मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को HDFC Bank में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 9.99% तक करने की मंजूरी दे दी है। HDFC Bank ने 19 अगस्त को स्टॉक एक्सचेंजों को दी जानकारी में बताया कि RBI ने LIC के आवेदन के आधार पर यह अनुमति दी है। खबर सामने आने के बाद 20 अगस्त को शुरुआती कारोबार में HDFC Bank के शेयर में 1% से ज्यादा की तेजी देखी गई।
14 अगस्त 2026 की उपलब्ध जानकारी के अनुसार LIC के पास HDFC Bank की 4.11% हिस्सेदारी है। नई मंजूरी के बाद LIC अपनी हिस्सेदारी करीब 5.88 प्रतिशत अंक तक बढ़ा सकती है और अधिकतम 9.99% तक पहुंच सकती है।
RBI की मंजूरी बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949, RBI के 2025 के शेयर अधिग्रहण संबंधी दिशा-निर्देश, FEMA और SEBI के नियमों समेत लागू कानूनों के पालन के अधीन है। LIC को इन सभी नियामकीय शर्तों का पालन करना होगा।
RBI की मंजूरी की खबर से HDFC Bank का शेयर बाजार में चर्चा में आ गया। गुरुवार के शुरुआती कारोबार में शेयर 1% से अधिक चढ़ा। निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि LIC वास्तव में अतिरिक्त हिस्सेदारी कब और किस कीमत पर खरीदती है।
HDFC Bank ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 19,059 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले करीब 5% अधिक है। बैंक का शुद्ध ब्याज आय (NII) भी 7% बढ़कर 33,530 करोड़ रुपये रही।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। क्रेडिट कार्ड का भुगतान समय पर नहीं करने वाले ग्राहकों के लिए बैंकों की सख्ती एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में HDFC Bank के एक मामले में सिर्फ 46 पैसे के बकाये पर ₹1,200 की पेनल्टी लगाए जाने की घटना सोशल मीडिया पर सामने आई। हालांकि यह एक व्यक्तिगत मामला है और संबंधित पोस्ट बाद में हटा दी गई, लेकिन इसने क्रेडिट कार्ड के लेट पेमेंट चार्ज को लेकर बहस तेज कर दी है। बकाया रकम छोटी हो, भुगतान जरूरी क्रेडिट कार्ड धारकों को केवल बड़ी रकम ही नहीं, बल्कि पूरी बकाया राशि समय पर चुकाने पर ध्यान देना चाहिए। थोड़ी रकम भी बकाया रहने पर बैंक के नियमों के अनुसार लेट पेमेंट शुल्क और अन्य संबंधित शुल्क लग सकते हैं। RBI के नियमों के तहत ऐसे शुल्क देय तारीख के बाद बकाया राशि पर लगाए जाने चाहिए, पूरी बिल राशि पर नहीं। 2027 से तीन दिन की राहत का नया नियम RBI ने क्रेडिट कार्ड खातों को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। 1 अप्रैल 2027 से किसी खाते को ‘past due’ मानने या लेट पेमेंट पेनल्टी लगाने के लिए भुगतान देय तारीख के बाद तीन दिन से अधिक बकाया रहना जरूरी होगा। यानी केवल एक-दो दिन की देरी पर इस नियम के तहत पेनल्टी नहीं लगाई जा सकेगी। बैंकों के चार्ज में भी बदलाव इस बीच कुछ बैंक अपने क्रेडिट कार्ड शुल्क में बदलाव कर रहे हैं। उदाहरण के लिए Axis Bank 28 अगस्त 2026 से लेट पेमेंट शुल्क की संरचना में बदलाव करने जा रहा है, जिसमें ₹50,000 से अधिक बकाया वाले कार्डधारकों पर नए शुल्क लागू होंगे। ग्राहकों को क्या सावधानी रखनी चाहिए क्रेडिट कार्ड धारकों को हर महीने बिल की अंतिम तारीख और कुल भुगतान राशि जरूर जांचनी चाहिए। केवल ‘Minimum Amount Due’ चुकाने से पूरा बिल साफ नहीं होता और शेष राशि पर ब्याज लग सकता है। साथ ही किसी शुल्क में बदलाव होने पर बैंक को ग्राहक को पहले से इसकी जानकारी देनी होती है।
मुंबई, एजेंसियां। दिग्गज निवेशक विजय केडिया की कंपनी Kedia Securities ने डिजिटल एक्सपेंस मैनेजमेंट और SaaS कंपनी Zaggle Prepaid Ocean Services में करीब 33 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी खरीदी है। NSE के बल्क डील आंकड़ों के अनुसार Kedia Securities ने 20 लाख शेयर औसतन ₹164.72 प्रति शेयर की कीमत पर खरीदे, जो कंपनी की करीब 1.48% हिस्सेदारी है। 52 सप्ताह के निचले स्तर पर खरीदारी विजय केडिया की यह खरीदारी ऐसे समय हुई जब Zaggle Prepaid का शेयर 18 अगस्त को 52 सप्ताह के निचले स्तर ₹154.36 तक पहुंच गया था। इससे बाजार में इसे निचले स्तर पर की गई बड़ी खरीदारी के तौर पर देखा जा रहा है। खरीदारी की खबर से शेयर में जोरदार तेजी Kedia Securities की खरीदारी की खबर सामने आने के बाद Zaggle Prepaid के शेयर में बुधवार को जोरदार उछाल आया। शुरुआती कारोबार में शेयर 15% से अधिक चढ़कर ₹190.94 तक पहुंच गया, जबकि अन्य रिपोर्टों में कारोबार के दौरान करीब 17% की तेजी दर्ज होने की बात कही गई है। कमजोर नतीजों के बाद मिली बड़ी खरीदारी इससे ठीक पहले Zaggle Prepaid के शेयर पर दबाव था। कंपनी का पहली तिमाही का PAT सालाना आधार पर करीब 32.9% घटकर ₹17.53 करोड़ रह गया था, जिसके बाद 17 अगस्त को शेयर 20% गिरकर लोअर सर्किट पर पहुंच गया था। केडिया की खरीदारी ने स्टॉक में निवेशकों की दिलचस्पी फिर बढ़ा दी।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अगस्त मौद्रिक नीति समिति (MPC) बैठक के जारी मिनट्स में महंगाई बढ़ने के जोखिम को लेकर सदस्यों की चिंता सामने आई है। MPC ने भले ही रेपो दर को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया था, लेकिन मिनट्स से संकेत मिला है कि यदि खाद्य, ईंधन और कच्चे तेल की कीमतों का दबाव बढ़ता है तो आने वाले महीनों में मौद्रिक नीति को सख्त किया जा सकता है। महंगाई बढ़ी तो दरों में बढ़ोतरी संभव RBI की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता समेत कुछ सदस्यों ने संकेत दिया कि मौजूदा महंगाई परिदृश्य में ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश सीमित है। अगर महंगाई के दबाव में तेजी आती है और यह व्यापक रूप लेता है तो 2026 की तीसरी तिमाही में दर बढ़ाने का विकल्प खुला रह सकता है। कच्चा तेल और खाद्य कीमतें बनी चिंता MPC सदस्यों ने पश्चिम एशिया के तनाव, कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों और खाद्य वस्तुओं की कीमतों को महंगाई के लिए प्रमुख जोखिम बताया। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी चेतावनी दी कि अगर खाद्य, ईंधन और इनपुट लागत में बढ़ोतरी व्यापक होती है तो महंगाई पर दूसरा दौर का असर देखने को मिल सकता है। रेपो रेट फिलहाल 5.25% पर बरकरार अगस्त की बैठक में MPC के सभी छह सदस्यों ने रेपो रेट 5.25% पर बनाए रखने के पक्ष में मतदान किया था। समिति ने अपना रुख ‘न्यूट्रल’ रखा है। FY2026-27 के लिए RBI ने महंगाई का अनुमान करीब 5% और आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.7% रखा है। बाजार की नजर अगली MPC बैठक पर मिनट्स में दिखी सख्त भाषा के बाद बाजार की नजर अब आगामी आंकड़ों और RBI के अगले कदम पर है। SBI Research ने अगस्त के मिनट्स को पिछले एक साल में सबसे ज्यादा ‘हॉकिश’ संकेत वाला बताया है, हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि RBI तत्काल दर बढ़ाने के बजाय कुछ समय तक महंगाई के आंकड़ों पर नजर रख सकता है।