कुमार, मुख्य सचिव तथा अन्य विभागीय अधिकारी भी मौजूद रहे।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
CP Singh
वित्त मंत्री की सुरक्षा विवाद पर गरमाई सियासत, सीपी सिंह बोले- दोबारा सुरक्षा लें तो लोग हंसेंगे

रांची। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा सुरक्षा व्यवस्था लौटाए जाने के मुद्दे पर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा विधायक सीपी सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि वित्त मंत्री ने सुरक्षा व्यवस्था छोड़ दी है, तो भविष्य में सरकार दोबारा सुरक्षा उपलब्ध कराए, तब भी उन्हें उसे स्वीकार नहीं करना चाहिए, अन्यथा लोग उनका मजाक उड़ाएंगे।   सीपी सिंह ने कहा  सीपी सिंह ने कहा कि किसी मंत्री का अपनी ही सरकार के खिलाफ पत्र लिखना और उसे सार्वजनिक करना कई सवाल खड़े करता है। उनका मानना है कि ऐसे मामलों का समाधान सरकार के भीतर होना चाहिए, न कि मीडिया के माध्यम से। उन्होंने कहा कि सरकार के वरिष्ठ मंत्री द्वारा लिखे गए पत्र का पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) जवाब तक नहीं देते, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे मामले में डीजीपी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई होनी चाहिए।   भाजपा विधायक ने कहा भाजपा विधायक ने कहा कि फिलहाल वित्त मंत्री बिना सुरक्षा के सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आ रहे हैं और जनता भी इसे देख रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार बाद में उन्हें फिर से सुरक्षा उपलब्ध कराती है, तो उन्हें स्पष्ट रूप से यह कहना चाहिए कि वे बिना सुरक्षा के ही जनता की सेवा करेंगे। तभी उनके फैसले की गंभीरता साबित होगी।   सीपी सिंह ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपना अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि तत्कालीन डीजीपी एमवी राव के कार्यकाल में उनके बयान के बाद रातोंरात उनके आवास से हाउस गार्ड हटा लिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी मुख्यमंत्री को ही प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि उनके तबादले और पदस्थापन का अधिकार मुख्यमंत्री के पास होता है।   उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की अधिक मौजूदगी कई बार खतरे को भी बढ़ाती है। स्वयं उन्होंने कई यात्राएं बिना सुरक्षा के की हैं। सीपी सिंह ने कहा कि यदि वित्त मंत्री वास्तव में संयुक्त सचिव के पत्र से आहत होकर यह कदम उठा रहे हैं तो उन्हें अपने फैसले पर कायम रहना चाहिए। अन्यथा यदि वे बाद में सुरक्षा स्वीकार करते हैं तो यह केवल राजनीतिक दिखावा माना जाएगा और उनकी छवि पर सवाल उठेंगे।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
Ranchi vendor market
रांची के वेंडर मार्केट में नियमों की अनदेखी, अवैध किरायेदारी पर निगम का शिकंजा

रांची। राजधानी रांची के विभिन्न वेंडर मार्केट में आवंटित दुकानों के दुरुपयोग की शिकायतों के बाद रांची नगर निगम ने सख्त रुख अपनाया है। निगम को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि कई लाभुक स्वयं दुकान संचालित करने के बजाय उन्हें दूसरे लोगों को किराये पर देकर आर्थिक लाभ कमा रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ लाभुक दुकान किराये पर देने के बाद दोबारा फुटपाथ और मुख्य सड़कों पर अतिक्रमण कर कारोबार कर रहे हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर ली है।   नियमों के उल्लंघन पर रद्द हो सकता है आवंटन नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण एवं सड़क विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 के तहत वेंडर मार्केट की दुकान केवल उसी व्यक्ति के उपयोग के लिए आवंटित की जाती है, जिसे लाभुक के रूप में चयनित किया गया हो। दुकान को किसी अन्य व्यक्ति को किराये पर देना या सब-लीज करना पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है। जांच में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित दुकानदार का आवंटन रद्द किया जा सकता है, सुरक्षा राशि जब्त की जा सकती है और दुकान का पुनः आवंटन भी किया जा सकता है।   मेयर ने बनाई जांच समिति कचहरी रोड स्थित अटल स्मृति वेंडर मार्केट, मोरहाबादी समेत कई बाजारों से एक से अधिक दुकानों के आवंटन, अवैध किरायेदारी और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों की शिकायतें मिली हैं। रांची की मेयर रोशनी खलखो ने बताया कि इन मामलों की जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है। समिति भौतिक सत्यापन कर रही है और जल्द ही दोषियों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।   नगर निगम का कहना है कि वेंडर मार्केट का उद्देश्य फुटपाथ दुकानदारों को स्थायी और सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना है। यदि कोई व्यक्ति इस योजना का दुरुपयोग कर दुकान को कमाई का माध्यम बनाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद जरूरत पड़ने पर दुकानें खाली कराकर नए लाभुकों को आवंटित की जाएंगी।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
Radhakrishna Kishore
राधाकृष्ण किशोर के समर्थन में उमड़े कार्यकर्ता, बोले- मंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी हमारी

रांची। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की सुरक्षा को लेकर सामने आई खबरों के बाद रविवार को उनके रांची स्थित आवास पर समर्थकों, कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों की भारी भीड़ जुट गई। पलामू और उनके विधानसभा क्षेत्र छत्तरपुर समेत विभिन्न इलाकों से बड़ी संख्या में लोग मंत्री से मिलने पहुंचे। समर्थकों ने कहा कि वे मंत्री की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और आवश्यकता पड़ने पर उनकी सुरक्षा के लिए स्वयं आगे आने को तैयार हैं। हालांकि, राधाकृष्ण किशोर ने सभी समर्थकों को शांत रहने की अपील करते हुए उन्हें वापस लौटा दिया और सरकारी कार्यक्रमों में उनके साथ नहीं आने का आग्रह किया।   बिना सुरक्षा घेरे के कार्यक्रमों में पहुंचे मंत्री रविवार को वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर महानगर कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कॉर्निवेल हॉल पहुंचे। इसके बाद उन्होंने एचईसी परिसर स्थित पारस अस्पताल का भी दौरा किया। पूरे दिन मंत्री बिना किसी सुरक्षा घेरे के नजर आए। हालांकि, उनकी सुरक्षा में तैनात स्पेशल ब्रांच और जैप के जवान दूर से उनकी गतिविधियों और आवास पर आने-जाने वालों पर नजर बनाए रहे। बारिश के बावजूद सुरक्षा कर्मी सड़क किनारे तैनात रहे और पूरे दिन स्थिति पर निगरानी रखते रहे।   संयुक्त सचिव के नोटिस पर मांगी रिपोर्ट इस बीच वित्त मंत्री ने चार जुलाई को वित्त सचिव प्रशांत कुमार को पत्र लिखकर विभाग के संयुक्त सचिव पंकज सिंह द्वारा सरकारी वाहन लौटाने संबंधी नोटिस पर आपत्ति जताई है। उन्होंने पूछा है कि यह नोटिस किस नियम और अधिकार के तहत जारी किया गया। यदि यह पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर भेजा गया है, तो संबंधित आदेश की प्रति उपलब्ध कराने को भी कहा है। मंत्री ने पूरे मामले की जांच कर 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने और दोषी अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।   राधाकृष्ण किशोर ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार से कोई नाराजगी नहीं है। उनका कहना है कि वे केवल प्रशासनिक जवाबदेही और राजकीय मर्यादा बनाए रखने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार में सभी अधिकारियों को अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर रहकर कार्य करना चाहिए और प्रशासनिक व्यवस्था की गरिमा का पालन करना आवश्यक है।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
Ranchi RSS Office Attack
रांची RSS कार्यालय हमला में था पाकिस्तान और दुबई का हाथ

रांची। रांची स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) कार्यालय पर हुए पेट्रोल बम हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को कई अहम सुराग मिले हैं। जांच के दौरान गिरफ्तार मुख्य आरोपी अमन अंसारी और सयाम सुजान ने कथित तौर पर स्वीकार किया है कि यह हमला एक सुनियोजित आतंकी साजिश का हिस्सा था। एनआईए के अनुसार, दोनों आरोपी पाकिस्तान और दुबई में मौजूद अपने कथित हैंडलरों के संपर्क में थे, जो उन्हें लगातार निर्देश दे रहे थे। एजेंसी ने दोनों को सात दिन की रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ शुरू कर दी है।   ऑनलाइन मिली पेट्रोल बम बनाने की ट्रेनिंग जांच में सामने आया है कि आरोपियों को पेट्रोल बम बनाने और उसका इस्तेमाल करने की कथित ट्रेनिंग ऑनलाइन दी गई थी। एनआईए के अनुसार, वे वीडियो कॉलिंग ऐप बॉटिम और व्हाट्सएप के जरिए विदेशी संपर्कों से जुड़े हुए थे और इन्हीं माध्यमों से हमले की पूरी योजना तैयार की गई। एजेंसी अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी दुबई कैसे पहुंचे और वहां किन लोगों के संपर्क में आए। प्रारंभिक जांच में उनका संबंध कथित तौर पर 'तेहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान' नामक आतंकी मॉड्यूल से होने की आशंका जताई जा रही है। जांच एजेंसी इस मॉड्यूल को मिलने वाले संभावित विदेशी समर्थन की भी पड़ताल कर रही है।   दिल्ली भागने की थी योजना, फंडिंग और स्लीपर सेल पर फोकस पूछताछ के दौरान यह भी जानकारी सामने आई है कि हमले के बाद आरोपी बोकारो, कोडरमा और बिहार के रास्ते दिल्ली भागने की योजना बना रहे थे। एनआईए अब यह पता लगाने में जुटी है कि दिल्ली में उनका संपर्क किससे होने वाला था और झारखंड में उन्हें किन लोगों से मदद या शरण मिली। इसके साथ ही आरोपियों के बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और संभावित फंडिंग नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।   एनआईए राज्य में सक्रिय संभावित स्लीपर सेल और उनसे जुड़े नेटवर्क की भी गहन पड़ताल कर रही है। एजेंसी का कहना है कि जांच अभी जारी है और पूछताछ में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
Rath Yatra 2026
जगन्नाथपुर रथ मेला को लेकर प्रशासन-पुलिस अलर्ट, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

रांची। ऐतिहासिक जगन्नाथपुर रथ मेला और रथ यात्रा के शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित आयोजन को लेकर रांची जिला प्रशासन और पुलिस ने तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचा दी हैं। रविवार को धुर्वा स्थित जगन्नाथपुर मंदिर परिसर के नीलाद्री हॉल में एडीजी मुख्यालय मनोज कौशिक की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मंदिर न्यास समिति, पुलिस और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने सुरक्षा, ट्रैफिक, भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की।   ड्रोन, सीसीटीवी और सादे लिबास में पुलिस की रहेगी नजर प्रशासन ने मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने का फैसला लिया है। पूरे मेला क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा। महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। चोरी, छिनतई और पॉकेटमारी जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों को सादे लिबास में भी तैनात किया जाएगा। पूरे परिसर की निगरानी सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए की जाएगी, जबकि कंट्रोल रूम से हर गतिविधि पर लगातार नजर रखी जाएगी।   ट्रैफिक, पार्किंग और स्वास्थ्य सुविधाओं की भी विशेष तैयारी श्रद्धालुओं की सुविधा और शहर में जाम से बचाव के लिए ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू किया जाएगा। आम लोगों और वीआईपी वाहनों के लिए अलग-अलग पार्किंग स्थल बनाए जाएंगे। प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस की तैनाती होगी और जरूरत पड़ने पर वन-वे व्यवस्था भी लागू की जाएगी। वहीं, मेला परिसर में अस्थायी चिकित्सा शिविर स्थापित किए जाएंगे, जहां डॉक्टर और पैरामेडिकल कर्मी 24 घंटे उपलब्ध रहेंगे। आपात स्थिति से निपटने के लिए एंबुलेंस भी तैनात रहेंगी।   बैठक में मंदिर समिति के सदस्यों को पहचान के लिए एक समान पगड़ी या विशेष पहचान चिह्न धारण करने के निर्देश दिए गए। एडीजी मनोज कौशिक ने कहा कि जगन्नाथपुर रथ मेला राज्य की आस्था का प्रमुख आयोजन है और सभी विभागों के समन्वय से श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने सभी तैयारियां समय पर पूरी करने और सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
National Under 9 Chess Championship
रांची में आज से राष्ट्रीय अंडर-9 शतरंज चैंपियनशिप, 438 खिलाड़ी करेंगे दिमागी मुकाबला

रांची। रांची एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर के खेल आयोजन का केंद्र बनने जा रहा है। 39वीं राष्ट्रीय अंडर-9 ओपन एवं गर्ल्स शतरंज चैंपियनशिप-2026 का आयोजन 6 से 12 जुलाई तक सरला बिरला विश्वविद्यालय, महिलौंग परिसर में किया जाएगा। सात दिनों तक चलने वाली इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में देशभर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 438 बाल शतरंज खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। आयोजन को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और खिलाड़ियों के स्वागत के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।   इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन ऑल झारखंड चेस एसोसिएशन द्वारा रांची जिला चेस एसोसिएशन के सहयोग से तथा ऑल इंडिया चेस फेडरेशन (AICF) के तत्वावधान में किया जा रहा है। प्रतियोगिता को विश्व शतरंज महासंघ (FIDE) की मान्यता प्राप्त है। लगभग आठ वर्षों के अंतराल के बाद रांची को इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतियोगिता की मेजबानी का अवसर मिला है। प्रतियोगिता में कुल पांच लाख रुपये की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है।   खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और अभिभावकों  आयोजन स्थल पर खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और अभिभावकों के लिए आवास, भोजन, चिकित्सा सुविधा, सुरक्षा और आधुनिक प्रतियोगिता हॉल सहित सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। आयोजकों का उद्देश्य प्रतिभागियों को राष्ट्रीय स्तर के अनुरूप बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि वे पूरी एकाग्रता के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकें।   आयोजन समिति का मानना है आयोजन समिति का मानना है कि इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले कई खिलाड़ी भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। यह आयोजन न केवल युवा खिलाड़ियों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा, बल्कि झारखंड में शतरंज जैसे बौद्धिक खेलों को भी नई पहचान देगा। प्रतियोगिता को सीसीएल, एनटीपीसी और बीसीसीएल का सहयोग प्राप्त है। ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी नवजोत अलंग ने कहा कि सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और निष्पक्ष व सफल आयोजन सुनिश्चित करने के लिए हर स्तर पर विशेष व्यवस्था की गई है।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
Premium Postal Service
रांची समेत झारखंड के चार शहरों में जल्द शुरू होगी प्रीमियम डाक डिलिवरी सेवा

रांची। झारखंड के चार प्रमुख शहरों - रांची, धनबाद, जमशेदपुर और बोकारो में जल्द ही डाक विभाग की प्रीमियम डाक डिलिवरी सेवा शुरू हो सकती है। इस संबंध में विभाग ने डाक निदेशालय को प्रस्ताव भेज दिया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इन शहरों के लोगों को पार्सल और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की तेज, सुरक्षित और समयबद्ध डिलिवरी की सुविधा उपलब्ध होगी। नई सेवा का उद्देश्य डाक वितरण प्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और ग्राहक-केंद्रित बनाना है।   देश के छह शहरों में सफल रहा प्रयोग डाक विभाग ने मार्च 2026 में इस प्रीमियम सेवा की शुरुआत देश के छह बड़े शहरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में की थी। विभाग के अनुसार, इन शहरों में सेवा को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और डिलिवरी की गुणवत्ता तथा समयबद्धता में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। इसी सफलता को देखते हुए अब इसे दूसरे राज्यों के प्रमुख शहरों तक विस्तार देने की योजना बनाई गई है।   आधुनिक तकनीक से होगी निगरानी प्रीमियम डाक डिलिवरी सेवा पूरी तरह आधुनिक तकनीक पर आधारित होगी। इसके तहत ग्राहकों को एसएमएस अलर्ट, ऑनलाइन ट्रैकिंग और रियल-टाइम स्टेटस अपडेट जैसी सुविधाएं मिलेंगी। इससे ग्राहक अपने पार्सल या महत्वपूर्ण दस्तावेज की बुकिंग से लेकर अंतिम डिलिवरी तक हर चरण की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। पारदर्शी ट्रैकिंग व्यवस्था से डिलिवरी प्रक्रिया पर भरोसा भी बढ़ेगा।   मंजूरी के बाद शुरू होगी सेवा डाक विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस सेवा के लागू होने से झारखंड के इन चार शहरों में डाक वितरण पहले की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और विश्वसनीय होगा। विशेष रूप से जरूरी दस्तावेजों और महत्वपूर्ण पार्सलों की समय पर डिलिवरी सुनिश्चित करने में यह सेवा अहम भूमिका निभाएगी। विभाग को उम्मीद है कि प्रस्ताव को जल्द मंजूरी मिल जाएगी, जिसके बाद रांची, धनबाद, जमशेदपुर और बोकारो के लोग इस आधुनिक प्रीमियम डाक सेवा का लाभ उठा सकेंगे।

anjali kumari जुलाई 4, 2026 0
Morhabadi Shopkeepers Protest
मोरहाबादी हाट बंद होने पर, दुकानदारों ने जिला प्रशासन और नगर निगम के खिलाफ खोला मोर्चा

रांची। राजधानी रांची के मोरहाबादी में पिछले कुछ वर्षों से लगने वाले साप्ताहिक हाट बाजार को प्रशासन ने बंद कर दिया है। बाजार के कारण सुबह और शाम के समय इलाके में लगातार जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही थी, जिससे आम लोगों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने अचानक हाट बाजार पर रोक लगा दी।    जिला प्रशासन और नगर निगम  प्रशासन के इस फैसले के विरोध में शनिवार को सैकड़ों सब्जी विक्रेता सड़कों पर उतर आए। आक्रोशित दुकानदारों ने जिला प्रशासन और नगर निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और बाजार को दोबारा शुरू करने की मांग की। उनका कहना है कि हाट बंद होने से उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है और परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो जाएगा।   क्या कह  रहे  दुकानदार? विरोध प्रदर्शन को देखते हुए मोरहाबादी इलाके में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे दुकानदारों को शांत कराने का प्रयास किया और उन्हें वैकल्पिक स्थान पर दुकान लगाने का प्रस्ताव दिया। हालांकि, दुकानदारों ने स्पष्ट किया कि जब तक बाजार दोबारा शुरू करने पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। फिलहाल प्रशासन और दुकानदारों के बीच समाधान निकालने की कोशिश जारी है।

anjali kumari जुलाई 4, 2026 0
RIMS land fraud
RIMS land fraud: एसीबी ने प्रदीप महतो को बताया साजिश का मुख्य किरदार

रांची। रिम्स (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) जमीन घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने इस मामले में प्रॉपर्टी डीलर प्रमोद कुमार महतो को पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड और मुख्य साजिशकर्ता बताया है। जांच एजेंसी का दावा है कि सरकारी अधिग्रहित जमीन की अवैध खरीद-बिक्री में उसकी अहम भूमिका रही है।   गवाह के बयान से मजबूत हुई जांच एसीबी ने जांच के दौरान सोनमैती देवी का बयान दर्ज किया है। उन्होंने बताया कि प्रमोद कुमार महतो उन प्रॉपर्टी डीलरों में शामिल था, जिन्होंने उन्हें रजिस्ट्री कार्यालय में अंगूठे का निशान लगाने के लिए बुलाया था। सोनमैती देवी के अनुसार, जमीन का एक हिस्सा उनके नाम पर था। जांच में एसीबी को यह भी पता चला है कि रिम्स के लिए अधिग्रहित सरकारी जमीन की बिक्री की पूरी प्रक्रिया में प्रमोद महतो ने उनकी सक्रिय रूप से मदद की थी।   फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेची गई जमीन जांच एजेंसी के अनुसार, जमीन की बिक्री को वैध दिखाने के लिए फर्जी वंशावली तैयार की गई और वार्ड पार्षद के कथित फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर दस्तावेज बनाए गए। एसीबी का मानना है कि यह पूरा खेल सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया ताकि सरकारी जमीन को निजी संपत्ति बताकर बेचा जा सके।   धोखाधड़ी का पुराना मामला भी आया सामने जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पटना निवासी कामिनी रंजन के नाम 17.35 डिसमिल जमीन की बिक्री के लिए करीब 45.72 लाख रुपये का सेल डीड तैयार किया गया था, लेकिन उन्हें कभी जमीन का कब्जा नहीं मिला। इसके बाद वर्ष 2020 में कामिनी रंजन ने पटना की अदालत में प्रमोद कुमार महतो के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था। आरोप है कि पैसा लौटाने के लिए दिया गया चेक भी बाउंस हो गया था।   एसीबी ने प्रमोद कुमार महतो को पूछताछ के लिए कई बार समन जारी किया है, लेकिन वह अब तक एजेंसी के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ है। इससे जांच एजेंसी का संदेह और गहरा गया है। वहीं, इस मामले में पहले ही एक बिल्डर समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
Gold Chain Snatching
रांची में दिनदहाड़े चेन स्नैचिंग, बरियातू थाना के पीछे महिला से सोने की चेन झपटी

रांची। झारखंड की राजधानी रांची में अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं। ताजा मामला बरियातू थाना क्षेत्र का है, जहां थाना परिसर के पीछे दिनदहाड़े एक महिला से बाइक सवार बदमाशों ने सोने की चेन झपट ली और फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है।   सब्जी खरीदकर घर लौट रही थीं महिला जानकारी के अनुसार, घटना अर्पण विला, विद्यापति मार्ग स्थित तेतर टोली गेट के पास की है। पीड़ित महिला सब्जी खरीदकर अपने घर लौट रही थीं। इसी दौरान अपाचे बाइक पर सवार दो बदमाश उनके पास पहुंचे। दोनों ने हेलमेट पहन रखा था, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया। मौका मिलते ही एक बदमाश ने महिला के गले से सोने की चेन झपट ली और दोनों तेज रफ्तार से फरार हो गए। अचानक हुई इस वारदात से महिला घबरा गईं और शोर मचाया, लेकिन तब तक आरोपी आंखों से ओझल हो चुके थे।   थाना के पास वारदात से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल घटना बरियातू थाना के बेहद करीब होने के कारण स्थानीय लोगों में नाराजगी और भय का माहौल है। लोगों का कहना है कि जब थाना के आसपास ही अपराधी बेखौफ होकर वारदात को अंजाम दे रहे हैं, तो शहर के अन्य इलाकों में आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।   सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जुटाकर जांच शुरू कर दी। पुलिस का कहना है कि फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस से जल्द कार्रवाई कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है। लगातार बढ़ रही छिनतई की घटनाओं ने खासकर महिलाओं में असुरक्षा की भावना बढ़ा दी है।

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
Radhakrishna Kishore
पुलिस मुख्यालय के पत्र से नाराज वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने लौटाई सरकारी सुरक्षा

रांची। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई पूरी सुरक्षा व्यवस्था वापस लौटा दी है। बताया जा रहा है कि पुलिस मुख्यालय की ओर से सुरक्षा व्यवस्था में कटौती से जुड़े एक पत्र के बाद मंत्री ने नाराजगी जताते हुए यह फैसला लिया। पिछले पांच दिनों से वह बिना सुरक्षा कर्मियों के ही सरकारी कार्यक्रमों और बैठकों में शामिल हो रहे हैं। गुरुवार को आयोजित राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक में भी वह बिना सुरक्षा के पहुंचे। हालांकि, वह अभी भी मंत्री के तौर पर आवंटित सरकारी वाहन का उपयोग कर रहे हैं।   सुरक्षा वाहन कम करने के पत्र से बढ़ी नाराजगी जानकारी के अनुसार, पुलिस मुख्यालय ने वित्त विभाग को पत्र भेजकर मंत्री की सुरक्षा में तैनात एक वाहन वापस लेने का निर्देश दिया था। अब तक उनकी सुरक्षा में चार वाहन और 16 सुरक्षा कर्मी तैनात थे। यह पत्र वित्त विभाग के संयुक्त सचिव के माध्यम से वित्त मंत्री तक पहुंचा। पत्र मिलने के बाद मंत्री ने नाराजगी जाहिर करते हुए पूरी सुरक्षा व्यवस्था ही लौटाने का निर्णय लिया।   'तीन गाड़ियों में 16 जवानों की तैनाती व्यावहारिक नहीं' सूत्रों के मुताबिक, वित्त मंत्री का मानना था कि यदि एक वाहन वापस ले लिया जाता है तो 16 सुरक्षा कर्मियों को केवल तीन वाहनों में समायोजित करना व्यावहारिक नहीं होगा। इसी कारण उन्होंने सुरक्षा में तैनात सभी कर्मियों और सुरक्षा वाहनों को वापस भेज दिया। फिलहाल वह बिना सरकारी सुरक्षा के ही अपने आधिकारिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।   इस घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। हालांकि, इस पूरे मामले पर अब तक पुलिस मुख्यालय या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, मंत्री के इस फैसले को लेकर विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग तरह की चर्चाएं जारी हैं।

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
Sadar Hospital Ranchi
रांची सदर अस्पताल में टेंडर का खेल? विफल एजेंसी को फिर मिला नया टेंडर

रांची। रांची सदर अस्पताल में दवा आपूर्ति से जुड़े टेंडर को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जिस एजेंसी पर एंटी रैबीज वैक्सीन की आपूर्ति में विफल रहने के कारण कई बार नोटिस और शोकॉज जारी किया गया, उसी एजेंसी को बाद में “संतोषजनक कार्य एवं आचरण” का अनुभव प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इतना ही नहीं, इसी प्रमाण पत्र के आधार पर उसे दूसरी दवा की आपूर्ति का नया टेंडर भी मिल गया।   जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, वीके ड्रग्स एंड कंपनी को ई-टेंडर के माध्यम से एंटी रैबीज वैक्सीन की हजारों वायल की आपूर्ति का जिम्मा दिया गया था। हालांकि निर्धारित समय में कंपनी ने कुल मांग का केवल लगभग 20 प्रतिशत यानी करीब 3200 वायल ही उपलब्ध कराए। वैक्सीन की कमी का सीधा असर डॉग बाइट के मरीजों पर पड़ा और अस्पताल प्रबंधन को दूसरी कंपनी से वैक्सीन खरीदकर मरीजों का इलाज कराना पड़ा।   आपूर्ति में देरी को लेकर एजेंसी ने दिया नोटिस आपूर्ति में देरी को लेकर 16 मार्च और 25 अप्रैल 2026 को एजेंसी को नोटिस जारी किए गए। इसके बाद 12 मई को सिविल सर्जन ने शोकॉज नोटिस जारी कर पूछा कि निविदा शर्तों के उल्लंघन पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाए। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि महज 17 दिन बाद, 29 मई को उसी एजेंसी को कार्य अनुभव प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया, जिसमें उसके काम और आचरण को संतोषजनक बताया गया।   मामले में स्टोर इंचार्ज अनिल कुमार ने कहा कि उन्होंने उपाधीक्षक के निर्देश पर फाइल आगे बढ़ाई थी, जबकि उपाधीक्षक डॉ. विमलेश कुमार सिंह ने इससे अनभिज्ञता जताते हुए किसी भी भूमिका से इनकार किया। दूसरी ओर, सिविल सर्जन ने सफाई दी कि अनुभव प्रमाण पत्र एजेंसी के पुराने कार्य रिकॉर्ड के आधार पर जारी किया गया, क्योंकि पहले उसने नियमित रूप से दवाओं की आपूर्ति की थी। एजेंसी ने आपूर्ति में देरी के लिए अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, विशेषकर अमेरिका-ईरान तनाव, परिवहन और पैकेजिंग लागत बढ़ने को जिम्मेदार बताया। हालांकि, इस पूरे प्रकरण ने सरकारी खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
Durand Cup 2026
रांची में पहली बार डूरंड कप का रोमांच, बिरसा मुंडा स्टेडियम में होंगे 16 बड़े मुकाबले

रांची। झारखंड की राजधानी रांची के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित फुटबॉल टूर्नामेंट डूरंड कप के 135वें संस्करण की मेजबानी पहली बार रांची को मिली है। इस आयोजन के तहत 26 जुलाई से 16 अगस्त तक बिरसा मुंडा स्टेडियम में कुल 16 मुकाबले, जिनमें लीग चरण के मैच और एक क्वार्टर फाइनल शामिल है, खेले जाएंगे। इससे राज्य के फुटबॉल प्रेमियों को देश-विदेश की नामी टीमों को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।   डूरंड कप आयोजन समिति ने इस वर्ष टूर्नामेंट में भाग लेने वाली 24 टीमों और पांच मेजबान शहरों की घोषणा कर दी है। इस बार मुकाबले कोलकाता, रांची, इंफाल, गुवाहाटी और शिलांग में आयोजित किए जाएंगे। मेजबान शहरों की सूची में पहली बार रांची का नाम शामिल होना झारखंड के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।   जमशेदपुर एफसी पर रहेंगी खास नजरें  रांची में होने वाले मुकाबलों में इंडियन सुपर लीग (ISL) की टीम जमशेदपुर एफसी पर खास नजरें रहेंगी। इसके अलावा स्पोर्टिंग क्लब दिल्ली, भारतीय वायुसेना फुटबॉल टीम और श्रीलंका आर्म्ड फोर्सेज की डिफेंडर्स एफसी जैसी टीमें भी मैदान में उतरेंगी। इन मुकाबलों से स्थानीय दर्शकों को उच्च स्तरीय फुटबॉल देखने का मौका मिलेगा और युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी।   इस स्टेडियम  में पहले भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन की है  बिरसा मुंडा स्टेडियम पहले भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी कर चुका है, लेकिन डूरंड कप जैसे ऐतिहासिक टूर्नामेंट का आयोजन इसकी उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ेगा। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इससे झारखंड में फुटबॉल संस्कृति को नई मजबूती मिलेगी और राज्य में खेल पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। डूरंड कप 2026 की शुरुआत 25 जुलाई से होगी, जबकि टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला 23 अगस्त को कोलकाता के विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन में खेला जाएगा। रांची में होने वाले मुकाबलों को लेकर फुटबॉल प्रेमियों में अभी से खासा उत्साह देखा जा रहा है।

anjali kumari जुलाई 2, 2026 0
Infrastructure Development
कांके रोड से चिरौंदी तक 2.97 किमी नई सड़क बनेगी, कैबिनेट की मंजूरी के बाद शुरू होगा निर्माण कार्य

रांची। रांची के सड़क नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कांके रोड से चिरौंदी को जोड़ने वाली नई सड़क परियोजना को योजना प्राधिकार समिति की मंजूरी मिल गई है। विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस परियोजना को स्वीकृति दी गई। अब प्रशासनिक मंजूरी के लिए प्रस्ताव राज्य कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। कैबिनेट की स्वीकृति मिलते ही सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी।   इनर रिंग रोड का अहम हिस्सा होगी नई सड़क प्रस्तावित सड़क करीब 2.97 किलोमीटर लंबी होगी और रांची के इनर रिंग रोड परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगी। यह सड़क कांके रोड के झिरगाटोली क्षेत्र को सीधे चिरौंदी से जोड़ेगी। इसके बनने से पंडरा से बड़गाईं (बरियातू) तक इनर रिंग रोड का संपर्क और मजबूत होगा।   वर्तमान में पंडरा से कांके रोड तक पहले चरण और चिरौंदी से लेम होते हुए बड़गाईं तक तीसरे चरण का निर्माण कार्य चल रहा है। हालांकि, कांके रोड से चिरौंदी तक का दूसरा चरण लंबित था। अब इस हिस्से को भी मंजूरी मिलने से पूरी परियोजना को गति मिलने की उम्मीद है।   लोगों को मिलेगा सीधा और आसान संपर्क नई सड़क बनने के बाद चिरौंदी और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को कांके रोड पहुंचने के लिए लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। अभी लोगों को बोड़ेया, ब्लॉक चौक या मोरहाबादी मैदान होकर कांके रोड जाना पड़ता है, जिससे समय और दूरी दोनों बढ़ जाते हैं। नई सड़क शुरू होने से यात्रा आसान होगी, ट्रैफिक दबाव कम होगा और स्थानीय लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।   दूसरी सड़क परियोजना को भी मिली मंजूरी योजना प्राधिकार समिति ने बैठक में बरलंगा से गोला-मुरी तक 4.83 किलोमीटर सड़क निर्माण परियोजना को भी स्वीकृति प्रदान की है। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से रांची और आसपास के क्षेत्रों में आवागमन सुगम होगा, ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर बनेगी और शहरी बुनियादी ढांचे को नई मजबूती मिलेगी।

anjali kumari जुलाई 2, 2026 0
Liquor Factory Raid
रांची की शराब फैक्ट्री पर बड़ी रेड, पूर्व एमएलसी सुबोध कुमार समेत तीन गिरफ्तार

रांची। रांची के ओरमांझी स्थित तरंगनी लिकर्स प्राइवेट लिमिटेड में रांची पुलिस और उत्पाद विभाग ने मंगलवार देर रात संयुक्त छापेमारी कर बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान फैक्ट्री से 303 पेटी विदेशी शराब जब्त की गई और राजद नेता तथा बिहार के पूर्व एमएलसी सुबोध कुमार, उनके चालक देवेंद्र भगत और कर्मचारी रविकांत राय को गिरफ्तार कर लिया गया। बुधवार शाम तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार भेज दिया गया। छापेमारी का नेतृत्व सहायक उत्पाद आयुक्त उमाशंकर सिंह ने किया। कार्रवाई रात करीब 12 बजे शुरू हुई और सुबह छह बजे तक चली।   फर्जी लेबल लगाकर दूसरे राज्यों में बिक्री का आरोप प्रारंभिक जांच में सामने आया कि फैक्ट्री में तैयार शराब पर दूसरे नामी ब्रांडों के फर्जी लेबल लगाकर उसे उत्तर प्रदेश और दिल्ली के नाम पर बाजार में कम कीमत पर बेचा जा रहा था। अधिकारियों के अनुसार प्लांट में 8 पीएम, आफ्टर डार्क और रॉयल्सन गोल्ड जैसे ब्रांडों के नाम से शराब तैयार और पैक की जा रही थी। कई बोतलों पर "For Sale in Uttar Pradesh" और "For Sale in Delhi" अंकित पाया गया, जिससे अन्य राज्यों में अवैध आपूर्ति की आशंका जताई जा रही है।   भारी मात्रा में शराब बरामद, विभाग की भूमिका पर भी सवाल छापेमारी के दौरान 70 पेटी किंगफिशर स्ट्रॉन्ग प्रीमियम बीयर, 218 पेटी आफ्टर डार्क ब्लू, 7 पेटी 8 पीएम और 78 पेटी रॉयल्सन गोल्ड व्हिस्की जब्त की गई। जांच में लाइसेंस शर्तों के उल्लंघन, गलत स्टॉक रखने, फर्जी दस्तावेजों के जरिए परिवहन और राज्य सरकार को राजस्व नुकसान पहुंचाने के आरोप भी सामने आए हैं।   गौरतलब है कि इसी फैक्ट्री पर दो वर्ष पहले भी उत्पाद विभाग ने कार्रवाई कर इसे सील किया था। वहीं, प्लांट में विभाग की ओर से बॉन्ड अफसर की तैनाती के बावजूद कथित तौर पर फर्जी लेबल लगाकर शराब की सप्लाई होने के खुलासे ने उत्पाद विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

anjali kumari जुलाई 2, 2026 0
Ranchi liquor raid
रांची में बिना लाइसेंस बन रही थीं कई ब्रांड की शराब, पूर्व RJD MLC की कंपनी पर छापा

रांची। झारखंड की राजधानी रांची में अवैध शराब निर्माण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस और उत्पाद विभाग की संयुक्त टीम ने ओरमांझी स्थित तरंगिनी बॉटलर्स पर छापेमारी की। जांच में खुलासा हुआ कि कंपनी को केवल कुछ चुनिंदा ब्रांड की शराब बनाने का लाइसेंस प्राप्त था, लेकिन इसके बावजूद वह अन्य कंपनियों के नाम से भी शराब और बीयर का उत्पादन कर रही थी। इस मामले में कंपनी के संचालक और बिहार के पूर्व आरजेडी एमएलसी सुबोध राय का नाम सामने आया है।   बिना लाइसेंस बन रही थी शराब और बीयर पुलिस के अनुसार, कंपनी को केवल 8 PM और White Mischief ब्रांड के उत्पादन की अनुमति थी। हालांकि छापेमारी के दौरान यह पाया गया कि यहां बिना लाइसेंस After Dark, Royalson Gold जैसी शराब और Kingfisher ब्रांड की बीयर भी तैयार की जा रही थी। मौके से भारी मात्रा में तैयार शराब और बीयर जब्त की गई, जबकि कई कर्मचारियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। उत्पाद विभाग ने फैक्ट्री को तत्काल सील कर दिया है।   पहले भी हो चुकी है कार्रवाई यह पहली बार नहीं है जब तरंगिनी बॉटलर्स विवादों में आई हो। मार्च 2023 में भी इसी फैक्ट्री पर छापा मारकर बड़ी मात्रा में शराब, खाली बोतलें और शराब निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई थी। उस समय कंपनी को सील करने और लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। हालांकि बाद में फैक्ट्री का संचालन दोबारा शुरू हो गया, जिस पर अब सवाल उठ रहे हैं।   कौन हैं सुबोध राय? सुबोध राय बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के पूर्व एमएलसी हैं। उन्हें पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद यादव का करीबी माना जाता रहा है। वे पहले भी विभिन्न राजनीतिक और कानूनी मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं। तरंगिनी लिकर प्राइवेट लिमिटेड के अलावा वे एक कोल्ड स्टोरेज कंपनी के भी निदेशक हैं।   लगातार सामने आ रहे हैं अवैध शराब के मामले रांची जिले में पिछले एक वर्ष के दौरान कई अवैध शराब फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ हो चुका है। पुलिस और उत्पाद विभाग का कहना है कि नकली और बिना लाइसेंस शराब के कारोबार पर लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। इस मामले में भी सभी जब्त सामग्री की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

anjali kumari जुलाई 1, 2026 0
Bhognadih Hool Diwas
भोगनाडीह में हूल दिवस पर विवाद, सिदो-कान्हू के वंशजों समेत 53 लोगों को SDM कोर्ट का नोटिस

साहेबगंज, एजेंसियां। झारखंड के साहेबगंज जिले के भोगनाडीह में 171वें हूल दिवस समारोह से पहले प्रशासन की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। एसडीएम कोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126/135 के तहत सिदो-कान्हू मुर्मू के वंशजों समेत 53 लोगों को नोटिस जारी किया है। सभी को कोर्ट में उपस्थित होकर 10 हजार रुपये का शांति बॉन्ड और दो प्रतिभूतियां जमा करने का निर्देश दिया गया है।   कानून-व्यवस्था का हवाला प्रशासन के अनुसार, बरहेट थाना प्रभारी की 25 जून की रिपोर्ट में हूल दिवस समारोह के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। इसी आधार पर एहतियाती कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी किए गए। सूची में भोगनाडीह के ग्राम प्रधान बबलू हांसदा सहित कई ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता और आसपास के गांवों के निवासी शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई किसी को दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि समारोह को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से की गई है।   चंपाई सोरेन का सरकार पर हमला इस कार्रवाई को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि हूल दिवस के अवसर पर वीर भूमि भोगनाडीह को पुलिस छावनी में बदल दिया गया है। उनके मुताबिक पूरे इलाके में भारी पुलिस बल और बड़ी संख्या में मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं।   चंपाई सोरेन ने कहा कि जिन वीर सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ हूल आंदोलन की शुरुआत की थी, उनके वंशजों और स्थानीय लोगों से श्रद्धांजलि देने के लिए शांति बॉन्ड भरवाना आदिवासी समाज और उनकी विरासत का अपमान है। उन्होंने सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी का आरोप लगाया।   क्या है BNSS की धारा 126? भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 के तहत यदि कार्यकारी मजिस्ट्रेट को किसी व्यक्ति से सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका होती है, तो वह उससे भविष्य में शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने को कह सकता है। यह दंडात्मक कार्रवाई नहीं बल्कि एहतियाती कानूनी प्रक्रिया है। यदि संबंधित व्यक्ति शर्तों का पालन करता है, तो उसके खिलाफ कोई सजा या अन्य कार्रवाई नहीं की जाती।

anjali kumari जून 30, 2026 0
Pradhan Mantri Awas Yojana
1.20 लाख नहीं, 2 लाख मिले, दीपिका पांडेय सिंह ने PM आवास योजना की राशि बढ़ाने की उठाई मांग

रांची। झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता को 1.20 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने की मांग केंद्र सरकार के समक्ष रखी है। उन्होंने यह प्रस्ताव नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन के दौरान केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने रखा।   बढ़ती निर्माण लागत का दिया हवाला दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि निर्माण सामग्री और मजदूरी की लागत में लगातार वृद्धि के कारण मौजूदा सहायता राशि में गुणवत्तापूर्ण पक्का घर बनाना कठिन हो गया है। उनका कहना था कि यदि सहायता राशि 2 लाख रुपये कर दी जाए तो ग्रामीण गरीब परिवारों को मजबूत और टिकाऊ आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य अधिक प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकेगा।   फैब्रिकेटेड मकानों और एकमुश्त भुगतान का सुझाव मंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आधुनिक फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर वाले घरों के निर्माण को बढ़ावा देने का सुझाव भी दिया। उनके अनुसार, इससे कम समय में मजबूत और गुणवत्तापूर्ण मकान तैयार किए जा सकेंगे। साथ ही उन्होंने लाभुकों को किस्तों के बजाय पूरी राशि एकमुश्त देने की मांग की, ताकि धन की कमी के कारण निर्माण कार्य बीच में न रुके।   अबुआ आवास योजना और मनरेगा को जोड़ने की पहल दीपिका पांडेय सिंह ने राज्य सरकार की अबुआ आवास योजना के तहत घर बनाने वाले लाभार्थियों को मनरेगा के माध्यम से 90 दिनों की मजदूरी देने का प्रस्ताव भी रखा। उनका मानना है कि इससे गरीब परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलेगी और ग्रामीण रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।   ग्रामीण उद्योगों और महिला समूहों पर भी जोर सम्मेलन में मंत्री ने झारखंड में ग्रामीण उद्योगों के विस्तार और स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने बताया कि राज्य की करीब 32 लाख महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं और पलाश व अदिवा जैसे ब्रांडों के माध्यम से अपने उत्पादों को पहचान दिला रही हैं। साथ ही बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत झारखंड के आम की दुबई, लंदन और इटली जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच को राज्य की बड़ी उपलब्धि बताया।   बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फैब्रिकेटेड आवास संबंधी सुझावों पर सकारात्मक रुख दिखाया और इन प्रस्तावों पर विचार करने का भरोसा जताया।

anjali kumari जून 30, 2026 0
retired employees protest
रांची नगर निगम के 400 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन में 20% तक कटौती, निगम कार्यालय में जोरदार प्रदर्शन

रांची। रांची नगर निगम एक बार फिर अपने फैसले को लेकर विवादों में है। इस बार मामला करीब 400 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन में 20 प्रतिशत तक की कटौती का है। तीन महीने के इंतजार के बाद सोमवार को पेंशनभोगियों के खातों में राशि भेजी गई, लेकिन अधिकांश कर्मचारियों की पेंशन में 5 हजार से 12 हजार रुपये तक की कटौती कर दी गई। इससे नाराज पेंशनभोगी निगम कार्यालय पहुंच गए और नगर आयुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।   नगर आयुक्त से की मुलाकात अवध बिहारी तिवारी के नेतृत्व में सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने नगर आयुक्त सुशांत गौरव से मुलाकात कर पेंशन में की गई कटौती पर आपत्ति जताई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बिना पूर्व सूचना उनके अधिकारों में कटौती की गई है, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर आयुक्त ने कर्मचारियों को बताया कि पेंशन में कटौती का निर्णय नगर विकास विभाग के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। उन्होंने पेंशनभोगियों को अपनी आपत्ति और मांग विभाग के समक्ष रखने की सलाह दी।   नौ साल पुराने फैसले पर बदला रुख मामले की पड़ताल में एक दिलचस्प तथ्य भी सामने आया है। वर्ष 2017 में झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद रांची नगर निगम ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राज्यकर्मियों के समान पेंशन देने का निर्णय लागू किया था। उस समय गठित समिति में तत्कालीन उप नगर आयुक्त संजय कुमार ने इस व्यवस्था पर सहमति जताई थी। अब, करीब नौ वर्ष बाद, जब वही संजय कुमार अपर नगर आयुक्त के पद पर हैं, तो पेंशन में कटौती के निर्णय पर भी उनकी सहमति बताई जा रही है। इस बदलाव को लेकर पेंशनभोगियों के बीच नाराजगी और सवाल दोनों बढ़ गए हैं। सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि पेंशन में की गई कटौती वापस नहीं ली गई तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। फिलहाल नगर निगम का कहना है कि वह विभागीय निर्देशों के अनुसार ही कार्रवाई कर रहा है।

anjali kumari जून 30, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0