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Two Minors Detained in Telangana Principal Murder Case

तेलंगाना में प्रिंसिपल की हत्या मामले में दो नाबालिग हिरासत में, पैसे के लिए वारदात का आरोप

surbhi अगस्त 20, 2026 0
Two minor suspects detained in Telangana principal murder case over alleged robbery motive and repeated knife attacks
Telangana Principal Murder Case: Two Minors Detained

तेलंगाना के नलगोंडा में स्कूल की प्रिंसिपल रूपा रेड्डी की हत्या के मामले ने पुलिस को भी हैरान कर दिया। पुलिस के मुताबिक, वारदात में स्कूल के दो नाबालिग पूर्व छात्र शामिल हैं। दोनों पर पैसे के लिए प्रिंसिपल पर चाकू से 27 बार हमला करने का आरोप है। जांच के दौरान CCTV फुटेज, आखिरी बातचीत में बोले गए एक शब्द और खून लगे नोटों से पुलिस आरोपियों तक पहुंची।

70 CCTV कैमरों की जांच से शुरू हुई पड़ताल

रूपा रेड्डी की 11 अगस्त को उनके घर में हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद नलगोंडा पुलिस ने जांच के लिए पांच टीमें बनाई थीं। पुलिस ने आसपास लगे करीब 70 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली, लेकिन शुरुआत में आरोपियों की पहचान आसान नहीं थी।

जांच को उस समय अहम सुराग मिला, जब पुलिस को पता चला कि हत्या के आसपास के समय रूपा रेड्डी ने अपनी आंटी से फोन पर बातचीत की थी। इस बातचीत में उन्होंने किसी को “बाबू” कहकर संबोधित किया था।

पुलिस के अनुसार, रूपा रेड्डी स्कूल में छात्रों को अक्सर इसी नाम से बुलाती थीं। इस जानकारी के बाद जांचकर्ताओं ने उन छात्रों पर ध्यान केंद्रित किया जो हत्या के समय स्कूल से अनुपस्थित थे।

13 छात्रों से पूछताछ, दो पर गहराया शक

पुलिस ने ऐसे 13 छात्रों की पहचान की, जिनमें पांच कक्षा 10 के छात्र थे। इन सभी से पूछताछ की गई। इसी दौरान दो छात्रों की गतिविधियां पुलिस को संदिग्ध लगीं।

जांच में सामने आया कि दोनों छात्र घटना के आसपास स्कूल से गैरहाजिर थे और अचानक काफी पैसे खर्च कर रहे थे। इसके बाद पुलिस ने एक नाबालिग के पास से 1.54 लाख रुपये नकद बरामद किए।

उसने पुलिस को बताया कि यह पैसा उसके माता-पिता ने दिया था। लेकिन नोटों पर खून के निशान मिलने के बाद जांच ने नया मोड़ ले लिया।

खून लगे नोटों ने खोला बड़ा राज

पुलिस ने बरामद नोटों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा। जांच में खून के निशान मृतका रूपा रेड्डी से मेल खाने की पुष्टि हुई। इसके बाद दोनों नाबालिग पुलिस की जांच के केंद्र में आ गए।

पुलिस ने इसके बाद हत्या के पीछे की वजह और दोनों छात्रों की गतिविधियों की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं।

प्रिंसिपल की डांट से नाराज था छात्र?

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों में से एक छात्र पहले स्कूल के हॉस्टल में रहता था। उसे शराब और बाइक का शौक होने की बात जांच में सामने आई है।

बताया गया कि रूपा रेड्डी ने उसके बैग में नकदी और मोबाइल फोन मिलने के बाद उसे फटकार लगाई थी। इसके बाद उसे हॉस्टल से हटाकर डे-स्कॉलर कर दिया गया था। पुलिस को शक है कि इस कार्रवाई से छात्र के मन में प्रिंसिपल के प्रति नाराजगी पैदा हुई।

जांच में यह भी सामने आया कि हत्या से करीब एक महीने पहले छात्र गोवा गया था और कथित तौर पर पैसे कमाने के रास्ते तलाश रहा था।

हत्या से पांच दिन पहले घर की रेकी का आरोप

पुलिस के अनुसार, वारदात से करीब पांच दिन पहले आरोपी छात्र ने रूपा रेड्डी के घर की रेकी की थी। उसे कथित तौर पर जानकारी थी कि स्कूल फीस से जमा होने वाली रकम घर में रखी जा सकती है।

इसके बाद 11 अगस्त को रूपा रेड्डी स्कूल से अपने घर लौटीं। पुलिस का आरोप है कि दोनों नाबालिग दीवार फांदकर घर में दाखिल हुए। दोनों ने चेहरे ढक रखे थे।

मास्क गिरा तो प्रिंसिपल ने पहचान लिया?

जांच एजेंसियों के मुताबिक, हमले के दौरान एक आरोपी का मास्क कथित तौर पर गिर गया। पुलिस का मानना है कि इसके बाद रूपा रेड्डी ने उसे पहचान लिया था।

इसके बाद आरोपियों ने उन पर चाकू से लगातार हमला किया। पुलिस के अनुसार, प्रिंसिपल के शरीर पर 27 बार चाकू से वार किए गए, जिससे उनकी मौत हो गई।

हत्या के बाद आरोपी कथित तौर पर घर से नकदी और दो मोबाइल फोन लेकर फरार हो गए।

आरोपी के पास से नकदी और मोबाइल बरामद

पुलिस ने जांच के दौरान एक आरोपी के पास से 1.54 लाख रुपये नकद बरामद किए। इसके अलावा एक आईफोन और रूपा रेड्डी का मोबाइल फोन भी बरामद किए जाने की बात कही गई है।

फिलहाल दोनों आरोपी नाबालिग हैं। पुलिस के अनुसार, उन्हें आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए जुवेनाइल जस्टिस कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा। मामले की जांच अभी जारी है।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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दारा सिंह की रिहाई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ओडिशा सरकार को दो हफ्ते में फैसला लेने का निर्देश

नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने दारा सिंह उर्फ रविंद्र कुमार पाल की समयपूर्व रिहाई यानी सजा में छूट की याचिका पर ओडिशा सरकार की देरी पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने 19 अगस्त 2026 को राज्य सरकार को अंतिम मौका देते हुए कहा कि ओडिशा की Sentence Review Board दो सप्ताह के भीतर इस मामले में फैसला करे। अगर बोर्ड ने निर्णय नहीं लिया, तो सुप्रीम कोर्ट खुद मामले पर विचार कर सकता है।   अदालत ने देरी पर जताई नाराजगी   जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने ओडिशा सरकार से साफ कहा कि मामले में अब और देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य से कहा कि वह निर्णय ले, अन्यथा अदालत खुद आगे कार्रवाई करेगी।   दारा सिंह किस मामले में उम्रकैद काट रहा है?   दारा सिंह को 1999 में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। ट्रायल कोर्ट ने 2003 में उसे मौत की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में ओडिशा हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था।   24 साल से अधिक समय जेल में रहने का दिया हवाला   दारा सिंह ने अपनी याचिका में कहा है कि वह 24 साल से अधिक समय जेल में रह चुका है और राज्य की मौजूदा नीतियों के तहत उसकी समयपूर्व रिहाई पर विचार किया जाना चाहिए। उसने अपने मामले की तुलना राजीव गांधी हत्या मामले के दोषियों को मिली रिहाई से भी की है।   अभी रिहाई का आदेश नहीं हुआ   महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने दारा सिंह को रिहा करने का आदेश नहीं दिया है। अदालत ने केवल सक्षम राज्य प्राधिकरण को उसकी रिहाई/सजा में छूट की याचिका पर तय समय में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अंतिम फैसला ओडिशा की संबंधित प्रक्रिया के तहत होना है।

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नई दिल्ली: हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद हुए कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस के भीतर भी चर्चा तेज हो गई है। बुधवार को दिल्ली में हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में खरगे ने इस मुद्दे पर पार्टी नेताओं की चुप्पी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खरगे ने बैठक में कहा कि उन्हें इस बात से दुख पहुंचा कि CWC के कई सदस्यों ने शुद्धिकरण की घटना की खुलकर निंदा करते हुए उनका समर्थन नहीं किया। हालांकि, उन्होंने किसी नेता का नाम लेकर शिकायत नहीं की। हल्द्वानी रैली के बाद हुआ था शुद्धिकरण मामला 8 अगस्त का है, जब मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की विजय शंखनाद रैली को संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद, 10 अगस्त को दक्षिणपंथी संगठन श्री राम सेना से जुड़े लोगों ने रैली स्थल पर शुद्धिकरण हवन किया था। इस घटना को लेकर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई थी। पार्टी नेताओं ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए आरोप लगाया था कि इस तरह की घटना के पीछे बीजेपी और आरएसएस से जुड़े लोगों की मानसिकता है। खरगे ने संसद में भी उठाया था मुद्दा शुद्धिकरण विवाद को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष पहले भी सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। मानसून सत्र के आखिरी दिन उन्होंने संसद में भी इस मुद्दे को उठाया था। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने CWC की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में इस घटना को अस्वीकार्य और निंदनीय बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाएं बीजेपी की मानसिकता को दर्शाती हैं। बीजेपी ने घटना से किया किनारा वहीं, बीजेपी ने शुद्धिकरण कार्यक्रम से खुद को अलग कर लिया था। पार्टी की ओर से इस अनुष्ठान की निंदा भी की गई थी। अब CWC बैठक में खरगे की नाराजगी सामने आने के बाद यह मामला कांग्रेस के अंदर भी चर्चा का विषय बन गया है। पार्टी अध्यक्ष की टिप्पणी से साफ है कि वे चाहते हैं कि ऐसे मुद्दों पर पार्टी के वरिष्ठ नेता सार्वजनिक रूप से एकजुट होकर अपनी प्रतिक्रिया दें।  

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उत्तर प्रदेश में भारी बारिश से नदियां उफान पर और जलभराव की स्थिति
यूपी में बारिश का दौर जारी, कई नदियां उफान पर; दीवार गिरने से चार की मौत

लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश में मानसूनी बारिश का दौर लगातार जारी है। लगातार हो रही बारिश से कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है और कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी उफान पर है, जिसके चलते रामघाट को बंद कर दिया गया है। प्रयागराज और वाराणसी में गंगा का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है। बारिश के कारण अलग-अलग जिलों में हादसे भी हुए हैं। जौनपुर और प्रयागराज में दीवार गिरने से चार लोगों की मौत हो गई। वहीं, कई अन्य जिलों में भी बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है।   बुंदेलखंड के चार जिलों में ऑरेंज अलर्ट     मौसम विभाग ने गुरुवार को बुंदेलखंड के झांसी, हमीरपुर, महोबा और ललितपुर में भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।   वहीं बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, फतेहपुर और जालौन में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में तेज बारिश के साथ जलभराव और स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका है।   प्रतापगढ़ और प्रयागराज में रिकॉर्ड बारिश     बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की गई। प्रतापगढ़ में सबसे ज्यादा 130 मिमी बारिश हुई, जबकि प्रयागराज में 119.8 मिमी और हरदोई में 101 मिमी बारिश दर्ज की गई।   इसके अलावा पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर में 64.3 मिमी और गोंडा में 60 मिमी बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार 23 अगस्त तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।   नदियों का बढ़ा जलस्तर, कई इलाके प्रभावित     लगातार बारिश के कारण यूपी की कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। कुछ स्थानों पर नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। अवध के कई जिलों में भी नदी के बढ़ते जलस्तर से परेशानी बढ़ी है।   चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के उफान को देखते हुए रामघाट को बंद कर दिया गया है। वहीं प्रयागराज और वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में चिंता बनी हुई है।   प्रयागराज में जलभराव पर हाईकोर्ट सख्त     प्रयागराज में बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव की स्थिति को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चिंता जताई है। कोर्ट ने जलभराव वाले इलाकों से बारिश का पानी 24 से 48 घंटे के भीतर निकालने के लिए आपात उपाय करने का निर्देश दिया है।   नगर आयुक्त को मोरी गेट और दारागंज समेत प्रभावित क्षेत्रों से पानी पंप कर निकालने को कहा गया है। जिलाधिकारी को भी जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।   23 अगस्त तक बारिश की संभावना     मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां फिलहाल बनी रहेंगी। आने वाले दिनों में कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश के दौर जारी रहने की संभावना है।   लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से निचले इलाकों और नदी किनारे जाने में सावधानी बरतने की अपील की है।

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