नई दिल्ली, एजेंसियां। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकारी स्तर से कंटेंट हटाने के अनुरोधों को लेकर केंद्र सरकार और एलन मस्क के प्लेटफॉर्म के बीच नया विवाद खड़ा होने के संकेत हैं। मस्क ने घोषणा की है कि X यूजर्स को यह जानने की सुविधा देगा कि किसी पोस्ट या अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई के लिए किस सरकार या सरकारी एजेंसी ने अनुरोध किया और उसका कानूनी आधार क्या था।
मस्क की इस पहल के बाद केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत में काम करने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भारतीय कानूनों और लागू नियमों का पालन करना होगा।
केंद्र की ओर से साफ संदेश दिया गया है कि X को भारत में संचालन के दौरान देश के कानूनों का पालन करना होगा। सरकार का यह रुख ऐसे समय आया है जब मस्क प्लेटफॉर्म पर सरकारी सेंसरशिप से जुड़े अनुरोधों को अधिक पारदर्शी बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
सरकार के अनुसार, किसी प्लेटफॉर्म की पारदर्शिता नीति उसे भारत में लागू कानूनी प्रावधानों से अलग काम करने की अनुमति नहीं देती।
मस्क की प्रस्तावित व्यवस्था के तहत X पर यूजर्स को यह जानकारी मिल सकती है कि किसी पोस्ट को हटाने या किसी अकाउंट पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किस सरकारी एजेंसी या सरकार की ओर से आया था।
जहां संभव होगा, वहां कार्रवाई के लिए बताए गए कानूनी आधार या कारण की जानकारी भी दी जा सकती है। इससे यूजर्स यह समझ सकेंगे कि किसी कंटेंट पर कार्रवाई X के अपने फैसले के कारण हुई या किसी सरकारी अनुरोध के बाद।
एलन मस्क लंबे समय से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की नीतियों और कंटेंट मॉडरेशन में अधिक पारदर्शिता की वकालत करते रहे हैं। X की ओर से कंटेंट की पहुंच, रिकमेंडेशन सिस्टम और मॉडरेशन से जुड़े फैसलों को समझने योग्य बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
नए बदलाव के जरिए प्लेटफॉर्म यह बताने की कोशिश कर रहा है कि किसी सामग्री की पहुंच कम होने या उसे हटाए जाने के पीछे क्या वजह रही।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मस्क के स्वामित्व के दौरान अलग-अलग रिपोर्टिंग अवधि में X ने सरकारों की ओर से किए गए कंटेंट हटाने के अनुरोधों में बड़ी संख्या पर कार्रवाई की है। विभिन्न अवधियों में अनुपालन दर 83 प्रतिशत से 98.8 प्रतिशत तक बताई गई है।
ऐसे में नई पारदर्शिता व्यवस्था से यह भी सामने आ सकता है कि अलग-अलग सरकारों के अनुरोधों पर X किस तरह कार्रवाई करता है।
सोशल मीडिया कंपनियों को लेकर केंद्र सरकार का सख्त रुख सिर्फ X तक सीमित नहीं है। इससे पहले सरकार ने Meta को भी भारत के कानूनों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप काम करने का संदेश दिया था।
सरकार ने कंटेंट मॉडरेशन, डीपफेक, CSAM और सिंथेटिक कंटेंट जैसे मुद्दों पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया है। साथ ही स्थानीय भाषाओं और भारतीय संदर्भ में कंटेंट की समीक्षा व्यवस्था मजबूत करने की बात कही गई है।
X की नई नीति से एक तरफ यूजर्स को सरकारी कंटेंट हटाने के अनुरोधों की अधिक जानकारी मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ सरकार का कहना है कि प्लेटफॉर्म को पारदर्शिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ भारतीय कानूनों का भी पालन करना होगा।
ऐसे में आने वाले दिनों में X की नई व्यवस्था और भारत के नियामकीय नियमों के बीच तालमेल एक अहम मुद्दा बन सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
तिरुवनंतपुरम, एजेंसियां। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को केरल में मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी जांच के तहत आठ ठिकानों पर नई छापेमारी की। यह कार्रवाई पूर्व केरल मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की बेटी वीणा टी. से जुड़े CMRL-Exalogic मामले में की गई है। अधिकारियों के अनुसार, तलाशी अभियान धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत चलाया जा रहा है। CMRL और Exalogic के बीच लेनदेन की जांच ED की जांच का केंद्र Cochin Minerals and Rutile Ltd (CMRL) और वीणा की अब बंद हो चुकी कंपनी Exalogic Solutions के बीच कथित वित्तीय लेनदेन है। जांच एजेंसी का आरोप है कि CMRL ने IT कंसल्टेंसी सेवाओं के भुगतान के नाम पर Exalogic को करीब 2.78 करोड़ रुपये का कथित फर्जी भुगतान किया था। ED इससे पहले भी इस मामले में वीणा से जुड़े ठिकानों पर तलाशी ले चुकी है। जून में एजेंसी ने वीणा को पूछताछ के लिए तलब किया था और उनके बयान को PMLA के तहत दर्ज किया गया था। जांच में सामने आए वित्तीय लेनदेन जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में CMRL से जुड़े लेनदेन के अलावा Exalogic को दिए गए कथित 50 लाख रुपये के ऋण की भी जांच की जा रही है। ED का आरोप है कि इन लेनदेन से जुड़े धन को अपराध की आय के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। पहले भी हो चुकी है कई ठिकानों पर कार्रवाई इस मामले में ED ने मई 2026 में भी केरल के कई स्थानों पर छापेमारी की थी। उस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के तिरुवनंतपुरम स्थित आवास समेत कई ठिकानों की तलाशी ली गई थी। इसके बाद वीणा से पूछताछ और मामले से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों की जांच आगे बढ़ाई गई। ED की मंगलवार की नई कार्रवाई से CMRL-Exalogic मामले की जांच एक बार फिर तेज होने के संकेत मिले हैं। एजेंसी फिलहाल तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य सामग्री की जांच कर रही है।
मुंबई, एजेंसियां। मुंबई मेट्रो से रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी सुविधा शुरू की गई है। अब यात्रियों को मेट्रो पास खरीदने के लिए टिकट काउंटर की लंबी लाइन में खड़े होने की जरूरत नहीं होगी। मुंबई मेट्रो वन ने WhatsApp आधारित डिजिटल मेट्रो पास सेवा शुरू की है। इसके जरिए यात्री अपने मोबाइल से ही पास खरीद सकेंगे और यात्रा के दौरान इसका इस्तेमाल कर सकेंगे। मुंबई मेट्रो वन के मुताबिक, यह देश की पहली WhatsApp आधारित मेट्रो पास सेवा है। फिलहाल यह सुविधा वर्सोवा-अंधेरी-घाटकोपर कॉरिडोर पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए उपलब्ध है। Google Wallet और Apple Wallet में भी सेव होगा पास WhatsApp से खरीदा गया डिजिटल मेट्रो पास सिर्फ चैट में ही उपलब्ध नहीं रहेगा। यात्री इसे Google Wallet और Apple Wallet में भी सेव कर सकते हैं। इससे सफर के दौरान पास को आसानी से एक्सेस किया जा सकेगा। इस सुविधा का सबसे बड़ा फायदा नियमित यात्रियों को होगा, जिन्हें बार-बार पास खरीदने के लिए टिकट काउंटर पर जाना पड़ता है। पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने से समय की भी बचत होगी। WhatsApp से ऐसे खरीदें मेट्रो पास मुंबई मेट्रो वन का डिजिटल पास खरीदने के लिए इन आसान स्टेप्स को फॉलो करें: सबसे पहले मुंबई मेट्रो वन का आधिकारिक WhatsApp नंबर +91 9670008889 अपने फोन में सेव करें। WhatsApp खोलकर इस नंबर पर Hi भेजें। चैट में दिए गए विकल्पों में Book Now चुनें। इसके बाद Digital Pass के विकल्प पर जाएं। अब अपनी जरूरत के अनुसार Trip Pass या Store Value Pass चुनें। इसके बाद UPI, डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड से भुगतान करें। पेमेंट पूरा होते ही आपका डिजिटल मेट्रो पास WhatsApp पर उपलब्ध हो जाएगा। किन यात्रियों को मिलेगा फायदा? यह सुविधा खास तौर पर मुंबई मेट्रो वन के वर्सोवा-अंधेरी-घाटकोपर रूट पर नियमित सफर करने वाले यात्रियों के लिए उपयोगी है। अब उन्हें पास खरीदने के लिए काउंटर पर जाने या अलग-अलग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं होगी। मुंबई मेट्रो वन की यह पहल सार्वजनिक परिवहन में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के साथ यात्रियों के सफर को अधिक सुविधाजनक और तेज बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
मुंबई, एजेंसियां। टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी Tata Sons की 108वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) आज 18 अगस्त 2026 को होनी है, लेकिन बैठक के आयोजन को लेकर गंभीर अनिश्चितता बनी हुई है। मुख्य वजह Sir Ratan Tata Trust (SRTT) की ओर से AGM के लिए अधिकृत प्रतिनिधि नामित न कर पाना है। इसके चलते जरूरी कोरम पूरा होने पर सवाल खड़ा हो गया है और बैठक स्थगित होने की संभावना जताई जा रही है। कोरम को लेकर क्यों फंसा मामला? Tata Sons के Articles of Association के Article 86 के तहत AGM के लिए दोनों प्रमुख टाटा ट्रस्ट—Sir Dorabji Tata Trust (SDTT) और Sir Ratan Tata Trust—द्वारा संयुक्त रूप से नामित अधिकृत प्रतिनिधि की मौजूदगी महत्वपूर्ण है। SRTT पर महाराष्ट्र के Charity Commissioner की नियामकीय पाबंदी के कारण ट्रस्ट फिलहाल अपना प्रतिनिधि नामित करने की स्थिति में नहीं है। SRTT की Tata Sons में करीब 23.56% हिस्सेदारी है और दोनों प्रमुख ट्रस्ट मिलकर कंपनी में बहुमत हिस्सेदारी रखते हैं। इसलिए प्रतिनिधित्व का यह मुद्दा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि AGM की वैध कार्यवाही के लिए अहम बन गया है। AGM में एन. चंद्रशेखरन को लेकर भी अहम मुद्दा इस AGM की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि Tata Sons के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने फरवरी 2027 में अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया है। उनके मौजूदा कार्यकाल और बोर्ड में बने रहने से जुड़े मुद्दे भी AGM के एजेंडे को महत्वपूर्ण बनाते हैं। टाटा ट्रस्ट और चंद्रशेखरन के बीच Tata Sons की संभावित लिस्टिंग, Air India जैसे नए कारोबारों की वित्तीय स्थिति और समूह की रणनीति समेत कई मुद्दों पर मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। बैठक हुई तो क्या, नहीं हुआ तो क्या? Tata Sons की योजना AGM आयोजित करने की है, लेकिन यदि निर्धारित कोरम पूरा नहीं हुआ तो बैठक को स्थगित करना पड़ सकता है। रिपोर्टों के अनुसार बोर्ड की अगली महत्वपूर्ण बैठक सितंबर के मध्य में हो सकती है, जहां लंबित मुद्दों पर आगे निर्णय लिया जा सकता है। इस पूरे घटनाक्रम का असर टाटा समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों पर भी दिखाई दिया है। AGM से पहले निवेशकों की चिंता के बीच Voltas, Tata Technologies और TCS समेत कई Tata Group stocks में दबाव देखा गया था।