शेयर बाजार

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सपाट बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 77,186 पर ठहरा, निफ्टी में मामूली गिरावट

मुंबई, एजेंसियां। गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में कारोबार के बाद लगभग सपाट बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स 1 अंक की मामूली बढ़त के साथ 77,186 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 5 अंक फिसलकर 24,072 पर आ गया। दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन अंत में प्रमुख सूचकांकों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो रियल्टी शेयरों में सबसे अधिक बिकवाली दर्ज की गई, जबकि अन्य सेक्टरों में मिला-जुला रुख देखने को मिला।   वैश्विक बाजारों का हाल  वैश्विक बाजारों का असर भी घरेलू बाजार पर दिखाई दिया। एशियाई बाजारों में कारोबार मिश्रित रहा। हांगकांग का हैंगसेंग 1.33 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे। वहीं, एक दिन पहले अमेरिकी बाजारों में मजबूती रही थी। डाउ जोन्स, नैस्डैक और एसएंडपी 500 सभी बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है।   विदेशी निवेशकों (FII/FPI) ने गुरुवार को करीब 740 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 2,928 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को सहारा दिया। पिछले सात दिनों में डीआईआई ने 9,177 करोड़ रुपये और पिछले 30 दिनों में 41,028 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है। इसके मुकाबले एफआईआई लगातार बिकवाली करते रहे हैं।   बाजार विशेषज्ञों का मानना  बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों की नजर अब आगामी तिमाही नतीजों, वैश्विक आर्थिक संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। इन कारकों के आधार पर आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा तय हो सकती है। फिलहाल घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

abhishek singh जुलाई 16, 2026 0
Share Market
शेयर बाजार की मजबूत शुरुआत, सेंसेक्स 500 अंक से ज्यादा उछला; निफ्टी 24,200 के पार

मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार ने आज मजबूत शुरुआत की। कारोबार के शुरुआती सत्र में बीएसई सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक चढ़कर 77,500 के ऊपर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी 24,200 के स्तर को पार कर गया। बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में देखने को मिली।   वित्तीय शेयरों ने दिखाई मजबूती   बाजार की तेजी में HDFC Life, ICICI Prudential Life, ICICI Lombard और अन्य वित्तीय कंपनियों के शेयरों ने अहम भूमिका निभाई। पहली तिमाही के नतीजों की उम्मीद में निवेशकों ने इन शेयरों में जमकर खरीदारी की, जिससे बैंकिंग और फाइनेंशियल इंडेक्स में अच्छी बढ़त दर्ज हुई।   वैश्विक संकेतों से मिला समर्थन   विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में उम्मीद से कम महंगाई  के आंकड़े आने के बाद वैश्विक बाजारों का माहौल सकारात्मक हुआ। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की आशंकाएं कम हुईं और भारतीय बाजार को भी मजबूती मिली। हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर बनी हुई है।   आईटी शेयरों पर रहा दबाव   जहां बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में तेजी रही, वहीं कुछ आईटी शेयरों पर दबाव देखा गया। विदेशी टेक कंपनियों के कमजोर आउटलुक का असर भारतीय आईटी सेक्टर पर भी दिखाई दिया। इसके बावजूद व्यापक बाजार में खरीदारी के चलते प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते रहे।

abhishek singh जुलाई 15, 2026 0
Share Market
लाल निशान पर बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 561 अंक टूटा, निफ्टी 24,052 पर बंद

मुंबई, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। तीन कारोबारी सत्रों की तेजी के बाद घरेलू बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 561.46 अंक यानी 0.72 फीसदी टूटकर 77,054.94 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 158.95 अंक यानी 0.66 फीसदी की गिरावट के साथ 24,052.05 के स्तर पर आ गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 614.92 अंक तक फिसलकर 77,001.48 के निचले स्तर पर पहुंच गया।   वित्तीय, ऑटो और आईटी शेयरों में बिकवाली दिनभर के कारोबार में वित्तीय, ऑटो, रियल एस्टेट और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेक्टर के शेयरों पर सबसे अधिक दबाव रहा। सेंसेक्स में शामिल एचसीएल टेक के शेयर 4.42 फीसदी तक टूटे। इसके अलावा बजाज फिनसर्व, इंटरग्लोब एविएशन, भारतीय स्टेट बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा तथा लार्सन एंड टुब्रो के शेयरों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर भारती एयरटेल, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), सन फार्मा, टाटा स्टील, अडानी पोर्ट्स और इटरनल के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। सुरक्षित माने जाने वाले हेल्थकेयर, फार्मा, एफएमसीजी और चुनिंदा मेटल शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।   कच्चा तेल महंगा, रुपया कमजोर वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 4.26 फीसदी बढ़कर 86.85 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। वहीं, डॉलर के मुकाबले रुपया 54 पैसे टूटकर 96.22 (अस्थायी) के स्तर पर बंद हुआ। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने और आयात लागत बढ़ने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही जून में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई बढ़कर 9.87 फीसदी होने से भी बाजार का निवेशक भाव कमजोर रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को 3,062.27 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना रहा।

abhishek singh जुलाई 14, 2026 0
Stock market analyst viewing Nifty 50 growth forecast with Goldman Sachs report and Indian sector performance data.
निफ्टी 26,500 तक पहुंच सकता है! Goldman Sachs ने जताया भरोसा, इन सेक्टर्स और शेयरों में दिखाया दम

वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म Goldman Sachs भारतीय शेयर बाजार को लेकर आशावादी नजर आ रही है। फर्म का अनुमान है कि आने वाले समय में निफ्टी 50 इंडेक्स 26,500 अंक तक पहुंच सकता है, जो मौजूदा स्तर से करीब 9.5% की बढ़त दर्शाता है। ब्रोकरेज का मानना है कि घरेलू आर्थिक संकेतकों में सुधार और विदेशी निवेशकों की संभावित वापसी भारतीय बाजार को नई मजबूती दे सकती है। क्यों सकारात्मक है Goldman Sachs? Goldman Sachs के अनुसार भारत के बाजार के लिए कई प्रमुख संकेतक बेहतर हो रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से: कमोडिटी कीमतों में नरमी रुपये की अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में बेहतर कॉर्पोरेट नतीजों की उम्मीद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की संभावित वापसी ब्रोकरेज का कहना है कि इस वर्ष विदेशी निवेशकों की बिकवाली काफी रही है, लेकिन अब यह दौर समाप्त होने की ओर बढ़ सकता है। यदि घरेलू आर्थिक माहौल मजबूत बना रहता है, तो विदेशी निवेश फिर से भारतीय बाजार की ओर लौट सकते हैं। किन सेक्टर्स पर लगाया दांव? Goldman Sachs ने पूरे बाजार की बजाय कुछ चुनिंदा सेक्टर्स को बेहतर प्रदर्शन करने वाला बताया है। ब्रोकरेज की पसंद में शामिल हैं: बैंकिंग सेक्टर टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी ऑयल रिफाइनिंग एवं एनर्जी कंपनियां इसके अलावा फर्म ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे: मिडकैप की तुलना में लार्जकैप शेयरों को प्राथमिकता दें। कृषि आधारित कंपनियों के बजाय पावर यूटिलिटी कंपनियों पर ध्यान दें। निर्यात आधारित कंपनियों की जगह घरेलू कारोबार पर आधारित कंपनियों को चुनें। इन 15 शेयरों पर Goldman Sachs को भरोसा ब्रोकरेज ने ऐसे 15 बड़े शेयरों की सूची जारी की है, जिनमें बाजार की तेजी का सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना जताई गई है। इनमें शामिल हैं: रिलायंस इंडस्ट्रीज HDFC बैंक अडानी पावर अडानी एंटरप्राइजेज कोटक महिंद्रा बैंक NTPC हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (HAL) Eternal (पूर्व में Zomato) पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन अडानी ग्रीन एनर्जी इंटरग्लोब एविएशन (IndiGo) HDFC लाइफ इंश्योरेंस इंडियन होटल्स मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स MakeMyTrip वैल्यू स्टॉक्स की ओर बढ़ सकता है रुझान Goldman Sachs का मानना है कि यदि बाजार में रिकवरी जारी रहती है तो निवेशकों का रुझान महंगे ग्रोथ स्टॉक्स से हटकर उचित मूल्यांकन (Value Stocks) वाले शेयरों की ओर बढ़ सकता है। ऐसे में मजबूत बुनियादी आधार वाली बड़ी कंपनियां बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? ब्रोकरेज के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति में सुधार, स्थिर व्यापक आर्थिक संकेतक और विदेशी निवेश की वापसी बाजार को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव अल्पकाल में बाजार की चाल को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे माहौल में मजबूत फंडामेंटल वाले लार्जकैप शेयरों और बैंकिंग, टूरिज्म तथा एनर्जी जैसे सेक्टर्स पर नजर रखना निवेशकों के लिए बेहतर रणनीति हो सकती है।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
Pritam and Pedro
राजकुमार हिरानी के बेटे वीर हिरानी ने किया बॉलीवुड डेब्यू, बोले- अरशद वारसी मेरे सबसे बड़े मार्गदर्शक रहे

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक राजकुमार हिरानी के बेटे वीर हिरानी ने अभिनय की दुनिया में कदम रख दिया है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वेब सीरीज़ 'प्रीतम एंड पेड्रो' से की है। डेब्यू के बाद वीर ने अपने सह-कलाकार अरशद वारसी का विशेष रूप से धन्यवाद देते हुए कहा कि शूटिंग के दौरान उन्होंने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया और आत्मविश्वास बढ़ाया।   "अरशद सर ने हर सीन में मेरा साथ दिया"   वीर हिरानी ने कहा कि अभिनय की शुरुआत उनके लिए चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन अरशद वारसी ने उन्हें सहज महसूस कराया। उन्होंने बताया, "अरशद सर लगातार मुझे गाइड करते रहे। हर सीन के बाद समझाते थे कि क्या बेहतर किया जा सकता है। उनके साथ काम करना मेरे लिए किसी अभिनय स्कूल से कम नहीं था।"   राजकुमार हिरानी ने नहीं दिया कोई विशेष फायदा   वीर के डेब्यू को लेकर पहले ही राजकुमार हिरानी स्पष्ट कर चुके थे कि बेटे होने का उन्हें कोई विशेष लाभ नहीं मिला। उन्होंने वीर से दूसरे कलाकारों की तरह ऑडिशन दिलवाया और भूमिका योग्यता के आधार पर ही मिली। वीर ने भी कई ऑडिशन टेप रिकॉर्ड किए और चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही उन्हें यह मौका मिला।   विक्की कौशल ने भी की तारीफ   अभिनेता विक्की कौशल ने भी वीर हिरानी के अभिनय की सराहना की। उन्होंने कहा कि उन्होंने वीर को 'संजू' के सेट पर एक असिस्टेंट के रूप में काम करते देखा था और अब उन्हें मुख्य भूमिका निभाते देखना बेहद खुशी की बात है। विक्की ने कहा कि वीर ने अपने प्रदर्शन से साबित किया है कि उन्होंने मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है।   'प्रीतम एंड पेड्रो' को मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया   राजकुमार हिरानी की पहली OTT सीरीज़ 'प्रीतम एंड पेड्रो' को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। साइबर क्राइम और कॉमेडी पर आधारित इस सीरीज़ में अरशद वारसी, वीर हिरानी और विक्रांत मैसी अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। दर्शकों और समीक्षकों ने वीर के आत्मविश्वासपूर्ण अभिनय की भी सराहना की है।

abhishek singh जुलाई 14, 2026 0
Indian stock market screen showing Sensex and Nifty decline amid global tensions and investor selling.
शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 24,000 के करीब; जानें गिरावट की बड़ी वजहें

सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 600 से अधिक अंक टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी 24,000 के आसपास कारोबार करता नजर आया। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया। क्यों टूटा शेयर बाजार? मंगलवार को बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से महंगाई और आयात बिल बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका असर सीधे शेयर बाजार पर देखने को मिलता है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव बाजार पर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली का भी असर पड़ा। वैश्विक स्तर पर जोखिम बढ़ने के कारण विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे भारतीय बाजार में दबाव बढ़ा है। वैश्विक बाजारों से भी मिले कमजोर संकेत एशियाई और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कमजोरी का माहौल देखने को मिला। निवेशक फिलहाल वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। इसका असर भारतीय बाजार की कारोबारी शुरुआत से ही दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतें बनी चिंता विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विश्लेषकों के अनुसार, मौजूदा गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक कारकों से प्रभावित है। ऐसे समय में निवेशकों को घबराहट में निर्णय लेने के बजाय बाजार की दिशा और वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रखते हुए लंबी अवधि की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
Rising crude oil prices displayed alongside a falling stock market chart highlighting pressure on aviation and energy-related stocks.
Crude Oil Price Rise: महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में दबाव, इंडिगो, एशियन पेंट्स और BPCL समेत कई शेयर टूटे

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कच्चे तेल पर निर्भर कई कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली, जबकि तेल उत्पादन से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में मजबूती दर्ज की गई। क्यों बढ़ीं कच्चे तेल की कीमतें? अमेरिका और ईरान के बीच सप्ताहांत में बढ़े सैन्य तनाव के बाद वैश्विक बाजार में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude की कीमतों पर पड़ा, जो बढ़कर 79 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से कंपनियों की लागत बढ़ने और मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इन सेक्टरों के शेयरों में आई गिरावट कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सबसे ज्यादा असर उन कंपनियों पर पड़ा, जिनकी परिचालन लागत ईंधन या पेट्रोलियम उत्पादों पर अधिक निर्भर करती है। सोमवार के कारोबार में इन सेक्टरों के शेयरों में कमजोरी रही: एविएशन पेंट्स टायर ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) इन प्रमुख शेयरों में रही गिरावट शुरुआती कारोबार में कई बड़े शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे। इनमें शामिल हैं: IndiGo Asian Paints BPCL अन्य ऑयल मार्केटिंग और क्रूड-सेंसिटिव कंपनियां इनमें से कई शेयरों में करीब 2% तक की गिरावट दर्ज की गई। तेल उत्पादक कंपनियों को मिला फायदा जहां कच्चे तेल का महंगा होना कई कंपनियों के लिए चिंता का कारण बना, वहीं तेल उत्पादन और खोज से जुड़ी कंपनियों को इसका फायदा मिला। बाजार में ऐसी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली क्योंकि ऊंचे कच्चे तेल के दाम से उनकी आय और मुनाफे में सुधार की संभावना बढ़ जाती है। निवेशकों की बढ़ी चिंता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर केवल कुछ कंपनियों तक सीमित नहीं रहता। यदि कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर महंगाई, परिवहन लागत, कंपनियों के खर्च और देश के आयात बिल पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों का रुख सतर्क रहा और प्रमुख सूचकांकों पर दबाव देखने को मिला।  

surbhi जुलाई 13, 2026 0
Stock market screen showing Sensex and Nifty falling sharply amid rising crude oil prices and Middle East tensions.
Stock Market Today: सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 24,000 के करीब; इंडिगो समेत बैंकिंग और मेटल शेयरों में गिरावट

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत तेज गिरावट के साथ हुई। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से निवेशकों की चिंता बढ़ गई, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला। सुबह कारोबार के दौरान BSE Sensex 626.40 अंक यानी 0.81% गिरकर 76,942.99 पर पहुंच गया, जबकि NSE Nifty 50 184 अंक यानी 0.76% टूटकर 24,022.90 पर कारोबार करता दिखा। मध्य पूर्व तनाव से बाजार पर दबाव बाजार में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव रही। रिपोर्ट्स के अनुसार, सप्ताहांत में दोनों देशों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमले हुए, जिसके बाद ईरान ने एक बार फिर Strait of Hormuz को बंद करने का दावा किया। यह समुद्री मार्ग दुनिया में तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके बंद होने की आशंका से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। कच्चे तेल की कीमतों में 4% से ज्यादा उछाल तनाव बढ़ने के बाद: Brent Crude 4% से अधिक बढ़कर 79.12 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। WTI Crude भी 4% से ज्यादा चढ़कर 74.33 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करने लगा। भारत अपनी अधिकांश तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है। सभी सेक्टर लाल निशान में सोमवार सुबह बाजार में बिकवाली लगभग सभी सेक्टरों में देखने को मिली। सभी 16 सेक्टोरल इंडेक्स गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। सबसे ज्यादा दबाव इन सेक्टरों पर रहा: बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज मेटल मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में गिरावट बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले थोड़ी कम रही। वहीं India VIX, जिसे बाजार का "फियर इंडेक्स" कहा जाता है, 10% से ज्यादा उछल गया, जो निवेशकों की बढ़ती चिंता का संकेत है। इन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट सेंसेक्स के प्रमुख गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे: टाटा स्टील इंडिगो बजाज फाइनेंस BEL अल्ट्राटेक सीमेंट लार्सन एंड टुब्रो (L&T) टाइटन HDFC बैंक मारुति सुजुकी बजाज फिनसर्व इंडिगो के शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 3% तक टूट गए। आईटी शेयरों ने दिखाई मजबूती बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ आईटी शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इन शेयरों में बढ़त दर्ज की गई: TCS HCLTech Tech Mahindra NTPC विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर तिमाही नतीजों की उम्मीद से आईटी सेक्टर को समर्थन मिल रहा है। विशेषज्ञों की क्या राय है? बाजार विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे अहम संकेतक कच्चे तेल की कीमत है। उनका कहना है कि यदि Brent Crude 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहता है, तो बाजार पर दबाव सीमित रह सकता है। लेकिन यदि कीमतें 90 डॉलर के ऊपर जाती हैं, तो बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार खरीदारी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है, जिससे बाजार को कुछ हद तक सहारा मिल सकता है।  

surbhi जुलाई 13, 2026 0
Homemade crispy potato smileys served with tomato ketchup, perfect kids' snack for tiffin and tea time.
फ्रोजन स्माइली खरीदना छोड़ें, घर पर बनाएं कुरकुरी और स्वादिष्ट पोटैटो स्माइली

Monsoon & Kids Special Recipe: आसान सामग्री से तैयार करें बाजार जैसी क्रिस्पी पोटैटो स्माइली, बच्चों के टिफिन के लिए परफेक्ट स्नैक अगर आप रोजाना एक जैसा नाश्ता बनाकर बोर हो चुके हैं और बच्चों के लिए कुछ नया, स्वादिष्ट और मजेदार बनाना चाहते हैं, तो घर पर बनी पोटैटो स्माइली एक बेहतरीन विकल्प है। यह स्नैक बाहर से कुरकुरा और अंदर से बेहद मुलायम होता है। इसे बनाने के लिए महंगी या ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती और यह बच्चों के टिफिन, शाम की चाय या बर्थडे पार्टी के लिए भी शानदार विकल्प है। पोटैटो स्माइली बनाने के लिए आवश्यक सामग्री 3–4 मध्यम आकार के आलू 3–4 बड़े चम्मच चावल का आटा स्वादानुसार नमक 1 छोटा चम्मच घी या तेल ½ छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर (वैकल्पिक) ½ छोटा चम्मच चिली फ्लेक्स (वैकल्पिक) तलने के लिए तेल परोसने के लिए टोमैटो केचप, हरी चटनी या पसंदीदा डिप ऐसे बनाएं पोटैटो स्माइली सबसे पहले आलू को धोकर छील लें और छोटे टुकड़ों में काटकर उबाल लें। आलू पकने के बाद अतिरिक्त पानी पूरी तरह निकाल दें और उन्हें अच्छी तरह मैश करें। अब मैश किए हुए आलू में चावल का आटा, नमक, घी या तेल और अपनी पसंद के अनुसार काली मिर्च या चिली फ्लेक्स डालकर मुलायम आटा तैयार करें। आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें गोल आकार दें। स्ट्रॉ या किसी गोल चीज की मदद से दो आंखें बनाएं और चम्मच के किनारे से हल्की मुस्कान का आकार दें। मध्यम आंच पर गर्म तेल में स्माइलीज को दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलें। अतिरिक्त तेल निकालकर इन्हें टोमैटो केचप, हरी चटनी या अपनी पसंदीदा डिप के साथ गरमागरम परोसें। क्रिस्पी स्माइली बनाने का आसान टिप आलू का अतिरिक्त पानी पूरी तरह निकालें। चावल का आटा कुरकुरापन बढ़ाता है। आटा ज्यादा गीला न रखें। हमेशा मध्यम आंच पर तलें ताकि स्माइली बाहर से क्रिस्पी और अंदर से सॉफ्ट रहें। घर पर बनी पोटैटो स्माइली न सिर्फ स्वाद में बाजार जैसी होती हैं, बल्कि ताजगी और साफ-सफाई के लिहाज से भी बेहतर विकल्प साबित होती हैं।  

anmol जुलाई 10, 2026 0
Share Market
बढ़त के साथ बंद हुआ शेयर बाजार

मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में शानदार तेजी देखने को मिली। घरेलू शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 828 अंक की छलांग लगाकर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 50 सूचकांक 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर बंद हुआ। बाजार में चौतरफा खरीदारी का माहौल रहा और अधिकांश सेक्टरों में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की।   आईटी, बैंकिंग और रियल्टी शेयरों ने दिखाई मजबूती बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह देश की प्रमुख आईटी कंपनी टीसीएस के उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजे रहे। बेहतर प्रदर्शन से आईटी सेक्टर में निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में भी जोरदार खरीदारी देखने को मिली। व्यापक बाजार में भी सकारात्मक रुख रहा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांकों में करीब 1.5 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों की रुचि केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही।   वैश्विक संकेतों का भी मिला समर्थन भारतीय बाजार को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भी सकारात्मक संकेत मिले। एशियाई बाजारों में अधिकांश सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। जापान का टॉपिक्स, ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200, हांगकांग का हैंग सेंग और शंघाई कंपोजिट सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। हालांकि अमेरिकी और यूरोपीय वायदा बाजारों में हल्की कमजोरी देखने को मिली, लेकिन उसका असर भारतीय बाजार पर नहीं पड़ा।   विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कॉरपोरेट नतीजों, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और वैश्विक स्तर पर सकारात्मक माहौल के कारण बाजार में तेजी का रुख बना हुआ है। आने वाले दिनों में अन्य कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। फिलहाल निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है और बाजार में सकारात्मक धारणा कायम है।

abhishek singh जुलाई 10, 2026 0
TCS corporate branding highlights AI-driven growth strategy and potential changes to dividend policy for future investments.
AI की दौड़ में TCS बदल सकती है अपनी डिविडेंड रणनीति, भविष्य की ग्रोथ के लिए बढ़ाना पड़ सकता है निवेश

देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट लगातार हासिल कर रही है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नए AI प्रोजेक्ट जीतना ही पर्याप्त नहीं होगा। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में मजबूत बढ़त बनाए रखने के लिए कंपनी को तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और साझेदारियों पर कहीं अधिक निवेश करना पड़ सकता है। ऐसे में माना जा रहा है कि TCS को भविष्य में अपनी डिविडेंड नीति पर भी दोबारा विचार करना पड़ सकता है, ताकि कंपनी AI कारोबार को तेजी से विस्तार देने के लिए पर्याप्त पूंजी अपने पास रख सके। AI कारोबार बढ़ रहा, लेकिन अभी भी कुल आय का छोटा हिस्सा जून तिमाही के नतीजों में TCS ने AI कारोबार में अच्छी प्रगति दर्ज की। कंपनी का वार्षिक AI राजस्व लगभग 2.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछली तिमाही की तुलना में करीब 13.6 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, यह कंपनी के कुल वार्षिक राजस्व 30.5 अरब डॉलर का केवल करीब 8.5 प्रतिशत हिस्सा है। यानी AI तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन फिलहाल यह TCS के कुल कारोबार का सीमित हिस्सा ही बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI को कंपनी की कमाई का बड़ा आधार बनाने के लिए आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत होगी। AI में आगे रहने के लिए बढ़ानी होगी पूंजी बाजार विश्लेषकों के मुताबिक AI तकनीक में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केवल प्रोजेक्ट हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि नई तकनीकों, डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक साझेदारियों पर भी भारी खर्च करना पड़ेगा। यही कारण है कि TCS को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपनी पूंजी खर्च करने की रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। क्या बदल सकती है डिविडेंड नीति? TCS लंबे समय से अपने निवेशकों को आकर्षक डिविडेंड देने वाली कंपनियों में शामिल रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने 39,571 करोड़ रुपये का डिविडेंड वितरित किया, जबकि उसका अनुमानित फ्री कैश फ्लो 47,288 करोड़ रुपये रहा। पिछले तीन वित्त वर्षों में भी कंपनी ने अपने अधिकांश फ्री कैश फ्लो का बड़ा हिस्सा निवेशकों को डिविडेंड के रूप में लौटाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिर कारोबार वाली कंपनियों के लिए यह रणनीति उपयुक्त हो सकती है, लेकिन AI जैसी तेजी से बदलती तकनीक के दौर में भविष्य के विस्तार के लिए अधिक पूंजी बचाकर रखना भी जरूरी हो सकता है। कारोबार के कई संकेत अब भी मजबूत हालांकि, निवेश बढ़ाने की जरूरत के बीच TCS के कई कारोबारी संकेतक सकारात्मक बने हुए हैं। जून तिमाही में कंपनी ने 9.5 अरब डॉलर के नए ऑर्डर हासिल किए, जो ग्राहकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है। इसके अलावा कर्मचारी छोड़ने की दर 13.6 प्रतिशत पर स्थिर रही। कंपनी ने इसी तिमाही में 9,279 नए कर्मचारियों की भर्ती की, जिससे कुल कर्मचारियों की संख्या बढ़कर लगभग 5.9 लाख हो गई। इसके साथ ही TCS ने 12 रुपये प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड देने का भी ऐलान किया है। निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत? विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को केवल तिमाही मुनाफे या राजस्व पर ही नजर नहीं रखनी चाहिए, बल्कि यह भी देखना होगा कि TCS AI कारोबार को कितनी तेजी से बढ़ा पाती है। यदि कंपनी भविष्य की तकनीकों में आक्रामक निवेश करती है, तो आने वाले वर्षों में उसका कारोबार और मजबूत हो सकता है। हालांकि इसके लिए कंपनी को डिविडेंड और विकास के लिए होने वाले निवेश के बीच नया संतुलन बनाना पड़ सकता है। AI रणनीति पर रहेगी बाजार की नजर आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि TCS AI प्रोजेक्ट्स को कितनी तेजी से बड़े कारोबार में बदल पाती है। यदि कंपनी तकनीकी निवेश और वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करने में सफल रहती है, तो AI युग में उसकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मजबूत हो सकती है। वहीं, डिविडेंड नीति में किसी संभावित बदलाव पर भी बाजार की खास नजर बनी रहेगी।  

surbhi जुलाई 10, 2026 0
Investors monitor stock market screens as Sensex surges on strong TCS earnings and rally in IT stocks.
Sensex Today: सेंसेक्स 800 अंक उछला, TCS के शानदार नतीजों और IT शेयरों की तेजी से बाजार में लौटी रौनक

भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को मजबूत शुरुआत करते हुए निवेशकों का भरोसा फिर से बढ़ा दिया। वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद घरेलू बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला। आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी TCS के उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में राहत ने बाजार की तेजी को मजबूती दी। सुबह करीब 9:20 बजे बीएसई सेंसेक्स 676.12 अंक यानी 0.88 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,417.94 पर कारोबार कर रहा था। वहीं एनएसई निफ्टी 50 196.30 अंक यानी 0.82 प्रतिशत चढ़कर 24,159.10 के स्तर पर पहुंच गया। TCS के शानदार नतीजों से IT सेक्टर में जबरदस्त खरीदारी बाजार की तेजी का सबसे बड़ा कारण आईटी शेयरों में आई मजबूती रही। जून तिमाही के नतीजों में TCS ने बाजार की उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे पूरे आईटी सेक्टर में सकारात्मक माहौल बन गया। निफ्टी आईटी इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 3 प्रतिशत से अधिक उछल गया। Tech Mahindra, TCS, HCLTech और Infosys जैसे प्रमुख शेयरों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा L&T Technology Services और Coforge के शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। मुनाफे और ऑर्डर बुक दोनों में मजबूत प्रदर्शन TCS ने जून तिमाही में 13,349 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत अधिक है। कंपनी की आय बढ़कर 72,275 करोड़ रुपये पहुंच गई। इसके साथ ही कंपनी के बोर्ड ने 12 रुपये प्रति शेयर अंतरिम लाभांश देने का भी ऐलान किया। कंपनी की ऑर्डर बुक 9.5 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। वहीं AI कारोबार का वार्षिक रन रेट बढ़कर 2.6 अरब डॉलर हो गया, जो इस क्षेत्र में बढ़ती मांग का संकेत माना जा रहा है। 9 हजार से ज्यादा नई भर्तियों ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा TCS ने जून तिमाही के दौरान 9,279 नए कर्मचारियों की नियुक्ति की, जो पिछले एक साल से अधिक समय में सबसे ज्यादा तिमाही भर्ती है। इसे भविष्य की मांग को लेकर कंपनी के भरोसे का संकेत माना जा रहा है। कंपनी के सीईओ के. कृतिवासन ने भी आने वाली तिमाहियों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए। उनका कहना है कि मैन्युफैक्चरिंग और लाइफ साइंस सेक्टर में टेक्नोलॉजी खर्च बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि AI कारोबार के लिए खतरा नहीं बल्कि नए अवसर लेकर आ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों से भी मिली राहत बाजार को एक और बड़ी राहत कच्चे तेल की कीमतों से मिली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बावजूद ब्रेंट क्रूड करीब 76.52 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड लगभग 72.29 डॉलर प्रति बैरल पर बना रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चा तेल 80 से 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंचता तो भारत की अर्थव्यवस्था, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता था। फिलहाल कीमतों के नियंत्रण में रहने से निवेशकों की चिंता कम हुई है। लगभग सभी सेक्टरों में लौटी तेजी आईटी के अलावा बैंकिंग और अन्य सेक्टरों में भी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, प्राइवेट बैंक, पीएसयू बैंक, ऑटो, एफएमसीजी, मीडिया और रियल्टी इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी रही। वहीं बाजार की अस्थिरता मापने वाला इंडिया VIX 5 प्रतिशत से अधिक गिर गया, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर? विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार की दिशा दो अहम कारकों पर निर्भर करेगी। पहला, अमेरिका-ईरान के बीच भू-राजनीतिक घटनाक्रम और दूसरा, जून तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजे। TCS ने कमाई के सीजन की सकारात्मक शुरुआत की है। अब निवेशकों की नजर अन्य बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी, जो आने वाले दिनों में शेयर बाजार की अगली चाल तय कर सकते हैं। नोट: शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले किसी योग्य वित्तीय सलाहकार की सलाह अवश्य लें।  

surbhi जुलाई 10, 2026 0
Share Market
हरे निशान पर बंद हुआ शेयर बाजार

मुंबई, एजेंसियां। बुधवार की भारी गिरावट के बाद गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने दमदार वापसी की। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की खरीदारी के दम पर बाजार में आंशिक रौनक लौटी। कारोबार के अंत में बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 238.22 अंक यानी 0.31 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,741.82 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई का निफ्टी 80.75 अंक यानी 0.34 प्रतिशत चढ़कर 23,962.80 के स्तर पर पहुंच गया।   दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद हरे निशान में बंद हुआ बाजार कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने शानदार तेजी दिखाई और एक समय 823 अंक तक उछलकर 77,326.65 के उच्च स्तर पर पहुंच गया। हालांकि दिन के अंतिम चरण में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली, फिर भी बाजार बढ़त बनाए रखने में सफल रहा। इससे एक दिन पहले अमेरिका-ईरान तनाव के चलते सेंसेक्स 1,677 अंक और निफ्टी 516 अंक लुढ़क गया था, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई थी।   इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा तेजी सेंसेक्स पैक में सन फार्मा, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, इंटरग्लोब एविएशन, एटरनल और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर प्रमुख बढ़त वाले रहे। दूसरी ओर, इंफोसिस, मारुति सुजुकी, एनटीपीसी और एक्सिस बैंक के शेयर दबाव में रहे और गिरावट के साथ बंद हुए। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी लौटी, खासकर रियल्टी और पीएसयू बैंकिंग सेक्टर में निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी की।   एफआईआई खरीदारी और वैश्विक संकेतों से मिला समर्थन बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने एक दिन पहले 1,962.80 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की, जिससे बाजार को मजबूती मिली। वहीं, जापान के निक्केई, दक्षिण कोरिया के कोस्पी और चीन के शंघाई कंपोजिट जैसे एशियाई बाजार भी बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान तनाव और 78 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बने ब्रेंट क्रूड के दाम आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रमों पर सतर्क नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

abhishek singh जुलाई 9, 2026 0
Share Market
भारी गिरावट के बाद शेयर बाजार में जोरदार वापसी, सेंसेक्स 550 अंक से अधिक उछला; निफ्टी 24,000 के पार

मुंबई, एजेंसियां। पिछले कारोबारी सत्र की भारी बिकवाली के बाद गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में मजबूत रिकवरी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 550 अंकों से अधिक चढ़ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 24,000 के स्तर के ऊपर पहुंच गया। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों का भरोसा लौटता नजर आया।   एक दिन पहले आई थी बड़ी गिरावट   बुधवार को वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के दबाव में भारतीय शेयर बाजार में तेज बिकवाली हुई थी। सेंसेक्स और निफ्टी में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा था।   आज क्यों लौटी बाजार में तेजी?   विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और निचले स्तरों पर निवेशकों की खरीदारी के चलते बाजार में रिकवरी देखने को मिली। अधिकांश सेक्टरों में खरीदारी रही, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई।   आईटी शेयरों पर बना दबाव   हालांकि बाजार में तेजी रही, लेकिन आईटी सेक्टर अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई दिया। तिमाही नतीजों से पहले कुछ प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला, जिससे आईटी इंडेक्स पर असर पड़ा।   निवेशकों की नजर इन कारकों पर   बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर रहेगी। यही कारक बाजार की अगली दिशा तय कर सकते हैं।   आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?   विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहीं और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता बनी रही, तो बाजार में रिकवरी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है। हालांकि, निवेशकों को उतार-चढ़ाव के बीच सतर्क रहकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

abhishek singh जुलाई 9, 2026 0
Investors monitor Sensex and Nifty as Indian stock market rebounds despite US-Iran tensions and global uncertainty.
US-ईरान तनाव के बीच शेयर बाजार में जबरदस्त रिकवरी, सेंसेक्स 500 अंक उछला; जानिए क्यों लौटी निवेशकों की खरीदारी

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत वापसी की। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक चढ़ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 24,000 के स्तर के ऊपर पहुंच गया। इससे एक दिन पहले भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार में तीन महीनों की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट दर्ज की गई थी। सुबह करीब 9:40 बजे सेंसेक्स 516.15 अंक (0.67%) की बढ़त के साथ 77,019.75 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 139.90 अंक (0.59%) चढ़कर 24,021.95 पर पहुंच गया। बुधवार की गिरावट के बाद क्यों लौटा बाजार? बुधवार को अमेरिका की ओर से ईरान पर सैन्य कार्रवाई और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ गई थी। इससे वैश्विक बाजारों में बिकवाली देखने को मिली और भारतीय बाजार भी 2% से अधिक टूट गया। हालांकि गुरुवार को निवेशकों की धारणा में सुधार देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल हालात उतने गंभीर नहीं हैं, जितनी आशंका पहले जताई जा रही थी। इसी वजह से निवेशकों ने फिर से खरीदारी शुरू कर दी। कच्चे तेल की कीमत अभी चिंता का बड़ा कारण नहीं विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 79–80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। यह स्तर भारत के लिए चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन फिलहाल अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा संकट नहीं माना जा रहा। विश्लेषकों का कहना है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित नहीं होती और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर नहीं जातीं, तो भारतीय बाजार पर इसका बड़ा नकारात्मक असर पड़ने की संभावना कम है। विदेशी निवेशकों की खरीदारी से मिला बाजार को सहारा बाजार में मजबूती का एक बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार खरीदारी भी रही है। पिछले चार कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लगभग 3,954 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी आगे भी बनी रह सकती है। स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में भी दिखी तेजी गुरुवार की तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली। Nifty Smallcap 100 में 1% से अधिक की बढ़त Nifty Midcap 50 और Midcap 100 में लगभग 1% की तेजी India VIX में 7% से अधिक की गिरावट, जिससे बाजार में घबराहट कम होने के संकेत मिले किन सेक्टरों ने दिखाई सबसे ज्यादा मजबूती? गुरुवार के कारोबार में कई सेक्टरों में अच्छी खरीदारी दर्ज की गई। सबसे ज्यादा तेजी इन सेक्टरों में रही— कंज्यूमर ड्यूरेबल्स रियल्टी प्राइवेट बैंक फार्मा हेल्थकेयर ऑटो एफएमसीजी पीएसयू बैंक वहीं आईटी सेक्टर दबाव में रहा। निवेशकों ने TCS के तिमाही नतीजों से पहले मुनाफावसूली की, जिससे Infosys, HCLTech, TCS और Tech Mahindra के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स के टॉप गेनर्स और लूजर्स शुरुआती कारोबार में Eternal सबसे ज्यादा बढ़त वाला शेयर रहा। इसके अलावा Sun Pharma, Titan, Bharti Airtel, ICICI Bank, Asian Paints, Larsen & Toubro, HDFC Bank, Power Grid, UltraTech Cement और BEL में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई। दूसरी ओर Infosys में सबसे ज्यादा गिरावट रही, जबकि HCLTech, TCS और Tech Mahindra भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे। रुपये में स्थिरता से भी मिला समर्थन भारतीय रुपया शुरुआती कारोबार में 95.55 प्रति डॉलर के स्तर पर लगभग स्थिर रहा। मुद्रा बाजार में स्थिरता ने भी निवेशकों के भरोसे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। क्या कहते हैं बाजार के जानकार? विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी रहेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव और नहीं बढ़ता तथा तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में आगे भी रिकवरी जारी रह सकती है।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
Share Market
लाल निशान पर बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 1,677 अंक टूटा, निफ्टी 23,900 के नीचे

मुंबई, एजेंसियां। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के साथ युद्धविराम समझौते को समाप्त घोषित किए जाने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंकाओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसका असर घरेलू बाजार पर भी दिखा और कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 1,677 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 581 अंक टूटकर 23,900 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद हुआ।   सभी प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली बाजार में चौतरफा बिकवाली का माहौल रहा। सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में बंद हुए। बैंकिंग, एफएमसीजी और ऑयल एंड गैस सेक्टर में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी करीब दो प्रतिशत तक लुढ़क गए। प्रमुख कंपनियों में जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, मारुति सुजुकी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, कोटक महिंद्रा बैंक और भारती एयरटेल के शेयरों में उल्लेखनीय गिरावट रही।   निवेशकों को भारी नुकसान बाजार में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों की करीब 10 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति घट गई। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर लगभग 470 लाख करोड़ रुपये रह गया। वहीं, बाजार में उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाला इंडिया वीआईएक्स सूचकांक 27 प्रतिशत उछल गया, जो निवेशकों के बीच बढ़ी अनिश्चितता और डर को दर्शाता है।   गिरावट की प्रमुख वजहें विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड करीब पांच प्रतिशत बढ़कर 78 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। साथ ही यूरोप और एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ।   विशेषज्ञों की सलाह बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकाल में वैश्विक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे। हालांकि, भारत के मजबूत आर्थिक आधार और दीर्घकालिक निवेश संभावनाओं को देखते हुए निवेशकों को घबराकर निर्णय लेने के बजाय सतर्कता के साथ लंबी अवधि की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
America-Pakistan News: अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट ने अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम (सीजफायर) में पाकिस्तान की संभावित भूमिका पर सवाल उठाते हुए इस्लामाबाद की तीखी आलोचना की है। उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद और धार्मिक उत्पीड़न से जोड़ते हु
अमेरिकी सीनेटर का पाकिस्तान पर हमला, बोले- जहां छिपा था लादेन, वह शांति का मध्यस्थ नहीं बन सकता

America-Pakistan News: अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट ने अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम (सीजफायर) में पाकिस्तान की संभावित भूमिका पर सवाल उठाते हुए इस्लामाबाद की तीखी आलोचना की है। उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद और धार्मिक उत्पीड़न से जोड़ते हुए कहा कि दुनिया को यह नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान का अतीत क्या रहा है। शहबाज शरीफ की ईरान यात्रा पर उठाए सवाल सीनेटर रिक स्कॉट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को श्रद्धांजलि देते नजर आ रहे हैं। वीडियो में शहबाज शरीफ खामेनेई को एक महान नेता बताते दिखाई देते हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए स्कॉट ने कहा कि पाकिस्तान की यह भूमिका केवल दिखावा है और इसे शांति प्रक्रिया का विश्वसनीय मध्यस्थ नहीं माना जा सकता। "दुनिया याद रखे पाकिस्तान की असली पहचान" रिक स्कॉट ने कहा कि दुनिया को यह नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान वही देश है, जहां अल-कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन वर्षों तक छिपा रहा। उन्होंने पाकिस्तान पर धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर ईसाइयों के खिलाफ ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसे रिकॉर्ड वाला देश क्षेत्रीय शांति का नेतृत्व करने का दावा नहीं कर सकता। मध्यस्थता की भूमिका पर भी सवाल अमेरिकी सीनेटर ने कहा कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनने के योग्य नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस्लामाबाद की नीतियां उसे निष्पक्ष भूमिका निभाने से रोकती हैं। स्कॉट ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका पाकिस्तान की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है और उसके हर कदम का आकलन किया जा रहा है। ईरान के घटनाक्रम के बीच आया बयान रिक स्कॉट का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव तथा क्षेत्रीय कूटनीतिक गतिविधियों को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।  

Deepshikha जुलाई 8, 2026 0
Stock market display showing Sensex and Nifty falling sharply amid global market uncertainty and rising crude oil prices.
Share Market Today: सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 24,250 के नीचे; जानिए बाजार में गिरावट की 3 बड़ी वजहें

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को तेज गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 600 अंकों से अधिक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 24,250 के नीचे फिसल गया। हाल के सप्ताहों में आई तेजी के बाद निवेशकों ने एक बार फिर सतर्क रुख अपनाया है। विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में गिरावट की मुख्य वजहें अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली हैं। 1. अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी कच्चे तेल की कीमतें बाजार पर सबसे बड़ा असर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का पड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 2 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 76 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका असर शेयर बाजार पर भी दिखाई देता है। 2. वैश्विक टेक शेयरों में बिकवाली अमेरिकी शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। Nasdaq Composite में 1.16% की गिरावट S&P 500 में 0.45% की गिरावट Dow Jones में 0.25% की कमजोरी सेमीकंडक्टर और AI से जुड़े शेयरों में बिकवाली का असर एशियाई बाजारों और भारतीय बाजार पर भी पड़ा। 3. AI सेक्टर को लेकर निवेशकों की चिंता दक्षिण कोरिया की Samsung Electronics ने मजबूत तिमाही नतीजों का अनुमान दिया, लेकिन इसके बावजूद निवेशकों ने मुनाफावसूली की। वहीं, चीन के AI स्टार्टअप DeepSeek द्वारा अपना AI चिप विकसित करने की खबर के बाद वैश्विक चिप कंपनियों के भविष्य को लेकर भी नई चिंताएं बढ़ गई हैं। इन घटनाओं ने AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर के शेयरों में दबाव बढ़ाया, जिसका असर वैश्विक निवेशकों की धारणा पर भी पड़ा। FII निवेश बना सकारात्मक संकेत गिरावट के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी भारतीय बाजार के लिए राहत की खबर मानी जा रही है। मंगलवार को: FII ने ₹393.19 करोड़ के शेयर खरीदे। DII ने ₹383.43 करोड़ के शेयर बेचे। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो विदेशी निवेश भारतीय बाजार का समर्थन जारी रख सकते हैं। निवेशकों की नजर किन बातों पर रहेगी? आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में तीन प्रमुख कारक अहम रहेंगे— अमेरिका-ईरान तनाव की आगे की स्थिति कच्चे तेल की कीमतों का रुख जून तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे इन कारकों को लेकर स्पष्टता आने तक भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना जताई जा रही है। नोट: शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले वित्तीय सलाहकार से परामर्श करना उचित है।  

surbhi जुलाई 8, 2026 0
Share Market
गिरावट के साथ  बंद हुआ शेयर बाजार

मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। निवेशकों की सतर्कता और मेटल तथा रियल्टी सेक्टर में हुई बिकवाली के कारण प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 104 अंक गिरकर 78,181 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 32 अंक कमजोर होकर 24,399 के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन अंतिम कारोबारी घंटों में बिकवाली का दबाव बढ़ने से बाजार संभल नहीं सका।   मेटल और रियल्टी शेयरों पर दबाव मंगलवार के कारोबार में मेटल और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत और मुनाफावसूली के चलते निवेशकों ने इन सेक्टरों में बिकवाली की। इसके विपरीत IT और कंज्यूमर ड्यूरेबल कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बनी रही, जिससे बाजार को कुछ हद तक सहारा मिला। आईटी शेयरों में निवेशकों की रुचि बढ़ने से इस सेक्टर ने बेहतर प्रदर्शन किया।   बाजार में दिनभर रहा उतार-चढ़ाव कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में कई बार तेजी और गिरावट का दौर देखने को मिला। हालांकि दिन के अंत में बाजार मामूली नुकसान के साथ बंद हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल वैश्विक आर्थिक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और आगामी कॉर्पोरेट तिमाही नतीजों पर नजर बनाए हुए हैं। इसी कारण बाजार में सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिल रहा है।   एक दिन पहले बाजार में रही थी जोरदार तेजी गौरतलब है कि सोमवार, 6 जुलाई को शेयर बाजार ने शानदार बढ़त दर्ज की थी। उस दिन सेंसेक्स 521 अंक चढ़कर 78,285 और निफ्टी 160 अंक की तेजी के साथ 24,430 पर बंद हुआ था। लेकिन मंगलवार को मुनाफावसूली और चुनिंदा सेक्टरों में बिकवाली के चलते बाजार की रफ्तार थम गई। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक संकेत और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करेंगे।

abhishek singh जुलाई 7, 2026 0
Trent Ltd stock price falls sharply after Q1 business update amid weak revenue growth concerns.
Trent के शेयरों में 10% तक की बड़ी गिरावट, Q1 बिजनेस अपडेट से निवेशक क्यों हुए निराश?

टाटा समूह की रिटेल कंपनी Trent Ltd के शेयरों में मंगलवार को शुरुआती कारोबार के दौरान तेज गिरावट देखने को मिली। कंपनी के पहली तिमाही (Q1) के बिजनेस अपडेट के बाद निवेशकों की निराशा साफ नजर आई, जिसके चलते शेयर करीब 10% टूटकर 3,010 रुपये के इंट्राडे लो तक पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ रिकवरी आई और शेयर लगभग 3,052 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखा। क्यों टूटा Trent का शेयर? शेयर में गिरावट की सबसे बड़ी वजह कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ रही। जून तिमाही में Trent की स्टैंडअलोन आय में 19% सालाना वृद्धि दर्ज की गई, जो बाजार और विश्लेषकों की उम्मीदों से कम रही। विशेषज्ञों के अनुसार, कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ लगातार पांचवीं तिमाही 20% से नीचे रही है। इससे यह चिंता बढ़ी है कि क्या Trent की तेज विकास दर अब धीमी पड़ रही है। स्टोर विस्तार भी उम्मीद से कमजोर कंपनी ने जून तिमाही के दौरान कुल 20 नए स्टोर खोले। इनमें: 1 Westside स्टोर 19 Zudio स्टोर विश्लेषकों का मानना है कि Westside स्टोरों की धीमी बढ़ोतरी और राजस्व प्रति वर्ग फुट (Revenue Per Square Foot) में अपेक्षित सुधार न होना निवेशकों की चिंता का कारण बना। ब्रोकरेज हाउस की क्या है राय? Q1 अपडेट के बाद अलग-अलग ब्रोकरेज फर्मों ने Trent को लेकर अपनी राय जारी की है। Macquarie ने 'Outperform' रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹3,600 का लक्ष्य मूल्य दिया, लेकिन समान स्टोर बिक्री (Same-Store Sales Growth) में नरमी की आशंका जताई। Morgan Stanley ने 'Overweight' रेटिंग और ₹3,151 का टारगेट बनाए रखा। फर्म का कहना है कि रेवेन्यू ग्रोथ उसके अनुमान से कम रही है, जिससे निकट अवधि में शेयर पर दबाव रह सकता है। Bernstein ने भी 'Outperform' रेटिंग और ₹3,500 का लक्ष्य रखा, लेकिन शेयर में अल्पकालिक नकारात्मक प्रतिक्रिया की संभावना जताई। Citi सबसे ज्यादा सतर्क नजर आया। उसने 'Sell' रेटिंग के साथ ₹2,733 का लक्ष्य मूल्य बरकरार रखा। फर्म ने बढ़ती प्रतिस्पर्धा, कमजोर राजस्व प्रति वर्ग फुट और टियर-2 एवं टियर-3 शहरों में विस्तार से जुड़ी चुनौतियों को प्रमुख जोखिम बताया। निवेशकों की नजर आगे की रणनीति पर बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में Trent के लिए समान स्टोर बिक्री, नए स्टोरों का प्रदर्शन और उपभोक्ता मांग में सुधार अहम भूमिका निभाएंगे। यदि शहरी खपत में मजबूती आती है तो कंपनी की विकास दर दोबारा तेज हो सकती है।  

surbhi जुलाई 7, 2026 0
IT sector stocks surge on Indian stock market ahead of Q1 earnings with Nifty IT Index gaining sharply.
Q1 नतीजों की उम्मीद से IT शेयरों में जोरदार तेजी, Nifty IT इंडेक्स 2% उछला

पहली तिमाही (Q1) के वित्तीय नतीजों से पहले आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। मंगलवार को कारोबार की शुरुआत में Nifty IT Index करीब 2% की तेजी के साथ कारोबार करता दिखा। इस तेजी की अगुवाई TCS, Infosys, HCLTech, Wipro और Tech Mahindra जैसे दिग्गज आईटी शेयरों ने की। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को कंपनियों के तिमाही नतीजों और प्रबंधन की भविष्य की रणनीति से सकारात्मक संकेत मिलने की उम्मीद है, जिसके चलते आईटी सेक्टर में खरीदारी बढ़ी है। इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा तेजी शुरुआती कारोबार में प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में 2% से 4% तक की बढ़त दर्ज की गई। तेजी वाले प्रमुख शेयर: TCS Infosys HCLTech Tech Mahindra Wipro Coforge LTIMindtree Newgen Software हालांकि, Fractal Analytics और Zensar Technologies के शेयरों में हल्की गिरावट देखने को मिली। Q1 रिजल्ट से पहले क्यों बढ़ा उत्साह? विश्लेषकों के अनुसार, जून तिमाही के नतीजों से पहले बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है। निवेशकों की नजर खास तौर पर इन बिंदुओं पर रहेगी: वित्त वर्ष 2027 (FY27) के लिए कंपनियों का आउटलुक ग्राहकों की आईटी खर्च (Client Spending) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रणनीति मार्जिन और नए ऑर्डर यही संकेत आगे आईटी शेयरों की दिशा तय कर सकते हैं। कमजोर रह सकती है जून तिमाही की कमाई हालांकि, कई ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि आईटी कंपनियों के लिए जून तिमाही बहुत मजबूत नहीं रहने वाली है। विश्लेषकों के मुताबिक इसके पीछे प्रमुख कारण हैं: वैश्विक स्तर पर कमजोर आईटी खर्च ग्राहकों द्वारा निवेश संबंधी फैसलों में देरी आर्थिक अनिश्चितता वेतन वृद्धि और पुनर्गठन (Restructuring) की लागत AI में बढ़ता निवेश इन कारणों से कंपनियों की आय और मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है। किन कंपनियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद? ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के अनुसार, बड़ी आईटी कंपनियों में Infosys और Tech Mahindra के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं मिड-कैप आईटी कंपनियों में Hexaware से अच्छे नतीजों की संभावना बताई गई है। शेयर बाजार में भी लगातार पांचवें दिन तेजी आईटी शेयरों में खरीदारी के साथ घरेलू शेयर बाजार में भी लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बढ़त देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में Nifty 50 और Sensex दोनों ही हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। स्थिर कच्चे तेल की कीमतों और बेहतर बाजार धारणा ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया।  

surbhi जुलाई 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0