स्वास्थ्य

Easy Yoga Poses to Improve Flexibility at Home

घर पर करें ये आसान Yoga Poses, शरीर की जकड़न होगी दूर और बढ़ेगी Flexibility

surbhi मई 22, 2026 0
Beginners practicing easy yoga poses at home to improve flexibility and reduce body stiffness naturally
Easy Yoga Poses for Flexibility at Home

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में घंटों कुर्सी पर बैठना, लैपटॉप और मोबाइल स्क्रीन पर झुके रहना और शारीरिक गतिविधियों की कमी हमारे शरीर को धीरे-धीरे अकड़ा हुआ बना देती है। कमर दर्द, कंधों में जकड़न, टाइट हैमस्ट्रिंग और खराब पोश्चर जैसी समस्याएं अब बेहद आम हो चुकी हैं। ऐसे में योग न केवल शरीर को लचीला बनाने में मदद करता है, बल्कि मानसिक तनाव को कम करने और शरीर की मूवमेंट को बेहतर बनाने में भी कारगर साबित होता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, Flexibility का मतलब सिर्फ स्प्लिट्स करना या कठिन योगासन करना नहीं है। असली उद्देश्य है रोजमर्रा की जिंदगी में शरीर को बिना दर्द और जकड़न के आसानी से मूव कर पाना। नियमित योग अभ्यास से शरीर की Mobility बेहतर होती है, यानी जोड़ों और मांसपेशियों की मूवमेंट अधिक सहज हो जाती है।

वेलनेस एक्सपर्ट्स का कहना है कि शुरुआत करने वालों को योग को किसी प्रतियोगिता की तरह नहीं लेना चाहिए। शरीर को जबरदस्ती स्ट्रेच करने के बजाय धीरे-धीरे कंट्रोल्ड मूवमेंट पर ध्यान देना जरूरी है।

शरीर में जकड़न क्यों होती है?

लंबे समय तक बैठे रहने से हिप फ्लेक्सर्स टाइट हो जाते हैं। लगातार स्क्रीन देखने से गर्दन और कंधों पर दबाव बढ़ता है और पोश्चर बिगड़ता है। वहीं, एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग की कमी जोड़ों की मूवमेंट को सीमित कर देती है। यही वजह है कि आजकल Flexibility और Mobility दोनों पर एक साथ काम करने की सलाह दी जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती लोगों में सबसे ज्यादा जकड़न इन हिस्सों में देखने को मिलती है:

  • Hips
  • Hamstrings
  • Shoulders
  • Spine
  • Ankles

इन हिस्सों की जकड़न के कारण आगे झुकना, बैठना, स्क्वाट करना और लंबे समय तक चलना तक मुश्किल हो सकता है।

Yoga करने का सही समय क्या है?

योग करने का कोई एक तय समय नहीं है। यह आपकी दिनचर्या और शरीर की जरूरत पर निर्भर करता है।

  • सुबह योग करने से शरीर की stiffness कम होती है और एनर्जी मिलती है।
  • शाम को योग करने से दिनभर की थकान और तनाव कम होता है।
  • Workout के after stretching करने से muscles ज्यादा effectively खुलती हैं क्योंकि शरीर पहले से warm होता है।

Beginners के लिए 5 आसान Yoga Poses

1. Cat-Cow Pose

यह pose spine को gently activate करता है और लंबे समय तक बैठने से हुई stiffness को कम करने में मदद करता है।

कैसे करें:

  • हाथों और घुटनों के बल आएं।
  • सांस अंदर लेते हुए पेट नीचे करें और छाती ऊपर उठाएं।
  • सांस छोड़ते हुए पीठ को गोल करें और ठुड्डी अंदर की ओर लाएं।
  • इसे 8–10 बार धीरे-धीरे दोहराएं।

2. Downward Facing Dog

यह pose shoulders, calves, hamstrings और spine को stretch करता है।

कैसे करें:

  • हाथ और पैरों के बल शरीर को उल्टे V आकार में उठाएं।
  • घुटनों को थोड़ा मोड़कर रखें।
  • Spine को लंबा करने पर फोकस करें।

Beginner Tip:
अगर heels जमीन तक नहीं पहुंचतीं तो चिंता न करें। शुरुआत में knees bend रखना बिल्कुल ठीक है।

3. Low Lunge

यह pose लंबे समय तक बैठने से tight हुए hips और lower back को खोलने में मदद करता है।

कैसे करें:

  • एक पैर आगे रखें और दूसरा घुटना जमीन पर टिकाएं।
  • Front knee को ankle के ऊपर रखें।
  • धीरे-धीरे hips को आगे की तरफ ले जाएं।
  • 20–30 सेकंड तक hold करें।

4. Cobra Pose

यह pose chest और shoulders खोलता है, posture सुधारता है और spine को मजबूत बनाता है।

कैसे करें:

  • पेट के बल लेट जाएं।
  • हथेलियों को ribs के पास रखें।
  • सांस लेते हुए धीरे-धीरे chest उठाएं।
  • कंधों को relaxed रखें।

Beginner Tip:
हाथों पर ज्यादा जोर देने के बजाय back muscles का इस्तेमाल करें।

5. Child’s Pose

यह pose शरीर और दिमाग दोनों को रिलैक्स करता है और recovery में मदद करता है।

कैसे करें:

  • घुटनों के बल बैठें।
  • शरीर को आगे की ओर झुकाएं।
  • माथे को जमीन या cushion पर टिकाएं।
  • 6–10 गहरी सांसों तक इसी स्थिति में रहें।

Beginners को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे बड़ी गलती है शरीर को जरूरत से ज्यादा push करना। Yoga कभी भी दर्द देने वाला नहीं होना चाहिए।

इन गलतियों से बचें:

  • जबरदस्ती deep stretch करना
  • Joints को lock करना
  • Bounce करते हुए stretch करना
  • बिना तैयारी के difficult backbends और inversions करना

अगर कोई pose blocked महसूस हो तो शरीर को force करने के बजाय modifications का इस्तेमाल करें।

कितनी बार Yoga करना चाहिए?

विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे sessions से ज्यादा जरूरी है consistency। रोज सिर्फ 10–15 मिनट योग करने से भी शरीर की flexibility, posture और mobility में बड़ा बदलाव आ सकता है।

अगर समय हो तो 45–60 मिनट का complete session जिसमें breathing exercises और relaxation शामिल हों, और भी बेहतर माना जाता है।

योग की शुरुआत करने के लिए आपको सिर्फ थोड़ा-सा खाली स्थान, एक योग मैट और नियमित अभ्यास की जरूरत है। धीरे-धीरे शरीर खुद बेहतर तरीके से respond करने लगता है।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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रोज नारियल पानी पीने से स्किन पर कितना असर पड़ता है? जानिए सच्चाई

नई दिल्ली, एजेंसियां। नेचुरली ग्लोइंग और हेल्दी स्किन पाने के लिए लोग तरह-तरह के घरेलू उपाय अपनाते हैं, जिनमें नारियल पानी को काफी फायदेमंद माना जाता है। अक्सर यह दावा किया जाता है कि रोज नारियल पानी पीने से स्किन की क्वालिटी में बड़ा सुधार होता है और चेहरा चमकने लगता है।   शरीर को अंदर से हाइड्रेट करता है नारियल पानी नारियल पानी में 90 प्रतिशत से ज्यादा पानी होता है, साथ ही इसमें पोटैशियम, सोडियम और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स पाए जाते हैं। यह शरीर को अंदर से हाइड्रेट करने में मदद करता है, जिससे स्किन ड्राई और बेजान नहीं रहती। पर्याप्त हाइड्रेशन के कारण त्वचा सॉफ्ट और फ्रेश नजर आने लगती है।   पिंपल्स और दाग-धब्बों में मिल सकती है राहत विशेषज्ञों के अनुसार, नारियल पानी शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है और इसमें मौजूद एंटी-माइक्रोबियल गुण स्किन इंफेक्शन से लड़ने में सहायक हो सकते हैं। इससे पिंपल्स और दाग-धब्बों की समस्या में कुछ हद तक सुधार देखने को मिल सकता है, खासकर जब इसे नियमित रूप से संतुलित डाइट के साथ लिया जाए।   एंटी-एजिंग गुणों का भी दावा नारियल पानी में साइटोकिनिन जैसे तत्व पाए जाने की बात कही जाती है, जो कोशिकाओं के विकास और एजिंग प्रोसेस को धीमा करने में मदद कर सकते हैं। इससे त्वचा पर झुर्रियां और फाइन लाइन्स कम होने का दावा किया जाता है, जिससे स्किन लंबे समय तक यंग दिख सकती है।   स्किन के लिए सेवन का सही तरीका नारियल पानी का सेवन दिन में किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन इसे सुबह खाली पेट पीना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है क्योंकि शरीर पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से अवशोषित करता है। इसे वर्कआउट के बाद एनर्जी ड्रिंक के रूप में भी लिया जा सकता है।   क्या यह जादुई इलाज है? हालांकि नारियल पानी स्किन के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसे किसी “मैजिक सोल्यूशन” की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। स्किन की सेहत मुख्य रूप से डाइट, पानी, लाइफस्टाइल और स्किन केयर रूटीन पर निर्भर करती है। संतुलित जीवनशैली के साथ नारियल पानी निश्चित रूप से स्किन हेल्थ को सपोर्ट कर सकता है।

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लगातार कमर दर्द में कब जरूरी होता है MRI टेस्ट? डॉक्टर से जानिए क्यों नहीं करना चाहिए नजरअंदाज

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, घंटों बैठकर काम करने की आदत और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कमर और जोड़ों का दर्द आम समस्या बन गया है। अक्सर लोग दर्द निवारक दवाओं के सहारे अस्थायी राहत तो पा लेते हैं, लेकिन लगातार बने रहने वाले दर्द को नजरअंदाज करना कई बार गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर MRI (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) कराने की सलाह दे सकते हैं, जिससे दर्द के वास्तविक कारण का पता लगाया जा सके। MRI क्या है और यह कैसे काम करता है? MRI एक नॉन-इनवेसिव स्कैनिंग तकनीक है, जिसमें शरीर के अंदर की विस्तृत तस्वीरें लेने के लिए मैग्नेटिक फील्ड और रेडियो वेव्स का उपयोग किया जाता है। यह रीढ़ की हड्डी, नसों, मांसपेशियों, लिगामेंट्स और अन्य सॉफ्ट टिश्यू की स्थिति को विस्तार से दिखाने में मदद करता है। किन स्थितियों में कमर दर्द के लिए MRI की जरूरत पड़ती है? 1. इलाज के बाद भी दर्द बना रहे अगर आराम, दवाओं, फिजियोथेरेपी और जीवनशैली में बदलाव के बावजूद दर्द लंबे समय तक बना रहे, तो डॉक्टर डिस्क की समस्या, नसों पर दबाव या सॉफ्ट टिश्यू की बीमारी का पता लगाने के लिए MRI कराने की सलाह दे सकते हैं। 2. दर्द के साथ नसों से जुड़े लक्षण दिखाई दें यदि कमर दर्द के साथ निम्न समस्याएं भी हों, तो MRI जरूरी हो सकता है— दर्द का हाथों या पैरों तक फैलना सुन्नपन या झनझनाहट कमजोरी महसूस होना चलने-फिरने में परेशानी हाथों की पकड़ कमजोर होना ये लक्षण स्लिप डिस्क, स्पाइनल स्टेनोसिस या नसों पर दबाव जैसी गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकते हैं। 3. चोट या अंदरूनी नुकसान की आशंका हो यदि किसी दुर्घटना, खेल या अन्य कारणों से लिगामेंट, कार्टिलेज, मेनिस्कस या रोटेटर कफ को नुकसान पहुंचने की आशंका हो, तो MRI सबसे प्रभावी जांच मानी जाती है। X-ray केवल हड्डियों की स्थिति दिखाता है, जबकि MRI सॉफ्ट टिश्यू की विस्तृत जानकारी देता है। 4. गंभीर बीमारी के संकेत दिखाई दें यदि कमर दर्द के साथ— बुखार अचानक वजन कम होना कैंसर का पुराना इतिहास संक्रमण की आशंका ऑस्टियोपोरोसिस लंबे समय तक स्टेरॉयड का उपयोग जैसी स्थितियां मौजूद हों, तो MRI तुरंत करवाने की आवश्यकता पड़ सकती है। MRI किन समस्याओं की पहचान में मदद करता है? स्लिप्ड डिस्क और नसों पर दबाव लिगामेंट और कार्टिलेज की चोट घुटने और कंधे की स्पोर्ट्स इंजरी स्पाइनल इंफेक्शन ट्यूमर इंफ्लेमेटरी अर्थराइटिस अस्पष्ट और गंभीर दर्द के कारण क्या हर कमर दर्द में MRI जरूरी है? विशेषज्ञों के अनुसार, नहीं। शुरुआती चरण में हर मरीज को MRI कराने की आवश्यकता नहीं होती। कई बार MRI में दिखाई देने वाले बदलाव वास्तविक दर्द का कारण नहीं होते, जिससे अनावश्यक भ्रम पैदा हो सकता है। इसलिए डॉक्टर मरीज के लक्षण, शारीरिक जांच, उपचार के परिणाम और दर्द की गंभीरता को ध्यान में रखकर ही MRI की सलाह देते हैं। कब नहीं करनी चाहिए लापरवाही? यदि दर्द लगातार बढ़ रहा हो, लंबे समय तक बना रहे, चोट के बाद शुरू हुआ हो या अन्य गंभीर लक्षणों के साथ दिखाई दे रहा हो, तो डॉक्टर से तुरंत परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच और सही इलाज से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।  

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Jharkhand CHC Upgrade
झारखंड के 188 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होंगे अपग्रेड, ग्रामीणों को मिलेगी बेहतर आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा

रांची। झारखंड सरकार ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य के सभी 188 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को चरणबद्ध तरीके से फर्स्ट रेफरल यूनिट (FRU) में अपग्रेड किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर और त्वरित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि मरीजों को छोटी-बड़ी आपात स्थितियों में जिला अस्पतालों या रिम्स जैसे बड़े संस्थानों पर निर्भर न रहना पड़े। पहले चरण में 20 CHC का होगा कायाकल्प स्वास्थ्य विभाग ने पहले चरण में 20 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को मॉडल एफआरयू के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इन केंद्रों में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी और इनके अनुभव के आधार पर शेष 168 केंद्रों का भी उन्नयन किया जाएगा। इस परियोजना को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (NHSRC), नई दिल्ली की ओर से विशेष ऑनलाइन ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। आईपीएचएस मानकों के अनुरूप होगा विकास मातृत्व स्वास्थ्य कार्यक्रम की राज्य नोडल पदाधिकारी Dr Pushpa के अनुसार सभी चयनित केंद्रों को भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक (IPHS) के अनुरूप विकसित किया जाएगा। इन अस्पतालों में बुनियादी ढांचे, डॉक्टरों की उपलब्धता, दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों को 50 से 80 प्रतिशत तक उन्नत किया जाएगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा। गैप एनालिसिस से दूर होंगी कमियां राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक Shashi Prakash Jha ने सभी केंद्रों में व्यापक गैप एनालिसिस कराने का निर्देश दिया है। इसके आधार पर आवश्यक मानव संसाधन, उपकरण और बुनियादी सुविधाओं की कमी को दूर किया जाएगा और केंद्रों को राष्ट्रीय प्रमाणन के लिए तैयार किया जाएगा। 24 घंटे मिलेंगी आपातकालीन सेवाएं आईईसी के राज्य नोडल पदाधिकारी Dr Rahul Kishore Singh ने बताया कि एफआरयू बनने के बाद इन केंद्रों में 24 घंटे आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। साथ ही ब्लड स्टोरेज, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, जटिल प्रसव और सिजेरियन ऑपरेशन जैसी सुविधाएं भी स्थानीय स्तर पर मिल सकेंगी। इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के साथ-साथ ग्रामीण मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

Unknown जून 9, 2026 0
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