Fitness Tips

Blood sugar testing and healthy lifestyle habits explained for better diabetes management.
मीठा छोड़ने के बाद भी कंट्रोल नहीं हो रहा ब्लड शुगर? जानिए डायबिटीज मैनेज करने का सही तरीका

आज के समय में डायबिटीज भारत में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन चुकी है। मोटापा, अनियमित खानपान और खराब लाइफस्टाइल के कारण बड़ी संख्या में लोग इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। आमतौर पर लोगों के बीच यह धारणा बनी हुई है कि डायबिटीज सिर्फ ज्यादा चीनी या मिठाई खाने से होती है और अगर चीनी खाना बंद कर दिया जाए तो ब्लड शुगर पूरी तरह नियंत्रित हो जाएगा। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सच्चाई इससे कहीं ज्यादा जटिल है। क्या सिर्फ चीनी खाने से होती है डायबिटीज? विशेषज्ञों के अनुसार, टाइप-2 डायबिटीज केवल चीनी खाने से नहीं होती। यह एक मेटाबॉलिक बीमारी है, जिसमें इंसुलिन रेजिस्टेंस, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, तनाव, आनुवंशिक कारण और असंतुलित आहार जैसी कई चीजें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं, तो ब्लड में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने लगता है। लंबे समय तक यही स्थिति टाइप-2 डायबिटीज का कारण बन सकती है। इंसुलिन रेजिस्टेंस क्या है? इंसुलिन एक हार्मोन है, जो पैंक्रियाज द्वारा बनाया जाता है और शरीर की कोशिकाओं तक ग्लूकोज पहुंचाने का काम करता है। लेकिन जब शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। इस स्थिति में पैंक्रियाज को अधिक इंसुलिन बनाना पड़ता है और धीरे-धीरे उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है। परिणामस्वरूप ब्लड शुगर बढ़ने लगता है। डायबिटीज के प्रमुख कारण मोटापा और बढ़ा हुआ वजन पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ा सकती है। वजन कम करने से डायबिटीज के जोखिम को काफी हद तक घटाया जा सकता है। शारीरिक गतिविधियों की कमी नियमित व्यायाम न करने से शरीर ग्लूकोज का सही उपयोग नहीं कर पाता, जिससे ब्लड शुगर प्रभावित होता है। पारिवारिक इतिहास यदि माता-पिता, दादा-दादी या अन्य करीबी रिश्तेदारों को डायबिटीज है, तो इस बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। तनाव और नींद की कमी लगातार तनाव और पर्याप्त नींद न लेने से शरीर का हार्मोनल संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ने का जोखिम रहता है। सिर्फ चीनी नहीं, इन चीजों से भी बनाएं दूरी ब्लड शुगर नियंत्रित रखने के लिए केवल मिठाई छोड़ना पर्याप्त नहीं है। इन चीजों का सेवन भी सीमित करना चाहिए— व्हाइट ब्रेड मैदा और उससे बनी चीजें प्रोसेस्ड फूड केक, पेस्ट्री और बेकरी उत्पाद अत्यधिक नमक शुगरी ड्रिंक्स और सॉफ्ट ड्रिंक्स ब्लड शुगर कंट्रोल करने का सही तरीका डायबिटीज को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए इन बातों का पालन जरूरी है— संतुलित और पौष्टिक आहार लें। रोजाना नियमित व्यायाम करें। वजन को नियंत्रित रखें। पर्याप्त नींद लें। तनाव कम करने की कोशिश करें। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं समय पर लें। समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच कराते रहें। डायबिटीज एक बहुआयामी बीमारी है और इसका इलाज सिर्फ चीनी छोड़ने तक सीमित नहीं है। सही जीवनशैली अपनाकर और डॉक्टर की सलाह का पालन करके ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है और भविष्य में होने वाली जटिलताओं के खतरे को कम किया जा सकता है।  

surbhi जून 22, 2026 0
Person relaxing outdoors during weekend therapy with nature, reading and stress-free lifestyle activities
Weekend Therapy: वीकेंड पर अपनाएं ये 6 आसान तरीके, हफ्तेभर की थकान होगी दूर, शरीर और दिमाग दोनों रहेंगे फ्रेश

Weekend Therapy: सिर्फ छुट्टी नहीं, खुद को रीचार्ज करने का मौका है वीकेंड पूरे सप्ताह ऑफिस, पढ़ाई, बिजनेस और घरेलू जिम्मेदारियों के बीच लोग शारीरिक और मानसिक रूप से थक जाते हैं। ऐसे में वीकेंड केवल आराम का दिन नहीं, बल्कि खुद को फिर से ऊर्जा से भरने का अवसर भी होता है। हालांकि कई लोग शनिवार और रविवार का ज्यादातर समय मोबाइल चलाने या देर तक सोने में बिताते हैं, जिससे शरीर और दिमाग को वास्तविक आराम नहीं मिल पाता। यदि आप वीकेंड का सही उपयोग करें तो आने वाले सप्ताह की शुरुआत नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच के साथ कर सकते हैं। 1. पूरी करें अधूरी नींद, लेकिन जरूरत से ज्यादा नहीं कामकाजी दिनों में अक्सर पर्याप्त नींद नहीं मिल पाती। वीकेंड पर शरीर को आराम देने के लिए अच्छी और गहरी नींद लेना जरूरी है। हालांकि बहुत ज्यादा देर तक सोना भी नुकसानदायक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य समय से एक-दो घंटे अधिक आराम करना शरीर और दिमाग को तरोताजा रखने के लिए पर्याप्त होता है। अच्छी नींद मानसिक तनाव कम करने और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करती है। 2. कुछ घंटों के लिए करें डिजिटल डिटॉक्स मोबाइल, लैपटॉप और टीवी की स्क्रीन आज हमारी जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुकी हैं। लगातार सोशल मीडिया और ईमेल्स देखने से दिमाग को आराम नहीं मिल पाता। वीकेंड पर कम से कम चार से पांच घंटे के लिए फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस से दूरी बनाएं। डिजिटल डिटॉक्स से आंखों को आराम मिलता है और मानसिक तनाव भी कम होता है। 3. प्रकृति के करीब बिताएं समय बंद कमरों और व्यस्त शहरों की जिंदगी से निकलकर थोड़ी देर प्रकृति के बीच समय बिताना मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। सुबह या शाम किसी पार्क में टहलना, हरियाली के बीच बैठना या ताजी हवा में गहरी सांस लेना मन को शांति देता है। प्रकृति के संपर्क में रहने से सकारात्मक भावनाएं बढ़ती हैं और तनाव कम होता है। 4. अपने शौक को दें समय भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर अपने पसंदीदा शौक भूल जाते हैं। वीकेंड पर कुछ समय उन गतिविधियों के लिए निकालें जो आपको खुशी देती हैं। चाहे किताब पढ़ना हो, संगीत सुनना, पेंटिंग करना, गार्डनिंग करना या कोई नया हुनर सीखना—अपनी पसंद का काम करने से मन प्रसन्न रहता है और मानसिक दबाव कम होता है। 5. मसाज और गुनगुने पानी से दें शरीर को राहत लगातार काम करने से शरीर की मांसपेशियों में खिंचाव और थकान महसूस हो सकती है। ऐसे में गुनगुने पानी से स्नान करना या हल्के तेल से मसाज करना फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके अलावा गुनगुने पानी में सेंधा नमक डालकर कुछ देर पैर डुबोकर बैठने से भी शरीर को आराम मिलता है। यह तरीका ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करने और शारीरिक थकान कम करने में मदद करता है। 6. परिवार और दोस्तों के साथ बिताएं क्वालिटी टाइम काम का दबाव और व्यस्त दिनचर्या कई बार लोगों को भावनात्मक रूप से भी थका देती है। वीकेंड पर परिवार, दोस्तों या प्रियजनों के साथ समय बिताना मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। खुलकर बातचीत करना, हंसी-मजाक करना और पुरानी यादें साझा करना तनाव कम करने का प्रभावी तरीका माना जाता है। छोटी-छोटी आदतें बदल सकती हैं आपका पूरा वीकेंड वीकेंड का सही इस्तेमाल केवल आराम करने के लिए नहीं, बल्कि खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से बेहतर बनाने के लिए भी किया जा सकता है। यदि आप अच्छी नींद, डिजिटल डिटॉक्स, प्रकृति के साथ समय, अपनी हॉबी, रिलैक्सेशन और अपनों के साथ बातचीत जैसी आदतों को अपनाते हैं, तो न सिर्फ आपकी थकान दूर होगी बल्कि आप नए सप्ताह की शुरुआत भी अधिक उत्साह और ऊर्जा के साथ कर पाएंगे।  

surbhi जून 13, 2026 0
Shilpa Shetty performing plank exercises and yoga poses as part of her fitness routine.
51 की उम्र में भी सुपरफिट हैं शिल्पा शेट्टी, प्लैंक और योग का यह कॉम्बिनेशन है उनकी फिटनेस का राज

बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी कुंद्रा 51 साल की हो चुकी हैं, लेकिन उनकी फिटनेस और एनर्जी आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है। 1993 में फिल्म बाजीगर से अपने करियर की शुरुआत करने वाली शिल्पा ने वर्षों से योग, संतुलित खानपान और नियमित व्यायाम को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाया हुआ है। शिल्पा का मानना है कि फिटनेस केवल शरीर को आकार देने का जरिया नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने का भी माध्यम है। वह हमेशा समग्र स्वास्थ्य (Holistic Wellness) पर जोर देती हैं और साफ-सुथरे खानपान के साथ नियमित शारीरिक गतिविधियों को बेहद महत्वपूर्ण मानती हैं। प्लैंक एक्सरसाइज से बनाती हैं मजबूत कोर हाल ही में शिल्पा शेट्टी ने सोशल मीडिया पर अपने वर्कआउट रूटीन की झलक साझा की थी। इस रूटीन में उन्होंने कई तरह की प्लैंक एक्सरसाइज शामिल की हैं, जिनमें— एक्सटेंडेड आर्म प्लैंक विद हिप एक्सटेंशन साइड एल्बो प्लैंक विद हिप डिप्स एल्बो प्लैंक विद हिप एब्डक्शन और एडडक्शन इन सभी एक्सरसाइज को वह 15-20 रेपिटेशन के तीन सेट में करती हैं। यह रूटीन पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के साथ-साथ कंधों, हाथों, पैरों और पीठ की मांसपेशियों की सहनशक्ति भी बढ़ाता है। सबसे खास बात यह है कि इस पूरे वर्कआउट के लिए केवल एक योगा मैट और करीब 20 मिनट का समय चाहिए। शिल्पा इसे अपनी "वॉशबोर्ड एब्स की रेसिपी" बताती हैं। हालांकि, वह नए लोगों को सलाह देती हैं कि शुरुआत आसान एक्सरसाइज से करें और धीरे-धीरे एडवांस रूटीन की तरफ बढ़ें। योग और मेडिटेशन भी हैं फिटनेस का अहम हिस्सा शिल्पा शेट्टी केवल जिम वर्कआउट पर निर्भर नहीं रहतीं, बल्कि योग और मेडिटेशन को भी अपनी दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती हैं। उनका कहना है कि योग शरीर के साथ-साथ मन और आत्मा को भी संतुलित करता है। सेतु बंधासन से मिलता है मानसिक और शारीरिक लाभ सेतु बंधासन (ब्रिज पोज) गर्दन, कंधों और पीठ को मजबूत बनाने में मदद करता है। यह रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बढ़ाने के साथ तनाव कम करने और मानसिक शांति प्रदान करने में भी सहायक माना जाता है। अर्ध हलासन और नौकासन से मजबूत होती हैं पेट की मांसपेशियां अर्ध हलासन और नौकासन दोनों ही कोर स्ट्रेंथ बढ़ाने वाले प्रमुख योगासन माने जाते हैं। इनसे— पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। पाचन तंत्र बेहतर होता है। रीढ़ की लचक बढ़ती है। शरीर का पोश्चर सुधरता है। आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती में भी वृद्धि होती है। शिल्पा शेट्टी की फिटनेस फिलॉसफी यही संदेश देती है कि नियमित व्यायाम, योग और संतुलित जीवनशैली के जरिए किसी भी उम्र में स्वस्थ और फिट रहा जा सकता है।  

surbhi जून 9, 2026 0
Fresh watermelon slices served in summer, known for supporting digestion and gut health.
गर्मियों में गट हेल्थ के लिए वरदान है तरबूज, पाचन सुधारने के साथ देता है कई बड़े फायदे

गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखना और पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। तेज धूप, पसीना और खानपान में बदलाव के कारण कई लोगों को कब्ज, एसिडिटी, पेट फूलना और अपच जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में तरबूज एक ऐसा मौसमी फल है, जो न सिर्फ शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है बल्कि गट हेल्थ को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, तरबूज में 90 प्रतिशत से अधिक पानी होता है, जिससे शरीर लंबे समय तक हाइड्रेटेड रहता है। इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर और अन्य पोषक तत्व पाचन तंत्र को सुचारु रूप से काम करने में सहायता करते हैं। गर्मियों में क्यों खास है तरबूज? तरबूज को समर सुपरफूड माना जाता है। यह हल्का, ताजगी देने वाला और आसानी से पचने वाला फल है। इसके नियमित और संतुलित सेवन से शरीर को ठंडक मिलती है और पेट से जुड़ी कई परेशानियों से राहत मिल सकती है। गट हेल्थ के लिए तरबूज के 5 बड़े फायदे 1. पाचन तंत्र को रखता है बेहतर तरबूज में मौजूद भरपूर पानी पाचन क्रिया को सुचारु बनाए रखने में मदद करता है। यह मल को नरम बनाता है और नियमित मल त्याग में सहायक होता है। 2. आसानी से पच जाता है यह फल हल्का होता है और शरीर इसे जल्दी पचा लेता है। इसलिए जिन लोगों को अपच, पेट फूलना या एसिडिटी की समस्या रहती है, उनके लिए यह फायदेमंद माना जाता है। 3. फाइबर का अच्छा स्रोत तरबूज में मौजूद फाइबर आंतों की कार्यप्रणाली को सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है। इससे कब्ज की समस्या को कम करने में सहायता मिल सकती है। 4. शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाता है गर्मी के मौसम में शरीर का तापमान बढ़ने पर एसिडिटी और पेट में जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। तरबूज का कूलिंग इफेक्ट शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मदद करता है। 5. हल्की ऊर्जा भी देता है इसमें मौजूद प्राकृतिक शुगर शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है, लेकिन पेट पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालती। किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए? हालांकि तरबूज स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन पेट फूलने, गैस या दस्त जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसे सीमित मात्रा में खाएं और भारी भोजन के तुरंत बाद इसका सेवन करने से बचें।  

surbhi जून 9, 2026 0
Person performing Navasana yoga pose to strengthen core muscles and improve balance
100 सिट-अप्स से भी ज्यादा असरदार है यह योगासन, पेट की चर्बी घटाने के साथ Cortisol भी करता है कम

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य दोनों ही लोगों की प्राथमिकता बन चुके हैं। ऐसे में योग का एक खास आसन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसे विशेषज्ञ 100 पारंपरिक सिट-अप्स के बराबर प्रभावी मानते हैं। यह आसन है नौकासन (Navasana) या Boat Pose, जो न केवल पेट और कोर मसल्स को मजबूत बनाता है बल्कि तनाव कम करने और शरीर को संतुलित रखने में भी मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, नौकासन शरीर की गहरी मांसपेशियों पर काम करता है और नियमित अभ्यास से शरीर की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार लाता है। यही कारण है कि इसे योग की सबसे प्रभावशाली कोर-स्ट्रेंथ एक्सरसाइज में गिना जाता है। 100 सिट-अप्स जितना असरदार क्यों माना जाता है नौकासन? अमेरिका की Auburn University at Montgomery द्वारा किए गए एक अध्ययन में नौकासन को योग और पिलेट्स की सबसे प्रभावी कोर एक्सरसाइज में शामिल किया गया। प्रसिद्ध योग शिक्षक Sharath Jois का मानना था कि यदि कोई व्यक्ति इस आसन को 25 गहरी सांसों तक सही तरीके से होल्ड करता है, तो इसका प्रभाव 100 पारंपरिक सिट-अप्स के बराबर हो सकता है। पेट, पीठ और कूल्हों को बनाता है मजबूत योग प्रशिक्षकों के अनुसार, नौकासन केवल एब्स तक सीमित नहीं है। यह पेट की मांसपेशियों, हिप फ्लेक्सर्स, ग्लूट्स, पेल्विक मसल्स और पीठ को भी मजबूत करता है। इस आसन के दौरान कोर को सक्रिय रखने से पेट के अंदरूनी अंगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे पाचन तंत्र बेहतर काम करता है और मेटाबॉलिज्म को भी समर्थन मिलता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित अभ्यास पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी कम करने में भी सहायक हो सकता है। तनाव कम करने में भी मददगार नौकासन का फायदा केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है। यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। साल 2023 में जर्नल Biomedicine में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि नियमित योग और ध्यान का अभ्यास करने वाले छात्रों में छह सप्ताह के भीतर कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर कम हुआ। नौकासन करते समय संतुलन बनाए रखना, सांसों को नियंत्रित करना और मन को केंद्रित रखना पड़ता है। यही प्रक्रिया तंत्रिका तंत्र को शांत करने और तनाव को नियंत्रित करने में मदद करती है। दिमाग की क्षमता भी बढ़ाता है नौकासन एक ऐसा आसन है जिसमें शरीर को संतुलन और स्थिरता दोनों बनाए रखनी होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के बैलेंसिंग अभ्यास मस्तिष्क और शरीर के बीच समन्वय को मजबूत करते हैं। नियमित अभ्यास से एकाग्रता, फोकस और न्यूरोमस्कुलर कनेक्शन बेहतर होता है। यही वजह है कि इसे शरीर और मन दोनों के लिए फायदेमंद माना जाता है। नौकासन करने का सही तरीका जमीन पर सीधे बैठ जाएं और पैरों को सामने फैलाएं। घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन से ऊपर उठाएं। धीरे-धीरे पैरों को सीधा करके शरीर को V आकार में लाने का प्रयास करें। रीढ़ को सीधा रखें और छाती को खुला रखें। दोनों हाथों को सामने की ओर फैलाएं। नजर हल्की ऊपर रखें और कोर को सक्रिय रखें। 5 से 10 गहरी सांसों तक इस स्थिति में बने रहें। आराम करें और 3 से 5 बार दोहराएं। शुरुआती लोग घुटनों को मोड़कर आसान रूप में भी इसका अभ्यास कर सकते हैं। इन गलतियों से बचें पीठ को गोल कर लेना सांस रोककर रखना कंधों में अनावश्यक तनाव पैदा करना क्षमता से अधिक पैरों को ऊपर उठाने की कोशिश करना विशेषज्ञों का कहना है कि इस आसन में ऊंचाई से ज्यादा स्थिरता महत्वपूर्ण होती है। किन लोगों को नहीं करना चाहिए नौकासन? निम्न समस्याओं से जूझ रहे लोगों को विशेषज्ञ की सलाह के बिना नौकासन नहीं करना चाहिए: कमर की गंभीर चोट हिप फ्लेक्सर स्ट्रेन हर्निया हाल ही में हुई पेट की सर्जरी गर्भावस्था के कुछ चरण

surbhi जून 8, 2026 0
Beginners practicing easy yoga poses at home to improve flexibility and reduce body stiffness naturally
घर पर करें ये आसान Yoga Poses, शरीर की जकड़न होगी दूर और बढ़ेगी Flexibility

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में घंटों कुर्सी पर बैठना, लैपटॉप और मोबाइल स्क्रीन पर झुके रहना और शारीरिक गतिविधियों की कमी हमारे शरीर को धीरे-धीरे अकड़ा हुआ बना देती है। कमर दर्द, कंधों में जकड़न, टाइट हैमस्ट्रिंग और खराब पोश्चर जैसी समस्याएं अब बेहद आम हो चुकी हैं। ऐसे में योग न केवल शरीर को लचीला बनाने में मदद करता है, बल्कि मानसिक तनाव को कम करने और शरीर की मूवमेंट को बेहतर बनाने में भी कारगर साबित होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, Flexibility का मतलब सिर्फ स्प्लिट्स करना या कठिन योगासन करना नहीं है। असली उद्देश्य है रोजमर्रा की जिंदगी में शरीर को बिना दर्द और जकड़न के आसानी से मूव कर पाना। नियमित योग अभ्यास से शरीर की Mobility बेहतर होती है, यानी जोड़ों और मांसपेशियों की मूवमेंट अधिक सहज हो जाती है। वेलनेस एक्सपर्ट्स का कहना है कि शुरुआत करने वालों को योग को किसी प्रतियोगिता की तरह नहीं लेना चाहिए। शरीर को जबरदस्ती स्ट्रेच करने के बजाय धीरे-धीरे कंट्रोल्ड मूवमेंट पर ध्यान देना जरूरी है। शरीर में जकड़न क्यों होती है? लंबे समय तक बैठे रहने से हिप फ्लेक्सर्स टाइट हो जाते हैं। लगातार स्क्रीन देखने से गर्दन और कंधों पर दबाव बढ़ता है और पोश्चर बिगड़ता है। वहीं, एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग की कमी जोड़ों की मूवमेंट को सीमित कर देती है। यही वजह है कि आजकल Flexibility और Mobility दोनों पर एक साथ काम करने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती लोगों में सबसे ज्यादा जकड़न इन हिस्सों में देखने को मिलती है: Hips Hamstrings Shoulders Spine Ankles इन हिस्सों की जकड़न के कारण आगे झुकना, बैठना, स्क्वाट करना और लंबे समय तक चलना तक मुश्किल हो सकता है। Yoga करने का सही समय क्या है? योग करने का कोई एक तय समय नहीं है। यह आपकी दिनचर्या और शरीर की जरूरत पर निर्भर करता है। सुबह योग करने से शरीर की stiffness कम होती है और एनर्जी मिलती है। शाम को योग करने से दिनभर की थकान और तनाव कम होता है। Workout के after stretching करने से muscles ज्यादा effectively खुलती हैं क्योंकि शरीर पहले से warm होता है। Beginners के लिए 5 आसान Yoga Poses 1. Cat-Cow Pose यह pose spine को gently activate करता है और लंबे समय तक बैठने से हुई stiffness को कम करने में मदद करता है। कैसे करें: हाथों और घुटनों के बल आएं। सांस अंदर लेते हुए पेट नीचे करें और छाती ऊपर उठाएं। सांस छोड़ते हुए पीठ को गोल करें और ठुड्डी अंदर की ओर लाएं। इसे 8–10 बार धीरे-धीरे दोहराएं। 2. Downward Facing Dog यह pose shoulders, calves, hamstrings और spine को stretch करता है। कैसे करें: हाथ और पैरों के बल शरीर को उल्टे V आकार में उठाएं। घुटनों को थोड़ा मोड़कर रखें। Spine को लंबा करने पर फोकस करें। Beginner Tip: अगर heels जमीन तक नहीं पहुंचतीं तो चिंता न करें। शुरुआत में knees bend रखना बिल्कुल ठीक है। 3. Low Lunge यह pose लंबे समय तक बैठने से tight हुए hips और lower back को खोलने में मदद करता है। कैसे करें: एक पैर आगे रखें और दूसरा घुटना जमीन पर टिकाएं। Front knee को ankle के ऊपर रखें। धीरे-धीरे hips को आगे की तरफ ले जाएं। 20–30 सेकंड तक hold करें। 4. Cobra Pose यह pose chest और shoulders खोलता है, posture सुधारता है और spine को मजबूत बनाता है। कैसे करें: पेट के बल लेट जाएं। हथेलियों को ribs के पास रखें। सांस लेते हुए धीरे-धीरे chest उठाएं। कंधों को relaxed रखें। Beginner Tip: हाथों पर ज्यादा जोर देने के बजाय back muscles का इस्तेमाल करें। 5. Child’s Pose यह pose शरीर और दिमाग दोनों को रिलैक्स करता है और recovery में मदद करता है। कैसे करें: घुटनों के बल बैठें। शरीर को आगे की ओर झुकाएं। माथे को जमीन या cushion पर टिकाएं। 6–10 गहरी सांसों तक इसी स्थिति में रहें। Beginners को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे बड़ी गलती है शरीर को जरूरत से ज्यादा push करना। Yoga कभी भी दर्द देने वाला नहीं होना चाहिए। इन गलतियों से बचें: जबरदस्ती deep stretch करना Joints को lock करना Bounce करते हुए stretch करना बिना तैयारी के difficult backbends और inversions करना अगर कोई pose blocked महसूस हो तो शरीर को force करने के बजाय modifications का इस्तेमाल करें। कितनी बार Yoga करना चाहिए? विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे sessions से ज्यादा जरूरी है consistency। रोज सिर्फ 10–15 मिनट योग करने से भी शरीर की flexibility, posture और mobility में बड़ा बदलाव आ सकता है। अगर समय हो तो 45–60 मिनट का complete session जिसमें breathing exercises और relaxation शामिल हों, और भी बेहतर माना जाता है। योग की शुरुआत करने के लिए आपको सिर्फ थोड़ा-सा खाली स्थान, एक योग मैट और नियमित अभ्यास की जरूरत है। धीरे-धीरे शरीर खुद बेहतर तरीके से respond करने लगता है।  

surbhi मई 22, 2026 0
Person doing yoga and pilates alongside gym workout for balanced fitness routine
सिर्फ वेट ट्रेनिंग नहीं, योग और पिलाटेस भी उतने ही जरूरी–लॉन्ग लाइफ और फिटनेस के लिए संतुलित रूटीन का मंत्र

  आज की तेज रफ्तार जिंदगी में फिट रहने के लिए लोग जिम और वेट ट्रेनिंग पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ भारी वजन उठाना ही पर्याप्त नहीं है। Yoga और Pilates जैसे लो-इम्पैक्ट वर्कआउट्स भी उतने ही अहम हैं, खासकर अगर आप लंबी और स्वस्थ जिंदगी चाहते हैं। फिटनेस का सही फॉर्मूला: बैलेंस जरूरी लॉन्गेविटी एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक संतुलित फिटनेस रूटीन में तीन प्रमुख हिस्से होने चाहिए: कार्डियो (जैसे दौड़ना, तैराकी) स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (वेट्स, बॉडीवेट एक्सरसाइज) स्ट्रेचिंग और माइंडफुलनेस (योग और पिलाटेस) विशेषज्ञ Vicente Mera का मानना है कि शरीर को पूरी तरह फिट रखने के लिए इन तीनों का संयोजन जरूरी है। 2:2:1 रूटीन: हफ्ते का स्मार्ट प्लान स्पोर्ट्स साइंस एक्सपर्ट David de la Fuente Franco एक आसान फॉर्मूला सुझाते हैं: 2 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग 2 दिन कार्डियो 1 दिन योग या स्ट्रेचिंग यह संतुलन शरीर को ओवरलोड किए बिना बेहतर रिजल्ट देता है। योग और पिलाटेस क्यों हैं जरूरी फिटनेस ट्रेनर Cristina Merino के अनुसार, योग और पिलाटेस: बैलेंस और स्टेबिलिटी सुधारते हैं बॉडी अवेयरनेस बढ़ाते हैं सही तकनीक और फॉर्म बनाए रखने में मदद करते हैं इससे वेट ट्रेनिंग के दौरान चोट लगने का खतरा कम हो जाता है और परफॉर्मेंस बेहतर होती है। लॉन्गेविटी के लिए योग का योगदान विशेषज्ञ Nigma Talib बताती हैं कि हफ्ते में दो बार 90 मिनट का योग: शरीर में सूजन (inflammation) को 20% तक कम कर सकता है ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करता है मानसिक स्वास्थ्य और सेल्फ-अवेयरनेस को मजबूत बनाता है स्ट्रेचिंग: बेहतर वर्कआउट का आधार ओस्टियोपैथ Francisco Moreno के अनुसार, नियमित स्ट्रेचिंग: मसल्स को लचीला और मजबूत बनाती है चोट का जोखिम कम करती है ब्लड सर्कुलेशन और रिकवरी बेहतर करती है रोजमर्रा के दर्द और जकड़न को कम करती है

surbhi अप्रैल 23, 2026 0
Unhealthy lifestyle habits like stress, poor sleep and screen time causing premature ageing signs
Causes Of Premature Ageing: ये 8 आदतें बना रही हैं आपको समय से पहले बूढ़ा

आजकल लोग फिट रहने के लिए जिम, डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल पर ध्यान दे रहे हैं, लेकिन रोजमर्रा की कुछ छोटी-छोटी आदतें ऐसी हैं, जो चुपचाप एजिंग प्रोसेस को तेज कर रही हैं। उम्र बढ़ना सिर्फ चेहरे की झुर्रियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर के अंदर सेल्स के स्तर पर भी असर डालता है। आइए जानते हैं वो 8 आदतें, जो आपको समय से पहले बूढ़ा बना रही हैं- 1. लंबे समय तक बैठे रहना रोज 8 घंटे से ज्यादा बैठना स्मोकिंग जितना खतरनाक हो सकता है। इससे मेटाबॉलिज्म धीमा होता है और एजिंग तेजी से बढ़ती है। 2. नींद की कमी कम नींद लेने से शरीर सही से रिपेयर नहीं हो पाता, जिससे स्किन, इम्यूनिटी और दिमाग पर असर पड़ता है। 3. लगातार तनाव में रहना लंबे समय तक तनाव रहने से कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो झुर्रियों और कई बीमारियों का कारण बनता है। 4. ज्यादा स्क्रीन टाइम मोबाइल और लैपटॉप का अधिक इस्तेमाल नींद के चक्र को बिगाड़ता है और स्किन को नुकसान पहुंचाता है। 5. पानी कम पीना डिहाइड्रेशन से स्किन ड्राई और बेजान हो जाती है और शरीर के जरूरी फंक्शन धीमे पड़ जाते हैं। 6. ज्यादा चीनी और प्रोसेस्ड फूड अधिक शुगर से शरीर में ग्लाइकेशन बढ़ता है, जिससे स्किन की इलास्टिसिटी कम होती है और झुर्रियां जल्दी आती हैं। 7. स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से दूरी मसल्स उम्र के साथ कम होते हैं। एक्सरसाइज न करने से शरीर कमजोर और सुस्त हो जाता है। 8. सोशल कनेक्शन की कमी अकेलापन और सामाजिक दूरी मेंटल हेल्थ पर असर डालती है और समय से पहले एजिंग का कारण बन सकती है। कैसे बचें इन आदतों से? रोजाना 60 मिनट फिजिकल एक्टिविटी करें 7–8 घंटे की नींद लें स्ट्रेस मैनेज करें (योग/मेडिटेशन) पानी ज्यादा पिएं हेल्दी डाइट अपनाएं स्क्रीन टाइम सीमित करें दोस्तों और परिवार से जुड़े रहें

surbhi मार्च 31, 2026 0
Man with belly fat measuring waist showing need for weight loss and healthy lifestyle
पुरुषों में जिद्दी पेट की चर्बी: कारण, खतरे और कम करने के असरदार तरीके

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पुरुषों के लिए पेट की जिद्दी चर्बी (Stubborn Belly Fat) एक आम लेकिन गंभीर समस्या बन चुकी है। यह सिर्फ दिखने में ही खराब नहीं लगती, बल्कि कई गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकती है। इस विशेष रिपोर्ट में हम विस्तार से समझते हैं कि यह समस्या क्यों होती है, इसके क्या संकेत हैं, और इसे कम करने के लिए कौन-कौन से वैज्ञानिक और व्यावहारिक उपाय अपनाए जा सकते हैं।   क्या हैं जिद्दी पेट की चर्बी के प्रमुख संकेत? पुरुषों में पेट की चर्बी अक्सर सामान्य डाइट या एक्सरसाइज से भी कम नहीं होती। इसके कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं: बाहर निकला हुआ पेट: लगातार डाइट और वर्कआउट के बावजूद पेट कम न होना कमर का बढ़ता घेरा: Waist size में लगातार वृद्धि विसरल फैट (Visceral Fat): यह आंतरिक अंगों के आसपास जमा होता है और सबसे खतरनाक माना जाता है BMI का बढ़ना: सामान्य स्तर (18.5–24.9) से अधिक होना पेट में भारीपन या असहजता मेटाबॉलिक सिंड्रोम के लक्षण: हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, इंसुलिन रेजिस्टेंस   किन कारणों से बढ़ती है पेट की चर्बी? विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं: खराब खानपान: जंक फूड, ज्यादा शुगर और ट्रांस फैट व्यायाम की कमी: बैठकर काम करने वाली जीवनशैली हार्मोनल बदलाव: उम्र बढ़ने के साथ टेस्टोस्टेरोन में कमी तनाव (Stress): ज्यादा कोर्टिसोल हार्मोन चर्बी बढ़ाता है जेनेटिक फैक्टर: कुछ लोगों में यह समस्या वंशानुगत होती है   स्वास्थ्य के लिए कितनी खतरनाक है? पेट की चर्बी को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। इसके गंभीर खतरे हैं: दिल की बीमारियों का बढ़ा जोखिम स्ट्रोक की संभावना टाइप-2 डायबिटीज कुछ कैंसर (कोलन, पैंक्रियास आदि) स्लीप एपनिया जैसी समस्या   कैसे पाएं छुटकारा? अपनाएं ये असरदार उपाय 1. संतुलित डाइट और नियमित एक्सरसाइज हाई प्रोटीन और फाइबर वाली डाइट लें शुगर और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं कार्डियो (जॉगिंग, साइक्लिंग) और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का कॉम्बिनेशन अपनाएं 2. स्ट्रेस मैनेजमेंट योग, मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग अपनाएं पर्याप्त नींद लें (7–8 घंटे) 3. मेडिकल ट्रीटमेंट (डॉक्टर की सलाह से) कुछ दवाएं जैसे Orlistat या Liraglutide मदद कर सकती हैं लेकिन इनका उपयोग विशेषज्ञ की देखरेख में ही करें 4. सर्जरी (आखिरी विकल्प) लिपोसक्शन या टमी टक केवल गंभीर मामलों में और डॉक्टर की सलाह पर

kalpana मार्च 26, 2026 0
Bigg Boss 19 winner Gaurav Khanna showcasing his fitness and natural diet routine at 44
Bigg Boss19 के विनर गौरव खन्ना की फिटनेस का राज: बिना प्रोटीन शेक के भी ऐसे रखते हैं खुद को सुपर फिट

टीवी अभिनेता Gaurav Khanna ने Bigg Boss 19 का खिताब जीतकर एक बार फिर अपनी लोकप्रियता साबित कर दी है। शो के होस्ट Salman Khan ने उन्हें ट्रॉफी के साथ 50 लाख रुपये का पुरस्कार भी दिया। लेकिन जीत के साथ-साथ उनकी फिटनेस भी चर्चा में है। 40 पार की उम्र में भी उनकी फिट बॉडी और एनर्जी ने फैंस को हैरान कर दिया है। कड़ी मेहनत और अनुशासन है फिटनेस का असली राज Gaurav Khanna की फिटनेस किसी शॉर्टकट का नतीजा नहीं, बल्कि सालों की मेहनत और अनुशासन का परिणाम है। कॉलेज के दिनों से ही उन्होंने नियमित वर्कआउट और हेल्दी डाइट को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बना लिया था। करीब पांच साल पहले उन्होंने बड़ा फैसला लेते हुए नॉन-वेज छोड़कर शाकाहारी डाइट अपनाई, जिसमें प्रोटीन की कमी को पौधों से मिलने वाले विकल्पों से पूरा किया। क्या है गौरव खन्ना की डाइट? उनकी डाइट पूरी तरह संतुलित और नेचुरल फूड्स पर आधारित है: बादाम: लंबे समय तक ऊर्जा के लिए ग्रीक योगर्ट: पाचन और गट हेल्थ के लिए क्विनोआ और चना: प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत पनीर (ग्रिल्ड): मसल्स के लिए जरूरी प्रोटीन सोया मिल्क: प्लांट-बेस्ड न्यूट्रिशन खास बात यह है कि Gaurav Khanna प्रोटीन शेक या सप्लीमेंट्स पर ज्यादा निर्भर नहीं रहते, बल्कि नेचुरल डाइट से ही अपनी जरूरत पूरी करते हैं। वर्कआउट रूटीन: फिटनेस का पूरा पैकेज उनकी फिटनेस का दूसरा मजबूत स्तंभ है उनका वर्कआउट रूटीन: सर्किट ट्रेनिंग योग और स्ट्रेचिंग स्पोर्ट्स एक्टिविटी पर्याप्त नींद और हाइड्रेशन गौरव खुद बताते हैं कि उनकी फिटनेस पर बॉलीवुड स्टार Akshay Kumar का भी काफी असर है, जो अपने अनुशासन के लिए जाने जाते हैं। 44 की उम्र में भी शानदार फिटनेस करीब 44 साल की उम्र में Gaurav Khanna जिस तरह खुद को फिट और एक्टिव रखते हैं, वह कई लोगों के लिए प्रेरणा है। उनका मानना है कि फिट रहना एक दिन का काम नहीं, बल्कि लगातार निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
Simple calorie deficit formula for effective weight loss.
वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं? इस सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट का आसान फॉर्मूला सच में करता है काम

  वजन कम करना कई लोगों के लिए आसान नहीं होता। डाइट प्लान, एक्सरसाइज, इंटरमिटेंट फास्टिंग और अलग-अलग सलाह के बीच लोग अक्सर कंफ्यूज हो जाते हैं। लेकिन सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट Dr. Siddhant Bhargava के मुताबिक वजन घटाने का सबसे आसान और वैज्ञानिक तरीका है कैलोरी डेफिसिट बनाना। डॉ. सिद्धांत भार्गव बॉलीवुड सितारों जैसे Alia Bhatt, Ananya Panday और Sara Ali Khan के साथ काम कर चुके हैं। वे हेल्दी मील सर्विस प्लेटफॉर्म Food Darzee के सह-संस्थापक भी हैं।   वजन घटाने का असली नियम: कैलोरी डेफिसिट डॉ. सिद्धांत के अनुसार, वजन घटाने का मूल सिद्धांत बेहद सरल है- शरीर जितनी कैलोरी लेता है उससे ज्यादा कैलोरी खर्च करे। इसे ही कैलोरी डेफिसिट कहा जाता है। उदाहरण के लिए: अगर आपका शरीर रोज 2000 कैलोरी खर्च करता है और आप सिर्फ 1600–1700 कैलोरी लेते हैं तो शरीर अतिरिक्त ऊर्जा के लिए स्टोर फैट को जलाना शुरू कर देता है, जिससे धीरे-धीरे वजन कम होने लगता है।   डाइट फॉलो करने से ज्यादा जरूरी है यह समझना डॉ. सिद्धांत बताते हैं कि लोग अक्सर अलग-अलग डाइट ट्रेंड्स के पीछे भागते हैं, जैसे: इंटरमिटेंट फास्टिंग लो-कार्ब डाइट क्रैश डाइट लेकिन असल में इन सभी का उद्देश्य सिर्फ कैलोरी कम करना ही होता है।   कैलोरी डेफिसिट बनाने के दो आसान तरीके 1. कम खाना (Portion Control) खाने की मात्रा थोड़ा कम कर दें और जंक फूड से बचें। 2️. ज्यादा एक्टिव रहना वर्कआउट, वॉकिंग, रनिंग या जिम से ज्यादा कैलोरी बर्न करें। इन दोनों तरीकों में से कोई भी अपनाया जा सकता है, बस शरीर को कम कैलोरी मिलनी चाहिए जितनी वह खर्च करता है।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
वजन के अनुसार रोज कितना प्रोटीन लेना चाहिए, हेल्थ और फिटनेस गाइड
जाने आपके वजन के हिसाब से कितना प्रोटीन हैं  जरूरी?

नई दिल्ली,एजेंसियां। प्रोटीन हमारे शरीर के लिए सबसे जरूरी पोषक तत्वों में से एक है। यह मांसपेशियों के निर्माण, हार्मोन और एंजाइम के निर्माण के साथ-साथ बाल और त्वचा के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि उन्हें रोजाना कितनी मात्रा में प्रोटीन लेना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार यह मात्रा व्यक्ति के शरीर के वजन, उम्र और शारीरिक गतिविधियों पर निर्भर करती है।   वजन के अनुसार कितनी होनी चाहिए प्रोटीन की मात्रा पोषण विशेषज्ञों और कई शोधों के अनुसार एक सामान्य वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन अपने शरीर के प्रति किलोग्राम वजन के हिसाब से लगभग 0.8 से 1 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति का वजन 60 किलोग्राम है, तो उसे रोजाना लगभग 48 से 60 ग्राम प्रोटीन का सेवन करना चाहिए। हालांकि यह मात्रा सभी लोगों के लिए एक समान नहीं होती। यदि कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से अधिक सक्रिय है या नियमित रूप से व्यायाम करता है, तो उसे सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा प्रोटीन की जरूरत हो सकती है।   एक्सरसाइज करने वालों को ज्यादा प्रोटीन की जरूरत पोषण संबंधी कई अध्ययनों के अनुसार जो लोग नियमित रूप से जिम या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं, उन्हें मांसपेशियों की मरम्मत और विकास के लिए अधिक प्रोटीन की आवश्यकता होती है। ऐसे लोगों के लिए प्रति किलोग्राम वजन के हिसाब से लगभग 1.2 से 1.7 ग्राम प्रोटीन की जरूरत बताई जाती है।वहीं एथलीट या अत्यधिक शारीरिक गतिविधियों में शामिल लोगों के लिए यह मात्रा 2 ग्राम प्रति किलोग्राम तक हो सकती है, जिससे शरीर के ऊतकों की मरम्मत तेजी से हो सके।   उम्र और विशेष परिस्थितियों में बढ़ जाती है जरूरत बढ़ती उम्र के बच्चों और किशोरों को शरीर के विकास के लिए अधिक प्रोटीन की आवश्यकता होती है। इसके अलावा 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में मांसपेशियों की कमी होने लगती है, इसलिए उन्हें भी पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन लेने की सलाह दी जाती है।गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को सामान्य लोगों की तुलना में प्रतिदिन लगभग 20 से 25 ग्राम अतिरिक्त प्रोटीन की आवश्यकता हो सकती है।   प्रोटीन की कमी और ज्यादा सेवन दोनों नुकसानदायक विशेषज्ञों के अनुसार प्रोटीन की कमी होने पर बाल झड़ना, नाखून कमजोर होना, थकान और बार-बार बीमार पड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं जरूरत से ज्यादा प्रोटीन, खासकर सप्लीमेंट्स के रूप में लेने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और शरीर में डिहाइड्रेशन की समस्या भी हो सकती है।   संतुलित आहार है सबसे बेहतर उपाय स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोटीन के लिए प्राकृतिक खाद्य पदार्थों का सेवन करना सबसे सुरक्षित तरीका है। दालें, पनीर, अंडे, दूध, सोयाबीन और नट्स जैसे खाद्य पदार्थ प्रोटीन के अच्छे स्रोत माने जाते हैं।

Unknown मार्च 14, 2026 0
Tamannaah Bhatia trainer warning about foods to avoid before gym
वर्कआउट से पहले भूलकर भी न खाएं ये 3 चीजें! एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया के ट्रेनर ने दी अहम सलाह

  जिम में बेहतर प्रदर्शन और सही फिटनेस रिजल्ट पाने के लिए सिर्फ एक्सरसाइज ही नहीं, बल्कि वर्कआउट से पहले क्या खाया जा रहा है यह भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। मशहूर अभिनेत्री Tamannaah Bhatia के फिटनेस ट्रेनर Siddhartha Singh ने हाल ही में बताया है कि जिम जाने से पहले कुछ खास तरह के खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए, क्योंकि ये आपकी ऊर्जा और परफॉर्मेंस पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। ट्रेनर ने अपने विचार Instagram पर साझा करते हुए कहा कि कई लोग अनजाने में ऐसी चीजें खा लेते हैं जो पाचन को धीमा कर देती हैं, पेट फूलने की समस्या पैदा करती हैं या वर्कआउट के दौरान ऊर्जा अचानक गिरा देती हैं।   1. तली हुई चीजें (Fried Foods) ट्रेनर के अनुसार तली हुई चीजों में फैट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जिससे पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है और शरीर भारी महसूस करता है। इससे जिम में सुस्ती और थकान महसूस हो सकती है। वर्कआउट से पहले French fries, Chicken nuggets, Donuts और Samosa जैसी चीजों से दूरी बनाकर रखना बेहतर माना जाता है।   2. ज्यादा फाइबर वाले फूड सामान्य तौर पर फाइबर युक्त भोजन सेहत के लिए अच्छा होता है, लेकिन जिम जाने से ठीक पहले इन्हें खाना सही नहीं माना जाता। विशेषज्ञों के मुताबिक ज्यादा फाइबर वाले भोजन से पेट फूलने और गैस की समस्या हो सकती है, जिससे वर्कआउट के दौरान असहजता महसूस हो सकती है।   3. ज्यादा मीठे खाद्य पदार्थ ट्रेनर का कहना है कि बहुत ज्यादा शुगर वाले खाद्य पदार्थ शुरुआत में तेजी से ऊर्जा देते हैं, लेकिन थोड़ी देर बाद अचानक ऊर्जा गिरने लगती है। इस वजह से वर्कआउट के बीच में थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है।   वर्कआउट से पहले क्या खाना चाहिए? फिटनेस एक्सपर्ट के अनुसार जिम जाने से पहले ऐसा भोजन लेना चाहिए जिसमें: हाई कार्बोहाइड्रेट कम फैट कम फाइबर मध्यम मात्रा में प्रोटीन हो। इससे शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिलती है और वर्कआउट बेहतर तरीके से किया जा सकता है। ट्रेनर का कहना है कि सही प्री-वर्कआउट डाइट न सिर्फ जिम में प्रदर्शन सुधारती है, बल्कि बेहतर रिकवरी और फिटनेस परिणाम भी देती है।   

surbhi मार्च 10, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0