महंगाई

Railway pantry staff serving food to passengers amid debate over rising train meal prices in India
पेट्रोल-डीजल महंगा होने के बाद क्या बढ़ेंगे ट्रेन के खाने के दाम? रेलवे कैटरर्स ने उठाई मांग

Indian Railway Catering and Tourism Corporation और Indian Railways से जुड़ी खानपान सेवाओं को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। ईरान-इजरायल तनाव के बाद बढ़ती महंगाई और ईंधन कीमतों के बीच अब ट्रेन में मिलने वाला खाना भी महंगा हो सकता है। रेलवे कैटरर्स के संगठन ने खाने-पीने की चीजों के रेट बढ़ाने की मांग की है। रेलवे कैटरर्स ने IRCTC को लिखा पत्र ट्रेनों में खानपान सेवा देने वाले ठेकेदारों के संगठन Indian Railway Mobile Caterers Association ने IRCTC को पत्र लिखकर तत्काल टैरिफ रिवीजन की मांग की है। संगठन के अध्यक्ष शरण बिहारी अग्रवाल ने अपने पत्र में कहा है कि: पेंट्री कार में बिकने वाले खाने-पीने के दाम आखिरी बार 2019 में तय हुए थे तब से खाद्य सामग्री, गैस और ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है कर्मचारियों का वेतन भी बढ़ा है मौजूदा रेट पर क्वालिटी बनाए रखना मुश्किल हो रहा है कैटरर्स का दावा है कि कई वस्तुओं की लागत में 250% तक बढ़ोतरी हो चुकी है। किन ट्रेनों पर पड़ सकता है असर? रेलवे में खानपान सेवाएं मुख्य रूप से दो तरह की होती हैं: 1. प्री-पेड कैटरिंग इनमें यात्री टिकट बुकिंग के दौरान ही खाने का पैसा दे देते हैं। यह सुविधा मुख्य रूप से: Rajdhani Express Shatabdi Express Vande Bharat Express जैसी प्रीमियम ट्रेनों में मिलती है। 2. पोस्ट-पेड कैटरिंग इन ट्रेनों में यात्री खाना खरीदने के बाद भुगतान करते हैं। कैटरर्स संगठन ने दोनों कैटेगरी में कीमतें बढ़ाने की मांग की है। क्या तुरंत बढ़ सकते हैं खाने के दाम? रेलवे से जुड़े जानकारों के अनुसार, पेंट्री कार सेवाओं के टेंडर “फिक्स रेट सप्लाई” मॉडल पर दिए जाते हैं। इसका मतलब है कि: टेंडर अवधि के दौरान तय कीमतें नहीं बदली जा सकतीं पुराने कॉन्ट्रैक्ट में बीच में रेट बढ़ाने का प्रावधान नहीं होता नई कीमतें केवल भविष्य के टेंडर पर लागू हो सकती हैं यानी फिलहाल यात्रियों को तुरंत महंगे खाने का सामना शायद न करना पड़े। अगर घाटा हो रहा है तो क्या करेंगे कैटरर्स? रेलवे अधिकारियों का कहना है कि हर टेंडर में “एग्जिट क्लॉज” मौजूद होता है। यदि किसी ठेकेदार को तय दरों पर काम करना घाटे का सौदा लग रहा है, तो वह कॉन्ट्रैक्ट छोड़ सकता है। अधिकारियों के मुताबिक रेलवे किसी ठेकेदार पर पुराने रेट पर काम जारी रखने का दबाव नहीं बनाता। महंगाई का असर रेलवे सेवाओं तक पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब रेलवे कैटरिंग तक पहुंचता दिख रहा है। अगर भविष्य में नए टेंडर्स में कीमतें बढ़ाई जाती हैं, तो यात्रियों को ट्रेन में चाय, नाश्ता और भोजन के लिए ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं। हालांकि रेलवे फिलहाल पुराने कॉन्ट्रैक्ट्स के नियमों के तहत ही सेवाएं जारी रखे हुए है।  

surbhi मई 20, 2026 0
Bread and pav packets displayed at a bakery shop after price hike in Mumbai markets.
नाश्ता हुआ महंगा! ब्रेड-पाव की कीमतों में ₹5 की बढ़ोतरी, जानें क्या है इसकी वजह

महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों को अब रोजमर्रा के नाश्ते पर भी ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। सोना-चांदी, पेट्रोल-डीजल और दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब Mumbai और आसपास के इलाकों में ब्रेड और पाव की कीमतें भी बढ़ा दी गई हैं। कई बड़ी कंपनियों ने 16 मई 2026 से नई दरें लागू कर दी हैं, जिससे लाखों कामकाजी लोगों, छात्रों और मजदूरों की जेब पर सीधा असर पड़ने वाला है। नई कीमतों के तहत अलग-अलग प्रकार की ब्रेड पर ₹2 से ₹5 तक की बढ़ोतरी की गई है। इसका असर खासतौर पर वड़ा-पाव, सैंडविच और ब्रेड आधारित नाश्ते पर दिखाई देगा, जो मुंबई की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा माने जाते हैं। आखिर क्यों बढ़ गए ब्रेड और पाव के दाम? बेकरी उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक कीमतों में इस बढ़ोतरी के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। प्लास्टिक पैकेजिंग महंगी हुई ब्रेड की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक कच्चा माल विदेशों से आयात किया जाता है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कमजोरी के कारण आयात लागत काफी बढ़ गई है। इससे पैकेजिंग खर्च में बड़ा इजाफा हुआ है। ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ी हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का असर अब खाद्य उत्पादों पर भी दिखने लगा है। ट्रकों के भाड़े में बढ़ोतरी होने से कच्चे माल को बेकरियों तक पहुंचाना और तैयार ब्रेड को दुकानों तक सप्लाई करना महंगा हो गया है। प्रिजर्वेटिव्स और दूध की कीमतें बढ़ीं ब्रेड को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रिजर्वेटिव्स की कीमतें भी बढ़ गई हैं। इसके अलावा दूध कंपनियों द्वारा हाल में किए गए रेट बढ़ोतरी के फैसले ने भी बेकरी उत्पादों की लागत बढ़ा दी है। मुंबई में ब्रेड-पाव का नया रेट कार्ड ब्रेड की वैरायटी पुरानी कीमत नई कीमत 400 ग्राम सैंडविच ब्रेड ₹35 ₹40 ब्राउन ब्रेड ₹45 ₹50 होल व्हीट ब्रेड ₹55 ₹60 मल्टिग्रेन ब्रेड ₹60 ₹65 स्मॉल ब्राउन लोफ ₹28 ₹30 व्हाइट लोफ ₹20 ₹22 आम लोगों पर क्या होगा असर? ब्रेड और पाव की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे आम लोगों के रसोई बजट पर पड़ेगा। मुंबई जैसे शहरों में लाखों लोग सुबह के नाश्ते और फास्ट फूड के लिए ब्रेड और पाव पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में वड़ा-पाव, सैंडविच और पाव-भाजी जैसे लोकप्रिय खाद्य पदार्थों की कीमतें भी आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईंधन और आयात लागत में कमी नहीं आई, तो आने वाले समय में अन्य बेकरी उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं।  

surbhi मई 19, 2026 0
Fuel station worker refilling petrol as fuel prices rise again across major Indian cities.
फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, 5 दिनों में दूसरी बढ़ोतरी; जानें आपके शहर में नई कीमतें

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। पिछले पांच दिनों में यह दूसरी बार है जब तेल कंपनियों ने ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। ताजा बढ़ोतरी के बाद आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। नई दरें लागू होने के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 98.64 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। महानगरों में पेट्रोल-डीजल के नए दाम मुंबई देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल 91 पैसे महंगा होकर 107.59 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि डीजल 94 पैसे बढ़कर 94.08 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया। कोलकाता कोलकाता में पेट्रोल की कीमत में सबसे अधिक 96 पैसे की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यहां पेट्रोल अब 109.70 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं डीजल 94 पैसे महंगा होकर 96.07 रुपये प्रति लीटर हो गया है। चेन्नई चेन्नई में पेट्रोल 82 पैसे बढ़कर 104.49 रुपये प्रति लीटर हो गया, जबकि डीजल की कीमत 86 पैसे बढ़ने के बाद 96.11 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। 15 मई को भी बढ़े थे दाम इससे पहले 15 मई को भी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की थी। उस समय दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये से बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गया था। उसी दिन अन्य महानगरों में भी ईंधन की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था। कोलकाता में पेट्रोल 108.74 रुपये, मुंबई में 106.68 रुपये और चेन्नई में 103.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया था। वहीं डीजल की कीमत कोलकाता में 95.13 रुपये, मुंबई में 93.14 रुपये और चेन्नई में 95.25 रुपये प्रति लीटर हो गई थी। आम लोगों पर बढ़ेगा असर लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का सीधा असर आम जनता की दैनिक जिंदगी पर पड़ सकता है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ने की आशंका है, जिसका असर खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।  

surbhi मई 19, 2026 0
Amul milk packets displayed after company increases milk prices by Rs 2 per litre across India
महंगाई का नया झटका: अमूल दूध के दाम बढ़े, आज से हर लीटर पर देने होंगे 2 रुपये ज्यादा

देशभर में बढ़ती महंगाई के बीच आम लोगों की रसोई पर एक और बोझ बढ़ गया है। देश के सबसे बड़े डेयरी ब्रांड Amul ने दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। नई कीमतें आज यानी 14 मई 2026 से लागू हो चुकी हैं। इस फैसले का असर करोड़ों उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा, क्योंकि अमूल दूध का इस्तेमाल देश के लगभग हर हिस्से में बड़े पैमाने पर किया जाता है। दूध की कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब पहले से ही सब्जियां, गैस सिलेंडर और रोजमर्रा की जरूरत की कई चीजें महंगी हो चुकी हैं। ऐसे में अब दूध के दाम बढ़ने से घरेलू बजट और बिगड़ सकता है। क्यों बढ़ाए गए अमूल दूध के दाम? अमूल ब्रांड के तहत उत्पाद बेचने वाली Gujarat Cooperative Milk Marketing Federation (GCMMF) ने बताया कि दूध उत्पादन से जुड़ी लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। संस्था के अनुसार पिछले कुछ महीनों में पशु आहार, पैकेजिंग सामग्री, ट्रांसपोर्टेशन और ईंधन की कीमतों में तेजी से इजाफा हुआ है। इन बढ़ती लागतों का सीधा असर डेयरी उद्योग पर पड़ा है, जिसके कारण कंपनी को दूध के दाम बढ़ाने का फैसला लेना पड़ा। GCMMF का कहना है कि लागत बढ़ने के बावजूद कीमतों में सीमित बढ़ोतरी की गई है ताकि उपभोक्ताओं पर ज्यादा बोझ न पड़े। कितनी बढ़ीं कीमतें? नई दरों के लागू होने के बाद अब अमूल दूध के अलग-अलग वेरिएंट्स के दाम 2 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गए हैं। संस्था के मुताबिक यह बढ़ोतरी कुल कीमत का लगभग 2.5 से 3.5 प्रतिशत है, जो मौजूदा खाद्य महंगाई दर से कम बताई जा रही है। हालांकि, आम ग्राहकों का मानना है कि लगातार बढ़ती कीमतों का असर सीधे घरेलू खर्च पर पड़ रहा है, खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वाले परिवारों पर। किसानों को भी मिलेगा फायदा GCMMF ने यह भी साफ किया कि दूध की बढ़ी कीमतों का फायदा केवल कंपनी को नहीं, बल्कि दूध उत्पादक किसानों को भी मिलेगा। फेडरेशन के अनुसार सदस्य डेयरी संघों ने किसानों से दूध खरीदने की कीमत में भी बढ़ोतरी की है। मई 2025 की तुलना में दूध खरीद मूल्य में करीब 30 रुपये प्रति किलोग्राम फैट तक का इजाफा किया गया है। इससे डेयरी किसानों की आय में सुधार होने की उम्मीद है। संस्था का दावा है कि अमूल अपने मुनाफे का बड़ा हिस्सा सीधे किसानों तक पहुंचाने की नीति पर काम करता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। लगातार दूसरी बार बढ़े दूध के दाम गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब अमूल ने दूध की कीमतों में इजाफा किया हो। इससे पहले मई 2025 में भी कंपनी ने दाम बढ़ाए थे। अब करीब एक साल बाद फिर से कीमतों में बढ़ोतरी होने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले महीनों में ईंधन और पशु आहार की कीमतें और बढ़ती हैं, तो डेयरी उत्पादों की कीमतों में आगे भी इजाफा देखने को मिल सकता है।  

surbhi मई 14, 2026 0
RBI Governor Sanjay Malhotra warns fuel prices may rise amid ongoing Middle East oil crisis
मध्य पूर्व संकट जारी रहा तो बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम, RBI गवर्नर की चेतावनी

वैश्विक संकट का भारत की अर्थव्यवस्था पर असर मध्य पूर्व में जारी तनाव और तेल आपूर्ति में बाधा का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चेतावनी दी है कि अगर यह संकट लंबे समय तक जारी रहता है तो देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका RBI गवर्नर ने कहा कि अभी तक सरकार ने खुदरा ईंधन कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, लेकिन स्थिति लगातार बिगड़ती रही तो कीमतों का बोझ आम जनता पर डाला जा सकता है। उनका कहना है कि लंबे समय तक वैश्विक तेल संकट जारी रहने पर कीमतें बढ़ना लगभग तय है। भारत पर तेल संकट का सीधा असर मध्य पूर्व में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम तेल मार्गों में बाधा के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर वैश्विक बाजार के साथ-साथ भारत पर भी पड़ रहा है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। भारत की स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि देश खाद्य तेल और उर्वरक के लिए भी विदेशों पर निर्भर रहता है। रुपये में गिरावट से बढ़ी चिंता इसी बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भी दबाव देखा जा रहा है। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होकर 95 के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है, जिससे आयात और महंगा हो गया है। सरकार की नीति और कदम सरकार ने अब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखी हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय दबाव रहने पर स्थिति बदल सकती है। प्रधानमंत्री ने भी ईंधन की खपत कम करने और बचत पर जोर देने की अपील की है ताकि विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो सके। वैश्विक हालात और भारत की चुनौती RBI गवर्नर ने स्विट्जरलैंड में एक सम्मेलन के दौरान कहा कि सरकार अब तक वित्तीय अनुशासन की नीति पर चल रही है, लेकिन वैश्विक अस्थिरता के कारण आने वाले समय में महंगाई और ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। मध्य पूर्व संकट यदि लंबे समय तक जारी रहता है तो भारत में ईंधन महंगा होना तय माना जा रहा है। ऐसे में सरकार और आम जनता दोनों के लिए आर्थिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।  

surbhi मई 14, 2026 0
Commercial LPG cylinder and 5 kg Chhotu cylinder with revised prices
कमर्शियल LPG सिलिंडर महंगा, 5 किलो वाला ‘छोटू’ हुआ महंगा–खर्च बढ़ने के आसार

देशभर में महंगाई के मोर्चे पर एक और बड़ा झटका लगा है। कमर्शियल LPG सिलिंडर के साथ-साथ 5 किलोग्राम वाले ‘छोटू’ (FTL) सिलिंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे खासतौर पर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ना तय माना जा रहा है। कमर्शियल सिलिंडर में भारी उछाल नई दरों के अनुसार, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलिंडर की कीमत में करीब 993 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। नई दिल्ली में इसकी कीमत बढ़कर अब 3,071.50 रुपये हो गई है। 5 किलो वाला ‘छोटू’ भी महंगा सिर्फ बड़े सिलिंडर ही नहीं, बल्कि 5 किलोग्राम वाले फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलिंडर की कीमत में भी 261 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। यह सिलिंडर छोटे दुकानदारों, ढाबों और सीमित व्यावसायिक उपयोग के लिए ज्यादा इस्तेमाल होता है, इसलिए इसका असर छोटे कारोबारियों पर भी पड़ेगा। घरेलू उपभोक्ताओं को राहत राहत की बात यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलिंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह वही सिलिंडर है जिसका इस्तेमाल देश के करोड़ों घरों में खाना बनाने के लिए किया जाता है। किन पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर? कमर्शियल LPG महंगा होने का सीधा असर इन सेक्टर्स पर पड़ेगा: रेस्टोरेंट और होटल बेकरी और फूड आउटलेट कैटरिंग सर्विस छोटे ढाबे और स्ट्रीट फूड विक्रेता आमतौर पर ऐसे व्यवसाय बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालते हैं, जिससे आने वाले दिनों में खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं। क्यों बढ़ती हैं कीमतें? 5 किलो वाला FTL सिलिंडर सब्सिडी फ्री होता है और इसकी कीमत बाजार के हिसाब से तय होती है। इसलिए इसमें अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का असर जल्दी देखने को मिलता है। क्या आगे और बढ़ सकती है महंगाई? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कमर्शियल LPG की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं, तो इसका असर खाने-पीने की कीमतों पर साफ दिखाई देगा।  

surbhi मई 1, 2026 0
Commercial LPG cylinder price hike from May 1 impacts restaurants and small businesses in India
कमर्शियल LPG सिलेंडर पर बड़ा झटका: 1 मई से ₹993 महंगा, घरेलू गैस कीमत स्थिर

देशभर में महंगाई के मोर्चे पर एक और बड़ा झटका सामने आया है। 1 मई से 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में ₹993 की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। राजधानी दिल्ली में अब इस सिलेंडर की नई कीमत ₹3,071.50 हो गई है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और छोटे व्यवसायों पर पड़ेगा, जहां LPG का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। तेल कंपनियों द्वारा लिया गया यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पहले से ही कारोबारी लागत बढ़ी हुई है। लगातार दूसरे महीने कीमतों में इजाफा होने से छोटे व्यापारियों के लिए खर्च संभालना और मुश्किल हो सकता है। पिछले महीने भी 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर के दाम ₹195 से ₹218 तक बढ़ाए गए थे, वहीं 5 किलो वाले मिनी सिलेंडर की कीमत में करीब ₹51 का इजाफा हुआ था। घरेलू उपभोक्ताओं को राहत, कीमत में कोई बदलाव नहीं जहां कमर्शियल सिलेंडर महंगा हुआ है, वहीं आम जनता के लिए राहत की खबर है। 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में इसकी कीमत अभी ₹913 पर ही बनी हुई है। इससे पहले 7 मार्च को इसमें ₹60 की बढ़ोतरी की गई थी। हर महीने की पहली तारीख को तय होते हैं दाम देश की प्रमुख तेल कंपनियां–इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम–हर महीने की पहली तारीख को LPG सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं। इनकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव और रुपये-डॉलर के उतार-चढ़ाव के आधार पर तय होती हैं। पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में पेट्रोल ₹94.72 प्रति लीटर और डीजल ₹87.62 प्रति लीटर मिल रहा है। पिछले साल मार्च में ₹2 प्रति लीटर की कटौती के बाद से इनके दाम स्थिर बने हुए हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बनी वजह कमर्शियल LPG की कीमतों में इस तेज बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन में रुकावट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50% तक की वृद्धि हो चुकी है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम मार्ग पर असर पड़ने से वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका असर अब घरेलू बाजार में भी दिखने लगा है।  

surbhi मई 1, 2026 0
RBI Governor announcing GDP growth cut amid global tensions impacting India’s economic outlook
RBI ने घटाया GDP ग्रोथ अनुमान, वैश्विक तनाव का असर

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की पहली तिमाही के लिए GDP ग्रोथ अनुमान 6.9% से घटाकर 6.8% कर दिया है। यह कटौती ऐसे समय में की गई है, जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और खासकर होर्मुज स्ट्रेट में आई बाधा से आर्थिक अनिश्चितता बढ़ी है। क्या कहा RBI गवर्नर ने? RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार: भारत मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल्स के साथ नए वित्त वर्ष में प्रवेश कर रहा है लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संघर्ष से ग्रोथ पर असर पड़ सकता है होर्मुज स्ट्रेट में बाधा से तेल सप्लाई और कीमतों पर दबाव बढ़ा है उन्होंने माना कि इन परिस्थितियों का असर भारत की आर्थिक रफ्तार पर पड़ना तय है। FY27 के लिए नया GDP अनुमान RBI ने अलग-अलग तिमाहियों के लिए ग्रोथ अनुमान में बदलाव किया है: Q1: 6.9% ➝ 6.8% Q2: 7.0% ➝ 6.7% Q3: 7.0% (स्थिर) Q4: 7.2% पूरे FY27 के लिए ग्रोथ अनुमान करीब 6.9% रखा गया है। क्यों बढ़ा जोखिम? 1. तेल-गैस की कीमतों में उछाल होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल सप्लाई का अहम रास्ता है। यहां बाधा आने से: क्रूड ऑयल महंगा हो सकता है भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर दबाव बढ़ता है 2. महंगाई का खतरा फिलहाल कोर महंगाई कंट्रोल में है लेकिन खाद्य कीमतों और मौसम का असर बढ़ सकता है 3. ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता ईरान-अमेरिका तनाव से वित्तीय बाजार प्रभावित निवेशक सुरक्षित विकल्प (Safe Haven) की ओर बढ़े डॉलर मजबूत, अन्य मुद्राओं पर दबाव फिर भी भारत की स्थिति क्यों बेहतर? RBI के मुताबिक: भारत की अर्थव्यवस्था पहले के मुकाबले ज्यादा मजबूत घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों में अच्छा मोमेंटम वैश्विक झटकों को झेलने की क्षमता बेहतर

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
Petrol pump display showing reduced fuel prices in Pakistan after government rollback decision
पाकिस्तान में पेट्रोल सस्ता, सरकार ने किया बड़ा यू-टर्न

पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों को लेकर बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। हाल ही में कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद अब सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पेट्रोल के दाम में कटौती कर दी है। ऊर्जा मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ के मुताबिक, 4 अप्रैल 2026 से पेट्रोल की कीमत में 80 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है। इस फैसले के बाद देश में पेट्रोल की नई कीमत 378.41 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गई है। हालांकि, सरकार ने डीज़ल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। डीज़ल अभी भी 520.35 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर के स्तर पर बना हुआ है। एक दिन पहले ही हुई थी भारी बढ़ोतरी इससे पहले गुरुवार को पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल दोनों की कीमतों में जोरदार इजाफा किया था। पेट्रोल में 137.23 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी डीज़ल में 184.49 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी इस बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल की कीमत 458.41 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी, जिससे आम जनता पर भारी बोझ पड़ा। सरकार का यू-टर्न प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की सरकार ने बढ़ते दबाव और महंगाई के असर को देखते हुए अब पेट्रोल की कीमतों में राहत देने का फैसला लिया है। हालांकि, डीज़ल की कीमतों को जस का तस रखना सवाल खड़े कर रहा है, क्योंकि इसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट और महंगाई पर पड़ता है। आम जनता को आंशिक राहत पेट्रोल सस्ता होने से आम लोगों को कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन डीज़ल की ऊंची कीमतें अभी भी चिंता का विषय बनी हुई हैं।  

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
Essential medicines and tablets with rising prices highlighting healthcare cost increase in India
760 से ज्यादा दवाएं हुईं महंगी, आगे और बढ़ोतरी की आशंका से बढ़ी चिंता

देशभर में आम लोगों के लिए स्वास्थ्य खर्च एक बार फिर बढ़ने वाला है। National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) ने थोक महंगाई के आधार पर 760 से अधिक जरूरी दवाओं की कीमतों में 0.6% की बढ़ोतरी की है। यह नई कीमतें 1 अप्रैल 2026 से लागू हो गई हैं। हालांकि यह बढ़ोतरी मामूली लग सकती है, लेकिन विशेषज्ञों और दवा विक्रेताओं को आगे और बड़ी कीमत वृद्धि की आशंका सता रही है। किन दवाओं पर पड़ा असर? इस फैसले का असर उन दवाओं पर पड़ा है जो आम लोगों के लिए बेहद जरूरी हैं। इनमें शामिल हैं: डायबिटीज की दवाएं जैसे मेटफॉर्मिन और इंसुलिन ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों की दवाएं एंटीबायोटिक्स जैसे एजिथ्रोमाइसिन और एमोक्सिसिलिन दर्द निवारक दवाएं जैसे पैरासिटामोल और इबुप्रोफेन मानसिक स्वास्थ्य, दौरे (seizures) और विटामिन्स से जुड़ी दवाएं इसके अलावा, मेडिकल डिवाइस जैसे कोरोनरी स्टेंट की कीमतों में भी संशोधन किया गया है। आगे और बढ़ सकती हैं कीमतें Bengal Chemists and Druggists Association के सचिव पृथ्वी बोस के मुताबिक, केंद्र सरकार ने दवा कंपनियों को कच्चे माल की कीमत बढ़ने पर आगे भी कीमतें बढ़ाने की छूट दी है। उनका कहना है कि अगर कीमतों पर सख्त नियंत्रण नहीं रखा गया, तो इसका सबसे ज्यादा असर मध्यम और निम्न आय वर्ग पर पड़ेगा। कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल पिछले एक महीने में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण फार्मा सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इससे दवाओं में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (API) की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार: पैरासिटामोल का कच्चा माल ₹250/kg से बढ़कर ₹450/kg तक पहुंच गया है इस स्थिति को देखते हुए दवा कंपनियां कीमतें बढ़ाने और सप्लाई में कमी की चेतावनी दे रही हैं। खुदरा विक्रेताओं की बढ़ी चिंता कोलकाता के दवा विक्रेताओं का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत के कारण भविष्य में और कीमत बढ़ सकती है। इससे आम जनता की जेब पर सीधा असर पड़ेगा और जरूरी दवाएं महंगी हो सकती हैं। पहले के मुकाबले कम बढ़ोतरी हालांकि इस बार 0.6% की वृद्धि अपेक्षाकृत कम है। इससे पहले 2022 और 2023 में दवाओं की कीमतों में 10% से ज्यादा तक की बढ़ोतरी देखी गई थी। All India Organisation of Chemists and Druggists के महासचिव राजीव सिंघल के अनुसार, इस साल की बढ़ोतरी सीमित है, लेकिन भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।  

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
Commercial LPG gas cylinders stacked with price hike impact on businesses and restaurants
महंगाई का बड़ा झटका: कमर्शियल LPG सिलेंडर ₹195 तक महंगा, जानिए नए रेट और असर

नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत आम लोगों के लिए महंगाई की खबर लेकर आई है। कारोबारियों पर भी इसका असर पड़ेगा। 1 अप्रैल से कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। कितनी बढ़ी कीमत? सरकार द्वारा जारी नए रेट के मुताबिक, दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में ₹195.50 और कोलकाता में ₹218 की बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹2078.50 हो गई है, जो पहले ₹1884.50 थी। वहीं कोलकाता में यह कीमत बढ़कर 2208 रुपये पहुंच गई है। अलग-अलग शहरों में नए रेट देश के प्रमुख शहरों में कमर्शियल LPG सिलेंडर की नई कीमत इस प्रकार है: दिल्ली – ₹2078.50 कोलकाता – ₹2208 मुंबई – ₹2031 चेन्नई – ₹2246.50 पटना – ₹2365 जयपुर – ₹2031 रांची – ₹2120 छोटे सिलेंडर पर भी असर 5 किलो वाले फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलेंडर की कीमत में भी ₹51 की बढ़ोतरी की गई है। अब इसकी कीमत ₹549 प्रति रिफिल हो गई है। कारोबारियों पर सीधा असर कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत बढ़ने का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा। इससे खाने-पीने की चीजों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। पहले भी बढ़ चुके हैं दाम गौरतलब है कि 1 मार्च 2026 को भी कमर्शियल LPG सिलेंडर ₹114.50 महंगा हुआ था। वहीं 7 मार्च को घरेलू गैस सिलेंडर ₹60 बढ़ा था। यानी पिछले एक महीने में ही कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में करीब ₹300 तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। क्यों बढ़ रही है कीमत? विशेषज्ञों के अनुसार मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर LPG के दामों पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के चलते आने वाले समय में भी कीमतों में बदलाव संभव है।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Indian rupee falling against US dollar with currency notes and rising oil prices indicating economic pressure
रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, डॉलर के मुकाबले 93 के पार- तेल की कीमतों और वैश्विक तनाव का असर

भारतीय मुद्रा पर बढ़ते दबाव के बीच रुपया शुक्रवार को ऐतिहासिक गिरावट के साथ पहली बार 93 के स्तर को पार कर गया। शुरुआती कारोबार में रुपया भारतीय रुपया 93.15 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। क्यों आई रुपया में इतनी बड़ी गिरावट रुपये में यह तेज गिरावट कई वैश्विक और घरेलू कारणों के चलते देखने को मिली है। खासतौर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ता है और डॉलर की मांग तेज होती है, जिससे रुपया कमजोर होता है। ‘सेफ हेवन’ की ओर भाग रहे निवेशक वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा अमेरिकी डॉलर को मिल रहा है, जो लगातार मजबूत हो रहा है। डॉलर के मजबूत होने से उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बढ़ता है, जिसमें रुपया भी शामिल है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भी भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। जब विदेशी निवेशक अपनी पूंजी निकालते हैं, तो वे रुपये को डॉलर में बदलते हैं, जिससे रुपये की गिरावट और तेज हो जाती है। अमेरिकी फेड की नीति भी बनी वजह फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति और ब्याज दरों को लेकर सतर्क रुख ने भी डॉलर को मजबूती दी है। इससे वैश्विक तरलता कम हो रही है और उभरते बाजारों में निवेश आकर्षण घट रहा है। भारत पर क्या होगा असर कमजोर होता रुपया और महंगा कच्चा तेल मिलकर भारत में महंगाई को बढ़ा सकते हैं। खासकर ईंधन और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। इससे कंपनियों की लागत बढ़ेगी और आम लोगों की जेब पर भी बोझ पड़ेगा। आगे क्या देखें अब बाजार की नजर तीन अहम कारकों पर रहेगी- पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति   कच्चे तेल की कीमतों का रुख   भारतीय रिजर्व बैंक की संभावित दखलअंदाजी   अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो रुपये पर दबाव जारी रह सकता है।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0