Yoga Poses

Woman practicing relaxing yoga poses at home to reduce stress, calm the mind and promote physical relaxation.
तनाव और स्ट्रेस को कम करने में मदद कर सकते हैं ये 7 योगासन, शरीर को भी मिलेगा सुकून

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव कई लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। काम का दबाव, नींद की कमी और लगातार सोचते रहने की आदत शरीर और दिमाग दोनों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में योग और धीमी सांसों पर ध्यान देना तनाव से निपटने का एक आसान तरीका हो सकता है। हालांकि, योग का उद्देश्य शरीर में कॉर्टिसोल को पूरी तरह खत्म करना नहीं है। कॉर्टिसोल शरीर के लिए जरूरी हार्मोन है, जो तनाव प्रतिक्रिया, मेटाबॉलिज्म, सूजन और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भूमिका निभाता है। नियमित योग अभ्यास शरीर की तनाव प्रतिक्रिया को बेहतर तरीके से संभालने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, रोजाना केवल 5 से 10 मिनट का हल्का योग अभ्यास भी शरीर को रिलैक्स करने और मानसिक तनाव कम करने में मददगार हो सकता है। आइए जानते हैं ऐसे 7 योगासन, जिन्हें तनाव के समय आजमाया जा सकता है। 1. बालासन यानी चाइल्ड पोज बालासन एक आरामदायक योगासन है, जिसे तनाव और थकान के दौरान किया जा सकता है। कैसे करें: घुटनों के बल बैठकर कूल्हों को एड़ियों की तरफ ले जाएं। घुटनों को अपनी सुविधा के अनुसार थोड़ा अलग रखें। शरीर को धीरे-धीरे आगे की ओर झुकाएं। माथे को जमीन या कुशन पर टिकाएं। हाथों को आगे फैलाएं या शरीर के पास आराम से रखें। कुछ देर सामान्य और धीमी सांस लेते रहें। फायदा: यह शरीर पर ज्यादा दबाव डाले बिना आराम करने का मौका देता है। इससे मानसिक तनाव के दौरान शरीर और दिमाग को शांत महसूस करने में मदद मिल सकती है। 2. मार्जरी आसन-बिटिलासन यानी कैट-काउ पोज यह योगासन सांस और शरीर की गतिविधि को एक साथ जोड़ता है। तनाव के समय इसे धीरे-धीरे करना बेहतर माना जाता है। कैसे करें: हाथों और घुटनों के बल आ जाएं। हथेलियां कंधों के नीचे और घुटने कूल्हों के नीचे रखें। सांस लेते हुए पेट को नीचे की ओर ले जाएं और छाती को ऊपर उठाएं। सांस छोड़ते हुए पीठ को गोल करें और ठुड्डी को हल्का अंदर की ओर करें। इस प्रक्रिया को 5 से 10 बार धीरे-धीरे दोहराएं। फायदा: सांस के साथ नियंत्रित मूवमेंट शरीर में जमा तनाव को कम करने और मन को शांत करने में मदद कर सकता है। 3. विपरीत करणी यानी लेग्स-अप-द-वॉल पोज यह एक आसान और कम मेहनत वाला योगासन है, जिसमें पैरों को दीवार के सहारे ऊपर रखा जाता है। कैसे करें: दीवार के पास एक तरफ बैठें। धीरे से पीठ के बल लेटते हुए दोनों पैरों को दीवार पर ऊपर करें। शरीर को ऐसी स्थिति में रखें जिसमें आपको आराम महसूस हो। हाथों को शरीर के दोनों तरफ रखें। कंधों और जबड़े को ढीला छोड़ते हुए सामान्य सांस लें। कुछ मिनट इसी स्थिति में आराम करें। फायदा: इस मुद्रा में शरीर को स्थिर रखने और सांस पर ध्यान देने से तनावपूर्ण स्थिति से बाहर आने में मदद मिल सकती है। 4. पश्चिमोत्तानासन यानी सीटेड फॉरवर्ड बेंड यह आसन शरीर को धीरे-धीरे आगे की ओर झुकाने पर आधारित है। इसे करते समय अपनी क्षमता से ज्यादा खिंचाव देने से बचना चाहिए। कैसे करें: दोनों पैर सामने की ओर सीधे करके बैठें। जरूरत महसूस हो तो घुटनों को थोड़ा मोड़ लें। रीढ़ को सीधा रखते हुए कूल्हों से आगे की ओर झुकें। हाथों को जांघों, पिंडलियों, टखनों या पैरों पर आराम से रखें। कुछ धीमी सांसों तक इसी स्थिति में रहें। फायदा: यह शरीर में तनाव के कारण पैदा हुई मांसपेशियों की जकड़न को कम करने में मदद कर सकता है। इस आसन में पैरों के पंजों को छूना जरूरी नहीं है। 5. शवासन यानी कॉर्प्स पोज शवासन बेहद सरल योग मुद्रा है, लेकिन मानसिक और शारीरिक आराम के लिए इसे काफी उपयोगी माना जाता है। कैसे करें: पीठ के बल आराम से लेट जाएं। पैरों के बीच थोड़ा अंतर रखें। हाथों को शरीर से थोड़ा दूर रखें और हथेलियों को ऊपर की ओर रखें। आंखें बंद कर सकते हैं। कंधे, जबड़े, पेट, हाथ और पैरों को ढीला छोड़ दें। सांस को सामान्य रखें और ध्यान धीरे-धीरे सांसों पर लाएं। फायदा: इसमें शरीर को किसी खास मुद्रा में बनाए रखने की जरूरत नहीं होती। इससे तनाव और मांसपेशियों के खिंचाव को कम करने में मदद मिल सकती है। 6. सेतु बंधासन यानी ब्रिज पोज सेतु बंधासन में शरीर के निचले हिस्से को सक्रिय रखते हुए छाती को हल्का स्ट्रेच किया जाता है। कैसे करें: पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ें। दोनों पैरों को जमीन पर कूल्हों की चौड़ाई के बराबर रखें। हाथों को शरीर के दोनों तरफ रखें। पैरों पर दबाव डालते हुए कूल्हों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं। घुटनों को सामने की ओर रखें। कुछ सांसों तक रुकने के बाद धीरे-धीरे वापस नीचे आएं। फायदा: यह छाती और शरीर के निचले हिस्से को स्ट्रेच करने के साथ तनाव और बेचैनी को संभालने में मदद कर सकता है। 7. उत्तानासन यानी स्टैंडिंग फॉरवर्ड बेंड उत्तानासन में खड़े होकर शरीर के ऊपरी हिस्से को आगे की तरफ झुकाया जाता है। इसे करते समय घुटनों को हल्का मोड़ना बिल्कुल ठीक है। कैसे करें: पैरों को कूल्हों की चौड़ाई के बराबर रखकर खड़े हों। घुटनों को थोड़ा ढीला रखें। कूल्हों से आगे की ओर झुकें। सिर और गर्दन को आराम की स्थिति में छोड़ दें। हाथों को नीचे लटका रहने दें या जरूरत हो तो किसी सपोर्ट का इस्तेमाल करें। कुछ सांसों के बाद धीरे-धीरे वापस खड़े हों। फायदा: यह शरीर में मौजूद मांसपेशियों के तनाव को कम करने और थकान की भावना को संभालने में मदद कर सकता है। सिर्फ कॉर्टिसोल कम करना योग का मकसद नहीं आजकल कॉर्टिसोल को लेकर काफी चर्चा होती है, लेकिन शरीर को स्वस्थ रखने के लिए इस हार्मोन की सामान्य भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए योग को केवल कॉर्टिसोल का स्तर कम करने के तरीके के तौर पर देखना सही नहीं होगा। योग का ज्यादा महत्वपूर्ण फायदा यह है कि यह व्यक्ति को सांस, शरीर की गतिविधियों और वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकता है। नियमित अभ्यास से तनाव को संभालने की क्षमता बेहतर हो सकती है। 5 मिनट से करें शुरुआत अगर आपके पास लंबे योग सत्र के लिए समय नहीं है, तो शुरुआत केवल 5 से 10 मिनट से की जा सकती है। हल्की स्ट्रेचिंग, धीमी सांस और कुछ रिलैक्सिंग योगासन तनावपूर्ण दिन में शरीर को शांत होने का मौका दे सकते हैं। हालांकि, हर योग मुद्रा हर व्यक्ति के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं होती। अगर किसी आसन को करने में दर्द, असहजता या ज्यादा खिंचाव महसूस हो तो उसे जबरदस्ती नहीं करना चाहिए। खासकर पहले से किसी शारीरिक समस्या से जूझ रहे लोगों को योग शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। नोट: यह लेख उपलब्ध स्रोत की जानकारी पर आधारित है। योग किसी बीमारी का इलाज नहीं है; लगातार या गंभीर तनाव की स्थिति में योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।    

surbhi अगस्त 14, 2026 0
Beginners practicing easy yoga poses at home to improve flexibility and reduce body stiffness naturally
घर पर करें ये आसान Yoga Poses, शरीर की जकड़न होगी दूर और बढ़ेगी Flexibility

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में घंटों कुर्सी पर बैठना, लैपटॉप और मोबाइल स्क्रीन पर झुके रहना और शारीरिक गतिविधियों की कमी हमारे शरीर को धीरे-धीरे अकड़ा हुआ बना देती है। कमर दर्द, कंधों में जकड़न, टाइट हैमस्ट्रिंग और खराब पोश्चर जैसी समस्याएं अब बेहद आम हो चुकी हैं। ऐसे में योग न केवल शरीर को लचीला बनाने में मदद करता है, बल्कि मानसिक तनाव को कम करने और शरीर की मूवमेंट को बेहतर बनाने में भी कारगर साबित होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, Flexibility का मतलब सिर्फ स्प्लिट्स करना या कठिन योगासन करना नहीं है। असली उद्देश्य है रोजमर्रा की जिंदगी में शरीर को बिना दर्द और जकड़न के आसानी से मूव कर पाना। नियमित योग अभ्यास से शरीर की Mobility बेहतर होती है, यानी जोड़ों और मांसपेशियों की मूवमेंट अधिक सहज हो जाती है। वेलनेस एक्सपर्ट्स का कहना है कि शुरुआत करने वालों को योग को किसी प्रतियोगिता की तरह नहीं लेना चाहिए। शरीर को जबरदस्ती स्ट्रेच करने के बजाय धीरे-धीरे कंट्रोल्ड मूवमेंट पर ध्यान देना जरूरी है। शरीर में जकड़न क्यों होती है? लंबे समय तक बैठे रहने से हिप फ्लेक्सर्स टाइट हो जाते हैं। लगातार स्क्रीन देखने से गर्दन और कंधों पर दबाव बढ़ता है और पोश्चर बिगड़ता है। वहीं, एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग की कमी जोड़ों की मूवमेंट को सीमित कर देती है। यही वजह है कि आजकल Flexibility और Mobility दोनों पर एक साथ काम करने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती लोगों में सबसे ज्यादा जकड़न इन हिस्सों में देखने को मिलती है: Hips Hamstrings Shoulders Spine Ankles इन हिस्सों की जकड़न के कारण आगे झुकना, बैठना, स्क्वाट करना और लंबे समय तक चलना तक मुश्किल हो सकता है। Yoga करने का सही समय क्या है? योग करने का कोई एक तय समय नहीं है। यह आपकी दिनचर्या और शरीर की जरूरत पर निर्भर करता है। सुबह योग करने से शरीर की stiffness कम होती है और एनर्जी मिलती है। शाम को योग करने से दिनभर की थकान और तनाव कम होता है। Workout के after stretching करने से muscles ज्यादा effectively खुलती हैं क्योंकि शरीर पहले से warm होता है। Beginners के लिए 5 आसान Yoga Poses 1. Cat-Cow Pose यह pose spine को gently activate करता है और लंबे समय तक बैठने से हुई stiffness को कम करने में मदद करता है। कैसे करें: हाथों और घुटनों के बल आएं। सांस अंदर लेते हुए पेट नीचे करें और छाती ऊपर उठाएं। सांस छोड़ते हुए पीठ को गोल करें और ठुड्डी अंदर की ओर लाएं। इसे 8–10 बार धीरे-धीरे दोहराएं। 2. Downward Facing Dog यह pose shoulders, calves, hamstrings और spine को stretch करता है। कैसे करें: हाथ और पैरों के बल शरीर को उल्टे V आकार में उठाएं। घुटनों को थोड़ा मोड़कर रखें। Spine को लंबा करने पर फोकस करें। Beginner Tip: अगर heels जमीन तक नहीं पहुंचतीं तो चिंता न करें। शुरुआत में knees bend रखना बिल्कुल ठीक है। 3. Low Lunge यह pose लंबे समय तक बैठने से tight हुए hips और lower back को खोलने में मदद करता है। कैसे करें: एक पैर आगे रखें और दूसरा घुटना जमीन पर टिकाएं। Front knee को ankle के ऊपर रखें। धीरे-धीरे hips को आगे की तरफ ले जाएं। 20–30 सेकंड तक hold करें। 4. Cobra Pose यह pose chest और shoulders खोलता है, posture सुधारता है और spine को मजबूत बनाता है। कैसे करें: पेट के बल लेट जाएं। हथेलियों को ribs के पास रखें। सांस लेते हुए धीरे-धीरे chest उठाएं। कंधों को relaxed रखें। Beginner Tip: हाथों पर ज्यादा जोर देने के बजाय back muscles का इस्तेमाल करें। 5. Child’s Pose यह pose शरीर और दिमाग दोनों को रिलैक्स करता है और recovery में मदद करता है। कैसे करें: घुटनों के बल बैठें। शरीर को आगे की ओर झुकाएं। माथे को जमीन या cushion पर टिकाएं। 6–10 गहरी सांसों तक इसी स्थिति में रहें। Beginners को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे बड़ी गलती है शरीर को जरूरत से ज्यादा push करना। Yoga कभी भी दर्द देने वाला नहीं होना चाहिए। इन गलतियों से बचें: जबरदस्ती deep stretch करना Joints को lock करना Bounce करते हुए stretch करना बिना तैयारी के difficult backbends और inversions करना अगर कोई pose blocked महसूस हो तो शरीर को force करने के बजाय modifications का इस्तेमाल करें। कितनी बार Yoga करना चाहिए? विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे sessions से ज्यादा जरूरी है consistency। रोज सिर्फ 10–15 मिनट योग करने से भी शरीर की flexibility, posture और mobility में बड़ा बदलाव आ सकता है। अगर समय हो तो 45–60 मिनट का complete session जिसमें breathing exercises और relaxation शामिल हों, और भी बेहतर माना जाता है। योग की शुरुआत करने के लिए आपको सिर्फ थोड़ा-सा खाली स्थान, एक योग मैट और नियमित अभ्यास की जरूरत है। धीरे-धीरे शरीर खुद बेहतर तरीके से respond करने लगता है।  

surbhi मई 22, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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संसद में फिर आमने-सामने सरकार और विपक्ष, अमित शाह के जवाब को लेकर सियासी घमासान; NDA की 'मंगल मिलन' रणनीति से राहुल गांधी पर निशाना

surbhi अगस्त 11, 2026 0