वॉशिंगटन: अमेरिका में रूस पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से एक नया प्रतिबंध (Sanctions) विधेयक पेश किया गया है। प्रस्तावित बिल में भारत समेत पांच देशों पर रूस से तेल खरीद जारी रखने की स्थिति में 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, यह अभी केवल एक प्रस्तावित विधेयक है और कानून बनने से पहले इसे अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से पारित होना और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलना बाकी है। रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर निशाना रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने प्रस्तावित विधेयक में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान का उल्लेख किया है। उनका तर्क है कि रूस से ऊर्जा खरीद जारी रहने से मॉस्को को आर्थिक समर्थन मिल रहा है, जिससे यूक्रेन युद्ध जारी रखने में उसे मदद मिलती है। पहले 500% टैरिफ का प्रस्ताव था इससे पहले पेश किए गए एक प्रस्ताव में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की बात कही गई थी। हालांकि, उसे पर्याप्त समर्थन नहीं मिला। नए विधेयक में अधिकतम 100 प्रतिशत टैरिफ का प्रस्ताव रखा गया है, जिसे अपेक्षाकृत व्यावहारिक माना जा रहा है। अंतिम निर्णय USTR करेगा प्रस्ताव के अनुसार, किसी देश पर कितना टैरिफ लगाया जाएगा, इसका अंतिम फैसला अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) करेगा। आवश्यकता पड़ने पर टैरिफ की दर कम भी की जा सकती है, लेकिन इसके लिए अमेरिकी संसद को सूचना देना अनिवार्य होगा। अगस्त से पहले पारित कराने की कोशिश विधेयक में रूस के ऊर्जा, रक्षा, वित्त और औद्योगिक क्षेत्रों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का भी प्रस्ताव है। अमेरिकी सांसदों का लक्ष्य इसे अगस्त से पहले संसद से पारित कराना है, हालांकि इसकी प्रक्रिया अभी जारी है। भारत पर क्या असर पड़ सकता है? यदि यह विधेयक कानून बनता है और भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होता है, तो अमेरिका को निर्यात होने वाले कई भारतीय उत्पाद महंगे हो सकते हैं। इसका असर विशेष रूप से इन क्षेत्रों पर पड़ सकता है— ज्वेलरी और रत्न उद्योग टेक्सटाइल एवं परिधान इंजीनियरिंग उत्पाद अन्य निर्यात आधारित उद्योग टैरिफ बढ़ने से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता अमेरिकी बाजार में प्रभावित हो सकती है। रूस से तेल आयात बना अहम मुद्दा भारत पिछले कुछ वर्षों से रूस से रियायती दरों पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि प्रस्तावित अमेरिकी कदम का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय को सीमित करना और रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर वैकल्पिक स्रोत अपनाने का दबाव बनाना है। हालांकि, फिलहाल यह केवल एक प्रस्तावित बिल है। इसके कानून बनने, अंतिम स्वरूप और संभावित प्रभाव को लेकर आने वाले दिनों में अमेरिकी संसद की प्रक्रिया और प्रशासन के रुख पर नजर रहेगी।
IIT Delhi AI Certificate Course 2026: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए अच्छी खबर है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली ने Applied Quantum Computing and AI में नया 6.5 महीने का ऑनलाइन सर्टिफिकेट प्रोग्राम शुरू किया है। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें प्रवेश के लिए JEE स्कोर की आवश्यकता नहीं है। यह कोर्स उन प्रोफेशनल्स के लिए तैयार किया गया है जो नई तकनीकों में अपने कौशल को बेहतर बनाकर करियर में आगे बढ़ना चाहते हैं। IIT Delhi ने जारी किया आधिकारिक नोटिस IIT दिल्ली ने अपने नोटिस में बताया है कि Applied Quantum Computing and AI Certificate Programme को इंडस्ट्री की मौजूदा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इस कोर्स के माध्यम से प्रतिभागियों को क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों से जुड़े व्यावहारिक ज्ञान के साथ उद्योग-उन्मुख स्किल्स भी सिखाई जाएंगी। आवेदन की अंतिम तिथि इच्छुक उम्मीदवार इस सर्टिफिकेट प्रोग्राम के लिए 15 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। 6.5 महीने का ऑनलाइन प्रोग्राम यह कोर्स पूरी तरह ऑनलाइन मोड में संचालित किया जाएगा, जिससे वर्किंग प्रोफेशनल्स अपनी नौकरी के साथ भी इसे आसानी से पूरा कर सकेंगे। इसके अलावा, प्रतिभागियों को IIT Delhi कैंपस विजिट का अवसर भी मिलेगा, जहां वे संस्थान के अकादमिक वातावरण और विशेषज्ञों के साथ सीखने का अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। किन लोगों के लिए है यह कोर्स? यह कार्यक्रम विशेष रूप से उन उम्मीदवारों के लिए डिजाइन किया गया है जो: AI और Quantum Computing में नई स्किल्स सीखना चाहते हैं। टेक्नोलॉजी सेक्टर में अपने करियर को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इंडस्ट्री-ओरिएंटेड और एडवांस तकनीकी ज्ञान हासिल करना चाहते हैं। नौकरी के साथ ऑनलाइन सीखने का विकल्प चाहते हैं। आवेदन कैसे करें? उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करके आवेदन कर सकते हैं: IIT Delhi CEP के आधिकारिक पोर्टल पर जाएं। Applied Quantum Computing and AI Certificate Programme चुनें। ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें। आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। निर्धारित शुल्क का भुगतान कर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। कोर्स की मुख्य विशेषताएं संस्थान: IIT Delhi कोर्स: Applied Quantum Computing and AI अवधि: 6.5 महीने मोड: ऑनलाइन कैंपस इमर्शन का अवसर JEE स्कोर की आवश्यकता नहीं वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए विशेष रूप से डिजाइन आवेदन की अंतिम तिथि: 15 अक्टूबर 2026 AI और Quantum Computing आने वाले वर्षों की सबसे तेजी से बढ़ती तकनीकों में शामिल हैं। ऐसे में IIT Delhi का यह सर्टिफिकेट प्रोग्राम उन प्रोफेशनल्स के लिए एक बेहतरीन अवसर हो सकता है जो भविष्य की तकनीकों में विशेषज्ञता हासिल कर अपने करियर को नई दिशा देना चाहते हैं।
Color Changing Mountain: ऑस्ट्रेलिया का उलुरु (Uluru) अपनी बदलती रंगत के लिए दुनिया भर में मशहूर है। सूरज की रोशनी के साथ इसका रंग बदलता हुआ नजर आता है। वहीं भारत में भी एक ऐसा पर्वत है, जहां सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पहाड़ों की रंगत बदलती हुई दिखाई देती है। दिनभर क्यों बदलता है इस पहाड़ का रंग? जानिए इसके पीछे का विज्ञान और आस्था दुनिया में कई पहाड़ अपनी ऊंचाई, बर्फ से ढकी चोटियों या प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया का उलुरु (Uluru) एक ऐसी प्राकृतिक धरोहर है, जो दिनभर बदलती रंगत के कारण दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करती है। सुबह की पहली किरणों में यह हल्का गुलाबी दिखाई देता है, दोपहर में चमकीला नारंगी और शाम ढलते-ढलते इसका रंग गहरा लाल और बैंगनी आभा लिए नजर आने लगता है। ऑस्ट्रेलिया के नॉर्दर्न टेरिटरी में स्थित यह विशाल बलुआ पत्थर (Sandstone) का पर्वत अपनी अनोखी रंग बदलने वाली विशेषता के कारण विश्व प्रसिद्ध है। हालांकि, चट्टान का वास्तविक रंग नहीं बदलता, बल्कि सूर्य की बदलती रोशनी और इसके खनिजों की संरचना के कारण ऐसा दृश्य दिखाई देता है। क्यों बदलता है उलुरु का रंग? विशेषज्ञों के अनुसार, उलुरु में मौजूद आयरन (लौह) युक्त खनिज समय के साथ ऑक्सीकरण (Oxidation) की प्रक्रिया से लाल रंग के हो गए हैं। सूरज की किरणें अलग-अलग कोणों से पड़ने पर यह चट्टान अलग-अलग रंगों का भ्रम पैदा करती है। दिनभर में इसकी रंगत कुछ इस तरह नजर आती है— सूर्योदय के समय हल्का गुलाबी सुबह सुनहरा नारंगी दोपहर में गहरा जंग जैसा लाल सूर्यास्त के समय लाल, बैंगनी और मैरून रंग आस्था से भी जुड़ा है यह पर्वत उलुरु केवल प्राकृतिक अजूबा ही नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी अनांगु (Anangu) समुदाय के लिए बेहद पवित्र स्थल भी माना जाता है। हजारों वर्षों से यह स्थान उनकी संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। भारत में कौन-सा पर्वत बदलता है रंग? अगर भारत की बात करें, तो कंचनजंगा पर्वत (सिक्किम) भी सूरज की रोशनी के साथ अपनी रंगत बदलता हुआ दिखाई देता है। सूर्योदय के समय इसकी बर्फीली चोटियां सुनहरी और गुलाबी आभा से चमक उठती हैं, जबकि सूर्यास्त के समय नारंगी और हल्के लाल रंग का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। इसी वजह से इसे देखने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। घूमने का सबसे अच्छा समय उलुरु (ऑस्ट्रेलिया): मई से सितंबर के बीच मौसम सबसे सुहावना रहता है और सूर्योदय व सूर्यास्त के समय रंग बदलने का नजारा सबसे खूबसूरत दिखाई देता है। कंचनजंगा (सिक्किम, भारत): अक्टूबर से दिसंबर और मार्च से मई का समय सबसे बेहतर माना जाता है। इन महीनों में आसमान साफ रहता है और पर्वत की बदलती रंगत स्पष्ट दिखाई देती है। ध्यान दें: पर्वतों की रंगत में बदलाव मुख्य रूप से सूर्य की रोशनी, मौसम और वातावरण की स्थिति पर निर्भर करता है। यह एक प्राकृतिक प्रकाशीय प्रभाव (Optical Effect) है।
नई दिल्ली: भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में उपभोक्ताओं की पसंद तेजी से बदल रही है। एक दशक से भी अधिक समय में पहली बार एंट्री-लेवल (बजट) स्मार्टफोन और टीवी की बिक्री में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, मिड-रेंज और प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे बाजार का रुझान महंगे और फीचर-समृद्ध डिवाइसों की ओर जाता दिखाई दे रहा है। मार्केट रिसर्च एजेंसी काउंटरपॉइंट रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से मई के बीच 12,000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन की बिक्री में 54 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत 12,000 से 30,000 रुपये वाले स्मार्टफोन की बिक्री 17 प्रतिशत बढ़ी, जबकि 30,000 रुपये से अधिक कीमत वाले प्रीमियम स्मार्टफोन की बिक्री में 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। बजट स्मार्टफोन की हिस्सेदारी घटी तेजी से बदलते बाजार के कारण कुल स्मार्टफोन बिक्री में बजट सेगमेंट की हिस्सेदारी भी काफी कम हो गई है। मुख्य आंकड़े: ₹12,000 से कम कीमत वाले स्मार्टफोन की बिक्री में 54% गिरावट ₹12,000–₹30,000 श्रेणी में 17% की बढ़ोतरी ₹30,000 से अधिक कीमत वाले प्रीमियम फोन की बिक्री में 6% वृद्धि कुल बाजार में बजट स्मार्टफोन की हिस्सेदारी घटकर लगभग 14% रह गई विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ता अब बेहतर कैमरा, लंबा सॉफ्टवेयर सपोर्ट, 5G कनेक्टिविटी और प्रीमियम फीचर्स वाले स्मार्टफोन को प्राथमिकता दे रहे हैं। क्यों बढ़ रही है प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग? उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, महंगे स्मार्टफोन की निर्माण लागत पर मेमोरी चिप की कीमतों का असर अपेक्षाकृत कम पड़ता है। यही वजह है कि प्रीमियम स्मार्टफोन की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई, जबकि बजट डिवाइसों की लागत पर इसका अधिक प्रभाव पड़ा। इसके अलावा: बेहतर कैमरा टेक्नोलॉजी AI आधारित फीचर्स हाई-रिफ्रेश रेट डिस्प्ले लंबी सॉफ्टवेयर अपडेट अवधि आसान EMI और फाइनेंसिंग विकल्प जैसे कारण भी प्रीमियम सेगमेंट की मांग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। टीवी बाजार में भी बदला ट्रेंड सिर्फ स्मार्टफोन ही नहीं, टीवी बाजार में भी उपभोक्ताओं की पसंद बदलती दिखाई दे रही है। जनवरी से जून के बीच: 32-इंच टीवी की बिक्री में 35% से अधिक गिरावट दर्ज की गई। कुल टीवी बाजार में इनकी हिस्सेदारी 45% से घटकर 38% रह गई। 43-इंच और उससे बड़े टीवी की मांग में 8% से 15% तक की वृद्धि हुई। छोटे टीवी क्यों हो रहे हैं महंगे? रिपोर्ट के अनुसार, 32-इंच टीवी की औसत कीमत में लगभग ₹3,000 से ₹3,500 तक की बढ़ोतरी हुई है। कीमत बढ़ने के कारण कई ग्राहक अब थोड़ा अधिक खर्च करके बड़ी स्क्रीन वाले स्मार्ट टीवी खरीदना पसंद कर रहे हैं। बाजार क्या संकेत दे रहा है? बदलते ट्रेंड से साफ है कि भारतीय उपभोक्ता अब केवल कम कीमत नहीं, बल्कि बेहतर फीचर्स, बड़ी स्क्रीन, बेहतर प्रदर्शन और लंबे समय तक उपयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं। आसान फाइनेंसिंग विकल्प और बढ़ती आय भी मिड-रेंज एवं प्रीमियम इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग को मजबूती दे रहे हैं। आने वाले समय में कंपनियां भी इसी सेगमेंट पर अधिक फोकस करती दिखाई दे सकती हैं।
नई दिल्ली: कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी का रविवार को 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन पर भारत सरकार ने 13 जुलाई 2026 को पूरे देश में एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में आधिकारिक जानकारी जारी की है। पूरे देश में आधा झुका रहेगा तिरंगा विदेश मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय शोक के दौरान देशभर की सभी सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) आधा झुका रहेगा। इसके अलावा, इस दिन किसी भी प्रकार के आधिकारिक मनोरंजन या सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे। पीएम मोदी ने जताया गहरा शोक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर शोक व्यक्त करते हुए शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी को एक दूरदर्शी नेता बताया। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि शेख हमद ने कतर को आधुनिक और समृद्ध राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि भारत उन्हें हमेशा एक "सच्चे मित्र" के रूप में याद रखेगा। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि उन्हें फरवरी 2024 में कतर यात्रा के दौरान शेख हमद से मिलने का अवसर मिला था। उन्होंने कतर के वर्तमान अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी, शाही परिवार और कतर की जनता के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। भारत की ओर से कतर जाएंगे किरेन रिजिजू केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू भारत सरकार की ओर से कतर जाएंगे। वे वहां शाही परिवार से मुलाकात कर भारत की ओर से आधिकारिक संवेदना व्यक्त करेंगे। 18 वर्षों तक रहे कतर के अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी ने करीब 18 वर्षों तक कतर के अमीर के रूप में शासन किया। जून 2013 में उन्होंने स्वेच्छा से सत्ता अपने बेटे और वर्तमान अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी को सौंप दी थी। कतर को वैश्विक पहचान दिलाने का श्रेय अपने कार्यकाल के दौरान शेख हमद ने कतर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान दिलाई। उनके नेतृत्व में देश ने— कूटनीति, वैश्विक निवेश, मीडिया, खेल, और आर्थिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की। उनके शासनकाल में कतर खाड़ी क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली देशों में शामिल हुआ। भारत-कतर संबंधों में निभाई अहम भूमिका शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी को भारत और कतर के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का समर्थक माना जाता था। उनके कार्यकाल में दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, निवेश और रणनीतिक सहयोग में उल्लेखनीय विस्तार हुआ। भारत सरकार ने उनके निधन को दोनों देशों के संबंधों के लिए एक बड़ी क्षति बताया है।
नई दिल्ली/ढाका: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने घोषणा की है कि वह इस वर्ष दिसंबर के आसपास अपने देश लौटने की योजना बना रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि वापसी पर उनकी गिरफ्तारी हो सकती है या उनकी जान को खतरा हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद वह स्वदेश लौटेंगी और अदालत के सामने आत्मसमर्पण करेंगी। 'गिरफ्तार करें या मार दें, मुझे अपने देश लौटना है' समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा कि अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद उन्हें बांग्लादेश छोड़कर भारत आना पड़ा था। उन्होंने कहा, "वे मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, वे मुझे मार भी सकते हैं। फिर भी मुझे अपने देश लौटना ही होगा।" हसीना ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी प्रस्तावित वापसी को लेकर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से कोई बातचीत नहीं हुई है। कोर्ट में करेंगी आत्मसमर्पण पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि बांग्लादेश लौटने के बाद वह अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगी और कानूनी प्रक्रिया का सामना करेंगी। अवामी लीग नेताओं पर कार्रवाई का आरोप शेख हसीना ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मृत्यु भी होती है तो वह अपने देश की धरती पर ही हो, जहां उनके माता-पिता दफन हैं। मानवता के खिलाफ अपराध मामले में मौत की सजा शेख हसीना का यह बयान ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है। यह मामला 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और प्रदर्शनकारियों की मौत से जुड़ा है। न्यायाधिकरण का आरोप है कि तत्कालीन सरकार प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और हिंसा रोकने में विफल रही। पूर्व गृह मंत्री को भी मौत की सजा इसी मामले में बांग्लादेश के पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को भी मौत की सजा सुनाई गई है। वहीं, पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को पांच वर्ष की जेल की सजा दी गई है। न्यायाधिकरण ने सरकार को शेख हसीना और असदुज्जमान खान कमाल की संपत्तियां जब्त करने का भी निर्देश दिया है। राजनीतिक संकट के बीच वापसी की तैयारी शेख हसीना की संभावित वापसी ऐसे समय में सामने आई है जब बांग्लादेश में राजनीतिक हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। यदि वह दिसंबर में लौटती हैं, तो उन्हें अदालत में पेश होकर कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा। वहीं, उनकी वापसी देश की राजनीति पर भी बड़ा असर डाल सकती है।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने 12 प्रतिशत से अधिक इथाइल अल्कोहल वाली दवाओं की बिना डॉक्टर की पर्ची बिक्री पर रोक लगा दी है। इस फैसले का चिकित्सा विशेषज्ञों ने स्वागत किया है। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से फर्जी प्रिस्क्रिप्शन तैयार किए जाने की संभावना नए नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए चुनौती बन सकती है। डॉक्टर ने बताया AI से बढ़ी नई चुनौती दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. धीरन गुप्ता ने कहा कि ऑनलाइन फार्मेसी के बढ़ते चलन के बीच AI का दुरुपयोग भी चिंता का विषय है। उनके अनुसार, अब AI की मदद से नकली डॉक्टर की पर्चियां तैयार करना पहले की तुलना में आसान हो गया है। ऐसे में केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि ऑनलाइन दवा बिक्री की प्रभावी निगरानी और सत्यापन व्यवस्था भी जरूरी होगी। बच्चों पर पड़ सकता है गंभीर असर डॉ. गुप्ता ने कहा कि अल्कोहल युक्त दवाओं का असर हमेशा तुरंत दिखाई नहीं देता, लेकिन बच्चों में इसका प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि कई बार माता-पिता अनजाने में ऐसी दवाएं बच्चों को दे देते हैं, जिससे भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। उन्होंने बच्चों के लिए शुगर-फ्री और कम जोखिम वाले विकल्पों को प्राथमिकता देने की सलाह दी। नए नियमों का स्वागत, लेकिन लागू करना चुनौती डॉ. गुप्ता का कहना है कि सरकार का फैसला सही दिशा में उठाया गया कदम है, लेकिन इसका प्रभावी पालन सुनिश्चित करना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार, दवा विक्रेताओं, ऑनलाइन फार्मेसी प्लेटफॉर्म और अभिभावकों सभी को जिम्मेदारी के साथ नियमों का पालन करना होगा। क्या है सरकार का नया नियम? स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 12 प्रतिशत से अधिक इथाइल अल्कोहल वाली दवाओं की बिक्री पर नए प्रतिबंध लागू किए हैं। नए नियमों के तहत: 12% से अधिक इथाइल अल्कोहल वाली दवाएं अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं बेची जा सकेंगी। ऐसी दवाओं की बिक्री केवल वैध प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर होगी। बिना लाइसेंस या निर्धारित प्रक्रिया के इन दवाओं की बिक्री पर रोक रहेगी। क्यों लिया गया यह फैसला? सरकार का कहना है कि कुछ अल्कोहल युक्त दवाओं का दुरुपयोग नशे के उद्देश्य से किए जाने की शिकायतें सामने आ रही थीं। इसी वजह से इन दवाओं की बिक्री को अधिक नियंत्रित करने का निर्णय लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऑनलाइन प्रिस्क्रिप्शन की डिजिटल जांच और सत्यापन प्रणाली मजबूत नहीं की गई, तो AI से तैयार फर्जी पर्चियां इस व्यवस्था के लिए नई चुनौती बन सकती हैं।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान उस समय असामान्य स्थिति पैदा हो गई, जब एक याचिकाकर्ता ने कथित तौर पर अदालत में अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और अपने दस्तावेज हवा में उछाल दिए। स्थिति बिगड़ने पर कोर्ट के निर्देश पर सुरक्षाकर्मियों ने उसे कोर्टरूम से बाहर निकाल दिया। सुनवाई के दौरान बढ़ा विवाद यह मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा था। सुनवाई न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ के समक्ष चल रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, याचिकाकर्ता काला कोट पहनकर अदालत पहुंचा था, हालांकि उसने अधिवक्ताओं वाला बैंड नहीं पहना था। सुनवाई के दौरान उसने अदालत के प्रति आक्रामक रुख अपनाया। जज से कहा- "मैं आपको आदेश देता हूं" सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कथित तौर पर कहा, "न्यायिक सेवक महोदय, मैं आपको आदेश देता हूं कि आप लखनऊ के एसीपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दें।" इस पर न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए पूछा, "क्या आप हमें आदेश दे रहे हैं?" अभद्र भाषा और दस्तावेज फेंकने का आरोप बताया गया कि इसके बाद याचिकाकर्ता ने कहा कि उसकी ओर से सब कुछ रिकॉर्ड पर है। आरोप है कि उसने इसके बाद अभद्र भाषा का प्रयोग किया और अपने मामले से जुड़े दस्तावेज अदालत कक्ष में हवा में उछाल दिए। स्थिति बिगड़ते देख कोर्ट की सुरक्षा में तैनात कर्मी तुरंत आगे आए और अदालत के निर्देश पर याचिकाकर्ता को कोर्टरूम से बाहर ले गए। सुनवाई सामान्य रूप से जारी रही याचिकाकर्ता को बाहर ले जाने के बाद अदालत की कार्यवाही सामान्य रूप से जारी रही। फिलहाल इस घटना को लेकर पीठ की ओर से खुली अदालत में कोई अलग आदेश पारित नहीं किया गया है। हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने पहुंचा था याचिकाकर्ता इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने आया था। हालांकि सुनवाई के दौरान उसके व्यवहार के कारण कुछ समय के लिए अदालत का माहौल तनावपूर्ण हो गया। घटना के बाद कोर्ट की कार्यवाही बिना किसी अन्य व्यवधान के आगे बढ़ाई गई।
नई दिल्ली: भारत दौरे पर आए अफगानिस्तान के कृषि, सिंचाई और पशुपालन मंत्री मौलवी अताउल्लाह ओमारी ने भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों को लेकर सकारात्मक संदेश दिया है। उन्होंने भारत में मिले स्वागत की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वे अपने ही लोगों के बीच हैं। ओमारी ने कहा, "भारत मुझे अपना देश लगता है, हमारा DNA एक ही है।" उनके इस बयान को दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भारत में मिला गर्मजोशी भरा स्वागत एएनआई के अनुसार, मौलवी अताउल्लाह ओमारी ने कहा कि यह उनकी भारत की पहली यात्रा है। उन्होंने भारत सरकार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और भारतीय जनता का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें यहां बेहद सम्मान और अपनापन मिला। उनके मुताबिक, यह स्वागत केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि पूरे अफगानिस्तान के लोगों के प्रति भारत की सद्भावना को दर्शाता है। अफगान जनता के लिए उम्मीद का संदेश ओमारी ने कहा कि भारत की मेहमाननवाजी अफगानिस्तान के लोगों के लिए उम्मीद का संदेश है। उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता संवाद विकास, सहयोग और बेहतर भविष्य की नई संभावनाएं खोल सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ मजबूत संबंध अफगानिस्तान के लिए लाभकारी साबित होंगे। इन क्षेत्रों में बढ़ सकता है सहयोग विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अफगानिस्तान के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की संभावना है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— कृषि और आधुनिक खेती सिंचाई एवं जल प्रबंधन पशुपालन और डेयरी विकास खाद्य सुरक्षा शिक्षा और क्षमता निर्माण स्वास्थ्य सेवाएं मानवीय सहायता और तकनीकी सहयोग भारत पहले भी अफगान किसानों के प्रशिक्षण, गेहूं और दवाइयों की आपूर्ति तथा कई विकास परियोजनाओं में सहयोग करता रहा है। पुराने रिश्तों को फिर मजबूत करने की कोशिश भारत और अफगानिस्तान के बीच दशकों पुराने सांस्कृतिक, व्यापारिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। वर्ष 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के संबंधों की गति धीमी हुई थी, लेकिन भारत ने मानवीय सहायता जारी रखी और काबुल में अपना तकनीकी मिशन भी दोबारा सक्रिय किया। विशेषज्ञों का मानना है कि मौलवी अताउल्लाह ओमारी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ाने और व्यावहारिक सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
Healthy Diet For Senior Citizens: रोहू, कतला, हिल्सा, टूना और सार्डिन जैसी मछलियां प्रोटीन, ओमेगा-3, विटामिन D और B12 का बेहतरीन स्रोत हैं। जानें इनके स्वास्थ्य लाभ, अनुमानित कैलोरी, हेल्दी कुकिंग टिप्स और सेवन का सही तरीका। उम्र बढ़ने के साथ शरीर की पोषण संबंधी जरूरतें बदलने लगती हैं। 60 वर्ष के बाद मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, हड्डियों का घनत्व कम हो सकता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित होने लगती है। ऐसे में संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर आहार स्वस्थ जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सप्ताह में दो से तीन बार सीमित मात्रा में मछली का सेवन बुजुर्गों के लिए लाभदायक हो सकता है। मछली में उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन D, विटामिन B12, आयोडीन और सेलेनियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हृदय, मस्तिष्क, हड्डियों और इम्यून सिस्टम के बेहतर कार्य में मदद कर सकते हैं। 1. रोहू (Rohu) अनुमानित कैलोरी: लगभग 170 kcal प्रति 100 ग्राम कैसे बनाएं :- रोहू को हल्दी, नमक, अदरक-लहसुन पेस्ट और नींबू के रस के साथ 20 मिनट मेरिनेट करें। इसके बाद नॉन-स्टिक पैन में हल्के सरसों के तेल के साथ दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंक लें। फायदे :- हाई क्वालिटी प्रोटीन का अच्छा स्रोत हड्डियों और मांसपेशियों के लिए लाभदायक पाचन में अपेक्षाकृत हल्की दिल की सेहत को सपोर्ट करती है 2. कतला (Katla) अनुमानित कैलोरी: लगभग 160 kcal प्रति 100 ग्राम कैसे बनाएं :- हल्के मसालों में मेरिनेट करें। प्याज और टमाटर की हल्की ग्रेवी तैयार कर उसमें मछली को धीमी आंच पर 10–12 मिनट पकाएं। फायदे विटामिन B12 से भरपूर शरीर को ऊर्जा देने में सहायक मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मददगार प्रोटीन का अच्छा स्रोत 3. हिल्सा (Hilsa/इलिश) अनुमानित कैलोरी: लगभग 210 kcal प्रति 100 ग्राम कैसे बनाएं :- सरसों के पेस्ट, हल्दी और नमक के साथ मेरिनेट कर 15 मिनट तक स्टीम करें। फायदे ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर हृदय और मस्तिष्क के लिए लाभदायक आंखों और त्वचा की सेहत को सपोर्ट करती है 4. टूना (Tuna) अनुमानित कैलोरी: लगभग 132 kcal प्रति 100 ग्राम कैसे बनाएं :- नींबू, लहसुन, काली मिर्च और थोड़ा ऑलिव ऑयल लगाकर 8–10 मिनट तक ग्रिल करें। फायदे कम फैट और हाई प्रोटीन हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहतर विटामिन D और B12 का अच्छा स्रोत वजन नियंत्रित रखने में सहायक 5. सार्डिन (Sardine) अनुमानित कैलोरी: लगभग 200 kcal प्रति 100 ग्राम कैसे बनाएं :- हल्के मसालों के साथ मेरिनेट कर एयर फ्रायर, ग्रिल या स्टीम में पकाएं। फायदे कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर हड्डियों को मजबूत बनाने में मददगार ओमेगा-3 का अच्छा स्रोत इम्यूनिटी को सपोर्ट करती है क्या मछली कैंसर से बचाती है? वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर मछलियां शरीर में सूजन कम करने में मदद कर सकती हैं। स्वस्थ आहार का हिस्सा होने के कारण ये कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकती हैं। हालांकि, कोई भी मछली कैंसर की रोकथाम या इलाज की गारंटी नहीं देती। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से दूरी और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। बुजुर्गों के लिए सबसे हेल्दी कुकिंग स्टाइल स्टीम फिश ग्रिल्ड फिश एयर फ्राइड फिश हल्की ग्रेवी वाली फिश करी कम तेल में पैन-सीयर फिश डीप फ्राई मछली का सेवन सीमित मात्रा में करना बेहतर माना जाता है। किसके साथ करें सर्व? ब्राउन राइस मल्टीग्रेन रोटी दलिया स्टीम सब्जियां हरी सलाद दाल का सूप नींबू हरी चटनी जरूरी कुकिंग टिप्स हमेशा ताजी मछली का चयन करें। पकाने से पहले अच्छी तरह साफ करें। हल्दी और नींबू से मेरिनेट करने पर गंध कम होती है। कम तेल और हल्के मसालों का इस्तेमाल करें। सप्ताह में 2–3 बार 100–150 ग्राम मछली पर्याप्त मानी जाती है (व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार)। यदि फिश एलर्जी, किडनी रोग या कोई गंभीर बीमारी है तो सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। निष्कर्ष:- रोहू, कतला, हिल्सा, टूना और सार्डिन जैसी भारत में आसानी से मिलने वाली मछलियां बुजुर्गों के लिए प्रोटीन, ओमेगा-3, विटामिन D और B12 का बेहतरीन स्रोत हैं। इन्हें स्टीम, ग्रिल या कम तेल में पका कर खाने से बेहतर पोषण मिलता है और यह हृदय, हड्डियों, मांसपेशियों तथा संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।
वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए नए प्रतिबंध कानून की तैयारी कर रहा है। यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो रूस से तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे देशों में भारत भी शामिल है, जो पिछले कुछ वर्षों में रूस से बड़ी मात्रा में रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीद रहा है। क्या है नया अमेरिकी प्रस्ताव? अमेरिकी संसद में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक सांसदों के एक समूह ने रूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों वाला विधेयक आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। इस पहल का नेतृत्व रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम और रोजर विकर तथा डेमोक्रेटिक सांसद रिचर्ड ब्लूमेंथल और जीन शाहीन कर रहे हैं। सांसदों का तर्क है कि यूक्रेन युद्ध जारी रहने के कारण रूस की ऊर्जा आय को कम करना जरूरी है। इसलिए उन देशों पर भी आर्थिक दबाव बनाया जाए, जो रूस से ऊर्जा खरीदकर उसकी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। भारत पर क्या पड़ सकता है असर? यदि प्रस्तावित कानून लागू होता है, तो रूस से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, विधेयक के शुरुआती मसौदे में 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, हालांकि बाद में इसमें संशोधन किए गए हैं। अंतिम कानून में क्या प्रावधान होंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है। यदि अमेरिका ऐसे टैरिफ लागू करता है, तो भारत के अमेरिका के साथ व्यापार और ऊर्जा आयात नीति पर असर पड़ सकता है। राष्ट्रपति को मिलेगी राहत देने की शक्ति प्रस्तावित विधेयक में अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार देने का भी प्रावधान है कि वे राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए किसी मित्र देश को 180 दिनों तक की छूट दे सकें। इसका मतलब है कि यदि अमेरिका चाहे, तो भारत जैसे रणनीतिक साझेदार देशों को अस्थायी राहत मिल सकती है। अमेरिकी संसद में मिल रहा समर्थन इस विधेयक को अमेरिकी सीनेट में व्यापक समर्थन मिल रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, 84 सीनेटर इस प्रस्ताव के पक्ष में हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति का समर्थन कर चुके हैं। हालांकि, विधेयक को अभी संसद से पारित होकर कानून बनना बाकी है। भारत क्यों है अहम? यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से रियायती दरों पर बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है। इससे भारत को ऊर्जा लागत नियंत्रित रखने में मदद मिली है। अमेरिका ने पहले कुछ परिस्थितियों में इस व्यापार के लिए अस्थायी छूट दी थी, लेकिन यह लाइसेंस 17 जून को समाप्त हो चुका है। आगे क्या होगा? यदि अमेरिकी कांग्रेस इस विधेयक को मंजूरी देती है और राष्ट्रपति इसे कानून का रूप देते हैं, तो भारत सहित कई देशों पर अतिरिक्त टैरिफ या अन्य प्रतिबंध लग सकते हैं। हालांकि, अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कानून का अंतिम स्वरूप क्या होता है और क्या अमेरिका भारत जैसे रणनीतिक साझेदार देशों को कोई विशेष छूट देता है। फिलहाल भारत और अन्य प्रभावित देश अमेरिकी फैसले पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव पर भारत ने पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने क्षेत्र में लगातार बढ़ते हमलों पर गहरी चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है। भारत ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा संकट का स्थायी समाधान सैन्य कार्रवाई से नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से ही संभव है। पश्चिम एशिया की स्थिति पर भारत की चिंता विदेश मंत्रालय ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि हाल के घटनाक्रम, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों के बाद क्षेत्र की स्थिति और गंभीर हो गई है। मंत्रालय के अनुसार, इससे क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। भारत ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए सभी संबंधित देशों को संयम दिखाना चाहिए और ऐसे कदमों से बचना चाहिए जो तनाव को और बढ़ा सकते हैं। बातचीत और कूटनीति पर दिया जोर भारत ने अपने बयान में कहा कि किसी भी विवाद का शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान केवल संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से ही निकाला जा सकता है। विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से आग्रह किया कि वे संघर्ष को बढ़ाने के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाएं। ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर चिंता भारत ने कहा कि उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को बिना किसी बाधा के जारी रखना शामिल है। विदेश मंत्रालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए और ऐसी किसी भी कार्रवाई से बचना चाहिए जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो। हमलों के बाद बढ़ा तनाव मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कथित तौर पर ईरान की ओर से हुए हमलों के जवाब में अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की है। वहीं, ईरान की ओर से कुवैत और बहरीन की दिशा में मिसाइलें दागे जाने की भी खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं के बाद क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है और बड़े सैन्य संघर्ष की आशंकाएं भी तेज हो गई हैं। ट्रंप ने दी आगे की कार्रवाई की चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि हालिया घटनाओं के बाद युद्ध-विराम की स्थिति समाप्त हो चुकी है और अमेरिका आगे की सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है। उनके इस बयान के बाद पूरे पश्चिम एशिया में हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं। भारत ने ऐसे समय में संयम और कूटनीति की अपील करते हुए स्पष्ट संकेत दिया है कि वह क्षेत्र में शांति, स्थिरता और संवाद के पक्ष में है।
ढाका: तीस्ता नदी परियोजना को लेकर भारत की चिंताओं के बीच चीन ने पहली बार अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट किया है। बांग्लादेश में चीन के राजदूत याओ वेन ने कहा कि चीन इस परियोजना में केवल बांग्लादेश के अनुरोध पर सहयोग कर रहा है और इसके पीछे उसका कोई अन्य रणनीतिक उद्देश्य नहीं है। ढाका स्थित चीनी दूतावास में आयोजित प्रेस वार्ता में याओ वेन ने कहा कि तीस्ता परियोजना पूरी तरह बांग्लादेश के विकास और वहां के लोगों की जरूरतों से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि चीन इस परियोजना को सफल बनाने के लिए हरसंभव तकनीकी और आर्थिक सहयोग देने को तैयार है। तारिक रहमान की चीन यात्रा में रही तीस्ता परियोजना की चर्चा चीन के राजदूत का यह बयान बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की हालिया चीन यात्रा के बाद सामने आया है। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम परियोजनाओं पर चर्चा हुई, जिनमें तीस्ता नदी प्रबंधन परियोजना प्रमुख रही। याओ वेन ने कहा कि तीस्ता नदी के आसपास रहने वाले लाखों लोगों की आजीविका इस परियोजना से जुड़ी हुई है। ऐसे में चीन बांग्लादेश की जरूरतों के अनुरूप इस परियोजना में अधिकतम सहयोग देगा। यूनुस सरकार के समय हुए समझौते पर भी दी सफाई प्रेस वार्ता के दौरान जब पिछली अंतरिम सरकार के कार्यकाल में एक चीनी कंपनी और बांग्लादेशी संस्था के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के बारे में सवाल पूछा गया तो याओ वेन ने कहा कि वह समझौता केवल एक कंपनी और सरकारी संस्था के बीच था। उन्होंने बताया कि अब परियोजना सरकार-स्तर पर आगे बढ़ रही है और चीन पहले विस्तृत सर्वेक्षण कराएगा, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी। भारत की चिंताओं पर क्या कहा? जब पत्रकारों ने पूछा कि भारत इस परियोजना को लेकर चिंता जता रहा है और यदि ऊपरी हिस्से से पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा गया तो परियोजना पर क्या असर पड़ेगा, तो याओ वेन ने कहा कि यह चीन का विषय नहीं है। उन्होंने कहा, "चीन केवल बांग्लादेश की अपेक्षाओं के अनुरूप इस परियोजना में सहयोग कर रहा है। इसके अलावा हमारा कोई अन्य उद्देश्य या चिंता नहीं है।" बांग्लादेश-म्यांमार-चीन कॉरिडोर पर भी रखी बात याओ वेन ने बांग्लादेश-म्यांमार-चीन आर्थिक कॉरिडोर (BMCC) का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह कोई नई अवधारणा नहीं है। करीब 15 वर्ष पहले चीन ने बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार (BCIM) आर्थिक कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा था, लेकिन यह योजना अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी। भारत के लिए भी खुला रखा प्रस्ताव चीन के राजदूत ने कहा कि यदि भारत भविष्य में इस आर्थिक कॉरिडोर से जुड़ना चाहता है तो चीन उसका स्वागत करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें शामिल होना या नहीं होना पूरी तरह भारत का निर्णय होगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल चीन बांग्लादेश और म्यांमार के साथ क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहा है। भारत की क्यों बढ़ी है चिंता? तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है। नदी के जल बंटवारे और प्रबंधन का मुद्दा लंबे समय से भारत और बांग्लादेश के बीच चर्चा का विषय रहा है। भारत की चिंता इस बात को लेकर भी है कि प्रस्तावित परियोजना सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के निकट स्थित है, जिसे देश के पूर्वोत्तर राज्यों से संपर्क बनाए रखने के लिहाज से बेहद रणनीतिक क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में इस परियोजना को क्षेत्रीय और सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई दिल्ली: भारत सरकार द्वारा WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर रोक लगाए जाने के बाद स्वदेशी टेक कंपनी Zoho ने भी बड़ा फैसला लिया है। कंपनी के संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने घोषणा की है कि उनका मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Arattai भी यूजरनेम आधारित अकाउंट फीचर को बंद करेगा। इस कदम के साथ Arattai सरकार के निर्देशों का समर्थन करने वाला पहला भारतीय मैसेजिंग ऐप बन गया है। श्रीधर वेम्बु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार के नए दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए Arattai में यूजरनेम आधारित अकाउंट की सुविधा समाप्त की जाएगी। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह बदलाव कब तक लागू होगा, लेकिन स्पष्ट किया कि कंपनी नियामकीय नियमों का पूरी तरह पालन करेगी। पहले से मौजूद था यूजरनेम फीचर Arattai में यूजरनेम के आधार पर अकाउंट बनाने और इस्तेमाल करने की सुविधा पहले से उपलब्ध थी। इस फीचर के जरिए यूजर बिना मोबाइल नंबर साझा किए दूसरे लोगों से जुड़ सकते थे। लेकिन अब कंपनी इसे चरणबद्ध तरीके से हटाने की तैयारी कर रही है। वेम्बु के इस फैसले को भारत सरकार की डिजिटल सुरक्षा और साइबर फ्रॉड रोकने की नीति के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। WhatsApp को सरकार ने क्यों रोका? हाल ही में Meta ने WhatsApp के लिए यूजरनेम फीचर पेश करने की घोषणा की थी। इस फीचर का उद्देश्य यूजर्स को अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना चैट करने की सुविधा देना था। कंपनी का दावा था कि इससे प्राइवेसी और सुरक्षा बेहतर होगी। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस फीचर को लेकर गंभीर सुरक्षा चिंताएं जताईं। सरकार का मानना है कि यदि यूजरनेम सिस्टम बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के लागू किया गया, तो साइबर अपराधी बैंक, सरकारी संस्थानों, कंपनियों और प्रसिद्ध हस्तियों के नाम से फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों को धोखा दे सकते हैं। इससे फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट, वित्तीय धोखाधड़ी और ऑनलाइन स्कैम जैसे मामलों में बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है। Meta से मांगी गई तकनीकी जानकारी रिपोर्ट्स के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta से इस फीचर की विस्तृत तकनीकी जानकारी मांगी है। इसमें यूजरनेम सिस्टम का आर्किटेक्चर, सुरक्षा व्यवस्था, पहचान सत्यापन और धोखाधड़ी रोकने के उपायों की जानकारी शामिल है। जब तक सरकार और Meta के बीच इस विषय पर चर्चा पूरी नहीं हो जाती और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान नहीं हो जाता, तब तक भारत में WhatsApp के यूजरनेम फीचर के रोलआउट पर रोक रहेगी। Meta ने क्या दी सफाई? Meta का कहना है कि उसने कई महत्वपूर्ण यूजरनेम पहले से ही सुरक्षित (Reserved) रखे हैं। इनमें सरकारी संस्थान, प्रमुख कंपनियां, मशहूर हस्तियां और Meta Verified अकाउंट शामिल हैं। यदि कोई सामान्य यूजर ऐसे नाम से यूजरनेम बनाने की कोशिश करता है, तो सिस्टम उसे बताएगा कि वह नाम उपलब्ध नहीं है। कंपनी का दावा है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य फर्जी अकाउंट और पहचान की चोरी को रोकना है। डिजिटल सुरक्षा पर बढ़ा फोकस WhatsApp और Arattai से जुड़े हालिया घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए सुरक्षा और पहचान सत्यापन से जुड़े नियम लगातार सख्त हो रहे हैं। सरकार चाहती है कि नए फीचर्स लॉन्च करने से पहले कंपनियां पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करें, ताकि ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।
काराकास: दक्षिण अमेरिकी देश Venezuela में आए भीषण भूकंपों के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार अब तक 1,943 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 58,870 से अधिक इमारतें क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि मलबा हटाने का कार्य जारी होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। हजारों मौतों की आशंका अमेरिकी United States Geological Survey के आकलन के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में वास्तविक नुकसान और मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। संयुक्त राष्ट्र के वेनेजुएला स्थित मानवीय समन्वयक Gianluca Rampolla ने बताया कि संभावित बढ़ती मृत्यु संख्या को देखते हुए सरकार और संयुक्त राष्ट्र लगभग 10,000 बॉडी बैग की व्यवस्था करने की तैयारी कर रहे हैं। राहत कार्यों में संसाधनों की कमी भूकंप से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक La Guaira में राहत अभियान जारी है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार कई स्थानों पर ईंधन और भारी मशीनों की कमी के कारण मलबा हटाने का काम प्रभावित हो रहा है। भारत का 'ऑपरेशन अमिस्ताद' भारत ने प्रभावित लोगों की सहायता के लिए ऑपरेशन अमिस्ताद (Operation Amistad) के तहत चिकित्सा सहायता अभियान शुरू किया है। भारतीय मेडिकल टीमें प्रभावित इलाकों में घायलों का उपचार कर रही हैं और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। S. Jaishankar ने डॉक्टर्स डे के अवसर पर वेनेजुएला में तैनात भारतीय चिकित्सा दलों की सराहना करते हुए उनके मानवीय योगदान को प्रेरणादायक बताया। विदेश मंत्रालय ने साझा किए राहत कार्य Ministry of External Affairs के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें साझा कीं, जिनमें भारतीय फील्ड हॉस्पिटल की टीमें प्रभावित लोगों को चिकित्सा सहायता देती दिखाई दे रही हैं। साझा किए गए वीडियो में स्थानीय नागरिकों ने भी भारतीय मेडिकल टीमों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कठिन समय में भारत की सहायता उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रही है। नासा का आकलन NASA के शोधकर्ताओं के अनुसार, हालिया दोहरे भूकंपों से वेनेजुएला के मध्य और उत्तरी हिस्सों में करीब 58,870 इमारतें क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। राहत एजेंसियां अभी भी खोज एवं बचाव, चिकित्सा सहायता और पुनर्वास कार्यों में जुटी हुई हैं, जबकि प्रभावित क्षेत्रों में हालात सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।
यरुशलम/नई दिल्ली: Sharren Haskel ने कहा है कि ईरान पर भरोसा करना आसान नहीं है और भारत सहित सभी लोकतांत्रिक देशों को सतर्क रहना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु एवं क्षेत्रीय तनाव से जुड़े मुद्दों पर बातचीत जारी है। अमेरिका-ईरान वार्ता पर जताया संदेह समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, शैरेन हैस्केल ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अमेरिका-ईरान वार्ता से बहुत अधिक उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने ईरान को एक आक्रामक शासन बताते हुए कहा कि केवल बातचीत पर्याप्त नहीं है, बल्कि भरोसा तभी कायम हो सकता है जब उसके व्यवहार में वास्तविक बदलाव दिखाई दे। इजराइल लंबे समय से लगाता रहा है आरोप इजराइल लगातार ईरान पर आरोप लगाता रहा है कि वह पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ाने, विभिन्न सशस्त्र समूहों का समर्थन करने और अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर, ईरान इन आरोपों को खारिज करता रहा है और कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है तथा इजराइल क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है। दोनों देशों के बीच तनाव 1979 की Iranian Revolution के बाद से लगातार बना हुआ है और हाल के वर्षों में कई बार सैन्य टकराव भी देखने को मिले हैं। भारत का संतुलित रुख भारत ने अब तक पश्चिम एशिया के मुद्दों पर संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई है। भारत के इजराइल के साथ रक्षा, कृषि और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में मजबूत संबंध हैं। वहीं ईरान भारत की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है। इसी कारण भारत दोनों देशों के साथ अपने संबंध बनाए रखते हुए किसी एक पक्ष का खुला समर्थन करने से बचता रहा है। वैश्विक नजर अमेरिका-ईरान वार्ता पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवादों का समाधान तलाशना है। इजराइल लगातार इस प्रक्रिया को लेकर अपनी आशंकाएं व्यक्त करता रहा है। शैरेन हैस्केल का ताजा बयान भी इसी नीति को दोहराता है कि स्थायी भरोसे के लिए केवल कूटनीतिक बातचीत नहीं, बल्कि ईरान के व्यवहार में ठोस बदलाव आवश्यक है।
वॉशिंगटन: Steve Daines ने भारत की विश्वसनीयता की सराहना करते हुए चीन पर अप्रत्यक्ष निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब वह चीन की यात्रा करते हैं तो अपना मोबाइल फोन वॉशिंगटन में छोड़ देते हैं, लेकिन भारत आते समय वही फोन अपने साथ लेकर आते हैं। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। भारत पर भरोसा, चीन को लेकर सतर्कता Steve Daines ने U.S.-India Strategic Partnership Forum के लीडरशिप समिट में कहा कि उनका यह व्यवहार दोनों देशों के प्रति भरोसे के स्तर को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "जब मैं चीन जाता हूं, तो मेरा यह फोन मेरे साथ नहीं जाता। यह वॉशिंगटन में ही रहता है। लेकिन जब मैं दिल्ली या भारत के किसी भी शहर में आता हूं, तो यही फोन मेरे साथ होता है।" उनके अनुसार, यही एक विश्वसनीय मित्र और रणनीतिक साझेदार की पहचान है। भारत-अमेरिका मिलकर दे सकते हैं चीन को चुनौती सीनेटर डेंस ने कहा कि भारत और अमेरिका मिलकर तकनीक, नवाचार और उन्नत उद्योगों के क्षेत्र में चीन को प्रभावी चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की प्रतिभा और अमेरिका की तकनीकी क्षमता का संयोजन वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प तैयार कर सकता है। चीन से रिश्ते पूरी तरह खत्म नहीं हो सकते डेंस ने माना कि अमेरिका चीन के साथ अपने संबंध पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकता, लेकिन उसे आर्थिक और रणनीतिक जोखिम कम करने की दिशा में काम करना होगा। उनके मुताबिक, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत जैसे भरोसेमंद साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाना आवश्यक है। भारत-अमेरिका साझेदारी को बताया अहम सीनेटर ने कहा कि वॉशिंगटन में चीन से जुड़ी चुनौतियों पर लगातार चर्चा होती रहती है, लेकिन अब अमेरिका को यह तय करना होगा कि भविष्य में किन देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच मजबूत संबंध केवल दोनों लोकतांत्रिक देशों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता, आर्थिक विकास और तकनीकी सहयोग के लिए भी महत्वपूर्ण होंगे।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने WhatsApp के प्रस्तावित 'यूजरनेम' फीचर को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने Meta को नोटिस जारी कर इस फीचर के रोलआउट पर सवाल उठाए हैं और तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक उसके सभी सुरक्षा संबंधी सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक भारत में यह फीचर लॉन्च नहीं किया जा सकेगा। नोटिस में क्या कहा गया? सरकार ने अपने नोटिस में कहा है कि WhatsApp का यूजरनेम फीचर ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी पहचान वाले साइबर अपराधों को बढ़ावा दे सकता है। नोटिस के अनुसार, यदि लोग केवल यूजरनेम के माध्यम से संपर्क कर सकेंगे, तो साइबर अपराधियों के लिए अपनी पहचान छिपाकर लोगों को निशाना बनाना अधिक आसान हो जाएगा। कानूनी कार्रवाई की चेतावनी सरकार ने मेटा से पूछा है कि जब कंपनी को इस फीचर से संभावित साइबर अपराधों का अंदेशा है, तो उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। मेटा को इस संबंध में लिखित और विस्तृत जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। सरकार की प्रमुख चिंताएं सरकार ने नोटिस में कई संभावित जोखिमों का उल्लेख किया है। डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन स्कैम: सरकार का मानना है कि बिना फोन नंबर साझा किए केवल यूजरनेम के जरिए संपर्क की सुविधा मिलने पर साइबर अपराधियों के लिए लोगों तक पहुंचना आसान हो सकता है। फर्जी पहचान का खतरा: धोखेबाज किसी व्यक्ति, कंपनी या सरकारी संस्था से मिलते-जुलते यूजरनेम बनाकर लोगों को भ्रमित कर सकते हैं। सरकारी एजेंसियों की नकल: आशंका जताई गई है कि अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, बैंक या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर लोगों से ठगी कर सकते हैं। यूजरनेम फीचर क्या है? WhatsApp जिस फीचर पर काम कर रहा है, उसके तहत उपयोगकर्ता अपने मोबाइल नंबर के बजाय एक यूजरनेम के जरिए दूसरों से जुड़ सकेंगे। इससे फोन नंबर साझा किए बिना बातचीत करने का विकल्प मिलेगा। यह सुविधा पहले से कई अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। भारत सरकार का मानना है कि इस फीचर को लागू करने से पहले पर्याप्त सुरक्षा उपाय और पहचान सत्यापन की व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है। फिलहाल मेटा की ओर से इस नोटिस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार के जवाब की समीक्षा के बाद ही भारत में WhatsApp के यूजरनेम फीचर के भविष्य पर फैसला लिया जाएगा।
नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अमेरिका ने भारत की चार कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए रूस से जुड़े प्रतिबंधों की सूची से उनके नाम हटा दिए हैं। अमेरिकी वित्त विभाग (यूएस ट्रेजरी) के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने अपनी ताजा समीक्षा के बाद यह फैसला लिया। इन कंपनियों के नाम स्पेशली डिज़िग्नेटेड नेशनल्स एंड ब्लॉक्ड पर्सन्स (SDN) सूची से हटाए गए हैं। इस कदम के बाद इन कंपनियों पर लागू कई वित्तीय और व्यापारिक प्रतिबंध समाप्त हो सकते हैं, जिससे उनके अंतरराष्ट्रीय कारोबार को गति मिलने की उम्मीद है। किन भारतीय कंपनियों को मिली राहत? प्रतिबंध सूची से हटाई गई कंपनियां हैं— RRG Engineering Technologies Pvt. Ltd. (हैदराबाद) Lokesh Machines Ltd. (हैदराबाद) Galaxy Bearings Ltd. (अहमदाबाद) Shaurya Aeronautics Pvt. Ltd. (नई दिल्ली) ये कंपनियां पहले रूस से जुड़े व्यापारिक मामलों के कारण अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आ गई थीं। क्या होगा इसका असर? प्रतिबंध हटने के बाद इन कंपनियों के लिए— अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। वैश्विक वित्तीय लेन-देन पर लगी बाधाएं कम होंगी। विदेशी निवेश प्राप्त करने की संभावनाएं बढ़ेंगी। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में व्यापार करना पहले की तुलना में अधिक सरल होगा। भारत-अमेरिका संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों के लिहाज से सकारात्मक संकेत है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग और निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि रूस से जुड़े लेन-देन पर अमेरिका की व्यापक प्रतिबंध नीति अभी भी प्रभावी है और अन्य संस्थाओं या कंपनियों पर लागू नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। OFAC क्या है? ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की वह एजेंसी है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के तहत विभिन्न देशों, संगठनों और व्यक्तियों पर आर्थिक प्रतिबंध लागू करती है। समय-समय पर यह एजेंसी प्रतिबंध सूची की समीक्षा कर उसमें संशोधन भी करती है। भारत की चार कंपनियों को SDN सूची से हटाने का फैसला इसी नियमित समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। जून 2026 में भारत का वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह मजबूत बढ़त के साथ ₹1.94 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गया। वित्त मंत्रालय के अनुसार, जून में सकल जीएसटी संग्रह ₹1,94,812 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष जून 2025 के ₹1,71,105 करोड़ की तुलना में 13.9 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि की सबसे बड़ी वजह आयातित वस्तुओं पर मिलने वाले कर संग्रह में रिकॉर्ड बढ़ोतरी रही। आयात कर ने बढ़ाई रफ्तार जून के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी सामानों के आयात पर मिलने वाला टैक्स 34.6 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि के साथ ₹60,038 करोड़ तक पहुंच गया। इसके मुकाबले घरेलू कारोबार से मिलने वाला जीएसटी संग्रह 6.5 प्रतिशत बढ़कर ₹1,34,774 करोड़ रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि आयात में तेजी से सरकारी राजस्व को मजबूती मिली है, हालांकि घरेलू मांग में अपेक्षाकृत धीमी बढ़त चिंता का विषय बनी हुई है। रिफंड के बाद भी बढ़ा शुद्ध राजस्व सरकार ने जून के दौरान करदाताओं को ₹32,436 करोड़ का जीएसटी रिफंड जारी किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 29.1 प्रतिशत अधिक है। इसके बावजूद सरकार का शुद्ध जीएसटी राजस्व ₹1,62,377 करोड़ रहा, जो सालाना आधार पर 11.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। पहली तिमाही में 6.31 लाख करोड़ से अधिक संग्रह चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कुल ₹6,31,699 करोड़ का जीएसटी संग्रह दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 8.4 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान आयात कर संग्रह में 26.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि घरेलू कर संग्रह में 2.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। राज्यों का प्रदर्शन रहा मिला-जुला राज्यों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो महाराष्ट्र सबसे अधिक ₹30,714 करोड़ के संग्रह के साथ शीर्ष पर रहा। उत्तर प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। वहीं सिक्किम, पुडुचेरी, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और तमिलनाडु में जीएसटी संग्रह में गिरावट देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत आयात गतिविधियां अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन दीर्घकालिक संतुलित विकास के लिए घरेलू उपभोग और बाजार मांग को भी गति देना आवश्यक होगा।
नई दिल्ली: भारत और जापान द्विपक्षीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश ऐसी व्यवस्था पर काम कर रहे हैं जिसके तहत कारोबार का भुगतान सीधे भारतीय रुपए और जापानी येन में किया जा सकेगा। इस पहल का उद्देश्य व्यापार को अधिक तेज, सस्ता और सुगम बनाना है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रस्ताव की औपचारिक घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के बीच नई दिल्ली में होने वाले 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद की जा सकती है। प्रधानमंत्री बनने के बाद ताकाइची का यह पहला भारत दौरा है। स्थानीय मुद्रा में होगा व्यापार प्रस्ताव लागू होने के बाद भारत और जापान के बीच पहली बार स्थानीय मुद्राओं में व्यापार के लिए औपचारिक व्यवस्था बनेगी। इसके तहत जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोलकर सीधे रुपए और येन में भुगतान कर सकेंगी। इस व्यवस्था से अमेरिकी डॉलर या किसी तीसरे देश की बैंकिंग प्रणाली पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा विनिमय की लागत घटेगी और सीमा-पार भुगतान पहले की तुलना में अधिक तेज़ी से हो सकेगा। स्पेशल अकाउंट के जरिए आसान होगा भुगतान योजना के तहत जापानी कंपनियां भारतीय बैंकों में विशेष खाते संचालित करेंगी, जिनके माध्यम से आयात-निर्यात का भुगतान सीधे स्थानीय मुद्राओं में किया जाएगा। इससे: विदेशी मुद्रा विनिमय का खर्च कम होगा। भुगतान प्रक्रिया तेज होगी। कारोबारियों की लेनदेन लागत घटेगी। व्यापारिक जोखिम कम होंगे। 2025 में बनी थी सहमति यह पहल नई नहीं है। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान जारी संयुक्त विजन दस्तावेज में दोनों देशों ने अगले 10 वर्षों के दौरान स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान प्रणाली को बढ़ावा देने पर सहमति जताई थी। अब जापान का वित्त मंत्रालय वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ एक सहयोग समझौते (MoC) पर काम कर रहा है, जिससे इस व्यवस्था को औपचारिक रूप दिया जा सके। भारत पहले से बढ़ा रहा रुपए में अंतरराष्ट्रीय व्यापार भारतीय रिजर्व बैंक ने जुलाई 2022 में स्पेशल रुपी वोस्त्रो अकाउंट (SRVA) व्यवस्था शुरू की थी, ताकि विदेशी देशों के साथ रुपए में व्यापार को बढ़ावा दिया जा सके। सरकार के अनुसार: 30 देशों के 123 विदेशी बैंकों के लिए भारत के 26 बैंकों में 156 विशेष रुपया वोस्त्रो खाते खोले जा चुके हैं। RBI का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मजबूत विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम होगी और रुपए का वैश्विक उपयोग बढ़ेगा। भारत-जापान आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत भारत और जापान के बीच आर्थिक सहयोग लगातार विस्तार कर रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 27.5 अरब डॉलर रहा। अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान जापान ने भारत में 3.2 अरब डॉलर का निवेश किया। अगले 10 वर्षों में जापान ने भारत में 61 अरब डॉलर से अधिक निवेश का लक्ष्य रखा है। भारत में वर्तमान में करीब 1,400 जापानी कंपनियां काम कर रही हैं। जापान मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) परियोजना सहित कई बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भी निवेश कर रहा है। शिखर सम्मेलन में इन मुद्दों पर भी होगी चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री साने ताकाइची के बीच होने वाली बैठक में कई रणनीतिक और आर्थिक विषयों पर बातचीत होने की संभावना है, जिनमें शामिल हैं— व्यापार और निवेश सेमीकंडक्टर सहयोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ऑटोमोबाइल सेक्टर सप्लाई चेन रक्षा सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा क्वाड सहयोग दोनों नेता उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। भारत-जापान साझेदारी की प्रमुख बातें जापान भारत में निवेश करने वाला पांचवां सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है। मार्च 2026 तक जापान का कुल निवेश लगभग ₹4.58 लाख करोड़ पहुंच चुका है। दोनों देशों ने 2025 में अगले 10 वर्षों के लिए 10 ट्रिलियन जापानी येन (करीब ₹5.84 लाख करोड़) के निजी निवेश का लक्ष्य तय किया। यह निवेश सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा उद्योगों पर केंद्रित होगा। भारत और जापान ने चीन पर वैश्विक निर्भरता कम करने के उद्देश्य से सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स (लिथियम, कोबाल्ट आदि) की सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए रणनीतिक सहयोग भी शुरू किया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।