फाइनेंस

पेट्रोल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स शून्य, डीजल और ATF पर भी शुल्क घटा

abhishek singh अगस्त 16, 2026 0
Windfall Tax
Windfall Tax on Petrol Exports Nil

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स यानी विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) में एक बार फिर बदलाव किया है। 15 अगस्त 2026 से लागू नई दरों में पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क पूरी तरह शून्य कर दिया गया है। वहीं डीजल और विमानन ईंधन ATF पर भी शुल्क घटाया गया है। यह बदलाव फिलहाल 15 से 31 अगस्त 2026 के पखवाड़े के लिए लागू है।

 

पेट्रोल पर टैक्स पूरी तरह खत्म, डीजल और ATF भी सस्ते

 

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर पहले ₹3.50 प्रति लीटर SAED लगाया जा रहा था, जिसे अब घटाकर ₹0 कर दिया गया है। डीजल पर शुल्क ₹25.50 से घटाकर ₹24 प्रति लीटर और ATF पर ₹22 से घटाकर ₹19.50 प्रति लीटर कर दिया गया है। इस तरह डीजल पर ₹1.50 प्रति लीटर और ATF पर ₹2.50 प्रति लीटर की कमी की गई है। पेट्रोल पर ₹3.50 प्रति लीटर का पूरा निर्यात शुल्क हटा दिया गया है।

 

सरकार हर दो सप्ताह में करती है समीक्षा

 

भारत में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर ये शुल्क स्थायी दर नहीं हैं। सरकार अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों तथा घरेलू आपूर्ति की स्थिति को देखते हुए इनकी हर पखवाड़े समीक्षा करती है। मौजूदा बदलाव भी इसी समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है।

 

विंडफॉल टैक्स का उद्देश्य ऐसे समय में पेट्रोलियम कंपनियों के असाधारण निर्यात लाभ पर अतिरिक्त कर लगाना और घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है। यह व्यवस्था 2022 में शुरू हुई थी और 2026 में पश्चिम एशिया में बढ़ी ऊर्जा बाजार की अस्थिरता के बीच इसे दोबारा लागू किया गया।

 

घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमत पर सीधा असर नहीं

 

यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि निर्यात शुल्क में कटौती का मतलब पेट्रोल या डीजल के घरेलू पंप मूल्य में तत्काल कमी नहीं है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इस बदलाव का संबंध मुख्य रूप से निर्यात किए जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाले शुल्क से है। घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर लागू मौजूदा उत्पाद शुल्क में इस अधिसूचना से बदलाव नहीं किया गया है।

 

तेल कंपनियों को निर्यात में मिल सकती है राहत

 

पेट्रोल पर निर्यात शुल्क खत्म होने और डीजल तथा ATF पर शुल्क घटने से भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात कुछ अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकता है। इसका असर कंपनियों के निर्यात मार्जिन पर पड़ सकता है, खासकर तब जब वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी हो।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

फाइनेंस

View more
Windfall Tax
पेट्रोल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स शून्य, डीजल और ATF पर भी शुल्क घटा

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स यानी विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) में एक बार फिर बदलाव किया है। 15 अगस्त 2026 से लागू नई दरों में पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क पूरी तरह शून्य कर दिया गया है। वहीं डीजल और विमानन ईंधन ATF पर भी शुल्क घटाया गया है। यह बदलाव फिलहाल 15 से 31 अगस्त 2026 के पखवाड़े के लिए लागू है।   पेट्रोल पर टैक्स पूरी तरह खत्म, डीजल और ATF भी सस्ते   वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर पहले ₹3.50 प्रति लीटर SAED लगाया जा रहा था, जिसे अब घटाकर ₹0 कर दिया गया है। डीजल पर शुल्क ₹25.50 से घटाकर ₹24 प्रति लीटर और ATF पर ₹22 से घटाकर ₹19.50 प्रति लीटर कर दिया गया है। इस तरह डीजल पर ₹1.50 प्रति लीटर और ATF पर ₹2.50 प्रति लीटर की कमी की गई है। पेट्रोल पर ₹3.50 प्रति लीटर का पूरा निर्यात शुल्क हटा दिया गया है।   सरकार हर दो सप्ताह में करती है समीक्षा   भारत में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर ये शुल्क स्थायी दर नहीं हैं। सरकार अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों तथा घरेलू आपूर्ति की स्थिति को देखते हुए इनकी हर पखवाड़े समीक्षा करती है। मौजूदा बदलाव भी इसी समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है।   विंडफॉल टैक्स का उद्देश्य ऐसे समय में पेट्रोलियम कंपनियों के असाधारण निर्यात लाभ पर अतिरिक्त कर लगाना और घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है। यह व्यवस्था 2022 में शुरू हुई थी और 2026 में पश्चिम एशिया में बढ़ी ऊर्जा बाजार की अस्थिरता के बीच इसे दोबारा लागू किया गया।   घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमत पर सीधा असर नहीं   यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि निर्यात शुल्क में कटौती का मतलब पेट्रोल या डीजल के घरेलू पंप मूल्य में तत्काल कमी नहीं है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इस बदलाव का संबंध मुख्य रूप से निर्यात किए जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाले शुल्क से है। घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर लागू मौजूदा उत्पाद शुल्क में इस अधिसूचना से बदलाव नहीं किया गया है।   तेल कंपनियों को निर्यात में मिल सकती है राहत   पेट्रोल पर निर्यात शुल्क खत्म होने और डीजल तथा ATF पर शुल्क घटने से भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात कुछ अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकता है। इसका असर कंपनियों के निर्यात मार्जिन पर पड़ सकता है, खासकर तब जब वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी हो।

abhishek singh अगस्त 16, 2026 0
FAST-DS

सरकार ने विदेशी संपत्तियों की घोषणा के लिए खोली एकमुश्त विंडो, 31 दिसंबर तक मिलेगा मौका

Chemical Exports

2030 तक भारत का रासायनिक निर्यात 81 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान

Share Market

शेयर बाजार में गिरावट, Sensex 71 अंक टूटा; Nifty 24,400 के नीचे बंद

Brent क्रूड तेल की कीमत 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास
Brent क्रूड 87 डॉलर के आसपास, कमजोर मांग और बढ़ते अमेरिकी भंडार से कीमतों पर दबाव

नई दिल्ली, एजेंसियां। वैश्विक कच्चे तेल बाजार में शुक्रवार को उतार-चढ़ाव जारी रहा। Brent क्रूड करीब 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। इससे पहले 13 अगस्त को Brent में करीब 2.15% की गिरावट आई थी और यह 87.07 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। कमजोर वैश्विक मांग के अनुमान और अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार बढ़ने से कीमतों पर दबाव बना हुआ है।   कमजोर मांग ने बढ़ाई चिंता   अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) और OPEC की ओर से तेल मांग के अनुमान में कटौती के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ी है। ऊंची ईंधन कीमतों के कारण खपत पर असर पड़ने की आशंका है। मांग को लेकर कमजोर संकेतों ने भू-राजनीतिक तनाव से मिलने वाले कीमतों के समर्थन को कुछ हद तक कमजोर किया है।   अमेरिकी तेल भंडार में बड़ा इजाफा   अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार में उम्मीद से ज्यादा बढ़ोतरी ने भी बाजार पर दबाव डाला है। इससे संकेत मिलता है कि मौजूदा स्तरों पर ईंधन की मांग उतनी मजबूत नहीं है, जितनी बाजार को उम्मीद थी।   ईरान तनाव से कीमतों को मिल रहा सहारा   हालांकि, दूसरी तरफ अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता तेल कीमतों को नीचे जाने से रोक रही है। शुक्रवार को अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी की धमकी के बाद आपूर्ति बाधित होने की आशंका फिर बढ़ी, जिससे Brent करीब 87.08 डॉलर तक पहुंचा।   भारत पर भी पड़ सकता है असर   कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। लंबे समय तक कीमतें ऊंची रहने पर आयात बिल और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि कीमतों में गिरावट से महंगाई और ईंधन लागत को कुछ राहत मिल सकती है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 14, 2026 0
भारत के निर्यात में अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान तेज वृद्धि

भारत के निर्यात में तेज उछाल, अप्रैल-जुलाई में करीब 15% बढ़ोतरी; ₹1 ट्रिलियन लक्ष्य पर सरकार की नजर

Chandrasekaran resignation

टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन का इस्तीफा स्वीकार किया, उत्तराधिकारी चुनने के लिए चयन समिति बनाने की प्रक्रिया शुरू

UltraTech Cement share sale

अल्ट्राटेक सीमेंट में बड़ी शेयर बिक्री, प्रमोटर ने ₹2,896 करोड़ में बेची 0.85% हिस्सेदारी

गजा कैपिटल के ₹550 करोड़ IPO की जानकारी
गजा कैपिटल का ₹550 करोड़ IPO 19 अगस्त से खुलेगा, प्राइस बैंड ₹152-160 तय

मुंबई, एजेंसियां। वैकल्पिक परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी गजा अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट, जो गजा कैपिटल ब्रांड के तहत कारोबार करती है, अपना ₹550 करोड़ का आईपीओ लेकर आ रही है। कंपनी ने आईपीओ का प्राइस बैंड ₹152 से ₹160 प्रति शेयर तय किया है। सार्वजनिक निर्गम के लिए सब्सक्रिप्शन 19 अगस्त 2026 से शुरू होगा और 21 अगस्त को बंद होगा।   ₹450 करोड़ का फ्रेश इश्यू   आईपीओ में ₹450 करोड़ का फ्रेश इश्यू शामिल है। इसके अलावा मौजूदा शेयरधारक करीब ₹100 करोड़ के शेयर ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचेंगे। इस तरह आईपीओ का कुल आकार लगभग ₹550 करोड़ है।   19 से 21 अगस्त तक खुलेगा आईपीओ   गजा कैपिटल का आईपीओ 19 अगस्त को खुलेगा और 21 अगस्त को बंद होगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 18 अगस्त को होगी। कंपनी के शेयरों की BSE और NSE पर 26 अगस्त को लिस्टिंग प्रस्तावित है।   गजा कैपिटल के लिए क्यों अहम है आईपीओ?   यह आईपीओ भारतीय पूंजी बाजार में एक खास कदम माना जा रहा है, क्योंकि गजा कैपिटल भारत की प्रमुख घरेलू वैकल्पिक निवेश प्रबंधन कंपनियों में शामिल है। कंपनी के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक गोपाल जैन के मुताबिक, सार्वजनिक बाजार में प्रवेश से कंपनी के कारोबार में पारदर्शिता और संस्थागत स्वरूप को बढ़ावा मिल सकता है

ranjan kumar tiwari अगस्त 14, 2026 0
SEBI की स्टडी में एंकर निवेशकों और FPI की IPO बिक्री का विश्लेषण

एंकर निवेशकों पर SEBI का बड़ा खुलासा, विदेशी निवेशक IPO शेयर जल्दी बेचने में सबसे आगे

भारत में LPG आयात बढ़ाने के लिए अमेरिकी कंपनियों से बातचीत

अमेरिका से LPG आयात बढ़ाने की तैयारी, 2027 के लिए भारत की अमेरिकी कंपनियों से बातचीत तेज

भारतीय रेलवे के रिकॉर्ड राजस्व और बढ़ी माल ढुलाई

भारतीय रेलवे की कमाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची, FY26 में राजस्व 3.2% बढ़कर ₹2.74 लाख करोड़

0 Comments

Top week

Prashant Kishor addresses Bankipur voters and promises private sector jobs for 10,000 educated unemployed youths.
बिहार

MLA बनते ही प्रशांत किशोर का बड़ा ऐलान, बांकीपुर के 10 हजार पढ़े-लिखे युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में नौकरी दिलाने का दावा

surbhi अगस्त 12, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?