लिवर को नुकसान केवल अल्कोहल से नहीं होता। जरूरत से ज्यादा पेनकिलर, प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा चीनी, बिना सलाह के सप्लीमेंट्स और वायरल संक्रमण भी लिवर की सेहत पर गंभीर असर डाल सकते हैं। Liver Health Tips: जब भी लिवर को नुकसान पहुंचाने वाली चीजों की बात होती है, तो सबसे पहले शराब का नाम आता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, रोजमर्रा की कुछ सामान्य आदतें और खाद्य पदार्थ भी धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कई लोग अनजाने में ऐसी चीजों का नियमित सेवन करते हैं, जिससे समय के साथ फैटी लिवर, लिवर इंफ्लेमेशन और अन्य गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। 1. जरूरत से ज्यादा पेनकिलर का सेवन हल्के दर्द में बार-बार दर्द निवारक दवाएं लेना लिवर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। दवाओं का सेवन हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करें। 2. ज्यादा चीनी और फ्रुक्टोज वाले फूड्स कोल्ड ड्रिंक, पैकेट वाले जूस, मिठाइयां और प्रोसेस्ड स्नैक्स में मौजूद अतिरिक्त शुगर लिवर में फैट जमा होने का कारण बन सकती है, जिससे नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) का जोखिम बढ़ सकता है। 3. प्रोसेस्ड और जंक फूड बर्गर, पिज्जा, चिप्स और डीप-फ्राइड फूड्स में ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट अधिक होता है। इनका नियमित सेवन लिवर में सूजन और फैट बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है। 4. बिना सलाह के सप्लीमेंट्स लेना फिटनेस, बॉडीबिल्डिंग या वजन घटाने के नाम पर कई लोग बिना विशेषज्ञ की सलाह के सप्लीमेंट्स या स्टेरॉयड लेने लगते हैं। कुछ उत्पादों में मौजूद तत्व लिवर के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। 5. हेपेटाइटिस जैसी वायरल बीमारियों को नजरअंदाज करना हेपेटाइटिस B और C जैसे संक्रमण समय पर इलाज न मिलने पर लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे बचाव के लिए वैक्सीनेशन, सुरक्षित स्वास्थ्य आदतें और समय पर जांच जरूरी है। लिवर को स्वस्थ रखने के आसान उपाय संतुलित और पौष्टिक आहार लें। जंक फूड और शुगर का सेवन सीमित रखें। नियमित व्यायाम करें और स्वस्थ वजन बनाए रखें। डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं या सप्लीमेंट्स न लें। नियमित हेल्थ चेकअप कराएं। ध्यान दें: यह जानकारी केवल सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। यदि आपको लगातार थकान, पीलिया, पेट में सूजन या अन्य लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
Kidney Health Monsoon Diet: मानसून के मौसम में संक्रमण, डिहाइड्रेशन और खानपान की गड़बड़ी का असर किडनी की सेहत पर भी पड़ सकता है। ऐसे में संतुलित आहार के साथ कुछ हेल्दी सुपरफूड रेसिपीज डाइट का हिस्सा बनाकर किडनी की कार्यक्षमता को सपोर्ट किया जा सकता है। हालांकि, किडनी रोग से पीड़ित मरीज किसी भी डाइट में बदलाव से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह जरूर लें। मानसून में किडनी की देखभाल क्यों है जरूरी? बारिश के मौसम में नमी, दूषित पानी और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा कई लोग इस दौरान पानी कम पीते हैं, जिससे शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) हो सकती है। पर्याप्त पानी, संतुलित पोषण और ताजा भोजन किडनी के सामान्य कार्य को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। अगर आप स्वस्थ हैं, तो कुछ पोषक तत्वों से भरपूर रेसिपीज अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। 1. लौकी-मूंग दाल सूप आवश्यक सामग्री 1 कप लौकी (कटी हुई) ¼ कप धुली मूंग दाल 1 छोटा टुकड़ा अदरक काली मिर्च थोड़ा हरा धनिया बनाने की विधि मूंग दाल और लौकी को प्रेशर कुकर में पकाएं। ब्लेंड करके हल्का सूप तैयार करें और ऊपर से धनिया डालकर सर्व करें। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 120 kcal प्रोटीन: 8 ग्राम फाइबर: 4 ग्राम संभावित फायदे हल्का और आसानी से पचने वाला शरीर को हाइड्रेशन देने में मदद कम फैट वाला विकल्प 2. खीरा-दही रायता आवश्यक सामग्री 1 खीरा 1 कप लो-फैट दही भुना जीरा पुदीना बनाने की विधि खीरे को कद्दूकस कर दही में मिलाएं। ऊपर से जीरा और पुदीना डालें। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 90 kcal प्रोटीन: 6 ग्राम संभावित फायदे शरीर को ठंडक हाइड्रेशन में मदद पाचन को सपोर्ट 3. लाल शिमला मिर्च और पत्तागोभी सलाद आवश्यक सामग्री लाल शिमला मिर्च पत्तागोभी गाजर नींबू का रस काली मिर्च बनाने की विधि सभी सब्जियों को मिलाकर नींबू और काली मिर्च डालें। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 95 kcal फाइबर: 5 ग्राम संभावित फायदे विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स इम्यूनिटी को सपोर्ट 4. सेब-दालचीनी ओट्स बाउल आवश्यक सामग्री ½ कप ओट्स 1 छोटा सेब दालचीनी लो-फैट दूध बनाने की विधि ओट्स पकाएं, ऊपर से कटे सेब और दालचीनी डालें। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 220 kcal प्रोटीन: 8 ग्राम फाइबर: 6 ग्राम संभावित फायदे लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद संतुलित ऊर्जा 5. ब्लूबेरी या जामुन योगर्ट बाउल आवश्यक सामग्री 1 कप दही ब्लूबेरी या जामुन चिया सीड्स (कम मात्रा में) बनाने की विधि दही में फल मिलाकर तुरंत खाएं। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 160 kcal प्रोटीन: 8 ग्राम संभावित फायदे एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत हेल्दी स्नैक विकल्प 6. कद्दू और मूंग दाल खिचड़ी आवश्यक सामग्री मूंग दाल चावल (कम मात्रा) कद्दू हल्दी जीरा बनाने की विधि सभी सामग्री को प्रेशर कुकर में पकाकर हल्की खिचड़ी तैयार करें। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 240 kcal प्रोटीन: 10 ग्राम फाइबर: 5 ग्राम संभावित फायदे आसानी से पचने वाली संतुलित भोजन मानसून में आरामदायक मील मानसून में किडनी हेल्थ के लिए रखें इन बातों का ध्यान पर्याप्त मात्रा में साफ और सुरक्षित पानी पिएं। सड़क किनारे खुले खाद्य पदार्थ खाने से बचें। अधिक नमक और प्रोसेस्ड फूड सीमित रखें। ताजे फल और सब्जियां अच्छी तरह धोकर खाएं। नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद लें। ध्यान दें यह रेसिपीज सामान्य स्वस्थ लोगों के लिए संतुलित आहार का हिस्सा हो सकती हैं। यदि आपको किडनी की बीमारी, हाई क्रिएटिनिन, डायलिसिस, हाई पोटैशियम या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो इन खाद्य पदार्थों का सेवन डॉक्टर या रजिस्टर्ड डाइटिशियन की सलाह के अनुसार ही करें। कोई भी एक खाद्य पदार्थ अकेले किडनी को स्वस्थ नहीं रख सकता।
डायबिटीज (मधुमेह) आज दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। अक्सर लोग मानते हैं कि केवल मीठा खाने से ही ब्लड शुगर बढ़ता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार कई ऐसी दैनिक आदतें भी हैं जो शुगर लेवल को असंतुलित कर सकती हैं और बीमारी को नियंत्रित करना मुश्किल बना सकती हैं। डायबिटीज को बेहतर तरीके से नियंत्रित रखने के लिए दवाओं के साथ-साथ संतुलित खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी बेहद जरूरी है। सिर्फ चीनी नहीं, फास्ट फूड भी बढ़ा सकता है परेशानी डायबिटीज में केवल मिठाइयों से दूरी बनाना पर्याप्त नहीं होता। कई फास्ट फूड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ भी ब्लड शुगर पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। इनमें शामिल हैं: बर्गर और पिज्जा फ्रेंच फ्राइज पैकेज्ड स्नैक्स प्रोसेस्ड और रिफाइंड फूड इन खाद्य पदार्थों में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, अस्वास्थ्यकर वसा और अतिरिक्त शर्करा अधिक हो सकती है। इनके नियमित सेवन से वजन बढ़ने, इंसुलिन की कार्यक्षमता प्रभावित होने और ब्लड शुगर नियंत्रण में कठिनाई आ सकती है। लंबे समय तक बैठे रहना भी हो सकता है नुकसानदायक शारीरिक निष्क्रियता डायबिटीज के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक मानी जाती है। जब शरीर सक्रिय रहता है, तो मांसपेशियां ग्लूकोज का बेहतर उपयोग करती हैं और इंसुलिन संवेदनशीलता (Insulin Sensitivity) में सुधार होता है। वहीं लंबे समय तक बैठे रहने से ब्लड शुगर नियंत्रित रखना कठिन हो सकता है। विशेषज्ञ आमतौर पर रोज कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि या व्यायाम करने की सलाह देते हैं। अनियमित दिनचर्या बढ़ा सकती है जोखिम समय पर भोजन न करना, देर रात तक जागना और अनियमित दिनचर्या अपनाना भी ब्लड शुगर के स्तर को प्रभावित कर सकता है। इन आदतों से शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी (Body Clock) प्रभावित होती है, जिससे ग्लूकोज नियंत्रण पर असर पड़ सकता है। तनाव को नजरअंदाज न करें लगातार तनाव रहने पर शरीर में ऐसे हार्मोन निकलते हैं जो ब्लड शुगर बढ़ाने का कारण बन सकते हैं। तनाव कम करने के लिए: पर्याप्त नींद लें। योग और ध्यान करें। नियमित व्यायाम करें। परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं। डायबिटीज में अपनाएं ये अच्छी आदतें संतुलित और पौष्टिक भोजन करें। नियमित समय पर खाना खाएं। रोजाना शारीरिक गतिविधि करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं और जांच समय पर कराएं। ब्लड शुगर की नियमित मॉनिटरिंग करें। ध्यान रखें डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए केवल मीठे से दूरी बनाना काफी नहीं है। स्वस्थ खान-पान, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और अनुशासित जीवनशैली अपनाकर ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित रखा जा सकता है। यदि ब्लड शुगर बार-बार बढ़ रहा हो या कोई असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।
Weight Loss Recipe : अगर आप वजन कम करना चाहते हैं लेकिन बार-बार भूख लगने, कमजोरी या सख्त डाइटिंग से बचना चाहते हैं, तो अपनी डेली डाइट में हाई-प्रोटीन और फाइबर से भरपूर दाल टिक्की शामिल कर सकते हैं। मूंग दाल, चना दाल और ताजी सब्जियों से तैयार यह हेल्दी रेसिपी लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद कर सकती है, जिससे अनहेल्दी स्नैकिंग कम हो सकती है। हालांकि, सिर्फ एक डिश खाने से एक महीने में वजन कम होने की गारंटी नहीं दी जा सकती। वजन घटाने के लिए संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त नींद भी जरूरी है। क्यों फायदेमंद है यह हाई-प्रोटीन टिक्की? मूंग दाल और चना दाल प्रोटीन और फाइबर के अच्छे स्रोत माने जाते हैं। इसमें ओट्स, सब्जियां और थोड़ी मात्रा में पनीर मिलाने से इसकी न्यूट्रिशन वैल्यू और बढ़ जाती है। यह कॉम्बिनेशन लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद कर सकता है और कैलोरी कंट्रोल करने में भी सहायक हो सकता है। दाल टिक्की बनाने के लिए सामग्री 1 कप भीगी हुई मूंग दाल ½ कप भीगी हुई चना दाल 2 बड़े चम्मच ओट्स 2 बड़े चम्मच भुनी मूंगफली 1 छोटा प्याज (बारीक कटा) ½ शिमला मिर्च (बारीक कटी) 1 हरी मिर्च 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट 2–3 बड़े चम्मच कद्दूकस किया पनीर (वैकल्पिक) हरा धनिया हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर, भुना जीरा, काली मिर्च, चाट मसाला और नमक 1 छोटा चम्मच तेल या घी सफेद तिल ऐसे बनाएं भीगी हुई मूंग और चना दाल को ओट्स और मूंगफली के साथ बिना पानी डाले पीस लें। इसमें सभी सब्जियां, मसाले और पनीर मिलाकर मिश्रण तैयार करें। छोटी-छोटी टिक्कियां बनाएं और हल्का तेल लगाकर नॉन-स्टिक पैन में दोनों तरफ से सुनहरा होने तक धीमी आंच पर सेक लें। प्रोबायोटिक रायता 1 कप दही में कद्दूकस किया हुआ खीरा और गाजर मिलाएं। स्वादानुसार नमक डालें। जीरा, हींग, करी पत्ता और हरी मिर्च का हल्का तड़का लगाकर रायते में मिला दें। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण (2 टिक्की + 1 कटोरी रायता) कैलोरी: 300–350 kcal प्रोटीन: 18–22 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 28–35 ग्राम फैट: 10–14 ग्राम फाइबर: 8–10 ग्राम संभावित फायदे हाई प्रोटीन और फाइबर से भरपूर लंबे समय तक पेट भरा रखने में मददगार अनहेल्दी स्नैकिंग कम करने में सहायक पाचन के लिए प्रोबायोटिक दही का लाभ वजन प्रबंधन वाली डाइट में शामिल किया जा सकता है ध्यान दें: किसी भी एक रेसिपी से तेजी से वजन कम होने की गारंटी नहीं होती। बेहतर परिणाम के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। यदि आपको कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो डाइट में बदलाव से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लें।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 13 जुलाई को देश के सभी सरकारी बैंकों (पीएसबी) और आईडीबीआई बैंक के प्रमुखों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक करेंगी। बैठक का मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा के प्रवाह को बढ़ाना, बैंकों द्वारा विदेशी मुद्रा जमा (एफसीएनआर-बी) जुटाने की प्रगति की समीक्षा करना और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा हाल में घोषित रियायती उपायों के प्रभाव का आकलन करना है। सरकार का लक्ष्य प्रवासी भारतीयों और विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश के लिए अधिक आकर्षित करना है। तीन प्रमुख मुद्दों पर रहेगा फोकस बैठक में विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (FCNR-B) खातों में जमा राशि बढ़ाने, सरकारी बैंकों द्वारा विदेशों से पूंजी जुटाने के लिए जारी किए जाने वाले विदेशी बॉन्ड तथा भारतीय कंपनियों और सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECB) की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इन तीनों माध्यमों से देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। आरबीआई की रियायतों की होगी समीक्षा पिछले महीने आरबीआई ने 30 सितंबर तक के लिए कई राहत उपाय लागू किए थे। इनमें 3 से 5 वर्ष की अवधि वाले नए एफसीएनआर (बी) जमा पर ब्याज दर की अधिकतम सीमा को अस्थायी रूप से हटाना शामिल है, जिससे बैंक विदेशी जमाकर्ताओं को अधिक आकर्षक ब्याज दर की पेशकश कर सकते हैं। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा विनिमय जोखिम कम करने के लिए बैंकों और सरकारी कंपनियों को रियायती दर पर फॉरेक्स स्वैप सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। विदेशी निवेश में तेजी की उम्मीद बैंकिंग क्षेत्र के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, नई रियायतों के बाद 3 जुलाई तक एफसीएनआर (बी) जमा के माध्यम से करीब 3 से 4 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जुटाई जा चुकी है। बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि विशेष रूप से खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों की भागीदारी बढ़ने से आने वाले महीनों में यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है। अनुमान है कि इन उपायों से भविष्य में 40 से 50 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त विदेशी निवेश आकर्षित किया जा सकता है, जिससे भारतीय रुपये को मजबूती मिलने के साथ-साथ देश की विदेशी मुद्रा स्थिति भी और सुदृढ़ होगी।
रोजाना कॉफी पीने वालों में गंभीर लिवर रोगों का खतरा कम पाया गया अगर आप रोजाना कॉफी पीते हैं, तो यह आदत सिर्फ आपको तरोताजा ही नहीं रखती, बल्कि आपके लिवर की सेहत के लिए भी फायदेमंद हो सकती है। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में दावा किया गया है कि नियमित रूप से कॉफी का सेवन करने वाले लोगों में लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों का जोखिम कम देखा गया। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन नतीजों के आधार पर हर किसी को अचानक ज्यादा कॉफी पीना शुरू नहीं कर देना चाहिए। करीब साढ़े तीन लाख लोगों पर किया गया अध्ययन यह शोध मेडिकल जर्नल Clinical Gastroenterology and Hepatology में प्रकाशित हुआ है। इसमें ब्रिटेन के यूके बायोबैंक (UK Biobank) के लगभग 3.55 लाख वयस्कों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का 10 वर्षों से अधिक समय तक विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों की कॉफी पीने की आदत, लिवर की स्कैन रिपोर्ट, रक्त जांच और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का अध्ययन किया। इसके बाद कॉफी के सेवन और लिवर स्वास्थ्य के बीच महत्वपूर्ण संबंध सामने आए। 5 या उससे अधिक कप कॉफी पीने वालों को मिला सबसे ज्यादा लाभ अध्ययन के अनुसार, जो लोग प्रतिदिन 5 या उससे अधिक कप कॉफी पीते थे, उनमें लिवर संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा उल्लेखनीय रूप से कम पाया गया। शोध में सामने आए प्रमुख निष्कर्ष: लिवर सिरोसिस का खतरा 32% तक कम लिवर कैंसर का जोखिम 47% तक घटा लिवर संबंधी कारणों से मृत्यु का खतरा 42% कम हालांकि, रोजाना 1 से 2 कप कॉफी पीने वालों में भी कुछ हद तक सकारात्मक प्रभाव देखा गया। कैफीन नहीं, कॉफी के प्राकृतिक तत्व भी हैं असरदार शोध की एक दिलचस्प बात यह रही कि कैफीनयुक्त (Regular) और डिकैफ (Decaffeinated) दोनों तरह की कॉफी पीने वालों में लगभग समान लाभ देखने को मिले। इससे वैज्ञानिकों का मानना है कि केवल कैफीन ही नहीं, बल्कि कॉफी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, पॉलीफेनॉल और अन्य प्राकृतिक यौगिक भी लिवर को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। कैसे पहुंचाती है कॉफी लिवर को फायदा? विशेषज्ञों के अनुसार कॉफी में मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर में सूजन कम करने, कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से बचाने और लिवर में अतिरिक्त वसा जमा होने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। यही कारण है कि लंबे समय में लिवर को होने वाले नुकसान का जोखिम कम हो सकता है। ज्यादा चीनी मिलाने से घट सकते हैं फायदे शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि कॉफी में अधिक मात्रा में चीनी, आर्टिफिशियल स्वीटनर या अत्यधिक प्रोसेस्ड क्रीमर मिलाने से लिवर को मिलने वाले कुछ फायदे कम हो सकते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि कॉफी पीनी हो तो कम या बिना चीनी वाली कॉफी बेहतर विकल्प हो सकती है। क्या अब सभी लोगों को 5 कप कॉफी पीनी चाहिए? इस अध्ययन के बावजूद वैज्ञानिकों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। यह शोध केवल कॉफी और बेहतर लिवर स्वास्थ्य के बीच संबंध दिखाता है, लेकिन यह साबित नहीं करता कि कॉफी सीधे लिवर रोगों को रोकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान, शराब का सेवन, वजन, खानपान और जीवनशैली जैसे कई अन्य कारक भी लिवर की सेहत को प्रभावित करते हैं। अधिक कॉफी पीने के हो सकते हैं नुकसान हर व्यक्ति का शरीर कैफीन को अलग-अलग तरीके से सहन करता है। जरूरत से ज्यादा कॉफी पीने पर कुछ लोगों में ये समस्याएं हो सकती हैं— बेचैनी और घबराहट नींद में बाधा दिल की धड़कन तेज होना पेट संबंधी परेशानियां गर्भवती महिलाओं और कुछ विशेष स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही कैफीन का सेवन करना चाहिए। क्या कहता है यह अध्ययन? यह शोध संकेत देता है कि नियमित और संतुलित मात्रा में कॉफी पीना लिवर की सेहत के लिए लाभकारी हो सकता है। हालांकि, केवल कॉफी के भरोसे स्वस्थ रहने की बजाय संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी उतना ही जरूरी है।
अगर परिवार में किसी को डायबिटीज है, तो अक्सर माता-पिता को यह चिंता रहती है कि कहीं उनके बच्चों को भी भविष्य में यह बीमारी न हो जाए। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि पारिवारिक इतिहास जोखिम जरूर बढ़ाता है, लेकिन यह तय नहीं करता कि बच्चे को डायबिटीज होगी ही। सही खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। एंडोक्राइनोलॉजिस्ट्स के अनुसार, बचपन में अपनाई गई अच्छी आदतें लंबे समय तक मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। क्या केवल जेनेटिक्स ही जिम्मेदार हैं? विशेषज्ञों के मुताबिक, टाइप-2 डायबिटीज केवल आनुवंशिक कारणों से नहीं होती। यह जेनेटिक प्रवृत्ति और जीवनशैली दोनों के संयुक्त प्रभाव का परिणाम है। यदि माता-पिता या भाई-बहन को डायबिटीज है, तो बच्चे में इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ सकता है। लेकिन यह जोखिम बीमारी में बदलेगा या नहीं, यह काफी हद तक उसकी रोजमर्रा की आदतों पर निर्भर करता है। बचपन से डालें स्वस्थ खानपान की आदत डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों को सख्त डाइट पर रखने की बजाय पूरे परिवार में हेल्दी खाने की आदत विकसित करनी चाहिए। दैनिक भोजन में शामिल करें: ताजे फल हरी सब्जियां साबुत अनाज दालें और फलियां कम वसा वाले प्रोटीन हेल्दी फैट्स वहीं, इन चीजों का सेवन सीमित रखें: मीठे पेय पदार्थ पैकेज्ड स्नैक्स प्रोसेस्ड फूड फास्ट फूड विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे वही आदतें सीखते हैं जो वे घर में रोज देखते हैं। रोजाना शारीरिक गतिविधि है जरूरी बच्चों को जिम भेजने की जरूरत नहीं है। उन्हें ऐसी गतिविधियों के लिए प्रेरित करें जिनमें उन्हें आनंद आता हो। बेहतर विकल्प हो सकते हैं: साइकिल चलाना तैराकी क्रिकेट या फुटबॉल खेलना दौड़ना डांस करना स्केटिंग आउटडोर गेम्स डॉक्टरों की सलाह है कि बच्चों को हर दिन कम से कम 60 मिनट मध्यम से तेज शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। पर्याप्त नींद भी उतनी ही महत्वपूर्ण अक्सर लोग खानपान और एक्सरसाइज पर ध्यान देते हैं, लेकिन अच्छी नींद को नजरअंदाज कर देते हैं। कम नींद लेने से शरीर के उन हार्मोन्स पर असर पड़ता है जो नियंत्रित करते हैं: भूख भूख बढ़ाने वाले हार्मोन ब्लड शुगर वजन इसलिए बच्चों के लिए नियमित सोने और जागने का समय तय करना जरूरी है। साथ ही रात में मोबाइल और अन्य स्क्रीन का उपयोग कम करना चाहिए। स्क्रीन टाइम रखें सीमित लंबे समय तक मोबाइल, टीवी या टैबलेट का इस्तेमाल बच्चों की शारीरिक गतिविधि कम कर देता है, जिससे: वजन बढ़ सकता है मोटापे का खतरा बढ़ता है नींद प्रभावित होती है टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है इसलिए स्क्रीन टाइम और एक्टिव प्ले के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। इन शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें यदि परिवार में डायबिटीज का इतिहास है और बच्चे में नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। बार-बार प्यास लगना बार-बार पेशाब आना बिना कारण वजन घटना लगातार थकान महसूस होना गर्दन या बगल में काले, मखमली धब्बे (Acanthosis Nigricans) तेजी से वजन बढ़ना या मोटापा जरूरत पड़ने पर डॉक्टर ब्लड शुगर टेस्ट, बीएमआई और कमर की माप जैसी जांच की सलाह भी दे सकते हैं। बच्चे वही सीखते हैं जो माता-पिता करते हैं विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे केवल सलाह नहीं, बल्कि अपने माता-पिता की आदतों की नकल करते हैं। यदि माता-पिता: संतुलित भोजन खाते हैं नियमित व्यायाम करते हैं समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाते हैं मीठे पेय पदार्थों से बचते हैं पर्याप्त नींद लेते हैं तो बच्चों में भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की संभावना अधिक रहती है। परिवार में डायबिटीज है तो घबराएं नहीं, सतर्क रहें डॉक्टरों का मानना है कि पारिवारिक इतिहास को डर की तरह नहीं, बल्कि समय रहते बचाव करने के अवसर के रूप में देखना चाहिए। जेनेटिक्स बदले नहीं जा सकते, लेकिन सही जीवनशैली अपनाकर भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यदि बच्चे में डायबिटीज से जुड़े लक्षण दिखाई दें या परिवार में बीमारी का मजबूत इतिहास हो, तो चिकित्सक से व्यक्तिगत सलाह अवश्य लें।
US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम टूटने के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कहा है कि अंतरिम युद्धविराम (सीजफायर) अब समाप्त हो चुका है। लगातार दो दिनों से दोनों देशों के बीच हमले जारी हैं। इस बीच, पहले मध्यस्थता की भूमिका निभाने की कोशिश कर चुका पाकिस्तान अब दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील कर रहा है। पाकिस्तान ने जताई चिंता पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा शुरू हुआ सैन्य संघर्ष किसी के हित में नहीं है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में सभी पक्षों से संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की, जिनसे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को नुकसान पहुंचे। पाकिस्तान ने कहा कि स्थायी समाधान केवल संवाद, कूटनीति और बातचीत से ही संभव है। मध्यस्थता की पेशकश पाकिस्तान ने यह भी कहा कि यदि दोनों पक्ष सहमत हों तो इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए तैयार है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पहले हुए समझौतों और प्रतिबद्धताओं का सम्मान किया जाना चाहिए ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे। ट्रंप ने कहा- सीजफायर खत्म अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच हुआ अंतरिम समझौता अब समाप्त हो चुका है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कूटनीतिक बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। ट्रंप के बयान के बाद वैश्विक बाजारों में भी असर देखने को मिला और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेजी दर्ज की गई। दोनों ओर से जारी हैं हमले अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत और कतर में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन घटनाओं के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है तथा व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका जताई जा रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा तनाव का सबसे बड़ा केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल निर्यात होता है। यदि संघर्ष और बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है। ईरान का सख्त रुख ईरान के वरिष्ठ नेताओं ने भी अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो उसका जवाब और कड़े तरीके से दिया जाएगा। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और क्षेत्रीय अधिकारों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। बढ़ी वैश्विक चिंता अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा शुरू हुए सैन्य टकराव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की है, ताकि पश्चिम एशिया में व्यापक युद्ध की स्थिति से बचा जा सके।
रांची। मानसून शुरू होते ही झारखंड के जंगलों में मिलने वाला रुगड़ा (पुटू) मशरूम बाजारों की रौनक बढ़ा देता है। यह देसी जंगली मशरूम केवल बारिश के मौसम में प्राकृतिक रूप से उगता है और स्थानीय लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय है। स्वाद और पौष्टिकता के कारण इसे झारखंड का पारंपरिक खजाना माना जाता है। सीमित समय के लिए मिलने वाला यह मशरूम हर साल लोगों को बेसब्री से इंतजार कराता है। साल के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगता है रुगड़ा रुगड़ा मुख्य रूप से झारखंड के साल के जंगलों में मिट्टी के अंदर उगता है। इसे स्थानीय भाषा में पुटू भी कहा जाता है। सफेद और गोल आकार वाले इस मशरूम को मिट्टी हटाकर सावधानी से निकाला जाता है। इसकी प्राकृतिक उपलब्धता सीमित होने के कारण बाजार में इसकी मांग हमेशा अधिक रहती है। स्वाद और पोषण का अनोखा मेल रुगड़ा का स्वाद इतना अलग और लाजवाब होता है कि कई लोग इसकी तुलना चिकन और मटन से करते हैं। पकने के बाद इसका बाहरी हिस्सा हल्का कुरकुरा और अंदर का भाग बेहद मुलायम हो जाता है। सावन के दौरान मांसाहार से परहेज करने वाले लोगों के लिए यह स्वादिष्ट और पौष्टिक शाकाहारी विकल्प माना जाता है। खरीदते और साफ करते समय रखें सावधानी चूंकि रुगड़ा मिट्टी के अंदर उगता है, इसलिए इसे पकाने से पहले अच्छी तरह साफ करना जरूरी होता है। खरीदते समय एक-दो रुगड़ा काटकर देख लेना चाहिए ताकि वह अंदर से ताजा और सुरक्षित हो। अच्छी गुणवत्ता वाला रुगड़ा स्वाद के साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। ऐसे बनाएं स्वादिष्ट रुगड़ा करी रुगड़ा करी बनाने के लिए सबसे पहले मशरूम को अच्छी तरह धोकर बीच से काट लें और हल्का भून लें। इसके बाद कड़ाही में तेल गर्म कर जीरा, प्याज और टमाटर भूनें। फिर हल्दी, धनिया, लाल मिर्च और नमक जैसे मसाले डालकर अच्छी तरह पकाएं। अब इसमें भुना हुआ रुगड़ा मिलाकर धीमी आंच पर कुछ मिनट पकाएं। अंत में गरम मसाला और हरा धनिया डालकर इसे गर्मागर्म चावल या रोटी के साथ परोसें। स्वाद और पोषण से भरपूर यह पारंपरिक झारखंडी व्यंजन मानसून का आनंद कई गुना बढ़ा देता है।
नई दिल्ली: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, बढ़ता तनाव, नींद की कमी और अनियमित खानपान ने माइग्रेन की समस्या को आम बना दिया है। यह केवल साधारण सिरदर्द नहीं, बल्कि एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल समस्या है जो कई घंटों तक व्यक्ति की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित कर सकती है। माइग्रेन के दौरान सिर के एक हिस्से में तेज दर्द, मतली, उल्टी, तेज रोशनी और आवाज से परेशानी जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। दवाओं के अलावा कुछ घरेलू उपाय भी माइग्रेन के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। इन्हीं में से एक है अजवाइन, जो लगभग हर भारतीय रसोई में आसानी से मिल जाती है। आयुर्वेद में लंबे समय से अजवाइन का उपयोग पाचन, गैस, सर्दी-जुकाम और सिरदर्द जैसी समस्याओं में किया जाता रहा है। क्यों होता है माइग्रेन? विशेषज्ञों के अनुसार माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें सिर के एक हिस्से में बार-बार तेज दर्द होता है। यह दर्द 4 घंटे से लेकर 72 घंटे तक भी बना रह सकता है। इसके साथ कई लोगों को मतली, उल्टी, धुंधला दिखाई देना और चिड़चिड़ापन भी महसूस होता है। माइग्रेन के सामान्य ट्रिगर हैं: लगातार मानसिक तनाव पर्याप्त नींद न लेना हार्मोनल बदलाव लंबे समय तक भूखे रहना कुछ विशेष खाद्य पदार्थ तेज रोशनी और तेज आवाज माइग्रेन में कैसे फायदेमंद है अजवाइन? अजवाइन में थाइमोल (Thymol) नामक सक्रिय तत्व पाया जाता है। शोध के अनुसार इसमें एंटी-इन्फ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट और दर्द कम करने वाले गुण मौजूद होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार अजवाइन में: पाचन शक्ति बढ़ाने वाले गुण वात और कफ को संतुलित करने की क्षमता गैस और अपच कम करने वाले तत्व पाए जाते हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से माइग्रेन के कुछ ट्रिगर्स को कम करने में मदद कर सकते हैं। माइग्रेन में अजवाइन के संभावित फायदे 1. तनाव कम करने में मदद अजवाइन में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में सहायक माने जाते हैं। तनाव कम होने से माइग्रेन के एपिसोड की तीव्रता भी कम हो सकती है। 2. पाचन सुधारकर राहत कई लोगों में गैस, अपच और पेट की गड़बड़ी माइग्रेन का कारण बनती है। अजवाइन पाचन को बेहतर बनाकर इस ट्रिगर को कम करने में मदद कर सकती है। 3. सूजन कम करने में सहायक शरीर में सूजन भी माइग्रेन के लक्षणों को बढ़ा सकती है। अजवाइन के एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण सूजन कम करने में मदद कर सकते हैं। माइग्रेन में अजवाइन का इस्तेमाल कैसे करें? 1. अजवाइन की गर्म पोटली 2 से 4 चम्मच अजवाइन को तवे पर हल्का गर्म करें। इसे सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। समय-समय पर इसकी हल्की सुगंध लें। इससे बंद नाक खुलने, रक्त संचार बेहतर होने और सिरदर्द में कुछ राहत महसूस हो सकती है। 2. अजवाइन का पानी 2 कप पानी में 2 चम्मच अजवाइन डालें। इसे कुछ मिनट तक उबालें। छानकर सुबह और शाम हल्का गुनगुना पी सकते हैं। यह पाचन बेहतर रखने में मदद कर सकता है, जिससे माइग्रेन के कुछ ट्रिगर्स कम हो सकते हैं। माइग्रेन से बचने के लिए अपनाएं ये आदतें पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। रोज 7-8 घंटे की नींद लें। तेज रोशनी और तेज आवाज से बचें। लंबे समय तक खाली पेट न रहें। प्रोसेस्ड फूड और अत्यधिक कैफीन से दूरी बनाएं। योग, मेडिटेशन और नियमित व्यायाम करें। अपने माइग्रेन ट्रिगर्स की पहचान कर उनसे बचने की कोशिश करें।
भारत में हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) और डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आमतौर पर लोग हाई बीपी की वजह अधिक नमक, मोटापा, तनाव, धूम्रपान या खराब लाइफस्टाइल को मानते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार बार-बार बढ़ता ब्लड प्रेशर किसी हार्मोनल समस्या, खासकर थायरॉइड डिसऑर्डर का भी संकेत हो सकता है। कार्डियक विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ब्लड प्रेशर दवाइयों के बावजूद बार-बार बढ़ रहा है या नियंत्रित नहीं हो रहा, तो थायरॉइड की जांच जरूर करानी चाहिए। कैसे जुड़ा है थायरॉइड और हाई ब्लड प्रेशर? थायरॉइड ग्रंथि शरीर में बनने वाले T3 (Triiodothyronine) और T4 (Thyroxine) हार्मोन का उत्पादन करती है। ये हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, दिल की धड़कन और रक्त वाहिकाओं के सामान्य कामकाज को नियंत्रित करते हैं। जब थायरॉइड हार्मोन कम बनने लगते हैं, जिसे हाइपोथायरॉइडिज्म (Hypothyroidism) कहा जाता है, तब रक्त वाहिकाएं धीरे-धीरे सख्त होने लगती हैं। इससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और ब्लड प्रेशर, विशेष रूप से डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर (निचला स्तर), बढ़ सकता है। डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर क्यों बढ़ता है? हाइपोथायरॉइडिज्म में दिल की धड़कन सामान्य से धीमी हो जाती है। साथ ही रक्त वाहिकाओं का लचीलापन कम होने लगता है। यही कारण है कि शरीर में रक्त प्रवाह बनाए रखने के लिए दबाव बढ़ सकता है, जिससे डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाई बीपी और थायरॉइड के बीच संबंध को देखते हुए दोनों स्थितियों की जांच एक साथ करना बेहतर माना जाता है। कब करानी चाहिए थायरॉइड जांच? यदि आपको— बार-बार हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो, दवा लेने के बावजूद बीपी नियंत्रित न हो, लगातार थकान महसूस हो, वजन बढ़ रहा हो, ठंड ज्यादा लगती हो, दिल की धड़कन धीमी रहती हो, तो डॉक्टर की सलाह पर TSH, T3 और T4 टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। हाइपोथायरॉइडिज्म में किन दवाओं में बरतें सावधानी? विशेषज्ञों के अनुसार, हाइपोथायरॉइडिज्म के मरीजों में पहले से ही दिल की धड़कन धीमी हो सकती है। ऐसे में कुछ बीपी की दवाएं, जैसे बीटा-ब्लॉकर्स और कुछ कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स, धड़कन को और धीमा कर सकती हैं। इसलिए कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए। ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखने के आसान उपाय हाई ब्लड प्रेशर और थायरॉइड दोनों स्थितियों में स्वस्थ जीवनशैली काफी मददगार साबित होती है। रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें। योग और कार्डियो एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल करें। नमक का सेवन सीमित रखें। फल, सब्जियां और साबुत अनाज से भरपूर DASH डाइट अपनाएं। पोटैशियम युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ाएं। धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं। नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और थायरॉइड की जांच कराते रहें। डॉक्टर की सलाह विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर और थायरॉइड की समस्या कई मामलों में एक-दूसरे से जुड़ी हो सकती हैं। इसलिए जिन लोगों को लगातार हाई बीपी की शिकायत रहती है, उन्हें थायरॉइड की जांच जरूर करानी चाहिए। वहीं थायरॉइड के मरीजों को भी समय-समय पर अपना ब्लड प्रेशर मॉनिटर करना चाहिए ताकि किसी गंभीर हृदय संबंधी समस्या से बचा जा सके।
नई दिल्ली। चुकंदर को सेहत के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सही तरीके से सेवन करना जरूरी है ताकि शरीर को पूरा फायदा मिल सके। चुकंदर में आयरन, फोलेट, फाइबर, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो खून की कमी दूर करने और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। 1. सुबह खाली पेट सेवन सबसे बेहतर स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, चुकंदर का सेवन सुबह खाली पेट करना अधिक फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे शरीर पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से अवशोषित कर पाता है और ऊर्जा बनी रहती है। 2.जूस की बजाय सलाद है ज्यादा फायदेमंद विशेषज्ञों का मानना है कि चुकंदर को जूस की बजाय सलाद के रूप में खाना ज्यादा लाभकारी होता है, क्योंकि इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है। 3.गाजर और आंवला के साथ सेवन से बढ़ते हैं फायदे चुकंदर को गाजर और आंवला के साथ मिलाकर सेवन करने से इसके पोषक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट्स का लाभ बढ़ जाता है, जो इम्यूनिटी मजबूत करने में सहायक हो सकता है। 4.सीमित मात्रा और सावधानी जरूरी विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि रोजाना 1 मध्यम आकार का चुकंदर या 150–200 मिलीलीटर जूस पर्याप्त है। अधिक सेवन से पेट संबंधी समस्या हो सकती है। किडनी स्टोन के मरीजों को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।
आज के समय में डायबिटीज भारत में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन चुकी है। मोटापा, अनियमित खानपान और खराब लाइफस्टाइल के कारण बड़ी संख्या में लोग इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। आमतौर पर लोगों के बीच यह धारणा बनी हुई है कि डायबिटीज सिर्फ ज्यादा चीनी या मिठाई खाने से होती है और अगर चीनी खाना बंद कर दिया जाए तो ब्लड शुगर पूरी तरह नियंत्रित हो जाएगा। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सच्चाई इससे कहीं ज्यादा जटिल है। क्या सिर्फ चीनी खाने से होती है डायबिटीज? विशेषज्ञों के अनुसार, टाइप-2 डायबिटीज केवल चीनी खाने से नहीं होती। यह एक मेटाबॉलिक बीमारी है, जिसमें इंसुलिन रेजिस्टेंस, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, तनाव, आनुवंशिक कारण और असंतुलित आहार जैसी कई चीजें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं, तो ब्लड में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने लगता है। लंबे समय तक यही स्थिति टाइप-2 डायबिटीज का कारण बन सकती है। इंसुलिन रेजिस्टेंस क्या है? इंसुलिन एक हार्मोन है, जो पैंक्रियाज द्वारा बनाया जाता है और शरीर की कोशिकाओं तक ग्लूकोज पहुंचाने का काम करता है। लेकिन जब शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। इस स्थिति में पैंक्रियाज को अधिक इंसुलिन बनाना पड़ता है और धीरे-धीरे उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है। परिणामस्वरूप ब्लड शुगर बढ़ने लगता है। डायबिटीज के प्रमुख कारण मोटापा और बढ़ा हुआ वजन पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ा सकती है। वजन कम करने से डायबिटीज के जोखिम को काफी हद तक घटाया जा सकता है। शारीरिक गतिविधियों की कमी नियमित व्यायाम न करने से शरीर ग्लूकोज का सही उपयोग नहीं कर पाता, जिससे ब्लड शुगर प्रभावित होता है। पारिवारिक इतिहास यदि माता-पिता, दादा-दादी या अन्य करीबी रिश्तेदारों को डायबिटीज है, तो इस बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। तनाव और नींद की कमी लगातार तनाव और पर्याप्त नींद न लेने से शरीर का हार्मोनल संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ने का जोखिम रहता है। सिर्फ चीनी नहीं, इन चीजों से भी बनाएं दूरी ब्लड शुगर नियंत्रित रखने के लिए केवल मिठाई छोड़ना पर्याप्त नहीं है। इन चीजों का सेवन भी सीमित करना चाहिए— व्हाइट ब्रेड मैदा और उससे बनी चीजें प्रोसेस्ड फूड केक, पेस्ट्री और बेकरी उत्पाद अत्यधिक नमक शुगरी ड्रिंक्स और सॉफ्ट ड्रिंक्स ब्लड शुगर कंट्रोल करने का सही तरीका डायबिटीज को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए इन बातों का पालन जरूरी है— संतुलित और पौष्टिक आहार लें। रोजाना नियमित व्यायाम करें। वजन को नियंत्रित रखें। पर्याप्त नींद लें। तनाव कम करने की कोशिश करें। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं समय पर लें। समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच कराते रहें। डायबिटीज एक बहुआयामी बीमारी है और इसका इलाज सिर्फ चीनी छोड़ने तक सीमित नहीं है। सही जीवनशैली अपनाकर और डॉक्टर की सलाह का पालन करके ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है और भविष्य में होने वाली जटिलताओं के खतरे को कम किया जा सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर यदि आप घर में योग और ध्यान के लिए शांत वातावरण बनाना चाहते हैं, तो अपनी बालकनी को हरियाली से सजाना एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। गार्डनिंग विशेषज्ञों का मानना है कि पौधों की देखभाल न केवल एक अच्छी हॉबी है, बल्कि यह तनाव कम करने और मानसिक सुकून पाने का प्रभावी तरीका भी है। कुछ पौधे ऐसे हैं जो हवा को शुद्ध करने के साथ सकारात्मक माहौल बनाने में भी मदद करते हैं। स्नेक प्लांट स्नेक प्लांट इस सूची में सबसे लोकप्रिय है। यह कम देखभाल में आसानी से बढ़ता है और दिन-रात ऑक्सीजन छोड़ने के लिए जाना जाता है। इसके अलावा यह हवा में मौजूद कई हानिकारक तत्वों को कम करने में भी सहायक माना जाता है। एरेका पाम एरेका पाम घर और बालकनी को हराभरा लुक देने के साथ वातावरण को ताजगी से भर देता है। वहीं रोजमेरी और लैवेंडर अपनी प्राकृतिक खुशबू के कारण तनाव कम करने और मन को शांत करने के लिए लोकप्रिय हैं। ध्यान और मेडिटेशन के दौरान इनकी सुगंध आरामदायक अनुभव देती है। चमेली चमेली के सुगंधित फूल भी मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का एहसास कराते हैं। वहीं एलोवेरा कम देखभाल वाला पौधा है, जो स्वच्छ वातावरण बनाए रखने में मदद करता है। गुलदाउदी अपने रंग-बिरंगे फूलों से बालकनी की सुंदरता बढ़ाने के साथ ताजगी का एहसास कराती है। विशेषज्ञों के अनुसार विशेषज्ञों के अनुसार, पौधों में पानी देना, मिट्टी के संपर्क में रहना और हरियाली के बीच समय बिताना तनाव कम करने में सहायक हो सकता है। ऐसे में योग दिवस पर अपनी बालकनी में इन पौधों के बीच योग या ध्यान करना मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का बेहतर अनुभव दे सकता है।
ग्रीन टी को आमतौर पर वजन कम करने और मेटाबॉलिज्म बढ़ाने वाले पेय के रूप में जाना जाता है, लेकिन इसके फायदे केवल वेट लॉस तक सीमित नहीं हैं। इसमें मौजूद कैटेचिन, पॉलीफेनॉल, ईजीसीजी (EGCG) और एल-थीनिन जैसे शक्तिशाली तत्व शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों के लिए लाभकारी माने जाते हैं। खासकर यह दांतों, मसूड़ों और मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। ग्रीन टी में क्यों होते हैं इतने फायदे? ग्रीन टी एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है, जो शरीर में बनने वाले फ्री रेडिकल्स को कम करने में मदद करते हैं। फ्री रेडिकल्स कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर कई पुरानी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं। ग्रीन टी में मौजूद पॉलीफेनॉल और ईजीसीजी शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में सहायक माने जाते हैं। दांतों और ओरल हेल्थ के लिए ग्रीन टी के फायदे 1. कैविटी का खतरा कम कर सकती है ग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन ऐसे बैक्टीरिया की गतिविधि को कम करने में मदद कर सकते हैं, जो दांतों में सड़न और कैविटी का कारण बनते हैं। इससे दांतों की सतह पर बैक्टीरिया के चिपकने का जोखिम भी कम हो सकता है। 2. मसूड़ों को रख सकती है स्वस्थ ग्रीन टी के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मसूड़ों की सूजन और ब्लीडिंग को कम करने में मदद कर सकते हैं। नियमित सेवन से पीरियोडोंटल डिजीज का जोखिम कम होने की संभावना भी बताई गई है। 3. मुंह की बदबू से दिला सकती है राहत मुंह की दुर्गंध पैदा करने वाले बैक्टीरिया को नियंत्रित करने में ग्रीन टी मददगार हो सकती है। इससे ओरल हाइजीन बेहतर बनी रहती है और सांसों की बदबू कम हो सकती है। दिमाग और याददाश्त के लिए भी फायदेमंद 1. बढ़ा सकती है एकाग्रता ग्रीन टी में मौजूद कैफीन और एल-थीनिन का संयोजन मानसिक सतर्कता और फोकस को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। यह दिमाग को सक्रिय बनाए रखने में सहायक माना जाता है। 2. याददाश्त को दे सकती है मजबूती कुछ अध्ययनों के अनुसार, ग्रीन टी का नियमित सेवन मूड को बेहतर बनाने और उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त में होने वाली गिरावट के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। ध्यान रखें ग्रीन टी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकती है, लेकिन इसे किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और स्वस्थ जीवनशैली के साथ सीमित मात्रा में ग्रीन टी का सेवन बेहतर परिणाम दे सकता है।
धनबाद। 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर धनबाद में खासा उत्साह है। इसे लेकर शुक्रवार को ‘रन फॉर योग’ का आयोजन हुआ, जिसमें धनबाद के लोगों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। लोगों ने दिया ये संदेश जिला प्रशासन की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शामिल लोगों ने योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संदेश दिया। DC आदित्य रंजन के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत रणधीर वर्मा चौक से हुई। इसके बाद प्रतिभागी दौड़ते हुए सिटी सेंटर पहुंचे, जहां कार्यक्रम का समापन हुआ। पूरे रास्ते लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। हर तबके के लोग हुए शामिल ‘रन फॉर योग’ में जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी, खेल प्रेमी, छात्र-छात्राएं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि समेत बड़ी संख्या में आम नागरिक शामिल हुए। सभी ने जोश के साथ दौड़ में हिस्सा लिया और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान लोगों को योग के महत्व और उसके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों के बारे में जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि नियमित योग करने से न सिर्फ शरीर फिट रहता है, बल्कि मानसिक तनाव भी कम होता है। योग को जन-आंदोलन बनाने का संकल्प दौड़ में शामिल लोगों ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योग को जन-जन तक पहुंचाने और इसे जन-आंदोलन बनाने का संकल्प लिया। साथ ही स्वस्थ और जागरूक समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने की बात कही। जिला प्रशासन ने कार्यक्रम में शामिल सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। साथ ही लोगों से अपील की कि 21 जून 2026 को मेमको मोड़ स्थित मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित होने वाले जिला स्तरीय योग कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर योग दिवस को सफल बनाएं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। स्लिम और फिट दिखने की चाह में कई लोग खाना-पीना कम कर देते हैं या लंबे समय तक भूखे रहते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। लगातार वजन बढ़ने के डर से भोजन से दूरी बनाना एनोरेक्सिया नर्वोसा (Anorexia Nervosa) जैसी गंभीर और जानलेवा मानसिक बीमारी का कारण बन सकता है। यह एक ईटिंग डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति खुद को मोटा समझता है और वजन बढ़ने के डर से पर्याप्त भोजन नहीं करता। विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है और शरीर 'स्टार्वेशन मोड' में चला जाता है। इससे शरीर फैट जलाने के बजाय उसे जमा करने लगता है। यदि समय रहते इस समस्या का इलाज न कराया जाए तो कुपोषण, अत्यधिक कमजोरी और कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। क्या हैं इसके प्रमुख लक्षण? एनोरेक्सिया नर्वोसा के सामान्य लक्षणों में तेजी से वजन घटना, कैलोरी गिनने की आदत, भोजन से बचना, अत्यधिक व्यायाम करना, अपने शरीर को लेकर असंतोष, बार-बार वजन मापना, सामाजिक गतिविधियों से दूरी बनाना और खाना खाने के बाद तुरंत बाथरूम जाना शामिल हैं। इसके अलावा हर समय ठंड लगना, थकान, बाल झड़ना, चक्कर आना, धीमी हृदय गति और महिलाओं में मासिक धर्म अनियमित होना भी इसके संकेत हो सकते हैं। क्यों होती है यह बीमारी? विशेषज्ञों का मानना है कि एनोरेक्सिया नर्वोसा के पीछे आनुवंशिक कारण, मानसिक तनाव, कम आत्मविश्वास, सोशल मीडिया का दबाव, शरीर को लेकर नकारात्मक सोच और पारिवारिक इतिहास जैसी कई वजहें जिम्मेदार हो सकती हैं। किशोरियों और युवा महिलाओं में इसका खतरा अपेक्षाकृत अधिक देखा जाता है, हालांकि पुरुष भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। समय पर इलाज है जरूरी डॉक्टरों के अनुसार एनोरेक्सिया का इलाज मेडिकल देखरेख, मनोचिकित्सा (साइकोथेरेपी) और संतुलित पोषण संबंधी सलाह के संयुक्त प्रयास से किया जाता है। यदि किसी व्यक्ति में इसके लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि समय पर इलाज से गंभीर जटिलताओं और जान का जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।
हम अक्सर इस बात पर ध्यान देते हैं कि क्या खाना है, लेकिन यह कम लोग जानते हैं कि कुछ खाद्य पदार्थ एक-दूसरे के साथ मिलकर ज्यादा फायदेमंद साबित होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कई विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट तभी शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित होते हैं जब उन्हें सही खाद्य पदार्थों के साथ खाया जाए। फैमिली फिजिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. सिल्जा शेफर के मुताबिक, कोई एक सुपरफूड या फूड कॉम्बिनेशन खराब खानपान की भरपाई नहीं कर सकता, लेकिन कुछ खास संयोजन शरीर को पोषक तत्वों का अधिक लाभ दिलाने में मदद करते हैं। 1. गाजर या कद्दू के साथ ऑलिव ऑयल गाजर और कद्दू में बीटा-कैरोटीन पाया जाता है, जो शरीर में विटामिन A में बदलता है। यह पोषक तत्व वसा की मौजूदगी में बेहतर तरीके से अवशोषित होता है। फायदा: आंखों, त्वचा और इम्यून सिस्टम के लिए लाभकारी। 2. टमाटर के साथ एवोकाडो या अच्छा तेल टमाटर में मौजूद लाइकोपीन एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है। इसे शरीर में बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने के लिए हेल्दी फैट की जरूरत होती है। फायदा: हृदय और कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मदद। 3. सब्जियों पर नट्स और बीजों की टॉपिंग बादाम, अखरोट, चिया सीड्स या कद्दू के बीज जैसी चीजें हेल्दी फैट और फाइबर प्रदान करती हैं। फायदा: फैट-सॉल्युबल विटामिन्स के अवशोषण में मदद और अतिरिक्त पोषण। 4. प्रोटीन और विटामिन C का संयोजन कोलेजन के निर्माण के लिए शरीर को प्रोटीन के साथ विटामिन C की भी आवश्यकता होती है। बेहतरीन उदाहरण: दही और बेरीज दाल और शिमला मिर्च मछली और नींबू फायदा: त्वचा, कनेक्टिव टिश्यू और घाव भरने की प्रक्रिया को समर्थन। 5. ओट्स के साथ बेरीज या सेब ओट्स में मौजूद प्लांट-बेस्ड आयरन विटामिन C के साथ ज्यादा अच्छी तरह अवशोषित होता है। फायदा: आयरन की कमी से बचाव में मदद। 6. दाल या बीन्स के साथ टमाटर और शिमला मिर्च दालों में मौजूद नॉन-हीम आयरन को शरीर बेहतर तरीके से उपयोग कर सके, इसके लिए विटामिन C जरूरी है। फायदा: शाकाहारी लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी। 7. हल्दी के साथ काली मिर्च हल्दी में मौजूद करक्यूमिन अपने आप में कम अवशोषित होता है, लेकिन काली मिर्च में मौजूद पाइपरीन इसकी जैव उपलब्धता को कई गुना बढ़ा देता है। फायदा: सूजन और इंफ्लेमेशन से जुड़ी समस्याओं में मददगार। 8. प्रीबायोटिक्स और प्रोबायोटिक्स का साथ प्रीबायोटिक्स (फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ) अच्छे बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करते हैं, जबकि प्रोबायोटिक्स सीधे फायदेमंद बैक्टीरिया प्रदान करते हैं। बेहतरीन उदाहरण: दही या केफिर के साथ फल दलिया और योगर्ट फायदा: आंतों के स्वास्थ्य और माइक्रोबायोम को बेहतर बनाने में मदद। सिर्फ फूड कॉम्बिनेशन ही नहीं, संतुलित जीवनशैली भी जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि पोषक तत्वों का अवशोषण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है। आंतों का स्वास्थ्य, हार्मोनल बदलाव, तनाव और कुछ बीमारियां भी इस प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं। इसलिए संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, नियमित व्यायाम, अच्छी नींद और तनाव नियंत्रण भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
Weekend Therapy: सिर्फ छुट्टी नहीं, खुद को रीचार्ज करने का मौका है वीकेंड पूरे सप्ताह ऑफिस, पढ़ाई, बिजनेस और घरेलू जिम्मेदारियों के बीच लोग शारीरिक और मानसिक रूप से थक जाते हैं। ऐसे में वीकेंड केवल आराम का दिन नहीं, बल्कि खुद को फिर से ऊर्जा से भरने का अवसर भी होता है। हालांकि कई लोग शनिवार और रविवार का ज्यादातर समय मोबाइल चलाने या देर तक सोने में बिताते हैं, जिससे शरीर और दिमाग को वास्तविक आराम नहीं मिल पाता। यदि आप वीकेंड का सही उपयोग करें तो आने वाले सप्ताह की शुरुआत नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच के साथ कर सकते हैं। 1. पूरी करें अधूरी नींद, लेकिन जरूरत से ज्यादा नहीं कामकाजी दिनों में अक्सर पर्याप्त नींद नहीं मिल पाती। वीकेंड पर शरीर को आराम देने के लिए अच्छी और गहरी नींद लेना जरूरी है। हालांकि बहुत ज्यादा देर तक सोना भी नुकसानदायक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य समय से एक-दो घंटे अधिक आराम करना शरीर और दिमाग को तरोताजा रखने के लिए पर्याप्त होता है। अच्छी नींद मानसिक तनाव कम करने और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करती है। 2. कुछ घंटों के लिए करें डिजिटल डिटॉक्स मोबाइल, लैपटॉप और टीवी की स्क्रीन आज हमारी जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुकी हैं। लगातार सोशल मीडिया और ईमेल्स देखने से दिमाग को आराम नहीं मिल पाता। वीकेंड पर कम से कम चार से पांच घंटे के लिए फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस से दूरी बनाएं। डिजिटल डिटॉक्स से आंखों को आराम मिलता है और मानसिक तनाव भी कम होता है। 3. प्रकृति के करीब बिताएं समय बंद कमरों और व्यस्त शहरों की जिंदगी से निकलकर थोड़ी देर प्रकृति के बीच समय बिताना मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। सुबह या शाम किसी पार्क में टहलना, हरियाली के बीच बैठना या ताजी हवा में गहरी सांस लेना मन को शांति देता है। प्रकृति के संपर्क में रहने से सकारात्मक भावनाएं बढ़ती हैं और तनाव कम होता है। 4. अपने शौक को दें समय भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर अपने पसंदीदा शौक भूल जाते हैं। वीकेंड पर कुछ समय उन गतिविधियों के लिए निकालें जो आपको खुशी देती हैं। चाहे किताब पढ़ना हो, संगीत सुनना, पेंटिंग करना, गार्डनिंग करना या कोई नया हुनर सीखना—अपनी पसंद का काम करने से मन प्रसन्न रहता है और मानसिक दबाव कम होता है। 5. मसाज और गुनगुने पानी से दें शरीर को राहत लगातार काम करने से शरीर की मांसपेशियों में खिंचाव और थकान महसूस हो सकती है। ऐसे में गुनगुने पानी से स्नान करना या हल्के तेल से मसाज करना फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके अलावा गुनगुने पानी में सेंधा नमक डालकर कुछ देर पैर डुबोकर बैठने से भी शरीर को आराम मिलता है। यह तरीका ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करने और शारीरिक थकान कम करने में मदद करता है। 6. परिवार और दोस्तों के साथ बिताएं क्वालिटी टाइम काम का दबाव और व्यस्त दिनचर्या कई बार लोगों को भावनात्मक रूप से भी थका देती है। वीकेंड पर परिवार, दोस्तों या प्रियजनों के साथ समय बिताना मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। खुलकर बातचीत करना, हंसी-मजाक करना और पुरानी यादें साझा करना तनाव कम करने का प्रभावी तरीका माना जाता है। छोटी-छोटी आदतें बदल सकती हैं आपका पूरा वीकेंड वीकेंड का सही इस्तेमाल केवल आराम करने के लिए नहीं, बल्कि खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से बेहतर बनाने के लिए भी किया जा सकता है। यदि आप अच्छी नींद, डिजिटल डिटॉक्स, प्रकृति के साथ समय, अपनी हॉबी, रिलैक्सेशन और अपनों के साथ बातचीत जैसी आदतों को अपनाते हैं, तो न सिर्फ आपकी थकान दूर होगी बल्कि आप नए सप्ताह की शुरुआत भी अधिक उत्साह और ऊर्जा के साथ कर पाएंगे।
बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी कुंद्रा 51 साल की हो चुकी हैं, लेकिन उनकी फिटनेस और एनर्जी आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है। 1993 में फिल्म बाजीगर से अपने करियर की शुरुआत करने वाली शिल्पा ने वर्षों से योग, संतुलित खानपान और नियमित व्यायाम को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाया हुआ है। शिल्पा का मानना है कि फिटनेस केवल शरीर को आकार देने का जरिया नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने का भी माध्यम है। वह हमेशा समग्र स्वास्थ्य (Holistic Wellness) पर जोर देती हैं और साफ-सुथरे खानपान के साथ नियमित शारीरिक गतिविधियों को बेहद महत्वपूर्ण मानती हैं। प्लैंक एक्सरसाइज से बनाती हैं मजबूत कोर हाल ही में शिल्पा शेट्टी ने सोशल मीडिया पर अपने वर्कआउट रूटीन की झलक साझा की थी। इस रूटीन में उन्होंने कई तरह की प्लैंक एक्सरसाइज शामिल की हैं, जिनमें— एक्सटेंडेड आर्म प्लैंक विद हिप एक्सटेंशन साइड एल्बो प्लैंक विद हिप डिप्स एल्बो प्लैंक विद हिप एब्डक्शन और एडडक्शन इन सभी एक्सरसाइज को वह 15-20 रेपिटेशन के तीन सेट में करती हैं। यह रूटीन पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के साथ-साथ कंधों, हाथों, पैरों और पीठ की मांसपेशियों की सहनशक्ति भी बढ़ाता है। सबसे खास बात यह है कि इस पूरे वर्कआउट के लिए केवल एक योगा मैट और करीब 20 मिनट का समय चाहिए। शिल्पा इसे अपनी "वॉशबोर्ड एब्स की रेसिपी" बताती हैं। हालांकि, वह नए लोगों को सलाह देती हैं कि शुरुआत आसान एक्सरसाइज से करें और धीरे-धीरे एडवांस रूटीन की तरफ बढ़ें। योग और मेडिटेशन भी हैं फिटनेस का अहम हिस्सा शिल्पा शेट्टी केवल जिम वर्कआउट पर निर्भर नहीं रहतीं, बल्कि योग और मेडिटेशन को भी अपनी दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती हैं। उनका कहना है कि योग शरीर के साथ-साथ मन और आत्मा को भी संतुलित करता है। सेतु बंधासन से मिलता है मानसिक और शारीरिक लाभ सेतु बंधासन (ब्रिज पोज) गर्दन, कंधों और पीठ को मजबूत बनाने में मदद करता है। यह रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बढ़ाने के साथ तनाव कम करने और मानसिक शांति प्रदान करने में भी सहायक माना जाता है। अर्ध हलासन और नौकासन से मजबूत होती हैं पेट की मांसपेशियां अर्ध हलासन और नौकासन दोनों ही कोर स्ट्रेंथ बढ़ाने वाले प्रमुख योगासन माने जाते हैं। इनसे— पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। पाचन तंत्र बेहतर होता है। रीढ़ की लचक बढ़ती है। शरीर का पोश्चर सुधरता है। आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती में भी वृद्धि होती है। शिल्पा शेट्टी की फिटनेस फिलॉसफी यही संदेश देती है कि नियमित व्यायाम, योग और संतुलित जीवनशैली के जरिए किसी भी उम्र में स्वस्थ और फिट रहा जा सकता है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य दोनों ही लोगों की प्राथमिकता बन चुके हैं। ऐसे में योग का एक खास आसन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसे विशेषज्ञ 100 पारंपरिक सिट-अप्स के बराबर प्रभावी मानते हैं। यह आसन है नौकासन (Navasana) या Boat Pose, जो न केवल पेट और कोर मसल्स को मजबूत बनाता है बल्कि तनाव कम करने और शरीर को संतुलित रखने में भी मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, नौकासन शरीर की गहरी मांसपेशियों पर काम करता है और नियमित अभ्यास से शरीर की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार लाता है। यही कारण है कि इसे योग की सबसे प्रभावशाली कोर-स्ट्रेंथ एक्सरसाइज में गिना जाता है। 100 सिट-अप्स जितना असरदार क्यों माना जाता है नौकासन? अमेरिका की Auburn University at Montgomery द्वारा किए गए एक अध्ययन में नौकासन को योग और पिलेट्स की सबसे प्रभावी कोर एक्सरसाइज में शामिल किया गया। प्रसिद्ध योग शिक्षक Sharath Jois का मानना था कि यदि कोई व्यक्ति इस आसन को 25 गहरी सांसों तक सही तरीके से होल्ड करता है, तो इसका प्रभाव 100 पारंपरिक सिट-अप्स के बराबर हो सकता है। पेट, पीठ और कूल्हों को बनाता है मजबूत योग प्रशिक्षकों के अनुसार, नौकासन केवल एब्स तक सीमित नहीं है। यह पेट की मांसपेशियों, हिप फ्लेक्सर्स, ग्लूट्स, पेल्विक मसल्स और पीठ को भी मजबूत करता है। इस आसन के दौरान कोर को सक्रिय रखने से पेट के अंदरूनी अंगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे पाचन तंत्र बेहतर काम करता है और मेटाबॉलिज्म को भी समर्थन मिलता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित अभ्यास पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी कम करने में भी सहायक हो सकता है। तनाव कम करने में भी मददगार नौकासन का फायदा केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है। यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। साल 2023 में जर्नल Biomedicine में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि नियमित योग और ध्यान का अभ्यास करने वाले छात्रों में छह सप्ताह के भीतर कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर कम हुआ। नौकासन करते समय संतुलन बनाए रखना, सांसों को नियंत्रित करना और मन को केंद्रित रखना पड़ता है। यही प्रक्रिया तंत्रिका तंत्र को शांत करने और तनाव को नियंत्रित करने में मदद करती है। दिमाग की क्षमता भी बढ़ाता है नौकासन एक ऐसा आसन है जिसमें शरीर को संतुलन और स्थिरता दोनों बनाए रखनी होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के बैलेंसिंग अभ्यास मस्तिष्क और शरीर के बीच समन्वय को मजबूत करते हैं। नियमित अभ्यास से एकाग्रता, फोकस और न्यूरोमस्कुलर कनेक्शन बेहतर होता है। यही वजह है कि इसे शरीर और मन दोनों के लिए फायदेमंद माना जाता है। नौकासन करने का सही तरीका जमीन पर सीधे बैठ जाएं और पैरों को सामने फैलाएं। घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन से ऊपर उठाएं। धीरे-धीरे पैरों को सीधा करके शरीर को V आकार में लाने का प्रयास करें। रीढ़ को सीधा रखें और छाती को खुला रखें। दोनों हाथों को सामने की ओर फैलाएं। नजर हल्की ऊपर रखें और कोर को सक्रिय रखें। 5 से 10 गहरी सांसों तक इस स्थिति में बने रहें। आराम करें और 3 से 5 बार दोहराएं। शुरुआती लोग घुटनों को मोड़कर आसान रूप में भी इसका अभ्यास कर सकते हैं। इन गलतियों से बचें पीठ को गोल कर लेना सांस रोककर रखना कंधों में अनावश्यक तनाव पैदा करना क्षमता से अधिक पैरों को ऊपर उठाने की कोशिश करना विशेषज्ञों का कहना है कि इस आसन में ऊंचाई से ज्यादा स्थिरता महत्वपूर्ण होती है। किन लोगों को नहीं करना चाहिए नौकासन? निम्न समस्याओं से जूझ रहे लोगों को विशेषज्ञ की सलाह के बिना नौकासन नहीं करना चाहिए: कमर की गंभीर चोट हिप फ्लेक्सर स्ट्रेन हर्निया हाल ही में हुई पेट की सर्जरी गर्भावस्था के कुछ चरण
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।