मुंबई, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। 12 अगस्त 2026 को ब्रेंट क्रूड करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। बुधवार को ब्रेंट क्रूड वायदा करीब 89.63 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि अमेरिकी WTI भी करीब 84 डॉलर के आसपास रहा।
तेल की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह मध्य-पूर्व में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दोबारा खुलने को लेकर अनिश्चितता बताई जा रही है। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यहां किसी भी तरह की बाधा से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका रहती है।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव आ सकता है। बुधवार को कारोबार की शुरुआत में भी रुपये पर क्रूड की बढ़ती कीमतों का असर देखा गया। महंगे कच्चे तेल का असर आगे चलकर महंगाई, परिवहन लागत, विमानन, पेंट, रसायन और अन्य तेल-आधारित उद्योगों पर भी पड़ सकता है।
क्रूड के 90 डॉलर के करीब पहुंचने से भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों की चिंता बढ़ी है। महंगे तेल से भारत के व्यापार घाटे और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका के कारण सेंसेक्स और निफ्टी पर भी दबाव देखने को मिला।
अगर कच्चा तेल लंबे समय तक 90 डॉलर के आसपास बना रहता है, तो बाजार की नजर अब रुपये की चाल, महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर रहेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 12 अगस्त 2026 को कारोबार गिरावट के साथ बंद हुआ। दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद BSE सेंसेक्स 188 अंक यानी 0.24% गिरकर 77,966.35 पर बंद हुआ। वहीं NSE निफ्टी 50 करीब 36 अंक यानी 0.15% टूटकर 24,435.95 पर बंद हुआ। IT और ऑटो शेयरों पर दबाव आज बाजार में IT, FMCG और ऑटो शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी IT इंडेक्स करीब 1.54% गिरा। TCS, मैक्स हेल्थकेयर, अपोलो हॉस्पिटल्स, M&M और टाटा स्टील प्रमुख गिरने वाले शेयरों में रहे। PSU बैंक और मेटल शेयरों में खरीदारी दूसरी ओर PSU बैंक और मेटल शेयरों में अच्छी खरीदारी रही। निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स 2.05% चढ़ा, जबकि निफ्टी बैंक 0.77% और निफ्टी मेटल 0.54% मजबूत हुआ। हिंदाल्को, SBI, भारती एयरटेल, जियो फाइनेंशियल और अल्ट्राटेक सीमेंट प्रमुख बढ़ने वाले शेयरों में रहे। कच्चे तेल की कीमत और भू-राजनीतिक तनाव का असर बाजार पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अनिश्चितता का दबाव रहा। ब्रेंट क्रूड करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। निवेशकों की नजर भारत और अमेरिका के महंगाई आंकड़ों पर भी रही।
मुंबई, एजेंसियां। टाटा समूह में नेतृत्व को लेकर बुधवार, 12 अगस्त 2026 को बड़ी हलचल सामने आई है। Tata Sons के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के 18 अगस्त को होने वाली वार्षिक आम बैठक (AGM) से पहले पद छोड़ने पर विचार करने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्रशेखरन ने इस संभावना को लेकर अपने करीबी लोगों से चर्चा की है। हालांकि, उनके पद छोड़ने का कोई अंतिम निर्णय आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुआ है। AGM से पहले क्यों बढ़ा विवाद? चंद्रशेखरन का Tata Sons के चेयरमैन के रूप में कार्यकाल फरवरी 2027 तक है, लेकिन उनके आगे बने रहने के लिए Tata Sons के बोर्ड में निदेशक के रूप में उनका पुनर्नियुक्त होना जरूरी है। आगामी AGM में इसी को लेकर शेयरधारकों के सामने प्रस्ताव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, AGM में उनके पुनर्नियुक्ति को लेकर संभावित अनिश्चितता के बीच चंद्रशेखरन ने स्वेच्छा से पद छोड़ने की संभावना पर विचार किया है। इससे टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं। Tata Trusts की बैठक भी अहम इस पूरे घटनाक्रम के बीच Tata Trusts के बोर्ड की 13 अगस्त को बैठक होने वाली है। चंद्रशेखरन के कार्यकाल के विस्तार से जुड़ा मुद्दा इस बैठक के एजेंडे में होने की संभावना है। इसलिए 13 अगस्त की बैठक और 18 अगस्त की AGM, दोनों को इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चंद्रशेखरन के कार्यकाल में Tata Group का विस्तार एन. चंद्रशेखरन ने 2017 में Tata Sons की कमान संभाली थी। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी निर्माण, डिजिटल कारोबार और विमानन जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया। Tata Sons के आधिकारिक दस्तावेजों में भी उन्हें समूह की होल्डिंग कंपनी के चेयरमैन के रूप में दर्ज किया गया है।
मुंबई, एजेंसियां। गोवा स्थित मेडिकल डायग्नोस्टिक्स कंपनी Molbio Diagnostics के IPO को निवेशकों की ओर से मजबूत प्रतिक्रिया मिली है। मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को बोली के दूसरे दिन के अंत तक इश्यू 3.11 गुना सब्सक्राइब हो चुका था। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, 81.58 लाख शेयरों के मुकाबले 2.53 करोड़ से ज्यादा शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। ₹940 करोड़ का है IPO Molbio Diagnostics का IPO करीब ₹939.70 करोड़ का है। कंपनी ने शेयरों का प्राइस बैंड ₹768 से ₹807 प्रति शेयर तय किया है। IPO 10 अगस्त को खुला है और 12 अगस्त 2026 को बंद होगा। कंपनी इस इश्यू के जरिए करीब ₹200 करोड़ का फ्रेश इश्यू जारी कर रही है, जबकि बाकी हिस्सा ऑफर फॉर सेल के जरिए है। QIB, NII और रिटेल निवेशकों की अच्छी भागीदारी 11 अगस्त शाम तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, QIB हिस्सा करीब 1.39 गुना, NII हिस्सा 5.21 गुना और रिटेल हिस्सा करीब 3.18 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इससे पता चलता है कि खासकर गैर-संस्थागत और रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी मजबूत रही। निवेशक न्यूनतम 18 शेयरों के एक लॉट के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से एक लॉट के लिए करीब ₹14,526 की जरूरत होगी। 12 अगस्त को आखिरी मौका Molbio Diagnostics IPO में निवेश के लिए आज 12 अगस्त आखिरी दिन है। उपलब्ध कार्यक्रम के मुताबिक अलॉटमेंट 13 अगस्त को और शेयरों की BSE तथा NSE पर संभावित लिस्टिंग 17 अगस्त 2026 को हो सकती है। कंपनी Truenat जैसे पोर्टेबल मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स प्लेटफॉर्म के लिए जानी जाती है। IPO में आवेदन करने से पहले निवेशकों को कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, वैल्यूएशन और बाजार जोखिमों का आकलन करना चाहिए।