झारखंड

JSSC CGL Exam Cancelled, TDPL Recruitment Exams Also Scrapped

JSSC CGL परीक्षा रद्द, TDPL की सभी भर्तियां भी कैंसल; हेमंत सरकार ने मानी छात्रों की बड़ी मांग

kalpana अगस्त 18, 2026 0
Students celebrating after the Jharkhand government cancelled the JSSC CGL exam amid a recruitment protest
JSSC CGL Cancelled: Jharkhand Government Scraps TDPL Recruitment Exams

रांची: जेपीएससी-जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में JSSC CGL परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया है. इसके साथ ही TDPL एजेंसी के माध्यम से आयोजित की गयी अन्य भर्ती परीक्षाओं को भी रद्द करने की घोषणा की गयी है.

प्रोजेक्ट भवन में कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद इसकी जानकारी दी. सरकार के इस फैसले के बाद रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच खुशी का माहौल देखने को मिला. छात्र लंबे समय से JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे.

TDPL की सभी परीक्षाएं होंगी रद्द

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल JSSC CGL परीक्षा ही रद्द नहीं होगी, बल्कि TDPL एजेंसी के माध्यम से आयोजित की गयी सभी भर्ती परीक्षाओं को भी रद्द किया जाएगा. इसमें वे परीक्षाएं भी शामिल होंगी, जिनकी चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है.

सरकार ने JSSC CGL परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों की जांच कराने का भी फैसला लिया है. सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा.

छात्रों के हित में सरकार ने लिया फैसला

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आंदोलन कर रहे सभी युवा राज्य के नौजवान हैं और सरकार उनके हितों के साथ खड़ी है. उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं होना चाहिए.

सरकार के इस फैसले को लंबे समय से जारी छात्र आंदोलन को खत्म करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. छात्रों की ओर से JSSC CGL समेत विवादित परीक्षाओं को लेकर लगातार सवाल उठाये जा रहे थे.

परीक्षा व्यवस्था में होंगे बड़े सुधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर पूर्व में तय एसओपी यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का पूरी सख्ती से पालन किया गया होता, तो परीक्षा व्यवस्था में इस तरह की खामियां सामने नहीं आतीं.

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने परीक्षा में धांधली रोकने के लिए पहले ही कड़ा कानून बनाया है. अब भर्ती परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया में और सुधार किये जाएंगे, ताकि भविष्य में परीक्षा संचालन और नियुक्ति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो सके.

अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में बनेगी उच्चस्तरीय कमेटी

JSSC और JPSC की परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार ने उच्चस्तरीय कमेटी गठित करने का फैसला लिया है. मुख्यमंत्री के अनुसार वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अमिताभ कौशल के नेतृत्व में यह कमेटी काम करेगी.

कमेटी प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन, चयन प्रक्रिया, परीक्षा संचालन और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों का अध्ययन करेगी. इसके बाद परीक्षा व्यवस्था में जरूरी सुधारों को लेकर अपनी सिफारिशें और दिशा-निर्देश देगी.

2014 से हुई नियुक्तियों की भी होगी जांच

सरकार ने जांच का दायरा केवल JSSC CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं तक सीमित नहीं रखा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 से अब तक हुई छोटी-बड़ी नियुक्तियों में अगर किसी तरह की गड़बड़ी हुई है, तो उसकी भी जांच की जाएगी.

इस फैसले से आने वाले दिनों में राज्य की पुरानी भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर भी जांच का दायरा बढ़ सकता है. सरकार का दावा है कि नियुक्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है.

MMDR बिल पर विशेष सत्र की संभावना

कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा पारित MMDR संशोधन कानून को लेकर भी राज्य सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि खनिज संपदा और राज्य के अधिकारों से जुड़े इस मुद्दे पर जल्द बैठक की जाएगी.

उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर MMDR कानून में हुए बदलावों पर चर्चा और विचार-विमर्श के लिए झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र भी बुलाया जा सकता है.

छात्रों की मांगों पर सरकार का बड़ा फैसला

JSSC CGL परीक्षा रद्द करने, TDPL की अन्य परीक्षाओं को कैंसल करने और भर्ती प्रक्रिया की जांच के फैसले को आंदोलनरत छात्रों की प्रमुख मांगों पर सरकार की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है. अब छात्रों की नजर सरकार की ओर से घोषित जांच और परीक्षा सुधारों के अगले कदम पर है.

फिलहाल JSSC CGL रद्द होने के साथ ही 23 दिनों से जारी छात्र आंदोलन में एक बड़ा मोड़ आ गया है. सरकार और छात्रों के बीच आगे की बातचीत में आंदोलन समाप्त करने और नई भर्ती प्रक्रिया को लेकर फैसला अहम होगा.

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

kalpana

झारखंड

View more
JPSC-JSSC protest students recovering at Ranchi Sadar Hospital
JPSC-JSSC Protest: सदर अस्पताल में भर्ती सभी छात्रों की हालत बेहतर, आज हो सकते हैं डिस्चार्ज

रांची: JPSC-JSSC समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में हुए धरना-प्रदर्शन के दौरान घायल होकर रांची सदर अस्पताल में भर्ती छात्रों की हालत अब बेहतर है. अस्पताल प्रबंधन ने इलाजरत सभी छात्रों को मंगलवार को डिस्चार्ज करने की तैयारी की है. अस्पताल में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत अन्य छात्रों का इलाज चल रहा था. डॉक्टरों के अनुसार सभी छात्रों की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार हुआ है और अब उन्हें अस्पताल में भर्ती रखने की जरूरत नहीं है. धरना-प्रदर्शन के दौरान बिगड़ी थी तबीयत JPSC और JSSC सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के विरोध में रांची में छात्र आंदोलन कर रहे थे. इसी दौरान कुछ छात्रों की तबीयत बिगड़ने और चोट लगने के बाद उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इलाजरत छात्रों में पलामू निवासी राहुल क्रांति, मनीष कुमार सिंह और छात्रा उम्मे हबीबा शामिल थीं. उम्मे हबीबा को पिछले मंगलवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों ने किया स्वास्थ्य परीक्षण सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश सिंह ने सोमवार देर रात अस्पताल में भर्ती छात्रों से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली. उन्होंने छात्रों की स्थिति का जायजा लेने के बाद बताया कि सभी की हालत पहले की तुलना में काफी बेहतर है. अस्पताल प्रबंधन के अनुसार डॉक्टरों की निगरानी में इलाज के बाद अब छात्रों की स्थिति स्थिर है. इसी आधार पर सभी को अस्पताल से छुट्टी देने की तैयारी की जा रही है. आंदोलन के बीच छात्रों की सेहत पर रही नजर JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान कई छात्रों की तबीयत बिगड़ी थी. अनशन और धरना-प्रदर्शन के कारण आंदोलनकारियों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा. फिलहाल अस्पताल में भर्ती छात्रों की हालत में सुधार के बाद उनके डिस्चार्ज का रास्ता साफ हो गया है. वहीं, परीक्षा विवाद और छात्रों की मांगों को लेकर सरकार के अगले कदम पर भी सभी की नजर बनी हुई है.  

kalpana अगस्त 18, 2026 0
Officials conducting a survey of proposed polling stations in Deoghar ahead of Jharkhand Panchayat Elections 2027

पंचायत चुनाव की आहट! देवघर में 2458 बूथों की खुलेगी ‘कुंडली’, शुरू हुआ मतदान केंद्रों का सर्वे

JPSC-JSSC exam scam investigation into alleged remote access and solver network

JPSC-JSSC मामला: अभय तिवारी का बड़ा दावा- ‘सेटिंग से मैं भी पास हुआ’, रिमोट एक्सेस से सॉल्वर हल करते थे पेपर

Water supply disrupted in Bagbera Housing Colony, Jamshedpur due to pump house fault

जमशेदपुर में 1140 घरों में नहीं पहुंचा पानी, सुबह-शाम ठप रही जलापूर्ति; बार-बार खराबी से लोगों में नाराजगी

BSO Tejnarayan Pandit detained in Chatra in connection with the JSSC CGL irregularities case
JSSC CGL मामला: पत्थलगड्डा के BSO तेजनारायण पंडित हिरासत में, CID के निर्देश पर पूछताछ जारी

चतरा: JSSC CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में पत्थलगड्डा के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (BSO) तेजनारायण पंडित को स्थानीय पुलिस ने हिरासत में लिया है. बताया जा रहा है कि CID के निर्देश पर पुलिस ने यह कार्रवाई की है. हिरासत में लेने के बाद उनसे परीक्षा में कथित अनियमितता से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर पूछताछ की जा रही है. परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में नाम सामने आया था जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले JSSC CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच के दौरान तेजनारायण पंडित का नाम सामने आया था. इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए CID के निर्देश पर स्थानीय पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया. पुलिस उनसे परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम, संभावित संपर्क और अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी जुटा रही है. हालांकि, अभी तक पुलिस या संबंधित अधिकारियों की ओर से तेजनारायण पंडित की भूमिका को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. पूछताछ के बाद साफ होगी भूमिका हिरासत में लिए गए BSO से लगातार पूछताछ की जा रही है. जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित परीक्षा गड़बड़ी में उनकी कोई भूमिका थी या नहीं और यदि थी तो उसका स्वरूप क्या था. फिलहाल सिर्फ हिरासत और पूछताछ की कार्रवाई हुई है. तेजनारायण पंडित की भूमिका को लेकर अंतिम स्थिति जांच पूरी होने और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी. 17 अगस्त को सरकार ने JSSC CGL रद्द करने का किया ऐलान गौरतलब है कि JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर रांची में अभ्यर्थियों का आंदोलन लंबे समय से चल रहा था. इसी बीच 17 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JSSC CGL परीक्षा रद्द करने का ऐलान किया था. सरकार ने इसके साथ ही TDPL एजेंसी द्वारा आयोजित अन्य परीक्षाओं को भी रद्द करने की घोषणा की है. वहीं CGL परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ी की जांच की बात भी कही गई है. अब पत्थलगड्डा के BSO को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने के बाद JSSC CGL मामले की जांच को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं. जांच में आगे और क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है.  

kalpana अगस्त 18, 2026 0
Heavy monsoon rain in Jharkhand with weather alert issued for several districts

झारखंड में भारी बारिश का अलर्ट, चतरा-हजारीबाग और रामगढ़ में रेड अलर्ट; कई जिलों में ऑरेंज-येलो अलर्ट

JPSC JSSC Exams Cancelled

JPSC-JSSC परीक्षा रद्द, छात्रों का अनशन खत्म; मंत्रियों ने पिलाया जूस

Students at a private school in Jharkhand as Santali language education is set to begin

झारखंड के निजी स्कूलों में अब पढ़ाई जाएगी संताली भाषा, डीपीएस रांची से होगी शुरुआत

Congress leaders address a press conference in Ranchi over JPSC-JSSC protests, SIR and the mining amendment bill
छात्र आंदोलन से SIR और माइनिंग बिल तक, कांग्रेस का केंद्र पर हमला; 18 अगस्त को आंदोलन की रणनीति होगी तय

रांची: झारखंड कांग्रेस मुख्यालय में सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने JPSC-JSSC छात्र आंदोलन, SIR और माइनिंग संशोधन बिल को लेकर केंद्र सरकार और बीजेपी पर जमकर निशाना साधा. प्रदेश प्रभारी के. राजू, प्रदेश सह प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने अलग-अलग मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखा. छात्र आंदोलन पर कांग्रेस ने कहा- बातचीत से निकले समाधान प्रदेश प्रभारी के. राजू ने कहा कि झारखंड में छात्रों का आंदोलन लंबे समय से चल रहा है. कांग्रेस छात्रों की मांगों के साथ खड़ी है और चाहती है कि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के जरिए जल्द समाधान निकले. उन्होंने राहुल गांधी द्वारा देशभर में छात्रों के मुद्दे उठाने और जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का जिक्र भी किया. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बातचीत के बाद छात्रों की मांगों पर चर्चा के लिए चार सदस्यीय मंत्रियों की कमेटी बनाई गई है. 80 फीसदी मांगों पर सहमति का दावा विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने दावा किया कि छात्रों की करीब 80 फीसदी मांगों पर सहमति बन चुकी है. उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर गंभीर है, लेकिन बीजेपी इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है. वहीं मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि JPSC की 14वीं परीक्षा और बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने को लेकर सहमति बनी है. TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को लेकर भी सरकार और छात्रों के बीच सहमति बनने की बात कही गई. हालांकि JSSC CGL परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग पर सहमति नहीं बन सकी है. मंत्री ने कहा कि CGL का रिजल्ट अदालत के निर्देश के बाद जारी हुआ था और कई चयनित अभ्यर्थी करीब एक साल से नौकरी कर रहे हैं. SIR को लेकर निर्वाचन आयोग पर सवाल कांग्रेस ने SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर भी निर्वाचन आयोग और बीजेपी पर निशाना साधा. के. राजू ने आरोप लगाया कि SIR के जरिए लोगों के वोट देने के अधिकार को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मुलाकात का समय मांगा था, लेकिन अभी तक समय नहीं मिला. कांग्रेस का दावा है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के फॉर्म लंबित हैं. मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि कई आदिवासी क्षेत्रों में लोग SIR का फॉर्म भरने से इनकार कर रहे हैं. उन्होंने ऐसे इलाकों में विशेष कैंप लगाकर मतदाताओं के नाम जोड़ने की मांग की. माइनिंग बिल पर केंद्र को घेरा प्रेस वार्ता में माइनिंग संशोधन बिल भी बड़ा मुद्दा रहा. के. राजू ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने बिल लाने से पहले राज्यों से पर्याप्त चर्चा नहीं की. कांग्रेस का कहना है कि इससे राज्यों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रपति से मुलाकात करेगी और बिल को कानून का रूप नहीं देने का आग्रह करेगी. प्रदीप यादव बोले- संघीय ढांचे पर हमला प्रदीप यादव ने माइनिंग संशोधन बिल को संघीय ढांचे पर प्रहार बताया. उन्होंने कहा कि राज्यों की राय लिए बिना खनन से जुड़े अधिकारों में बदलाव करना उचित नहीं है. उन्होंने बताया कि 18 अगस्त को कांग्रेस इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करेगी और जिला स्तर पर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी. 15 हजार करोड़ के नुकसान का दावा स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने आरोप लगाया कि माइनिंग संशोधन कानून से झारखंड को करीब 15 हजार करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है. उन्होंने कहा कि यदि राज्य के खनिज आधारित राजस्व पर असर पड़ता है, तो इसका प्रभाव सरकार की कई योजनाओं पर पड़ सकता है. तीनों मुद्दों पर आंदोलन जारी रखने का ऐलान कांग्रेस ने साफ किया कि छात्र आंदोलन, SIR और माइनिंग संशोधन बिल को लेकर पार्टी आगे भी सक्रिय रहेगी. 18 अगस्त को माइनिंग कानून के खिलाफ आंदोलन की रणनीति तय करने के बाद जिला स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाने की बात कही गई है. कुल मिलाकर, कांग्रेस ने एक ही प्रेस वार्ता में छात्र आंदोलन से लेकर मतदाता सूची और खनिज अधिकारों तक कई मुद्दों पर केंद्र और बीजेपी को घेरा और आने वाले दिनों में आंदोलन तेज करने के संकेत दिए हैं.  

kalpana अगस्त 18, 2026 0
Devendra Nath Mahto and other JPSC-JSSC protestors end their hunger strike at Ranchi Sadar Hospital

JPSC-JSSC आंदोलन खत्म, देवेंद्र नाथ महतो समेत अनशनकारियों ने तोड़ा अनशन; मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने पिलाया जूस

Electric buses proposed for public transport in Ranchi, Jamshedpur, Dhanbad and Bokaro

झारखंड के 4 शहरों में जल्द दौड़ेंगी 400 इलेक्ट्रिक बसें, रांची-जमशेदपुर समेत इन शहरों को मिलेगा फायदा

Vehicles passing through a modern toll plaza on a highway in Jharkhand without stopping

झारखंड में अब टोल प्लाजा पर नहीं लगेगी लंबी कतार, मल्टी लेन फ्री-फ्लो सिस्टम से बिना रुके कटेगा टैक्स

0 Comments

Top week

Prashant Kishor addresses Bankipur voters and promises private sector jobs for 10,000 educated unemployed youths.
बिहार

MLA बनते ही प्रशांत किशोर का बड़ा ऐलान, बांकीपुर के 10 हजार पढ़े-लिखे युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में नौकरी दिलाने का दावा

surbhi अगस्त 12, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?