फाइनेंस

रूस से भारत का कच्चा तेल आयात रिकॉर्ड स्तर पर

रूस से भारत का कच्चा तेल आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जुलाई में 55% से ज्यादा रही हिस्सेदारी

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
रूस से भारत के रिकॉर्ड कच्चे तेल आयात और ऊर्जा आपूर्ति
भारत के कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत से ज्यादा

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत ने जुलाई 2026 में रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाकर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जुलाई में रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात करीब 28 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया, जो भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 55 प्रतिशत से अधिक है। रूस लगातार दूसरे महीने भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

 

रूस से तेल खरीद में तेज बढ़ोतरी

 

 

भारत की रिफाइनरी कंपनियों ने जुलाई में रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई। पश्चिम एशिया में आपूर्ति संबंधी जोखिम और समुद्री मार्गों को लेकर अनिश्चितता के बीच रूसी तेल ने भारत के लिए वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

रूस से बढ़े आयात के कारण जुलाई में भारतीय कच्चे तेल आयात में उसकी हिस्सेदारी आधे से भी ज्यादा हो गई। यह आंकड़ा ऐसे समय आया है जब भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अलग-अलग देशों से आपूर्ति बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।

 

अमेरिका के दबाव के बीच बढ़ी खरीद

 

 

रूस से तेल खरीद बढ़ने का मुद्दा भारत और अमेरिका के बीच भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। अमेरिकी सीनेट में रूस से जुड़े प्रतिबंधों को कड़ा करने वाले प्रस्ताव पर आगे बढ़ने के बाद भारतीय तेल आयात को लेकर दबाव बढ़ा है।

 

प्रस्तावित अमेरिकी कदमों में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की संभावना भी शामिल है। ऐसे में रूसी तेल की रिकॉर्ड खरीद भारत की ऊर्जा नीति और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

 

भारत के लिए रूस क्यों महत्वपूर्ण है?

 

 

भारत के लिए रूसी कच्चा तेल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे देश की रिफाइनरी कंपनियों को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कच्चा तेल हासिल करने और घरेलू ईंधन जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है।

 

हालांकि, भारत एक ही देश पर अत्यधिक निर्भरता से बचने के लिए अपने तेल आयात स्रोतों में विविधता भी बढ़ा रहा है। सरकार के अनुसार भारत अब 41 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है, जबकि पहले यह संख्या 27 थी।

 

आगे अमेरिका-भारत संबंधों पर रहेगी नजर

 

 

रूसी तेल की खरीद आने वाले दिनों में भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों का एक अहम मुद्दा बनी रह सकती है। यदि अमेरिका रूस से तेल खरीद पर अतिरिक्त प्रतिबंध या शुल्क लागू करता है, तो भारतीय रिफाइनरी कंपनियों की खरीद रणनीति पर असर पड़ सकता है।

 

फिलहाल भारत का रुख ऊर्जा सुरक्षा और कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। आने वाले महीनों में रूस से तेल आयात, वैश्विक कच्चे तेल की कीमत और अमेरिकी प्रतिबंध नीति पर बाजार की नजर बनी रहेगी।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

फाइनेंस

View more
रूस से भारत के रिकॉर्ड कच्चे तेल आयात और ऊर्जा आपूर्ति
रूस से भारत का कच्चा तेल आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जुलाई में 55% से ज्यादा रही हिस्सेदारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत ने जुलाई 2026 में रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाकर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जुलाई में रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात करीब 28 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया, जो भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 55 प्रतिशत से अधिक है। रूस लगातार दूसरे महीने भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।   रूस से तेल खरीद में तेज बढ़ोतरी     भारत की रिफाइनरी कंपनियों ने जुलाई में रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई। पश्चिम एशिया में आपूर्ति संबंधी जोखिम और समुद्री मार्गों को लेकर अनिश्चितता के बीच रूसी तेल ने भारत के लिए वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।   रूस से बढ़े आयात के कारण जुलाई में भारतीय कच्चे तेल आयात में उसकी हिस्सेदारी आधे से भी ज्यादा हो गई। यह आंकड़ा ऐसे समय आया है जब भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अलग-अलग देशों से आपूर्ति बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।   अमेरिका के दबाव के बीच बढ़ी खरीद     रूस से तेल खरीद बढ़ने का मुद्दा भारत और अमेरिका के बीच भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। अमेरिकी सीनेट में रूस से जुड़े प्रतिबंधों को कड़ा करने वाले प्रस्ताव पर आगे बढ़ने के बाद भारतीय तेल आयात को लेकर दबाव बढ़ा है।   प्रस्तावित अमेरिकी कदमों में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की संभावना भी शामिल है। ऐसे में रूसी तेल की रिकॉर्ड खरीद भारत की ऊर्जा नीति और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।   भारत के लिए रूस क्यों महत्वपूर्ण है?     भारत के लिए रूसी कच्चा तेल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे देश की रिफाइनरी कंपनियों को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कच्चा तेल हासिल करने और घरेलू ईंधन जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है।   हालांकि, भारत एक ही देश पर अत्यधिक निर्भरता से बचने के लिए अपने तेल आयात स्रोतों में विविधता भी बढ़ा रहा है। सरकार के अनुसार भारत अब 41 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है, जबकि पहले यह संख्या 27 थी।   आगे अमेरिका-भारत संबंधों पर रहेगी नजर     रूसी तेल की खरीद आने वाले दिनों में भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों का एक अहम मुद्दा बनी रह सकती है। यदि अमेरिका रूस से तेल खरीद पर अतिरिक्त प्रतिबंध या शुल्क लागू करता है, तो भारतीय रिफाइनरी कंपनियों की खरीद रणनीति पर असर पड़ सकता है।   फिलहाल भारत का रुख ऊर्जा सुरक्षा और कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। आने वाले महीनों में रूस से तेल आयात, वैश्विक कच्चे तेल की कीमत और अमेरिकी प्रतिबंध नीति पर बाजार की नजर बनी रहेगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
ICICI Prudential

ICICI Prudential AMC खरीदेगी ICICI Securities का PMS कारोबार, बोर्ड ने दी मंजूरी

कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर की मजबूती के बीच भारतीय रुपये में गिरावट

कच्चे तेल में तेजी और डॉलर की मजबूती से रुपया 8 पैसे कमजोर, 95.29 प्रति डॉलर पर बंद

LEAP India and Technocraft IPO

LEAP India और Technocraft IPO में मुकाबला, निवेशकों के सामने निवेश का विकल्प

Crude Oil Price
अमेरिका-ईरान वार्ता में गतिरोध से कच्चा तेल महंगा, ब्रेंट 88 डॉलर के करीब पहुंचा

नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे को लेकर चल रही बातचीत में प्रगति नहीं होने से वैश्विक कच्चे तेल बाजार में चिंता बढ़ गई है। वार्ता में गतिरोध के बीच तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली और ब्रेंट क्रूड 88 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। बाजार में आशंका है कि दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।   वार्ता में प्रगति नहीं होने से बढ़ी चिंता   अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत लंबे समय से चल रही है। बाजार की उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच किसी समझौते से ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील मिल सकती है और वैश्विक बाजार में ईरानी तेल की आपूर्ति बढ़ सकती है।   हालांकि, वार्ता में अपेक्षित प्रगति नहीं होने से यह संभावना कमजोर हुई है। निवेशकों ने संभावित आपूर्ति जोखिम को देखते हुए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के साथ प्रतिक्रिया दी है।   होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी नजर   तेल बाजार में सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है और खाड़ी क्षेत्र से होने वाले तेल निर्यात के लिए बेहद अहम है।   अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की स्थिति में इस समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर डाल सकता है। इसी आशंका के कारण बाजार में जोखिम प्रीमियम बढ़ सकता है।   भारत पर पड़ सकता है सीधा असर   कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी भारत के लिए चिंता बढ़ा सकती है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल और डॉलर की मांग बढ़ सकती है।   महंगे कच्चे तेल का असर रुपये पर भी पड़ सकता है। अगर रुपया कमजोर होता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो घरेलू अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पैदा हो सकता है।   आगे तेल बाजार की दिशा पर नजर   अब बाजार की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता की अगली गतिविधियों और पश्चिम एशिया की स्थिति पर है। अगर दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है तो तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। वहीं बातचीत पूरी तरह विफल होने या क्षेत्रीय तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल में और तेजी देखने को मिल सकती है।   भारत समेत दुनिया भर के बाजारों के लिए आने वाले दिनों में ब्रेंट क्रूड, डॉलर की चाल और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम महत्वपूर्ण संकेतक बने रहेंगे।

anjali kumari अगस्त 11, 2026 0
Gold Rate Today

Gold Price: सोने की कीमत में जोरदार उछाल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भाव 4,400 डॉलर के पार

Stock Market

Stock Market: शेयर बाजार में गिरावट के साथ शुरुआत, सेंसेक्स 250 अंक से ज्यादा टूटा; निफ्टी 24,550 के नीचे

एलन मस्क की संपत्ति और दुनिया के सबसे अमीर 1 प्रतिशत लोगों की बढ़ती दौलत

मस्क की संपत्ति में बेतहाशा इजाफा, 1% अमीरों की दौलत 34 लाख करोड़ डॉलर बढ़ी

Stock Market
Stock Market: शेयर बाजार में हल्की तेजी, सेंसेक्स 178 अंक चढ़ा; निफ्टी 24,600 के पार

नई दिल्ली, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को शुरुआती कारोबार में हल्की तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। बेहतर पहली तिमाही के नतीजों, मजबूत घरेलू मांग और विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार को सहारा मिला। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार पर दबाव बनाए रखा।   सेंसेक्स 78,676 के स्तर तक पहुंचा   शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 177.81 अंक यानी 0.22 फीसदी चढ़कर 78,676 के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी करीब 50 अंक यानी 0.20 फीसदी की बढ़त के साथ 24,620 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।   फार्मा और आईटी शेयरों में खरीदारी   सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी फार्मा 0.72 फीसदी की बढ़त के साथ मजबूत प्रदर्शन करने वाला प्रमुख सूचकांक रहा। हेल्थकेयर इंडेक्स में भी तेजी रही। वहीं, निफ्टी आईटी 0.53 फीसदी और मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम इंडेक्स 0.58 फीसदी चढ़ा।   इसके अलावा निजी बैंक, ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और रियल्टी शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। दूसरी ओर, निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.27 फीसदी और पीएसयू बैंक इंडेक्स 0.21 फीसदी नीचे रहा।   बेहतर तिमाही नतीजों से निवेशकों का भरोसा मजबूत   बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, कंपनियों के पहली तिमाही के उम्मीद से बेहतर नतीजों और मजबूत घरेलू मांग ने बाजार की धारणा को सकारात्मक बनाए रखा है। कमाई के सीजन में कई कंपनियों ने अनुमान से बेहतर आय वृद्धि दर्ज की है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।   FII की खरीदारी से भी बाजार को सहारा   विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, जुलाई में विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध खरीदार रहे और अगस्त में भी खरीदारी का रुख देखने को मिला है।   कच्चे तेल की कीमतों में तेजी चिंता   हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। शुरुआती कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड 1 फीसदी से अधिक बढ़कर 84.73 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 1.59 फीसदी चढ़कर 79.43 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी का असर बाजार और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

anjali kumari अगस्त 10, 2026 0
Air India

Air India की उड़ानों में सितंबर से बड़ा विस्तार, 1 सितंबर से अधिकांश सेवाएं बहाल करने की तैयारी

SEBI

SEBI ने कहा- भारतीय बाजार की घरेलू बुनियाद मजबूत, वैश्विक जोखिमों से चुनौती बरकरार

Hero MotoCorp

Hero MotoCorp के कंसोलिडेटेड मुनाफे में 17% की गिरावट, PAT घटकर ₹1,418 करोड़

0 Comments

Top week

French Rafale multirole fighter jet during flight as France submits a 114-aircraft proposal to strengthen the Indian Air Force.
राष्ट्रीय

भारत की हवाई ताकत को मिलेगा बड़ा बूस्ट? फ्रांस ने 114 राफेल फाइटर जेट का प्रस्ताव सौंपा, 94 विमान भारत में बनाने की योजना

surbhi अगस्त 7, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?