Russia

Ukraine Russia War
यूक्रेन का रूस पर बड़ा ड्रोन हमला, मॉस्को क्षेत्र के कई ठिकाने बने निशाना; जवाबी रूसी हमलों में ओडेसा में कई लोगों की मौत

कीव/मॉस्को, एजेंसियां। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध एक बार फिर तेज हो गया है। यूक्रेन ने रातभर में 400 से अधिक ड्रोन रूस की ओर भेजे, जिनका मुख्य निशाना मॉस्को क्षेत्र, तेल डिपो और सैन्य लॉजिस्टिक्स ठिकाने रहे। रूसी अधिकारियों ने दावा किया कि अधिकांश ड्रोन मार गिराए गए, लेकिन कई स्थानों पर आग और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा।   मॉस्को के आसपास तेल डिपो और औद्योगिक क्षेत्र प्रभावित   यूक्रेन के हमले के बाद मॉस्को के आसपास स्थित एक औद्योगिक क्षेत्र और संभावित तेल भंडारण केंद्र में आग लगने की खबर है। रूस ने कई हवाई अड्डों पर उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया, जबकि सुरक्षा एजेंसियों ने प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया।   ओडेसा में रूस का जवाबी हमला, कई लोगों की मौत   यूक्रेनी ड्रोन हमलों के जवाब में रूस ने ओडेसा क्षेत्र पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। एक नागरिक मालवाहक जहाज और अन्य ठिकानों पर हुए हमलों में कई लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए। ओडेसा प्रशासन ने हालात को गंभीर बताते हुए राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है।   काला सागर में बढ़ा तनाव   यूक्रेन ने दावा किया कि उसने रूस की तेल आपूर्ति और सैन्य लॉजिस्टिक्स को बाधित करने के उद्देश्य से ब्लैक सी क्षेत्र में भी कार्रवाई की। वहीं रूस ने इसे नागरिक और व्यापारिक गतिविधियों के लिए खतरा बताते हुए जवाबी सैन्य कार्रवाई जारी रखने की बात कही।   युद्धविराम की उम्मीदें फिर कमजोर   लगातार बढ़ते हमलों के बीच युद्धविराम की संभावनाएं कमजोर पड़ती दिख रही हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है, लेकिन फिलहाल दोनों पक्षों की सैन्य कार्रवाई जारी है।

abhishek singh जुलाई 21, 2026 0
The U.S. Capitol building in Washington, D.C., symbolizing a proposed sanctions bill that could impose tariffs on countries continuing to import Russian oil.
भारत समेत 5 देशों पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव, रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी संसद में नया प्रतिबंध बिल

वॉशिंगटन: अमेरिका में रूस पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से एक नया प्रतिबंध (Sanctions) विधेयक पेश किया गया है। प्रस्तावित बिल में भारत समेत पांच देशों पर रूस से तेल खरीद जारी रखने की स्थिति में 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, यह अभी केवल एक प्रस्तावित विधेयक है और कानून बनने से पहले इसे अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से पारित होना और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलना बाकी है। रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर निशाना रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने प्रस्तावित विधेयक में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान का उल्लेख किया है। उनका तर्क है कि रूस से ऊर्जा खरीद जारी रहने से मॉस्को को आर्थिक समर्थन मिल रहा है, जिससे यूक्रेन युद्ध जारी रखने में उसे मदद मिलती है। पहले 500% टैरिफ का प्रस्ताव था इससे पहले पेश किए गए एक प्रस्ताव में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की बात कही गई थी। हालांकि, उसे पर्याप्त समर्थन नहीं मिला। नए विधेयक में अधिकतम 100 प्रतिशत टैरिफ का प्रस्ताव रखा गया है, जिसे अपेक्षाकृत व्यावहारिक माना जा रहा है। अंतिम निर्णय USTR करेगा प्रस्ताव के अनुसार, किसी देश पर कितना टैरिफ लगाया जाएगा, इसका अंतिम फैसला अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) करेगा। आवश्यकता पड़ने पर टैरिफ की दर कम भी की जा सकती है, लेकिन इसके लिए अमेरिकी संसद को सूचना देना अनिवार्य होगा। अगस्त से पहले पारित कराने की कोशिश विधेयक में रूस के ऊर्जा, रक्षा, वित्त और औद्योगिक क्षेत्रों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का भी प्रस्ताव है। अमेरिकी सांसदों का लक्ष्य इसे अगस्त से पहले संसद से पारित कराना है, हालांकि इसकी प्रक्रिया अभी जारी है। भारत पर क्या असर पड़ सकता है? यदि यह विधेयक कानून बनता है और भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होता है, तो अमेरिका को निर्यात होने वाले कई भारतीय उत्पाद महंगे हो सकते हैं। इसका असर विशेष रूप से इन क्षेत्रों पर पड़ सकता है— ज्वेलरी और रत्न उद्योग टेक्सटाइल एवं परिधान इंजीनियरिंग उत्पाद अन्य निर्यात आधारित उद्योग टैरिफ बढ़ने से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता अमेरिकी बाजार में प्रभावित हो सकती है। रूस से तेल आयात बना अहम मुद्दा भारत पिछले कुछ वर्षों से रूस से रियायती दरों पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि प्रस्तावित अमेरिकी कदम का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय को सीमित करना और रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर वैकल्पिक स्रोत अपनाने का दबाव बनाना है। हालांकि, फिलहाल यह केवल एक प्रस्तावित बिल है। इसके कानून बनने, अंतिम स्वरूप और संभावित प्रभाव को लेकर आने वाले दिनों में अमेरिकी संसद की प्रक्रिया और प्रशासन के रुख पर नजर रहेगी।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
Russia Crude Oil
भारत के लिए सस्ता हुआ रूसी तेल, टैंकर किराए में बड़ी गिरावट; कच्चे तेल के आयात पर बढ़ेगी बचत

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के लिए राहत भरी खबर है। रूस से कच्चा तेल लाने वाले टैंकरों का किराया हाल के हफ्तों में काफी कम हो गया है, जिससे भारतीय रिफाइनरियों की आयात लागत घटने लगी है। शिपिंग दरों में इस गिरावट का सीधा फायदा भारत को सस्ते रूसी कच्चे तेल के रूप में मिल रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव इस राहत को लंबे समय तक बनाए रखने में चुनौती बन सकता है।   क्यों घटा टैंकरों का किराया?   जानकारों के अनुसार, वैश्विक शिपिंग बाजार में टैंकरों की उपलब्धता बढ़ने और माल ढुलाई की मांग में नरमी आने से समुद्री परिवहन लागत कम हुई है। इसका असर रूस से भारत आने वाले तेल टैंकरों पर भी पड़ा है। कम फ्रेट चार्ज के कारण भारतीय कंपनियों को पहले की तुलना में कम लागत पर रूसी कच्चा तेल मिल रहा है, जिससे रिफाइनरियों के मार्जिन में सुधार की उम्मीद है।   भारत को मिलेगा आर्थिक फायदा   भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और रूस उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। टैंकर किराया कम होने से तेल आयात का कुल खर्च घटेगा, जिससे रिफाइनरियों की लागत कम होगी। यदि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो इसका सकारात्मक असर ईंधन कंपनियों की लागत और ऊर्जा क्षेत्र पर भी पड़ सकता है।   होर्मुज तनाव बना सबसे बड़ा जोखिम   विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा। यदि इस मार्ग पर आवाजाही प्रभावित होती है, तो शिपिंग लागत दोबारा बढ़ सकती है और भारत को मिल रही मौजूदा राहत सीमित हो सकती है। ऐसे में ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों पर भी भारत का फोकस बना रहेगा।

abhishek singh जुलाई 12, 2026 0
U.S. Capitol and Russian oil infrastructure with an Indian oil tanker, symbolizing proposed U.S. sanctions targeting countries importing Russian energy.
US Russia Sanctions: अमेरिका के नए रूस प्रतिबंध कानून से बढ़ सकती हैं भारत की मुश्किलें, जानिए पूरा मामला

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए नए प्रतिबंध कानून की तैयारी कर रहा है। यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो रूस से तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे देशों में भारत भी शामिल है, जो पिछले कुछ वर्षों में रूस से बड़ी मात्रा में रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीद रहा है। क्या है नया अमेरिकी प्रस्ताव? अमेरिकी संसद में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक सांसदों के एक समूह ने रूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों वाला विधेयक आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। इस पहल का नेतृत्व रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम और रोजर विकर तथा डेमोक्रेटिक सांसद रिचर्ड ब्लूमेंथल और जीन शाहीन कर रहे हैं। सांसदों का तर्क है कि यूक्रेन युद्ध जारी रहने के कारण रूस की ऊर्जा आय को कम करना जरूरी है। इसलिए उन देशों पर भी आर्थिक दबाव बनाया जाए, जो रूस से ऊर्जा खरीदकर उसकी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। भारत पर क्या पड़ सकता है असर? यदि प्रस्तावित कानून लागू होता है, तो रूस से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, विधेयक के शुरुआती मसौदे में 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, हालांकि बाद में इसमें संशोधन किए गए हैं। अंतिम कानून में क्या प्रावधान होंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है। यदि अमेरिका ऐसे टैरिफ लागू करता है, तो भारत के अमेरिका के साथ व्यापार और ऊर्जा आयात नीति पर असर पड़ सकता है। राष्ट्रपति को मिलेगी राहत देने की शक्ति प्रस्तावित विधेयक में अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार देने का भी प्रावधान है कि वे राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए किसी मित्र देश को 180 दिनों तक की छूट दे सकें। इसका मतलब है कि यदि अमेरिका चाहे, तो भारत जैसे रणनीतिक साझेदार देशों को अस्थायी राहत मिल सकती है। अमेरिकी संसद में मिल रहा समर्थन इस विधेयक को अमेरिकी सीनेट में व्यापक समर्थन मिल रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, 84 सीनेटर इस प्रस्ताव के पक्ष में हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति का समर्थन कर चुके हैं। हालांकि, विधेयक को अभी संसद से पारित होकर कानून बनना बाकी है। भारत क्यों है अहम? यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से रियायती दरों पर बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है। इससे भारत को ऊर्जा लागत नियंत्रित रखने में मदद मिली है। अमेरिका ने पहले कुछ परिस्थितियों में इस व्यापार के लिए अस्थायी छूट दी थी, लेकिन यह लाइसेंस 17 जून को समाप्त हो चुका है। आगे क्या होगा? यदि अमेरिकी कांग्रेस इस विधेयक को मंजूरी देती है और राष्ट्रपति इसे कानून का रूप देते हैं, तो भारत सहित कई देशों पर अतिरिक्त टैरिफ या अन्य प्रतिबंध लग सकते हैं। हालांकि, अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कानून का अंतिम स्वरूप क्या होता है और क्या अमेरिका भारत जैसे रणनीतिक साझेदार देशों को कोई विशेष छूट देता है। फिलहाल भारत और अन्य प्रभावित देश अमेरिकी फैसले पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
Saint Petersburg
यूक्रेन का रूस पर बड़ा ड्रोन हमला, सेंट पीटर्सबर्ग के तेल टर्मिनल को बनाया निशाना

मॉस्को, एजेंसियां। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन ने रूस की ऊर्जा अवसंरचना पर एक और बड़ा हमला किया है। शनिवार देर रात यूक्रेनी ड्रोन ने रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर सेंट पीटर्सबर्ग के प्रमुख तेल टर्मिनल और आसपास के बंदरगाह क्षेत्र को निशाना बनाया। हमले के बाद तेल टर्मिनल में आग लग गई और इलाके में धुएं का बड़ा गुबार दिखाई दिया। रूसी अधिकारियों ने इसे हाल के महीनों का सबसे बड़ा ड्रोन हमला बताया।   72 ड्रोन मार गिराने का रूस का दावा   रूस के लेनिनग्राद क्षेत्र के गवर्नर के अनुसार, एयर डिफेंस सिस्टम ने हमले के दौरान 72 यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराया। इसके बावजूद सेंट पीटर्सबर्ग ऑयल टर्मिनल और वायसोत्स्क बंदरगाह क्षेत्र में नुकसान हुआ। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।   रूस की ऊर्जा आपूर्ति को निशाना बना रहा यूक्रेन   विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन लगातार रूस की तेल और ईंधन आपूर्ति से जुड़ी परियोजनाओं को निशाना बना रहा है, ताकि युद्ध के लिए जरूरी लॉजिस्टिक्स और आर्थिक संसाधनों पर दबाव बनाया जा सके। हाल के महीनों में रूस के कई तेल डिपो, रिफाइनरी और बंदरगाहों पर ऐसे हमले हो चुके हैं।   युद्ध के बीच बढ़ा तनाव   यह हमला ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों के बीच हवाई हमलों और ड्रोन हमलों की तीव्रता लगातार बढ़ रही है। रूस ने भी यूक्रेन के कई शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ऊर्जा अवसंरचना पर बढ़ते हमले आने वाले दिनों में संघर्ष को और अधिक तीखा बना सकते हैं।

abhishek singh जुलाई 5, 2026 0
India Petroleum Supply
भारत से रूस ने पेट्रोलियम आपूर्ति बढ़ाई, यूक्रेन हमलों के बाद ईंधन संकट गहराया

नई दिल्ली, एजेंसियां। रूस ने यूक्रेन के हमलों के बाद पैदा हुए ईंधन संकट के बीच भारत से पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति बढ़ानी शुरू कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक रूस को घरेलू मांग पूरी करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते वह भारत समेत एशियाई देशों से ईंधन आयात कर रहा है।   ऊर्जा संकट के बीच बढ़ा व्यापारिक दबाव   सूत्रों के अनुसार, रूस के कई रिफाइनरी और ऊर्जा ढांचे पर हाल के हमलों के बाद उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसी कारण पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति में कमी देखने को मिल रही है, जिसे पूरा करने के लिए रूस भारत से खरीदारी कर रहा है।   भारत के ऊर्जा निर्यात पर असर की संभावना   विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो भारत के ऊर्जा व्यापार और निर्यात पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि फिलहाल इसे अल्पकालिक रणनीति माना जा रहा है।   वैश्विक तेल बाजार पर नजर   इस घटनाक्रम के चलते अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी हलचल देखी जा रही है, क्योंकि आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन पर असर पड़ सकता है।

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
Russian Tu-22M3 strategic bomber crashes near Irkutsk during training flight as four crew members eject safely.
रूस का Tu-22M3 बॉम्बर विमान क्रैश, चारों पायलट सुरक्षित; इंजन फेल होने की आशंका

  मॉस्को: रूस का रणनीतिक बॉम्बर विमान Tu-22M3 सोमवार को साइबेरिया के इरकुत्स्क क्षेत्र में प्रशिक्षण उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, विमान अचानक नियंत्रण खोकर जमीन की ओर तेजी से गिरा, जिससे घटनास्थल पर धुएं का बड़ा गुबार उठ गया। विमान में सवार चारों क्रू मेंबर समय रहते इजेक्ट करने में सफल रहे और उनकी जान बच गई। चारों क्रू मेंबर सुरक्षित, अस्पताल में भर्ती रूसी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि विमान में मौजूद चारों पायलट पैराशूट के जरिए सुरक्षित बाहर निकल गए। उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि दुर्घटना में जमीन पर किसी प्रकार का नुकसान या हताहत नहीं हुआ है। कामेंका गांव के पास हुआ हादसा इरकुत्स्क क्षेत्र के गवर्नर इगोर कोबजेव के मुताबिक, यह हादसा कामेंका गांव के नजदीक हुआ। प्रारंभिक जांच में विमान के इंजन में खराबी को दुर्घटना की संभावित वजह माना जा रहा है। अधिकारियों ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। क्या है Tu-22M3 बॉम्बर की खासियत? Tu-22M3 रूस के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक बॉम्बर विमानों में से एक है। सोवियत काल में विकसित इस विमान को NATO ने 'Backfire' कोडनेम दिया है। यह सुपरसोनिक बॉम्बर लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता रखता है और रूस ने इसका इस्तेमाल सीरिया और यूक्रेन में सैन्य अभियानों के दौरान भी किया है। Tu-22M3 आधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस है और यह Kh-22 क्रूज मिसाइलों के अलावा हवा से लॉन्च होने वाली हाइपरसोनिक किंझाल (Kinzhal) मिसाइलों को भी ले जाने में सक्षम है। इसकी वजह से इसे रूस की रणनीतिक हवाई शक्ति का अहम हिस्सा माना जाता है। जांच के बाद सामने आएगी दुर्घटना की असली वजह शुरुआती जांच में इंजन फेल होने की आशंका जताई गई है, लेकिन रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जा सकेगी।  

Deepshikha जून 16, 2026 0
Emergency responders inspect damage after fresh Russia-Ukraine border attacks causing civilian casualties.
रूस-यूक्रेन सीमा पर फिर बढ़ा तनाव, दोनों ओर के हमलों में 3 लोगों की मौत

  रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। सीमा से सटे क्षेत्रों में दोनों देशों की ओर से हुए ताजा हमलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। घायलों में एक पांच वर्षीय बच्चा भी शामिल बताया गया है। दोनों देशों के अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में हुए हमलों की पुष्टि की है। युद्धकालीन परिस्थितियों में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि करना कठिन है। ब्रायंस्क क्षेत्र में यूक्रेनी हमले का दावा रूस के सीमावर्ती क्षेत्र ब्रायंस्क के अधिकारियों के अनुसार, यूक्रेन की ओर से की गई गोलाबारी में दो लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। ब्रायंस्क के कार्यवाहक गवर्नर येगोर कोवलचुक ने बताया कि सीमा के निकट स्थित सूजेमका क्षेत्र को निशाना बनाया गया। उनके अनुसार, हमले से स्थानीय नागरिक प्रभावित हुए और कई इमारतों को भी नुकसान पहुंचा। स्टारोडुब में पेट्रोल पंपों पर हमला रूसी अधिकारियों का दावा है कि ब्रायंस्क क्षेत्र के स्टारोडुब इलाके में हुए एक अन्य हमले में पेट्रोल पंपों को निशाना बनाया गया। इस घटना में सात लोग घायल हुए हैं। इसके अतिरिक्त, एक अलग ड्रोन हमले में पांच वर्षीय बच्चे के घायल होने की भी जानकारी दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित लोगों के इलाज की व्यवस्था किए जाने की बात कही है। रूस का पलटवार, यूक्रेन में भी नुकसान दूसरी ओर, यूक्रेनी अधिकारियों ने रूसी ड्रोन हमलों में नागरिक हताहतों की सूचना दी है। यूक्रेन के सुमी क्षेत्र के गवर्नर ओलेह ह्रीहोरोव के अनुसार, रूसी ड्रोन हमले में 44 वर्षीय एक महिला की मौत हो गई, जबकि एक अन्य महिला गंभीर रूप से घायल हुई है। मायकोलाइव में भी ड्रोन हमले यूक्रेन के दक्षिणी शहर मायकोलाइव में भी ड्रोन हमलों की सूचना मिली है। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, इस हमले में कम से कम तीन लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी है तथा नुकसान का आकलन किया जा रहा है। नागरिकों पर बढ़ रहा युद्ध का असर चार वर्षों से अधिक समय से जारी इस संघर्ष का सबसे अधिक असर सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों पर पड़ रहा है। हाल के हमले इस बात का संकेत हैं कि मोर्चों पर तनाव अभी भी बना हुआ है और दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखे हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा सकती हैं, जबकि नागरिक आबादी लगातार युद्ध की कीमत चुका रही है।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
Russian and Pakistani officials sign security cooperation agreements during SCO meeting in Bishkek, Kyrgyzstan.
भारत के दोस्त रूस ने पाकिस्तान के साथ किए दो अहम समझौते, SCO बैठक में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति

  नई दिल्ली/बिश्केक: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान रूस और पाकिस्तान ने सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों देशों ने अवैध प्रवासन पर नियंत्रण और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके अलावा क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और अफगानिस्तान की स्थिति जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। यह समझौते किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी और रूस के गृह मंत्री व्लादिमीर कोलोकोल्त्सेव के बीच हुई बैठक के दौरान हुए। मोहसिन नकवी एससीओ सदस्य देशों के गृह एवं सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए बिश्केक पहुंचे हैं। अवैध प्रवासन रोकने पर समझौता पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने अवैध प्रवासन की रोकथाम और इससे जुड़े मामलों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते के तहत दोनों देश अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध रूप से रह रहे नागरिकों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया में सहयोग करेंगे। ड्रग्स तस्करी के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई रूस और पाकिस्तान के बीच दूसरा समझौता मादक पदार्थों और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने से संबंधित है। दोनों देशों ने ड्रग्स नेटवर्क पर निगरानी बढ़ाने, खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान करने और अंतरराष्ट्रीय तस्करी से निपटने के लिए संयुक्त प्रयासों को मजबूत करने पर सहमति जताई। रूस-पाकिस्तान संबंधों में बढ़ती नजदीकी हाल के वर्षों में रूस और पाकिस्तान के संबंधों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। दोनों देश ऊर्जा, व्यापार और औद्योगिक सहयोग के क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ा रहे हैं। पाकिस्तान रूस से ऊर्जा आयात बढ़ाने की संभावनाओं पर भी काम कर रहा है। जुलाई 2025 में दोनों देशों ने कराची स्थित पाकिस्तान स्टील मिल को पुनर्जीवित करने के लिए एक समझौता किया था। यह परियोजना ऐतिहासिक महत्व रखती है क्योंकि इस स्टील मिल की स्थापना सोवियत संघ की सहायता से की गई थी। अफगानिस्तान और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा बैठक के दौरान अफगानिस्तान की सुरक्षा स्थिति, सीमा पार आतंकवाद और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। रूस और पाकिस्तान दोनों ने क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। मध्य एशियाई देशों के नेताओं से भी मिले नकवी एससीओ बैठक के दौरान पाकिस्तानी गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने ताजिकिस्तान, उजबेकिस्तान, किर्गिस्तान और कजाकिस्तान के गृह मंत्रियों के साथ भी अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में आतंकवाद, सीमा पार अपराध, संगठित अपराध और सुरक्षा सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। SCO मंच पर सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा बिश्केक में हुई बैठकों से संकेत मिलता है कि एससीओ सदस्य देश क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, अवैध प्रवासन और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे साझा खतरों से निपटने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने के पक्ष में हैं। रूस और पाकिस्तान के बीच हुए ये नए समझौते भी इसी व्यापक क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
Russian Foreign Ministry spokesperson Maria Zakharova speaking during an official press briefing in Moscow.
रूस की मुखर कूटनीतिक आवाज: कौन हैं मारिया जखारोवा, जिन पर भरोसा करती है पुतिन सरकार?

  रूस की विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय विवादों और वैश्विक घटनाक्रमों पर जब भी मॉस्को का आधिकारिक पक्ष सामने आता है, तो सबसे प्रमुख चेहरों में मारिया जखारोवा का नाम शामिल होता है। अपनी स्पष्टवादी शैली, तीखी प्रतिक्रियाओं और मजबूत कूटनीतिक उपस्थिति के कारण वह रूस की सबसे चर्चित राजनयिकों में गिनी जाती हैं। पिछले एक दशक से अधिक समय से वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रूस का पक्ष मजबूती से रख रही हैं और आज उन्हें रूसी विदेश मंत्रालय की सबसे प्रभावशाली आवाज माना जाता है। राजनयिक परिवार से निकलकर बनीं रूस की प्रमुख प्रवक्ता 24 दिसंबर 1975 को मॉस्को में जन्मीं मारिया जखारोवा का बचपन कूटनीतिक माहौल में बीता। उनके पिता सोवियत संघ की राजनयिक सेवा में कार्यरत थे और उनकी नियुक्ति चीन में होने के कारण मारिया ने अपने शुरुआती वर्ष बीजिंग में बिताए। उनकी मां इरीना जखारोवा कला इतिहासकार थीं और मॉस्को के प्रतिष्ठित संग्रहालयों से जुड़ी रहीं। सोवियत संघ के विघटन के बाद परिवार रूस लौट आया, जहां मारिया ने अपनी उच्च शिक्षा पूरी की और अंतरराष्ट्रीय मामलों की दुनिया में कदम रखा। पत्रकारिता से शुरू हुआ सफर, कूटनीति तक पहुंचीं मारिया जखारोवा ने मॉस्को स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस (MGIMO) से अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता और प्राच्य अध्ययन में शिक्षा प्राप्त की। वह रूसी, अंग्रेजी और चीनी भाषाओं में दक्ष हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने रूसी विदेश मंत्रालय की पत्रिका डिप्लोमैटिक बुलेटिन में संपादक के रूप में काम शुरू किया। यहीं से उनका सरकारी और कूटनीतिक करियर आगे बढ़ा और धीरे-धीरे उन्हें मंत्रालय में बड़ी जिम्मेदारियां मिलने लगीं। संयुक्त राष्ट्र में निभाई अहम भूमिका वर्ष 2005 से 2008 के बीच जखारोवा ने न्यूयॉर्क स्थित रूस के स्थायी मिशन में प्रेस सचिव के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सामने रूस की नीतियों और दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। संयुक्त राष्ट्र में उनके कार्यकाल को उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है, जहां उन्होंने वैश्विक कूटनीति के जटिल मुद्दों पर अनुभव हासिल किया। पहली महिला बनीं सूचना एवं प्रेस विभाग की निदेशक 2011 में उन्हें रूसी विदेश मंत्रालय के सूचना एवं प्रेस विभाग का उप निदेशक बनाया गया। चार वर्षों तक मीडिया रणनीति और अंतरराष्ट्रीय संचार व्यवस्था संभालने के बाद अगस्त 2015 में उन्हें विभाग का निदेशक नियुक्त किया गया। इस पद तक पहुंचने वाली वह पहली महिला बनीं। वर्तमान में वह विभाग की प्रमुख होने के साथ-साथ रूसी विदेश मंत्रालय की आधिकारिक प्रवक्ता भी हैं। टीवी डिबेट और सोशल मीडिया से बढ़ी लोकप्रियता मारिया जखारोवा केवल सरकारी अधिकारी नहीं, बल्कि रूस की सार्वजनिक कूटनीति का भी प्रमुख चेहरा हैं। वह नियमित रूप से टीवी कार्यक्रमों, प्रेस ब्रीफिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय रहती हैं। यूक्रेन युद्ध, नाटो विस्तार, अमेरिका-रूस संबंधों और पश्चिमी देशों की नीतियों पर उनकी टिप्पणियां अक्सर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बनती हैं। उनकी तेज और सीधी प्रतिक्रियाएं उन्हें अन्य राजनयिकों से अलग पहचान दिलाती हैं। अंतरराष्ट्रीय पहचान और प्रतिबंध 2016 में उन्हें दुनिया की 100 प्रभावशाली महिलाओं की सूची में शामिल किया गया था। वहीं फरवरी 2022 में यूक्रेन संघर्ष शुरू होने से पहले यूरोपीय संघ ने उन पर प्रतिबंध लगाए थे। यूरोपीय देशों ने उन पर रूस के आधिकारिक रुख और सैन्य कार्रवाई का समर्थन करने का आरोप लगाया था।  इन प्रतिबंधों के बावजूद जखारोवा की भूमिका रूस की विदेश नीति में लगातार मजबूत बनी हुई है। क्यों मानी जाती हैं पुतिन प्रशासन की भरोसेमंद आवाज? करीब ढाई दशक लंबे करियर में मारिया जखारोवा ने खुद को रूस की सबसे प्रभावशाली कूटनीतिक हस्तियों में स्थापित किया है। राष्ट्रपति Vladimir Putin के लंबे शासनकाल के दौरान उनका कद लगातार बढ़ता गया है। विश्लेषकों का मानना है कि उनकी पेशेवर क्षमता, मीडिया प्रबंधन कौशल और सरकार के दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की क्षमता ने उन्हें क्रेमलिन की सबसे भरोसेमंद सार्वजनिक आवाजों में शामिल कर दिया है। आज अंतरराष्ट्रीय राजनीति में रूस का आधिकारिक संदेश दुनिया तक पहुंचाने वाले प्रमुख चेहरों में मारिया जखारोवा सबसे आगे हैं।  

Deepshikha जून 5, 2026 0
Russia defends Iran at UN Security Council amid rising tensions over Strait of Hormuz
UN में रूस ने ईरान का किया बचाव, होर्मुज पर अमेरिका-पश्चिम को घेरा

Russia ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर Iran का खुलकर समर्थन किया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस ने पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका, पर तीखा हमला बोला और ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य में कदमों को जायज़ ठहराया। रूस ने क्या कहा? संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी प्रतिनिधि Vasily Nebenzya ने कहा कि युद्ध की स्थिति में किसी भी तटीय देश को अपनी सुरक्षा के लिए समुद्री क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही सीमित करने का अधिकार है। उनका कहना था कि ईरान पर पूरा दोष मढ़ना गलत है, जबकि वह खुद बाहरी दबाव और हमलों का सामना कर रहा है। पश्चिमी देशों पर 'समुद्री डाकू' वाला हमला नेबेंज्या ने पश्चिमी देशों की तुलना समुद्री डाकुओं से करते हुए कहा कि वे अपने "गैरकानूनी" कदमों को एकतरफा प्रतिबंधों और दबाव की आड़ में छिपाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोपीय देश खुलेआम समुद्र में लूटपाट जैसी कार्रवाइयों का समर्थन कर रहे हैं। पहले भी रूस-चीन ने किया था वीटो इस महीने की शुरुआत में China और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उस प्रस्ताव को वीटो कर दिया था, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना था। पुतिन ने भी जताया समर्थन इसी दिन रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की और ईरान के प्रति अपना समर्थन दोहराया। क्यों अहम है होर्मुज? Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
Iran-US ceasefire and Middle East tensions.
“War Not Over”: ईरान सीजफायर पर रूस का हमला, अमेरिका-NATO पर साधा निशाना

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच रूस ने ईरान और अमेरिका के बीच हुए सीजफायर का स्वागत तो किया, लेकिन साथ ही वॉशिंगटन और उसके सहयोगियों पर तीखा हमला भी बोला है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने साफ शब्दों में कहा कि यह संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है और क्षेत्र में हालात अब भी बेहद नाजुक बने हुए हैं। लावरोव ने कहा कि रूस मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति चाहता है, जो किसी एक देश की दादागिरी पर नहीं बल्कि सभी क्षेत्रीय शक्तियों के संतुलन पर आधारित हो। उन्होंने चेतावनी दी कि सैन्य कार्रवाई के जरिए इस संकट का समाधान संभव नहीं है और अमेरिका का अभियान इतिहास में एक असफल प्रयास के रूप में दर्ज हो सकता है। रूस ने इस पूरे घटनाक्रम को पश्चिमी शक्तियों की कमजोरी के तौर पर भी पेश किया। NATO, European Union और ब्रिटेन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मॉस्को ने कहा कि ईरान को घेरने की रणनीति पूरी तरह विफल रही है। इससे पश्चिमी सैन्य गठबंधन की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। क्रेमलिन का मानना है कि भले ही पाकिस्तान में बातचीत और अस्थायी युद्धविराम की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन जमीनी हालात अभी भी विस्फोटक हैं। रूस ने स्पष्ट किया कि “War Is Not Over” और क्षेत्र में संघर्ष की आशंका बनी हुई है। इस बीच, इस टकराव का आर्थिक पहलू भी चर्चा में है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधा के कारण वैश्विक तेल और उर्वरक आपूर्ति प्रभावित हुई, जिसका सीधा लाभ रूस को मिला। दुनिया के बड़े ऊर्जा निर्यातकों में शामिल रूस की मांग अचानक बढ़ी और कीमतों में उछाल से उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली। रूस ने यह भी संकेत दिया कि मिडिल ईस्ट की भू-राजनीति अब केवल अमेरिका के नियंत्रण में नहीं है। मॉस्को और चीन की बढ़ती सक्रियता ने इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बदल दिया है। संयुक्त राष्ट्र में वीटो जैसे कदमों के जरिए यह साफ हो चुका है कि अब वैश्विक फैसले बहुध्रुवीय व्यवस्था में लिए जा रहे हैं। कुल मिलाकर, रूस का संदेश साफ है-ईरान सीजफायर के बावजूद संकट टला नहीं है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन की नई लड़ाई शुरू हो चुकी है।  

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
Iran US Israel conflict news
ईरान ने जंग खत्म करने के लिए रखीं तीन शर्तें

तेहरान,एजेंसियां। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच मसूद पेजेशकियन ने युद्ध समाप्त करने के लिए तीन अहम शर्तें रखी हैं। ईरान और Israel-United States के बीच चल रहा यह संघर्ष अब 13वें दिन में पहुंच गया है और दोनों पक्षों के बीच लगातार मिसाइल और हवाई हमले जारी हैं। इसी बीच ईरानी राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने युद्ध समाप्ति का प्रस्ताव रखा है। ईरान की तीन प्रमुख शर्तें राष्ट्रपति पेजेशकियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि क्षेत्र में शांति के लिए ईरान प्रतिबद्ध है, लेकिन युद्ध समाप्त करने के लिए कुछ शर्तें जरूरी हैं। उनकी पहली शर्त है कि ईरान के वैध अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किया जाए। दूसरी शर्त के अनुसार, युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा दिया जाए। तीसरी शर्त यह है कि भविष्य में ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई न हो, इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत सुरक्षा गारंटी दी जाए। उन्होंने बताया कि इन मुद्दों पर उन्होंने Russia और Pakistan के नेताओं से भी चर्चा की है। ट्रंप का दावा इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी हमलों में ईरान के कई सैन्य ठिकाने तबाह हो चुके हैं। उनके अनुसार, ईरान की वायु रक्षा प्रणाली और कई अहम सैन्य क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने अपने अधिकांश सैन्य लक्ष्य हासिल कर लिए हैं और हालात ऐसे हैं कि जब चाहे युद्ध को समाप्त किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने युद्ध खत्म करने की स्पष्ट रणनीति साझा नहीं की। लेबनान में भी तेज हुए हमले दूसरी ओर, इजरायल ने हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। इजरायली सेना ने Beirut, Lebanon के दक्षिणी हिस्सों में हवाई हमले किए, जिससे कई रिहायशी इलाकों में भारी नुकसान हुआ। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हालिया हमलों में 86 बच्चों और 47 महिलाओं समेत 600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,400 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

Unknown मार्च 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Explosion reported in Iran after US airstrikes near Bandar Abbas
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ईरान पर फिर बरसे अमेरिकी बम, बंदर अब्बास समेत कई शहरों में धमाके; मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 21, 2026 0