देवघर, एजेंसियां। झारखंड के विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में आयोजित श्रावणी मेला 2026 के दौरान श्रद्धालुओं के लिए पहली बार भव्य ड्रोन शो का आयोजन किया जा रहा है। देवघर के शिवलोक परिसर में होने वाले इस 3D ड्रोन शो में भगवान शिव, कांवड़ यात्रा, ज्योतिर्लिंग और धार्मिक प्रतीकों की आकर्षक आकृतियां आसमान में दिखाई जाएंगी। यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए मेले का प्रमुख आकर्षण बन गया है। आस्था और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम झारखंड पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन की ओर से आयोजित इस ड्रोन शो का उद्देश्य श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव के साथ आधुनिक तकनीक का अनोखा संगम दिखाना है। सैकड़ों ड्रोन एक साथ उड़ान भरकर शिव तांडव, ओम, त्रिशूल, डमरू और बाबा बैद्यनाथ धाम की आकृतियां बनाएंगे। श्रावणी मेले में तकनीक का व्यापक उपयोग इस बार श्रावणी मेले में केवल ड्रोन शो ही नहीं, बल्कि AI आधारित निगरानी प्रणाली, फेस रिकग्निशन कैमरे, QR कोड शिकायत व्यवस्था और स्मार्ट भीड़ प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि इससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा दोनों बेहतर होंगी। श्रद्धालुओं में भारी उत्साह ड्रोन शो को देखने के लिए हर शाम बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिवलोक परिसर पहुंच रहे हैं। प्रशासन का मानना है कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और देवघर की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई देने में यह आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
देवघर। श्रावणी मेला 2026 के दौरान श्रद्धालुओं की सेहत से खिलवाड़ की आशंका को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। गुरुवार को देवघर के विभिन्न होटल, भोजनालय और खाद्य प्रतिष्ठानों में चलाए गए जांच अभियान के दौरान एक निजी प्रतिष्ठान से करीब 10 टन एक्सपायर्ड आटा, 800 किलो बेसन और बड़ी मात्रा में एक्सपायर्ड फॉर्च्यून ब्रांड का खाद्य तेल बरामद किया गया। विभाग ने पूरी सामग्री जब्त कर सुरक्षित रख ली है। श्रद्धालुओं को परोसने की थी आशंका जिला खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आशंका है कि एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री का उपयोग श्रावणी मेला के दौरान श्रद्धालुओं को भोजन उपलब्ध कराने में किया जाना था। हालांकि विभाग की समय पर की गई कार्रवाई से यह सामग्री बाजार तक पहुंचने से पहले ही पकड़ ली गई। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई खाद्य सुरक्षा विभाग ने संबंधित प्रतिष्ठान के संचालक को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की संबंधित धाराओं के तहत नोटिस जारी किया है। अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच जारी है और नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। होटल और भोजनालयों में भी मिलीं अनियमितताएं जांच अभियान के दौरान देवघर के 'देसी जायका' भोजनालय का भी निरीक्षण किया गया, जहां रसोई की स्थिति बेहद गंदगीपूर्ण पाई गई। विभाग ने संचालक को तत्काल साफ-सफाई सुनिश्चित करने और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करने का निर्देश देते हुए नोटिस जारी किया है। श्रावणी मेला में निगरानी रहेगी जारी खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि श्रावणी मेला के दौरान होटल, ढाबों, भोजनालयों और खाद्य प्रतिष्ठानों की नियमित जांच जारी रहेगी। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सेहत से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
देवघर। श्रावण माह की शुरुआत के साथ ही झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम और दुमका के बाबा बासुकीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी है। इसी बीच झारखंड सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पूरे श्रावणी मेला 2026 के दौरान दोनों मंदिरों में VIP और आउट ऑफ टर्न दर्शन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसका उद्देश्य आम श्रद्धालुओं को बिना किसी व्यवधान के सुगम और समान रूप से दर्शन का अवसर उपलब्ध कराना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि श्रावण मेले के दौरान किसी भी व्यक्ति के लिए विशेष सिफारिश या प्राथमिकता के आधार पर दर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी। मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन के लिए पहले से लागू अर्घा सिस्टम के माध्यम से जलार्पण की व्यवस्था संचालित रहेगी। एसीएस वंदना दादेल ने जारी किया आदेश कैबिनेट सचिवालय एवं निगरानी विभाग की अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल ने इस संबंध में आधिकारिक पत्र जारी किया है। पत्र में कहा गया है कि बाबा बैद्यनाथ धाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और श्रावण माह में यहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। अधिकांश श्रद्धालु देवघर के साथ दुमका स्थित बाबा बासुकीनाथ मंदिर भी दर्शन के लिए जाते हैं। ऐसे में भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए VIP और आउट ऑफ टर्न दर्शन की व्यवस्था पूरी तरह बंद रखने का निर्णय लिया गया है। सिफारिश भेजने से भी किया गया मना सरकार ने सभी मंत्रालयों, विभागों और संबंधित संस्थानों से अपील की है कि बाबा बैद्यनाथ धाम और बाबा बासुकीनाथ मंदिर में VIP दर्शन के लिए किसी भी प्रकार की अनुशंसा या अनुरोध राज्य सरकार अथवा जिला प्रशासन को न भेजें। यह आदेश भारत सरकार के कैबिनेट सचिव, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल तथा देश के सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी भेजा गया है, ताकि श्रावणी मेले के दौरान VIP सिफारिशों पर पूरी तरह रोक सुनिश्चित की जा सके।
देवघर। श्रावणी मेला 2026 के दौरान बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बाबा मंदिर तक श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए नवनिर्मित फुट ओवरब्रिज (एफओबी) का रविवार देर शाम सफल परीक्षण किया गया। यह परीक्षण उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं को मिलेगा सुरक्षित और सुगम मार्ग फुट ओवरब्रिज के शुरू होने से श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर तक सुरक्षित, व्यवस्थित और आसान तरीके से पहुंचने में सुविधा मिलेगी। श्रावणी मेले में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए इस ओवरब्रिज का निर्माण किया गया है, जिससे कतारों का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा और जलार्पण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुचारु एवं सुरक्षित होगी। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ सफल परीक्षण जिले के उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया और पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ फुट ओवरब्रिज का परीक्षण किया गया। दोनों अधिकारियों ने स्वयं व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और सुरक्षा सहित विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की। भीड़ का दबाव होगा कम, जाम से मिलेगी राहत उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया ने कहा कि फुट ओवरब्रिज के चालू होने से श्रद्धालुओं को लंबी कतारों में अधिक व्यवस्थित ढंग से खड़े होने और मंदिर तक पहुंचने में आसानी होगी। इससे मंदिर परिसर में भीड़ का दबाव नियंत्रित रहेगा और श्रद्धालुओं का आवागमन अधिक सुगम बनेगा। स्थानीय लोगों ने किया पहल का स्वागत स्थानीय लोगों ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह फुट ओवरब्रिज केवल श्रावणी मेले के दौरान ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों के लिए भी उपयोगी साबित होगा। इससे मंदिर क्षेत्र में लगने वाले जाम में कमी आएगी और आवागमन पहले की अपेक्षा अधिक सुविधाजनक हो सकेगा।
कोलकाता: दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर में 12 वर्षीय किशोरी की कथित दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पीड़ित परिवार से मिलने जाने की उनकी कोशिश को रोक दिया गया और उनके आवास के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात कर उन्हें "हाउस अरेस्ट" जैसी स्थिति में रखा गया। 'पीड़ित परिवार से मिलने नहीं जाने दिया गया' वीडियो संदेश जारी करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि वह अकेले बारुईपुर जाकर पीड़ित परिवार से मुलाकात करना चाहती थीं, लेकिन उनके घर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और विभिन्न खुफिया एजेंसियों के कर्मियों की तैनाती कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कारण वह अपने घर से बाहर नहीं निकल सकीं। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर जताई चिंता मुख्यमंत्री ने कहा कि बारुईपुर की घटना ने उन्हें बेहद दुखी और चिंतित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों—भगवानपुर, पटाशपुर, कूचबिहार, दुर्गापुर, दिनहाटा और पानीहाटी—में भी महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराध सामने आए हैं। ममता ने कहा कि बारुईपुर की घटना ने लोगों के धैर्य की सीमा तोड़ दी है। सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल मुख्यमंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इलाके में धारा 144 लागू नहीं है, तो उनके आवास के आसपास भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती और रूट मार्च क्यों कराया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को स्वतंत्र रूप से कार्यक्रम करने की अनुमति दी जा रही है, जबकि उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोका जा रहा है। पीड़ित परिवार से फोन पर की बात ममता बनर्जी ने बताया कि वह स्वयं घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकीं, लेकिन उन्होंने पीड़ित परिवार से फोन पर बात की और उन्हें हरसंभव मदद तथा न्याय दिलाने का भरोसा दिया। क्या है पूरा मामला? दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर के धपधपी-2 ग्राम पंचायत क्षेत्र में शनिवार से लापता 12 वर्षीय किशोरी का शव रविवार सुबह एक तालाब से बोरे में बंद मिला था। परिजनों ने आरोप लगाया है कि बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या की गई। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया। आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया, पुलिस वाहन में तोड़फोड़ की और एक संदिग्ध युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी। पुलिस की कार्रवाई जारी पुलिस ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार करने की पुष्टि की है। वहीं, भीड़ द्वारा एक व्यक्ति की हत्या के मामले में भी अलग से जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल, किशोरी की मौत, दुष्कर्म के आरोप और हिंसा की सभी घटनाओं की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
देवघर, एजेंसियां। विश्वप्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेला 2026 के लिए देवघर में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस बार बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मंदिर प्रशासन ने वीआईपी कूपनधारकों और सामान्य श्रद्धालुओं की कतारों को अलग-अलग संचालित करने के लिए नया ओवरब्रिज तैयार कर लिया है। तकनीकी जांच पूरी होने के बाद यह नई व्यवस्था 15 जुलाई 2026 से लागू कर दी जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं को पहले की तुलना में कहीं अधिक सुगम और तेज दर्शन की सुविधा मिलेगी। देवघर एसडीएम रवि कुमार ने बताया बाबा मंदिर प्रभारी सह देवघर एसडीएम रवि कुमार ने बताया कि अब तक मंदिर के टी-जंक्शन पर वीआईपी कूपन और सामान्य कतार एक ही मार्ग से गर्भगृह की ओर बढ़ती थीं। संकरे रास्ते के कारण दोनों कतारों के मिलते ही भारी भीड़ और जाम की स्थिति बन जाती थी। इसके चलते श्रद्धालुओं को घंटों तक इंतजार करना पड़ता था। विशेष रूप से शीघ्र दर्शन कूपन लेने वाले श्रद्धालुओं की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि उन्हें भी अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही थी। नई व्यवस्था के तहत इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए जिला प्रशासन ने युद्धस्तर पर नए ओवरब्रिज का निर्माण कराया है। नई व्यवस्था के तहत वीआईपी कूपनधारकों और सामान्य श्रद्धालुओं की कतारें अलग-अलग मार्गों से आगे बढ़ेंगी और मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के समीप निर्धारित स्थान पर व्यवस्थित रूप से पहुंचेंगी। इससे भीड़ का दबाव कम होगा और दर्शन व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित बनेगी। मंदिर प्रशासन का दावा हैं मंदिर प्रशासन का दावा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद श्रद्धालु केवल 2 से 5 मिनट के भीतर बाबा बैद्यनाथ के दर्शन, जलार्पण और पूजा-अर्चना कर सकेंगे। इससे न केवल श्रद्धालुओं का समय बचेगा, बल्कि श्रावणी मेले के दौरान प्रतिदिन उमड़ने वाली भारी भीड़ का बेहतर प्रबंधन भी संभव हो सकेगा। प्रशासन का मानना है कि यह व्यवस्था इस वर्ष के श्रावणी मेले को अधिक सुरक्षित, सुगम और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
देवघर। देवघर जिले के सोनारायठाड़ी थाना क्षेत्र के उपर नवाडीह गांव में हुए सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड का पुलिस ने 24 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। जांच में सामने आया कि घर की बड़ी बहू शबाना खातून ने अपने प्रेमी इरशाद अंसारी के साथ मिलकर सास और नाबालिग देवर की हत्या की साजिश रची थी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी, हथौड़ा और खून से सने कपड़े बरामद कर लिए हैं। मामले का खुलासा देवघर के एसडीपीओ कुलदीप कुमार ने प्रेस वार्ता में किया। शादी के बाद भी जारी था प्रेम संबंध पुलिस के अनुसार, 19 वर्षीय शबाना खातून की शादी करीब तीन महीने पहले उपर नवाडीह निवासी शाहिल अहमद से हुई थी, जो फिलहाल बाहर रहकर काम करता है। शादी से पहले ही शबाना का अपने रिश्तेदार इरशाद अंसारी से प्रेम संबंध था, जो विवाह के बाद भी जारी रहा। इरशाद का ससुराल में आना-जाना लगा रहता था। इसी दौरान शबाना की सास और देवर को दोनों के संबंधों की जानकारी मिल गई थी, जिसके बाद दोनों आरोपियों ने उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रची। मोबाइल पर निर्देश देता रहा प्रेमी जांच में यह भी सामने आया कि घटना की रात इरशाद लगातार मोबाइल फोन पर शबाना के संपर्क में था। पुलिस के अनुसार, वह कॉल पर वारदात को अंजाम देने के लिए निर्देश देता रहा, जबकि शबाना ने घर में कुल्हाड़ी और हथौड़े से हमला कर सास और देवर की हत्या कर दी। घटना के बाद गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने घटनास्थल से खून के नमूने, हत्या में प्रयुक्त हथियार और अन्य साक्ष्य जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिए हैं। मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
देवघर। इस साल राज्य सरकार 30 जुलाई से 28 अगस्त तक आयोजित होने वाले श्रावणी मेला को भव्य और आकर्षक बनाने की तैयारी में जुटी है। इस बार मेला केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें तकनीक, पर्यटन और सांस्कृतिक प्रस्तुति का भी समावेश किया जाएगा। श्रावणी मेला का मुख्य आकर्षण लेजर शो और ड्रोन शो होगा, जिसके माध्यम से भगवान शिव की महिमा को भव्य रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। इसके जरिए श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुभव के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का भी अनुभव मिलेगा। पर्यटन, कला, संस्कृति एवं खेलकूद विभाग के अंतर्गत कार्यरत झारखंड पर्यटन विकास निगम को इसके लिए एजेंसी चयन की जिम्मेदारी दी गई है और प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। देवघर और दुमका में टेंट सिटी बनाई जाएगी श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए देवघर और दुमका में टेंट सिटी बनाई जाएगी। देवघर में कोठिया बस स्टैंड के दोनों ओर और दुमका में जरमुंडी प्रखंड कार्यालय तथा दर्शनिया टिकर में यह व्यवस्था की जाएगी। देवघर में 2,000 और दुमका में 2,400 कांवरियों के ठहरने की क्षमता होगी। इन टेंट सिटी में कथा वाचन, भजन संध्या, क्लॉक रूम और आध्यात्मिक भवन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा देवघर और बासुकीनाथ में एलईडी वीडियो वॉल लगाए जाएंगे ताकि श्रद्धालुओं को जानकारी और धार्मिक प्रसारण मिल सके। श्रद्धालुओं की सहायता के लिए 19 स्थानों पर अस्थायी टूरिस्ट इंफॉर्मेशन सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों पर स्नातक स्तर के प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती होगी जो यात्रियों को आवश्यक जानकारी प्रदान करेंगे। शिवलोक ग्राउंड में जर्मन हैंगर बनेगा देवघर के शिवलोक ग्राउंड में जर्मन हैंगर का निर्माण किया जाएगा, जहां 20 स्टॉल लगाए जाएंगे। इन स्टॉल्स के माध्यम से झारखंड के पर्यटन स्थलों और स्थानीय कला-संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया जाएगा। साथ ही, श्रद्धालुओं को बाबा बैद्यनाथ धाम और अन्य पर्यटन स्थलों की जानकारी भी दी जाएगी। इन 19 टूरिस्ट इंफॉर्मेशन सेंटरों को रांची रेलवे स्टेशन, देवघर रेलवे स्टेशन, जसीडीह रेलवे स्टेशन, दुमका रेलवे स्टेशन, खादगढ़ा बस टर्मिनल, सुलतानगंज कांवरिया मार्ग, बासुकीनाथ बस स्टैंड और अन्य प्रमुख कांवरिया मार्गों एवं स्थलों पर स्थापित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य श्रावणी मेला को न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनाना है, बल्कि इसे एक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और तकनीकी रूप से आधुनिक आयोजन के रूप में विकसित करना भी है, जिससे देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके।
देवघर। देवघर-दुमका-बासुकीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित खड़गडीहा स्वास्थ्य उपकेंद्र स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का उदाहरण बनकर रह गया है। आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में विकसित इस केंद्र का भवन वर्षों पहले तैयार हो चुका है, लेकिन नियमित स्वास्थ्य सेवाएं अब तक शुरू नहीं हो सकी हैं। इसका खामियाजा आसपास के हजारों ग्रामीणों के साथ-साथ हाईवे पर यात्रा करने वाले लोगों को भी भुगतना पड़ रहा है। अधिकांश दिनों बंद रहता है स्वास्थ्य केंद्र स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब तीन से चार वर्ष पहले इस स्वास्थ्य उपकेंद्र का निर्माण पूरा हो गया था। इसके बावजूद यहां डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित तैनाती नहीं हो पाई है। ग्रामीणों के अनुसार महीने में केवल सात-आठ दिन ही कर्मचारी केंद्र पर पहुंचते हैं, जबकि बाकी दिनों में भवन पर ताला लटका रहता है। इससे सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए भी लोगों को कई किलोमीटर दूर अस्पताल जाना पड़ता है। हादसों में बर्बाद हो रहा ‘गोल्डन आवर’ राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं। ऐसे में यह स्वास्थ्य केंद्र प्राथमिक उपचार के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। लेकिन केंद्र बंद रहने के कारण घायल मरीजों को सीधे देवघर या दुमका के अस्पतालों तक ले जाना पड़ता है, जिससे इलाज में देरी होती है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शरद कुमार के अनुसार दुर्घटना के बाद पहले एक घंटे यानी ‘गोल्डन आवर’ में उपचार मिलने से मरीज की जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई का दिया आश्वासन मामले पर देवघर के सिविल सर्जन डॉ. रमेश कुमार ने स्वीकार किया कि खड़गडीहा स्वास्थ्य उपकेंद्र रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है। उन्होंने कहा कि इस समस्या की जानकारी मिलने के बाद मोहनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से समन्वय कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही उपकेंद्र को नियमित रूप से संचालित करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी, ताकि ग्रामीणों और हाईवे यात्रियों को समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
देवघर। देवघर के सदर अस्पताल में इन दिनों गंदगी और कचरे का अंबार मरीजों और उनके परिजनों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। अस्पताल परिसर में कई दिनों से कचरा जमा रहने के कारण तेज दुर्गंध फैल रही है, जिससे मरीजों को इलाज के साथ-साथ अस्वच्छ माहौल का भी सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि अस्पताल पहुंचते ही उन्हें गंदगी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। नगर निगम पर लापरवाही का आरोप अस्पताल परिसर के बाहर पार्किंग स्टैंड के पास रखे नगर निगम के कचरा डब्बों में लंबे समय से कूड़ा जमा है। समय पर कचरा नहीं उठाए जाने के कारण वहां बदबू और गंदगी का माहौल बना हुआ है। मरीजों और उनके परिजनों ने नगर निगम और जिला प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि नियमित रूप से सफाई और कचरा उठाव होता, तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। लोगों ने यह भी कहा कि अस्पताल के मुख्य द्वार के पास फैली गंदगी से अस्पताल की छवि खराब हो रही है। कई परिजनों ने अस्पताल के अंदर की साफ-सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। खासकर मेटरनिटी वार्ड में पर्याप्त बेड की कमी और साफ-सफाई की खराब स्थिति को लेकर नाराजगी जताई गई। अस्पताल प्रबंधन ने मानी समस्या मामले पर सदर अस्पताल की उपाधीक्षक Dr. Sushma Verma ने माना कि गंदगी के कारण मरीजों और अस्पताल प्रशासन दोनों को परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि नियमित कचरा उठाव नहीं होने के कारण यह स्थिति बनी है। डॉ. सुषमा वर्मा के अनुसार नगर निगम से संपर्क कर समस्या की जानकारी दी गई है और जल्द ही अस्पताल परिसर से कचरा हटाने का आश्वासन मिला है। अस्पताल प्रबंधन को उम्मीद है कि जल्द सफाई व्यवस्था सामान्य कर दी जाएगी, ताकि मरीजों को राहत मिल सके।
देवघर। देवघर की रहने वाली श्रेया केसरी ने ISC 12वीं बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए आर्ट्स स्ट्रीम में 98.5% अंक हासिल कर झारखंड में टॉप किया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल है। श्रेया ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर यह मुकाम हासिल किया और राज्य का नाम रोशन किया। बचपन से आर्ट्स में रही रुचि श्रेया ने बताया कि उन्हें बचपन से ही आर्ट्स विषयों में गहरी रुचि थी। उन्होंने 10वीं बोर्ड परीक्षा में भी 97% अंक प्राप्त किए थे, जिसके बाद उन्होंने आर्ट्स स्ट्रीम को चुना। उनका मानना है कि सफलता के लिए विषय नहीं, बल्कि मेहनत और समर्पण मायने रखता है। आगे चलकर वह लॉ की पढ़ाई करना चाहती हैं और उनका सपना सुप्रीम कोर्ट की जज बनने का है। छात्रों को दिया प्रेरणादायक संदेश श्रेया ने अन्य छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि अक्सर यह धारणा होती है कि केवल साइंस स्ट्रीम में ही बेहतर करियर बन सकता है, लेकिन यह सोच गलत है। उन्होंने कहा कि आर्ट्स और साइंस दोनों में समान अवसर हैं। जरूरी यह है कि छात्र अपनी रुचि के अनुसार विषय चुनें और पूरी लगन से पढ़ाई करें। माता-पिता का मिला पूरा सहयोग श्रेया की मां नीतू केसरी ने बेटी की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी श्रेया पर पढ़ाई को लेकर दबाव नहीं डाला। उन्होंने हमेशा उसे अपनी पसंद के अनुसार आगे बढ़ने की आजादी दी। उनका मानना है कि बच्चों को समझना और उनका मार्गदर्शन करना जरूरी है, न कि उन पर अनावश्यक दबाव डालना। श्रेया की सफलता न केवल छात्रों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सही दिशा, मेहनत और परिवार के सहयोग से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
देवघर। देवघर जिले में अवैध हथियारों की संभावित सप्लाई को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी और झारखंड एटीएस ने गुरुवार को संयुक्त रूप से बड़ी कार्रवाई की है। गुप्त सूचना के आधार पर दोनों एजेंसियों ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से शहर के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी अभियान चलाया। सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिला था कि क्षेत्र में हथियार तस्करी से जुड़ा नेटवर्क सक्रिय है। इसी सूचना के बाद रणनीति बनाकर सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया। दो स्थानों से संदिग्धों को हिरासत में लिया गया छापेमारी के दौरान टीम ने सबसे पहले नंदन पहाड़ के पास स्थित नंदी नगर मोहल्ले में दबिश दी, जहां से एक युवक को हिरासत में लिया गया। बताया जा रहा है कि वह अपने ननिहाल में ठहरा हुआ था। इसके बाद टीम ने भुरभुरा मोड़ के पास दूसरी कार्रवाई करते हुए एक और संदिग्ध युवक को पकड़ा। दोनों को तत्काल नगर थाना लाया गया, जहां उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। हालांकि, अब तक की कार्रवाई में किसी प्रकार का हथियार या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है। बिहार के आरा से जुड़ रहे हैं तार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि नंदी नगर से पकड़ा गया युवक मूल रूप से बिहार के आरा जिले का रहने वाला है। उसके पिता देवघर के एक निजी स्कूल में वाहन चालक के रूप में कार्यरत हैं। परिवार कुंडा थाना क्षेत्र के चितोलोढ़िया इलाके में रहता है। बताया जा रहा है कि युवक पिछले कुछ दिनों से अपने मामा के घर पर रह रहा था। एजेंसियां इस कड़ी को गंभीरता से लेते हुए बिहार कनेक्शन की भी जांच कर रही हैं। फिलहाल दोनों संदिग्धों से नगर थाना में एनआईए और एटीएस के अधिकारी संयुक्त रूप से पूछताछ कर रहे हैं। अभी किसी तरह का आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
रांची। झारखंड के देवघर स्थित प्रसिद्ध बैद्यनाथ धाम में मंगलवार सुबह एक अनोखी घटना ने श्रद्धालुओं के बीच कौतूहल और आस्था का माहौल बना दिया। सुबह करीब 9:30 बजे बाबा बैद्यनाथ और माता पार्वती मंदिर को जोड़ने वाला पवित्र गठबंधन धागा अचानक टूट गया। इस घटना से कुछ समय के लिए मंदिर परिसर में हल्की अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। तुरंत संभाला गया धागा, फिर सामान्य हुई स्थिति धागा टूटते ही मंदिर की छत पर तैनात भंडारियों ने तत्परता दिखाते हुए उसे तुरंत संभाल लिया। बाद में काफी प्रयास के बाद धागे को दोबारा बांध दिया गया, जिससे स्थिति जल्द ही सामान्य हो गई और श्रद्धालुओं का दर्शन-पूजन जारी रहा। प्रसाद के रूप में धागा पाने की लगी होड़ धागे का एक हिस्सा नीचे गिर गया था, जिसे प्रसाद के रूप में पाने के लिए श्रद्धालुओं और तीर्थ पुरोहितों के बीच होड़ मच गई। कई लोग इसे अपने साथ ले जाने के लिए उत्साहित नजर आए। धागा पाने वाले श्रद्धालु खुद को सौभाग्यशाली मान रहे हैं। पुरोहितों और श्रद्धालुओं की अलग-अलग मान्यताएं इस घटना को लेकर मंदिर के पुरोहितों में अलग-अलग मत सामने आए हैं। कुछ इसे पारंपरिक दृष्टि से शुभ संकेत नहीं मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे भगवान का आशीर्वाद बता रहे हैं। वहीं कई श्रद्धालुओं ने इसे ईश्वरीय संकेत मानते हुए अपनी आस्था व्यक्त की। आस्था से जुड़ी हर घटना बनती है खास बाबा धाम में घटने वाली ऐसी घटनाएं श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत करती हैं। चाहे इसे संयोग माना जाए या आध्यात्मिक संकेत, लेकिन Lord Shiva और माता पार्वती के प्रति लोगों की आस्था इस घटना के बाद और गहरी होती नजर आई।
देवघर। देवघर सदर अस्पताल को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस करने की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। अस्पताल में अब नई डिजिटल 500 एमए एक्स-रे मशीन और हाई-एंड कलर डॉपलर अल्ट्रासाउंड मशीन की शुरुआत की गई है। इन सुविधाओं का उद्घाटन उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने किया। यह पहल सीएसआर (CSR) फंड के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना है। जटिल जांच अब अस्पताल में ही संभव नई मशीनों के लगने से मरीजों को अब गंभीर और जटिल जांच के लिए निजी अस्पतालों या बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हृदय, पेट और नसों से जुड़ी बीमारियों की जांच अब देवघर सदर अस्पताल में ही आसानी से हो सकेगी। इससे मरीजों का समय और पैसा दोनों की बचत होगी। आम लोगों को मिलेगी राहत पहले ऐसी जांच के लिए मरीजों को निजी लैब या बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, जहां खर्च काफी अधिक होता था। अब सरकारी अस्पताल में ही यह सुविधा उपलब्ध होने से आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी और इलाज अधिक सुलभ हो जाएगा। संथाल परगना के मरीजों को भी लाभ देवघर सदर अस्पताल सिर्फ जिले ही नहीं बल्कि पूरे संथाल परगना क्षेत्र के मरीजों के लिए बड़ा चिकित्सा केंद्र है। इसमें पाकुड़, साहिबगंज, गोड्डा, दुमका और जामताड़ा जैसे जिलों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। नई सुविधाओं से इन सभी जिलों के लोगों को भी बेहतर चिकित्सा सेवा मिलेगी। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था होगी मजबूत अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की आधुनिक सुविधाओं के जुड़ने से सरकारी अस्पतालों पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा। साथ ही गरीब और जरूरतमंद मरीजों को कम खर्च में बेहतर इलाज उपलब्ध हो सकेगा। प्रशासन ने मशीनों के सही संचालन और रखरखाव पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए हैं।
रांची। गाजियाबाद में पकड़े गए पाकिस्तान से जुड़े जासूसी नेटवर्क के तीन संदिग्धों से पूछताछ में कई बड़े खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह नेटवर्क देश के कई संवेदनशील ठिकानों की जानकारी जुटाकर पाकिस्तान भेज रहा था। गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ जारी है और मामले में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है। देवघर मंदिर भी था टारगेट जांच में सामने आया है कि बाबा बैद्यनाथ धाम भी इस नेटवर्क के निशाने पर था। बिहार निवासी नौशाद को मंदिर का वीडियो और GPS लोकेशन इकट्ठा करने का जिम्मा दिया गया था, जिसे वह पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलर के निर्देश पर अंजाम दे रहा था। नौशाद और साथियों की अहम भूमिका पूछताछ में खुलासा हुआ कि नौशाद इस नेटवर्क का मुख्य किरदार था और वह सुहेल मलिक व समीर के साथ मिलकर काम कर रहा था। उसे दिल्ली कैंट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की रेकी करने का भी टास्क दिया गया था। साथ ही एक बड़े उद्योगपति के घर की निगरानी करने की बात भी सामने आई है। सोशल मीडिया और ऐप के जरिए ऑपरेशन जांच एजेंसियों के अनुसार, पूरा नेटवर्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और एक खास मोबाइल ऐप के जरिए संचालित हो रहा था। इसी ऐप के माध्यम से जुटाई गई जानकारी पाकिस्तान भेजी जाती थी। पाकिस्तानी हैंडलर ‘सरफराज’ इस नेटवर्क को ट्रेनिंग देता था। ‘मीरा’ नाम की महिला के जरिए नौशाद इस गिरोह से जुड़ा था। हवाला नेटवर्क पर कार्रवाई तेज जांच में यह भी सामने आया कि इस जासूसी गतिविधि के लिए पैसे हवाला के जरिए भेजे जाते थे, जो पंजाब रूट से भारत पहुंचते थे। अब पुलिस उन बैंक खातों और लोगों की पहचान में जुटी है, जिनके माध्यम से यह फंडिंग की गई। जांच का अगला चरण फिलहाल एजेंसियों का फोकस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने, जुड़े लोगों की पहचान करने और हवाला चैनल को खत्म करने पर है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
देवघर। भारतीय क्रिकेटर करण शर्मा शुक्रवार सुबह झारखंड के देवघर पहुंचे। यहां उन्होंने प्रसिद्ध बैद्यनाथ धाम मंदिर में बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की और देश की तरक्की व शांति के लिए प्रार्थना की। इस दौरान उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच मंदिर में दर्शन कराया गया। दर्शन के बाद करण शर्मा ने स्थानीय युवा क्रिकेटरों से बातचीत करते हुए उन्हें मेहनत का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, इसलिए खिलाड़ियों को लगातार मेहनत करते रहना चाहिए। करण शर्मा ने देश की प्रगति व शांति के लिए प्रार्थना की करण शर्मा ने कहा कि बाबा भोलेनाथ के दर्शन बहुत अच्छे तरीके से हुए और उन्होंने देश की प्रगति व शांति के लिए प्रार्थना की। उन्होंने अपने क्रिकेट करियर को लेकर कहा कि भगवान की कृपा से जो सोचा था, वह पूरा हुआ और आगे भी वही कृपा बनी रहे, यही कामना है। लेग स्पिन गेंदबाजी के लिए मशहूर 38 वर्षीय करण शर्मा दाएं हाथ के लेग स्पिनर हैं और अपनी गुगली व लेग ब्रेक गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं। मूल रूप से Meerut (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले करण शर्मा भारत की राष्ट्रीय टीम का भी प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय और आईपीएल करियर करण शर्मा ने 2014-15 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था और अपने पहले टेस्ट में चार विकेट लिए थे। इसके अलावा उन्होंने भारत के लिए दो वनडे और एक टी-20 मैच भी खेला है। Indian Premier League में उन्होंने लगभग 90 मैचों में 83 विकेट लिए हैं। आईपीएल में वे Mumbai Indians, Chennai Super Kings, Royal Challengers Bangalore और Sunrisers Hyderabad जैसी टीमों के लिए खेल चुके हैं और तीन बार आईपीएल ट्रॉफी जीतने वाली टीमों का हिस्सा भी रहे हैं। घरेलू क्रिकेट में भी शानदार प्रदर्शन घरेलू क्रिकेट में करण शर्मा ने प्रथम श्रेणी के 97 मैचों में 270 विकेट, लिस्ट-ए के 123 मैचों में 153 विकेट और टी-20 के 191 मैचों में 168 विकेट हासिल किए हैं। साल 2012-13 में रणजी ट्रॉफी के तीन मैचों में 21 विकेट लेने के बाद उन्हें Board of Control for Cricket in India की ओर से बेस्ट अंडर-25 क्रिकेटर का पुरस्कार भी मिला था।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।