झारखंड

धनबाद के बड़ापिछरी में कचरा प्रबंधन के दो संयंत्र बनेंगे

धनबाद में कचरा प्रबंधन को मिलेगी रफ्तार, बड़ापिछरी में 6 एकड़ जमीन पर बनेंगे दो संयंत्र

ranjan kumar tiwari अगस्त 20, 2026 0
धनबाद के बड़ापिछरी में छह एकड़ जमीन पर कचरा प्रबंधन संयंत्र
बड़ापिछरी में बनेंगे निर्माण और जैव-चिकित्सीय कचरा संयंत्र

धनबाद। नगर निगम क्षेत्र में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। गोविंदपुर अंचल के बड़ापिछरी मौजा में छह एकड़ सरकारी जमीन नगर विकास एवं आवास विभाग, झारखंड सरकार को निःशुल्क हस्तांतरित करने की मंजूरी दी गयी है। इस जमीन पर निर्माण एवं विध्वंस कचरा प्रबंधन तथा जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट के लिए संयंत्र स्थापित किये जायेंगे।

जमीन की अनुमानित कीमत 109.83 करोड़ रुपये आंकी गयी है। हालांकि, सरकारी विभागों के बीच अंतर्विभागीय हस्तांतरण के प्रावधान के तहत इसे बिना किसी राशि के हस्तांतरित किया जा रहा है।

 

निर्माण और जैव-चिकित्सीय कचरे का होगा वैज्ञानिक निस्तारण

 

 

बड़ापिछरी मौजा संख्या 86 में स्थित यह जमीन हाल सर्वे खाता संख्या 401 और प्लॉट संख्या 2694 में है। छह एकड़ भूमि पर निर्माण एवं मलबा प्रबंधन व प्रसंस्करण संयंत्र तथा जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट के उपचार और प्रबंधन संयंत्र स्थापित करने की योजना है।

 

इन संयंत्रों के बनने के बाद नगर निगम क्षेत्र से निकलने वाले निर्माण मलबे और जैव-चिकित्सीय कचरे के वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण और निस्तारण को बढ़ावा मिलेगा।

 

109.83 करोड़ रुपये है जमीन का अनुमानित मूल्य

 

 

राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत जमीन का मूल्यांकन किया गया। पिछले तीन वर्षों में दर्ज दस्तावेजों के आधार पर अधिकतम मूल्य वाली 50 फीसदी पंजीकृत दस्तावेजों के औसत मूल्य के अनुसार जमीन की दर 4,50,595.5285 रुपये प्रति डिसमिल निर्धारित की गयी।

 

इस आधार पर छह एकड़ जमीन की कुल अनुमानित कीमत करीब 109.83 करोड़ रुपये तय हुई है। सरकारी विभागों के बीच निःशुल्क अंतर्विभागीय हस्तांतरण के कारण इसके लिए कोई राशि नहीं ली जा रही है।

 

छह महीने में काम शुरू नहीं हुआ तो वापस होगी जमीन

 

 

जिला प्रशासन ने जमीन हस्तांतरण के साथ समयसीमा भी तय की है। संबंधित विभाग को छह महीने के भीतर निर्माण कार्य शुरू करना होगा। निर्धारित समय में काम शुरू नहीं होने पर जमीन स्वतः राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग को वापस हो जायेगी।

 

वहीं, 12 महीने के भीतर जमीन का उपयोग नहीं होने पर भी इसे वापस करने का प्रावधान रखा गया है।

 

अधिकारियों की अनुशंसा के बाद मिली मंजूरी

 

 

भूमि हस्तांतरण के लिए गोविंदपुर अंचल अधिकारी के प्रस्ताव पर एलआरडीसी और धनबाद एसडीओ की अनुशंसा ली गयी। इसके बाद उपायुक्त आदित्य रंजन ने भूमि हस्तांतरण को मंजूरी दी।

 

प्रशासन का यह कदम धनबाद नगर निगम क्षेत्र में बढ़ते कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और प्रसंस्करण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संयंत्रों के निर्माण से निर्माण मलबे और जैव-चिकित्सीय कचरे के व्यवस्थित निस्तारण की व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है।

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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रांची में धोनी के घर तक जाने वाली सड़क का होगा कायाकल्प, ₹2.75 करोड़ मंजूर

रांची। राजधानी रांची में महेंद्र सिंह धोनी के घर तक जाने वाली जर्जर सड़क का अब कायाकल्प किया जाएगा। एनएच-23 के पिस्का मोड़-कटहल मोड़ मार्ग के बीच ललित नारायण मिश्रा कॉलोनी से सिमलिया तक जाने वाली करीब 2.47 किलोमीटर लंबी सड़क को लगभग 2.75 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है। ग्रामीण कार्य विभाग ने सड़क निर्माण का काम शुरू कर दिया है।   धोनी और ईशान किशन के आवास से जुड़ती है सड़क   यह सड़क आगे रिंग रोड से जुड़ती है, जहां भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का आवास है। दूसरी ओर यह सड़क क्रिकेटर ईशान किशन के अपार्टमेंट समेत कई महत्वपूर्ण संस्थानों और रिहायशी इलाकों को भी जोड़ती है। इसी वजह से इस मार्ग को स्थानीय लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।   2.47 किमी सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे   लंबे समय से सड़क की हालत बेहद खराब थी। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे होने के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही थी। बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। रात के समय दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता था।   आए दिन हादसों से परेशान थे लोग   स्थानीय लोगों के अनुसार, जर्जर सड़क के कारण आए दिन बाइक सवार गिरकर घायल हो रहे थे। पैदल चलने वालों के साथ स्कूली बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। गर्मी में सड़क से उड़ने वाली धूल और बारिश में कीचड़ व जलजमाव ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी थीं।   बारिश के कारण फिलहाल काम धीमा   ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से सड़क निर्माण का काम शुरू कर दिया गया है। पिछले दो दिनों से भारी बारिश के कारण काम प्रभावित हुआ है। मौसम साफ होते ही निर्माण कार्य में तेजी लाने की बात कही गई है। सड़क बनने के बाद आसपास के लोगों के साथ-साथ इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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धनबाद: जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों को बेहतर और सुविधाजनक बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। डीएमएफटी फंड से 51 आंगनबाड़ी केंद्रों के नए भवन बनाए जाएंगे। इन केंद्रों को मॉडल सेंटर के रूप में विकसित करने की योजना है, ताकि बच्चों को पढ़ाई, पोषण और अन्य गतिविधियों के लिए बेहतर वातावरण मिल सके। 51 केंद्रों पर खर्च होंगे 14.05 करोड़ रुपये प्रस्तावित भवनों के निर्माण पर कुल करीब 14.05 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यानी प्रत्येक भवन पर लगभग 27.54 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी लघु सिंचाई विभाग को दी गई है। नए भवनों में बच्चों के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। इसका उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल बच्चों के बैठने की जगह तक सीमित न रखकर उन्हें बेहतर बाल विकास केंद्र के रूप में विकसित करना है। निरसा में बनेंगे सबसे ज्यादा 43 केंद्र कुल 51 प्रस्तावित आंगनबाड़ी केंद्रों में सबसे ज्यादा 43 केंद्र निरसा प्रखंड में बनाए जाएंगे। इसके अलावा केलियासोल में दो और चिरकुंडा नगर परिषद क्षेत्र में छह नए भवन बनाए जाने की योजना है। योजना में बांदा, पटलाबाड़ी, उरमा, धोबारी, सालूकचापड़ा, पांड्रा, मदनपुर और वीरसिंहपुर समेत कई क्षेत्र शामिल हैं। वहीं शिवलीबाड़ी, श्यामपुर, कालूबथान, कुमारधुबी, कुशडंगाल और चिरकुंडा में भी नए आंगनबाड़ी भवन प्रस्तावित हैं। बच्चों को मिलेगा बेहतर माहौल नए भवन तैयार होने के बाद आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण मिलने की उम्मीद है। इन केंद्रों के जरिए बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और समग्र विकास से जुड़ी गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा। संपादकीय नजरिया आंगनबाड़ी केंद्र ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बच्चों के शुरुआती विकास और पोषण की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ऐसे में नए भवनों का निर्माण सकारात्मक पहल है। हालांकि, भवन बनने के साथ यह भी जरूरी है कि वहां स्वच्छ पेयजल, शौचालय, पोषण सामग्री, शिक्षण संसाधन और पर्याप्त मानव संसाधन जैसी सुविधाएं नियमित रूप से उपलब्ध रहें। तभी मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र बनाने का उद्देश्य वास्तव में पूरा हो सकेगा।  

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तीन किलोमीटर सड़क बदहाल, बारिश ने बढ़ाई ग्रामीणों की मुश्किलें; जल्द मरम्मत की मांग

गिरिडीह: देवरी प्रखंड में कोसोगोंदोदिघी से बरवाडीह मोड़ (गमहारडीह) तक जाने वाली करीब तीन किलोमीटर लंबी सड़क लंबे समय से मरम्मत के अभाव में जर्जर हो गई है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। बारिश के बाद इन गड्ढों में पानी भर जाने और सड़क पर कीचड़ जमा होने से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सड़क आसपास के कई गांवों के लिए महत्वपूर्ण आवागमन मार्ग है। प्रतिदिन विद्यार्थी, किसान, मजदूर और अन्य ग्रामीण इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। सड़क की खराब स्थिति के कारण पैदल चलने के साथ-साथ दोपहिया वाहनों से आवागमन भी जोखिम भरा हो गया है। बारिश में गड्ढों में भर रहा पानी ग्रामीणों के अनुसार, सड़क की लंबे समय से मरम्मत नहीं होने के कारण इसकी स्थिति लगातार खराब होती गई। हल्की बारिश के बाद ही सड़क के गड्ढों में पानी जमा हो जाता है। कई स्थानों पर कीचड़ फैलने से फिसलन की स्थिति बन जाती है। स्थानीय लोगों को सबसे अधिक परेशानी बारिश के दौरान होती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाली का असर रोजमर्रा के कामकाज के साथ-साथ विद्यार्थियों और किसानों की आवाजाही पर भी पड़ रहा है। प्रशासन से जल्द मरम्मत की मांग कोसोगोंदोदिघी पंचायत के मुखिया धनेश्वर यादव, उपमुखिया संजय राय, वार्ड सदस्य सदानंद पांडेय और पंसस प्रतिनिधि रंजीत पासवान समेत ग्रामीणों ने सड़क की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क की स्थिति का निरीक्षण कराने, गड्ढों की मरम्मत करने और जलजमाव की समस्या दूर करने के लिए उचित जल निकासी की व्यवस्था करने की अपील की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं की गई, तो बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है। सड़क की लगातार खराब होती स्थिति से दुर्घटना का खतरा भी बढ़ रहा है। अब सवाल व्यवस्था पर ग्रामीण इलाकों में सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और बाजार तक पहुंच की बुनियादी कड़ी होती हैं। ऐसे में तीन किलोमीटर सड़क की बदहाली लंबे समय तक बनी रहना स्थानीय लोगों के लिए गंभीर समस्या है। अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की मांग पर कितनी जल्दी कार्रवाई करता है।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
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