रांची। राजधानी में बिजली के खंभों पर लगे अनधिकृत और असुरक्षित केबल हटाने की कार्रवाई के दौरान बुधवार को कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बाधित हो गयीं। बिजली विभाग की कार्रवाई से रांची के करीब 14 इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रभावित रही। इससे BSNL, Airtel, Jio समेत विभिन्न ऑपरेटरों के उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा।
जेबीवीएनएल की टीम ने बिजली के खंभों पर कम ऊंचाई और असुरक्षित तरीके से लगे टेलीकॉम, ओएफसी और टीवी केबल हटाने का अभियान चलाया। इसी दौरान कुछ जगहों पर इंटरनेट कंपनियों के केबल क्षतिग्रस्त हो गये, जिससे दोपहर करीब एक बजे से कई इलाकों में इंटरनेट सेवा प्रभावित रही।
कंपनी सूत्रों के अनुसार, प्रभावित केबल की मरम्मत के बाद कुछ क्षेत्रों में रात तक इंटरनेट सेवा बहाल कर दी गयी।
कार्रवाई का असर हरमू, कोकर, कांके रोड, मेन रोड, खेलगांव, कुसई चौक और करमटोली समेत कई क्षेत्रों में देखने को मिला। कुछ इलाकों में फाइबर इंटरनेट और अन्य दूरसंचार सेवाएं भी प्रभावित हुईं।
Airtel के अनुसार, क्षतिग्रस्त केबल की जानकारी मिलने के बाद तकनीकी टीम ने मरम्मत शुरू की और कई क्षेत्रों में रात करीब आठ बजे तक सेवा बहाल कर दी।
हाइकोर्ट की सख्ती के बाद झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) ने बिजली पोल पर लगे अनधिकृत, कम ऊंचाई वाले और असुरक्षित केबल हटाने का अभियान शुरू किया है। कंपनियों को सुरक्षा मानकों के अनुरूप अपने केबल व्यवस्थित करने के लिए दिया गया अंतिम समय भी खत्म हो चुका है।
निगम के अनुसार, 16 अगस्त के बाद सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने वाले केबल हटाये जा रहे हैं। केबल हटाने में आने वाला खर्च संबंधित कंपनी या एजेंसी से वसूला जायेगा।
अभियान के पहले चरण में कुसई चौक, हिनू रोड, हरमू रोड, श्रद्धानंद रोड, कांके रोड, तुपुदाना, बूटी मोड़, मेन रोड, कोचा टोली, खेलगांव रोड, डिस्टिलरी पुल, कोकर, करमटोली और जगन्नाथपुर समेत कई स्थानों पर कार्रवाई की गयी।
इसके अलावा डोरंडा, हिनू, डंगराटोली, लालपुर, पुरुलिया रोड, मोरहाबादी, चिरौंदी और नामकुम में भी अनधिकृत व झूलते केबल हटाने का अभियान जारी है।
पहले चरण में रांची के ईस्ट, वेस्ट, सेंट्रल, न्यू कैपिटल, डोरंडा और कोकर विद्युत आपूर्ति प्रमंडलों को कार्रवाई की जिम्मेदारी दी गयी है। रांची के साथ खूंटी, गुमला, लोहरदगा और सिमडेगा में भी असुरक्षित केबल हटाने के निर्देश दिये गये हैं।
जेबीवीएनएल ने स्पष्ट किया है कि बिजली पोल से अवैध और असुरक्षित केबल हटाने की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। नामकुम थाना क्षेत्र में 15 वर्षीय नाबालिग के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पुलिस ने मामले में 35 वर्षीय आरोपी गुरुदयाल मुंडा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपी पीड़िता के परिवार का परिचित था और इसी वजह से उसका घर पर आना-जाना था। घर में ही वारदात का आरोप परिजनों के मुताबिक, 16 अगस्त की रात आरोपी घर में रुका था। देर रात करीब 12 बजे उसने कथित तौर पर नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद नाबालिग की तबीयत बिगड़ गई। उसने अपनी मां को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद परिजन उसे इलाज के लिए निजी अस्पताल ले गए। रिम्स में कराया गया भर्ती नाबालिग की स्थिति गंभीर होने पर निजी अस्पताल से उसे रिम्स रेफर किया गया। रिम्स में इलाज के दौरान उसका बयान दर्ज किया गया। इसी बयान के आधार पर नामकुम पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की। POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज नामकुम थाना प्रभारी राम नारायण सिंह के अनुसार, आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और POCSO एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले भी दुष्कर्म के एक मामले में जेल जा चुका है।
धनबाद: गोमो फ्लाईओवर परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। तोपचांची अंचल के रामाकुंडा और महथाडीह मौजा में कुल 2.9978 एकड़ निजी जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भू-अर्जन निदेशालय ने इस संबंध में अधिघोषणा जारी की है। इस जमीन का अधिग्रहण सार्वजनिक प्रयोजन के लिए प्रस्तावित गोमो फ्लाईओवर के निर्माण के लिए किया जाना है। रामाकुंडा में 2.13 एकड़ से अधिक जमीन अधिघोषणा के अनुसार रामाकुंडा मौजा में 2.1378 एकड़ निजी जमीन परियोजना के लिए अधिग्रहित की जाएगी। इसमें अलग-अलग खाता और भूखंड संख्या वाली जमीनें शामिल हैं। संबंधित जमीनों में कनाली, गौड़ा, बाईद और परती जैसी भूमि भी शामिल है। महथाडीह की 0.86 एकड़ जमीन भी अधिग्रहण के दायरे में वहीं महथाडीह मौजा में 0.8600 एकड़ निजी जमीन अधिग्रहण के दायरे में ली गई है। इसमें अलग-अलग खाता और भूखंड संख्या वाली नौ जमीनें शामिल हैं। अधिघोषणा में संबंधित रैयतों के नाम, जमीन का रकबा और उसकी सीमाओं का विवरण भी दर्ज किया गया है। आपत्तियों की सुनवाई के बाद आगे बढ़ी प्रक्रिया भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आपत्तियों की सुनवाई और निर्धारित कानूनी जांच के बाद आगे बढ़ाई गई है। अधिघोषणा में प्रभावित परिवारों के पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन से जुड़े प्रावधानों का भी उल्लेख किया गया है। प्रशासन के अनुसार भूमि अधिग्रहण से संबंधित योजना और दस्तावेजों का निरीक्षण जिला भूमि अर्जन पदाधिकारी, धनबाद के कार्यालय में कार्य दिवस के दौरान किया जा सकता है। फ्लाईओवर से आवागमन आसान होने की उम्मीद गोमो क्षेत्र में फ्लाईओवर निर्माण को यातायात व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद परियोजना के निर्माण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण चरण आगे बढ़ा है। हालांकि, परियोजना के समय पर पूरा होने के लिए भूमि अधिग्रहण के साथ निर्माण कार्य की गति और प्रभावित रैयतों से जुड़े मामलों का समयबद्ध समाधान भी महत्वपूर्ण होगा। संपादकीय नजरिया किसी भी बड़ी सड़क परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक होता है। गोमो फ्लाईओवर की जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू होना परियोजना के लिए सकारात्मक संकेत है। अब प्रशासन के सामने चुनौती यह होगी कि रैयतों के अधिकारों और पुनर्वासन संबंधी प्रावधानों का पालन करते हुए प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
गुमला/बसिया: गुमला जिले के बसिया प्रखंड मुख्यालय स्थित पंचायत भवन परिसर में पेसा कानून के तहत बसिया राजस्व ग्राम में सहायक पंचायत सचिव और कोषाध्यक्ष का चयन किया गया। ग्रामसभा में सदस्यों ने अजय सिंह उर्फ विश्वनाथ प्रताप सिंह को सहायक पंचायत सचिव और नमिता सुरीन को कोषाध्यक्ष चुना। चयन प्रक्रिया ग्रामसभा के सदस्यों के बीच मत विभाजन के माध्यम से पूरी की गई। बैठक में ग्राम प्रधान विश्वकर्मा मुंडा, मुखिया गुलशन टेटे और उपमुखिया संदीप सिंह मौजूद रहे। पर्यवेक्षक के रूप में बीटीएम रश्मि सुरीन भी उपस्थित थीं। मत विभाजन के बाद हुआ चयन सहायक पंचायत सचिव के पद के लिए अजय सिंह और फिरू उरांव का नाम प्रस्तावित किया गया था। वहीं, कोषाध्यक्ष पद के लिए नमिता सुरीन और फुलमनी टोपनो के नाम सामने आए। ग्रामसभा में उपस्थित सदस्यों के बीच मत विभाजन कराया गया। इसके बाद अजय सिंह को सहायक पंचायत सचिव और नमिता सुरीन को कोषाध्यक्ष चुना गया। पहले कोरम पूरा नहीं होने से रद्द हुई थी सभा सहायक सचिव और कोषाध्यक्ष के चयन को लेकर इससे पहले भी ग्रामसभा आयोजित की गई थी, लेकिन पर्याप्त सदस्य उपस्थित नहीं होने के कारण कोरम पूरा नहीं हो सका था। इसके चलते पिछली बैठक को रद्द करना पड़ा था। इस बार बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी में चयन प्रक्रिया पूरी की गई। ग्रामसभा में करीब 500 महिला और पुरुष शामिल हुए। पेसा कानून के तहत ग्रामसभा की भूमिका महत्वपूर्ण पेसा कानून के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा को स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। ऐसे में बसिया में ग्रामसभा के माध्यम से पदाधिकारियों का चयन स्थानीय स्वशासन की प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में सुभाष चौधरी, गोकुल चंद्र सोनी, पंकज सिंह, जितेंद्र भगत, रंजीत चौधरी, लक्ष्मी सोनी, हीरा लाल रजक, सत्तार खान, सतीश नायक, अर्जुन नायक, अंकित चौधरी, अमित तिवारी, अखिलेश यादव, मुकेश साहू समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।