Crude Oil

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में गिरावट
कच्चे तेल की तेजी से रुपया दबाव में, डॉलर के मुकाबले 95.75 तक फिसला; 96 का स्तर अहम

मुंबई, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दबाव में बना हुआ है। 19 अगस्त 2026 को रुपया 95.7525 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि पिछले सत्र में यह 95.68 पर था। यह जुलाई के बाद रुपये का सबसे कमजोर बंद स्तर है।   कच्चा तेल 92 डॉलर के करीब पहुंचा     रुपये पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से आ रहा है। ब्रेंट क्रूड लगातार चार कारोबारी सत्रों में बढ़कर करीब 91.87 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान तनाव ने तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं।     96 रुपये प्रति डॉलर का स्तर बना अहम     बाजार में अब 96 रुपये प्रति डॉलर का स्तर मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कारोबारियों के मुताबिक यदि रुपये पर दबाव बढ़ता है तो यह स्तर टूट सकता है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक की संभावित डॉलर बिक्री ने रुपये की गिरावट को सीमित करने में मदद की है।     महंगे तेल से बढ़ सकता है आयात बिल     भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ सकती है और रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऊंची तेल कीमतें महंगाई के लिए भी जोखिम बढ़ाती हैं। RBI की हालिया MPC बैठक के मिनट्स में भी तेल कीमतों को महंगाई के प्रमुख जोखिमों में गिना गया है।     RBI की नजर रुपये और तेल दोनों पर     रुपये में तेज गिरावट रोकने के लिए RBI के बाजार में हस्तक्षेप की संभावना बनी हुई है। विश्लेषकों के अनुसार आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर की मांग, पश्चिम एशिया की स्थिति और RBI का रुख रुपये की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 20, 2026 0
होर्मुज संकट के बीच बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें
होर्मुज संकट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर के आसपास पहुंचा

नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिका-ईरान तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी अनिश्चितता के बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। 19 अगस्त को ब्रेंट क्रूड करीब 91.62 डॉलर प्रति बैरल और WTI करीब 85.83 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। दोनों बेंचमार्क लगातार चौथे सत्र में बढ़े और 24 जुलाई के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए।   होर्मुज संकट से आपूर्ति पर चिंता   स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही को लेकर विरोधाभासी दावों के कारण कई जहाज मालिक अभी भी इस रास्ते से गुजरने से बच रहे हैं। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर बाजार में चिंता बनी हुई है।   ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर के पार   19 अगस्त को ब्रेंट क्रूड 91.62 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि WTI 85.83 डॉलर पर रहा। इससे पहले 18 अगस्त को ब्रेंट 91.02 डॉलर पर बंद हुआ था और उस समय भी कीमत तीन सप्ताह से ज्यादा के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी।   भारत पर भी पड़ सकता है असर   कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो भारत के लिए आयात बिल, रुपये की विनिमय दर और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि घरेलू पेट्रोल-डीजल कीमतों पर तत्काल असर कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करेगा।

ranjan kumar tiwari अगस्त 20, 2026 0
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति संकट की खबर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद, ईरान के रुख से वैश्विक तेल आपूर्ति पर बढ़ा संकट

तेहरान, एजेंसियां। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को बंद रखने का ऐलान किया है, जिससे दुनिया के प्रमुख ऊर्जा मार्गों में से एक पर संकट गहरा गया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी प्रमुख मांगों—ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाने, तेल प्रतिबंधों में राहत और सैन्य दबाव खत्म करने—पर कदम नहीं उठाता, तब तक जलडमरूमध्य बंद रहेगा।   अमेरिका और ईरान के दावे अलग-अलग   स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति को लेकर अमेरिका और ईरान के दावे एक-दूसरे से अलग हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जलडमरूमध्य खुला और संचालित हो रहा है, जबकि ईरान इसे बंद रखने की बात कह रहा है। इस विरोधाभास के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों में अनिश्चितता बढ़ गई है।   जहाजों की आवाजाही बेहद कम   स्ट्रेट से होकर गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की संख्या सामान्य स्तर की तुलना में काफी कम हो गई है। 18 अगस्त के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार केवल छह कमोडिटी जहाज होर्मुज से गुजरे, जबकि 10 दिनों का औसत करीब 11 जहाज प्रतिदिन था। बड़े कच्चे तेल और LNG टैंकरों की आवाजाही भी दर्ज नहीं हुई। चीन की सरकारी शिपिंग कंपनियों ने भी सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए होर्मुज और बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से अपने जहाजों की आवाजाही रोककर वैकल्पिक रास्तों और समुद्र में जहाज-से-जहाज तेल ट्रांसफर का सहारा लेना शुरू कर दिया है।   कच्चे तेल की कीमतों पर असर   होर्मुज में जारी गतिरोध का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। 19 अगस्त को ब्रेंट क्रूड करीब 91.28 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI करीब 85.31 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। तेल की कीमतों में लगातार चौथे दिन तेजी दर्ज की गई। होर्मुज से वैश्विक तेल और LNG आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में लंबे समय तक आवाजाही बाधित रहने पर तेल की कीमतों, शिपिंग लागत और वैश्विक महंगाई पर दबाव और बढ़ सकता है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 19, 2026 0
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, ब्रेंट 91 डॉलर के पार

नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की उम्मीद कमजोर पड़ने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी है। मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को ब्रेंट क्रूड 91.14 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI करीब 85.04 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। दोनों कीमतें जुलाई के अंत के बाद के उच्चतम स्तर के आसपास हैं।   अमेरिका-ईरान वार्ता से बाजार को झटका     तेल बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में बढ़ता गतिरोध है। ईरान ने बातचीत विफल होने के बाद अधिक आक्रामक सैन्य रुख अपनाने की बात कही है, जबकि अमेरिका ने मौजूदा युद्धविराम को आगे बढ़ाने से इनकार किया है। इससे निवेशकों को आशंका है कि मध्य पूर्व में संघर्ष और लंबा खिंच सकता है।     हॉर्मुज में टैंकरों की आवाजाही घटी     तेल बाजार की चिंता का सबसे बड़ा कारण स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। Reuters के अनुसार, हाल के दिनों में यहां से गुजरने वाले तेल टैंकरों की संख्या में भारी गिरावट आई है—शनिवार को केवल पांच टैंकर गुजरे, जबकि रविवार को कोई टैंकर नहीं निकला।   यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो मध्य पूर्व से एशिया और अन्य बाजारों तक तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी आशंका ने कच्चे तेल की कीमतों में भूराजनीतिक जोखिम प्रीमियम बढ़ा दिया है।   भारत पर भी पड़ सकता है असर     कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर से ऊपर रहने का असर भारत पर भी पड़ सकता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार तेजी से आयात बिल बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव पड़ सकता है। Reuters के मुताबिक मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 95.68-95.72 के आसपास कमजोर खुलने की आशंका जताई गई थी, जिसमें महंगे तेल को एक प्रमुख दबाव माना गया।     आगे तेल की कीमतों पर रहेगी नजर     फिलहाल बाजार की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता, हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही और क्षेत्रीय सैन्य घटनाक्रम पर है। यदि कूटनीतिक समाधान की उम्मीद और कमजोर होती है या हॉर्मुज में तेल परिवहन लंबे समय तक बाधित रहता है, तो ब्रेंट में और तेजी का जोखिम बना रहेगा। वहीं, बातचीत में प्रगति होने पर कीमतों में राहत भी देखने को मिल सकती है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 18, 2026 0
शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी की कमजोर शुरुआत
Stock Market: क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल से टूटा बाजार, सेंसेक्स 100 अंक नीचे खुला; निफ्टी भी फिसला

मुंबई, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतें करीब 89 डॉलर प्रति बैरल पहुंचने से सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 100 अंक से ज्यादा नीचे खुला, जबकि निफ्टी भी लाल निशान में रहा।   सेंसेक्स 100 अंक से ज्यादा गिरा     सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 100 से अधिक अंक यानी 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,892.92 के स्तर पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 करीब 22.55 अंक यानी 0.09 प्रतिशत गिरकर 24,343.45 पर पहुंच गया।   बड़े बैंकिंग शेयरों और आईटी कंपनियों में कमजोरी ने बाजार पर दबाव बढ़ाया। निवेशकों ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए कारोबार में सतर्क रुख अपनाया।   इन सेक्टर्स में दिखी ज्यादा कमजोरी     शुरुआती कारोबार में निफ्टी मिडस्मॉल फाइनेंशियल सर्विसेज करीब 0.98 प्रतिशत टूटकर सबसे ज्यादा दबाव में रहा। इसके अलावा निफ्टी पीएसयू बैंक और एफएमसीजी इंडेक्स में भी करीब 0.9 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई।   रियल्टी, सीमेंट, आईटी, एनर्जी और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में भी कमजोरी रही। हालांकि, निफ्टी केमिकल्स में 0.48 प्रतिशत और निफ्टी मिडस्मॉल हेल्थकेयर में 0.45 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली।   क्रूड ऑयल 89 डॉलर के आसपास     अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। क्रूड करीब 89 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, तेल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितता भारतीय बाजार में तेजी की राह में बड़ी बाधा बन सकती है।     24,000-24,600 के दायरे में रह सकता है निफ्टी     बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भू-राजनीतिक स्थिति में बड़ा सुधार नहीं होने तक निफ्टी 24,000 से 24,600 के दायरे में कारोबार कर सकता है।   तकनीकी स्तर पर 24,329 से 24,240 का क्षेत्र निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं ऊपर की ओर 24,540 से 24,666 के स्तर पर मजबूत रेजिस्टेंस है। अगर निफ्टी 24,170 के नीचे फिसलता है तो इसमें और गिरावट आ सकती है और यह 23,575 के स्तर तक जा सकता है।   निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों पर     विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों को जल्दबाजी से बचते हुए बाजार के वैश्विक संकेतों पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मजबूत तिमाही नतीजों वाले चुनिंदा शेयरों में अवसर तलाशे जा सकते हैं।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
Brent क्रूड तेल की कीमत 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास
Brent क्रूड 87 डॉलर के आसपास, कमजोर मांग और बढ़ते अमेरिकी भंडार से कीमतों पर दबाव

नई दिल्ली, एजेंसियां। वैश्विक कच्चे तेल बाजार में शुक्रवार को उतार-चढ़ाव जारी रहा। Brent क्रूड करीब 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। इससे पहले 13 अगस्त को Brent में करीब 2.15% की गिरावट आई थी और यह 87.07 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। कमजोर वैश्विक मांग के अनुमान और अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार बढ़ने से कीमतों पर दबाव बना हुआ है।   कमजोर मांग ने बढ़ाई चिंता   अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) और OPEC की ओर से तेल मांग के अनुमान में कटौती के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ी है। ऊंची ईंधन कीमतों के कारण खपत पर असर पड़ने की आशंका है। मांग को लेकर कमजोर संकेतों ने भू-राजनीतिक तनाव से मिलने वाले कीमतों के समर्थन को कुछ हद तक कमजोर किया है।   अमेरिकी तेल भंडार में बड़ा इजाफा   अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार में उम्मीद से ज्यादा बढ़ोतरी ने भी बाजार पर दबाव डाला है। इससे संकेत मिलता है कि मौजूदा स्तरों पर ईंधन की मांग उतनी मजबूत नहीं है, जितनी बाजार को उम्मीद थी।   ईरान तनाव से कीमतों को मिल रहा सहारा   हालांकि, दूसरी तरफ अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता तेल कीमतों को नीचे जाने से रोक रही है। शुक्रवार को अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी की धमकी के बाद आपूर्ति बाधित होने की आशंका फिर बढ़ी, जिससे Brent करीब 87.08 डॉलर तक पहुंचा।   भारत पर भी पड़ सकता है असर   कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। लंबे समय तक कीमतें ऊंची रहने पर आयात बिल और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि कीमतों में गिरावट से महंगाई और ईंधन लागत को कुछ राहत मिल सकती है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 14, 2026 0
90 डॉलर के करीब पहुंचा ब्रेंट क्रूड और भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव
क्रूड ऑयल 90 डॉलर के करीब, भारत की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर बढ़ा दबाव

मुंबई, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। 12 अगस्त 2026 को ब्रेंट क्रूड करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। बुधवार को ब्रेंट क्रूड वायदा करीब 89.63 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि अमेरिकी WTI भी करीब 84 डॉलर के आसपास रहा।   स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चिंता   तेल की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह मध्य-पूर्व में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दोबारा खुलने को लेकर अनिश्चितता बताई जा रही है। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यहां किसी भी तरह की बाधा से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका रहती है।   भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?   भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव आ सकता है। बुधवार को कारोबार की शुरुआत में भी रुपये पर क्रूड की बढ़ती कीमतों का असर देखा गया। महंगे कच्चे तेल का असर आगे चलकर महंगाई, परिवहन लागत, विमानन, पेंट, रसायन और अन्य तेल-आधारित उद्योगों पर भी पड़ सकता है।   शेयर बाजार पर भी पड़ा असर   क्रूड के 90 डॉलर के करीब पहुंचने से भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों की चिंता बढ़ी है। महंगे तेल से भारत के व्यापार घाटे और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका के कारण सेंसेक्स और निफ्टी पर भी दबाव देखने को मिला। अगर कच्चा तेल लंबे समय तक 90 डॉलर के आसपास बना रहता है, तो बाजार की नजर अब रुपये की चाल, महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर रहेगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 12, 2026 0
रूस से भारत के रिकॉर्ड कच्चे तेल आयात और ऊर्जा आपूर्ति
रूस से भारत का कच्चा तेल आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जुलाई में 55% से ज्यादा रही हिस्सेदारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत ने जुलाई 2026 में रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाकर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जुलाई में रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात करीब 28 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया, जो भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 55 प्रतिशत से अधिक है। रूस लगातार दूसरे महीने भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।   रूस से तेल खरीद में तेज बढ़ोतरी     भारत की रिफाइनरी कंपनियों ने जुलाई में रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई। पश्चिम एशिया में आपूर्ति संबंधी जोखिम और समुद्री मार्गों को लेकर अनिश्चितता के बीच रूसी तेल ने भारत के लिए वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।   रूस से बढ़े आयात के कारण जुलाई में भारतीय कच्चे तेल आयात में उसकी हिस्सेदारी आधे से भी ज्यादा हो गई। यह आंकड़ा ऐसे समय आया है जब भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अलग-अलग देशों से आपूर्ति बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।   अमेरिका के दबाव के बीच बढ़ी खरीद     रूस से तेल खरीद बढ़ने का मुद्दा भारत और अमेरिका के बीच भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। अमेरिकी सीनेट में रूस से जुड़े प्रतिबंधों को कड़ा करने वाले प्रस्ताव पर आगे बढ़ने के बाद भारतीय तेल आयात को लेकर दबाव बढ़ा है।   प्रस्तावित अमेरिकी कदमों में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की संभावना भी शामिल है। ऐसे में रूसी तेल की रिकॉर्ड खरीद भारत की ऊर्जा नीति और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।   भारत के लिए रूस क्यों महत्वपूर्ण है?     भारत के लिए रूसी कच्चा तेल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे देश की रिफाइनरी कंपनियों को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कच्चा तेल हासिल करने और घरेलू ईंधन जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है।   हालांकि, भारत एक ही देश पर अत्यधिक निर्भरता से बचने के लिए अपने तेल आयात स्रोतों में विविधता भी बढ़ा रहा है। सरकार के अनुसार भारत अब 41 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है, जबकि पहले यह संख्या 27 थी।   आगे अमेरिका-भारत संबंधों पर रहेगी नजर     रूसी तेल की खरीद आने वाले दिनों में भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों का एक अहम मुद्दा बनी रह सकती है। यदि अमेरिका रूस से तेल खरीद पर अतिरिक्त प्रतिबंध या शुल्क लागू करता है, तो भारतीय रिफाइनरी कंपनियों की खरीद रणनीति पर असर पड़ सकता है।   फिलहाल भारत का रुख ऊर्जा सुरक्षा और कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। आने वाले महीनों में रूस से तेल आयात, वैश्विक कच्चे तेल की कीमत और अमेरिकी प्रतिबंध नीति पर बाजार की नजर बनी रहेगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर की मजबूती के बीच भारतीय रुपये में गिरावट
कच्चे तेल में तेजी और डॉलर की मजबूती से रुपया 8 पैसे कमजोर, 95.29 प्रति डॉलर पर बंद

मुंबई, एजेंसियां। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच भारतीय रुपया सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 8 पैसे कमजोर होकर 95.29 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये पर दबाव बना रहा। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक महंगे कच्चे तेल और मजबूत डॉलर ने भारतीय मुद्रा की धारणा को प्रभावित किया।   शुरुआती कारोबार में भी दबाव     इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.26 प्रति डॉलर पर खुला और शुरुआती कारोबार में 95.22 के स्तर तक मजबूत हुआ। हालांकि, बाद में डॉलर की मांग बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण रुपये पर दबाव बढ़ गया।   दिन के कारोबार में भारतीय मुद्रा ने 95.36 प्रति डॉलर का निचला स्तर भी छुआ। अंत में रुपया पिछले कारोबारी सत्र के 95.21 के मुकाबले 8 पैसे की गिरावट के साथ 95.29 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।   डॉलर इंडेक्स में मजबूती     छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति बताने वाला डॉलर इंडेक्स 0.12 प्रतिशत बढ़कर 98.47 पर पहुंच गया। डॉलर की मजबूती का असर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर भी देखने को मिला।   विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, इसलिए तेल की कीमतों में तेजी से डॉलर की मांग बढ़ सकती है।   कच्चे तेल की कीमतों में तेजी     वैश्विक तेल बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 1.04 प्रतिशत बढ़कर 69.48 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) करीब 1.11 प्रतिशत बढ़कर 66.73 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।   महंगे कच्चे तेल से भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इससे डॉलर की मांग बढ़ने और रुपये पर आगे भी दबाव बने रहने की संभावना रहती है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
रूस के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंध और भारत पर 100% टैरिफ का खतरा
रूस के खिलाफ अमेरिकी सीनेट में सख्त प्रतिबंधों की तैयारी, भारत पर 100% टैरिफ का खतरा

वॉशिंगटन, एजेंसियां। रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका में नए और कड़े प्रतिबंधों को लेकर हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी सीनेट में रूस के ऊर्जा क्षेत्र और उसके साथ कारोबार करने वाले देशों पर कार्रवाई से जुड़े प्रस्ताव पर चर्चा हुई है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत रूस से तेल या अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान रखा गया है। इससे भारत समेत रूस से ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर अमेरिकी दबाव बढ़ सकता है।   भारत पर क्यों पड़ सकता है असर?     भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। ऐसे में यदि अमेरिकी प्रशासन रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100% तक अतिरिक्त शुल्क लागू करता है, तो भारतीय निर्यातकों पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका है।   हालांकि, 100% टैरिफ अभी भारत पर लागू नहीं हुआ है। यह प्रस्तावित अमेरिकी कार्रवाई से जुड़ा संभावित शुल्क है और इसके लागू होने की स्थिति, दायरा तथा समय को लेकर आगे अमेरिकी प्रशासन और कांग्रेस के फैसले महत्वपूर्ण होंगे।   रूस की ऊर्जा आय पर दबाव बनाने की कोशिश     अमेरिका और उसके सहयोगी देश यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की ऊर्जा आय को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं। रूस की अर्थव्यवस्था में तेल और गैस से होने वाली कमाई महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी वजह से रूस के ऊर्जा कारोबार को निशाना बनाने वाली पाबंदियों को उसके खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने का प्रमुख माध्यम माना जा रहा है।   नए प्रस्तावों का उद्देश्य रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले देशों को भी अप्रत्यक्ष रूप से दबाव में लाना है, ताकि रूस की तेल आय को सीमित किया जा सके।   भारत-अमेरिका संबंधों के लिए भी अहम     भारत लंबे समय से रूस से कच्चे तेल की खरीद को अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों से जोड़कर देखता रहा है। यदि अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी अतिरिक्त शुल्क लगाता है, तो इसका असर भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी पड़ सकता है।   भारत पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि उसकी ऊर्जा खरीद का फैसला राष्ट्रीय हित और घरेलू जरूरतों के आधार पर किया जाता है। ऐसे में अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़े किसी भी नए फैसले पर नई दिल्ली की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।   अब अमेरिकी प्रशासन के अगले कदम पर नजर     फिलहाल 100% टैरिफ को लेकर ‘भारत पर शुल्क लागू हो गया’ कहना सही नहीं होगा। प्रस्ताव की आगे की प्रक्रिया और अमेरिकी प्रशासन द्वारा इसके इस्तेमाल का फैसला महत्वपूर्ण रहेगा।   यदि ऐसा शुल्क वास्तव में लागू किया जाता है, तो भारत के लिए अमेरिका को होने वाले निर्यात की लागत बढ़ सकती है और दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता पर भी इसका असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में अमेरिकी सरकार और भारतीय पक्ष की प्रतिक्रिया इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
Brent Crude और WTI कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
कच्चा तेल फिर महंगा, Brent Crude $83 के पार; होर्मुज को लेकर बढ़ी चिंता

नई दिल्ली, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को फिर तेजी देखने को मिली। Brent Crude करीब 83.29 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड करीब 77.93 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को लेकर अनिश्चितता को तेल कीमतों में तेजी की प्रमुख वजह माना जा रहा है।   दूसरे दिन भी तेल की कीमतों में तेजी     Brent Crude शुक्रवार को करीब 1 फीसदी से ज्यादा बढ़कर $83.29 प्रति बैरल पहुंचा। WTI भी बढ़कर करीब $77.93 प्रति बैरल पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में भी तेल कीमतों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली थी।     होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा कारण     तेल बाजार की नजर इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी हुई है। ईरान और ओमान के बीच जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर बातचीत के बावजूद जहाजों की आवाजाही की शर्तों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।   ईरान की ओर से कुछ जहाजों को लेकर प्रस्तावित प्रतिबंधों और संभावित जुर्माने की खबरों ने बाजार की चिंता बढ़ाई है। होर्मुज दुनिया के महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है और यहां किसी भी लंबे व्यवधान से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।   भारत पर भी पड़ सकता है असर     कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी लंबे समय तक बनी रहने पर आयात बिल, रुपये की स्थिति और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल तेल बाजार की दिशा होर्मुज जलडमरूमध्य, अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक आपूर्ति की स्थिति से तय होने की संभावना है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
Crude Oil Prices
कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, अमेरिका से राहत भरी खबर के बाद Brent Crude करीब 5% हुआ सस्ता

नई दिल्ली, एजेंसियां। वैश्विक तेल बाजार में बुधवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। Brent Crude की कीमत करीब 5% तक लुढ़क गई, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। कीमतों में यह गिरावट अमेरिका से आए सकारात्मक आर्थिक संकेतों और पश्चिम एशिया में तनाव कुछ कम होने की उम्मीद के बाद देखने को मिली।    अमेरिकी संकेतों से बढ़ा निवेशकों का भरोसा   विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार, मांग और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े ताजा आंकड़ों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर आपूर्ति बाधित होने की आशंका कम होने से तेल की कीमतों पर दबाव बना।   भारत के लिए राहत की उम्मीद   भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें घटने से पेट्रोलियम कंपनियों की लागत कम हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गिरावट लंबे समय तक बनी रहती है, तो महंगाई पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है और ऊर्जा आयात बिल में कमी आने की संभावना है।    आगे बाजार की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर   विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका के आर्थिक आंकड़े, ओपेक+ की उत्पादन नीति और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति कच्चे तेल की कीमतों की दिशा तय करेंगे। निवेशकों की नजर इन सभी घटनाक्रमों पर बनी हुई है।

abhishek singh जुलाई 29, 2026 0
Indian stock market plunges as Sensex drops over 850 points after US tariff announcement and rising crude oil prices.
Share Market Crash: ट्रंप के 10% टैरिफ का असर, सेंसेक्स 850 अंक टूटा, निवेशकों के ₹3 लाख करोड़ स्वाहा

Stock Market Today: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत समेत 17 देशों के कुछ आयातित सामान पर 10% टैरिफ लगाने के फैसले का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। शुक्रवार को घरेलू बाजार लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 850 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 23,700 के नीचे फिसल गया। इस भारी बिकवाली के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार पूंजीकरण (Market Cap) में करीब 3 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में बाजार पर भारी दबाव सुबह करीब 10:15 बजे: सेंसेक्स 876.06 अंक (1.15%) टूटकर 75,515.33 पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी 50 258.80 अंक (1.08%) गिरकर 23,610.80 पर पहुंच गया। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर करीब 473 लाख करोड़ रुपये रह गया। यह लगातार पांचवां कारोबारी दिन है जब भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। रुपये पर भी दिखा दबाव शेयर बाजार में कमजोरी के साथ भारतीय मुद्रा पर भी दबाव देखने को मिला। डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 0.06% कमजोर होकर 96.63 पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 96.5725 पर बंद हुआ था। किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट? सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। सबसे अधिक दबाव इन शेयरों पर रहा— इंफोसिस भारती एयरटेल इंडिगो इटरनल टाटा स्टील बजाज फाइनेंस अल्ट्राटेक सीमेंट बजाज फिनसर्व एचडीएफसी बैंक एशियन पेंट्स मारुति सुजुकी लार्सन एंड टुब्रो ट्रेंट अडानी पोर्ट्स वहीं एचसीएल टेक शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज करने वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहा। सेक्टरवार कैसा रहा हाल? ब्रॉडर मार्केट में भी बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप लगभग 0.63% कमजोर रहा। निफ्टी स्मॉलकैप करीब 0.62% नीचे कारोबार करता दिखा। सबसे ज्यादा गिरावट इन सेक्टरों में रही— रियल्टी ऑटो मेटल जबकि फार्मा और आईटी सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। बाजार क्यों टूटा? बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका द्वारा भारत सहित 17 देशों के कुछ आयातित सामान पर 10% टैरिफ लगाने की घोषणा मानी जा रही है। अमेरिका का आरोप है कि ये देश जबरन मजदूरी (Forced Labour) से बने उत्पादों के आयात पर पर्याप्त रोक लगाने में विफल रहे हैं। यह फैसला अमेरिकी ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत हुई जांच के बाद लिया गया है। भारत के अलावा जिन देशों पर यह टैरिफ लगाया गया है, उनमें शामिल हैं— पाकिस्तान बांग्लादेश श्रीलंका कंबोडिया यूनाइटेड किंगडम (यूके) और अन्य देश इस फैसले ने वैश्विक व्यापार को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। महंगा हुआ कच्चा तेल भी बना चिंता का कारण बाजार पर दबाव बढ़ाने वाली दूसरी बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रही। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। रिपोर्टों के मुताबिक, रेड सी में हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने के बाद सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो भारत जैसे आयातक देशों पर महंगाई और चालू खाते के घाटे का दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है। निवेशकों के लिए आगे क्या? विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर तीन प्रमुख कारकों पर रहेगी— अमेरिका की व्यापार नीति और टैरिफ से जुड़े अगले फैसले। मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव। कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियों पर। यदि वैश्विक हालात में सुधार नहीं होता, तो घरेलू शेयर बाजार में निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।  

surbhi जुलाई 24, 2026 0
Petrol pump display showing fuel prices as global crude oil rises due to Strait of Hormuz tensions on July 23, 2026.
Petrol Diesel Price Today: होर्मुज संकट से 3% उछला क्रूड ऑयल, जानिए 23 जुलाई 2026 को पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

Petrol Diesel Price Today, 23 July 2026: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव का असर एक बार फिर वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। जियोपॉलिटिकल जोखिम बढ़ने से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 3% से अधिक उछल गई, लेकिन राहत की बात यह है कि भारत में 23 जुलाई 2026 को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया। सरकारी तेल कंपनियों ने लगातार 58वें दिन ईंधन के दाम स्थिर रखे हैं। होर्मुज संकट से क्यों बढ़ी कच्चे तेल की कीमत? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल पर फिर से Geopolitical Risk Premium जुड़ गया है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। गुरुवार सुबह: Brent Crude: 3.36% की बढ़त के साथ 94.07 डॉलर प्रति बैरल WTI Crude: 1.15% की तेजी के साथ 87.83 डॉलर प्रति बैरल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाएं जारी रहती हैं, तो वर्ष की चौथी तिमाही तक ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर सकता है। 58 दिनों से नहीं बदले पेट्रोल-डीजल के दाम सरकारी तेल कंपनियों ने 25 मई 2026 के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे पहले मई में सिर्फ 11 दिनों के भीतर चार बार कीमतें बढ़ाई गई थीं: 15 मई: पेट्रोल ₹3.00 और डीजल ₹3.29 प्रति लीटर महंगा 19 मई: पेट्रोल ₹0.87 और डीजल ₹0.91 महंगा 23 मई: पेट्रोल ₹0.87 और डीजल ₹0.91 महंगा 25 मई: पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 महंगा 23 जुलाई 2026: प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट शहर पेट्रोल (₹/लीटर) डीजल (₹/लीटर) दिल्ली 102.12 95.20 मुंबई 111.21 97.83 कोलकाता 113.51 99.82 चेन्नई 107.77 99.55 नोएडा 102.12 97.56 चंडीगढ़ 101.51 89.47 लखनऊ 101.89 95.36 पटना 113.37 99.36 रांची 105.26 100.49 भोपाल 114.57 99.64 ऐसे चेक करें अपने शहर का पेट्रोल-डीजल रेट अगर आप अपने शहर का ताजा ईंधन मूल्य जानना चाहते हैं, तो SMS के जरिए भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। Indian Oil: RSP <City Code> लिखकर 9224992249 पर भेजें। BPCL: RSP <City Code> लिखकर 9223112222 पर भेजें। HPCL: HPPRICE <City Code> लिखकर 9222201122 पर भेजें। क्या आगे बढ़ सकते हैं दाम? अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ते कच्चे तेल के दाम और पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए आने वाले दिनों में घरेलू ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि फिलहाल सरकारी तेल कंपनियों ने उपभोक्ताओं को राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बनाए हुए हैं।  

surbhi जुलाई 23, 2026 0
Fuel station displaying petrol, diesel, and LPG prices as rising crude oil costs impact Indian state-run oil companies.
Petrol-Diesel Price: पश्चिम एशिया संकट से सरकारी तेल कंपनियों को बड़ा झटका, पेट्रोल-डीजल और LPG पर बढ़ा घाटा

Petrol-Diesel News: पश्चिम एशिया में युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल का असर अब सरकारी तेल कंपनियों के वित्तीय नतीजों में साफ दिखाई दे रहा है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में भारी घाटा दर्ज किया है। इसकी सबसे बड़ी वजह लंबे समय तक पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की कीमतों में बदलाव नहीं करना रही। कच्चे तेल की कीमतों में 70% तक उछाल पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 70% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, इस दौरान देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दाम तुरंत नहीं बढ़ाए गए, जिससे सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर लागत का दबाव बढ़ गया। HPCL और BPCL को कितना हुआ नुकसान? HPCL अप्रैल-जून तिमाही में 12,265 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड घाटा। पिछले वर्ष इसी अवधि में 4,111 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। घरेलू एलपीजी पर 3,607 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी दर्ज की गई। BPCL पहली तिमाही में 1,873 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड घाटा। पिछले वर्ष इसी अवधि में 6,839 करोड़ रुपये का लाभ हुआ था। एलपीजी बिक्री पर 3,485 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी हुई। घाटे की मुख्य वजह क्या रही? विशेषज्ञों के अनुसार, जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही थीं, तब सरकारी कंपनियों ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी नहीं की। बाद में सरकार ने: पेट्रोल और डीजल के दाम लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए। 14.2 किलोग्राम घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 89 रुपये की बढ़ोतरी की। लेकिन यह बढ़ोतरी बढ़ी हुई लागत की पूरी भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं थी। राजस्व में बढ़ोतरी के बावजूद घाटा दिलचस्प बात यह है कि दोनों कंपनियों का कारोबार बढ़ा, लेकिन बढ़ी हुई लागत ने मुनाफे को नुकसान पहुंचाया। HPCL ऑपरेशन से राजस्व 1.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपये (करीब 21% वृद्धि) पहुंच गया। BPCL राजस्व 1.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.6 लाख करोड़ रुपये हो गया। HPCL ने अपने बयान में कहा कि पश्चिम एशिया संकट का असर वित्तीय नतीजों पर पड़ा, हालांकि कंपनी के रिफाइनिंग और मार्केटिंग ऑपरेशन मजबूत बने रहे। आगे क्या हो सकता है? यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव जारी रह सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में ईंधन की कीमतों और सरकारी नीतियों पर बाजार की नजर बनी रहेगी।  

surbhi जुलाई 23, 2026 0
Fuel station displaying petrol and diesel prices as global crude oil rises while Indian fuel rates remain unchanged.
Petrol Price Today: अमेरिका में क्रूड ऑयल स्टॉक घटने से कच्चा तेल महंगा, भारत में 51वें दिन भी पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर

नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिली है। अमेरिका में क्रूड ऑयल की इन्वेंट्री (भंडार) उम्मीद से अधिक घटने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और WTI क्रूड के दाम बढ़ गए हैं। हालांकि, इस बढ़ोतरी का असर फिलहाल भारतीय उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ा है। सरकारी तेल कंपनियों ने गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को भी देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया। भारत में 25 मई 2026 के बाद से ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं और आज लगातार 51वां दिन है, जब पेट्रोल और डीजल के दाम अपरिवर्तित रहे हैं। अमेरिका में क्यों बढ़े कच्चे तेल के दाम? अमेरिका के Energy Information Administration (EIA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 10 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में देश की क्रूड ऑयल इन्वेंट्री में 5.64 लाख बैरल (564,000 barrels) की कमी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका का कुल क्रूड ऑयल भंडार अब करीब 1.7 मिलियन बैरल पर आ गया है, जो पिछले पांच वर्षों के औसत स्तर से लगभग 6% कम है। इससे बाजार में यह उम्मीद बढ़ी है कि आने वाले समय में अमेरिका अपने तेल भंडार को दोबारा भरने के लिए खरीदारी बढ़ा सकता है। इसी संभावना के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत गुरुवार सुबह शुरुआती कारोबार में: Brent Crude लगभग 0.34% बढ़कर 85.24 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। WTI Crude करीब 0.52% की तेजी के साथ 80.01 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंताओं ने भी कच्चे तेल की कीमतों को समर्थन दिया है। भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में नहीं हुआ बदलाव हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं, लेकिन भारतीय तेल विपणन कंपनियों ने घरेलू ईंधन कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे पहले मई 2026 में विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार चरणों में बढ़ोतरी की गई थी। उसके बाद से कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। चार महानगरों में पेट्रोल के ताजा दाम (रुपये प्रति लीटर) शहर पेट्रोल दिल्ली ₹102.12 मुंबई ₹111.21 कोलकाता ₹113.51 चेन्नई ₹107.77 चार महानगरों में डीजल के ताजा दाम (रुपये प्रति लीटर) शहर डीजल दिल्ली ₹95.20 मुंबई ₹97.83 कोलकाता ₹99.82 चेन्नई ₹99.55 अन्य प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमत शहर पेट्रोल डीजल नोएडा ₹102.12 ₹97.56 चंडीगढ़ ₹101.51 ₹89.47 लखनऊ ₹101.89 ₹95.36 पटना ₹113.37 ₹99.36 रांची ₹105.26 ₹100.49 भोपाल ₹114.57 ₹99.64 आगे क्या रहेगी नजर? यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में घरेलू ईंधन कीमतों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। फिलहाल तेल कंपनियों ने उपभोक्ताओं को राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखे हैं।  

surbhi जुलाई 16, 2026 0
Russia Crude Oil
भारत के लिए सस्ता हुआ रूसी तेल, टैंकर किराए में बड़ी गिरावट; कच्चे तेल के आयात पर बढ़ेगी बचत

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के लिए राहत भरी खबर है। रूस से कच्चा तेल लाने वाले टैंकरों का किराया हाल के हफ्तों में काफी कम हो गया है, जिससे भारतीय रिफाइनरियों की आयात लागत घटने लगी है। शिपिंग दरों में इस गिरावट का सीधा फायदा भारत को सस्ते रूसी कच्चे तेल के रूप में मिल रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव इस राहत को लंबे समय तक बनाए रखने में चुनौती बन सकता है।   क्यों घटा टैंकरों का किराया?   जानकारों के अनुसार, वैश्विक शिपिंग बाजार में टैंकरों की उपलब्धता बढ़ने और माल ढुलाई की मांग में नरमी आने से समुद्री परिवहन लागत कम हुई है। इसका असर रूस से भारत आने वाले तेल टैंकरों पर भी पड़ा है। कम फ्रेट चार्ज के कारण भारतीय कंपनियों को पहले की तुलना में कम लागत पर रूसी कच्चा तेल मिल रहा है, जिससे रिफाइनरियों के मार्जिन में सुधार की उम्मीद है।   भारत को मिलेगा आर्थिक फायदा   भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और रूस उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। टैंकर किराया कम होने से तेल आयात का कुल खर्च घटेगा, जिससे रिफाइनरियों की लागत कम होगी। यदि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो इसका सकारात्मक असर ईंधन कंपनियों की लागत और ऊर्जा क्षेत्र पर भी पड़ सकता है।   होर्मुज तनाव बना सबसे बड़ा जोखिम   विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा। यदि इस मार्ग पर आवाजाही प्रभावित होती है, तो शिपिंग लागत दोबारा बढ़ सकती है और भारत को मिल रही मौजूदा राहत सीमित हो सकती है। ऐसे में ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों पर भी भारत का फोकस बना रहेगा।

abhishek singh जुलाई 12, 2026 0
E20 Petrol
क्या है E20 पेट्रोल? जानिए क्यों चर्चा में है यह ईंधन

नई दिल्ली, एजेंसियां। देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर चर्चा तेज है। कुछ वाहन मालिकों की शिकायतों और सोशल मीडिया पर वायरल दावों के बाद सरकार ने E20 पेट्रोल को लेकर विस्तृत सफाई जारी की है। सरकार का कहना है कि E20 कोई प्रयोग नहीं, बल्कि वर्षों की वैज्ञानिक जांच और परीक्षण के बाद लागू की गई नीति है।   क्या होता है E20 पेट्रोल?   E20 पेट्रोल में 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल का मिश्रण होता है। इथेनॉल गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार होने वाला जैव ईंधन है। इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और किसानों की आय बढ़ाना है। देशभर में 1 अप्रैल 2026 से E20 पेट्रोल की आपूर्ति शुरू की गई है।   सरकार ने क्या कहा?   पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार E20 पेट्रोल पर उठ रही कई आशंकाएं तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। मंत्रालय का कहना है कि यह ईंधन व्यापक लैब और रोड टेस्ट के बाद लागू किया गया है। सरकार के मुताबिक E20 से विदेशी मुद्रा की बचत होगी, ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम होगा और घरेलू इथेनॉल उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।   क्या माइलेज कम होता है?   सरकार ने स्वीकार किया है कि कुछ वाहनों में E20 पेट्रोल के उपयोग से माइलेज में लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। हालांकि मंत्रालय का कहना है कि इसके बदले मिलने वाले पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। साथ ही E20 के कारण इंजन खराब होने या फ्यूल टैंक में जंग लगने जैसी वायरल खबरों को भी सरकार ने भ्रामक बताया है।   विवाद क्यों बढ़ा?   हाल ही में कुछ वाहन मालिकों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने E20 पेट्रोल से वाहन खराब होने के दावे किए, जिसके बाद यह मुद्दा चर्चा में आ गया। सरकार और वाहन निर्माता कंपनियों का कहना है कि कई मामलों में समस्या का कारण दूषित ईंधन या वाहन की तकनीकी खराबी थी, न कि E20 पेट्रोल। फिलहाल E20 को लेकर बहस जारी है, लेकिन सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल इस नीति में बदलाव की कोई योजना नहीं है।

abhishek singh जुलाई 11, 2026 0
Spain players celebrate after defeating Belgium 2-1 to reach the FIFA World Cup 2026 semi-finals.
FIFA World Cup 2026: बेल्जियम को 2-1 से हराकर स्पेन सेमीफाइनल में, अब फ्रांस से होगी टक्कर

FIFA World Cup 2026 में स्पेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बेल्जियम को 2-1 से हराकर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। लॉस एंजिलिस स्टेडियम में खेले गए रोमांचक क्वार्टर फाइनल मुकाबले में स्पेन ने आखिरी मिनटों में गोल दागकर जीत दर्ज की। अब सेमीफाइनल में उसका मुकाबला मौजूदा उपविजेता फ्रांस से डलास में होगा, जिसे टूर्नामेंट के सबसे बड़े मुकाबलों में से एक माना जा रहा है। कोच का बड़ा फैसला स्पेन के लिए साबित हुआ गेम चेंजर स्पेन के मुख्य कोच लुइस डे ला फुएंते ने इस मुकाबले में शुरुआती एकादश में बड़ा बदलाव करते हुए स्टार मिडफील्डर पेड्री की जगह फाबियन रूइज को मौका दिया। यह फैसला टीम के लिए बेहद सफल साबित हुआ। फाबियन रूइज ने पूरे मैच में मिडफील्ड पर शानदार नियंत्रण बनाए रखा और स्पेन के लिए पहला गोल भी दागा। उन्होंने आक्रमण और रक्षा दोनों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया। फाबियन रूइज ने दिलाई शुरुआती बढ़त मैच के शुरुआती मिनटों से ही स्पेन ने गेंद पर कब्जा बनाए रखा और लगातार बेल्जियम के डिफेंस पर दबाव बनाया। 30वें मिनट में दानी ओल्मो के शॉट को बेल्जियम के गोलकीपर थिबाउट कूर्तुआ ने रोक दिया, लेकिन रीबाउंड पर फाबियन रूइज ने शानदार फिनिश करते हुए गेंद को नेट में पहुंचा दिया और स्पेन को 1-0 की बढ़त दिला दी। इसके बाद युवा स्टार लामिन यामाल ने भी अपनी तेज ड्रिब्लिंग से बेल्जियम की रक्षा पंक्ति को कई बार चुनौती दी, हालांकि वह गोल करने से चूक गए। डी केटेलारे ने बेल्जियम की कराई वापसी पहले हाफ के अंतिम चरण में बेल्जियम ने शानदार वापसी की। कप्तान केविन डी ब्रुने ने बेहतरीन थ्रू पास देकर टिमोथी कास्टान्ये को मौका बनाया। कास्टान्ये के सटीक क्रॉस पर चार्ल्स डी केटेलारे ने 41वें मिनट में शानदार हेडर लगाकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। पहले हाफ की समाप्ति तक दोनों टीमें बराबरी पर थीं। दूसरे हाफ में दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर दूसरे हाफ में दोनों टीमों ने लगातार आक्रामक खेल दिखाया। स्पेन ने गेंद पर अधिक नियंत्रण रखा, जबकि बेल्जियम ने तेज काउंटर अटैक के जरिए बढ़त बनाने की कोशिश की। दोनों गोलकीपरों और डिफेंडरों ने कई शानदार बचाव किए, जिससे लंबे समय तक स्कोर नहीं बदल सका। कूर्तुआ की चोट ने बदला मैच का रुख 71वें मिनट में बेल्जियम को बड़ा झटका लगा जब अनुभवी गोलकीपर थिबाउट कूर्तुआ चोटिल होकर मैदान से बाहर हो गए। उनकी जगह युवा गोलकीपर सेने लामेन्स को उतारा गया। इस बदलाव के बाद स्पेन ने लगातार दबाव बढ़ाया और बेल्जियम के डिफेंस पर पकड़ मजबूत कर ली। मेरिनो ने 88वें मिनट में दिलाई यादगार जीत मुकाबले का निर्णायक पल 88वें मिनट में आया। स्पेन के डिफेंडर पाउ क्यूबार्सी के दूर से लगाए गए शॉट को गोलकीपर सेने लामेन्स पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सके। रीबाउंड पर मौजूद मिकेल मेरिनो ने बिना कोई गलती किए गेंद को गोल में पहुंचाकर स्पेन को 2-1 की बढ़त दिला दी। अंतिम मिनटों में बेल्जियम ने बराबरी की पूरी कोशिश की, लेकिन स्पेन के डिफेंस ने कोई मौका नहीं दिया और टीम ने सेमीफाइनल का टिकट हासिल कर लिया। अब फ्रांस से होगा हाई-वोल्टेज सेमीफाइनल इस जीत के साथ स्पेन फीफा विश्व कप 2026 के अंतिम चार में पहुंच गया है। अब उसका मुकाबला डलास में मौजूदा उपविजेता फ्रांस से होगा। दोनों यूरोपीय दिग्गज शानदार फॉर्म में हैं, इसलिए इस मुकाबले को टूर्नामेंट के सबसे रोमांचक और बहुप्रतीक्षित मैचों में शामिल किया जा रहा है।  

surbhi जुलाई 11, 2026 0
Gold - Silver Price
सोने-चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव, निवेशकों की नजर वैश्विक बाजार और डॉलर की चाल पर

नई दिल्ली, एजेंसियां। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। गुरुवार को भी दोनों कीमती धातुओं के दाम दबाव में रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता के कारण सर्राफा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।   लगातार चौथे कारोबारी दिन दबाव में सोना-चांदी   बाजार के ताजा रुझानों के अनुसार, सोने और चांदी की कीमतों में लगातार चौथे कारोबारी दिन कमजोरी दर्ज की गई। सोना करीब 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जबकि चांदी का भाव करीब ₹2.45 लाख प्रति किलोग्राम रहा, जो पिछले कारोबारी दिन के मुकाबले लगभग ₹500 प्रति किलो कम है। वहीं चार दिनों में चांदी करीब ₹15,000 प्रति किलो सस्ती हो चुकी है।   वैश्विक तनाव का बाजार पर असर   विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने वैश्विक बाजार में महंगाई की चिंताओं को बढ़ा दिया है। इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर नीति को लेकर भी निवेशकों में असमंजस बना हुआ है, जिसका सीधा असर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ रहा है।   डॉलर की मजबूती से घट रही सोने की चमक   अमेरिकी डॉलर मजबूत होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग पर दबाव पड़ता है। इसी वजह से हाल के दिनों में निवेशकों का रुझान कुछ हद तक डॉलर आधारित निवेश की ओर बढ़ा है, जिससे सर्राफा बाजार में उतार-चढ़ाव तेज हुआ है।   निवेशकों की नजर आगे किन संकेतों पर?   बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले, डॉलर इंडेक्स की चाल, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम सोने-चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखने की सलाह दी जा रही है।   खरीदारों के लिए राहत, निवेशकों के लिए सतर्क रहने का समय   कीमतों में आई हालिया नरमी से आभूषण खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों को कुछ राहत मिल सकती है। वहीं, निवेश के उद्देश्य से सोना-चांदी खरीदने वालों को विशेषज्ञ बाजार की चाल और अंतरराष्ट्रीय संकेतों को ध्यान में रखकर ही फैसला लेने की सलाह दे रहे हैं।

abhishek singh जुलाई 9, 2026 0
Investors monitor Sensex and Nifty as Indian stock market rebounds despite US-Iran tensions and global uncertainty.
US-ईरान तनाव के बीच शेयर बाजार में जबरदस्त रिकवरी, सेंसेक्स 500 अंक उछला; जानिए क्यों लौटी निवेशकों की खरीदारी

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत वापसी की। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक चढ़ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 24,000 के स्तर के ऊपर पहुंच गया। इससे एक दिन पहले भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार में तीन महीनों की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट दर्ज की गई थी। सुबह करीब 9:40 बजे सेंसेक्स 516.15 अंक (0.67%) की बढ़त के साथ 77,019.75 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 139.90 अंक (0.59%) चढ़कर 24,021.95 पर पहुंच गया। बुधवार की गिरावट के बाद क्यों लौटा बाजार? बुधवार को अमेरिका की ओर से ईरान पर सैन्य कार्रवाई और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ गई थी। इससे वैश्विक बाजारों में बिकवाली देखने को मिली और भारतीय बाजार भी 2% से अधिक टूट गया। हालांकि गुरुवार को निवेशकों की धारणा में सुधार देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल हालात उतने गंभीर नहीं हैं, जितनी आशंका पहले जताई जा रही थी। इसी वजह से निवेशकों ने फिर से खरीदारी शुरू कर दी। कच्चे तेल की कीमत अभी चिंता का बड़ा कारण नहीं विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 79–80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। यह स्तर भारत के लिए चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन फिलहाल अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा संकट नहीं माना जा रहा। विश्लेषकों का कहना है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित नहीं होती और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर नहीं जातीं, तो भारतीय बाजार पर इसका बड़ा नकारात्मक असर पड़ने की संभावना कम है। विदेशी निवेशकों की खरीदारी से मिला बाजार को सहारा बाजार में मजबूती का एक बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार खरीदारी भी रही है। पिछले चार कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लगभग 3,954 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी आगे भी बनी रह सकती है। स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में भी दिखी तेजी गुरुवार की तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली। Nifty Smallcap 100 में 1% से अधिक की बढ़त Nifty Midcap 50 और Midcap 100 में लगभग 1% की तेजी India VIX में 7% से अधिक की गिरावट, जिससे बाजार में घबराहट कम होने के संकेत मिले किन सेक्टरों ने दिखाई सबसे ज्यादा मजबूती? गुरुवार के कारोबार में कई सेक्टरों में अच्छी खरीदारी दर्ज की गई। सबसे ज्यादा तेजी इन सेक्टरों में रही— कंज्यूमर ड्यूरेबल्स रियल्टी प्राइवेट बैंक फार्मा हेल्थकेयर ऑटो एफएमसीजी पीएसयू बैंक वहीं आईटी सेक्टर दबाव में रहा। निवेशकों ने TCS के तिमाही नतीजों से पहले मुनाफावसूली की, जिससे Infosys, HCLTech, TCS और Tech Mahindra के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स के टॉप गेनर्स और लूजर्स शुरुआती कारोबार में Eternal सबसे ज्यादा बढ़त वाला शेयर रहा। इसके अलावा Sun Pharma, Titan, Bharti Airtel, ICICI Bank, Asian Paints, Larsen & Toubro, HDFC Bank, Power Grid, UltraTech Cement और BEL में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई। दूसरी ओर Infosys में सबसे ज्यादा गिरावट रही, जबकि HCLTech, TCS और Tech Mahindra भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे। रुपये में स्थिरता से भी मिला समर्थन भारतीय रुपया शुरुआती कारोबार में 95.55 प्रति डॉलर के स्तर पर लगभग स्थिर रहा। मुद्रा बाजार में स्थिरता ने भी निवेशकों के भरोसे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। क्या कहते हैं बाजार के जानकार? विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी रहेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव और नहीं बढ़ता तथा तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में आगे भी रिकवरी जारी रह सकती है।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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शेयर बाजार में गिरावट, Sensex 71 अंक टूटा; Nifty 24,400 के नीचे बंद

abhishek singh अगस्त 14, 2026 0