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कच्चे तेल की तेजी से रुपया 95.75 प्रति डॉलर तक फिसला

कच्चे तेल की तेजी से रुपया दबाव में, डॉलर के मुकाबले 95.75 तक फिसला; 96 का स्तर अहम

ranjan kumar tiwari अगस्त 20, 2026 0
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में गिरावट
रुपया 95.75 प्रति डॉलर तक कमजोर, 96 का स्तर अहम

मुंबई, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दबाव में बना हुआ है। 19 अगस्त 2026 को रुपया 95.7525 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि पिछले सत्र में यह 95.68 पर था। यह जुलाई के बाद रुपये का सबसे कमजोर बंद स्तर है।

 

कच्चा तेल 92 डॉलर के करीब पहुंचा

 

 

रुपये पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से आ रहा है। ब्रेंट क्रूड लगातार चार कारोबारी सत्रों में बढ़कर करीब 91.87 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान तनाव ने तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं।

 

 

96 रुपये प्रति डॉलर का स्तर बना अहम

 

 

बाजार में अब 96 रुपये प्रति डॉलर का स्तर मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कारोबारियों के मुताबिक यदि रुपये पर दबाव बढ़ता है तो यह स्तर टूट सकता है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक की संभावित डॉलर बिक्री ने रुपये की गिरावट को सीमित करने में मदद की है।

 

 

महंगे तेल से बढ़ सकता है आयात बिल

 

 

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ सकती है और रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऊंची तेल कीमतें महंगाई के लिए भी जोखिम बढ़ाती हैं। RBI की हालिया MPC बैठक के मिनट्स में भी तेल कीमतों को महंगाई के प्रमुख जोखिमों में गिना गया है।

 

 

RBI की नजर रुपये और तेल दोनों पर

 

 

रुपये में तेज गिरावट रोकने के लिए RBI के बाजार में हस्तक्षेप की संभावना बनी हुई है। विश्लेषकों के अनुसार आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर की मांग, पश्चिम एशिया की स्थिति और RBI का रुख रुपये की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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NSE IPO
NSE IPO को लेकर बड़ा अपडेट, सितंबर में आ सकता है देश का सबसे बड़ा IPO; ₹5.26 लाख करोड़ तक वैल्यूएशन की तैयारी

मुंबई, एजेंसियां। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित IPO को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। SEBI से NSE को IPO के लिए नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मिल चुका है और अब एक्सचेंज की नजर सितंबर 2026 में शेयर बाजार में लिस्टिंग पर है। NSE के एमडी एवं सीईओ आशीषकुमार चौहान ने SEBI की मंजूरी के लिए नियामक का सार्वजनिक रूप से आभार भी जताया है।    ₹5.26 लाख करोड़ तक हो सकता है NSE का वैल्यूएशन   रिपोर्टों के मुताबिक NSE IPO के दौरान कंपनी करीब ₹5.26 लाख करोड़ तक के वैल्यूएशन को लक्ष्य बना सकती है। कुछ रिपोर्टों में संभावित शेयर मूल्य ₹2,000-₹2,100 के आसपास बताए गए हैं, हालांकि अंतिम प्राइस बैंड अभी तय नहीं हुआ है।    ₹30,000 करोड़ से ज्यादा का IPO बनने की संभावना   NSE का प्रस्तावित IPO करीब ₹30,000 करोड़ का हो सकता है। यदि यह आकार बरकरार रहता है तो यह भारत का सबसे बड़ा IPO बन सकता है और 2024 में आए Hyundai Motor India के ₹27,870 करोड़ के IPO का रिकॉर्ड टूट सकता है।    पूरी तरह OFS हो सकता है इश्यू   मौजूदा योजना के अनुसार NSE का IPO मुख्य रूप से Offer for Sale (OFS) के रूप में आने की संभावना है। यानी NSE को नए शेयर जारी करके पैसा जुटाने के बजाय मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं। NSE ने जून 2026 में अपना ड्राफ्ट IPO दस्तावेज SEBI के पास दाखिल किया था।   निवेशकों की नजर अब IPO की तारीख पर   फिलहाल IPO की आधिकारिक ओपनिंग डेट, अंतिम प्राइस बैंड और शेयरों की संख्या घोषित नहीं हुई है। इसलिए सितंबर में IPO आने की खबर को अभी संभावित समयसीमा के तौर पर देखना चाहिए। अंतिम विवरण SEBI प्रक्रिया और NSE के आधिकारिक दस्तावेजों के बाद स्पष्ट होंगे।

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SEBI शेयर बाजार में AI इस्तेमाल के लिए किल स्विच और मानव निगरानी के नियम लाएगा
SEBI लाएगा AI के लिए नए नियम, शेयर बाजार में ‘किल स्विच’ और मानव निगरानी होगी जरूरी

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) जल्द ही शेयर बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए नए दिशानिर्देश जारी करने की तैयारी में है। SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि प्रस्तावित ढांचे में ‘किल स्विच’, मानव निगरानी और डेटा नियंत्रण जैसे सुरक्षा उपाय शामिल होंगे।   AI सिस्टम में होगा ‘किल स्विच’     प्रस्तावित नियमों में किल स्विच एक अहम सुरक्षा व्यवस्था होगी। इसका उद्देश्य किसी AI आधारित सिस्टम में असामान्य गतिविधि, तकनीकी गड़बड़ी या जोखिम दिखाई देने पर उसके संचालन को तुरंत रोकना होगा। इससे बाजार में AI के कारण होने वाली संभावित गड़बड़ियों और बड़े वित्तीय नुकसान के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।     मानव निगरानी भी जरूरी होगी     SEBI के प्रस्तावित ढांचे में ‘ह्यूमन-इन-द-लूप’ व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है। यानी महत्वपूर्ण वित्तीय फैसलों और AI सिस्टम के संचालन में मानव की निगरानी बनी रहेगी। नियामक का उद्देश्य AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ जवाबदेही और निवेशक सुरक्षा को मजबूत करना है।     AI से बाजार निगरानी और धोखाधड़ी रोकने में मदद     SEBI के अनुसार AI का इस्तेमाल बाजार निगरानी, जोखिम आकलन, धोखाधड़ी की पहचान और निवेशक सेवाओं जैसे क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकता है। हालांकि, AI के इस्तेमाल से साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण, गलत निर्णय और जवाबदेही से जुड़े नए जोखिम भी पैदा हो सकते हैं।     जोखिम के हिसाब से बनाया जाएगा नियमों का ढांचा     SEBI चेयरमैन के अनुसार नए दिशानिर्देश टियर-आधारित यानी जोखिम के स्तर के अनुसार तैयार किए जाएंगे। नियामक यह सुनिश्चित करना चाहता है कि AI का इस्तेमाल बाजार की कार्यक्षमता बढ़ाए, लेकिन बाजार की पारदर्शिता, स्थिरता और निवेशकों के हितों से समझौता न हो।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 20, 2026 0
विजय केडिया की Zaggle Prepaid में हिस्सेदारी खरीदने के बाद शेयर में तेजी

विजय केडिया ने Zaggle Prepaid में खरीदी 33 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी, शेयर में 17% से ज्यादा उछाल

Moderna के कैंसर वैक्सीन परीक्षण के सकारात्मक नतीजों से शेयर में तेजी

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IDFC FIRST Bank ने पहली बार विदेश में 500 मिलियन डॉलर का बॉन्ड जारी किया, वैश्विक ऋण बाजार में एंट्री

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Upstox IPO की तैयारी में, Tiger Global समर्थित ब्रोकिंग कंपनी जल्द नियुक्त कर सकती है निवेश बैंक

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय ऑनलाइन ब्रोकिंग कंपनी Upstox संभावित IPO की दिशा में आगे बढ़ रही है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक कंपनी ने निवेश बैंकों के साथ शुरुआती बातचीत शुरू कर दी है और जल्द ही IPO के लिए सलाहकार नियुक्त करने की तैयारी में है। प्रस्तावित इश्यू से करीब 400 मिलियन डॉलर (लगभग ₹3,400 करोड़ से ₹3,800 करोड़) जुटाने की योजना बताई जा रही है।    नए शेयर और OFS का हो सकता है मिश्रण   रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित IPO में नए शेयर जारी करने के साथ मौजूदा निवेशकों की हिस्सेदारी की बिक्री (OFS) भी शामिल हो सकती है। हालांकि, इश्यू का अंतिम आकार, शेयरों की संख्या और मूल्यांकन अभी तय नहीं हुआ है।   Tiger Global समेत बड़े निवेशक जुड़े   Upstox को Tiger Global सहित कई निवेशकों का समर्थन प्राप्त है। कंपनी ने अब तक करीब 220 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है। इसके निवेशकों में Tiger Global के अलावा दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा और Stride Ventures का नाम भी शामिल है।   IPO बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा   यदि Upstox IPO लेकर आती है, तो यह भारतीय ब्रोकिंग क्षेत्र की एक और बड़ी कंपनी का सार्वजनिक बाजार में प्रवेश होगा। हाल के वर्षों में डिजिटल निवेश और ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता बढ़ने से इस क्षेत्र की कंपनियों की बाजार में दिलचस्पी बढ़ी है।

anjali kumari अगस्त 20, 2026 0
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