मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता वीर पहाड़िया की आगामी फिल्म ‘प्रेम कीटाणु’ का मजेदार टीजर जारी कर दिया गया है। अपूर्व सिंह कार्की के निर्देशन में बनी यह फिल्म कॉलेज और हॉस्टल लाइफ, दोस्ती, प्यार और युवाओं की मस्ती को हास्यपूर्ण अंदाज में पेश करती है। फिल्म में वीर पहाड़िया के साथ अपारशक्ति खुराना, आफिया सैयद, राकेश बेदी और निखिल विजय प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे।
टीजर में वीर पहाड़िया एक बैकबेंचर कॉलेज छात्र के किरदार में दिखाई दे रहे हैं। टीजर की शुरुआत रैगिंग और कॉलेज के माहौल से होती है, जिसके बाद दोस्ती, मस्ती और प्यार से जुड़े कई मजेदार दृश्य देखने को मिलते हैं। फिल्म आज के युवाओं की जिंदगी और उनके सामने आने वाली परेशानियों को हल्के-फुल्के अंदाज में दिखाने का वादा करती है।
फिल्म की कहानी युवाओं की दोस्ती, सपनों, दिल टूटने और बड़े होने के दौरान आने वाली चुनौतियों के इर्द-गिर्द घूमती है। निर्देशक अपूर्व सिंह कार्की ने इसे दिल, हास्य और दोस्ती से जुड़ी कहानी बताया है। टीजर में फिल्म की पूरी कहानी को उजागर नहीं किया गया है, जिससे दर्शकों की उत्सुकता बनी हुई है।
गौरव वर्मा की अवनिका फिल्म्स की यह पहली फिल्म है। इसे फार्स फिल्म्स के साथ मिलकर और भावना स्टूडियोज के सहयोग से प्रस्तुत किया गया है। ‘प्रेम कीटाणु’ 2 अक्टूबर 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
टीजर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ दर्शकों ने फिल्म की तुलना मलयालम फिल्म ‘प्रेमलु’ से भी की है, हालांकि मेकर्स ने फिल्म को युवाओं की दोस्ती और रिश्तों पर आधारित अपनी कहानी के रूप में पेश किया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
हैदराबाद, एजेंसियां। साउथ सिनेमा की अभिनेत्री अनुपमा परमेश्वरन के हालिया इंटरव्यू के बाद उनके कथित पुराने रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच अभिनेता ध्रुव विक्रम ने पहली बार अपनी निजी जिंदगी और मुश्किल दौर को लेकर खुलकर बात की है। हालांकि, उन्होंने अनुपमा परमेश्वरन का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ध्रुव विक्रम और अनुपमा परमेश्वरन के बीच करीब दो साल तक रिश्ता रहा था। दोनों ने फिल्म 'बाइसन कालामादन' में साथ काम किया है। हाल में अनुपमा ने एक इंटरव्यू में अपने एक मुश्किल रिश्ते का जिक्र करते हुए नार्सिसिस्टिक एब्यूज का सामना करने की बात कही थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनके बयान को ध्रुव के साथ कथित रिश्ते से जोड़कर देखा जाने लगा। ध्रुव बोले- सच से जुड़े रहना जरूरी अपनी निजी जिंदगी को लेकर हो रही चर्चाओं पर ध्रुव विक्रम ने कहा कि वह इस पूरे मामले से व्यक्तिगत रूप से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह कहना गलत होगा कि इन बातों का उन पर कोई असर नहीं पड़ा। अभिनेता ने कहा कि ऐसे समय में सच्चाई से जुड़े रहना, खुद को और अपने सिद्धांतों को समझना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि अपने प्रियजनों और उन चीजों की रक्षा करना महत्वपूर्ण है, जो कभी उनकी जिंदगी में मायने रखती थीं। आलोचना की भी एक सीमा होती है ध्रुव ने आगे कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी सच्चाई और उन चीजों को लेकर स्पष्ट होता है, जो उसे स्थिर रखती हैं, तो आलोचना का असर एक सीमा तक ही रहता है। उन्होंने बताया कि धीरे-धीरे इंसान अकेले ही चीजों को संभालना सीख जाता है। उनके मुताबिक, काम और अपनी निजी दुनिया पर ध्यान केंद्रित करने से मुश्किल परिस्थितियों से निपटने में मदद मिलती है। अनुपमा ने रिश्ते को लेकर क्या कहा था? अनुपमा परमेश्वरन ने हालिया इंटरव्यू में अपने एक पुराने रिश्ते को लेकर कई बातें साझा की थीं। उन्होंने कथित तौर पर बताया कि रिश्ता शुरू होने के कुछ समय बाद ही सामने वाला व्यक्ति जरूरत से ज्यादा नियंत्रण करने लगा था। उन्होंने ऐसे रिश्ते को नार्सिसिस्टिक बताया और कहा कि उन्हें लंबे समय तक मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। अभिनेत्री ने यह भी दावा किया कि उन्हें एक फिल्म के प्रमोशन से दूर रखा गया और सोशल मीडिया पर उससे जुड़े पोस्ट करने की अनुमति भी नहीं थी। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में ध्रुव विक्रम का नाम नहीं लिया। 2025 में शुरू हुई थी डेटिंग की चर्चा अनुपमा परमेश्वरन और ध्रुव विक्रम के रिश्ते को लेकर 2025 में सोशल मीडिया पर अफवाहें सामने आई थीं। दोनों की साथ में तस्वीरों और उनकी बॉन्डिंग को लेकर भी काफी चर्चा हुई थी। अब अनुपमा के पुराने रिश्ते से जुड़े बयानों और ध्रुव की प्रतिक्रिया के बाद एक बार फिर दोनों का नाम सोशल मीडिया पर चर्चा में है। हालांकि, दोनों कलाकारों ने सार्वजनिक रूप से अपने कथित रिश्ते या ब्रेकअप की पूरी कहानी की पुष्टि नहीं की है। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों और उनके सार्वजनिक बयानों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
मुंबई, एजेंसियां। फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने अपनी आगामी क्राइम ड्रामा फिल्म ‘पुलिस कंपनी’ को लेकर बड़ा ऐलान किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह फिल्म अब दो भागों वाली फ्रेंचाइजी के रूप में बनाई जाएगी। फिल्म में हर्षवर्धन राणे मुख्य भूमिका में नजर आएंगे और उनका किरदार मुंबई के चर्चित एनकाउंटर स्पेशलिस्ट दया नायक से प्रेरित बताया जा रहा है। दया नायक से प्रेरित होगा हर्षवर्धन राणे का किरदार ‘पुलिस कंपनी’ की कहानी मुंबई पुलिस की उस एनकाउंटर टीम से प्रेरित है, जिसने 1997 से 2004 के बीच अंडरवर्ल्ड के खिलाफ कई अभियान चलाए थे। हर्षवर्धन राणे फिल्म में एक ऐसे पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाएंगे, जिसे अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने की असाधारण शक्तियां मिलती हैं। ‘डी कंपनी’ से भी ज्यादा खतरनाक बताई कहानी राम गोपाल वर्मा ने फिल्म को अपने पुराने अंडरवर्ल्ड प्रोजेक्ट ‘डी कंपनी’ से भी ज्यादा खतरनाक और गहरी कहानी बताया है। निर्देशक के मुताबिक, फिल्म सिर्फ एनकाउंटर की घटनाओं पर नहीं बल्कि उस स्थिति के नैतिक और मानसिक प्रभावों पर भी ध्यान देगी, जब किसी पुलिस अधिकारी को यह तय करने की शक्ति मिल जाती है कि किसे जीना है और किसे मरना। फिल्म की शूटिंग शुरू, कई बड़े कलाकार भी शामिल ‘पुलिस कंपनी’ की प्रोडक्शन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। फिल्म में हर्षवर्धन राणे के अलावा फरदीन खान, सौरभ शुक्ला, परेश रावल और मकरंद देशपांडे जैसे कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। फिल्म को दो हिस्सों में बनाने का फैसला इसकी कहानी के बड़े दायरे को देखते हुए किया गया है। राम गोपाल वर्मा की क्राइम फिल्मों में वापसी ‘पुलिस कंपनी’ के साथ राम गोपाल वर्मा एक बार फिर मुंबई के अपराध और पुलिस की दुनिया पर केंद्रित कहानी लेकर लौट रहे हैं। इससे पहले वह ‘डी कंपनी’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्मों में इस तरह की कहानियां दिखा चुके हैं। अब ‘पुलिस कंपनी’ के दो भागों में बनने की खबर ने फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी है।
मुंबई, एजेंसियां। ‘विमल इलायची’ के विज्ञापन को लेकर बॉलीवुड के तीन बड़े सितारे शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ मुश्किल में घिर गए हैं। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने तीनों अभिनेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। FDA का आरोप है कि इलायची के विज्ञापन के जरिए प्रतिबंधित पान मसाला ब्रांड का अप्रत्यक्ष प्रचार किया जा सकता है। 15 दिन में देना होगा जवाब महाराष्ट्र FDA ने तीनों कलाकारों से विज्ञापन में उनकी भूमिका, ब्रांड के साथ हुए एंडोर्समेंट समझौते और संबंधित जानकारी मांगी है। नोटिस का जवाब देने के लिए उन्हें 15 दिनों का समय दिया गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आगे की कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। FDA ने यह भी कहा है कि संबंधित विज्ञापन को उनके नियंत्रण वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाया जाए और आगे ऐसे प्रचार से दूरी बनाई जाए। सरोगेट विज्ञापन को लेकर FDA की आपत्ति विवाद का मुख्य कारण सरोगेट विज्ञापन है। ‘विमल इलायची’ एक अलग उत्पाद के तौर पर प्रचारित की जाती है, लेकिन FDA का कहना है कि विज्ञापन की ब्रांडिंग और प्रस्तुति से प्रतिबंधित पान मसाला उत्पाद की ब्रांड पहचान को बढ़ावा मिल सकता है। महाराष्ट्र में पान मसाला और तंबाकू से जुड़े प्रतिबंधित उत्पादों को लेकर प्रशासन पहले से सख्त कार्रवाई कर रहा है। FDA प्रमुख ने दी सख्त चेतावनी महाराष्ट्र FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कार्रवाई के बाद साफ कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शा जाएगा। उनका कहना है कि कार्रवाई केवल फिल्मी सितारों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विज्ञापन से जुड़े पूरे नेटवर्क की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इस मामले के सामने आने के बाद सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट और प्रतिबंधित उत्पादों के अप्रत्यक्ष प्रचार को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। फिलहाल शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ की ओर से नोटिस पर आधिकारिक जवाब का इंतजार है।