टेक्नोलॉजी

सर्विस और डिलीवरी कॉल के लिए 1601 नंबर सीरीज

TRAI का नया टेलीकॉम निर्देश, अब सर्विस और डिलीवरी कॉल के लिए इस्तेमाल होगी 1601 नंबर सीरीज

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
TRAI के 1601 नंबर सीरीज वाले नए टेलीकॉम निर्देश
TRAI का नया निर्देश, सर्विस कॉल के लिए 1601 नंबर सीरीज

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने स्पैम और फर्जी कॉल पर लगाम लगाने के लिए टेलीकॉम कंपनियों और सेवा प्रदाता संस्थानों के लिए नया निर्देश जारी किया है। अब बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा और सरकारी सेवाओं के अलावा अन्य क्षेत्रों की सर्विस और ट्रांजैक्शन संबंधी कॉल के लिए 1601 नंबर सीरीज का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्राहकों के लिए जरूरी सेवा कॉल को पहचानना आसान बनाना और धोखाधड़ी वाली कॉल पर अंकुश लगाना है।

 

1601 नंबर सीरीज का होगा इस्तेमाल

 

 

TRAI के नए निर्देश के तहत यूटिलिटी, कूरियर, लॉजिस्टिक्स और इसी तरह के क्षेत्रों से आने वाली सेवा एवं ट्रांजैक्शन संबंधी कॉल को 1601 सीरीज के नंबरों से किया जाएगा। इससे ग्राहकों को यह समझने में आसानी होगी कि कॉल किसी पंजीकृत सेवा प्रदाता या कारोबारी संस्था की ओर से की जा रही है।

 

वर्तमान में बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा और सरकारी संस्थाओं से जुड़ी सेवा कॉल के लिए 1600 सीरीज का इस्तेमाल किया जाता है। नई 1601 सीरीज इन दोनों तरह की सेवाओं के बीच स्पष्ट अंतर बनाएगी।

 

फर्जी और स्पैम कॉल पर लगेगी लगाम

 

 

TRAI का यह कदम लगातार बढ़ रही स्पैम और धोखाधड़ी वाली कॉल की समस्या से निपटने की कोशिश का हिस्सा है। टेलीकॉम कंपनियों ने अप्रैल से जून के बीच 24.4 अरब कॉल और संदेशों को संदिग्ध स्पैम के तौर पर चिह्नित किया। इसी अवधि में TRAI ने स्पैम से जुड़े 1.8 लाख से ज्यादा टेलीकॉम संसाधनों पर कार्रवाई की।

 

1601 सीरीज से ग्राहकों को वास्तविक सेवा कॉल और अनजान नंबरों से आने वाली संदिग्ध कॉल के बीच अंतर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

 

किन कंपनियों पर पड़ेगा असर

 

 

नई व्यवस्था का असर खास तौर पर यूटिलिटी, कूरियर, लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी सेवाओं से जुड़ी कंपनियों पर पड़ेगा। इन क्षेत्रों की कंपनियों को ग्राहकों से संबंधित सर्विस और ट्रांजैक्शन कॉल के लिए निर्धारित नंबर सीरीज का इस्तेमाल करना होगा।

 

इस व्यवस्था से महत्वपूर्ण कॉल की पहचान आसान होने के साथ-साथ ग्राहकों के बीच भरोसा बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। वहीं आम लोगों को भी किसी कॉल पर अपनी बैंकिंग या निजी जानकारी साझा करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।

 

ग्राहकों को क्या फायदा होगा

 

 

TRAI का मानना है कि अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग नंबर सीरीज होने से टेलीकॉम संचार ज्यादा व्यवस्थित और पारदर्शी हो सकता है। ग्राहक 1601 सीरीज से आने वाली कॉल को सामान्य निजी मोबाइल नंबरों से अलग पहचान सकेंगे।

 

हालांकि, सिर्फ 1601 नंबर देखकर किसी कॉल को पूरी तरह सुरक्षित मानना सही नहीं होगा। किसी भी कॉल पर OTP, PIN, पासवर्ड या बैंक खाते की संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचना जरूरी है। TRAI की नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य पहचान को आसान बनाना है, न कि हर कॉल को स्वतः सुरक्षित घोषित करना।

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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