देवघर: वर्ष 2027 में संभावित पंचायत चुनाव को लेकर देवघर जिले में प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं. राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश के बाद जिले के 2458 प्रस्तावित मतदान केंद्रों की मौजूदा स्थिति का सर्वे शुरू कराया गया है. प्रखंड स्तर पर अधिकारी और कर्मचारी मतदान केंद्रों का जायजा लेकर उनकी स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं.
आयोग की ओर से सभी मतदान केंद्रों की वर्तमान स्थिति की जानकारी मांगी गई है. इसके तहत यह देखा जा रहा है कि जिस भवन में मतदान केंद्र बनाया जाना प्रस्तावित है, वह सुरक्षित है या नहीं, वहां मतदान कराने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है या नहीं और मतदाताओं के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाएं मौजूद हैं या नहीं.
जिला पंचायती राज कार्यालय के निर्देश के बाद सभी प्रखंडों में मतदान केंद्रों का सर्वे कराया जा रहा है. संबंधित कर्मी प्रत्येक मतदान केंद्र पर पहुंचकर भवन की स्थिति, उपलब्ध जगह और अन्य सुविधाओं की जानकारी जुटा रहे हैं.
सर्वे पूरा होने के बाद प्रखंड स्तर से रिपोर्ट जिला मुख्यालय को भेजी जाएगी. इसके बाद सभी रिपोर्टों को एक साथ संकलित कर राज्य निर्वाचन आयोग को भेजने की तैयारी है. आयोग इसी जानकारी के आधार पर मतदान केंद्रों की स्थिति और व्यवस्था को अंतिम रूप देगा.
सर्वे के दौरान खास तौर पर जर्जर और अनुपयुक्त भवनों की पहचान की जा रही है. यदि कोई भवन मतदान केंद्र के लिए सुरक्षित नहीं पाया जाता है, तो उसे अलग सूची में शामिल किया जाएगा. इसके बाद ऐसे मतदान केंद्रों के लिए वैकल्पिक भवन की तलाश की जा सकती है.
प्रशासन का उद्देश्य चुनाव से पहले ही मतदान केंद्रों से जुड़ी सभी कमियों को दूर करना है, ताकि मतदान के दिन मतदाताओं और मतदानकर्मियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.
मतदान केंद्रों के निर्धारण में सिर्फ भवन की स्थिति ही नहीं, बल्कि वार्डवार मतदाताओं की संख्या को भी ध्यान में रखा जाएगा. जिन वार्डों में मतदाताओं की संख्या अधिक है, वहां मतदान केंद्रों पर पर्याप्त जगह और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा.
इससे मतदान के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने और मतदाताओं को सुगम तरीके से मतदान का अवसर देने में मदद मिलेगी.
देवघर जिले में पंचायत चुनाव के तहत 194 पंचायत, 25 जिला परिषद क्षेत्र, 325 पंचायत समिति सदस्य और 2458 वार्ड सदस्य पदों के लिए चुनाव कराया जाना है. चुनाव की आधिकारिक तारीखों की घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन संभावित चुनाव को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर शुरुआती तैयारियां शुरू कर दी गई हैं.
आने वाले दिनों में मतदान केंद्रों के सत्यापन, मतदाता सूची, कर्मचारियों की उपलब्धता और चुनाव से जुड़े अन्य इंतजामों पर भी काम तेज होने की उम्मीद है.
झारखंड में पंचायत चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से कराने की तैयारी की जा रही है. अलग-अलग पदों के लिए अलग रंग के मतपत्र इस्तेमाल किए जाने का प्रस्ताव है. इसके तहत वार्ड सदस्य के लिए सफेद, मुखिया के लिए गुलाबी, पंचायत समिति सदस्य के लिए हल्का हरा और जिला परिषद सदस्य के लिए हल्का पीला मतपत्र निर्धारित किया जा सकता है.
हालांकि, मतपत्रों के रंग और अन्य चुनावी व्यवस्थाओं को लेकर अंतिम निर्णय राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से लिया जाएगा.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
जमशेदपुर: गोलमुरी थाना क्षेत्र का आकाशदीप प्लाजा एक बार फिर सड़क हादसे को लेकर चर्चा में है. सोमवार देर रात एक ट्रक अचानक अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़ गया. हादसे में ट्रक चालक को हल्की चोट आई, जबकि आसपास से गुजर रहे कई वाहन भी दुर्घटना की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए. घटना के बाद सड़क पर कुछ देर के लिए वाहनों की लंबी कतार लग गई. सूचना मिलने पर गोलमुरी पुलिस मौके पर पहुंची और यातायात व्यवस्था को सामान्य कराया. वाहन में खराबी के बाद अनियंत्रित हुआ ट्रक मिली जानकारी के अनुसार, ट्रक गोलमुरी की ओर से एग्रिको गोलचक्कर की तरफ जा रहा था. इसी दौरान आकाशदीप प्लाजा के पास अचानक ट्रक में तकनीकी खराबी आ गई. चालक वाहन को संभाल पाता, इससे पहले ही ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क के डिवाइडर से जा टकराया और उसके ऊपर चढ़ गया. टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रक चालक को झटका लगा और उसे हल्की चोट आई. हालांकि, राहत की बात यह रही कि हादसे के समय आसपास से गुजर रहे दूसरे वाहन ट्रक की चपेट में नहीं आए. अगर दुर्घटना के समय सड़क पर वाहनों की संख्या अधिक होती, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी. हादसे के बाद सड़क पर लगा जाम ट्रक के डिवाइडर पर चढ़ने के बाद सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो गई. देखते ही देखते दोनों तरफ वाहनों की कतार लगने लगी. स्थानीय लोगों ने घटना की सूचना पुलिस को दी. इसके बाद गोलमुरी थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को सड़क से हटाने की प्रक्रिया शुरू कराई. पुलिस की कार्रवाई के बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य हुआ और सड़क पर वाहनों का परिचालन फिर से शुरू हो गया. लगातार हादसों से बढ़ी चिंता आकाशदीप प्लाजा और गोलमुरी इलाके में लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही काफी अधिक रहती है. ऐसे में तेज रफ्तार, गलत दिशा में वाहन चलाने और सड़क किनारे अवैध पार्किंग जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है. कुछ दिन पहले भी इसी इलाके में ट्रक की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत की घटना सामने आई थी. इसके बाद एक बार फिर ट्रक के दुर्घटनाग्रस्त होने से स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं. सड़क सुरक्षा को लेकर ट्रैफिक पुलिस पर उठे सवाल लगातार हो रही दुर्घटनाओं को लेकर आजसू पार्टी के जिला प्रवक्ता अप्पू तिवारी ने जिला पुलिस और ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति नहीं होनी चाहिए. दुर्घटना संभावित स्थानों पर नियमित निगरानी और सख्त ट्रैफिक व्यवस्था की जरूरत है. उन्होंने गोलमुरी समेत शहर के अन्य दुर्घटना संभावित चौक-चौराहों और प्रमुख सड़कों पर नियमित ट्रैफिक जांच कराने की मांग की. साथ ही तेज रफ्तार वाहनों पर कार्रवाई, गलत दिशा में वाहन चलाने वालों पर नियंत्रण और अवैध पार्किंग रोकने की जरूरत बताई. पर्याप्त संकेतक और चेतावनी बोर्ड लगाने की मांग अप्पू तिवारी ने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में पर्याप्त ट्रैफिक संकेतक और चेतावनी बोर्ड लगाने की भी मांग की है. उनका कहना है कि रात के समय ऐसे स्थानों पर वाहन चालकों को पहले से सावधान करने के लिए स्पष्ट संकेत और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था होनी चाहिए. फिलहाल पुलिस ने दुर्घटना के बाद यातायात को सामान्य करा दिया है. हालांकि, लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच अब यह सवाल उठ रहा है कि आकाशदीप प्लाजा जैसे हादसा संभावित स्थानों पर सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रशासन की ओर से क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं.
जमशेदपुर: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान दिल्ली के लाल किले से जमशेदपुर का नाम भी चर्चा में आया. शहर की पहचान बन चुकी डिमना लेक को देश के प्रमुख और ऐतिहासिक जलाशयों की सूची में शामिल करते हुए विशेष सम्मान दिया गया. इस उपलब्धि के बाद जमशेदपुर समेत पूरे झारखंड में गर्व का माहौल है. केंद्र सरकार की ओर से 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान देश के 25 प्रमुख और ऐतिहासिक जलाशयों के नाम पर लाल किले की दर्शक दीर्घाओं का नामकरण किया गया. इसी सूची में जमशेदपुर की डिमना लेक को भी स्थान मिला. यह सम्मान डिमना लेक के ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ जल संरक्षण और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर की गयी योजना की पहचान के तौर पर देखा जा रहा है. 80 साल पहले रखी गयी थी जल संरक्षण की नींव डिमना लेक का इतिहास टाटा स्टील की दूरदर्शी योजना से जुड़ा हुआ है. शहर की बढ़ती आबादी और भविष्य में पानी की बढ़ती जरूरत को देखते हुए करीब आठ दशक पहले इस जलाशय की योजना तैयार की गयी थी. इस परियोजना की परिकल्पना प्रसिद्ध इंजीनियर डॉ. एम. विश्वेश्वरैया की सोच से जुड़ी रही. फरवरी 1940 में डिमना लेक के निर्माण का काम शुरू हुआ और करीब चार साल बाद 17 अप्रैल 1944 से जमशेदपुर शहर को यहां से पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गयी. आज भी जमशेदपुर की जलापूर्ति में अहम भूमिका करीब 7500 मिलियन गैलन जल भंडारण क्षमता वाला डिमना लेक आज भी जमशेदपुर के लिए बेहद महत्वपूर्ण जलस्रोत है. पिछले करीब आठ दशकों से यह शहर की पानी की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रहा है. डिमना लेक सिर्फ पेयजल का स्रोत नहीं है, बल्कि यह जमशेदपुर की पर्यावरणीय और प्राकृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है. जलाशय की देखरेख और निगरानी के लिए संबंधित संस्थाओं की ओर से लगातार काम किया जाता है. पर्यटकों के लिए भी खास आकर्षण दलमा पहाड़ियों की खूबसूरत वादियों के बीच स्थित डिमना लेक जमशेदपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में भी शामिल है. शहर और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग यहां घूमने, पिकनिक मनाने और प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने पहुंचते हैं. डिमना लेक पर नौकायन समेत कई मनोरंजक गतिविधियां भी लोगों को आकर्षित करती हैं. बारिश के मौसम में जलाशय और आसपास का प्राकृतिक नजारा पर्यटकों के लिए और भी खास हो जाता है. लाल किले से सम्मान ने बढ़ाया गौरव डिमना लेक को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से मिली राष्ट्रीय पहचान जमशेदपुर के लिए गौरव की बात है. करीब आठ दशक पहले भविष्य की जल जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गयी यह परियोजना आज भी शहर के लिए उपयोगी बनी हुई है.
देवघर: वर्ष 2027 में संभावित पंचायत चुनाव को लेकर देवघर जिले में प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं. राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश के बाद जिले के 2458 प्रस्तावित मतदान केंद्रों की मौजूदा स्थिति का सर्वे शुरू कराया गया है. प्रखंड स्तर पर अधिकारी और कर्मचारी मतदान केंद्रों का जायजा लेकर उनकी स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं. आयोग की ओर से सभी मतदान केंद्रों की वर्तमान स्थिति की जानकारी मांगी गई है. इसके तहत यह देखा जा रहा है कि जिस भवन में मतदान केंद्र बनाया जाना प्रस्तावित है, वह सुरक्षित है या नहीं, वहां मतदान कराने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है या नहीं और मतदाताओं के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाएं मौजूद हैं या नहीं. प्रखंडों से मांगी जा रही मतदान केंद्रों की रिपोर्ट जिला पंचायती राज कार्यालय के निर्देश के बाद सभी प्रखंडों में मतदान केंद्रों का सर्वे कराया जा रहा है. संबंधित कर्मी प्रत्येक मतदान केंद्र पर पहुंचकर भवन की स्थिति, उपलब्ध जगह और अन्य सुविधाओं की जानकारी जुटा रहे हैं. सर्वे पूरा होने के बाद प्रखंड स्तर से रिपोर्ट जिला मुख्यालय को भेजी जाएगी. इसके बाद सभी रिपोर्टों को एक साथ संकलित कर राज्य निर्वाचन आयोग को भेजने की तैयारी है. आयोग इसी जानकारी के आधार पर मतदान केंद्रों की स्थिति और व्यवस्था को अंतिम रूप देगा. जर्जर भवनों को किया जा रहा चिह्नित सर्वे के दौरान खास तौर पर जर्जर और अनुपयुक्त भवनों की पहचान की जा रही है. यदि कोई भवन मतदान केंद्र के लिए सुरक्षित नहीं पाया जाता है, तो उसे अलग सूची में शामिल किया जाएगा. इसके बाद ऐसे मतदान केंद्रों के लिए वैकल्पिक भवन की तलाश की जा सकती है. प्रशासन का उद्देश्य चुनाव से पहले ही मतदान केंद्रों से जुड़ी सभी कमियों को दूर करना है, ताकि मतदान के दिन मतदाताओं और मतदानकर्मियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. मतदाताओं की संख्या के आधार पर भी होगा इंतजाम मतदान केंद्रों के निर्धारण में सिर्फ भवन की स्थिति ही नहीं, बल्कि वार्डवार मतदाताओं की संख्या को भी ध्यान में रखा जाएगा. जिन वार्डों में मतदाताओं की संख्या अधिक है, वहां मतदान केंद्रों पर पर्याप्त जगह और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा. इससे मतदान के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने और मतदाताओं को सुगम तरीके से मतदान का अवसर देने में मदद मिलेगी. 194 पंचायतों और 2458 वार्डों में चुनाव की तैयारी देवघर जिले में पंचायत चुनाव के तहत 194 पंचायत, 25 जिला परिषद क्षेत्र, 325 पंचायत समिति सदस्य और 2458 वार्ड सदस्य पदों के लिए चुनाव कराया जाना है. चुनाव की आधिकारिक तारीखों की घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन संभावित चुनाव को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर शुरुआती तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. आने वाले दिनों में मतदान केंद्रों के सत्यापन, मतदाता सूची, कर्मचारियों की उपलब्धता और चुनाव से जुड़े अन्य इंतजामों पर भी काम तेज होने की उम्मीद है. बैलेट पेपर से हो सकता है पंचायत चुनाव झारखंड में पंचायत चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से कराने की तैयारी की जा रही है. अलग-अलग पदों के लिए अलग रंग के मतपत्र इस्तेमाल किए जाने का प्रस्ताव है. इसके तहत वार्ड सदस्य के लिए सफेद, मुखिया के लिए गुलाबी, पंचायत समिति सदस्य के लिए हल्का हरा और जिला परिषद सदस्य के लिए हल्का पीला मतपत्र निर्धारित किया जा सकता है. हालांकि, मतपत्रों के रंग और अन्य चुनावी व्यवस्थाओं को लेकर अंतिम निर्णय राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से लिया जाएगा.