Student Movement

Supreme Court of India hearing petitions on police action during Jantar Mantar student protests
Jantar Mantar Protest: छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई के मामलों पर SC करेगा सुनवाई, पूरे देश के लिए SOP बनाने पर विचार

Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सोमवार (27 जुलाई) को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मंगलवार (28 जुलाई) को इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करेगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में पूरे देश में विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure-SOP) तैयार करने पर विचार किया जाएगा। दिल्ली से बिहार तक के मामलों पर होगी संयुक्त सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष दिल्ली के जंतर-मंतर छात्र आंदोलन में पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं का उल्लेख किया गया। इस दौरान वकीलों ने बताया कि बिहार समेत अन्य राज्यों में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले भी अदालत के समक्ष लाए गए हैं। याचिकाओं में दिल्ली के जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज के अलावा बिहार के सिवान में कथित तौर पर AK-47 के इस्तेमाल जैसे मामलों का भी जिक्र किया गया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों को एक साथ सूचीबद्ध कर संयुक्त सुनवाई करने का निर्देश दिया। पूरे देश के लिए SOP बनाने पर सुप्रीम कोर्ट का संकेत सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए पूरे देश में एक समान SOP की आवश्यकता पर विचार किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि सभी राज्यों से जुड़े मामलों पर विचार करने के बाद यह देखा जाएगा कि भविष्य में ऐसे हालात से निपटने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जा सकते हैं या नहीं। 'शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार' मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का एक मूल अधिकार है और नागरिकों को इसके लिए उचित स्थान और अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल विरोध प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस की कठोर कार्रवाई या आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग को उचित नहीं ठहराया जा सकता। अदालत इस बात की भी जांच करेगी कि पुलिस द्वारा अपनाए गए कदम कानून और संविधान के अनुरूप थे या नहीं। पुलिसकर्मियों की सुरक्षा पर भी होगी सुनवाई सुनवाई के दौरान घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों की ओर से भी पक्ष रखा गया। उनके वकील ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया, जिससे कई जवान घायल हुए। उन्होंने मांग की कि अदालत पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और उनके अधिकारों पर भी विचार करे। इस पर जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि "हर जीवन महत्वपूर्ण है।" उन्होंने कहा कि अदालत प्रदर्शनकारियों के अधिकारों के साथ-साथ ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था और उनके संरक्षण से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा करेगी। मंगलवार को होगी अहम सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित याचिकाओं को एक साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। मंगलवार (28 जुलाई) को होने वाली सुनवाई में अदालत प्रदर्शनकारियों के अधिकार, पुलिस की जवाबदेही, कानून-व्यवस्था बनाए रखने की प्रक्रिया और भविष्य के लिए राष्ट्रीय स्तर पर SOP तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार करेगी। यह सुनवाई देशभर में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई के लिए भविष्य की कानूनी रूपरेखा तय करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।  

kalpana जुलाई 27, 2026 0
Indian students protesting peacefully at Jantar Mantar during a youth movement
जंतर-मंतर ने दुनिया को दिखाया नया भारत, भारतीय Gen-Z ने विरोध की बदल दी परिभाषा

Gen-Z Protest: 36 दिनों तक चले जंतर-मंतर छात्र आंदोलन के समापन के साथ सिर्फ एक धरना खत्म नहीं हुआ, बल्कि भारतीय छात्र राजनीति में विरोध की एक नई शैली सामने आई। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन समाप्त हुआ, लेकिन इस दौरान देश की Gen-Z पीढ़ी ने जिस अनुशासन, अहिंसा और रचनात्मकता का परिचय दिया, उसने भारतीय लोकतंत्र में विरोध की राजनीति को एक नई पहचान दी। जिस पीढ़ी को अक्सर सोशल मीडिया, रील्स और डिजिटल दुनिया तक सीमित मान लिया जाता है, उसी पीढ़ी ने यह साबित किया कि वह लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक जिम्मेदारियों को भी उतनी ही गंभीरता से समझती है। जंतर-मंतर पर बीते 36 दिनों में जो तस्वीरें सामने आईं, वे दुनिया के कई बड़े छात्र आंदोलनों से अलग नजर आईं। विरोध भी, जिम्मेदारी भी आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने न तो सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और न ही हिंसा का रास्ता अपनाया। पुलिस की कार्रवाई, वॉटर कैनन, हिरासत और सुरक्षा बंदोबस्त के बावजूद आंदोलन का स्वरूप व्यापक रूप से शांतिपूर्ण बना रहा। प्रदर्शन के बीच कई ऐसे दृश्य सामने आए जिन्होंने लोगों का ध्यान खींचा। कहीं छात्र वॉटर कैनन के बीच नाचते दिखाई दिए, तो कहीं पुलिसकर्मियों से मजाकिया अंदाज में हेलमेट मांगते नजर आए। भीषण गर्मी में कुछ छात्र राहगीरों को हाथ से पंखा झलते दिखे, जबकि स्वयंसेवकों ने प्रदर्शन स्थल की सफाई की जिम्मेदारी भी अपने हाथों में ली। दस्ताने पहनकर कचरा उठाना, झाड़ू लगाना और सफाई अभियान चलाना इस आंदोलन की अलग पहचान बन गया। रचनात्मक विरोध की नई मिसाल यह आंदोलन केवल नारों तक सीमित नहीं रहा। कविता, संगीत, पोस्टर, व्यंग्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से छात्रों ने अपनी बात रखी। सोशल मीडिया का उपयोग केवल प्रचार के लिए नहीं, बल्कि संवाद और जनजागरूकता के माध्यम के रूप में किया गया। इसने यह संदेश दिया कि विरोध केवल आक्रोश नहीं, बल्कि विचार और जिम्मेदारी के साथ भी किया जा सकता है। मास्क के पीछे छिपी सामाजिक हकीकत आंदोलन के दौरान कई छात्र मास्क या हेलमेट पहनकर प्रदर्शन में शामिल हुए। इसके पीछे सुरक्षा से अधिक पारिवारिक और सामाजिक दबाव की वजह बताई गई। कुछ छात्रों का कहना था कि उनके परिवारों की राजनीतिक सोच अलग है और वे घर में अनावश्यक विवाद नहीं चाहते थे। यह पहलू भारतीय समाज में राजनीतिक मतभेदों के बदलते स्वरूप को भी दर्शाता है। देश के शीर्ष संस्थानों के छात्र रहे शामिल जंतर-मंतर आंदोलन में देश के कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के छात्र शामिल हुए। इनमें IIT, AIIMS, IIM, NIT, दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू, बीएचयू, श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, मिरांडा हाउस और अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी मौजूद थे। इनमें बड़ी संख्या उन छात्रों की थी जिन्होंने JEE Advanced, NEET, CAT, CLAT और CUET जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की थी। यही कारण रहा कि आंदोलन की रणनीति, पोस्टर, नारे और सोशल मीडिया अभियान में भी वैचारिक परिपक्वता और व्यवस्थित योजना दिखाई दी। दुनिया के आंदोलनों से कैसे अलग रहा जंतर-मंतर? पिछले कुछ वर्षों में फ्रांस, चिली, हांगकांग, बांग्लादेश और श्रीलंका सहित कई देशों में छात्र आंदोलनों के दौरान हिंसा, आगजनी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और पुलिस के साथ गंभीर झड़पें देखने को मिलीं। इसके विपरीत जंतर-मंतर आंदोलन में प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण विरोध, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन करने पर जोर दिया। आंदोलन के दौरान स्वयं सफाई करना, लोगों की मदद करना और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से अपनी बात रखना इसकी सबसे बड़ी विशेषता बनकर उभरा। भारतीय छात्र आंदोलनों की नई दिशा जेपी आंदोलन, मंडल आंदोलन और नागरिकता कानून विरोध जैसे आंदोलनों के बाद जंतर-मंतर का यह आंदोलन एक अलग पहचान छोड़ता दिखाई देता है। यहां विरोध था, लेकिन हिंसा नहीं। नारों में आक्रोश था, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति के प्रति सम्मान भी था। सोशल मीडिया की ताकत थी, लेकिन जमीनी संगठन और अनुशासन भी उतना ही मजबूत दिखाई दिया। इस आंदोलन ने यह संकेत दिया कि भारत की नई पीढ़ी केवल डिजिटल दुनिया तक सीमित नहीं है। वह लोकतंत्र में अपनी भागीदारी को समझती है, सवाल भी पूछती है और जिम्मेदारी भी निभाती है। यही वजह है कि जंतर-मंतर का यह आंदोलन भारतीय छात्र राजनीति के इतिहास में विरोध की एक नई और अलग शैली के रूप में याद किया जा सकता है।  

kalpana जुलाई 27, 2026 0
NEET Protest
डिंपल यादव ने छात्र आंदोलन का किया समर्थन, बोलीं- युवाओं की आवाज को दबाया नहीं जा सकता

नई दिल्ली, एजेंसियां। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने नीट पेपर लीक विवाद और छात्र आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। डिंपल यादव ने छात्रों के समर्थन में आवाज उठाते हुए कहा कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। वह हाल ही में CJP के 'संसद चलो' मार्च में शामिल हुई थीं, जहां उन्होंने पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया।   संसद से जंतर-मंतर तक मार्च में हुईं शामिल   डिंपल यादव ने समाजवादी पार्टी के अन्य सांसदों के साथ संसद परिसर से जंतर-मंतर तक पैदल मार्च किया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने नीट पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाई। डिंपल यादव ने छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेने और सरकार से संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की।   सोनम वांगचुक मामले पर भी उठाए सवाल   इससे पहले डिंपल यादव ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने की दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन करते हुए कहा था कि लोकतंत्र में लोगों की आवाज सुनना जरूरी है।   सपा में बढ़ रही है डिंपल यादव की सक्रिय भूमिका   राजनीतिक रूप से डिंपल यादव की सक्रियता पिछले कुछ समय में बढ़ी है। वह समाजवादी पार्टी की प्रमुख महिला चेहरों में शामिल हैं और वर्तमान में मैनपुरी लोकसभा सीट से सांसद हैं। संसद में भी वह शिक्षा, महिला मुद्दों और सामाजिक विषयों पर अपनी बात रखती रही हैं।

anjali kumari जुलाई 24, 2026 0
DSPMU रांची में छात्र संगठनों और शिक्षक-कर्मचारियों के बीच धक्का-मुक्की और प्रदर्शन
DSPMU में फिर बवाल, छात्र संगठनों और शिक्षक-कर्मचारियों के बीच धक्का-मुक्की

रांची। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) में विभिन्न शैक्षणिक मांगों को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन गुरुवार को एक बार फिर विवाद में बदल गया। सीट कटौती, क्लस्टर सिस्टम, स्मार्ट क्लासरूम और अन्य मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठनों तथा विश्वविद्यालय के शिक्षक-कर्मचारियों के बीच तीखी नोकझोंक के बाद धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। बढ़ते तनाव को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस बल बुलाया, जबकि रांची के सिटी एसपी स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे।   विश्वविद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों ने कुलपति कार्यालय के मुख्य गेट के सामने पेन डाउन स्ट्राइक करते हुए धरना दिया। उनका आरोप है कि बाहरी छात्रों के लगातार प्रदर्शन से शैक्षणिक माहौल और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, धरने की सूचना मिलते ही विभिन्न छात्र संगठनों के सदस्य भी मौके पर पहुंच गए, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस धक्का-मुक्की में बदल गई।   छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के एक कर्मचारी ने उनके साथ हाथापाई की है। उन्होंने संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई और इस्तीफे की मांग करते हुए चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।   दूसरी ओर, शिक्षक और कर्मचारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल विश्वविद्यालय में शैक्षणिक वातावरण बनाए रखना है। विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर डॉ. अजय चौधरी ने आरोप लगाया कि कुछ छात्र लगातार अनुशासनहीनता कर विश्वविद्यालय की व्यवस्था बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि छात्र संगठनों का कहना है कि प्रशासन उनकी समस्याओं की अनदेखी कर मनमाने फैसले ले रहा है।   मामले की गंभीरता को देखते हुए सिटी एसपी ने दोनों पक्षों से बातचीत कर माहौल शांत कराने की पहल की। फिलहाल पुलिस बल विश्वविद्यालय परिसर में तैनात है और छात्र संगठनों व विश्वविद्यालय प्रबंधन के बीच वार्ता जारी है। उल्लेखनीय है कि पिछले कई दिनों से छात्र सीट कटौती, क्लस्टर सिस्टम समाप्त करने और अन्य शैक्षणिक मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 23, 2026 0
CJP Protest
CJP Protest: छात्रों के समर्थन में उतरे दिलजीत दोसांझ, कई बॉलीवुड सितारों ने उठाई आवाज

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के जंतर-मंतर से संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई के बाद मनोरंजन जगत के कई प्रमुख कलाकार छात्रों के समर्थन में सामने आए हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसमें 118 से अधिक पुलिसकर्मी और करीब 60 प्रदर्शनकारी घायल हुए। घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई फिल्मी हस्तियों ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए शांतिपूर्ण संवाद और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग की।   दिलजीत बोले- छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए छात्रों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ सख्ती नहीं बरती जानी चाहिए और प्रशासन को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। दिलजीत ने यह भी याद दिलाया कि किसानों के आंदोलन के दौरान समर्थन करने पर उन्हें आलोचना और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था तथा कई बार उन्हें 'राष्ट्र-विरोधी' कहा गया।   वीर दास ने कलाकारों की चुप्पी पर उठाए सवाल कॉमेडियन और अभिनेता वीर दास ने कलाकारों से सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बोलने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि कलाकार जनता के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चुप रहते हैं, तो बाद में उनसे समर्थन और टिकट खरीदने की उम्मीद करना उचित नहीं है। उनके अनुसार, युवाओं का भरोसा और समर्थन ही लाइव एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की सबसे बड़ी ताकत है।   हुमा, भूमि और अन्य सितारों ने जताई चिंता अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने घटना की तस्वीरों को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि ऐसे दृश्य लंबे समय तक याद रहेंगे। उन्होंने बल प्रयोग के बजाय संवाद और धैर्य की आवश्यकता पर जोर दिया। भूमि पेडनेकर ने लिखा कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है और लोकतंत्र में बातचीत सबसे प्रभावी रास्ता है। अनुराग कश्यप ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि अदिति राव हैदरी, सोनाक्षी सिन्हा, सोहा अली खान, रितेश देशमुख और जेनेलिया ने भी छात्रों के समर्थन में अपनी बात रखी। कलाकारों की इन प्रतिक्रियाओं ने एक बार फिर लोकतांत्रिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और युवाओं की आवाज को लेकर राष्ट्रीय बहस को तेज कर दिया। 

anjali kumari जुलाई 21, 2026 0
Abhijit Deepke announces student-led protest demanding accountability over examination controversies
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक 6 जून को लौटेंगे भारत, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान

  कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने घोषणा की है कि वह 6 जून को भारत लौटेंगे और विभिन्न परीक्षा विवादों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करेंगे। वर्तमान में अमेरिका में मौजूद दीपके ने सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों और छात्रों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है। एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि छात्र और नागरिक संविधान के दायरे में रहकर अपनी आवाज बुलंद करें। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों के एकजुट होने पर सरकार को उनकी मांगों पर ध्यान देना पड़ेगा। दिल्ली एयरपोर्ट से जंतर-मंतर तक मार्च की तैयारी अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों से 6 जून की सुबह दिल्ली हवाई अड्डे पर उनका स्वागत करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वहां से सभी लोग संसद मार्ग थाने पहुंचेंगे और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगेंगे। दीपके के अनुसार, उनका प्रस्तावित आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित किया जाएगा। परीक्षा विवादों को लेकर सरकार पर सवाल दीपके ने दावा किया कि हाल के वर्षों में कई प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि नीट, सीबीएसई, सीयूईटी और एसएससी-जीडी जैसी परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने छात्रों के बीच असुरक्षा और चिंता का माहौल पैदा किया है। उनका आरोप है कि इन घटनाओं का असर एक करोड़ से अधिक छात्रों पर पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद जवाबदेही तय नहीं की गई। ऑनलाइन याचिका को मिले लाखों समर्थन अभिजीत दीपके ने बताया कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू की गई ऑनलाइन याचिका पर अब तक करीब आठ लाख लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में भी शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। दीपके ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के प्रभावित होने के बावजूद यदि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती है, तो यह जवाबदेही की कमी को दर्शाता है।   गिरफ्तारी की आशंका पर भी दी प्रतिक्रिया अपने वीडियो संदेश में दीपके ने कहा कि उनके परिवार और मित्रों को आशंका है कि भारत लौटने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन उन्हें शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से विरोध दर्ज कराने की अनुमति देगा। उन्होंने कहा कि वह लोकतंत्र और संविधान में विश्वास रखते हैं तथा कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखना चाहते हैं। गांधी, आंबेडकर और भगत सिंह से प्रेरित होने का दावा दीपके ने कहा कि वह महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर, भगत सिंह और जवाहरलाल नेहरू के विचारों से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार देता है और उनका आंदोलन इसी संवैधानिक अधिकार के तहत होगा। उन्होंने समर्थकों से अपील करते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए सभी लोगों को लोकतांत्रिक तरीके से एकजुट होकर अपनी आवाज उठानी चाहिए।  

Deepshikha जून 2, 2026 0
Young cricket sensation Vaibhav Sooryavanshi celebrates after a standout performance in IPL 2026
15 साल के वैभव सूर्यवंशी पर BCCI की बड़ी नजर, जल्द मिल सकता है टीम इंडिया का टिकट

IPL 2026 में धमाकेदार प्रदर्शन के बाद बढ़ी राष्ट्रीय टीम में चयन की उम्मीद भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे Vaibhav Sooryavanshi को लेकर टीम इंडिया में चयन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। आईपीएल 2026 में शानदार बल्लेबाजी करने वाले 15 वर्षीय युवा खिलाड़ी के लिए अब राष्ट्रीय टीम के दरवाजे खुलते नजर आ रहे हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सचिव Devajit Saikia ने संकेत दिया है कि वैभव जल्द ही भारतीय सीनियर टीम का हिस्सा बन सकते हैं। उनके बयान को युवा बल्लेबाज के लिए अब तक का सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है। IPL 2026 के सबसे बड़े सितारे बने वैभव Rajasthan Royals के लिए खेलते हुए वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में 16 मैचों में 776 से अधिक रन बनाए और ऑरेंज कैप अपने नाम की। पूरे सीजन में उन्होंने दुनिया के कई दिग्गज गेंदबाजों के खिलाफ निडर बल्लेबाजी की। उनकी तकनीक, आक्रामकता और दबाव में मैच संभालने की क्षमता ने क्रिकेट विशेषज्ञों और चयनकर्ताओं को प्रभावित किया। BCCI सचिव ने दिए बड़े संकेत देवजीत सैकिया ने कहा कि चयन समिति युवा बल्लेबाज के प्रदर्शन पर लगातार नजर बनाए हुए है और उनके भविष्य को लेकर उचित फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वैभव भारतीय क्रिकेट के नए "वंडरकिड" हैं और आने वाले दिनों में दुनिया भर में अपनी छाप छोड़ सकते हैं। सैकिया के अनुसार, चयन समिति के सभी सदस्य आईपीएल मैचों पर करीबी नजर रख रहे थे और वैभव का प्रदर्शन किसी से छिपा नहीं है। इंग्लैंड दौरे की टीम में मिल सकता है मौका रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय टीम के आगामी यूनाइटेड किंगडम दौरे के लिए होने वाली चयन बैठक में वैभव सूर्यवंशी का नाम चर्चा का विषय बन सकता है। हालांकि BCCI ने आधिकारिक तौर पर किसी चयन की पुष्टि नहीं की है, लेकिन बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों की टिप्पणियों ने अटकलों को और मजबूत कर दिया है। "असाधारण प्रतिभा" बताया देवजीत सैकिया ने कहा कि आईपीएल में कई खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया, लेकिन वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन "असाधारण" रहा। उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट को इस समय एक नया प्रतिभाशाली खिलाड़ी मिला है और वह जल्द ही नई ऊंचाइयों को छू सकता है। चयनकर्ताओं के सामने बड़ी चुनौती अब अंतिम फैसला मुख्य चयनकर्ता Ajit Agarkar और उनकी टीम को लेना है। चयनकर्ताओं को यह तय करना होगा कि इतनी कम उम्र में वैभव को सीधे सीनियर टीम में मौका दिया जाए या पहले उन्हें भारत ए और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुभव दिलाए जाएं। खिलाड़ियों की फिटनेस पर भी BCCI की नजर आईपीएल के बाद खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर भी BCCI सतर्क है। सैकिया ने बताया कि बोर्ड का तकनीकी और फिटनेस स्टाफ केंद्रीय अनुबंध वाले खिलाड़ियों की लगातार निगरानी करता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि आईपीएल के दौरान खिलाड़ी अपनी-अपनी फ्रेंचाइजी के नियंत्रण में होते हैं, इसलिए बोर्ड हर गतिविधि में सीधे हस्तक्षेप नहीं करता। भारतीय क्रिकेट का अगला सुपरस्टार? वैभव सूर्यवंशी की उम्र अभी सिर्फ 15 साल है, लेकिन उन्होंने जिस तरह बड़े मंच पर खुद को साबित किया है, उससे क्रिकेट जगत में उनकी तुलना भविष्य के बड़े सितारों से की जाने लगी है। अगर उन्हें जल्द ही टीम इंडिया में मौका मिलता है, तो वह भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे कम उम्र के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों में शामिल हो सकते हैं।  

surbhi जून 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0