Stock Market Today: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत समेत 17 देशों के कुछ आयातित सामान पर 10% टैरिफ लगाने के फैसले का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। शुक्रवार को घरेलू बाजार लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 850 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 23,700 के नीचे फिसल गया। इस भारी बिकवाली के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार पूंजीकरण (Market Cap) में करीब 3 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में बाजार पर भारी दबाव सुबह करीब 10:15 बजे: सेंसेक्स 876.06 अंक (1.15%) टूटकर 75,515.33 पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी 50 258.80 अंक (1.08%) गिरकर 23,610.80 पर पहुंच गया। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर करीब 473 लाख करोड़ रुपये रह गया। यह लगातार पांचवां कारोबारी दिन है जब भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। रुपये पर भी दिखा दबाव शेयर बाजार में कमजोरी के साथ भारतीय मुद्रा पर भी दबाव देखने को मिला। डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 0.06% कमजोर होकर 96.63 पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 96.5725 पर बंद हुआ था। किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट? सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। सबसे अधिक दबाव इन शेयरों पर रहा— इंफोसिस भारती एयरटेल इंडिगो इटरनल टाटा स्टील बजाज फाइनेंस अल्ट्राटेक सीमेंट बजाज फिनसर्व एचडीएफसी बैंक एशियन पेंट्स मारुति सुजुकी लार्सन एंड टुब्रो ट्रेंट अडानी पोर्ट्स वहीं एचसीएल टेक शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज करने वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहा। सेक्टरवार कैसा रहा हाल? ब्रॉडर मार्केट में भी बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप लगभग 0.63% कमजोर रहा। निफ्टी स्मॉलकैप करीब 0.62% नीचे कारोबार करता दिखा। सबसे ज्यादा गिरावट इन सेक्टरों में रही— रियल्टी ऑटो मेटल जबकि फार्मा और आईटी सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। बाजार क्यों टूटा? बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका द्वारा भारत सहित 17 देशों के कुछ आयातित सामान पर 10% टैरिफ लगाने की घोषणा मानी जा रही है। अमेरिका का आरोप है कि ये देश जबरन मजदूरी (Forced Labour) से बने उत्पादों के आयात पर पर्याप्त रोक लगाने में विफल रहे हैं। यह फैसला अमेरिकी ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत हुई जांच के बाद लिया गया है। भारत के अलावा जिन देशों पर यह टैरिफ लगाया गया है, उनमें शामिल हैं— पाकिस्तान बांग्लादेश श्रीलंका कंबोडिया यूनाइटेड किंगडम (यूके) और अन्य देश इस फैसले ने वैश्विक व्यापार को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। महंगा हुआ कच्चा तेल भी बना चिंता का कारण बाजार पर दबाव बढ़ाने वाली दूसरी बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रही। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। रिपोर्टों के मुताबिक, रेड सी में हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने के बाद सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो भारत जैसे आयातक देशों पर महंगाई और चालू खाते के घाटे का दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है। निवेशकों के लिए आगे क्या? विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर तीन प्रमुख कारकों पर रहेगी— अमेरिका की व्यापार नीति और टैरिफ से जुड़े अगले फैसले। मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव। कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियों पर। यदि वैश्विक हालात में सुधार नहीं होता, तो घरेलू शेयर बाजार में निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
Monsoon & Kids Special Recipe: आसान सामग्री से तैयार करें बाजार जैसी क्रिस्पी पोटैटो स्माइली, बच्चों के टिफिन के लिए परफेक्ट स्नैक अगर आप रोजाना एक जैसा नाश्ता बनाकर बोर हो चुके हैं और बच्चों के लिए कुछ नया, स्वादिष्ट और मजेदार बनाना चाहते हैं, तो घर पर बनी पोटैटो स्माइली एक बेहतरीन विकल्प है। यह स्नैक बाहर से कुरकुरा और अंदर से बेहद मुलायम होता है। इसे बनाने के लिए महंगी या ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती और यह बच्चों के टिफिन, शाम की चाय या बर्थडे पार्टी के लिए भी शानदार विकल्प है। पोटैटो स्माइली बनाने के लिए आवश्यक सामग्री 3–4 मध्यम आकार के आलू 3–4 बड़े चम्मच चावल का आटा स्वादानुसार नमक 1 छोटा चम्मच घी या तेल ½ छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर (वैकल्पिक) ½ छोटा चम्मच चिली फ्लेक्स (वैकल्पिक) तलने के लिए तेल परोसने के लिए टोमैटो केचप, हरी चटनी या पसंदीदा डिप ऐसे बनाएं पोटैटो स्माइली सबसे पहले आलू को धोकर छील लें और छोटे टुकड़ों में काटकर उबाल लें। आलू पकने के बाद अतिरिक्त पानी पूरी तरह निकाल दें और उन्हें अच्छी तरह मैश करें। अब मैश किए हुए आलू में चावल का आटा, नमक, घी या तेल और अपनी पसंद के अनुसार काली मिर्च या चिली फ्लेक्स डालकर मुलायम आटा तैयार करें। आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें गोल आकार दें। स्ट्रॉ या किसी गोल चीज की मदद से दो आंखें बनाएं और चम्मच के किनारे से हल्की मुस्कान का आकार दें। मध्यम आंच पर गर्म तेल में स्माइलीज को दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलें। अतिरिक्त तेल निकालकर इन्हें टोमैटो केचप, हरी चटनी या अपनी पसंदीदा डिप के साथ गरमागरम परोसें। क्रिस्पी स्माइली बनाने का आसान टिप आलू का अतिरिक्त पानी पूरी तरह निकालें। चावल का आटा कुरकुरापन बढ़ाता है। आटा ज्यादा गीला न रखें। हमेशा मध्यम आंच पर तलें ताकि स्माइली बाहर से क्रिस्पी और अंदर से सॉफ्ट रहें। घर पर बनी पोटैटो स्माइली न सिर्फ स्वाद में बाजार जैसी होती हैं, बल्कि ताजगी और साफ-सफाई के लिहाज से भी बेहतर विकल्प साबित होती हैं।
मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में शानदार तेजी देखने को मिली। घरेलू शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 828 अंक की छलांग लगाकर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 50 सूचकांक 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर बंद हुआ। बाजार में चौतरफा खरीदारी का माहौल रहा और अधिकांश सेक्टरों में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की। आईटी, बैंकिंग और रियल्टी शेयरों ने दिखाई मजबूती बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह देश की प्रमुख आईटी कंपनी टीसीएस के उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजे रहे। बेहतर प्रदर्शन से आईटी सेक्टर में निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में भी जोरदार खरीदारी देखने को मिली। व्यापक बाजार में भी सकारात्मक रुख रहा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांकों में करीब 1.5 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों की रुचि केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। वैश्विक संकेतों का भी मिला समर्थन भारतीय बाजार को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भी सकारात्मक संकेत मिले। एशियाई बाजारों में अधिकांश सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। जापान का टॉपिक्स, ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200, हांगकांग का हैंग सेंग और शंघाई कंपोजिट सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। हालांकि अमेरिकी और यूरोपीय वायदा बाजारों में हल्की कमजोरी देखने को मिली, लेकिन उसका असर भारतीय बाजार पर नहीं पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कॉरपोरेट नतीजों, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और वैश्विक स्तर पर सकारात्मक माहौल के कारण बाजार में तेजी का रुख बना हुआ है। आने वाले दिनों में अन्य कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। फिलहाल निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है और बाजार में सकारात्मक धारणा कायम है।
भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को मजबूत शुरुआत करते हुए निवेशकों का भरोसा फिर से बढ़ा दिया। वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद घरेलू बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला। आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी TCS के उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में राहत ने बाजार की तेजी को मजबूती दी। सुबह करीब 9:20 बजे बीएसई सेंसेक्स 676.12 अंक यानी 0.88 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,417.94 पर कारोबार कर रहा था। वहीं एनएसई निफ्टी 50 196.30 अंक यानी 0.82 प्रतिशत चढ़कर 24,159.10 के स्तर पर पहुंच गया। TCS के शानदार नतीजों से IT सेक्टर में जबरदस्त खरीदारी बाजार की तेजी का सबसे बड़ा कारण आईटी शेयरों में आई मजबूती रही। जून तिमाही के नतीजों में TCS ने बाजार की उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे पूरे आईटी सेक्टर में सकारात्मक माहौल बन गया। निफ्टी आईटी इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 3 प्रतिशत से अधिक उछल गया। Tech Mahindra, TCS, HCLTech और Infosys जैसे प्रमुख शेयरों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा L&T Technology Services और Coforge के शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। मुनाफे और ऑर्डर बुक दोनों में मजबूत प्रदर्शन TCS ने जून तिमाही में 13,349 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत अधिक है। कंपनी की आय बढ़कर 72,275 करोड़ रुपये पहुंच गई। इसके साथ ही कंपनी के बोर्ड ने 12 रुपये प्रति शेयर अंतरिम लाभांश देने का भी ऐलान किया। कंपनी की ऑर्डर बुक 9.5 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। वहीं AI कारोबार का वार्षिक रन रेट बढ़कर 2.6 अरब डॉलर हो गया, जो इस क्षेत्र में बढ़ती मांग का संकेत माना जा रहा है। 9 हजार से ज्यादा नई भर्तियों ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा TCS ने जून तिमाही के दौरान 9,279 नए कर्मचारियों की नियुक्ति की, जो पिछले एक साल से अधिक समय में सबसे ज्यादा तिमाही भर्ती है। इसे भविष्य की मांग को लेकर कंपनी के भरोसे का संकेत माना जा रहा है। कंपनी के सीईओ के. कृतिवासन ने भी आने वाली तिमाहियों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए। उनका कहना है कि मैन्युफैक्चरिंग और लाइफ साइंस सेक्टर में टेक्नोलॉजी खर्च बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि AI कारोबार के लिए खतरा नहीं बल्कि नए अवसर लेकर आ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों से भी मिली राहत बाजार को एक और बड़ी राहत कच्चे तेल की कीमतों से मिली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बावजूद ब्रेंट क्रूड करीब 76.52 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड लगभग 72.29 डॉलर प्रति बैरल पर बना रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चा तेल 80 से 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंचता तो भारत की अर्थव्यवस्था, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता था। फिलहाल कीमतों के नियंत्रण में रहने से निवेशकों की चिंता कम हुई है। लगभग सभी सेक्टरों में लौटी तेजी आईटी के अलावा बैंकिंग और अन्य सेक्टरों में भी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, प्राइवेट बैंक, पीएसयू बैंक, ऑटो, एफएमसीजी, मीडिया और रियल्टी इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी रही। वहीं बाजार की अस्थिरता मापने वाला इंडिया VIX 5 प्रतिशत से अधिक गिर गया, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर? विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार की दिशा दो अहम कारकों पर निर्भर करेगी। पहला, अमेरिका-ईरान के बीच भू-राजनीतिक घटनाक्रम और दूसरा, जून तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजे। TCS ने कमाई के सीजन की सकारात्मक शुरुआत की है। अब निवेशकों की नजर अन्य बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी, जो आने वाले दिनों में शेयर बाजार की अगली चाल तय कर सकते हैं। नोट: शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले किसी योग्य वित्तीय सलाहकार की सलाह अवश्य लें।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत वापसी की। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक चढ़ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 24,000 के स्तर के ऊपर पहुंच गया। इससे एक दिन पहले भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार में तीन महीनों की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट दर्ज की गई थी। सुबह करीब 9:40 बजे सेंसेक्स 516.15 अंक (0.67%) की बढ़त के साथ 77,019.75 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 139.90 अंक (0.59%) चढ़कर 24,021.95 पर पहुंच गया। बुधवार की गिरावट के बाद क्यों लौटा बाजार? बुधवार को अमेरिका की ओर से ईरान पर सैन्य कार्रवाई और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ गई थी। इससे वैश्विक बाजारों में बिकवाली देखने को मिली और भारतीय बाजार भी 2% से अधिक टूट गया। हालांकि गुरुवार को निवेशकों की धारणा में सुधार देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल हालात उतने गंभीर नहीं हैं, जितनी आशंका पहले जताई जा रही थी। इसी वजह से निवेशकों ने फिर से खरीदारी शुरू कर दी। कच्चे तेल की कीमत अभी चिंता का बड़ा कारण नहीं विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 79–80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। यह स्तर भारत के लिए चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन फिलहाल अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा संकट नहीं माना जा रहा। विश्लेषकों का कहना है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित नहीं होती और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर नहीं जातीं, तो भारतीय बाजार पर इसका बड़ा नकारात्मक असर पड़ने की संभावना कम है। विदेशी निवेशकों की खरीदारी से मिला बाजार को सहारा बाजार में मजबूती का एक बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार खरीदारी भी रही है। पिछले चार कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लगभग 3,954 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी आगे भी बनी रह सकती है। स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में भी दिखी तेजी गुरुवार की तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली। Nifty Smallcap 100 में 1% से अधिक की बढ़त Nifty Midcap 50 और Midcap 100 में लगभग 1% की तेजी India VIX में 7% से अधिक की गिरावट, जिससे बाजार में घबराहट कम होने के संकेत मिले किन सेक्टरों ने दिखाई सबसे ज्यादा मजबूती? गुरुवार के कारोबार में कई सेक्टरों में अच्छी खरीदारी दर्ज की गई। सबसे ज्यादा तेजी इन सेक्टरों में रही— कंज्यूमर ड्यूरेबल्स रियल्टी प्राइवेट बैंक फार्मा हेल्थकेयर ऑटो एफएमसीजी पीएसयू बैंक वहीं आईटी सेक्टर दबाव में रहा। निवेशकों ने TCS के तिमाही नतीजों से पहले मुनाफावसूली की, जिससे Infosys, HCLTech, TCS और Tech Mahindra के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स के टॉप गेनर्स और लूजर्स शुरुआती कारोबार में Eternal सबसे ज्यादा बढ़त वाला शेयर रहा। इसके अलावा Sun Pharma, Titan, Bharti Airtel, ICICI Bank, Asian Paints, Larsen & Toubro, HDFC Bank, Power Grid, UltraTech Cement और BEL में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई। दूसरी ओर Infosys में सबसे ज्यादा गिरावट रही, जबकि HCLTech, TCS और Tech Mahindra भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे। रुपये में स्थिरता से भी मिला समर्थन भारतीय रुपया शुरुआती कारोबार में 95.55 प्रति डॉलर के स्तर पर लगभग स्थिर रहा। मुद्रा बाजार में स्थिरता ने भी निवेशकों के भरोसे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। क्या कहते हैं बाजार के जानकार? विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी रहेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव और नहीं बढ़ता तथा तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में आगे भी रिकवरी जारी रह सकती है।
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को तेज गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 600 अंकों से अधिक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 24,250 के नीचे फिसल गया। हाल के सप्ताहों में आई तेजी के बाद निवेशकों ने एक बार फिर सतर्क रुख अपनाया है। विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में गिरावट की मुख्य वजहें अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली हैं। 1. अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी कच्चे तेल की कीमतें बाजार पर सबसे बड़ा असर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का पड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 2 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 76 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका असर शेयर बाजार पर भी दिखाई देता है। 2. वैश्विक टेक शेयरों में बिकवाली अमेरिकी शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। Nasdaq Composite में 1.16% की गिरावट S&P 500 में 0.45% की गिरावट Dow Jones में 0.25% की कमजोरी सेमीकंडक्टर और AI से जुड़े शेयरों में बिकवाली का असर एशियाई बाजारों और भारतीय बाजार पर भी पड़ा। 3. AI सेक्टर को लेकर निवेशकों की चिंता दक्षिण कोरिया की Samsung Electronics ने मजबूत तिमाही नतीजों का अनुमान दिया, लेकिन इसके बावजूद निवेशकों ने मुनाफावसूली की। वहीं, चीन के AI स्टार्टअप DeepSeek द्वारा अपना AI चिप विकसित करने की खबर के बाद वैश्विक चिप कंपनियों के भविष्य को लेकर भी नई चिंताएं बढ़ गई हैं। इन घटनाओं ने AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर के शेयरों में दबाव बढ़ाया, जिसका असर वैश्विक निवेशकों की धारणा पर भी पड़ा। FII निवेश बना सकारात्मक संकेत गिरावट के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी भारतीय बाजार के लिए राहत की खबर मानी जा रही है। मंगलवार को: FII ने ₹393.19 करोड़ के शेयर खरीदे। DII ने ₹383.43 करोड़ के शेयर बेचे। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो विदेशी निवेश भारतीय बाजार का समर्थन जारी रख सकते हैं। निवेशकों की नजर किन बातों पर रहेगी? आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में तीन प्रमुख कारक अहम रहेंगे— अमेरिका-ईरान तनाव की आगे की स्थिति कच्चे तेल की कीमतों का रुख जून तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे इन कारकों को लेकर स्पष्टता आने तक भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना जताई जा रही है। नोट: शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले वित्तीय सलाहकार से परामर्श करना उचित है।
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूती देखने को मिली। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और शांति की उम्मीद से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 500 अंक से अधिक चढ़ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 24,300 अंक के ऊपर कारोबार करता नजर आया। सुबह करीब 9:22 बजे सेंसेक्स 487.81 अंक (0.63%) की बढ़त के साथ 77,989.93 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 156.80 अंक (0.65%) मजबूत होकर 24,332.50 के स्तर पर पहुंच गया। IT सेक्टर ने संभाली बाजार की कमान सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 24 शेयर बढ़त के साथ खुले। सबसे ज्यादा तेजी HCL Technologies के शेयर में दर्ज की गई, जिसमें 4 प्रतिशत से अधिक उछाल आया। इसके अलावा Tech Mahindra, Infosys, TCS, Tata Steel, Sun Pharma, Bajaj Finserv और UltraTech Cement जैसे दिग्गज शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। आईटी सेक्टर में मजबूत निवेशकों की दिलचस्पी ने बाजार की तेजी को और मजबूती दी। इन शेयरों में दिखी गिरावट बाजार की तेजी के बावजूद कुछ शेयर दबाव में रहे। Mahindra & Mahindra के शेयर में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा SBI, Kotak Mahindra Bank, IndiGo, Titan, Adani Ports और Asian Paints जैसे शेयरों में भी हल्की कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10 बजे तक प्रमुख शेयरों का प्रदर्शन तेजी वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे— HCL Technologies: +4.31% Tech Mahindra: +2.81% Tata Steel: +2.78% Sun Pharma: +2.07% BEL: +1.88% Eternal: +1.75% Trent: +1.56% Bajaj Finserv: +1.55% TCS: +1.33% UltraTech Cement: +1.23% वहीं गिरावट वाले प्रमुख शेयर— Mahindra & Mahindra: -0.95% SBI: -0.67% Kotak Mahindra Bank: -0.38% IndiGo: -0.34% Titan: -0.33% Adani Ports: -0.28% ब्रॉडर मार्केट में भी खरीदारी मुख्य सूचकांकों के साथ-साथ व्यापक बाजार में भी मजबूती देखने को मिली। Nifty Midcap Index करीब 0.21% चढ़ा। Nifty Smallcap Index में लगभग 0.47% की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टोरल इंडेक्स में Nifty Metal और Nifty IT सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर रहे। दूसरी ओर Nifty Bank और Nifty PSU Bank अपेक्षाकृत कमजोर रहे। निवेशकों का बढ़ा भरोसा विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद, विदेशी बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और आईटी शेयरों में मजबूत खरीदारी ने भारतीय शेयर बाजार को लगातार तीसरे दिन बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई। यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी बाजार का सकारात्मक रुख जारी रह सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को मजबूत बढ़त के साथ कारोबार का समापन किया। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और आईटी सेक्टर में जोरदार खरीदारी के दम पर बाजार में चौतरफा तेजी देखने को मिली। कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 579.48 अंक यानी 0.75 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,502.12 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 169.86 अंक यानी 0.71 प्रतिशत चढ़कर 24,175.70 के स्तर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट बनी बड़ी वजह बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटकर करीब 70 डॉलर प्रति बैरल पर आने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में तेल सस्ता होने से कंपनियों की लागत कम होने और अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद से बाजार में खरीदारी तेज हुई। आईटी शेयरों ने दिखाई सबसे ज्यादा मजबूती गुरुवार के कारोबार में आईटी सेक्टर बाजार की तेजी का प्रमुख आधार बना। निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 3.5 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। प्रमुख आईटी कंपनी एचसीएल टेक के शेयरों में लगभग 5 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि बजाज फिनसर्व के शेयर भी करीब 3 प्रतिशत मजबूत हुए। इसके अलावा मेटल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और केमिकल सेक्टर के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। हालांकि, मीडिया सेक्टर में हल्की कमजोरी दर्ज की गई। वैश्विक बाजारों से मिला सकारात्मक संकेत एशियाई बाजारों में जापान का टोपिक्स और हांगकांग का हैंग सेंग बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि अमेरिकी और यूरोपीय वायदा बाजारों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। इन वैश्विक संकेतों का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। विश्लेषकों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और आईटी सेक्टर में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रहती है, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी बाजार में तेजी का रुख जारी रह सकता है। हालांकि, रुपया डॉलर के मुकाबले 24 पैसे कमजोर होकर 95.40 के स्तर पर बंद हुआ।
मुंबई, एजेंसियां। दो दिन की लगातार गिरावट के बाद बुधवार को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत वापसी की। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और निवेशकों की खरीदारी के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में जोरदार उछाल देखा गया। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 443.97 अंक या 0.58 फीसदी बढ़कर 76,922.64 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 140.10 अंक या 0.59 फीसदी की तेजी के साथ 24,005.85 के स्तर पर पहुंच गया। इंट्रा-डे में 631 अंक तक चढ़ा सेंसेक्स, कई बड़े शेयरों में खरीदारी दिन के दौरान सेंसेक्स में मजबूत तेजी देखने को मिली और यह 631.41 अंक तक उछलकर 77,110.08 के उच्च स्तर पर पहुंच गया। बाजार को एटरनल, एशियन पेंट्स, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अदाणी पोर्ट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और एसबीआई जैसे शेयरों में खरीदारी से सपोर्ट मिला। हालांकि, आईटी सेक्टर के शेयरों में दबाव देखने को मिला, जहां एचसीएल टेक, टीसीएस, इंफोसिस और टेक महिंद्रा जैसे स्टॉक्स गिरावट में रहे। वैश्विक बाजार और कच्चे तेल ने दिया सहारा वैश्विक स्तर पर भी बाजारों में मिलाजुला लेकिन सकारात्मक रुख रहा। अमेरिका और एशियाई बाजारों में मजबूती ने भारतीय बाजार को सपोर्ट किया। वहीं, ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.07 फीसदी गिरकर 72.17 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जिससे महंगाई की आशंका कम हुई और निवेशकों का भरोसा बढ़ा। विशेषज्ञों की राय और निवेशकों की भावना विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू बाजार में H2CY26 को लेकर सकारात्मक रुख बना हुआ है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के विनोद नायर के मुताबिक, अमेरिका-भारत व्यापार समझौते की उम्मीद, मध्य पूर्व में तनाव में कमी और कच्चे तेल की नरम कीमतें बाजार के लिए अनुकूल माहौल बना रही हैं। FIIs की बिकवाली के बावजूद बाजार मजबूत हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने मंगलवार को 2,556 करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली की थी, लेकिन इसके बावजूद बुधवार को घरेलू बाजार में तेजी देखने को मिली। मंगलवार को बाजार गिरावट के साथ बंद हुए थे, लेकिन अगले ही सत्र में निवेशकों ने मजबूत खरीदारी दिखाकर बाजार को ऊंचाई पर पहुंचा दिया।
मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की। पिछले सत्र की गिरावट को पीछे छोड़ते हुए सेंसेक्स 423.30 अंक (0.55%) की बढ़त के साथ 77,226.20 पर खुला, जबकि निफ्टी 119.11 अंक (0.50%) चढ़कर 24,132.20 के स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में आई इस तेजी से निवेशकों का भरोसा फिर मजबूत होता नजर आया। आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिसमें एचसीएल टेक और मारुति शुरुआती कारोबार के प्रमुख गेनर्स रहे। मॉनसून की धीमी रफ्तार बनी चिंता की वजह बाजार में तेजी के बावजूद निवेशकों की नजर मॉनसून की प्रगति पर बनी हुई है। इस वर्ष जून में अब तक सामान्य से करीब 38 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मॉनसून में और देरी होती है तो खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। इससे खाद्य महंगाई बढ़ने और ग्रामीण मांग कमजोर पड़ने का खतरा रहेगा, जिसका असर देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की आय पर भी पड़ सकता है। ग्लोबल बाजारों से मिले-जुले संकेत अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख मिला-जुला रहा। जापान का टॉपिक्स इंडेक्स 1.3 फीसदी और ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 0.1 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। वहीं अमेरिकी S&P 500 फ्यूचर्स में 0.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। एशिया में हैंग सेंग 1.3 फीसदी और शंघाई कंपोजिट 0.2 फीसदी कमजोर रहे। इसके अलावा यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स भी 0.3 फीसदी फिसले। आगे इन संकेतों पर रहेगी बाजार की नजर विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घरेलू बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है, लेकिन आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मॉनसून की प्रगति, महंगाई के आंकड़ों और वैश्विक बाजारों के रुख पर निर्भर करेगी। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी से बचते हुए बाजार की चाल पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
मुंबई,एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी देखने को मिली। बाजार में खरीदारी का माहौल बने रहने से निवेशकों की संपत्ति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 347 अंकों की बढ़त के साथ 77,155.62 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 96 अंकों की मजबूती के साथ 24,085.70 के स्तर पर बंद हुआ। बैंकिंग और आईटी शेयरों में दिखी मजबूती बाजार की तेजी में बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों का अहम योगदान रहा। निवेशकों ने चुनिंदा ब्लू-चिप कंपनियों के शेयरों में जमकर खरीदारी की, जिससे प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिला समर्थन विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। तेल की कीमतों में नरमी भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए राहत की खबर मानी जा रही है। निवेशकों में बढ़ा उत्साह लगातार चार दिनों से जारी तेजी के कारण निवेशकों का बाजार के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार का व्यापक दायरा मजबूत रहा है। आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल बाजार जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और विदेशी निवेशकों का समर्थन मिलता है, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी बाजार में सकारात्मक रुख बना रह सकता है। हालांकि निवेशकों को उतार-चढ़ाव को देखते हुए सावधानी के साथ निवेश करने की सलाह दी गई है।
वैश्विक तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमत घटने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में तेजी देखने को मिली। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ, जिससे बाजार की शुरुआत हरे निशान में हुई। शुरुआती कारोबार में S&P BSE Sensex 306.22 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,570.55 पर पहुंच गया। वहीं Nifty 50 72.95 अंक या 0.31 प्रतिशत चढ़कर 23,926.85 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। ईरान-अमेरिका समझौते से कच्चे तेल में गिरावट बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक शांति समझौते की खबर रही। इससे लंबे समय तक चलने वाले भू-राजनीतिक संघर्ष की आशंकाएं कम हुईं और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड 84 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसलकर 82.99 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड करीब 80.74 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में गिरावट देश के लिए राहत की खबर मानी जा रही है, क्योंकि इससे महंगाई, चालू खाता घाटा और रुपये पर दबाव कम हो सकता है। रुपये में मजबूती से बाजार को मिला सहारा विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में नरमी और रुपये की मजबूती बाजार को समर्थन दे रही है। हाल के दिनों में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.96 के निचले स्तर से सुधरकर 94.71 तक पहुंच गया है। इससे विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली पर भी कुछ हद तक रोक लग सकती है। हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में AI आधारित निवेश थीम की मजबूती के कारण विदेशी निवेश का कुछ हिस्सा भारत से बाहर जा सकता है। आईटी सेक्टर बना बाजार का स्टार सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो आईटी शेयरों में सबसे अधिक खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी आईटी : +1.43% निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स : +0.91% निफ्टी मीडिया : +0.64% निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज : +0.42% वहीं मेटल शेयरों पर दबाव बना रहा और निफ्टी मेटल इंडेक्स 1.52 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे कमजोर सेक्टर साबित हुआ। इन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा तेजी सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में आईटी कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन किया। सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयर: HCLTech (+3.11%) Bajaj Finserv (+1.61%) Bajaj Finance (+1.60%) Hindustan Unilever (+1.55%) Tech Mahindra (+1.46%) Tata Consultancy Services (+1.44%) इसके अलावा Infosys, Bharti Airtel, HDFC Bank और Larsen & Toubro में भी खरीदारी देखने को मिली। इन शेयरों पर रहा दबाव दूसरी ओर कुछ बड़े शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। Axis Bank (-1.10%) UltraTech Cement (-0.56%) Tata Steel (-0.48%) Power Grid Corporation of India (-0.42%) Bharat Electronics Limited (-0.40%) मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बनी रही तेजी बाजार की मजबूती केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार में भी निवेशकों की खरीदारी जारी रही। निफ्टी मिडकैप 50 : +0.35% निफ्टी मिडकैप 100 : +0.31% निफ्टी स्मॉलकैप 100 : +0.42% इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों का भरोसा बाजार के विभिन्न वर्गों में बना हुआ है। आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर? विश्लेषकों के अनुसार, हालिया तेजी को समर्थन जरूर मिला है, लेकिन आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कई अहम कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, वैश्विक AI रैली, घरेलू वैल्यूएशन, मानसून की प्रगति और महंगाई के आंकड़े प्रमुख रहेंगे।
मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में बुधवार का कारोबार सुस्त और मिला-जुला रुख लेकर बंद हुआ। कारोबार के अंत में प्रमुख सूचकांक अलग-अलग दिशा में बंद हुए, जहां सेंसेक्स ने मामूली बढ़त दर्ज की, वहीं निफ्टी दबाव में लाल निशान पर बंद हुआ। सेंसेक्स में 64 अंकों की बढ़त बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 64.42 अंकों की हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ। यह 0.08 प्रतिशत की तेजी के साथ 73,983.18 के स्तर पर स्थिर रहा। दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स ने मामूली बढ़त के साथ निवेशकों को सीमित राहत दी। निफ्टी में गिरावट, लाल निशान में बंद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 इंडेक्स कमजोर रुख के साथ बंद हुआ। यह 27.15 अंकों की गिरावट यानी 0.12 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,214.95 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी में दिनभर बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे यह लाल निशान में फिसल गया। प्रमुख शेयरों में मिला-जुला प्रदर्शन बाजार में सेक्टोरल और स्टॉक आधारित मूवमेंट देखने को मिला। एफएमसीजी सेक्टर की दिग्गज कंपनी एचयूएल के शेयरों में लगभग 2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जिसने बाजार को कुछ सहारा दिया। वहीं, मेटल सेक्टर की प्रमुख कंपनी हिंडाल्को के शेयरों में 3 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों को नुकसान हुआ। रुपये में मजबूती विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ। रुपया 14 पैसे की बढ़त के साथ डॉलर के मुकाबले 95.27 पर बंद हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, रिजर्व बैंक की संभावित हस्तक्षेप नीति ने रुपये को सपोर्ट दिया। बाजार में सतर्कता का माहौल कुल मिलाकर, बाजार में निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना रहा। सेंसेक्स की मामूली बढ़त और निफ्टी की गिरावट यह संकेत देती है कि बाजार में चुनिंदा खरीदारी और बिकवाली का दबाव समान रूप से बना रहा।
भारतीय शेयर बाजार में बीता सप्ताह उतार-चढ़ाव भरा रहा। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और आरबीआई की नई आर्थिक अनुमान रिपोर्ट ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। इसके चलते प्रमुख सूचकांक लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए। लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट में बंद हुआ बाजार सप्ताह के अंत में बीएसई सेंसेक्स 532.40 अंक यानी 0.71 फीसदी गिरकर 74,243.34 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 में 181.05 अंकों यानी 0.76 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,366.70 के स्तर पर बंद हुआ। मिडकैप शेयरों में दबाव, स्मॉलकैप स्थिर निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स ने पिछले दो सप्ताह की तेजी का सिलसिला तोड़ते हुए 1.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की। इस दौरान सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे— PB Fintech ICICI Prudential AMC Patanjali Foods IREDA BHEL NALCO वहीं, मिडकैप श्रेणी में Vodafone Idea, Laurus Labs, NMDC और Federal Bank जैसे शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स लगभग सपाट बंद हुआ। IFCI, Himadri Speciality Chemical, JBM Auto, Tata Technologies और Ola Electric Mobility जैसे शेयरों में 8% से 16% तक की तेजी देखने को मिली। मीडिया सेक्टर बना सबसे बड़ा विजेता सेक्टोरल इंडेक्स में मिश्रित रुख देखने को मिला। गिरावट वाले सेक्टर निफ्टी कैपिटल मार्केट्स: -3.6% FMCG: -2% इंफ्रा: लगभग -2% रियल्टी: लगभग -2% मेटल: लगभग -2% बढ़त वाले सेक्टर निफ्टी मीडिया: +7% कंज्यूमर ड्यूरेबल्स: +1.7% PSU बैंक: +1.2% मीडिया इंडेक्स पूरे सप्ताह का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। बाजार पूंजीकरण में 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की गिरावट सप्ताह के दौरान बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गया। सबसे अधिक बाजार मूल्य गंवाने वाली कंपनियों में शामिल रहीं— रिलायंस इंडस्ट्रीज NTPC टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) भारती एयरटेल वहीं, टाइटन, इंफोसिस और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के मार्केट वैल्यू में बढ़ोतरी दर्ज की गई। लगातार तीसरे सप्ताह मजबूत हुआ रुपया भारतीय रुपया लगातार तीसरे सप्ताह मजबूती के साथ बंद हुआ। सप्ताह के अंत में डॉलर के मुकाबले रुपया 94.94 पर पहुंच गया, जबकि पिछले सप्ताह यह 95 के स्तर पर था। विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने सप्ताह भर में 31,114.47 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार खरीदारी जारी रखकर बाजार को सहारा दिया। निवेशकों की नजर अगले सप्ताह किन बातों पर रहेगी? कच्चे तेल की कीमतों की दिशा वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम विदेशी निवेशकों की गतिविधियां घरेलू आर्थिक संकेतक और कॉर्पोरेट नतीजे
घरेलू शेयर बाजार ने जून महीने की शुरुआत मजबूती के साथ की है। लगातार तीन कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद सोमवार को बाजार में शानदार रिकवरी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 400 अंकों से ज्यादा चढ़ गया, जबकि Nifty 50 23,600 के महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर कारोबार करता नजर आया। बाजार में इस तेजी के पीछे आईटी शेयरों में खरीदारी, बेहतर तिमाही नतीजे और निवेशकों की वापसी को प्रमुख वजह माना जा रहा है। शुरुआती कारोबार में मजबूत बढ़त पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 74,775.74 पर बंद हुआ था, जबकि सोमवार को यह 75,203 के स्तर पर खुला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 400 अंकों से ज्यादा उछलकर 75,000 के ऊपर पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी करीब 23,650 के स्तर तक चढ़ गया। विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले सप्ताह की भारी बिकवाली के बाद बाजार में वैल्यू बाइंग देखने को मिली, जिससे निवेशकों का भरोसा कुछ हद तक लौटा है। इंडिगो के शेयरों में सबसे बड़ी तेजी सोमवार के कारोबार में सबसे ज्यादा चर्चा InterGlobe Aviation के शेयरों की रही। इंडिगो के शेयरों में लगभग 5 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। हालांकि कंपनी ने तिमाही नतीजों में घाटा दर्ज किया है, लेकिन ब्रोकरेज फर्मों ने भविष्य की आय संभावनाओं और मजबूत यात्री मांग को देखते हुए सकारात्मक रुख बनाए रखा है। इसी वजह से निवेशकों ने इंडिगो के शेयरों में जोरदार खरीदारी की। इन शेयरों में भी दिखी मजबूती बाजार में तेजी के दौरान कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। प्रमुख बढ़त वाले शेयर: Asian Paints Infosys Tata Consultancy Services Tech Mahindra HCL Technologies Bajaj Finserv आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा मजबूती देखने को मिली और निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 3 प्रतिशत तक चढ़ा। बैंकिंग और कुछ ऊर्जा शेयर दबाव में जहां अधिकांश शेयर हरे निशान में रहे, वहीं कुछ बैंकिंग और ऊर्जा कंपनियों में कमजोरी देखने को मिली। गिरावट वाले प्रमुख शेयर: Kotak Mahindra Bank Axis Bank NTPC Limited Trent Limited मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी बाजार की तेजी सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में बढ़त निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में भी मजबूती इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों की दिलचस्पी व्यापक बाजार में भी बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता शेयर बाजार में तेजी के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल चिंता का विषय बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड 2 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 93 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की बढ़ती कीमतें आने वाले दिनों में भारतीय बाजार पर दबाव बना सकती हैं। अमेरिका-ईरान तनाव पर टिकी नजर वैश्विक बाजारों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव पर भी बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिए हैं कि उनका प्रशासन ईरान के साथ ऐसा समझौता चाहता है जिससे परमाणु हथियारों की संभावना खत्म हो सके। हालांकि फिलहाल निवेशक भू-राजनीतिक हालात को लेकर सतर्क बने हुए हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे।
BSE Sensex और NIFTY 50 ने सोमवार, 25 मई 2026 को शानदार शुरुआत की। ग्लोबल मार्केट से मिले मजबूत संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के चलते भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स 800 अंकों से ज्यादा उछल गया, जबकि निफ्टी 23,900 के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गया। शुरुआती कारोबार में बाजार ने पकड़ी रफ्तार कारोबार शुरू होते ही: BSE Sensex करीब 800 अंक चढ़कर 76,241.44 पर पहुंच गया NIFTY 50 लगभग 240 अंकों की बढ़त के साथ 23,959.20 के स्तर तक पहुंच गया बाजार में खरीदारी का माहौल खासतौर पर बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर में देखने को मिला। बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह क्या है? इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट मानी जा रही है। Brent Crude करीब 5.4% टूटकर 95-97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती शांति वार्ता की उम्मीदों ने बाजार का सेंटिमेंट मजबूत किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक: ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने पर सैद्धांतिक सहमति दे सकता है अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम करने की दिशा में भी बातचीत आगे बढ़ रही है इन खबरों से वैश्विक निवेशकों को राहत मिली है और जोखिम लेने की भावना मजबूत हुई है। एशियाई बाजारों में भी दिखी हरियाली तेल की कीमतों में गिरावट का असर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशियाई बाजारों में देखने को मिला। Nikkei 225 में 3% से ज्यादा तेजी ताइवान इंडेक्स करीब 2.9% मजबूत दक्षिण कोरिया का कोस्पी लगभग सपाट रहा वहीं तेल कीमतों में नरमी के चलते डॉलर की मांग भी घटी, जिससे भारतीय रुपया मजबूत होकर डॉलर के मुकाबले 95.42 के स्तर तक पहुंच गया। आगे बाजार की दिशा क्या हो सकती है? मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल बाजार का सेंटिमेंट सकारात्मक बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार: अगर निफ्टी 23,850 के ऊपर टिकता है, तो जल्द 24,000 से 24,200 तक पहुंच सकता है निफ्टी के लिए 23,600 मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है सेंसेक्स के लिए 75,100 अहम सपोर्ट लेवल रहेगा NIFTY Bank में भी तेजी जारी रह सकती है और यह 54,500 तक जा सकता है हालांकि निवेशकों को अमेरिका-ईरान वार्ता से जुड़ी खबरों पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। निवेशकों को क्या करना चाहिए? विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा तेजी में जल्दबाजी से बचना जरूरी है। मजबूत फंडामेंटल वाले सेक्टर्स और क्वालिटी स्टॉक्स में निवेश फिलहाल बेहतर रणनीति हो सकती है। साथ ही ग्लोबल घटनाक्रमों के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को जबरदस्त रिकवरी देखने को मिली। सोमवार को शुरुआती भारी गिरावट के बाद बाजार ने जिस तरह वापसी की थी, उसी तेजी को आज भी जारी रखा गया। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex करीब 400 अंकों की मजबूती के साथ 75,700 के ऊपर कारोबार करता नजर आया, जबकि NIFTY 50 100 अंकों की तेजी के साथ 23,750 के पार पहुंच गया। बाजार में चौतरफा खरीदारी के चलते निवेशकों का भरोसा एक बार फिर मजबूत होता दिखा। आईटी शेयरों में लगातार खरीदारी आज के कारोबार में सबसे ज्यादा मजबूती आईटी सेक्टर में देखने को मिली। Nifty IT इंडेक्स के शेयरों में जोरदार खरीदारी जारी रही। विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद निवेशक आईटी कंपनियों के लंबे समय के ग्रोथ आउटलुक को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं। इसी वजह से इस सेक्टर में लगातार निवेश बढ़ रहा है। हालांकि दूसरी तरफ Nifty Private Bank इंडेक्स पर दबाव बना रहा। प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली। एशियाई बाजारों का मिला-जुला रुख एशियाई बाजारों से मिले संकेत पूरी तरह सकारात्मक नहीं रहे। Hang Seng Index में 0.24% की बढ़त दर्ज की गई। Nikkei 225 में 0.64% की गिरावट रही। KOSPI में 3% से ज्यादा की बड़ी कमजोरी देखने को मिली। इसके बावजूद भारतीय बाजार ने मजबूती बनाए रखी। अमेरिकी बाजारों में मिला-जुला कारोबार बीती रात अमेरिकी बाजारों में भी मिश्रित रुख देखने को मिला। Dow Jones Industrial Average 160 अंक चढ़कर बंद हुआ। Nasdaq Composite में गिरावट रही। S&P 500 लगभग सपाट बंद हुआ। टेक शेयरों में दबाव और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता अमेरिकी बाजारों पर असर डालती दिखी। विदेशी निवेशकों की वापसी बनी बड़ा सहारा भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक संकेत विदेशी निवेशकों की वापसी मानी जा रही है। काफी समय से लगातार बिकवाली कर रहे Foreign Institutional Investors (FII/FPI) सोमवार को खरीदारी करते नजर आए। निवेशकों की स्थिति कैटेगरी सोमवार की स्थिति FII/FPI ₹1,329 करोड़ की खरीदारी DII ₹1,959 करोड़ की बिकवाली हालांकि पिछले 30 दिनों में विदेशी निवेशक अब भी बिकवाल बने हुए हैं, लेकिन हालिया खरीदारी ने बाजार को बड़ा समर्थन दिया है। निवेशकों की नजर अब किस पर? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में: वैश्विक बाजारों का रुख अमेरिकी फेडरल रिजर्व से जुड़े संकेत विदेशी निवेशकों का फ्लो आईटी और बैंकिंग सेक्टर की चाल भारतीय बाजार की दिशा तय करेंगे। फिलहाल बाजार में लौटती मजबूती ने निवेशकों का भरोसा जरूर बढ़ाया है।
शुरुआती तेजी के बाद बाजार में बिकवाली भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को शुरुआती बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं सकी। कारोबार के दौरान BSE Sensex दिन के उच्च स्तर से करीब 450 अंक नीचे फिसल गया, जबकि NIFTY 50 23,400 के अहम स्तर से नीचे आ गया। बाजार में गिरावट ऐसे समय आई है जब पिछले चार कारोबारी सत्रों में दोनों प्रमुख इंडेक्स लगभग 4 प्रतिशत तक कमजोर हो चुके हैं। क्यों लाल निशान में आया बाजार? मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक बाजार में कमजोरी के पीछे कई बड़े कारण हैं। 1. विदेशी निवेशकों की बिकवाली Foreign Institutional Investors (FII) लगातार मुनाफावसूली कर रहे हैं। विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और ऊंचे वैल्यूएशन के चलते विदेशी फंड्स फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं। 2. कमजोर मार्केट मोमेंटम हाल के दिनों में आई तेज तेजी के बाद बाजार में थकावट दिखाई देने लगी है। कई निवेशक अब प्रॉफिट बुकिंग कर रहे हैं, जिससे इंडेक्स दबाव में आ गए। ट्रेडर्स का कहना है कि जब तक NIFTY 50 23,400 के ऊपर मजबूत पकड़ नहीं बनाता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। 3. ग्लोबल संकेत भी बने दबाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मिलेजुले संकेतों और ब्याज दरों को लेकर जारी चिंताओं का असर भी भारतीय बाजार पर देखने को मिला। निवेशक फिलहाल अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित नीति और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर नजर बनाए हुए हैं। किन सेक्टर्स में ज्यादा दबाव? बाजार गिरावट के दौरान बैंकिंग, IT और ऑटो शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। वहीं कुछ डिफेंसिव सेक्टर्स में सीमित खरीदारी दिखाई दी। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों ने सतर्कता दिखाई। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में बाजार काफी संवेदनशील बना हुआ है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए। यदि वैश्विक संकेत और विदेशी निवेशकों का रुख कमजोर बना रहता है, तो आने वाले सत्रों में बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
कमजोर संकेतों के साथ खुल सकता है बाजार BSE Sensex और NIFTY 50 में शुक्रवार को दबाव देखने को मिल सकता है। ग्लोबल बाजारों में कमजोरी, अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। गिफ्ट निफ्टी करीब 102 अंकों की गिरावट के साथ 24,283 के आसपास कारोबार करता दिखा, जिससे घरेलू बाजार में कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी बाजार की टेंशन मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने दुनियाभर के बाजारों को प्रभावित किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया सैन्य घटनाओं के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। इसका असर कमोडिटी मार्केट पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कच्चा तेल 100 डॉलर के पार ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 101 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह चिंता की बात मानी जा रही है, क्योंकि इससे महंगाई और लागत दोनों बढ़ सकती हैं। सोने और डॉलर में भी तेजी अनिश्चितता बढ़ने के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं। सोने की कीमतों में तेजी देखी गई है, जबकि डॉलर इंडेक्स भी मजबूत बना हुआ है। ग्लोबल बाजारों का क्या रहा हाल? अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए। टेक शेयरों में मुनाफावसूली और भू-राजनीतिक तनाव का असर वॉल स्ट्रीट पर देखने को मिला। Dow Jones Industrial Average में 0.63% की गिरावट S&P 500 0.38% नीचे बंद NASDAQ Composite 0.13% टूटा एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखे। आज आएंगे इन बड़ी कंपनियों के नतीजे शुक्रवार को कई दिग्गज कंपनियां अपने चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे जारी करेंगी। बाजार की नजर खासतौर पर इन कंपनियों पर रहेगी: State Bank of India (SBI) Titan Company Hyundai Motor India Swiggy MCX India Urban Company इन शेयरों में दिख सकता है एक्शन BSE India कंपनी का चौथी तिमाही का मुनाफा सालाना आधार पर 61% से ज्यादा बढ़ा है, जिसके बाद शेयर चर्चा में रह सकता है। Lenskart मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी में बड़ी ब्लॉक डील हो सकती है। इससे शेयर बाजार में हलचल बढ़ सकती है। Cochin Shipyard कंपनी की सहयोगी इकाई को नया बड़ा ऑर्डर मिला है, जिससे निवेशकों की नजर इस शेयर पर बनी रहेगी। Britannia Industries एफएमसीजी कंपनी ने मजबूत तिमाही नतीजे पेश किए हैं। मुनाफे में 21% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। PNC Infratech कंपनी को लखनऊ विकास प्राधिकरण से बड़ा EPC प्रोजेक्ट मिला है, जिससे शेयर में तेजी देखने को मिल सकती है। निवेशकों को किन बातों पर रखनी होगी नजर? मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार आज का कारोबार काफी उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है। निवेशकों को अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर बनाए रखनी होगी।
ग्लोबल तनाव का भारतीय बाजार पर बड़ा असर BSE Sensex और NIFTY 50 में शुक्रवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसके चलते बाजार की शुरुआत ही भारी गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 553 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी 100 अंकों से ज्यादा फिसल गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 77,400 और निफ्टी 24,213 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बैंकिंग और ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली आज के कारोबार में बैंकिंग और ऑटो सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। HDFC Bank, ICICI Bank और Reliance Industries जैसे दिग्गज शेयरों में कमजोरी दर्ज की गई। विशेषज्ञों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली बाजार की गिरावट की बड़ी वजह बन रही है। हालांकि आईटी और फार्मा सेक्टर में कुछ खरीदारी देखने को मिली, लेकिन वह बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही। कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को तेज कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर महंगाई, रुपये और शेयर बाजार पर पड़ता है। यही वजह है कि निवेशकों में घबराहट बढ़ी हुई है। बाजार को अब किस बात का इंतजार? मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी रहेगी। अगर वैश्विक तनाव कम होता है, तो भारतीय बाजार और रुपये को राहत मिल सकती है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) और रिटेल निवेशक अभी भी बाजार में सक्रिय हैं, जिसकी वजह से मिडकैप और पावर सेक्टर के कुछ शेयर मजबूती दिखा रहे हैं।
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन मजबूती देखने को मिली। BSE Sensex और Nifty 50 दोनों बढ़त के साथ खुले। बाजार में आई इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदें मानी जा रही हैं। वैश्विक बाजार से मिले सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जिसकी वजह से निफ्टी 24,400 के करीब पहुंच गया, जबकि सेंसेक्स 78,300 के पार खुलने में सफल रहा। बाजार में क्यों दिखी हल्की अस्थिरता? शुरुआती तेजी के बाद बाजार में कुछ उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। GIFT Nifty के संकेतों और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने बाजार पर दबाव बनाया। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली भी चिंता का विषय बनी हुई है। बुधवार को FIIs ने 5,834 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 6,836 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को संभालने की कोशिश की। कच्चे तेल और ग्लोबल मार्केट का असर Brent Crude की कीमतें गिरकर करीब 101 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं। इससे भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों को राहत मिलती है क्योंकि इससे आयात बिल कम होने की संभावना रहती है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों की बात करें तो अमेरिकी बाजारों में भी शानदार तेजी दर्ज की गई। Nasdaq Composite S&P 500 दोनों इंडेक्स मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए। इसका असर एशियाई बाजारों में भी दिखा, जहां Nikkei 225 में 5% से ज्यादा की उछाल दर्ज की गई। डॉलर की मांग में कमी आने से भारतीय रुपये को भी मजबूती मिली है, जिससे बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिला। आगे बाजार की चाल कैसी रह सकती है? मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,500 का स्तर बेहद अहम माना जा रहा है। अगर इंडेक्स इस स्तर के ऊपर टिकने में सफल रहता है, तो बाजार 24,700 की तरफ बढ़ सकता है। हालांकि अगर निफ्टी 24,250 के सपोर्ट लेवल से नीचे फिसलता है, तो बाजार में दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में– बैंकिंग सेक्टर फार्मा सेक्टर कैपिटल मार्केट से जुड़े शेयर इनमें अच्छी गतिविधि देखने को मिल सकती है। अब निवेशकों की नजर पूरी तरह अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता और वैश्विक संकेतों पर बनी हुई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।